
मायानगरी -10
प्राची ने अधिराज को अपनी बाइक पर पीछे बैठाया और अस्पताल के लिए निकल गयी..
घर पर इनका जीवन कैसा भी हो, लेकिन अस्पताल पहुँचने के बाद इन डॉक्टर्स का जीवन पूरी तरह बदल जाता था, न खाने का समय न आराम करने का..।
यहाँ तक की कई बार मोबाईल भी घंटो देखने का वक्त नहीं मिल पाता था..।
प्राची समय की पाबंद नहीं थी, उसे रात भर जाग कर टीवी पर सीरीज़ देखना, सुबह देर तक सोते रहना पसंद था। कॉलेज की क्लासेस भी वो अक्सर इसी चक्कर में मिस कर दिया करती थी, लेकिन अब रेजिडेंट बनने के बाद अधिराज के कारण उसे भी समस्य पर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा था…
आज भी गाडी पार्किंग में डालने के बाद वो दोनों तेज़ कदमो से चलते हुए अस्पताल की सीढ़ियां चढ़ने लगे !!
एमरजेंसी में रोज़ की तरह आज भी भीड़ भाड़ थी.. प्राची और अधिराज पंच मशीन में इन पंच कर के उसी तरफ बढ़ गए..
वापस एक एक्सीडेंट केस आया हुआ था..
एक औरत की कार सामने से आती ट्रक से हुई भिड़ंत में पलट गयी थी…
औरत उस वक्त खुद कार चला रही थी और उसे सर माथे और हाथों में चोटें आई थी…।
किसी राहगीर ने कार का एक्सीडेंट देखकर पुलिस और एंबुलेंस को फोन कर दिया था। एंबुलेंस में पैरामेडिकल स्टाफ ने उस महिला को जितनी भी प्राथमिक चिकित्सा दी जा सकती थी, अपनी तरफ से देकर उसे सुरक्षित अस्पताल तक लाने की भरपूर कोशिश की थी, लेकिन अब तक उस बेहोश महिला को होश में नहीं ला सके थे..।
प्राची वहाँ पहुंची और उस महिला की हालत देख कर चिंतित हो गयी..
“कॉम्प्लिकेटेड केस है अधिराज ?”
“क्यों क्या हुआ ?”
“लेडी प्रेग्नेंट है.. !” प्राची ने कहा ही था कि उसके पीछे खड़ी उसी वक् वहाँ पहुंची छवि ने आगे बढ़ कर अपनी बात कह दी..
“और फ़ुल टर्म भी !”
“व्हाट ?”, प्राची चौंक उठी..
“हम्म और मुझे ये प्राइमी लग रही !”
“प्रायमी मतलब ये इसका पहला बेबी है !” प्राची ने पूछा और छवि ने हामी भर दी..
“अब सबसे पहले इसे होश मे लाने का प्रयास करना होगा, जब तक ये होश मे न आ जाये कुछ कहा नहीं जा सकता !”
उसी समय डॉक्टर नायरा भी वहाँ पहुँच गयी.. उसके आते ही छवि उसे उस महिला से जुडी सारी डिटेल्स बताने लगी.. नायरा ने सब सुन कर छवि के कंधे पर हाथ रख दिया..
“वैसे छवि, अब मेडिकल के जनरल नॉर्म्स के हिसाब से अगर कोई इमरजेंसी है, तो जनरल सर्जन भी सी सेक्शन कर सकता है !”
“जानती हूँ नायरा मैम, लेकिन हमारी मायानगरी की माया निराली है।
यहाँ ऊपर बैठे राजमहिषियों की शनी सी वक्र दृष्टी मेरी पति के साथ साथ कब मुझे अपना ग्रास बना ले इसका कोई भरोसा नहीं। इसलिए अब मैं सिर्फ प्रोटोकाल के हिसाब से ही चलना चाहती हूँ !”
“पर चल नहीं पाओगी, क्यूंकि तुम एक ईमानदार और कर्मठ डॉक्टर जो हो..
इसके घर से कोई आया है या नहीं ?”
नर्स उस महिला के माता पिता को साथ ले आई..
“कैसे भी हो हमारी बच्ची को बचा लीजिये !” वो दोनों हाथ जोड़े अनुनय करने लगे..
नायरा आगे बढ़ कर उनसे जानकारी लेने लगी..
“ये खुद ड्राइव कर रही थी न ? असल में यह सवाल पूछना इसलिए जरूरी है कि यह एक एक्सीडेंट केस है। कहीं ऐसा तो नहीं कि ड्राइवर गाड़ी चला रहा था और एक्सीडेंट के बाद वह इन्हे गाड़ी पर अकेला छोड़कर भाग गया..!”
” नहीं यह खुद ही गाड़ी चला रही थी। आज एक फंक्शन में इसे बुलाया गया था, यह वहीं से वापस लौट रही थी..!”
” आप लोगों ने अकेले खुद ड्राइव करके आने और जाने क्यों दिया? या तो कोई ड्राइवर साथ जाता, या आप खुद चले जाते!”
” जी मैडम मैंने इससे कहा था कि मैं साथ चलता हूं। लेकिन मेरी तबीयत आजकल बहुत ऊपर नीचे रहती है, बस इसी वजह से इसने मुझे साथ नहीं लिया। कहा के पास में ही है, मैं तुरंत कार्यक्रम अटेंड करके आ जाऊंगी। लेकिन लौटते समय जाने कैसे यह इतना बड़ा एक्सीडेंट हो गया..!”
” एक्सीडेंट तो हुआ ही है, लेकिन साथ ही इन्हें ब्लीडिंग भी शुरू हो गई है। हमें तुरंत ऑपरेट करना पड़ेगा। कंडीशन देखकर लग रहा है कि या तो हम बच्चे को बचा पाएंगे या..”
” चाहे जो भी हो जाए, आप हमारी बच्ची को बचा लीजिए। उसकी जान हमारे लिए ज्यादा जरूरी है..!”
“मैं समझ सकती हूँ.. !”
नायरा उन लोगो से बात कर के स्टाफ की तरफ मुड़ गयी..
“ओआर रेडी करवाओ !”
नायरा वहाँ से निकल कर बाहर की तरफ चली गयी..
छवि और प्राची अब भी उस महिला के साथ थे..
छवि के विभाग से उसके लिए कॉल आ गया और उसे भी जाना पड़ गया..।
अब प्राची ही बस वहाँ रह गयी थी..
उसी वक्त उस बेहोश महिला ने धीमे से आँखे खोल दी..
“मैं.. कहाँ हूँ?”
” आप हॉस्पिटल में है। आपका रोड एक्सीडेंट हुआ था। जिसमें आप बेहोश हालत में यहां लाई गई है। आपका फुल टाइम चल रहा है, और अब बच्चे को डिलीवर करने का वक्त आ गया है..!”
प्राची ने सारी बातें उस महिला को बता दी। उस महिला ने प्राची के दोनों हाथ थाम लिए। उसी वक्त उसके माता-पिता भी वहां पहुंच गए।
वह दोनों बड़े प्यार से अपनी बेटी के माथे पर हाथ फेरने लगे।
” हम तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे जीवा, तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगी। घबराओ मत ।”
उस महिला की मां ने प्राची की तरफ देखा और अपने हाथ जोड़ दिए।
” कैसे भी हो, आप लोग मेरी बच्ची को बचा लीजिए।”
प्राची ने हां में गर्दन हिला दी।
इसके साथ ही वह औरत आगे बोलने लगी।
” अभी-अभी वह सीनियर डॉक्टर हमसे परमिशन लेकर गई है। उन्होंने साफ कहा है कि बच्चे को बचाने में मुश्किल आएगी, इसलिए या तो बच्चे को ही बचाया जा सकता है, या माँ को।
हम दोनों ने परमिशन दे दी है कि हम अपनी बेटी को बचाना चाहते हैं।”
प्राची ने हामी भरी और उस महिला की तरफ देखने लगी। लेकिन उस महिला के चेहरे के भाव बदलने लगे…
उसके चेहरे पर लाचारगी और नाराजगी नजर आने लगी, उसने प्राची का हाथ पकड़ लिया
“प्लीज डॉक्टर, जैसे भी हो इस बच्चे को बचा लीजिए।”
प्राची ने उस महिला के हाथ पर अपना हाथ रखकर उसे तसल्ली दी।
” देखिए सीनियर डॉक्टर्स डिसीजन ले चुके हैं। उन्होंने आपके माता-पिता से भी बात कर ली है, तो आपके लिए जो सही होगा वही निर्णय लिया जाएगा। वैसे भी अगर बच्चे और माँ में से किसी एक को बचाना पड़े तो हमारे एथिक्स यही कहते हैं कि हम पहले मां को बचाने की कोशिश करें।
वैसे भी माँ रहेगी तो दूसरा बच्चा तो आ ही सकता है..।”
“नहीं आ सकता।”
और यह कहकर उस महिला की आंखों से आंसू बहने लगे। उसके पिता उसके बालों पर हाथ फेरने लगे, उसकी मां ने भी अपनी आंखों से बहते आंसू पोंछ लिए। प्राची को समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब इतने भावुक क्यों हो रहे हैं। उसने उस महिला की तरफ देखा और वह महिला आगे कहने लगी..
“मेरे पति पिछले महीने बॉर्डर पर हुए हमले में शहीद हो चुके हैं..।
ये उनकी आखिरी निशानी है जो मुझे किसी भी हाल में संभाल कर रखनी है..। मैं अपने इस बच्चे को किसी कीमत पर नहीं खो सकती..।
आप मुझे नहीं, इस बच्चे को ही बचाने की कोशिश कीजिये।
इसमें उनका अंश है इसे पालने के लिए मुझे ज़िंदा रहना ही होगा.. ।
मुझे कुछ नहीं होगा डॉक्टर, आप मेरी फ़िक्र न करे..।”
उस महिला की बात सुन प्राची सकते में आ गई। कभी-कभी ईश्वर कैसा अजीब खेल रच देते हैं। उस महिला की हालत सोच कर ही प्राची का दिल डूबने लगा था। उस जैसी कठोर पाषाणहृदय लड़की भी आज इस केस को देखकर भावुकता में बहने लगी। उसे लगा किसी तरह अधिराज आ जाए और वह उसके सीने से लगकर रो लें…
उसने खुद को संभाला और वहां से निकल कर डॉक्टर नायरा से मिलने चली गई। डॉक्टर नायरा ओ आर में मौजूद थी। वहां वह कुछ जरूरी कागजात की औपचारिकता पूरी कर रही थी। वहां पहुंचकर प्राची ने उस महिला से हुए सारी बातें डॉक्टर नायरा को बता दी..
” तुम्हारी बातें समझ रहीं हूं प्राची, लेकिन यह वक्त कोरी भावुकता में बहने का नहीं है…।
मरीज को बचाने के लिए हमें सी सेक्शन करना होगा जिसमें एनेस्थीसिया देने और बाकी तैयारी करने के वक्त में बच्चा बच नहीं पाएगा…
अगर हमें बच्चे को बचाना है, तो उसे नॉर्मल डिलीवरी करवानी पड़ेगी। और फिलहाल उस औरत की जो स्थिति है, वह नॉर्मल डिलीवरी का पेन लेने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। हो सकता है पेंस लेने में उस महिला को कार्डियक अरेस्ट हो जाए..।”
“नहीं होगा मैम, वह इस वक्त इस शहर के सबसे बड़े और सफल हॉस्पिटल में मौजूद है। इतने सारे डॉक्टर के बीच अगर उसे कार्डियक अरेस्ट हो जाता है, तो यह हमारी सबसे बड़ी असफलता होगी।
कार्डियक अरेस्ट ना हो इसके लिए हम कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर को भी तो यहां पर रख सकते हैं। जो उसके हार्ट को लगातार मॉनिटर करते रहे..।”
“काफी हाइपोथेटिकल बात कह रही हो प्राची। लेकिन यह बहुत बड़ा रिस्क हो जाएगा। उस महिला को एक्सीडेंट में चोट लगी है। उसकी ब्लीडिंग ऑलरेडी स्टार्ट हो चुकी है… ऐसे में उसके बच्चे की तरफ से ध्यान हटाकर हमें इसकी इंटरनल ब्लीडिंग रोकने के लिए तुरंत सी सेक्शन करके बच्चे को जैसे भी हो बाहर निकालना होगा और उसका ट्रीटमेंट करना चाहिए..।”
“मैडम वह मरीज कोई साधारण महिला नही एक शहीद की पत्नी है। एक महीने पहले अपने पति को खोने के बावजूद आज जब वह पूरी हिम्मत से अपने बच्चे को बचाना चाहती है तो हमें उसे एक मौका तो देना चाहिए। हम डॉक्टर नायक की एनेस्थीसिया टीम, डॉक्टर अधिराज और बाकी कार्डियोलॉजी वाली टीम को साथ लेकर भी तो इस नॉर्मल डिलीवरी को कंडक्ट करवा सकते हैं..।”
“यह पूरी तरह से हमारा रिस्क हो जाएगा प्राची, अगर उस महिला को कुछ भी हुआ तो उसके माता-पिता हम पर क्लेम कर सकते हैं। क्या तुम इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हो..?”
“मैं इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं।”
दरवाजे पर खड़ी छवि ने आगे बढ़कर कहा और नायरा ने उसे और प्राची को देखकर कंधे उचका दिए।
” आजकल देख रही हूं डॉक्टर्स में भावुकता कुछ ज्यादा ही हो गई है। पहले के डॉक्टर काफी प्रैक्टिकल हुआ करते थे। उनके लिए पेशेंट सिर्फ पेशेंट हुआ करते थे। लेकिन आप लोग उन पेशेंट से दिल का रिश्ता जोड़ने लगे हैं, जो सही मायनो में आपके फ्यूचर के लिए और आपके प्रोफेशन के लिए सही नहीं है।”
डॉक्टर नायरा ने कहा और प्राची के लाए हुए कंसेंट फॉर्म पर अपने दस्तखत कर दिए।
” डॉ प्राची, डॉक्टर छवि अब ये केस पूरी तरह से आप लोगों के जिम्मे है। मैं हाथ भी नहीं लगाऊंगी।”
” बिल्कुल मैम आपके हाथ लगाने की जरूरत नहीं है, बस आप अपने अनुभव की छांव में हमें बनाए रखिएगा। “
छवि की बात सुनकर नायरा के चेहरे पर हंसी चली आई..
“लेट्स गो.. अगर नार्मल डिलीवरी करानी है, तो हमें तुरंत शुरू करना पड़ेगा…।”
इसके बाद सब आनन फानन होता चला गया.. ।
डॉक्टर्स की टीम एक साथ जुटी और उन धन्वन्तरीयों ने फिर यमराज के हाथ से उस माँ बेटी का जीवन छीन लिया..
घंटे भर बाद प्राची ने ही बच्ची को साफ सुफा कर सफेद कपड़े में लपेटा और उसकी माँ के पास चली आई..
अपनी रुई के गोले सी बेटी को हाथ में लेकर उसकी आंखे डबडबा गयी…
“थैंक यू डॉक्टर !”
“आपने बहुत हिम्मत दिखाई.. इतनी चोट के बाद भी आपने नॉर्मल डिलीवरी का दर्द सहने की इच्छा जताई और डिलीवरी में हमारा पूरा साथ दिया.. थैंक्स की असली हक़दार तो आप है.. और सिर्फ थैंक्स नहीं बल्कि सम्मान की भी हक़दार है.. !”
प्राची ने उसके हाथो पर अपना हाथ रख कर हल्के से दबा दिया..
अगले दिन उस महिला की छुट्टी कर दी गयी..
उसे व्हील चेयर पर बैठा कर अस्पताल के स्त्री रोग विभाग का सारा स्टाफ बाहर तक छोड़ने आया..
उनके साथ ही छवि प्राची और डॉक्टर नायरा भी थे..
छवि ने अपने हाथ में पकड़ रखा एक छोटा सा तोहफा उस महिला की तरफ बढ़ा दिया..
“ये आपके लिए !”
“अरे तोहफा तो मुझे देना चाहिए.. और आप लोग तोहफा दे रहे हैं !” वो महिला मुस्कुरा उठी..
“खोल कर देखिये !” प्राची ने कहा और उस महिला ने तोहफा खोल लिया, उसमे एक छोटे से गणपति थे..
“ये हमेशा आप दोनों की रक्षा करेंगे !”
“आपकी पूरी टीम की शुक्रगुजार हूँ मैं……!”
उस महिला ने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए..
अपनी गाडी के पास पहुँचने के बाद उसने धीरे से बच्ची को गोद में लिया और गाड़ी में बैठ कर वहाँ से निकल गयी..
उसके वहाँ से जाने के बाद ये सारे लोग भी वापस अपने अपने काम में लौट गए..
अधिराज प्राची के साथ ही चल रहा था..
“जानती हो, ये कौन है ?”
प्राची ने न में सर हिला दिया..
“जामनगर के प्रसिद्ध कपडा व्यवसायी करसन दास कपाड़िया की बेटी जयंती कपाड़िया है !”
“ओह्ह… मतलब बहुत रिच है ?”
“हम्म.. इन्होने अपने घर वालो से बगावत कर के मिलिट्री ऑफिसर कुशाल बदेशा से शादी की थी.. उसके बाद इनके परिवार वालो ने इनसे संबंध तोड़ लिए थे..
लेकिन लास्ट मंथ कुशाल के शहीद होने की खबर के बाद ये लोग अपनी बेटी के पास चले आये !”
“हम्म.. बहुत हिम्मती हैं ये !”
“हाँ और बहुत अच्छी भी !”
“चलो कैंटीन में चल कर कुछ खा लिया जाये.. आज सुबह जल्दी आने के चक्कर में कुछ खा नहीं पायी थी..
वो दोनों कैंटीन की तरफ बढ़ गए..
क्रमशः

Wow prachi ki thodi si himmat ne aaj ek ma ki apne pati ki aakhiri nishani ko dekhne ka mauka de diya.ye baat wo aurat kabhi nahi bhul payegi.bahut hi achha part tha 😘😘😘😘😘👌👌👌👌👌👌
Very nyc part 👌
Beautiful part ese doctors ko hearty solute
उफ्फ ईश्वर जो भी दिखाए सो कम😢भला हो मायानगरी टीम का जो ना बेटी को बचा लिया।
आज के पार्ट से पता चला कि एक मां चाहे तो कुछ भी कर सकती है अपने बच्चे के लिए , हम लोग तो यूंही कह देते है कि बच्चा नहीं मानता हमारी बात , अगर एक मां अपनी बात भगवान से मनवा सकती है अपनी ओलाद के लिए , तो किसी से भी मनवा सकती है 🫡🫡🫡🫡 छवि प्राची के लिए जयगढ़ की तोप की 100 सलामी 🙏🏼🙏🏼👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼
Jabardast part… lajwab story 😍 salute to dr….
क्या बात 👏👏👏👏👏आज के भाग मे एक फिर साबित हो गया कि आप जैसा कोई नहीं लिख सकता 👏🫡।
आज का भाग पढ़ते पढ़ते मुझे सुकांत का वो OT का सीन याद आ गया उस समय भी डॉक्टर मृत्युंजय और उनकी team ने भगवान बनकर उसकी जान बचाई थी और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ और एक तो पेशेंट की हिम्मत और दूसरा डॉक्टर्स की मेहनत से दोनों माँ बेटी ठीक है,स्वस्थ है और एक बात बेशक डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप है पर इंसानी दिल…भावुक कर ही देता उन्हें भी 😊,।
डॉक्टर साहिबा….आप भी तो डॉक्टर ही हो और सच मे बहुत भावुक भी 😊🫂।
लाजवाब भाग 👌👌👌👌🙏।
Supper .story 🥰🥰🙏🙏
Wow aise hi dictors ko bhagwaan ka drja nahin diya gya prachi apni personal life mein chahe kaisi bhi ho lekin poore jee jaan se dono ne kr dikhaya
Aur fir yeh to shaheed ki widow to sabhi ne apne pryason se jachcha bachcha dono ko bcha liya
Hat off to Dr chhavi & prachi
Bahut achchha likhtii hain aap😇😇👏👏
Very nice part