
जीवनसाथी -3 भाग -121
” प्रिंस जरा पीछे पलट कर देखिए। “
विक्रम ने कहा और शौर्य जो अब तक उस भयंकर डिश के सदमे में था, विक्रम की बात सुनकर पीछे पलट गया। उसी वक्त कली की नजर भी शौर्य पर पड़ी, शौर्य अपनी जगह पर बैठा उसे देखता रह गया और कली भी अपनी जगह पर खड़ी रह गई..।
दोनों कुछ देर के लिए एक दूजे को देखते रहे और फिर कली ही उसकी तरफ बढ़ आयी..
“क्या हुआ ? कुछ परेशान लग रहे हो ?”
शौर्य के चेहरे से ही मालूम हो रहा था कि उसे वो डिश बिलकुल बेहूदा लगी थी, और उसे अब तक उस रोस्टेड कबूतर को याद कर उबकाई सी आ रही थी..
“आज विक्रम के चक्कर में एक पाप हो जाना था मुझसे !”
शौर्य की ये बात सुन विक्रम और कली एक दूसरे को देखने लगे
“पाप ?”, कली के मुंह से बेसाख्ता निकल पड़ा क्यूंकि पाप पुण्य का लेखाजोखा तो कभी शौर्य रखता ही नहीं था..
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कली को एकदम से इण्डिया में गुज़ारी वो शाम याद आ गयी जब वो और शौर्य उस रोड साइड कैफे में कॉफी पीकर निकले ही थे और दो छोटे बच्चो ने शौर्य के सामने हाथ फैला दिया था..
शौर्य की जेब उस वक्त खाली थी, और उस रोज़ पहली दफा अपने पास पैसे न होने के कारण वो तिलमिला गया था..
तब कली ने तुरंत अपनी वॉलेट से पैसे निकाल कर बच्चो की तरफ बढ़ाया था और शौर्य ने उसे टोक दिया..
“बहुत छोटे बच्चे हैँ, इन्हे रुपयों की नहीं बल्कि खाने की भूख है.. इन रुपयों से इनके लिए कुछ अच्छा सा खरीद कर दे दो.. और सुनो ऐसा कोई फैंसी खाना मत खरीदना जो ये लोग रोज़ नहीं खा सकते..!”
“मतलब ?”
भोली कली का चिप्स की तरफ बढ़ता हाथ रुक गया..
“इन्हे चिप्स और चॉकलेट्स की नहीं, हमारे पौष्टिक खाने की ज़रूरत है… !”
“लेकिन यहाँ कैफे में दाल चावल तो मिलेंगे नहीं !” कली ने कंधे उचका दिए
“हम्म… !” शौर्य ने कली के हाथ से रूपये ले लिए और साथ वाली दुकान की तरफ बढ़ गया। जहाँ से उसने ज़रूरी राशन और ब्रेड का एक पैकेट खरीद कर उन बच्चो के हाथ में पकड़ा दिया..
“इस तरह से किसी के सामने हाथ फैलाना अच्छी बात नहीं होती, ये तुम्हारे स्कूल जाने की उम्र है। भीख मांगने की नहीं ! स्कूल क्यों नहीं जाते ?”
“भैया पढाई करना अच्छा नहीं लगता !” बच्चे ने अपना ईमानदार जवाब दे दिया
“मुझे भी नहीं अच्छा लगता था, लेकिन मम्मी कभी प्यार से तो कभी मार के स्कूल ज़रूर भेज देती थी। और आज देखो इस लायक तो बन गया कि तुम लोगो की मदद कर पा रहा हूँ..।
तुम्हे भी ऐसा बनना है ना, कि कोई तुमसे मदद मांगे तो तुम मना करने की जगह उनका साथ दे सको, मदद कर सको और अगर ऐसा करना है तो उसके लिए पढाई करनी पड़ेगी.. ।”
“लेकिन भैया स्कूल के लिए यूनिफॉर्म.. किताबे बस्ता सब लगता है.. !” अबकी बार बच्ची ने कहा
शौर्य ने उसे घूर कर देखा..
“सरकारी स्कूल में मुफ्त शिक्षा के साथ साथ यूनिफॉर्म और बस्ता भी मुफ्त मिलता है..। किताब कॉपी पेन्सिल सब कुछ.. यहाँ तक की दोपहर का भोजन भी..।
हाँ ये हो सकता है की कहीं कम कहीं ज़्यादा मिलता होगा, लेकिन जितना भी मिल रहा कुछ नहीं से तो बेहतर ही है न..।
और अब कोई बहाना नहीं बनाना, वरना सीधे तुम्हारे घर पहुँच कर तुम्हारे माता पिता से बात करूँगा !”
“नहीं भैया.. हम ज़रूर पढाई करेंगे.. कल से हम सब स्कूल जायेंगे !”
“ज़रूर जाना.. तुम लोग स्कूल नहीं जाते और इसका हर्ज़ाना तुम्हारे टीचर्स को भुगतना पड़ता है..।
तुम्हारी टीचर्स घर घर आकर तुम लोगो को पढ़ने के लिए पकड़ कर लेकर जाती है न..?
उनकी मेहनत की कदर कर लिया करो..। वो कितने प्यार से, कितनी मेहनत से तुम सब को पढ़ाती है..।
अच्छा बताओ क्या आजतक कभी स्कूल नहीं गए ?
“जाते थे भैया, अभी दो चार महीने से ही नहीं जा रहे !”
“तुम्हारी सबसे पसंदीदा दीदी कौन सी है जो तुम्हे पढ़ाती है !”
“उपासना दीदी.. ! वो हम सब को बहुत प्यार करती हैँ, कभी कभी जलेबी भी खिलाती है !”
“हाँ तो आज से उन्हीं के लिए तुम लोगो को स्कूल जाना होगा.. जाओगे न ?”
“ज़रूर जायेंगे भैया !”
और वो बच्चे हँसते हुए वहाँ से चले गए..
“तो ये सब पुण्य कमाने के लिए किया जा रहा है ?” कली ने शौर्य से बव्च्चो के जाने के बाद पूछा
“क्या होता है पुण्य ? और क्या होता है पाप ! मैं ये सब कुछ नहीं मानता..।
जो है जैसा है यही जन्म है..।
हम जो अच्छे काम करते है, उससे हमे क्या मिलता है या क्या मिलेगा इस लालच में अगर हमने कोई अच्छाई की भी तो उसका क्या फायदा..?
मैं जब किसी की मदद करता हूँ कभी दिमाग में ये बात नहीं रहती कि उसके बदले मुझे भी कुछ अच्छा मिले..
अगर मेरी किस्मत में होगा तो मिलेगा वरना नहीं…
अपने लालच का सोच कर मैं कभी किसी के लिए कुछ नहीं करता !”
शौर्य की उस दिन की कही बात याद आते ही कली ध्यान से उसे देखने लगी..
किसी समय पाप पुण्य के बारे में थोड़ा भी न सोचने वाला शौर्य आज कैसे पाप पुण्य का लेखा जोखा कर रहा… यही कली के लिए अचरज की बात थी !
उसने आगे बढ़ कर शौर्य का हाथ थाम लिया..
“यहाँ से कहीं बाहर चलें ?”
शौर्य एकदम से मना नहीं कर पाया और विक्रम को साथ आने का इशारा कर वो बाहर निकल गया
कली उसे अपनी गाड़ी के पास ले आयी.. गाड़ी में से उसने एक डिब्बा निकाला और खोल कर शौर्य के सामने रख दिया..
“गाजर का हलुवा.. वाओ ! किसने बनाया तुमने ?” शौर्य ने हलुवा अपने मुहं में रख कर सुकून से आंखे मूँद ली..
शौर्य के सवाल पर कली अपनी दोनों बांहे आपस में लपेट कर उसे घूर कर देखने लगी..
“जैसे तुम्हे मेरी कुकिंग स्किल्स मालूम ही नहीं.. है न ?”
कली के सवाल को अनदेखा कर शौर्य अपने हलवे में मगन था.. मन भर कर खाने के बाद उसने डिब्बा विक्रम की तरफ बढ़ा दिया..
“तुम भी खा लो मित्र… ऐसा टेस्टी खाना कभी कभी ही मिलता है !”
राजमहल के शाही दस्तरखान पर बिछने वाले छप्पन भोग विक्रम की आँखों में तैर गए..
यहाँ भी शौर्य के फ़्लैट में पूरी व्यवस्था थी.. एक उड़िया महाराज पूरी रसोई की पलटन को संभालने के लिए थे, तो एक खानसामा भी था जो महल के देशी विदेशी मेहमानों की रूचि का विशेष ख्याल रखने के लिए थे..।
इनके अलावा एक इटेलियन शेफ भी प्रिंस की रसोई का चमकता सितारा था..
शौर्य जब जो खाने का इशारा भर कर दे वो व्यंजन उसके सामने मिनटों में पेश कर दिया जाता था..।
“क्या हुआ पसंद नहीं आया ?” शौर्य ने पूछा और विक्रम बौखला गया..
“नहीं… बहुत बहुत पसंद आया !”
वो चुपचाप खाने लगा..
उसने एक बार कली की तरफ देखा, कली भी उसी की तरफ देख रही थी जैसे पूछ रही हो कि इस शौर्य को हुआ क्या है ?
*****
हर्ष राजमहल आया हुआ था…..
मीठी शाम के वक्त महल पहुँच गयी.. उसने हर्ष को फ़ोन किया और हर्ष उससे मिलने नीचे उतर आया..
दोनों साथ में बगीचे में टहल रहे थे…
“चाय पिओगी.. मगवाऊं ?”
मीठी ने मना कर दिया..
“क्यों चाय नहीं पसंद ?”
“पसंद है, पर मैं बनाउंगी !”
“बिलकुल बना लो, ये किचन तुम्हारा ही तो है !”
हर्ष मुस्कुरा कर एक तरफ को हट कर खड़ा हो गया….
“आप यही रुकिए, मैं चाय बना कर लाती हूँ !”
“अच्छा जी.. मैं क्यों न चलूँ ?”
मीठी ने मुस्कुरा कर उसे वहीँ रुकने को कहा और आगे बढ़ गयी..
वो रसोई की तरफ बढ़ रही थी तभी एक कमरे से उसे कुछ जानी पहचानी सी आवाज़ सुनाई देने लगी..
उन आवाज़ों में उसे हर्ष का नाम सुनाई दिया और वो पल भर के लिए ठिठक कर रुक गयी.. .
उसके कानो में बुआ जी की स्पष्ट आवाज़ पड़ने लगी…
“हमने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी, लेकिन पता नहीं ये लड़की किस मिट्टी की बनी है, मान ही नहीं रही !”
“माँ साहेब आपको इन बातों में क्या रस मिल रहा है..? उस हर्षवर्धन की शादी से आपको और हमें क्या लेना देना ?”
“यही तो नहीं समझती तुम…
हर्षवर्धन इस रियासत का अगला होने वाला महाराज है.. उसे ही गद्दी पर बैठना है, और हम चाह्ते हैँ उसकी शादी हमारी पसंद की लड़की से हो..।
लेकिन वो उस लड़की से प्रेम करता है जो इस गद्दी में बैठने वाले महाराज की पत्नी बनने के योग्य कहीं से नहीं….
वो लड़की मीठी हमें बिलकुल भी पसंद नहीं और हम नहीं चाह्ते कि उसकी शादी हर्ष से हो !”
“तो इसी के लिए आपने इतना बड़ा झूठ रच दिया ? बाबाजी से भी सब झूठ बुलवाया ?”
“नहीं गुरु जी से झूठ बुलवा सके इतनी हममे ताकत नहीं है.. !”
“फिर आपने क्या किया माँ साहब, जो गुरूजी ने ऐसी भविष्यवाणी कर दी ?”..
“हमने एक दूसरे कुंडली ज्ञाता से हर्ष और मीठी की कुंडली में वांछित बदलाव करवा लिए थे..
इसलिए जब गुरूजी के सामने इन दोनों की कुंडली आयी तो उन्हें कुंडली में वही दिखा जो हम बुलवाना चाह्ते थे, इसलिए रूपा और बांसुरी को शक भी नहीं हुआ और हमारा काम भी बन गया !”
“इतना करने पर भी कहाँ आपका काम बना ? बात तो वहीँ की वही अटक गयी !”..
“अभी देखती जाओ, आगे आगे हम क्या करते हैँ ! इस सब के बाद भी अगर बड़ो का निर्णय मान लिया जाता तो हर्ष और मीठी की सगाई टूट ही जाती लेकिन वो जिद्दी लड़की अड़ गयी कि उसे हर्ष से ही शादी करनी है..
तो ठीक है अब भुगतने के लिए भी तैयार रहे वो !”
“मतलब… अब क्या करेंगी आप ?”
“बस तुम देखती जाओ, कि आगे हम क्या करते हैँ !”
बाहर खड़ी मीठी की आँखों के आगे तारे घूमने लगे.. उसके पांव कांपने लगे, आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा…
उसने दरवाज़े को पकड़ कर खुद को संभाला और अपनी आँखों में घुमड़ते आंसू रोकने का प्रयत्न करती हुई वहाँ से निकल गयी..
क्रमशः

राजा साहब कुछ भी कर सकते हैं अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए और अब जब की शौर्य की हरकतें समझ में नहीं आ रही है तो पक्की बात है कि यह लड़का शौर्य है ही नहीं शायद उसके भेष में कोई और है क्योंकि शौर्य का एक्सीडेंट हुआ था यह बात राजा जी से तो छुपी रहे नहीं सकती तो शायद इसी खातिर उन्होंने शोर की जगह पर किसी दूसरे को बैठा दिया है ताकि शौर्य को कोई नुकसान न पहुंचे तभी उसकी हरकतें बिल्कुल अलग है शौर्य से।
बुआ जी की हरकतों की वजह से ही सारी हुआ जात बदनाम हुई बैठी है इनकी ऐसी घटिया हरकतों के चलते तो मीठी कभी खुश नहीं रह पाएगी पर अब मीठी को यह बातें हर्ष को बता देनी चाहिए वरना यह घटिया बुआ जी कुछ भी करने पर उतारू हो सकती हैं।
अपनी चाल है कामयाब करने के लिए यह किसी भी हद तक जा सकती है इतना तो उनकी बातों से ही समझ में आ गया है और अब मीठी को और भी ज्यादा सचेत हो जाना चाहिए और हर्ष को भी इस बारे में सब कुछ डिटेल में बता देना चाहिए
Toh sab bua ji ki karni hai
😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍
Very nice part
Wow superb episode
Oh tou ye baat hai
Ye Rupa ki Phu saheb ye karna chahti hai
Or shourya ko kya hua hai
Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
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Very nyc part 👌
Bahut sundar
Nice story