
अतिथि -21
डिंकी कॉलेज से निकल कर अपने ऑफिस पहुँच चुकी थी, आज उसका ध्यान काम निपटाने पर कम और बाहर ज्यादा था..।
उसका ध्यान रह रह कर घड़ी की तरफ जा रहा था, उसे माधव के चाय पीने आने का समय याद था। और वह इस समय को आज मिस नहीं करना चाहती थी…
वह अपनी टेबल पर कुछ काम निपटा रही थी कि तभी वहां से उस ऑफिस की मालकिन गुजरने लगी।
उसने रुक कर डिंकी को देखा और उसके पास थम कर खड़ी हो गई
“अनुराधा, अगले महीने नयनतारा की शादी है। यह बहुत ग्रैंड वेडिंग होने वाली है। और नयनतारा जी ने हमें अपने वेडिंग आउटफिट का आर्डर दिया है। लगभग दस बारह साड़ियां लानी है मुझे।
और सात आठ डिजाइनर लहंगे तैयार करवाने हैं।ये समझ लो लाखो का आर्डर है, इसे किसी हाल में मिस नहीं किया जा सकता।
मैंने कल की मीटिंग में सारे डिज़ाईनर्स को डिजाइन बनाने के ऑर्डर दे दिए थे, तुम आज सारे डिजाइंस कलेक्ट करके मेरे ऑफिस में रख दो।
ठीक 1 घंटे में मैं मीटिंग लूंगी।
कहां से फैब्रिक आना है? कहां से हम मटेरियल लेंगे? कहां से गोटा पत्ती आएगी? और कौन किस काम को देखेगा, यह सब कुछ मुझे मीटिंग में तय करना है। सो तुम जाओ और फटाफट सरे डिजाइनर्सघ से डिजाइन कलेक्ट करके 1 घंटे के भीतर मेरे ऑफिस में पहुंच जाओ..!”
इतना कहकर रूबी मैडम वहां से निकल गई, और अनुराधा फटाफट काम निपटाने के लिए सारे डिजाइनर्स की टेबल की तरफ दौड़ लगाने लगी।
उसका सपना खुद एक डिजाइनर बनने का था, वह अपना खुद का बड़ा सा बुटीक और कपड़ों का शोरूम खोलना चाहती थी। लेकिन शुरुआत उसे यहीं से करनी थी। वह कई बार अपने डिजाइन किए हुए ड्रेस भी रूबी मैडम को दिखा चुकी थी, लेकिन वह बिना उसके डिजाइंस पर एक नजर भी डाले, उन्हें सीधे कूड़े में फेंक दिया करती थी। फिर भी पूरे धैर्य के साथ डिकी उस ऑफिस में काम कर रही थी कि किसी न किसी दिन रूबी मैडम की नजरे उसके काम पर भी पड़ेंगी और उसे भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा…।
वह फटाफट हर एक डिजाइनर के पास पहुंचकर रूबी मैडम की बात बताने लगी, लेकिन वहां कोई अपनी टेबल पर पड़ा ऊंघ रहा था, तो कोई लैपटॉप खोलकर पबजी खेल रहा था। दो लड़कियां अपने-अपने ससुराल की गॉसिप्स में लगी थी।
उन सबको फटाफट काम बता कर वह वापस रूबी मैडम के ऑफिस में पहुंच गई..
वहां पर उनकी टेबल को सही करने के बाद उसने वक्त देखा अभी माधव के आने में समय था। वह चाहती थी कि रूबी मैडम की मीटिंग निपट जाए और वह माधव तक जा सके…।
एक बार फिर वह सारे डिजाइनर तक दौड़ लगाने लगी लेकिन अब तक किसी का काम पूरा नहीं हुआ था। वह लौट कर अपनी टेबल पर चुपचाप बैठ गई उसे मालूम था कि इन डिजाइनर के आलस की सजा उसे भुगतनी पड़ेगी।
रूबी मैडम ने उसे काम दिया है, सबके पास से डिजाइंस कलेक्ट करने का, अगर वह सही समय पर डिजाइंस नहीं ले जा पाई तो डांट वह खायेगी। उसने कुछ खाली कागज निकाले और अपने दिमाग में चल रही बेहतरीन डिजाइंस को उन कागजों पर उतारने लगी।
उसने पल भर के लिए आंखें बंद की और अपनी शादी के कपड़ों को सोचने लगी। वह सोचने लगी कि वह अपनी खुद की हल्दी में, संगीत में, फेरों में, रिसेप्शन में, कैसा लहंगा पहनना चाहती है, और उसके बाद वह उन चित्रों को कागजों पर उतारने लगी…
वैक्स क्रेयॉन की सहायता से उन डिजाइनर लहंगो को रंगों में रंग कर अपने ही बनाए डिजाइंस पर मोहित होने लगी..
एक-एक कर उसने लगभग सात आठ अलग-अलग डिजाइंस तैयार कर लिए। उन्हें एक साथ लेकर आगे बढ़ी और रूबी मैडम की केबिन में जा पहुंची। अब तक रूबी मैडम वहां नहीं आई थी, उसने उन सारे कागजों को एक साथ क्लैंप किया और वह भी मैडम की टेबल पर सामने ही रख दिया।
एक बार फिर वह डिजाइनर्स के सामने उनके डिजाइंस की भीख मांगने के लिए खड़ी हुई थी। कभी-कभी उसे अपने इस काम पर खीझ भी होने लगती थी। सामने बैठे डिजाइनर उसे कुछ भी नहीं समझते थे। वह अपने घमंड में इतने चूर थे कि उन्हें किसी और की कला की कोई कदर ही नहीं थी। उन सब के लिए वह एक कॉलेज जाने वाली टुच्ची सी लड़की थी जो चंद पैसों के लिए यहां पार्ट टाइम नौकरी कर रही थी।
और इसीलिए वह सब अपने ईगो में अकड़े हुए उससे ढंग से बात भी नहीं करते थे। लेकिन फिर भी डिंकी में एक लगन थी, अपने आप को आगे बढ़ाने की लगन। अपने सपने को पूरा करने की लगन।
और उस लगन के लिए वह इन लोगों के खराब बर्ताव को भी नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाया करती थी। आज जब वह एक बार फिर उन डिजाइनर के पास पहुंची तो उनमें से कुछ लोगों ने तो अपने डिजाइन दे दिए, लेकिन उनमें से दो लोग इस वक्त बाहर कैंटीन में चाय पीने चले गए थे।
एक गहरी सी सांस भरकर डिंकी ने जितने लोगों से डिजाइंस इकट्ठा किए थे उन्हें एक साथ रखा और मैडम की केबिन की तरफ बढ़ गई।
वहां पहुंचकर उसने हर एक डिजाइनर की डिजाइंस को अलग-अलग पिन किया और रूबी मैडम की टेबल पर रख दिया।
उसने वक्त देखा रूबी मैडम के आने का समय होने लगा था। उसने उन्हें कॉल कर लिया।
इत्तेफाक से पहली ही रिंग पर रूबी मैडम ने कॉल उठा लिया।
” अनुराधा मुझे आने में वक्त लगेगा। एक लंच मीटिंग में उलझ गई हूं। मैं शाम पांच बजे तक ऑफिस पहुंच पाऊंगी। तब तक तुम सारे डिजाइंस मेरे टेबल पर इकट्ठे कर लेना।”
यह बोलकर उन्होंने फोन रख दिया लेकिन यह सुनकर अनुराधा के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई। उसने फटाफट उस टेबल को अरेंज किया और वहां से बाहर निकल गई। उसने एक नजर उन डिजाइनर की टेबल की तरफ डाली, जो चाय पीने बाहर गए हुए थे। वह लोग अब भी वापस नहीं आए थे। अपनी घड़ी पर नजर डालकर मुस्कुराते हुए डिंकी बाहर निकल गई।
माधव के भी चाय पर आने का समय हो चुका था। वह बाहर पहुंची, उसने चारों तरफ नजर दौङाई लेकिन माधव और उसका दोस्त वहां मौजूद नहीं थे। लेकिन वो दोनों डिजाइनर वहां बैठे खिलखिला रहे थे। दोनों के सामने टेबल पर चाय रखी थी और हाथों में सिगरेट। वह उन लोगों के पास पहुंच गई…
” भूषण सर, योगिता मैडम आप दोनों भी अपने डिजाइंस दे देते, तो मैं रूबी मैडम के केबिन में अरेंज कर देती..!”
उसके इतना कहते ही वह दोनों घूर कर उसे देखने लगे उन दोनों के ‘क्वालिटी टाइम’ के रसीले कबाब में वह हड्डी जो बन चुकी थी..।
“गेट आउट फ्रॉम हियर, हमें जब जो देना होगा डायरेक्ट रूबी को ही दे देंगे !”
“ओके सर, मैं आपकी ये बात उनसे कह देती हूँ !”
“शट अप यू इडियट.. हम लोग देख लेंगे कहा न..।
तुम जाओ यहाँ से !”
इस बार योगिता ने पूरी बदतमीजी से डिंकी का हाथ पकड़ कर उसे धक्का दे दिया..।
डिंकी ज़ोर से फर्श पर गिरती, लेकिन उसके पीछे खड़े माधव ने उसे संभाल लिया..
“एक्सक्यूज़ मी.. ये क्या हो रहा है यहाँ ?”
माधव के ऐसा पूछते ही उन दोनों ने उसे भी कुछ गलत कहने के लिए ज़बान खोली ही थी कि भूषण की नजर माधव पर पड़ गई।
माधव पीडब्ल्यूडी में काम करने वाला इंजीनियर था। जिसके पास फिलहाल भूषण का एक प्रोजेक्ट अटका पड़ा था।
जब तक माधव उस प्रोजेक्ट पर साइन नहीं कर देता वह आगे नहीं बढ़ना था।
भूषण अब तक दो बार माधव से मिलने की कोशिश कर चुका था। लेकिन इत्तेफाक से माधव उस दिन ऑफिस में अनुपस्थित था। एक बार दूर से ही माधव की झलक बस भूषण ने देखी थी, लेकिन यह चेहरा एक बार देखकर भूलने वालों में से नहीं था।
भूषण खुद कुछ देर तक उसे देखता रह गया था। कमबख्त फिल्मों में होता तो आज टॉप का नायक होता। मन ही मन यह सोचते हुए भूषण उस दिन पीडब्ल्यूडी ऑफिस से लौट आया था। लेकिन आज माधव को अपने सामने देख उसकी बांछे खिल गई। वह तुरंत अपने स्टूल से उठकर खड़ा हो गया।
“हैलो सर! मैं भूषण मलिक हूं। मेरा एक प्रोजेक्ट आपके ऑफिस में, आपके टेबल पर आपकी कृपादृष्टि की प्रतीक्षा में पड़ा ऊंघ रहा है!”
माधव ने भूषण की तरफ देखा और कुछ देर पहले का उसका बर्ताव याद आते ही माधव की माथे पर बल पड़ गए…
“कौन सा प्रोजेक्ट ?”
” बिबियापुर कोठी के पिछली तरफ जो सरकारी इमारत बन रही है, उसमें दुकानों के लिए टेंडर डालना था..
बस उसी के लिए आवेदन दिया हुआ है! अगर आप एक बार अवलोकन कर लेते तो, हमारा भी कुछ भला हो जाता!”
माधव ने बड़े ध्यान से उसे देखा और फिर उसके चेहरे पर तिरछी सी मुस्कान चली आई..
“आओ डिंकी !” उसने डिंकी के सामने अपनी चौड़ी हथेली फैला दी.. डिंकी ने अपनी पतली पतली उँगलियाँ धीरे से उसके हाथ पर रखी और उसने मजबूती से उस मरालदंड सी कमनीय कलाई को थाम लिया..
क्रमशः

प्यारी सी dinki इतनी मेहनत कर रही है। जरूर एक दिन वो कामयाब होगी एक बेहतरीन डिजाइनर बनेगी।
जिस माधव का इंतज़ार वो इतने देर से कर रही थी।आज उसने गिरने से बचाया ही नहीं बल्कि गिराने वाले को मज़ा भी चखाएंगे।
Nice part 👌👌👌👌
बेचारी डिंकी कितनी मेहनत कर रही है अपने सपने को पूरा करने के लिए और मुझे लग रहा है कि एक दिन वह बहुत बड़ी डिजाइनर भी बनेगी क्योंकि किसी की भी मेहनत और उसकी सच्ची लगन कभी भी खाली नहीं जाती हमेशा कभी ना कभी देर सवेर उसका फल उसे जरूर मिल जाता है।☺️☺️☺️☺️☺️
अब आया न ऊंट पहाड़ के नीचे कैसे उसे बेचारी डिकी को धक्का😡😡😡😡😡 दिया था अब माधव मजा चखाएगा इस भूषण मलिक को और डिकी की वैल्यू😊😊😊😊 भी बढ़ जाएगी उसके ऑफिस में अगर सबको पता चलेगा कि डिकी माधव की दोस्त है यह बिल्कुल सही समय पर माधव ने एंट्री ली है किसी हीरो की तरह मजा आ गया देखकर। 😍😍😍😍🥰🥰🥰🥰🥰🥰
Very nyc part 👌
Super
बहुत अच्छा भाग।मुझे पूरा विश्वास है कि रूबी को डिंकी के डिज़ाइन ही पसंद आयेंगे।👌🏻👌🏻👌🏻
Very beautiful
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫
Very nice part
अतिथि के अगले पार्ट का इंतजार है maam। जल्दी शेयर करिए pls।