
अतिथि- 24
इतवार की अलसायी सी सुबह में सुलोचना ने सबसे पहली अपने लिए चाय चढ़ाई और बाहर वाले कमरे को समेट रही थी कि विनोद उठ कर चला आया..
“हमे भी एक कप चाय मिल जाती तो…”
“अरे… आज आप बड़ी जल्दी जाग गए !”
“हम्म.. तुम्हारे साथ चाय पीना था, इसलिए बस !”
“जाइये.. बड़े आये चाय पीने वाले !”
मीठा सा उलाहना देती वो चाय छान कर ले आई..
दोनों साथ साथ बैठे चाय की चुस्कियां भरने लगे, विनोद ने ही शांति को तोडा..
“शर्मा जी ने एक रिश्ता बताया है !”
सुलोचना चिहुंक कर विनोद को देखने लगी…
“डिंकी के लिए ?” वो पूछ बैठी
“हाँ फिर.. चिंटू तो अभी बहुत छोटा है !”
सुलोचना ने मुहं टेढ़ा कर लिया
“कभी सीधी बात नहीं बोलेंगे, पता नहीं जीभ टेढ़ी है या दांत ?”
“आगे बताऊँ या रहने दूँ ? भाई तुम्ही ने कहा था रिश्ता देखना है, और अब जब देख रहा तो सुनने की फुरसत नहीं !”
“सुनने की फुरसत क्यों न होगी.. बताइये भी !”
“लड़का एमबीए किया हुआ है, अभी फ़िलहाल घर ही से कुछ काम कर रहा है.. उसका परिवार कानपुर रहता है..।
एक ही बहन है, उसकी शादी हो चुकी है..।
लड़के के दादा भागवत कथा बांचते थे, खूब जाना माना नाम है उनका.. अब उनके बाद उनके बेटे ने गद्दी संभाली है.. !”
“मतलब लड़के के पिता ने ?”
“हाँ लड़के के पिता अब कथावाचक है, कइयों तो उनके गुरुभाई उनके आगे पीछे हाथ बांधे डोलते हैं!
“नौकरी वॉकरी ?”
“अरे उन्हें नौकरी की क्या ज़रूरत, इतनी तो चढ़ोतरी चढ़ जाती है लेकिन वो नौकरी करते हैं.. सरकारी स्कूल में प्राचार्य है, उनकी धर्मपत्नी भी सरकारी स्कूल में प्राचार्या हैं.. बढ़िया दोनों लोग दोनों हाथ से कमा रहे हैं !”
“लड़का क्या करता है ?”
“करता है कुछ.. आजकल तो घर बैठे ही लोग बिज़नेस चला लेते हैं वैसा ही कुछ काम है.. तुम ये बताओ कि बात आगे करना है या नहीं ?”
“हाँ बिलकुल कर लीजिये, बस मन में ये विचार आ रहा कि बड़े लोग हैं, हमारे यहाँ के लिए मानेंगे भी ?”
“देखो मैंने अपनी तरफ से तो कुछ कहा नहीं.. शर्मा जी के रिश्तेदार हैं वो, उन्होंने अपनी डिंकी को देख रखा है। उन्होंने ने ही अपनी तरफ से बात उठायी है.. बाक़ी ईश्वर इच्छा.. !”
“हम्म.. ठीक है.. मैं फटाफट नहा लेती हूँ। आज आपके केदार बाबू की पत्नी घर आने वाली हैं न.. उनके साथ ज़रा खरीदारी करने जाना है !”
सुलोचना दोनों हाथो में कप लेकर उठ गयी और पीछे से विनोद ने आवाज़ लगा दी..
“सुनो ज़रा एक कप चाय और मिल जाती तो…. “
सुलोचना का डिंकी के रिश्ते की बात से प्रफुल्लित ह्रदय फिलहाल विनोद की अवांछित मांग पर भी अगला विश्व युद्ध छेड़ने की कामना से ग्रस्त नहीं हुआ, और मुस्कुरा कर वो उसे एक मीठा उलाहना दे गयी..
“आप भी न एक कप चाय में तो आपका कभी मन ही नहीं भरता.. दिन रात दफ्तर में कलम घिसते हुए भी तो चाय सुड़कते रहते हैं.. मन नहीं भरता ?”
“और नहीं तो क्या.. हमारे लिए तो हमारा ईंधन है चाय, उसी के भरोसे चलते हैं !”
सुलोचना मुस्कुरा कर रसोई में घुस गयी, भगोने में पड़ी बासी पत्ती में वापस थोडा दूध चीनी पानी डाल उसे वापस खौलने चढ़ा कर सुलोचना ने दोपहर के भोज की रुपरेखा गढ़नी शुरू कर दी ..
“सुन लीजिये जी, आज बस तहरी मिलेगी.. !”
“काहे ? आज तो इतवार है !”
“हाँ तो इतवार आप ही बस का है..? मेरा न है, उस पर आपकी ठसकेदार मित्रपत्नी आने वाली है !”
“तो उन्हें सिर्फ तहरी खिलाओगी ?”
“जी नहीं उन्होंने तो खाने को साफ़ मना कर दिया है.. कह दिया है खाने की कोई तैयारी मत कीजिएगा, बहन जी बाहर खरीदारी करते हुए ही आप पर हम कुछ खा लेंगे।
मैंने भी इस बार ज्यादा संकोच नहीं किया और हां कह दिया…
खाना बस आप तीनों के लिए बना है। थोड़ी कढी बना दूंगी और बढ़िया गोभी मटर गाजर डालकर पुलाव.. आज इसी में काम चलाइये !”
चाय का दूसरा कप पकड़ते हुए विनोद बाबू का चेहरा प्रसन्नता से उत्फुल्लित हो गया..
“ज़रा सी धनिया टमाटर की चटनी भी पीस देना !”
अपनी नजरो की चावनी से उसे घायल करती वो बाथरूम में घुस गयी..
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डिंकी नहा कर निकली अपने बालों को धूप में सूखा रही थी कि माधव अपनी माँ के साथ चला आया..
सुलोचना को नहीं लगा था कि माधव भी आ रहा है..
उसने सोचा था औरतों वाली खरीदारी करनी है, इसीलिए शायद माधव की मां उसे साथ लेकर जाना चाहती है।
लेकिन माधव को साथ देख कर सुलोचना का चेहरा फीका पड़ गया।
लेकिन उसने अपने मन के भावों को उन लोगों के सामने नहीं आने दिया। उन लोगों का स्वागत कर बाहरी कमरे में बैठकर वह रसोई में पानी लेने चली गई। डिंकी माधव को देखकर मुस्कुराते हुए बाहर चली आई..
माधव की माँ के सामने उसने हाथ जोड़ दिए..
“खूब खुश रहो, खूब तरक्की करो !”
पानी के गिलास उन लोगो के सामने रखती सुलोचना बोल पड़ी..
“माधव भी चला आया.. ? वैसे हम औरतों की शॉपिंग में माधव तो बोर हो जायेगा.. आपको यहाँ छोड़ने ही आया था क्या ?”
सुलोचना की ये बात डिंकी को बिलकुल पसंद नहीं आई। हालाँकि सुलक्षणा और माधव का इस बात पर कोई विशेष ध्यान नहीं गया..
डिंकी उठ कर रसोई में चली गयी। वहीँ से उसने अपनी माँ को आवाज लगा दी..
“मम्मी… सुनो ज़रा !”
“क्या हुआ डिंकी ?”
अपनी साड़ी की सलवटें सही करते हुए सुलोचना रसोई में पहुंच गई।
” क्या हुआ, यहां क्यों बुला लिया डिंकी?
डिंकी अपनी मां को घूर रही थी।
” अतिथियों के लिए आज चाय पानी कुछ नहीं करना क्या?”
” पानी दे तो दिया है।”
” मम्मी ऐसा रिएक्शन क्यों दे रही हो? कम से कम चाय तो पिलाओ।”
डिंकी को स्लैब के सामने से हटा कर सुलोचना ने बिल्कुल बेमन से चाय का पानी चढ़ा दिया। डिंकी ने झांक कर देखा पानी उसे थोड़ा ज्यादा ही लग रहा था। उसने बर्तन उतार कर आधे से ज्यादा पानी सिंक में फेंक दिया।
” यह क्या कर रही है लड़की?”
” ढंग की चाय बना लो मम्मी, दो ही लोग हैं। पानी पानी पिला दोगी क्या?”
सुलोचना ने पत्ती और चीनी डालने के साथ ही अपने एकतरफ रखे कप होल्डर से रोज़ाना में उपयोग लिए जाने वाले रंगबिरंगे कप में से दो अलग अलग रंगो के कप निकाल लिए..
डिंकी से नहीं रहा गया..
“मम्मी आप बाहर जाकर बैठिये, मैं चाय लेकर आती हूँ !”
सुलोचना ने आंखे फाडे डिंकी को देखा और उसके माथे पर शिकन चली आई..
“क्या हो गया आज? हमारी गुलबानो रसोई में कैसे ?”
“आज इतवार है न.. आपको भी एक दिन आराम मिलना चाहिए आखिर.. !”
एक तरह से धकिया कर ही उसने अपनी माँ को बाहर भेजा और फिर उस बिगड़ी पड़ी चाय को संवारने में लग गयी..।
अपने सरहाने बने आले से उसने बोन चाइना के दो सफेद सजीले कप निकाले और अदरक इलायची कूट कूट कर खौलाई चाय को कप में ढाल कर कुकीज़ के साथ बाहर ले आई..
उसे खुद बड़ी आत्मसंतुष्टि मिल रही थी..।
चाय के कप देखते ही सुलोचना का माथा गर्म हो गया…
अब इनके लिए इतने महंगे कप निकालने की लड़की को क्या ज़रूरत थी, लेकिन चाय का प्याला मुहं से लगाते ही सुलक्षणा खुद को रोक नहीं पायी..
“चाय तो बड़ी बढ़िया बनी है बेटा !”
“थैंक यू आंटी !” उसने धीमे से माधव की तरफ देखा वो हर तरफ से निर्लिप्त चुपचाप बैठा चाय पी रहा था..
“तुम भी हमारे साथ ही क्यों नहीं चलती ?”
माधव की तरफ देख कर सुलक्षणा ने डिंकी से सवाल कर दिया…..
“मैं… लेकिन मैं क्या करुँगी ?”
“अरे आजकल की लड़कियॉं को साड़ी वाड़ी तो भाती नहीं, तुम्हारी चॉइस के कुछ कुर्ते और एक आध साड़ी ही ले लेंगे, माधव की होने वाली दुल्हन के लिए.. !”
होने वाली दुल्हन सुन कर डिंकी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई..
“लेकिन डिंकी का वाकई क्या काम और फिर ऑटो में बैठते भी नही बनेगा न ?”सुलोचना माधव के परिवार से डिंकी की ज्यादा नजदीकी चाहती नहीं थी..
“ऑटो क्यों, माधव कार लेकर आया है। उसके साथ सामने की सीट पर डिंकी हो जाएगी, पीछे आप और हम !”
सुलक्षणा का ये मक्खन मलाई प्रस्ताव सुलोचना को हरगिज़ पसंद नहीं आया। वो किसी हाल में डिंकी का माधव के संग बैठना बर्दाश्त नहीं कर सकती थी.. वो अभी डिंकी को मना करती, उतनी देर में डिंकी अपने बालों में क्लच फंसाये एक हैंड बैग टांगे बाहर चली आई..
“अच्छा चलिए आज मैं आपकी मेरे हिसाबो वाली ज़बरदस्त शॉपिंग करवाती हूँ ! आप भी याद रखेंगी कि वाह कितनी गुणी लड़की से पाला पड़ा था … !”
कुछ डिंकी के कहने का ढंग कुछ उसका लहजा सुन सभी हंस पड़े..
विनोद से आज्ञा ले एक एक कर वो चारों लोग बाहर निकल गए..
सुलोचना फुर्ती से आगे बढ़कर कार में सामने वाली सीट की तरफ पहुंच गई, उसने दरवाजा खोला ही था कि सुलक्षणा ने बड़े प्यार से उसका हाथ थाम कर उसे पीछे की तरफ खींच लिया।
” आप इधर आइये ना, हम पीछे बैठकर गप्पे मारते हुए चलेंगे, बच्चों को सामने बैठ जाने दीजिए..।”
बिल्कुल बेमन से सुलोचना सुलक्षणा के साथ पीछे बैठ गई। डिंकी ने एक नजर माधव को देखा, माधव ने उसकी तरफ जाकर कार का दरवाजा जरा अच्छे से खोल दिया और डिंकी अंदर बैठ गयी..
ज़मीन पर फैला पड़ा उसका दुपट्टा बड़े अंदाज़ से उठा कर माधव ने उसकी गोद में रख दिया, और कार का दरवाज़ा बंद कर ड्राइविंग सीट की तरफ चला आया..।
वो सभी लोग मार्किट की तरफ निकल गए..
क्रमशः

Dinki के लिए जहां रिश्ता आया। वहीं माधव की तैयारियां भी शुरू हो गई। जाने इन दोनों की नियति इन्हें मिलवाएगी या जुदा करवाएगी।
Mujhe dinki bahut pyari lagi.itna janne aur hone par bhi uske man me koi mail nhi hai
कहां तो सुलोचना और सुंदर सलोने से लड़के पर वारी जाती थी और कहां उसकी एक बात पता चलने पर आज वह अजीब सी हरकतें कर रही है समझ नहीं आता की एकदम से उसका इतना हृदय परिवर्तन क्यों हो गया ।
अरे नहीं करना उसे माधव से अपनी बेटी की शादी तो कोई बात नहीं वह तो वैसे भी माधव के लिए दूसरी लड़की के लिए शॉपिंग को जा रहे हैं अब तो उनका ब्याह भी तय हो गया है तो अब कैसा डर और कैसी फिक्र😏😏😏😏 सुलोचना का दिमाग इस बात को मन ही नहीं पा रहा है कि अभी माधव और डिकी का ब्याह नहीं हो सकता इसलिए वह दोनों को दूर रखने की कोशिश कर रही है।
पता नहीं सुलक्षणा जी ने माधव के बारे में वह बात कही थी वह सच थी या नहीं पर मंजरी ने जो बातें बताई है वह सारी ही माधव की बातों से मिलती-जुलती थी अभी बहुत सी चीज समझ से बाहर है आगे चलने पर ही पता चलेगा।
Very interesting n Excellent n Superb part.
बहुत अच्छा भाग 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌🧿🧿🧿❤️❤️❤️❤️❤️⭐⭐⭐⭐⭐🥰🥰🥰🥰🍫🍫🍫🍫🍫❤️❤️🥳🥳🥳
Lovely part 👌
Haaye ab ye maa hi kya dinkinke pyar ki dushman banegi
सुंदर अति सुन्दर शानदार रचना
👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻😘😘😘
खूब मस्त भाग लगा।सुलोचना भी अनप्रीडिक्टेबल है।कहां तो माधव पर फिदा हुई जा रही थीं और अब देखो एक ज़रा सी कमी निकल आई तो माधव को दूध की मक्खी सा छांट दिया।