
जीवनसाथी -3 भाग -120
लेकिन यह वाला शौर्य कुछ अलग ही था। जरा तेजतर्रार, अपने आप को सबसे ऊपर समझने वाला, किसी को अपने सामने कुछ ना समझने वाला, पूरी दुनिया को खुद का गुलाम समझने वाला सनकी था ये..
इसकी बातें सुनकर विक्रम को कभी तो इस पर गुस्सा भी आने लगता था, लेकिन अगले ही पल कोई ना कोई ऐसा बिंदु आकर सामने खुल जाता था कि शौर्य का वही कड़वा व्यवहार कड़वी दवाई की तरह फायदेमंद लगने लगता था।
विक्रम ने अपने सर को झटका दिया और शौर्य के सामने बैठ गया। शौर्य ने मेनू कार्ड उठाकर विक्रम के सामने फेंक दिया।
” देखो क्या खाना है?”
विक्रम ने कार्ड बहुत सभ्यता के साथ खोलकर शौर्य के आगे रख दिया।
” प्रिंस मैं आपके सामने कुछ भी नहीं हूं। मेरी पसंद का खाना आप खाएं, यह आपको शोभा नहीं देता। आप जो भी ऑर्डर करेंगे, मैं उसी में से थोड़ा सा कुछ ले लूंगा।”
” मैंने तुमसे कितनी बार कहा है कि मुझसे ऐसी बातें मत किया करो। मुझे किसी बात के लिए ऑर्डर मत दिया करो।
मैंने कहा ना खाना तुम अपनी पसंद से मंगवाओगे। मैं उसी को खा लूंगा, और अगर अब मेरी बात नहीं सुनी तो मैं अपनी गन निकल कर तुम्हें शूट कर दूंगा।
तुम जानते हो ना मैं बहुत सनकी हूं।”
विक्रम अपनी हंसी दबाने की कोशिश करते हुए मेनू कार्ड के पन्ने पलटने लगा।
एक डिश देखने के बाद उसने उस डिश पर हाथ रखा और शौर्य की तरफ कार्ड को घुमा दिया। शौर्य अपने मोबाइल पर व्यस्त था, उसने एक झलक उस डिश को देखकर दो उंगलियां हिला कर ओके की मुद्रा बना दी..
विक्रम ने शौर्य की तरफ ध्यान से देखा,
” प्रिंस एक बार देख लीजिए कि यह डिश क्या है?”
” मुझे नहीं देखना, तुमने ऑर्डर कर दिया ना, मैं खा लूंगा!”
अपने मोबाइल पर उंगलियां चलाते शौर्य ने जवाब दे दिया।
विक्रम ने वेटर को बुलाकर उस डिश को ऑर्डर कर दिया। उस पकवान का नाम कुछ अलग भाषा में लिखा था, उसका वर्णन ज़रूर अंग्रेजी में था, लेकिन ऐसा कुछ खास समझ में नहीं आ रहा था !
विक्रम को अक्सर नयी नयी चीजे खाने के शौक था बस इसीलिए उसने ये ऑर्डर कर दिया !
कुछ देर बाद एक गोल चांदी की प्लेट में वेटर उस डिश को सजाकर वहां ले आया..
ऊपर से स्टील की गोल गुंबद नुमा ढक्कन लगी हुई थी। उस वेटर ने उस डिश को वहां लाकर रखने से पहले अपने साथी वेटर को बुला लिया। दो लड़कों ने पहले उस टेबल पर कुछ अलग सी जाली नुमा कपड़े की शीट जैसी बिछाई।
शौर्य और विक्रम दोनों उन लोगों की इस कलाबाजी को देख रहे थे। इसके बाद उनमें से एक लड़के ने एक तरफ एक कैंडल रखी और उसे जला दिया। वह कैंडल जलने से जल्दी ही वहां खुशबू की फुहारे छूटने लगी। उस कैंडल के बाद दूसरे वेटर ने दो छोटी-छोटी प्याली नुमा कटोरिया उन दोनों के सामने रख दी।
शौर्य ने एक बार घूर कर उस वेटर को देखा और विक्रम की तरफ देखने लगा।
विक्रम समझ गया कि शौर्य को बहुत जोरों की भूख लगी है और उसे यह सारी नौटंकी जरा भी पसंद नहीं आ रही।
इतने सारे ताम-झाम के बाद वेटर ने पहले उस डिश को पकड़े हुए ही झुक कर उन दोनों को नमस्कार किया और उसके बाद उस डिश को टेबल पर उस जाली नुमा कपड़े के ठीक बीचों बीच रख दिया।
अपने दोनों हाथों से और भी कलाबाजियां दिखाने के बाद उस वेटर ने कुछ दो-चार अजीबोगरीब बातें बोली।
विक्रम और शौर्य वापस उस वेटर को देखने लगे ।
शौर्य ने उसे घूर कर देखा
” अब तुम इस ढक्कन को हटाओगे या मैं खोल दूं?”
वेटर ने मुस्कुरा कर उस ढक्कन पर अपना हाथ रख आंखें बंद की और बिल्कुल इस अदा से उस ढक्कन को हटाया जैसे वह कोई जादूगर हो और अपने जादू के पिटारे से कोई अनोखी सी चीज निकाल कर लाया हो।
बिल्कुल उस जादूगर की तरह जो लोगों की भीड़ के बीच से कबूतर को गायब कर देता है, और फिर एक छोटे से बक्से से या रुमाल से उस कबूतर को बनाकर उड़ा देता है। कुछ ऐसे ही भावों के साथ उस वेटर ने उस भगोने के ढक्कन को खोल दिया।
सामने कबूतर की आकृति का रोस्ट किया हुआ कबूतर जैसा ही कुछ पड़ा था। उसे देखते ही शौर्य घबराकर अपनी जगह से जरा पीछे सरक गया। विक्रम भी फटी फटी आंखों से देखने लगा ।
विक्रम ने वेटर की तरफ देखा।
” यह क्या है?”
” सर आपने जो डिश ऑर्डर की थी, वह हमारे इस कैफे की सबसे ऑथेंटिक डिश है ।
यह डिश अट्ठारहवी शताब्दी की है, इसमें हम जिंदा कबूतर को पकड़ कर सीधे तंदूर में डाल देते हैं…।
यह डिश फ्रेंच रिवॉल्यूशन के समय की है।
उस समय जब सैनिकों को भूख लगती थी, तब वह इसी तरह अपना खाना बनाया करते थे। यह डिश बहुत टेस्टी है…. और….
वेटर अभी और भी कुछ-कुछ कहता उसके पहले ही शौर्य ने बहुत गंदा सा मुंह बनाकर गर्दन ना में हिलानी शुरू की और उस डिश को हटाने के लिए अपने हाथों से इशारा करने लगा..।
वेटर शौर्य के इशारे को बिना समझे ही उस डिश की तारीफ में कसीदे पढ़ रहा था, कि शौर्य चीख पड़ा
” प्लीज इस डिश को यहां से हटाओ, वरना मैं तुम्हारे होटल में उल्टी कर दूंगा। अगर अब मेरे सामने से यह डिश नहीं हटाई गई तो मैं इसी के ऊपर …
शौर्य लगभग चीख पड़ा और घबराकर विक्रम ने उस ढक्कन को उठाकर उस डिश के ऊपर रख दिया..।
“विक्रम तुम्हें नहीं पता कि मैं वेजिटेरियन हूं।”
शौर्य जोर से चीख पड़ा।
विक्रम बड़े आश्चर्य से शौर्य की तरफ देखने लगा। उसने वेटर्स को इशारा करके तुरंत टेबल साफ करने का हुक्म दिया और उसमें न्यू कार्ड से वेजीटेरियन डिशेज ढूंढने लगा..।
“लेकिन किसी जमाने में तो आपको नॉनवेज खाना बहुत पसंद था।”
विक्रम होठों ही होठों में गुनगुना उठा, लेकिन शौर्य का दिमाग उस डिश को देखकर इतनी बुरी तरह से खराब हो चुका था कि वह खिड़की से बाहर देखने लगा।
बाहर देखते-देखते वह स्वतः बड़बड़ाने लगा।
” कितनी हरियाली है चारों तरफ, खाने के लिए कितने खूबसूरत फल पौधे और अनाज दिए हैं भगवान ने। फिर भी इंसान जानवरों को मार कर खा जाता है.. ।”
शौर्य की बात सुनकर विक्रम सोच में डूब गया।
उसी समय बाहर से हसती खिलखिलाती एक टोली अंदर चली आई। जिस पर विक्रम की नजर पड़ गई।
चार पांच लड़के लड़कियां एक साथ रेस्टोरेंट में डिनर के लिए आ रहे थे, और उसमें सबसे पीछे शांत अपनी सोच में गुम चलती कली पर भी विक्रम की नजर पड़ गई।
” प्रिंस जरा पीछे पलट कर देखिए। “
विक्रम ने कहा और शौर्य जो अब तक उस भयंकर डिश के सदमे में था, विक्रम की बात सुनकर पीछे पलट गया। उसी वक्त कली की नजर भी शौर्य पर पड़ी, शौर्य अपनी जगह पर बैठा उसे देखता रह गया और कली भी अपनी जगह पर खड़ी रह गई..।
क्रमशः

Jeevansaathi season 3 part 124 daal do please
Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Jeewansaathi -3 bhag 121
Bahut lamba intzar kerwa rahi hain dr sahiba 121 bhag post kerne mein
Iska agal bhag kab post ker rahin hain Aparna ji kaafi lamba time ho gaya
शौर्य के मूड स्विंग्स देखकर मजा आ रही है।
अब शोर की हरकत से पता चल गया है कि वह शौर्य नहीं है वह कोई बहरूपिया है जो शोर की जगह आकर बैठा है शायद शोर की जान बचाने के इरादे से ही तभी उसकी हरकतें इतनी अजीब है पर पता नहीं यह है कौन जो भी है मुझे लग रहा है शौर्य का कोई हमशक्ल है जिसे उसकी जगह पर बिठाया गया है ताकि शोर को रिकवर होने में थोड़ा समय मिल जाए।
पर कहीं ऐसा ना हो कि इस वाले शहर की हरकतों की वजह से कभी के दिल में उसके लिए पनप रहा प्यार खत्म हो जाए या नाराजगी आ जाए जिससे इसका भुगतान असली वाले शौर्य को भुगतना पड़े।
कहीं यह सब किया धरा वासुकी का तो नहीं है ऐसा तो नहीं कि उसने ही यह वाला शौर्य सबके सामने लाया हो ताकि कली के साथ वह रूखा व्यवहार करें और फिर कली भी उससे नाराज होकर उससे दूर चली जाए
कैसा तेरा जलवा कैसा तेरा प्यार तेरा इमोशनल अत्याचार😩
Shaurya badal gaya hai
जानेमन आप भी कमाल करती हो 🤦नवरात्रो मे कबूतर…बना दिया वो भी तंदूर मे 😄,पर जो भी था मजा ही आ गया उस वेटर की करामात देखकर तो मेरी हंसी नहीं रुक रही थी 😄😄।
आयययय हायययय कली भी आ गई 💃💃💃।
Ab toh pakka ye shaurya nahi hai.hey mahadev kahan hai hamara prince 😱😱😱.l mam itna mat khun jalao hamara please warna ham raja sahab se aapki sikayat kar denge ki aapne hi unke bete ko badal diya