
जीवनसाथी -3 भाग -129
सावधानी से चलाने के बावजूद एक अंधे मोड़ पर सामने से आते दस चक्का वाहन से अपनी गाड़ी को बचाने के प्रयास में बाहरी मोड पर गाड़ी को मोङते हुए ड्राइवर से गाड़ी संभली नहीं, और घाटी के रास्ते से जरा नीचे की तरफ उतर कर कच्चे कीचड़ भरे मार्ग पर तेजी से फिसलती चली गयी…
ड्राइवर का गाडी रोकने का अथक प्रयास भी निष्फल होता जा रहा था..।
वो भरसक प्रयास कर रहा था कि गाडी रुक जाए, लेकिन गाडी उसके नियंत्रण से बाहर हो गयी थी…।
ढलान पर उतरते हुए गाडी में एक धक्का सा लगा, और गाड़ी पलटने को थी कि जैसे चमत्कार सा हुआ, उसी तरफ लगे बड़े से पेड़ की झुकी हुई मोटी सी टहनी में कार का बोनट यूँ उलझा की गाडी पलटते पलटते थम गयी….
अंदर बैठे लोगों ने तो डर से आंखे मूंद ली थी, लेकिन ड्राइवर अपनी पूरी कोशिश में जूझ रहा था..
वो किसी कीमत पर राजपरिवार को तिनके बराबर भी कष्ट नहीं दे सकता था..
ईश्वर का हाथ कह लो या कोई चमत्कार, गाडी एकदम से रुक गयी..
ड्राइवर की जान में जान आई..।
अब तक पीछे आ रही सिक्योरिटी की गाड़ियां भी उस गाडी के पास चली आई थी..।
आगे बढ़ कर युवराज रूपा और बांसुरी को सुरक्षित निकाल लिया गया..
सिक्युरिटी के लोग उस ड्राइवर से पूछताछ करने लगे लेकिन युवराज ने उन्हें रोक दिया, युवराज ने उसके अथक प्रयासों को नजदीक से देखा था..।
ड्राइवर के ही प्रयास थे कि उन तीनो को ज़रा सी खरोंच तक नहीं आई थी..
उन सभी को साथ लिए वो पूरा दल महल की ओर निकल पड़ा..
उन लोगो के पहुँचने तक में महल में ये खबर आग की तरह फ़ैल चुकी थी कि कुलगुरु के आश्रम से लौटते हुए युवराज की गाडी दुर्घटनाग्रस्त हो गयी..
महल में हर कोई चिंतित था..
सब से ज्यादा हैरान परेशान हर्ष था..।
वो पल पल की खबर ले रहा था, लेकिन उससे रहा नहीं जा रहा था।
वो अपनी गाडी निकाल कर जाने को था कि तभी महल के प्रवेशद्वार से सारी गाड़ियां अंदर चली आई..
उन तीनो को स्वस्थ देख सभी के चेहरे पर राहत चली आई..
उन लोगो को अंदर ले जाकर हर्ष और बाकी लोग उन्हें घेर कर बैठ गए..
इसी सब के बीच फू साहब ने एक नौकरानी से थाल और कुछ सामग्री मंगवाई और रूपा के पास चली आई..
उनका स्वगत भाषण शुरू था..
“ये लक्षण कुछ अच्छे नहीं लग रहे.. अभी लड़की घर आई नहीं और अभी से कुंडली ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया..।
विवाह तिथि स्थिर कर आते समय सास ससुर की गाडी पलट गयी.. कोई माने न माने लड़की के चरण टेढ़े हैं !”
बात इस ढंग से कही गयी थी कि सामने वाले के कान में पड़ भी जाए और ये भी न लगे की उसे सुनाया जा रहा हो..
रूपा के कान जलने लगे, उसने किसी से कुछ कहा नहीं लेकिन मन में उसके ये बात घर बना गयी…।
बांसुरी रूपा से जरा हट कर बैठी थी, उसके साथ बैठी रेखा को वो सब कुछ बता रही थी,ऊ इसलिए उन लोगो तक फू साहब की आवाज़ नहीं पहुंची..
रूपा सरदर्द का बहाना कर वहाँ से उठ गयी….
एक एक कर सभी अपने कमरे में चले गए.. बांसुरी ने राजा को कुछ भी बताने से मना कर दिया था.. इसलिए राजा प्रेम समर तक ये बात नहीं पहुंचाई गयी…।
बांसुरी अपने कमरे में पहुंची और उसने शौर्य का नंबर लगा दिया…
आज बड़े दिनों के बाद शौर्य ने तुरंत फ़ोन उठा लिया..
बांसुरी के कुछ बोलने से पहले ही वो उधर से बोल पड़ा..
“आपने बताया क्यों नहीं कि आपकी गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ है ?”
“तुम्हे किसने बताया ?”
“पहले ये बताइये कि आप सब ठीक है ?”
“हम्म हम लोग ठीक है, तुम कैसे हो ? आजकल तो अपनी माँ से बात करने का वक्त नहीं है तुम्हारे पास !”
“थोडा बिज़ी हो गया हूँ.. यहाँ सब कुछ इतना भी आसान नहीं है !”
“राजा साहब के बेटे के लिए क्या कठिन हो गया ?”
“आपने तो हमेशा मुझे एक सामान्य बच्चे की तरह ही पाला है…
बचपन में पढ़ा डार्विन का सिद्धांत उस छोटी सी कक्षा के लिए बहुत गूढ़ है.. जीवन के पथ में उतरने के बाद वो सिद्धांत अब जाकर समझ आया है…
इसलिए बस लगा हुआ हूँ सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट की रेस में !”
“बहुत बड़ी बड़ी बातें करने लगा है मेरा बेटा… अच्छा सुन, सोच रही हूँ तेरे नानू को तेरी कुंडली दिखा दूँ.. उनके पास हर्ष की शादी का निमंत्रण देने जाना ही है !”
“जैसी आपकी मर्जी, मैं तो इन बातों पर जरा यक़ीन नहीं करता और आपको भी मना करता हूँ.. आप कहाँ इन बातो में उलझी हुई हैं!
मॉम… वीणा मौसी कैसी हैं ? “
बांसुरी के चेहरे पर आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी की लहर दौड़ गयी…
“अच्छी हैं, तुझे बहुत याद करती हैं..! कल ही बात हुई, तब कह रही थी बड़े दिनों से शौर्य से मिलना नहीं हुआ.. अभी हर्ष की शादी में वो भी आएगी !”
“हम्म.. आपने कुछ खाया ?”
आज शौर्य पल प्रतिपल अपने बदलते रंग से उसे चकित कर रहा था !!
बांसुरी और भी बातें करना चाहती थी, लेकिन शौर्य ने फ़ोन रख दिया..
उसके फ़ोन रखते ही, उसका दूसरा फ़ोन बजने लगा..
फ़ोन भदौरिया का था..
“महलवासियों के साथ तुम कुछ ज्यादा ही फेमिलिअर नहीं हो रहे हो ? जितना बोला गया है उतना करो, समझे ?”
“सब समझता हूँ, इसलिए सबकुछ ठीक ही कर रहा हूँ.. आप खुद सोच कर देखिये एक बेटा अपनी माँ से क्या और कैसे बात करेगा.. ?
अगर मैं उन्हें अवॉयड करूँगा या उनका हाल समाचार नहीं लूंगा तो क्या उन्हें लगेगा नहीं की बेटा, बेटा सा नहीं लग रहा..
आपके लिए वो सिर्फ राजाधिराज अजतशत्रु सिंह बुंदेला की पत्नी है लेकिन असल में उनका अपना भी एक सुदृढ़ व्यक्तित्व है..।
भूलिए मत, अपने अकेले के दम पर वो सात से आठ जिलों की कमान संभाल चुकी है। किसी समय उनकी कलक्ट्री की लोग दाद दिया करते थे। ये और बात है उन्होंने घर परिवार के लिए अपना कैरियर छोड़ दिया..
उन्हें कम बिलकुल भी मत आंकिये.. आप जैसों को तो वो अपने पैर के पास भी फटकने न दे..
“बस बस इतना बांसुरी पुराण सुनाने की ज़रूरत नहीं है..
वो जो भी रही हो, हमें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता.. हमारे लिए वो हमारे शत्रु की पत्नी से अधिक कुछ नहीं..
और सुनो कल हम सब अकरा निकलने वाले हैं, वहाँ की गरीब बस्ती में मेरे फ्री प्रोडक्ट्स बाँटने है !”
“वहाँ मेरा भी रहना जरुरी है क्या ?”
“अजातशत्रु का बेटा अपने आप में एक ब्रांड है, उसका मेरे साथ खड़ा रहना ही बहुत है और इसलिए तुम्हे वहाँ चलना होगा और सुनो मुझसे ज्यादा सवाल जवाब न किया करो, मेरे नौकर हो मेरा बॉस बनने की चेष्टा न करो !”
“यस बॉस !”
चिढ कर शौर्य ने फ़ोन एकदम से काट दिया, इस बात पर भी भदौरिया भड़क गया लेकिन वापस शौर्य को फ़ोन कर सुनाने का उसका मन नहीं किया और उसने खुद अपना फ़ोन एक तरफ रख दिया..
अगली सुबह निकलने की तैयारियों में वो लग गया…
फ़ोन बंद कर के शौर्य पलटा ही था कि उसके ठीक सामने विक्रम खड़ा था..
विक्रम को देख शौर्य एकदम से चिहुंक गया..
“तुम.. तुम यहाँ कब आये ?” शौर्य ने पूछा और विक्रम बिना कोई जवाब दिए उसे घूरता रहा..
“मुझे ऐसे क्या देख रहे हो, बताओ कब से खड़े हो यहाँ ? क्या तुमने कुछ सुना ?”
शौर्य को ध्यान से देखते हुए विक्रम ने अपने कान से ईयर प्लग निकाले और उसकी तरफ देखने लगा
“क्या कह रहे थे आप प्रिंस.. सॉरी कान में इयरप्लग लगा होने के कारण मैं कुछ सुन नहीं पाया.. ! बोलिये !”
एक गहरी सी साँस भर कर शौर्य मुड़ गया..
“कल सुबह अकरा निकलना है ! रेडी रहना, भदौरिया अपने चार्टर्ड प्लेन में लेकर जाने वाला है.. ओके !”
“ओके !”
क्रमशः

बांसुरी से बात करते समय एक पल को तो लगा जैसे शौर्य ही है यह लड़का पर भदोरिया से बात करने पर सारा भरम जाता रहा।
इतना बड़ा अनर्थ होते-होते बच गया आज राजमहल में और यह बात शौर्य को कैसे पता चल गई अचानक से।
हो सकता है यह बात विक्रम ने शौर्य और भदोरिया की सारी बातचीत सुन ली हो और वह कानों में अर्बुद लगे होने का नाटक कर रहा हूं मुझे लगता है कि कुछ दिन बाद इसका भंडाफोड़ होने वाला है और यह नकली शौर्य कौन है सबका पता बहुत जल्द ही चल जाएगा पर कुछ भी कहिए डॉक्टर साहिबा रचना में बेहद मजा आ रहा है इतने दिनों बाद अपने इस अनोखे परिवार से मिलने का मजा ही कुछ अलग था बहुत दिनों से मिस कर रही थी मैं राजा साहब और उनकी फैमिली से मिलने को
जीवन साथी भाग 130
Very nyc part 👌
Ab ye Asli Shouraya kaha gya,Ab kaisaya pata chalayaga, Waiting for the next part eagerly.
129 एपीसोड रिपीट हो गया है या हमारी प्रोफ़ाइल गलत दिख रहा है
लगता है कि शौर्य को किडनैप कर कोई बहरूपिया को प्रिंस बना दिया गया है
मैं शुरू से जानती थी कि शौर्य नकली ही है।अपना शौर्य ऐसा हो ही नहीं सकता।बस इसका सच सबके सामने आ जाए।
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Me to starting se hi keh rhi hu ye hmara shourya hai hi nhi
Wow superb episode
Kya Shaurya ko kuch ho gaya hai or yaha jo hai wo Shaurya nhi
Pata nhi kya ho raha hai
Kya Phu saheb apni chal m kamyab ho jayegi
Nhi mithi ki shadi Harsh se hi ho please mam
Wait for next episode