जीवनसाथी-3 भाग -124

जीवनसाथी -3 भाग -124

अपनी माँ की बचपन की कहानी सुन कर मीठी के मन में छायी धुंध हट चुकी थी..
उसका हर्ष पर अविश्वास बह गया था..
ये ज़रूरी तो नहीं की किसी रिश्ते की सुंदरता सिर्फ उसकी पारदर्शिता पर ही निर्भर करती हो, ये ज़रूरी तो नहीं कि अगर हर्ष उससे हर बात नहीं बताता इसका मतलब वो उससे प्यार नहीं करता..
प्यार सिर्फ एक दूसरे को सराहने का अर्थ ही तो नहीं देता, बल्कि हर परिस्थिति में एक दूसरे को संभालने का भी पर्याय है..
तो क्यों वो इस छोटी सी बात पर हर्ष को दोषी मान कर उस पर नाराज़ हो जाये  जबकि सच्चाई इसके सर्वथा विपरीत है..।
उसकी नाराज़गी तो फू साहब पर थी, कि उन्होंने उसे रास्ते से हटाने की कोशिश की और बिलावजह वो उनके गुस्से के बम का गोला हर्ष पर दागने को तैयार हो गई..

नहीं अब जो हो जाये इन फू साहब से तो वो अकेली ही निपट लेगी..।

अगर उनके पास उनके राजसी रक्त का तेज़ है, तो वो भी उसी राजसी रक्त की प्रेयसी है, उस प्रेम की आँच से दमक रही है..
उनके पास तो फिर भी विलासिता और वैभव का प्रसून पल्लव है जो कागज के नकली फूलों सा श्रीहीन है। लेकिन उसके पास सच्चे प्रेम की वो अपूर्व कस्तूरी है जिससे वो नखशिखांत महक रही है। और ताउम्र इस सुगन्धि को वो खुद से अलग होने नहीं देगी..।

मन ही मन एक दृढ़ संकल्प ले वो तैयार होने लगी, आज उसे महल से विशिष्ट रूप से लंच के लिए आमंत्रित किया गया था…

निरमा ने उसके लिए अपनी एक मखमली बेलबूटे की लेस लगी बेज साड़ी निकाल दी थी..
और उसे कहती गयी थी की अगर साड़ी पहनने का मन हो तो इसे ही पहन लेना..
पहले तो उसने सोचा नहा कर एक सूट ही डाल लूँ लेकिन कुछ सोच कर उसने वही साड़ी लपेट ली..।

घर की पुरानी नौकरानी सुमित्रा काम कर रही थी.. वो उस की मदद करने चली आई..
और अपनी लाड़ली बेबी साहब को पहली बार साड़ी में देख गदगद हो गयी..

“हाय दैया, नजर न लगे, बेबी साब बड़ी सुंदर लग रही !”

“चुप करो दीदी, एक तो ये साड़ी उलझती चली जा रही है.. उस पर आप मजाक बना रही हमारा !”

धुले हुए खुले बालों के उड़ने से शैम्पू की खुशबू बिखर रही थी…
उस पर मीठी का शनील चेरी ऑन द टॉप लग रहा था..
कुछ देर तो सुमित्रा मीठी को देखती रह गयी, फिर वहीं पड़ी काजल की पेन्सिल उठा कर उसके कान के पीछे एक चाँद बना दिया..

“ये क्या दीदी ?”

“हर तरह की अला बाला नजर से बचा रही हूँ !”

“वाह आश्चर्य है आपका ये छोटा सा टोटका मुझे बुरी नजर से बचा लेगा ? अरे दीदी जो किस्मत में लिखा  होगा वो तो होकर रहेगा न !”

“हमे इतनी बड़ी बड़ी बातें समझ नहीं आती बेबी साब, आपके लिए जूस निकाल दिया है, पी लीजिये फिर आपको निकलना भी है.. !”

“हम्म !” होंठो पर हल्की गुलाबी सी लिपस्टिक लगा कर मीठी नीचे उतर गयी..
उसे पता था हर्ष समय का बहुत पाबंद है, वो जानती थी उसे लेने के लिए महल से एकदम समय पर गाडी आ जाएगी, लेकिन उसने सोचा नहीं था कि हर्ष खुद उसे लेने चला आएगा..

उसके निकलने के समय के ठीक पांच मिनट पहले बाहर से नौकर भागता हुआ अंदर चला आया..

“बेबी साब, महल से हुकुम स्वयं आये है, आपको लेने !”

मीठी के चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कान चली आई..

“उन्हें अंदर ले आइये !” मीठी के इतना कहते ही हर्ष की आवाज़ उसके कानो में पड़ गयी..

“किसी के लाने की क्या ज़रूरत, हम खुद चले आये !”

हर्ष बोलते हुए ठीक मीठी के सामने आ खड़ा हुआ..
वो मीठी को ठिठक कर देखता रह गया..
मीठी ने पलकों की चितवन गिरा कर उसे लताड़ दिया.. और वो झेंप कर रह गया..

“चले ?”

“कुछ लेंगे नहीं ?” मीठी ने जूस का गिलास उसके सामने बढ़ा दिया…

हर्ष ने धीमे से न में गर्दन हिलायी और मीठी का हाथ पकड़ते पकड़ते रुक गया….
आसपास नौकरी की मौजूदगी में वो भी संकुचित हो उठा..
उसके पीछे मीठी भी बाहर निकल गयी..
दोनों गाडी में बैठे और हर्ष ने गाडी आगे बढ़ा दी..

“क्या हुआ ऐसे क्या देख रहे थे ?”

“अपनी रूपसी पत्नी को देखना गुनाह है क्या ?”

“अभी पत्नी हुई कहाँ है ?”

“जल्दी ही हो जाएगी… माँ साहेब डैड के साथ हमारे कुलगुरु के आश्रम जाने वाली है..।
वही से तिथि निकलवाई जाएगी।
जानती हो मेहमान कितने होने वाले हैं ?”

मीठी ने हर्ष की तरफ देख कर न में गर्दन हिला दी..

“सारे रिश्तेदार घर परिवार पास दूर के सब मिला कर तीन चार सौ लोग होंगे। उसके बाद काका साहब के मंत्रिमंडल के मेहमान, डैड के राजशाही के मेहमान, माँ साहेब काकी और काका सा लोगों के मित्र प्रत्यवेशी.. और इन सबके साथ हमारी पूरी रियासत..
जानती हो मीठी,  हमारे यहाँ शादी में हांका पड़ता है। मतलब पूरी रियासत में मुनादी के साथ हांका डलेगा कि हमारी शादी हल्दी मेहँदी की रस्में किस किस तिथि पर की जाएँगी और उसके बाद पूरा गांव हमारे हर उत्सव में शामिल होने के लिए आएगा..।”

“ओह्ह.. मतलब पूरा गांव ?”

“हाँ.. विजयराघवगढ़ के अलावा आसपास के और गांव भी तो हमारी रियासत का हिस्सा है। वो सारे गांव भी आमंत्रित किये जायेंगे ! रिसेप्शन वाले दिन के बाद एक दिन बहु की मुहं दिखाई का हांका भी डलेगा..।
उस दिन फिर पूरा गांव आएगा, जिन्हे तुम्हारे हाथो से उपहार दिलवाये जायेंगे..

“ओह्ह गॉड.. इतना सब करके मैं तो थक जाउंगी !”

“तुम्हे थकाने के लिए तो मैं अकेला काफी हूँ.. !” हर्ष मीठी की तरफ झुकने को था कि मीठी ने उसे रोक दिया
..

“कहीं और गाडी मत घुमाइएगा, लंच का टाइम कार्ड पर लिखा था, मैं अपनी होने वाली ससुराल लेट नहीं पहुंचना चाहती !”

“हम्म.. ये बात है.. चलो फिर वहीँ चलते हैं.. ।
लंच के बाद तुम्हे अपना कमरा दिखाने ले चलूँगा.. आज तक तुमने मेरा कमरा नहीं देखा !”

“देखा तो था !”

“वो सिर्फ मेरी स्टडी है.. तुम आज तक कमरे में आई ही नहीं !”

“अब तो वहीँ आना है, हमेशा के लिए !”

मीठी ने मुस्कुरा कर हर्ष की हथेली को चूम लिया और हर्ष चौंक कर उसे देखने लगा..

उसने धीरे से अपना चेहरा मीठी की तरफ ले जाना शुरू कर दिया और मीठी ने लाड़ से उसके चेहरे को खुद से दूर कर दिया..
कुछ देर में वो लोग महल पहुँच गए..

खाने की मेज पर एक एक कर महलवासी पहुँचने लगे थे, हालाँकि हर्ष और मीठी का स्वागत करने के लिए जया वहाँ मौजूद थी, कुछ देर में रूपा भी चली आई..
मीठी रूपा के पैरों पर झुकने को थी कि रूपा ने उसे रोक दिया..

“नहीं अभी हम तुमसे पैर नहीं छुवा सकते !”

सवालिया नजरो से मीठी रूपा को देखने लगी..

“अभी तुम कुंवारी कन्या हो, कन्या से हमारे यहाँ पैर छुवाने का रिवाज नहीं है..शादी होने के बाद तुम हमारी बहु हो जाओगी, तब छू लेना !”

रूपा ने उसे बैठने का इशारा किया और अपनी परिमार्जित रूचि का परिचय देती अपनी पसंद के व्यंजनों की प्रदर्शनी सी लगवा दी..

फूफू साहब उसके ठीक सामने बैठी उसे घूर रही थी.. उनका इस तरह घूरना मीठी को असहज कर रहा था, लेकिन मन ही मन उनसे निपटने के लिए मीठी को हिम्मत भी जुटा रहा था..

नौकर चाकर इधर से उधर परिवेषण में लगे थे….
हर्ष इस बात का बराबर ध्यान रखे था कि मीठी वहाँ सब के बीच सहज रहे, लेकिन फूफू साहब कोई न कोई ऐसी बात कर ही दे रही थी जिससे मीठी को कमतर महसूस करवा सके..
हर्ष का खाना हो चुका था, उसका फ़ोन बजने लगा और अपनी माँ और बाकी लोगो से इजाजत लेकर वो फ़ोन उठाये बाहर निकल गया..

फूफू साहब ने मौका देखा और मीठी के ज़रा पास चली आई..

“संभल कर खाना, कहीं महल के गरिष्ठ भोजन से अपच न हो जाये ! वैसे भी इस तरह के राजसी भोजो की तुम्हे आदत जो नहीं होगी !”

मीठी ने उनकी तरफ देखा और हल्के से मुस्कुरा उठी..

“अब गरिष्ठ हो या सुपाच्य, मुझे तो इसी भोजन की आदत डालनी है। और फिर अभी उम्र भी कम है, इसलिए हाज़मा दुरुस्त है मेरा.. फ़िक्र तो उम्रदराज़ लोगो को करना चाहिए..! वैसे मेरी चिंता करने के लिए आपका आभार फू साहब, लेकिन आपको तो आजकल काफी नापतौल कर खाना पड़ता होगा न..!”

फू साहब के चेहरे का रंग अपमान से काला पड़ गया..
उसी समय उनके पास खड़े नौकर ने उनकी प्लेट में परोसना शुरू किया और मीठी ने उसे टोक दिया..

“आराम से परोसो, वो संकोच में मना भी नहीं करेंगी और उनकी अब सोच सोच कर खाने की उमर आ गयी है.. है न फू साहब !”

फू साहब उसे घूर रही थी, लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी.. उन्होंने अपनी बात बड़े धीमे स्वर में कही थी और मीठी ने भी बिलकुल उनके ही लहजे में अपनी बात कही थी.. टेबल पर बैठे बाकी लोग उनकी बातें सुन नहीं पाए थे, इसलिए वो किसी से मीठी की शिकायत भी नहीं कर सकती थी…
अपना सा मुहं लिए वो बैठी चुपचाप खाने लगी..

*****

  शौर्य भदौरिया की मीटिंग के लिए पूरी तरह से तैयारियां कर चुका था..
वो विक्रम को एक एक कागज़ात जांचने परख़ने कह रहा था कि तभी भदौरिया का फ़ोन आ गया..

शौर्य आईने के सामने खड़ा अपनी टाई की गांठ सही कर रहा था… उसने रिंग सुन कर विक्रम की तरफ देख कर उसे कॉल उठा कर स्पीकर में डालने का इशारा कर दिया..
विक्रम ने स्पीकर में कॉल डाल दी..
दूसरी तरफ से भदौरिया की आवाज़ आने लगी..

“शौर्य.. कब तक पहुँच जाओगे मीट में !”

“अदब से बात करना कब सीखेंगे आप भदौरिया जी ?”

शौर्य के ऐसा कहते ही भदौरिया की टोन बदल गयी..

“क्या मतलब ?”

“मतलब मैं आपका बिज़नेस पार्टनर बस नहीं, बल्कि एक रियासत का राजकुमार, महामहिम अजातशत्रु सिंह बुंदेला का बेटा भी हूँ.. कायदे से तो आपको मुझे महामहिम बुलाना चाहिए पर उतना लम्बा आप नहीं बोल पाएंगे तो कम से कम प्रिंस तो बोलिये..
पता नहीं आप लोगो को सम्मान देने में क्या आपत्ति होती है.. ?
राजशाही से जुड़ा कोई प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया जाता आप सब से, और आये हैं राजसी परिवार से संबंध जोड़ने.. !
क्यों सही कहा न !”

भदौरिया को ये बात पसंद तो नहीं आ रही थी लेकिन फ़िलहाल शौर्य का उसके साथ जुड़ने के लिए सहमति दे देना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात थी..।

इस मीट के पहले शौर्य ने जिस तरीके से भदौरिया की धज्जियां उड़ाई थी एक ही रात में उसके शेयर्स के रेट काफी नीचे गिर गए थे।
   उस मीट में मौजूद भदौरिया के कई फायनेंसर ने अपना हाथ खींच लिया था और भदौरिया भयंकर आर्थिक संकट की स्थिति में घिर आया था..
उसके पास साम दम दंड भेद सभी के प्रयोग से शौर्य को अपने साथ जोड़ने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं बचा था वरना उसके व्यापर का अंत तय था..
और इसलिए आज वो शौर्य की हर बात को सुन और सह रहा था..

“आई एम सॉरी प्रिंस.. ! मुझसे गलती हो गयी.. मैं अब ध्यान रखूँगा.. आप जल्दी से जल्दी मीट में आ जाइये, यहाँ लोग जुड़ने लगे हैं.. “

“हम्म… आई लाइक इट.. प्रिंस शौर्य कुछ ही देर में आ रहे हैं.. ।”

शौर्य ने विक्रम की तरफ देखा और उसे चलने का इशारा कर दिया..
.दोनों वहाँ से उस रीजनल मीट के लिए निकल गए..

.क्रमशः

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उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

यह मारा मीठी ने नहले पर दहला 👏🏻👏🏻👏🏻अपनी बुआ सास को अब कैसे जवाब देना है वह सीख रही है जहर ही जहर को काटता है बस ठीक उसी तरीके से वह अपनी बुआ सास की बातों को काटना भी सीख रही है। 😡😡😡😡
आजकल हर्ष काफी बोलने लगे हैं अपनी होने वाली पत्नी के सामने हर्ष का यह कहना कि मैं तुम्हें अकेला काफी हूं था थकाने के लिए बेचारी मीठी ही तो बोलते ही बंद हो गई होगी अपने इस बड़बोले की बातों के आगे।🥰🥰🥰🥰😍😍😍😍
बिल्कुल इसी आत्मविश्वास के साथ मीठी को अपना पूरा जीवन बिताना है उसे राजशि महल के लोगों के साथ जिन्हें कभी अपने से नीचे तवके के लोगों के साथ कैसे पेश आना है वह भी सीखना होगा

Nisha
Nisha
1 year ago

Mithi samjhdar hai wo fu saheb se nipat legi chinta toh shaurya ki hai ki wo kyun itna badla badla sa waywhar kar raha hai 🤔🤔

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

लाजवाब भाग 👌👌👌👌👌👌💐💐💐💐❤️❤️❤️❤️🥰🥰🥰🍫🍫🍫⭐⭐⭐⭐⭐

Jyoti
Jyoti
1 year ago

Very interesting part 👌

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Shanu singla
Shanu singla
1 year ago

👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Shanu singla
Shanu singla
1 year ago

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Dhara kundaliya
Dhara kundaliya
1 year ago

Meethi ne aaj kamaal kar diya…. superb story 😍 bahut hi behtrin part…

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏

Radhika Porwal
Radhika Porwal
1 year ago

Wow superb episode