
जीवनसाथी -3 भाग -116
विक्रम ने कली की तरफ देखा..
“आइये आपको घर छोड़ दूँ !”..
कली के चेहरे की मुस्कान चली गयी
“नहीं… मैं चली जाउंगी.. !”
वो अपना बैग उठाये वहाँ से भारी कदमो से घर के लिए निकल गयी…
उसका यहाँ तक पहुँचने का सारा उत्साह उड़ गया था.. टैक्सी लेकर वो जैसे तैसे घर पहुंची..
घर पहुँचते ही अपने कमरे में पहुँच कर अपने बिस्तर पर वो कटे पेड़ सी ढह गयी..।
अब तक बड़ी मुश्किल से रोक रखें आंसू कमरे का एकांत देख बह चले..।
उसका रोना जो शुरू हुआ तो उसकी हिचकी बंध गयी लेकिन आंसू नहीं रुके… उसे खुद समझ नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है..।
आज तो उसे खुश होना चाहिए था, वो इतने दिनों से जिस बात का इंतज़ार कर रही थी, आज वो हो गया था.. उसे अंगूठी पहना कर शौर्य ने उसे प्रपोज़ किया था।
लेकिन ये कैसा प्रपोजल था उसका, जिसमे कहीं प्यार नजर ही नहीं आया…।
हो सकता है उसका एक्सीडेंट बहुत भयानक रहा हो..।
हाँ यही होगा, एक्सीडेंट के बाद शरीर के साथ साथ दिमाग पर भी तो असर होता ही है..।
लेकिन इतना असर?
उसका स्वभाव ही बदल गया..
सोचते सोचते उसके सर में दर्द हो गया …
सारिका उसे दो तीन बार खाने के लिए बुलाने आयी लेकिन आज उसका कुछ खाने का मन ही नहीं था.. बीच बीच में वो अपनी ऊँगली में पहन रखी अंगूठी को ज़रूर देख लेती थी, लेकिन जो अपनापन उसे इस अंगूठी में दिखना था, महसूस होना था, वो नहीं हो रहा था..
वो चाह कर भी इन पलों को उतनी ख़ुशी से जी नहीं पा रही थी, जैसे जीना चाहती थी..
दिल के किसी कोने में एक कसक सी उठ रही थी.. एक मलाल सा था कि आज शौर्य से मिलने क्यों चली गयी.. ?
शायद शौर्य को अभी और वक्त चाहिए, अपने एक्सीडेंट से रिकवर होने में…।
उसने हड़बड़ी में गलत दिन चुन लिया।
उसे थोड़ा और वक्त देना था शौर्य को, लेकिन वो भी कहाँ जानती थी कि वो किसी दुर्घटना का शिकार हुआ था…
उसे आश्चर्य खुद पर भी हो रहा था कि, कैसे इतनी बड़ी दुर्घटना की बात सुनने के बाद भी वो समान्य रह पायी, क्यों वो तड़प कर शौर्य के सीने से नहीं लगी ?
बहुत देर तक बालकनी में खड़ी खड़ी वो यही सब सोचती रही और फिर थक कर सो गयी !!
सुबह उसकी नींद खुली तो, सर ऐसा भारी हो रहा था जैसे सर पर किसी ने मन भर का पत्थर बाँध रखा हो ।
अपने सर को दोनों हाथों से दबाती हुई वह नीचे उतर आई.. रसोई में सारिका कुछ बना रही थी।
“डैडा आ गए सरु ?”
कली को जाने क्यों वासुकी की बहुत याद आ रही थी..
सारिका ने ना में गर्दन हिलाई और उसे देखकर चिंता भरे शब्दों में पूछ बैठी
“क्या हुआ कली, तबीयत ठीक नहीं है ?”
“हां सर में बहुत दर्द है, सरु एक कप कॉफी मिलेगी ?”
“हाँ बेटा क्यों नहीं.. !”
सारिका ने फटाफट ब्लैक कॉफी बना कर कली को थमा दी….
कली अपनी कॉफी लेकर बाहर बगीचे में चली आयी.. हरे भरे पौधों के बीच वो अपना कल का तनाव भुला देना चाहती थी..
उसने बगीचे में एक तरफ बने झरने की तरफ कदम बढ़ा दिए… ।
****
बुंदेला असोसिएट्स के ऑफिस में सुबह का समय सबसे ज्यादा खुशनुमा होता था..।
ऑफिस के हेड, दोपहर बाद तक आते थे।
इसलिए स्टाफ भी कभी नौ, कभी दस, तो कभी ग्यारह बजे तक भी आते थे..।
हालाँकि ज्यादातर स्टाफ ईमानदार था और काम पूरी ईमानदारी से करता था, लेकिन ऑफिस आने जाने का अनुशासन वहाँ नहीं नजर आता था..।
शौर्य आज बड़े दिन बाद ऑफिस आ रहा था..
वो लिफ़्ट में दाखिल हो गया, उसके साथ ही विक्रम भी चला आया..।
विक्रम शौर्य के बाजू में खड़ा था।
शौर्य ने पलट कर उसकी तरफ देखा और उसकी एक भौंह ऊपर उठ गयी , चेहरे पर हिराकत वाले भाव चले आये..
उसने दो उँगलियाँ उठा कर उसे पीछे सरकने का इशारा कर दिया..।
विक्रम सर झुका कर पीछे सरक गया..
लिफ़्ट जैसे ही रुकी, शौर्य तेज़ कदमो से बाहर निकल गया..
ऑफिस के अंदर उसके दाखिल होते ही वहाँ मौजूद स्टाफ एक दूसरे को देखने लगा..
ऑफिस हॉल के ज्यादातर क्यूबिकल खाली थे..।
शौर्य ने एक नजर सब तरफ दौड़ाई और पीछे पलट कर विक्रम की तरफ देख कर आगे बढ़ने का इशारा कर दिया..
विक्रम आगे बढ़ कर शौर्य के केबिन की तरफ बढ़ गया.. आगे जाकर उसने शौर्य का केबिन खोल दिया।
तेज़ कदमो से चलता हुआ शौर्य अपने कमरे में दाखिल हो गया…।
अपनी कुर्सी पर बैठ कर शौर्य ने रिवॉल्विंग चेयर को इधर से उधर घुमाया और हलके से मुस्कुरा उठा..
सामने विक्रम खड़ा था, वो शौर्य को ही देख रहा था..
शौर्य का ध्यान विक्रम पर चला गया..
“बाहर इतने कम लोग क्यों नजर आ रहे ?”
“अब तक सारा स्टाफ आया नहीं था, लेकिन मैनेजर सबको इन्फॉर्म कर रहे हैँ लिटिल मास्टर !”
“लिटिल मास्टर ? व्हाट रबिश, मैं प्रिंस हूँ, लिटिल मास्टर नहीं.. तुम मुझे प्रिंस बुला सकते हो !”
विक्रम ने बड़े आश्चर्य से शौर्य को देखा..
“ओके प्रिंस, जैसा आप चाहे !”
“अच्छा सुनो.. कॉफी मंगवा दो !”
विक्रम ने शौर्य के लिए कॉफी ऑर्डर कर दी.. कुछ देर में एक लड़की कॉफी लिए वहाँ चली आयी..
“सर ये आपकी कॉफी !”
उसने कॉफी टेबल पर रख दी.. शौर्य किसी फाइल पर नजर गड़ाए बैठा था, उसने कॉफी का प्याला उठा कर मुहं से लगा लिया..
कॉफी पीते ही उसने थूक दी और चीख उठा….
“किसने बनायीं है ये ज़हर कॉफी.. छि, पूरे मुहं का स्वाद बिगाड़ दिया..।”
विक्रम ने कॉफी देखी और शौर्य की तरफ देखने लगा..
“क्या हुआ तुम मुझे क्यों घूर रहे हो?”
“प्रिंस आपको तो ब्लैक कॉफी बहुत पसंद है.. आज क्या हुआ.. ? कुछ टेस्ट ख़राब लग रहा क्या ?”
“ख़राब ? पूरी जहर है ये.. !”
और शौर्य ने वो कॉफी फ़ेंक दी..
शौर्य के इस बदले हुए से व्यवहार से विक्रम भी अचरज में था..
“सॉरी.. मैं दूसरी लेकर आता हूँ, लेकिन आप जरा बता दीजिये कैसी कॉफी चाहिए आपको ?”
“कॉफी कैसी होती है ये भी बताना पड़ेगा.. इस कॉफी में गर्म पानी और कॉफी के अलावा कुछ नहीं है..।
अरे दूध तो डालो और चीनी, तब बनेगी न कॉफी !”
“जी अच्छी बात है !” विक्रम सर झुकाये बाहर निकल गया..
कांच के बाहर ही मैनेजर खड़ा था, जो अंदर चल रहा तमाशा देख पा रहा था..
उसने अब तक बाक़ी इम्पलॉईस को फ़ोन कर दिया था, और एक एक कर के लोग आने लगे थे..
“क्या हो गया है लिटिल मास्टर इतने गुस्से में क्यों हैँ ?”
मैनेजर के सवाल पर विक्रम ने उसकी तरफ देखा..
“लिटिल मास्टर नहीं प्रिंस बोलने की आदत डाल लो !”
“हम्म.. क्या ?” मैनेजर ने अपने चश्मे को सही करते हुए पूछा और कुछ नहीं बोल कर विक्रम खुद कॉफ़ी बनाने चला गया…
शौर्य अपनी जगह से उठ कर इधर उधर टहलते हुए किसी फाइल को बड़े ध्यान से पढ़ रहा था..।
तभी उसकी नजर बाहर खड़े मैनेजर पर पड़ गयी.. मैनेजर उसे देख मुस्कुरा उठा, वो वैसे भी बड़ा चापलूस व्यक्ति था…
शौर्य ने उसे इशारे से अंदर बुला लिया..
वो हँसते हुआ अंदर चला आया, आते ही उसने शौर्य का झुक कर अभिवादन किया
“क्या वक्त है तुम्हारे एम्पलॉईस के आने का ?”
“लिटिल मास्टर, वो जरा आज लेट हो गए !”
शौर्य ने एक भौंह ऊपर चढ़ा कर उसे घूर कर देखा..
“सारे एम्पलॉईस की अटेंडेंस रजिस्टर लेकर आओ !”
“अभी ?”
“फिर कब… जाओ !” शौर्य चीख पड़ा और “ओके लिटिल मास्टर” बोल कर वो बाहर की तरफ भागा..
उसके पीछे शौर्य भी बाहर चला आया..
अपने हाथ में रजिस्टर लेकर वो एक एक का नाम पुकार कर अटेंडेंस लेने लगा..
लेकिन कुछ ही एम्पलॉईस आये हुए थे, कुछ आ रहे थे और कुछ अब तक नहीं आये थे..।
मैनेजर से लाल पेन लेकर शौर्य ने अनुपस्थित लोगो के में लाल टिक मार्क बना दिया।
यहाँ तक कि जो लोग अभी पहुँच रहे थे, उनके भी सामने आधे दिन की छुट्टी का निशान बना दिया..
“लिटिल मास्टर ये सब.. !” मैनेजर ने धीमे से अपनी बात रखनी चाही और शौर्य उस पर चीख उठा.
“आई एम अ प्रिंस.. मैं कोई लिटिल मास्टर नहीं हूँ ! मेरे पास खूब रुपया है, चाहूँ तो पूरे लंदन को खरीद सकता हूँ.. जानते हो न, किसका बेटा हूँ मैं !”..
मैनेजर ने धीरे से शौर्य की तरफ देखा, शौर्य की आंखे गुस्से से जल रही थी..
“जाओ एक अच्छी सी मीठी कॉफी लेकर आओ, दूध वाली !”
“मैं ?” मैनेजर ने सवाल किया, क्यूंकि कॉफ़ी लेकर आना उसके पद की गरिमा के ख़िलाफ़ था..
“क्यों? तुम क्यों नहीं ला सकते ?,ओह्ह अच्छा, तुम्हे ये छोटा काम लग रहा है क्यों ? है न ?”
मैनेजर ने कुछ नहीं कहा तभी शौर्य ने अपने हाथ में पकड़ रखी पैन गिरा दी..
“ज़रा उठा कर दोगे ?”
मैनेजर ने पैन देखी और उठाने के किये झुका ही था कि शौर्य ने उसे टोक दिया
“मेरे जूते पर कुछ गिर गया है, ज़रा साफ़ कर दोगे !”
मैनेजर ने सर उठा कर शौर्य की तरफ देखा, और शौर्य ज़ोर से हंस पड़ा..
“उठ जाओ, मैं मजाक कर रहा था !” शौर्य ने अपना पैर अपनी तरफ खींच लिया, मैनेजर ने पैन उठा कर शौर्य की तरफ बढ़ा दी, लेकिन शौर्य वापस हंसने लगा..
“हंसो.. तुम भी हंसो, क्यूंकि तुम्हारा बॉस हंस रहा है !”
मैनेजर हंस नहीं पाया और शौर्य उसे देख कर वापस आदेश देने लगा..
“मैंने कहा न हंसो.. मतलब हंसो.. सब लोग हंसो !” उसने बाक़ी सबकी तरफ देख कर आदेश सा दिया और सब हंसने लगे..
लेकिन सबके दिमाग में यही चल रहा था कि शौर्य को आज हो क्या गया है..
शौर्य वापस अपने केबिन में चला गया। उसी के पीछे विक्रम भी चला गया..
वहाँ पहुँचते ही विक्रम ने उसकी तरफ कॉफ़ी का कप बढ़ा दिया.. पहली घूंट पीकर शौर्य ने घबराये से खड़े विक्रम की तरफ देखा..
“हम्म अब सही बनी है ! तुम भी पीकर देखना, ये होती है असली कॉफ़ी !”
कॉफ़ी पीते हुए वो अपने सामने खुली रखी फाइल को पढ़ने लगा..
ये भदौरिया का भेजा हुआ बिज़नेस प्लान था, जो पिछले बीस दिन से इस टेबल पर पड़ा पड़ा ऊंघ रहा था..
इसे आज शौर्य ने खोला था !!..
क्रमशः

ये कहीं कोई बहुरूपिया तो नहीं या राजकुमार जी के किसी प्लान का हिस्सा है देखते हैं,,,
Satte pe Satta ki tarah shourya ka duplicate aa gya h kya?? Bahut bura behaviour tha.
आज तो पक्का यकीन हो गया क्या यह शौर्य नहीं है शोर इतनी अजीब सी हरकतें नहीं करता उसकी एकदम से आदत है कैसे बदल सकती हैं पर शौर्य जैसा ही दिखने वाला हूं व हु उसके जैसा इंसान अचानक से कहां से आ सकता है।
और विक्रम को भी इस बारे में कोई अंदाजा नहीं है मुझे लगता है कि शौर्य का एक्सीडेंट हुआ ही नहीं था किसी और को शोर की गाड़ी में बैठ कर एक्सीडेंट हुआ था और शायद यह सब शोर्य के पिता राजा साहब ने ही किया हो वह भले ही कहीं भी रहते हो पर उन्हें अपने बेटे की सबसे ज्यादा चिंता रहती हूं और शायद इसीलिए उन्होंने शौर्य को समय पर बदल दिया हो ।
होने को तो डॉक्टर साहिबा हमारी कुछ भी कर सकती हैं हम तो बस कयास ही लगा सकते हैं।🙏🏻🙏🏻🙏🏻😊😊😊
🤷♀️ये अपना शौर्य है भी या नहीं 🤔यही सोचते सोचते ये भाग भी पढ़ लिया पर दिमाग़ वहीं अटका है ये कौन है 🤔बहुत अच्छा भाग 👌👌👌👌
Kuch hua hai kya ya phir ye shaurya ki sakal me koi aur hai
ये कैसा ट्विस्ट
शौर्य बदल तो नही दिया कही
भदौरिया ने कोई चाल तो नही चल दी
ये अब पूरा पक्का हो गया है कि ये हमशक्ल है शौर्य का जो दुश्मनों ने अपने फायदे को लेकर चला है शायद या शौर्य की सुरक्षा के लिए भी हो सकता हैं लेकिन ऐसा होता तो ये ऐसा हरकतें नहीं करता जिससे उसकी छवि ख़राब हो कुछ तो गड़बड़ झाला है लेकिन क्या
Great twist,,but painful behaviour of little master ooops ‘prince’☺️.
Yah to pakka hai ki Shaurya nahin hai ki koi bahrupiya hai Shaurya ki image kharab karne ke liye yah koi Shaurya Bankar aaya hai👍👍👍👍👍💯💯💯😴😴😴😴😴😴
Ye shaurya to nhi ho sakta .kucha to different he