अतिथि-14

अतिथि -14

एक भीना सा खुशबु का झोंका आया और उसे हल्के से सहला गया..।
अपने में खोया सा वो गाडी को स्टैण्ड से निकाल कर निकलने को था कि उसके सामने उसकी चाय का कुल्हड़ चला आया..

“अरे! मैं चाय तो भूल ही गया !”

गाड़ी खड़ी कर उसने पलट कर देखा, उसके सामने अपने दोनों हाथो में चाय लिए, वो खड़ी थी।

माधव चौंक कर रह गया..!

सामने डिंकी खड़ी थी !!

डिंकी ने एक चाय उसकी तरफ बढ़ा दी, और दूसरी खुद थामे रही..
वो भी उसकी बाइक के करीब आकर उससे टेक लगा कर खड़ी हो गयी..

“तुम यहाँ कैसे ?”

“पहले आप बताइये, आप यहाँ कैसे ?” जवाब के बदले डिंकी ने सवाल कर लिया !

“वो.. मैं तो… कुछ काम से.. “

उसकी बात अधूरी ही रह गयी और डिंकी बोलने लगी..

“छुट्टी वाले दिन ऑफिस में क्या काम पड़ गया आपको? सच बताइये, किसी से मिलने विलने तो नहीं आये ?”

माधव की जैसे चोरी पकड़ी गयी हो, ऐसे वो लजा गया। लेकिन अपनी झेंप मिटाने उसने कोई प्रयास नहीं किया..
और डिंकी वापस बोलने लगी।

“सुबह इतनी जल्दी सोकर उठी थी। फटाफट तैयार होकर पहुँच भी गयी, लेकिन बस छूट गयी !”

“अरे…! अच्छा हाँ तुमने बताया तो था, कि तुम्हे आज केंट जाना था ?”

“आपको याद था ?” मुस्कुरा कर डिंकी ने सवाल किया

“हम्म… अभी याद आया !”

“हाँ… सोच रही हूँ स्कूटी से निकल जाऊं ?”

“अरे नहीं… रास्ते में बहुत ट्रेफिक रहता है। स्कूटी में कहा जाओगी !”

“फिर ? क्या न जाऊं ?”  बड़ी मासूमियत से उसने पूछा और माधव के मुहं से बेसाख्ता निकल पड़ा।

‘”चलो मैं ले चलता हूँ !”

“सच्ची ? लेकिन आपका दिन भर लग जायेगा, और फिर मेरी कार्यशाला में आप करेंगे क्या ?”

“मैं इधर उधर घूम कर शॉपिंग कर लूंगा ! आओ चले !”

बोलने को बोल तो गया लेकिन वो खुद अपने दुस्साहस पर चकित था !
आज तक उसकी बाइक पर पीछे की सीट पर कोई लड़की नहीं बैठी थी, आज पहली बार डिंकी बैठने वाली थी..।

एक हल्की सी मुस्कान उसके होंठो पर आती आती रह गयी..।

माधव का मन एक अलग ही उत्साह से भर गया..
उसने डिंकी को साथ लिया और निकल पड़ा..
उसमे कभी नहीं सोचा था लखनऊ कि गालियाँ, यहाँ के रास्ते इतने सुंदर भी हो सकते हैँ।

आज हर एक चौक चौराहा उसे बड़ा प्यारा सा, अपना सा लग रहा था..।
वो गाड़ी बहुत सम्भल कर चला रहा था, खुद में मगन !
पीछे बैठी डिंकी ने बाइक को ही पकड़ा हुआ था..
दोनों चुपचाप चले जा रहे थे।

“आपको केंट का रास्ता पता है न ?”

“हम्म, बचपन में यहाँ अक्सर आया करता था न !”

“एक बात पूछूं? आप बचपन में अपने दादा दादी के पास क्यों रहते थे? मम्मी पापा की याद नहीं आती थी ?”

माधव ज़रा खामोश हो गया..
फिर कुछ सोच कर उसने बोलना शुरू किया…

“मैं बहुत छोटा था, जब माँ गुज़र गयी थी !”

“ओह्ह.. !” डिंकी के दिल को धक्का सा लगा।
     उसे एकदम से छोटे बालक माधव पर तरस आ गया। कैसे रहा होगा वो, अपनी माँ के बिना। वो तो कल्पना भी नहीं कर सकती, अपनी माँ के बिना अपने जीवन की।
एक बार उसकी मम्मी, नानी के घर दो दिन रुक गयी थी। नानी की ख़राब तबियत की वजह से।
   और जब दो दिन बाद वो लौटी, तो उनके गले लग कर वो सिसक उठी थी। उन्होंने प्यार से उसे झिड़की भी लगा दी थी।

“क्या हुआ था आंटी जी को ?” धीमे से उसने पूछा

“अच्छे से मुझे भी नहीं पता !” कह कर माधव चुप हो गया।
लेकिन तभी डिंकी को ख्याल आया कि वो अपनी मम्मी और पापा के बारे में बात तो करता है।

वो कुछ पूछती उसके पहले माधव बोल पड़ा..

“शायद माँ की तबियत सही नहीं रहती थी। और एक दिन अचानक वो हम सब को छोड़ कर चली गयी..
मैं तो बिलकुल ही खामोश हो गया था।
तब दादी ने पापा पर बहुत ज़ोर डाला कि मेरी देखभाल के लिए वो दूसरी शादी कर ले..
फिर पापा ने दूसरी शादी कर ली, और…..। “

माधव कहते कहते चुप हो गया..

“अच्छा… तो फिर.. !” डिंकी से रहा नहीं गया और उसने पूछ लिया..

लेकिन माधव कुछ कह नहीं पाया, डिंकी समझ गयी की ज़रूर विमाता ने माधव को बचपन में खूब सताया होगा, तभी बेचारा इतना शांत सा हो गया है !

लड़की चुप रह गयी..!
माधव के मन में बहती पीर डिंकी ने महसूस कर ली और उसका ह्रदय पिघल गया..

गाड़ी एक झटके के साथ रुक गयी..
वो दोनों केंट पहुँच गए थे।

“अरे हम तो पहुँच भी गए ?” डिंकी ने बाइक से उतर कर कहा

“यही है न कार्यशाला ?” माधव के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। जैसे वो रास्ते में हुई बातों की कड़वाहट भूल चुका था..

“हम्म… आप दो मिनट रुकेंगे, मैं एक बार देख कर आ जाती हूँ !”

गर्दन हिला कर माधव ने हामी भर दी..

डिंकी जिस जगह पर कार्यशाला होनी थी, उस तरफ चली गयी..
गेट पर खड़े गार्ड से डिंकी कुछ बातचीत करने लगी..

“मुझे देर हो गयी है, क्या मुझे एंट्री नहीं मिलेगी ?” डिंकी ने पूछा

“ऐसा कुछ नहीं है मैडम, आप अंदर चली जाइये..।वहाँ आपको एंट्रेंस पर बैठे दो लोग मिलेंगे जो आपका आईडी कार्ड और बाकी सारा मटीरियल आपको दे देंगे ! वहाँ से आप अंदर हॉल में चली जाइएगा.. !”

“हम्म !” कुछ सोच कर डिंकी ने उस गार्ड की तरफ देखा, मुस्कुरायी और वहाँ से बाहर चली आयी..

बाहर अपनी बाइक के पास खड़े माधव को उन लोगो की बातचीत सुनाई नहीं दे रही थी..

उसने डिंकी के वापस आते ही पूछ लिया

“क्या कहा उसने ?”

“अंदर जाने से मना कर रहा है। कह रहा है, एक निश्चित समय के बाद एंट्री नहीं दी जाएगी !”

“ओह्ह.. कुछ ट्राई कर के देखो..।
इतनी दूर से आयी हो, अगर कार्यशाला में जाने नहीं मिला तो बड़ी दिक़्क़त हो जाएगी ?”

“हाँ मूड तो मेरा भी ऑफ़ हो गया लेकिन कर भी क्या सकते हैँ ? मेरी बॉस बड़ी खड़ूस है, वो वैसे भी किसी की नहीं सुनती।
  लेकिन एक अच्छी बात ये है कि यही कार्यशाला नेक्स्ट मंथ फिर से होने वाली है। तो उसे अटेंड कर लूंगी!”

डिंकी ने मुस्कुरा कर कहा

“मैं एक बार जाकर बात करूँ क्या ?”
माधव को लगा डिंकी अपना दुःख छुपा कर मुस्कुरा रही है….

“अरे नहीं… ऐसी भी कोई बात नहीं..।
आप इतना परेशान मत हो ! मैं ठीक हूँ।
बस बहुत ज़ोर से भुख लगने लगी है… इस कार्यशाला के चक्कर में सुबह घर से भूखी ही भाग आयी थी  !”

“ओह्ह !” इधर उधर देखते हुए माधव ने कहा और एक तरफ इशारा कर दिया।

“चलो, वहाँ चल कर बैठते हैँ। कुछ अच्छा खाने को भी मिल जायेगा !”

दोनों उस तरफ बढ़ गए..
डिंकी ने ही दोनों के लिए नाश्ते का ऑर्डर दिया और अपने दोनों हाथ टेबल पर रख कर उस पर अपना चेहरा टिका कर बैठ गयी..

“आपसे एक बात पूछूं ?”

‘”हम्म.. !” माधव ने अपना मोबाइल एक बार खोल कर देखा और वापस टेबल पर रख दिया

“आप इसीलिए इतने शांत गंभीर से हैं क्या ?”

“किसलिए ?”

“मतलब, वो जो अभी आप बता रहे थे न..।
आपकी माँ नहीं रही और फिर आपकी स्टेप मॉम आ गयी..।
मैं समझ सकती हूँ, स्टेप मॉम कहाँ उतने अच्छे से ध्यान रखती रही होगी आपका..?
ज़रूर उन्होंने ही अंकल से कह कर आपको दादा दादी के पास भिजवा दिया होगा…।
जिससे उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में व्यवधान न हो.. कितनी ख़राब बात है छी..।
औरतें कैसे इतना गिर जाती है? ये भी नहीं सोच पाती, कि सामने वाला एक छोटा बच्चा ही तो है। उनका न भी हो तब भी..।
अच्छी तरह समझ सकती हूँ कि आपको कितना कुछ झेलना पड़ा होगा..।”

“कैसे समझ पा रही हो? मतलब बिना अनुभव के ?”

माधव की बात पर डिंकी उसे आंखे फाडे देखने लगी..

“फिल्मो में देखा है ना, कई सारे सीरियल्स में भी देखा है…  बस वहीँ से समझ आ गया..।
मैं भावुक भी बहुत हूँ !”

डिंकी ने चेहरे पर कुछ ऐसे भाव लाकर कहा कि माधव को हंसी आ गयी…
उसकी हंसी सुनते ही डिंकी चौंक कर उसकी तरफ देखने लगी..

क्रमशः



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Nisha
Nisha
1 year ago

Lagta hai dil ke taar uljh rahe hain aapas me 🥰🥰

कांति
कांति
1 year ago

Dinki को देखने के लालच में आए माधव का तो दिन ही बन गया जो dinki की बस छूट गई।
पर अचानक से इतनी हिम्मत आई कैसे जो dinki को साथ चलने को कह दिया शायद प्यार का एहसास।
बहुत सुंदर भाग 👏👏👏

Seema Srivastava
Seema Srivastava
1 year ago

Very nice

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Nice part

Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

हाय री किस्मत
पर इस बारे मे केदार जी ने किसी की कुछ भी नही बताया

माधव डिंकी को देखने आया तो डिंकी ने अपनी कार्यशाला ही छोड़ दी माधव के लिए

मतलब एहसास दोनो तरफ ही पैर पसार रहे है

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

पहले तो लगा कि शायद माधव कोई सपना देख रहा है जो डिकी उसके सामने खड़ी है पर बाद में समझ आया कि वह कोई सपना नहीं था जिनकी सच में उसके सामने खड़ी हुई थी चाय लेकर,उसकी बस जो छूट गई थी लगा ही था कि माधव उसे जरूर कार्यशाला तक छोड़ने की बात कहेगा और हुआ भी वैसा ही।😍😍😍
यह छोटा सा सफर बड़ा प्यारा साबित हुआ दोनों के लिए आज पता चला डिंकी को माधव के बारे में कि वह इतना सीधा शांत और सरल क्यों हो गया पर मुझे नहीं लग रहा है कि पिंकी ने जो अनुमान लगाया है माधव की मां के बारे में वह सही है क्योंकि अंत में बात कुछ और ही निकल कर आएगी ऐसा लग रहा है🙄🙄🙄🙄🙄

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

कोई इतना खूबसूरत..कोई इतना खूबसूरत..कोई…इतना…खूबसूरत कैसे हो सकता है 😊👌👌👌👏👏लाजबाब भाग 👌👌👌👌👌डिंकी और माधव की प्यारी सी बातचीत सुनने का मजा आ रहा है 👌👌👌👏👏👏।

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

Superb aprna ji बहुत ही अच्छा लगा ये भाग 👌🏻👌🏻 नए नए प्यार के सिर उठाते अंकुर कितने अच्छे लगते हैं ना एक दूसरे को एक झलक देख लेने के एक दूसरे के साथ समय व्यतीत करने के लिए तरह तरह के बहाने ,सब कुछ कितना प्यारा सा लगता है ना।❤️ आपकी कहानियों की ये विशेषता होती है कि कितना भी पढ़ लो पेट भरता ही नहीं है।अब राधा माधव से भी रिश्ता जुड़ सा गया है।

Sushma
Sushma
1 year ago

Vry nice part 👍👍👍👍