
अतिथि -23
डिंकी और माधव टेबल तक पहुंचे और वहाँ बैठी लड़की को देख डिंकी चौंक गयी..
उसके सामने उसकी मौसी की लड़की मंजरी बैठी थी..
“मंजू दी.. आप ?”
मंजरी ज़रा झेंपते हुए मुस्कुरा उठी…
“डिंकी मैं बस तुम्हे बताने ही वाली थी.. !”
डिंकी ने हाँ में गर्दन हिला दी.. माधव ने बड़ी नरमी से एक कुर्सी पीछे की तरफ खींच दी और डिंकी उस पर बैठ गयी..
“क्या लेंगे आप दोनों ?” माधव ने बैठते हुए पूछा..
डिंकी अब तक असमंजस में थी, लेकिन मंजरी के चेहरे पर सदाबहार मुस्कान मौजूद थी..
“यहाँ सबसे अच्छा क्या मिलता है ?”
मंजरी के सवाल पर माधव ने उसकी तरफ देखा और बोलने लगा..
“इटेलियन रेस्त्रां है, वैसे यहाँ की फ़ुज़िली और फेतुचिनी फेमस है.. !”
डिंकी के सामने मेन्यू कार्ड पड़ा था, वो माधव के लिए उन नामो का मन ही मन उच्चारण करती उन्हें उस कार्ड में ढूंढने का निरर्थक प्रयास करने लगी..
उतनी देर में आर्डर लेने के लिए एक लड़का वहाँ चला आया..
डिंकी के जीवन का ये पहला अनुभव था, जब वो किसी फाइव स्टार में बैठी थी.. उसे लगा था किसी सामान्य से कैफे में ही माधव ने उसे बुलाया होगा..
आज सुबह से वो उसे यूँ ही बार बार चकित कर रहा था…
पहले तो उसकी महंगी विदेशी घड़ी ने उसे बांध लिया, माधव से मिल कर लौटते समय ही उसने तुरंत उस घड़ी का मूल्य गूगल से पता कर लिया था…
बत्तीस हज़ार की तो घड़ी ही बांध रखी थी उसने और अब इतने बड़े होटल में मंजरी दी को मिलने बुला लिया…!
उसे खुद पर खीझ सी भी होने लगी..
उसके मन में माधव के लिए अगर कोमल भावनाये जाग गयी है, तो जरुरी तो नहीं कि वो भी ऐसा ही कुछ सोचता हो…
आखिर उसने मंजरी को मिलने के लिए बुलाया न, मतलब हो सकता है उनके बीच किसी तरह के रिश्ते के फलने फूलने की संभावना हो..
अब उसे वहाँ बैठना रुच नहीं रहा था, कैसे भी हो वो वहाँ से निकल भागने को आतुर हो उठी..
स्त्री मन की अतल गहराई का पता खुद स्त्री को भी कहाँ चल पाता है?
कुछ देर पहले तक माधव से मिल कर अपनी हृत्पीड़ा कह देने को व्याकुल डिंकी का अब वहाँ से भाग जाने का मन कर रहा था..।
उसे लग रहा था एक बार फिर जल्दबाजी में उसने गलत निर्णय ले लिया..
उसे अभी यहाँ नहीं आना चाहिए था..
“सुनिए, आप दोनों बैठिये, मैं जाती हूँ !” अपनी पूरी हिम्मत जोड़ कर उसने कह ही दिया.
“अरे क्यों ?” माधव आश्चर्य से आंखे फाडे उसे देखने लगा.. मंजरी ने भी डिंकी के हाथो पर अपना हाथ रख दिया..
“बैठ न डिंकी, तुझसे कुछ छिपा थोड़े न है.. हमारे दोनों के घरवालों ने कब हमारी बातचीत तय कर दी, पता ही नहीं चला..।
मम्मी इनकी माँ के साथ स्कूल में पढ़ी है..
तभी दोनों ने पता नहीं क्या तय किया था, फिर पापा की नौकरी तो यही लखनऊ में लग गयी थी..।
फिर तबादले में हम कानपुर चले गए….
हालाँकि छह महीने पहले पापा का वापस तबादला यही हो गया है, लेकिन हम लोग पापा के साथ कहाँ आ पाए !”
ऐसा लगा डिंकी के बिना पूछे ही मंजरी सारी कैफियत दे देना चाहती है..
डिंकी के मन में सवाल तो उबल रहे थे, लेकिन उसने उस वक्त कुछ नहीं पूछा….
“तुम क्या बताना चाहती थी डिंकी ?” माधव की गहरी सी आवाज़ गाढ़े शहद सी उसके अंदर उतरती चली गयी और इस आवाज़ को नजरअंदाज कर ले इतनी उसमे हिम्मत नहीं थी..।
उसने चुपचाप सर झुका लिया, माधव ने पानी का गिलास उसकी तरफ बढ़ा दिया..
“लो पानी पियो… !”
शांत अनुशासित बच्ची की तरह डिंकी ने गिलास उठा कर मुहं से लगा लिया.. और एक साँस में सारा पानी पी गयी, उसे पता ही नहीं था कि उसे इतनी प्यास लगी है..
“अब बोलो !” वो किसी धीर गंभीर अनुभवी प्राचार्य की तरह उससे सवाल करने लगा..
और डिंकी अपना धैर्य खो बैठी..
एक एक कर उसने योगिता और भूषण का किया सारा ढोंग उसे बता दिया..।
मंजरी भी डिंकी की पार्ट टाइम नौकरी के बारे में जानती थी..। उसे भी ये सब सुन कर बुरा लगा लेकिन माधव के चेहरे का गुस्से से रंग बदला गया.
तमतमाया सा बैठा माधव एकदम से अपनी जगह पर खड़ा हो गया..
डिंकी आंसू पोंछ कर उसके साथ खड़ी हो गयी..
“नहीं, अभी कुछ नहीं करना है.. मैं तो बस आपसे अपना दुःख बाँटना चाहती थी, आपको कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है !”
माधव पल भर के लिए नीचे देखते हुए अपने आप को शांत करने की कोशिश करने लगा..
उसने आंखे उठायी और हलके से मुस्कुरा कर डिंकी से कहने लगा..
उसके गालों पर पड़ने वाला लम्बा सा मनोहारी जानलेवा गड्ढा डिंकी के मन में छाये सारे अंधकार को फिर लील गया..
“नहीं मैं कुछ नहीं करूँगा, असल में मैं कुछ कर भी नहीं सकता ! मैं एक अदना सा जूनियर इंजिनियर ही तो हूँ.. मेरे कार्यालय में मेरी भी ऐसी ही कुछ स्थिति है, बस यही कहूंगा कि इन बातो को खुद पर हावी मत होने देना.. और अपने काम और अपनी लगन में कोई कमी न आने देना !”
डिंकी ने हामी भर दी..
वो एक्सक्यूज़ मी कह कर वाश रूम की तरफ चला गया और मंजरी डिंकी के करीब सरक आई..
“ये जो बोल के गया न अदना सा जूनियर इंजिनियर हूँ आदि इत्यादी.. इसकी बातो में मत आना.. तुम असल में जानती ही नहीं कि ये कौन है.. ?”
डिंकी बड़े ध्यान से मंजरी को देखने लगी..
“ऊपर से साधारण मध्यम वर्गीय दिखने वाला ये परिवार अंदर से जमींदार है.. इनके दादा का बांगरमऊ में खूब नाम था…
अंग्रेज़ो के ज़माने में इनके दादा की कोठी में अँगरेज़ आकर ठहरा करते थे और रुपयों से उन्हें तोल देते थे .. मैंने सुना है इनके दादा के काम काज से प्रभावित हो अँगरेज़ सरकार ने उनके नाम कई एकड़ की ज़मीन कर दी थी..।
बाद में इनके दादा ने कुछ ज़मीन बेचीं लेकिन बहुत सारी खुद ही रख ली..
इनके पिता ने कुछ भी नहीं बेचा और सारी पुश्तैनी ज़मीन सेंत कर रखें रहे। लेकिन वहाँ आगे बढ़ कर कोई फैक्ट्री बन रही थी, उसके लिए रास्ता इनकी ज़मीन के एक तरफ से होकर बनना था। तब उस छोटे से हिस्से को मुहं मांगी रकम की अदायगी कर के ही फैक्ट्री मालिक ने इनके पिता से प्राप्त किया था..।
बड़े होने के बाद, कुछ ज़मीनों का काम इन्होने भी कर के काफी रुपया बनाया है..
इनकी कोठी ही अकेले कई करोड़ की है..
इनकी पढाई लिखाई भी बाहर से हुई है.. !”
सब कुछ सुनती बैठी डिंकी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई..
तो उसके छैल छबीले ने अपनी मोहिनी मंजरी पर भी चला ही दी..
डिंकी को हंसी आ गयी.. मानना पड़ेगा किस्सागोई में इनका कोई सानी नहीं..
उसे हँसते देख मंजरी बोल पड़ी..
“तू हंस रही है ? तुझे शायद विश्वास नहीं हो रहा है न ?
इनके बारे में मम्मी ने सब कुछ पता करवाया है, और तभी तो मम्मी इस रिश्ते के लिए इतनी उत्सुक है ! तू तो जानती है डिंकी मम्मी के दिल दिमाग पर बस एक ही धुन सवार रहती है, मेरी शादी अच्छे घर में हो जाये.. फिर यहाँ तो लड़का सरकारी नौकरी में होने के साथ साथ करोडो की सम्पत्ति का वारिस भी है..!”
डिंकी का माथा ठनकने लगा..
मंजरी सारी सच्चाई जानती भी है या नहीं ? और अगर जानती है तो क्या सिर्फ माधव के पैसों के लिए शादी करने को तैयार है ?”
वैसे कामदेव जैसे सुदर्शन माधव को देख कर कौन सी लड़की मुहं फेर सकती थी..
सिर्फ करोड़ों की कोठी ही नहीं बल्कि मंजरी की इस लपलपाती जिह्वा के पीछे माधव के रूप रंग का भी विशेष हाथ था..
लेकिन बात गोल घूम कर वहीँ अटक रही थी कि अगर मंजरी और उसका परिवार तैयार था तो माधव कैसे मना करेगा… और अगर माधव ने मना नहीं किया तो ?
डिंकी का सर घूमने लगा, अपने ऑफिस की राजनीति से वैसे ही प्रताड़ित बैठी थी उस पर उसके प्रेमाकाश पर भी मंजरी नाम के बादल छाने लगे थे..
आज का दिन ही ख़राब था..
नहीं उसे मंजरी से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन…
लेकिन वो अपने मन में जागने वाले भावो को भी तो नजरअंदाज नहीं कर सकती थी..
“मंजू दी.. एक बात बतानी थी आपको !”
“हाँ बोल न !”
“किसी से कहोगी तो नहीं ?”
वो इतना बोल कर मंजरी के नजदीक सरक आई और तभी उसके कानो में गहरी सी आवाज़ पड़ गयी.
“बोलो डिंकी.. क्या कहना है !”
माधव उसके ठीक पीछे खड़ा था..
वो सकपका कर चुप हो गयी..
.”नहीं कुछ खास नहीं… कुछ गर्ल्स टॉक था !”
“ओह्ह.. चलो ऑर्डर आ गया है खा कर बताओ कैसा लगा !”
उनके सामने बड़ी बड़ी कांच की गोल तश्तरी में मोटे चपटे लम्बे लम्बे नूडल्स रखें थे।
रंग रूप से फीके से दिखने वाले इन नूडल्स को देख डिंकी की सदा की चटोरी तीखी जिव्हा अलसा गयी.. अपनी माँ की बनायी सुस्वादिष्ट थाली का दाल भात चोखा उसे मुहं चिढ़ाने लगा..
“टेस्ट तो करो !” मुस्कुरा कर माधव ने चॉप स्टिक्स उठा ली..
डिंकी को चॉप स्टिक्स देख कर ही झुंझलाहट होने लगी..
वो उन्हें सही तरीके से पकड़ ही नहीं पा रही थी, माधव ने बड़े आराम से उसकी दोनो उंगलियों को पर्याप्त दूरी में रख कर उनमे स्टिक्स को फंसा दिया और उनसे कैसे नूडल्स उठाना पकड़ना है इसका प्रदर्शन भी कर दिया..
एक दो बार के बाद डिंकी ने जैसे तैसे कर थोड़े प्रयास से थोड़ा बहुत कुछ खा लिया..
वो अभी और कुछ खा पाती की उसका मोबाइल बजने लगा.. उसके घर से फ़ोन आ रहा था..
अपनी माँ का नंबर देख वो सकपका कर खड़ी हो गयी..
माधव और मंजरी से इजाजत लेकर वो घर की तरफ निकल गयी…
क्रमशः

Manjiri आखिर उसकी मां ने बाजी मारने की पुरी कोशिश कर ही ली। लेकिन क्या उनकी मंशा पूरी होगी, क्या माधव उनका जवाई बनेगा।
Kya madhav manjari ke bhagya me likha jayega ya is baar madhav radha ka hoga
पता नहीं क्यों पर जैसे-जैसे आप माधव का वर्णन करती हो वैसे ही वह दिमाग पर छाता जा रहा है उसका धीर गंभीर सा व्यक्तित्व और उसका वह मन लुभावना सा चेहरा पता नहीं कितनी मंजरी और डिंकी को अपने मोहपाश में बांधेगा ।😍😍😍🥰🥰🥰🥰
डिकी को चिंता होने लगी है कि अगर जल्दी ही कुछ ना किया गया तो उसका होने वाला प्यार किसी और का भी हो सकता है होने वाला इसलिए कहा क्योंकि अभी तक तो वह खुद ही अपनी फीलिंग से परिचित नहीं है पूरी तरह की उसे करना क्या है और ना ही उसने अभी माधव को ही इस बारे में कुछ बता पाया है उसे जल्दी ही कुछ ना कुछ जुगाड़ लगानी पड़ेगी😌😌😌 ताकि उसके और माधव के बीच में कोई तीसरा ना आ पाए मां को समझाना भी एक बहुत बड़ी परेशानी है जो डिकी के सामने खड़ी है 😔😔😔😔
Very nyc part 👌
Dinky ke man me uthal -puthal ho rahi hai,ki Manjari jo Kah rahi ki bahut sampann gharanaya se hai Madhav,jo Madhav ki Ma ne kaha ki Madhav ke dimag me kuch garbar hai kaha tak sahi hai ya galat.hai,Dinky Asmanjus me pari hai,Ma ke phon aanaya per kuch thoea kha kar wahase Nikal gyi,Waiting for the next part eagerly, Aagya kya hoga
अतिथि तुम कब आओगे।।।।
Ye lagta hai Madav ki maa ne jhuthi kahani batayi hai Madav ke bare me, Madav ko koi pagal pan ki bimari nahi hai ye aapne bahut hi shandar suspense bana kar rakha hai
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏
मुझे तो अब माधव की माँ पर ही शक हो रहा है। dinki का परिवार माधव में रुचि न रखे इसलिए उसे दिमागी तौर पर बीमार बताया है। साथ ही ये बात भी हज़म नही हो रही कि माधव कभी कभी क्यो मन ही मन कहता है कि dinki उसकी किस्मत में नही। सस्पेंस तो तगड़ा है डॉक्टर साहिबा।
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