
जीवनसाथी -3 भाग -117
कॉफ़ी पीते हुए वो अपने सामने खुली रखी फाइल को पढ़ने लगा..
ये भदौरिया का भेजा हुआ बिज़नेस प्लान था, जो पिछले बीस दिन से इस टेबल पर पड़ा पड़ा ऊंघ रहा था..
इसे आज शौर्य ने खोला था !!..
शौर्य उसे बड़े ध्यान से पढ़ने लगा..
उसे पढ़ने के बाद शौर्य को लगा कि उसे और भी कुछ मालूम होना चाहिए, इसलिए उसने मैनेजर को बुलवाया और उससे पूछताछ करने लगा…
मैनेजर जितने सवालों के जवाब दे पाया, उतने देने के बाद उसने कुछ फाइल्स निकाल कर उसके सामने रख दी..।
“ये फाइल्स तो मैं देख लूंगा, लेकिन मैं ये जानना चाहता हूँ कि ये आदमी हमारे साथ काम क्यों करना चाहता है ?”
“वो आपके साथ जुड़ना चाहते हैँ प्रिंस !”
“ये बहुत ऑब्वियस सी बात है कि बुंदेलाज़ के साथ हर कोई जुड़ना चाहता है। ये नाम है ही इतना बड़ा, लेकिन हम क्यों उसके साथ जुड़े ? हमारा फायदा ?”
“प्रिंस ये फाइल कॉन्फिडेंशियल थी, सिर्फ आप या हर्ष सा ही पढ़ सकते हैँ, इसलिए.. !”
“इसलिए तुमने नहीं पढ़ी ?”
मैनेजर ने न में गर्दन हिला दी..
“हम्म.. ठीक है.. भदौरिया से एक मीटिंग फिक्स करो, तुरंत !”
“कल की डेट लूँ या परसो की ?”
“गधे हो क्या ? तुरंत मीटिंग बुलाने का मतलब तुरंत, अभी आधे घंटे के अंदर.. !”
“आप आधे घंटे में उसके ऑफिस पहुंच जायेंगे ?”
मैनेजर ने विक्रम की तरफ देख सवाल किया
“मैं कहीं नहीं जाऊंगा, भदौरिया हम से जुड़ना चाहता है, उसे यहाँ आने बोलो !”
शौर्य इतना बोल कर अपना मोबाइल खोल कर कुछ देखने लगा..
मैनेजर की आंखे फटी रह गयी.. जिस ढंग से शौर्य ने बोला था, वैसा भदौरिया इतना छोटा आदमी भी नहीं था..।
फ़िलहाल लंदन के व्यापारी संघ का वो एक मजबूत स्तम्भ था। उससे मिलने के लिए लोग महीने भार पहले से उसका अपॉइंटमेंट लेते थे.।
यह सच था कि शौर्य राजा साहब का बेटा था, और उनका अपना अलग ही एक रूतबा था। लेकिन भदौरिया भी कोई आम इंसान नहीं था।
उससे मिलने के लिए बहुत बार बड़े-बड़े नेता मंत्री भी उसका वक्त लेकर उसका इंतजार किया करते थे। भदौरिया के व्यक्तित्व का एक दूसरा पक्ष यह भी था कि वह अपनी काले धन को वहां की राजनीतिक पार्टियों के भरण पोषण में भी लगाया करता था।
इसलिए वहां के राजनेताओं का भी भदौरिया को पूरा पूरा सपोर्ट था।
इन सब वजहों से वो दिन दूंगी रात चौगुनी तरक्की करता हुआ फिलहाल व्यापार के उस ऊंचे पायदान पर पहुंच चुका था, जहां से नीचे देखने पर उसे आम लोग चीटियों की तरह नजर आने लगे थे।
इस सब के बावजूद भदौरिया मन ही मन वासुकी से जरा दबता था। भदौरिया जानता था कि वहां के व्यापारी वर्ग का एक बड़ा हिस्सा वासुकी को दिल से मानता था।
लंदन स्टॉक एक्सचेंज में भी वासुकी का काफी दखल था। एकदम से वासुकी के खिलाफ भदौरिया नहीं खड़ा हो सकता था… ।
यही हाल बुंदेला परिवार के साथ भी था.. ।।
उसने अपनी चालाकियों से वासुकी को अब तक अपने पाले में डाला हुआ था, उसने नहीं सोचा था कि उसके बिज़नेस प्लान को शौर्य इस तरह चुटकियों में उड़ा देगा और इसलिए उसने उसके पास अपना नया प्रोपोज़ल भेजा था..
पहले तो वो शौर्य को तकलीफ पहुंचा कर वापस इण्डिया भेज देने के मनसूबे बना रहा था, लेकिन फिर शौर्य की वापसी के साथ ही उसके तिकड़मी दिमाग ने नयी नयी चालें सोचनी शुरू कर दी थी..।
इन्हीं चालों का हिस्सा था उसका बिज़नेस प्रोपोज़ल जो फ़िलहाल पढ़ने के बाद शौर्य उससे तुरंत मिलना चाह रहा था..
मैनेजर शौर्य की बात सुन बाहर निकल गया, और भदौरिया के पीए को फ़ोन लगा कर उससे बात करने लगा..
भदौरिया के पीए ने जैसे ही उसे बताया कि शौर्य तुरंत उससे मिलना चाहता है, भदौरिया के माथे पर बल पड़ गए..
“तुरंत मिलना चाहता है ?”
“जी हाँ ! ” पीए ने डरते हुए ही ये बाए भदौरिया को बताई थी, क्यूंकि उसके सनकी स्वभाव से वो भी परिचित था..।
कई बार भदौरिया संयम की सीमा लाँघ जाता था। और भरी मीटिंग में कभी किसी पर, तो कभी किसी पर हाथ तक छोड़ देता था..।
ये पीए खुद दो तीन दफा ऐसे मौकों का शिकार हो चुका था। इसलिए उसे भदौरिया के गुस्से से डर ही लगता था..।
“ठीक है ओके बोल दो.. हम लोग निकलते हैँ !”
पीए आंखे फाडे भदौरिया को देखता रह गया..
उधर मैनेजर ने जैसे ही ये सुना कि भदौरिया आने को तैयार है, वो तुरंत शौर्य के केबिन में दाखिल हो गया ..
मुस्कुरा और जरा झुक कर बड़े अदब से उसने शौर्य को देखा..
“भदौरिया सर अपने ऑफिस से निकल गए हैँ.. वो बस आधे घंटे में यहाँ पहुँच जायेंगे !”
शौर्य के चेहरे पर एक तीखी सी मुस्कान आ गयी…
“गुड… देखा विक्रम कुछ भी असम्भव नहीं है। बस हम डर के कारण कदम आगे नहीं बढ़ाते ! मैंने अगर उसे नही बुलाया होता तो तुम लोग मुझे उसके पास भेज देते..।
है की नहीं.. ? क्या नाम है तुम्हारा ?”
शौर्य ने मैनेजर की तरफ देख कर पूछा..
“रॉय गौरव रॉय !”
“अरे वाह,, नाम तो बढ़िया है। हाँ तो रॉय बाबू कितना वक्त लेंगे आपके भदौरिया जी ?”
“प्रिंस उन्हें आधा घंटा लग ही जायेगा, उनका ऑफिस यहाँ से दूर है, फिर ट्रैफिक भी तो होगा !”
“हम्म.. मतलब काफी वक्त है हमारे पास..।
तो मिस्टर रॉय आप मीटिंग की तैयारियां कीजिये, मैं ज़रा शॉपिंग कर के आता हूँ.. !”
शौर्य अपनी जगह पर खड़ा हो गया और विक्रम और मैनेजर की ऑंखें आश्चर्य से बाहर निकल आने को आतुर हो गयी..
“प्रिंस लेकिन.. !” विक्रम ने बोलने की कोशिश की लेकिन शौर्य को किस की सुनना था, वो एक झटके में अपने केबिन से बाहर था….
विक्रम भी उसके पीछे भागता हुआ सा बाहर निकल आया..
वो भाग कर उसकी गाडी ले आया.।
गाड़ी का पिछला दरवाज़ा खोलते हुए भी विक्रम ने शौर्य को एक आखिरी बार समझाने की कोशिश की..
“प्रिंस! भदौरिया यहाँ आ जायेगा और हम लोग शॉपिंग पे रहेंगे ये अच्छा नहीं लगेगा..।
हमे अभी नहीं जाना चाहिए.. हम उसके लौटने के बाद भी तो जा सकते हैँ !”
“तुमने मेरे कपड़े देखे.. क्या इन कपड़ो में मैं मीटिंग अटेंड करूँगा.. ?
जानते हो न किसका बेटा हूँ मैं..?
मेरा अपना भी एक ऑरा है, पर्सनैलिटी है..।
और तुम चाह्ते हो मैं किसी भी ऐसे वैसे के लिए अपनी शॉपिंग छोड़ दूँ ?” शौर्य ने चीख कर कहा
“नहीं मेरा मतलब था, हम बाद में भी तो जा सकते हैँ !?”
“बॉस तुम हो या मैं ? “
“हिज हाइनेस… आप ही बॉस हैं !”
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“तो फिर ऑर्डर कौन देगा, तुम या मैं ?”
विक्रम चुप खड़ा रह गया..
“मैं माफ़ी चाहता हूँ… लेकिन.. !”
“अब अगर एक और शब्द मुझे रोकने के लिए कहा, तो मैं तुम्हे शूट कर दूंगा !”
इतना कह कर शौर्य गाडी में बैठ गया और उसने तेज़ी से दरवाज़ा बंद कर दिया..
विक्रम भाग कर सामने की तरफ आया और ड्राइविंग सीट पर बैठ कर गाडी उसने शॉपिंग मॉल की तरफ बढ़ा दी…।
मॉल में शॉप के अंदर जितने कर्मचारी थे सब भाग भाग कर शौर्य के लिए सभी लेटेस्ट डिज़ाइन के टक्सिडो और ब्लेज़र्स ला ला कर दिखाने लगे..
शौर्य ध्यान से एक एक को देख रहा था…
उसने पलट कर विक्रम की तरफ नजर घुमाई..
“मुझ पर कौन सा अच्छा दिखेगा.. बताओ ?”
“आप पर तो हर रंग सूट करता है !”
“हम्म… इनमें से कौन सा अच्छा दिख रहा ये बताओ ?”
विक्रम ने एक मेहरून और एक गहरे काई रंग की ब्लेजर अलग कर दी..
“ओके.. ! इन दोनों को हटा कर अलग रख दो.. !”
इसके बाद एक बार फिर शौर्य यहाँ से वहाँ नजर दौड़ने लगा.. उसे कोई रंग पसंद ही नहीं आ रहा था..
बहुत जद्दोजहद के बाद शौर्य ने लगभग सात आठ कपड़े अलग करवा लिए..
इसी बीचे दो बार मैनेजर का फ़ोन आ गया कि भदौरिया आ चुका है..
विक्रम ने पहली बार में शौर्य को नहीं बताया बस उसे थोड़ा जल्दी करने की गुज़ारिश कर दी।
लेकिन अगली बार उसे शौर्य को बताना ही पड़ा।
विक्रम ने सारे कपड़े अलग करके रखे और शौर्य की तरफ देखने लगा।
” प्रिंस यह तो सारे एक जैसे काले रंग के ही हैं ,और कोई दूसरा रंग नहीं पसंद है आपको ?”
शौर्य ने विक्रम की तरफ घूर कर देखा और अपनी जेब से कार्ड निकाल कर बिलिंग काउंटर पर रख दिया। बिलिंग होने के बाद सारे कपड़े शॉप के एक लड़के ने पकड़े और बाहर गाड़ी तक छोड़ने निकलने लगा..
“रहने दो, विक्रम पकड़ लेगा.. !”
शौर्य ने विक्रम की तरफ देखा, विक्रम ने हामी भारी और सारे बैग्स पकड़ लिए..
एक बार फिर मैनेजर का फ़ोन घनघना उठा..
विक्रम के हाथ में बैग्स थे, उसने जैसे तैसे फ़ोन उठाया और मैनेजर उस पर लगभग चीख उठा..
“तुम लोग दस मिनट में नहीं पहुंचे, तो ये सनकी यहाँ से चला जायेगा..।”
मैनेजर की आवाज़ तेज़ थी बाहर शौर्य को भी सुनाई दे गयी…
शौर्य ने गर्दन झटक दी और आगे बढ़ गया…
विक्रम गाडी को भागने लगा..
शौर्य ने इधर उधर देखा और एक केक शॉप पर गाड़ी को रुकवा दिया..
विक्रम घबराया हुआ था, उसे लग रहा था जितनी जल्दी हो सके ऑफिस पहुंचना चाहिए।
उसे शौर्य की यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आ रही थी। लेकिन वो शौर्य की बात काट नहीं सकता था…
इसलिए मन मार कर केक शॉप पर गाड़ी रोक दी उसने..
“जाओ एक अच्छे से फ्लेवर का केक ले आओ!”
“कौन सा फ्लेवर ?”
“अब ये भी मैं बताऊँ..? खुद का दिमाग लगाओगे या नहीं ?” शौर्य चीख उठा और विक्रम एक झटके में गाड़ी से निकल कर शॉप के अंदर चला गया….
केक लेकर वो दोनों ऑफिस पहुँच गए..
शॉपिंग वाला सारा सामान तो शौर्य ने गाड़ी में ही छुड़वा दिया, लेकिन केक विक्रम को साथ लाने बोल दिया..
कुछ देर बाद वो भदौरिया के सामने था..
“आशा करता हूँ आपको मेरे ऑफिस में कोई दिक़्क़त नहीं हुई होगी.. मिस्टर रॉय कॉफी पिलवाई या नहीं भदौरिया जी को !”
“जी सर.. आई मीन हाँ प्रिंस !”
“हम्म.. भदौरिया जी मीटिंग शुरु करने के पहले ज़रा पांच मिनट देंगे ?”
“तुम पहले ही मेरा आधा घंटा बर्बाद कर चुके हो !”
” कौन सा आज आपका यमराज से अपॉइंटमेंट है जो इतनी हड़बड़ी में हैँ ! सिर्फ पांच मिनट में कुछ नहीं हो जायेगा !”
शौर्य ने मैनेजर के कान में कुछ कहा और मैनेजर कुछ देर में ही केक लेकर उस कमरे में चला आया..
ऑफिस के उस फ्लोर में मौजूद कर्मचरितों को भी बुला लिया गया..
सब एक दूसरे की तरफ देख रहे थे कि आखिर क्या माजरा है, की तभी शौर्य ने सबको सम्बोधित कर बोलना शुरू किया..
.क्रमशः

शौर्य का ये रूप डरा रहा है हमें 😱😱कहीं उसे पता तो नहीं चल गया कि उसका एक्सीडेंट भदौरिया ने करवाया था और ये सब इसीलिए नाटक कर रहा है वो🙄🙄
Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
आज शौर्य को हो क्या गया है वह विक्रम से तो ऐसी अभद्रता से कभी पेश नहीं आया विक्रम को भी बड़ा अजीब लग रहा होगा क्योंकि भले ही वह प्रिंस है पर विनम्रता भी उसके खून में उसके परिवार यानी कि उसके मां-बाप की दी हुई है राजा साहब इतने बड़े आदमी होने के बाद भी कभी अभद्रता करते नहीं दिखे।
कठिन से स्थिति में भी उन्होने संयम से काम लिया है और कुछ कुछ वैसा ही शौर्य भी है पर आज और की हरकतें देखकर लग नहीं रहा कि यह सच में ही शौर्य है पता नहीं यह कौन है और कहां से बीच में आ गया है
डॉक्टरनी…….😯ये क्या हो रहा है यार 🤔।
जो भी है शौर्य का ये रूप मस्त है उस कुत्ते भदौरिया की ऐसी की तैसी।
केक किसके लिए लिया 🤔हैं….🤔।
🥺🥺🥺🥺
क्या करने वाला है शौर्य
क्यो सबकी धड़कने अटकाई हुई है शौर्य ने
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍🤔🤔
Good
Ye kya ho raha h .ye shorya h bi ya nahi
Very nyc part 👌