मायानगरी -2 भाग -9

मायानगरी -2 भाग -9

लगभग ढाई तीन घंटे की जद्दोजहद  के बाद मृत्युंजय ने ऑपरेशन पूरा कर लिया…
इस जटिल सर्जरी के दौरान कई बार उसे और उसकी टीम को लगा कि वो लोग इस मरीज को बचा नहीं पाएंगे, लेकिन महादेव ने उनका साथ दिया और इस तरह सर्जरी ठीक से संपन्न हो गई!

      इस दो ढाई घंटे के दौरान ऊपर विजन रूम में बैठे थापर और मंढ़रिया लगातार जय के काम पर नजर बनाए हुए थे। प्रेसिडेंट सर वैसे भी जय से प्रभावित हो रहे थे, लेकिन थापर को यह बात पसंद नहीं आ रही थी। वह सर्जरी के बीच में ही उठकर बाहर निकल गया। बाहर निकलते समय उसने अपने दोनों असिस्टेंट को अपने साथ ले लिया।
    विजन रूम के ठीक बाहर का दरवाजा बंद कर थापर अपने दोनों असिस्टेंट के साथ खड़ा था।

” क्या हुआ सर? आपने हमें बाहर क्यों बुलाया ?”

  “तुम दोनों एक बात का अच्छे से ध्यान रखोगे।”

“कौन सी बात का सर ?”

” अब न्यूरोलॉजी से जुड़ी हुई जितनी भी सर्जरीस आएंगी, उनमें से ज्यादातर या तो डॉक्टर कुलदीपक को दी जाएगी या फिर डॉ श्रीवास्तव को दी जाएंगी..!”

“लेकिन, ऐसा क्यों सर ?” उनमे से एक ने डरते हुए पूछा.. !”

“मैं बोल रहा हूँ तो कुछ सोच कर ही बोल रहा हूँगा न ?”

“वह तो ठीक है सर, लेकिन डॉक्टर मृत्युंजय हमारे हॉस्पिटल के बेस्ट न्यूरोसर्जन है!”

“जानता हूं लेकिन मृत्युंजय को सर्जरी देने की जरूरत नहीं है!”

यह सुनकर दोनों असिस्टेंट आश्चर्य से डॉक्टर थापर की तरफ देखने लगे।

” लेकिन क्यों सर?”

” हर क्यों का जवाब देने के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। तुम दोनों मेरे असिस्टेंट हो, मुझे इस पूरे अस्पताल को चलाना है। अगर हम एक ही बेस्ट सर्जन को सारी सर्जरी देते रहे तो, बाकी डॉक्टर्स क्या करेंगे? और उनकी टीम क्या करेगी?
   अगर एक ही डॉक्टर को इस तरह सर पर बैठा लिया गया तो, कल को यह हमारे अस्पताल को छोड़कर अपना प्राइवेट अस्पताल खोल लेगा, और तब हम उसे मुंह मांगी कीमत देकर भी रोक नहीं पाएंगे।
    उसके जाने के बाद हमारे पास कोई अनुभवी डॉक्टर नही बचा रहेगा, जिसे सर्जरी का अनुभव हो।
       मुझे सिर्फ मरीजों को सही करने का नहीं, बल्कि अस्पताल को चलाने का पैसा मिलता है। और इसलिए मुझे सभी डॉक्टर्स को बराबर मौके देने हैं।”

” ठीक है सर, जैसा आप कहे, लेकिन मृत्युंजय को बिल्कुल ही केस न देकर भी तो हम गलत करेंगे।”

” सही और गलत क्या है, इसके बारे में तुम लोगों को ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। मैंने जो थोड़ी देर पहले कहा, क्या वह भी तुम दोनों सोच पाए थे।”

” नहीं सर आप सच कह रहे हैं, आप ग्रेट है।”

थापर के चेहरे पर क्रूरता भरी मुस्कान आ गयी..
उसके साथ काम करने वाले उसके दोनों असिस्टेंट में से एक मेडिसिन विभाग का विभागाध्यक्ष था और दूसरा कार्डियोलॉजी विभाग का..
दोनों ही जल्द से जल्द प्रमोशन पाकर आगे बढ़ना चाह्ते थे.. दोनों अस्पताल की सारी खबर थापर तक पहुंचाते थे..
थापर का मुख्य उद्देश्य ही था कि प्रेजिडेंट के जाने के बाद वो खुद प्रेजिडेंट की पोस्ट पर पहुँच जाए.. उसका प्रेजिडेंट की पोस्ट पर पहुंचना मतलब उसकी जगह पर इन दोनों में से किसी का आना था..
इसीलिए ये दोनों थापर के आगे पीछे घूम कर उसकी हाँ में हाँ मिलाया करते थे.. !
हालाँकि जय से दोनों में से किसी कि व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी, लेकिन थापर का कहा टालना भी उन दोनों के बस में नहीं था..

” अगर आप उस जय को सर्जरी नहीं दे रहे तो इसके पीछे भी कुछ तो उसकी अच्छाई ही होगी!”
   डॉक्टर मंडल ने कहा…

“करेक्ट, तो जब तक इस तरह का कोई केस ना आए, जिसमें मरीज खुद होकर डॉक्टर मृत्युंजय का नाम ना ले, तब तक उसे कोई भी सर्जरी मत दो!”

  ” लेकिन सर हफ्ते में चार दिन उसी की ओटी होती हैं!”
   डॉक्टर रथ ने अगली समस्या उठायी

” कोई बात नहीं, शिफ्ट कर दो! डॉक्टर श्रीवास्तव डॉक्टर कुलदीपक को दे दो!”

” ठीक है सर!”

” उसे ओपीडी दो, इमरजेंसी दो, नाईट शिफ्ट करवाओ, हॉस्पिटल मैनेजमेंट के फालतू कामो वाली कमिटी में डाल दो, नर्सिंग होम एक्ट वाली कमिटी में डाल दो, बाहर निशुल्क कैम्प करवाओ…
   लेकिन ओटी मत दो!”

” जी सर जैसा आप कहें !”

अपने असिस्टेंट को समझा बुझाकर थापर वापस विजन रूम में लौट आया।

    वहाँ बैठे प्रेसिडेंट को मालूम भी नहीं चला कि डीन थापर बाहर अपने असिस्टेंट के साथ क्या खिचड़ी पका रहा था?
    सर्जरी पूरी होने के बाद डॉक्टर जय ने  एक बार ऊपर देखा, प्रेसिडेंट सर को अभिवादन करने के बाद उसने थापर को देखकर भी धीरे से अपना सर झुकाया और सर्जरी रूम से बाहर निकल गया।

   उसकी टीम आज बहुत खुश थी। लगभग हफ्ते भर बाद वह अपने पसंदीदा सर्जन के साथ काम कर रहे थे। उसकी सारी टीम को उसके साथ काम करते हुए ऐसा लगता था, जैसे वह सब किसी जादूगर के साथ है।

    ओटी की सफाई शुरू हो चुकी थी। नर्स कॉटन रोल को गिन कर जमा रही थी और उसके चेहरे पर मुस्कान थी। तभी दूसरी सिस्टर ने उसे टोक दिया

” क्या हुआ जेनी सिस्टर, आज आप बहुत स्माइल कर रहीं हैं?”

” स्माइल करने वाली बात ही है, हमारी ओटी के हीरो वापस जो आ गए हैं।”

जेनी की बात सुनकर वहां फर्श पर का सामान समेटती हुई नर्स भी मुस्कुराने लगी।

” यह बात तो सच है, इस ओ आर की रौनक डॉक्टर मृत्युंजय से ही है। जब वह ओ आर के नीले कपड़ों में इस रूम में प्रवेश करते हैं, तो मुझे ऐसा लगता है जैसे साक्षात भगवान शिव अपने कैलाश से उतर कर चले आए हैं।
     लंबे-लंबे कदम भरते हुए जब अपने दोनों धुले हुए हाथों को सीधा रख कर आते हैं, तो ऐसा लगता है कि अब यह मरीज ठीक होकर ही जाएगा।”

“तुम सच कह रही हो, उनका कॉन्फिडेंस देखा है?
   केस कितना भी जटिल हो, लेकिन वह ऐसे सुलझा कर रख देते हैं, जैसे ह्यूमन बॉडी का नहीं बल्कि किसी खिलौने का ऑपरेशन कर रहे हैं। उनके सामने पड़ी हुई बेहोश बॉडी किसी डॉल की तरह नजर आती है। वह अपनी चमत्कारी उंगलियों से यूँ चमत्कार करते हैँ जैसे  सर्जरी उन्हीं के लिए बनी है!”

” बिल्कुल ठीक कह रही हो! वह जब सर्जरी करते हैं तो ऐसा लगता है, जैसे स्वयं भगवान सर्जरी करने उतर आए हैं। ऐसा लगता है जैसे उस वक्त डॉक्टर मृत्युंजय के अंदर कोई और ही आ जाता है।”

” सुन जेनी ऐसी डरावनी बातें मत कर यार, वैसे भी हॉस्पिटल में इतने लोगों की जान जाती हैं, साथ ही मोर्चरी भी है। और आज मुझे 1 घंटे के लिए मोर्चरी भी जाना है।
     वैसे भी वहां से लौटने के बाद मुझे नींद नहीं आती। इसलिए तू डरा मत।”

” चल बाहर चलते हैं, अगली सर्जरी की तैयारी करनी है।”

” अगली सर्जरी किसकी है ?”

“डॉक्टर श्रीवास्तव की।”

   ओआर मे सफाई कर, सारा स्टाफ निकलकर बाहर आ गया। मृत्युंजय ऑपरेशन रूम से बाहर आ चुका था। बाहर गुंबर के परिवार के लोग मौजूद थे। उसकी पत्नी और उसका असिस्टेंट भाग कर जय के पास पहुंच गए…

“डॉक्टर साहब अब सर कैसे हैं?”

” खतरे से बाहर है। ऑपरेशन ठीक से हो गया है, शाम तक में होश भी आ जाएगा।”

    असिस्टेंट ने जय के दोनों हाथ पकड़ लिए….

“सर आप जितना कहेंगे, आपको उतना पैसा दिया जाएगा। बहुत धन्यवाद सर।”

  जय ने असिस्टेंट के हाथों से अपने हाथों को धीरे से छुङा लिया।

” जो पैसा आप लोग मुझे देना चाहते हैं, किसी गरीब बच्चे की पढ़ाई में लगा दीजिएगा।
  हमारे देश को काबिल और शिक्षित बच्चों की जरूरत है।”

जय मुस्कुरा कर आगे बढ़ गया।

थापर के दोनों असिस्टेंट उसे देख रहे थे..

“पता नहीं ये थापर का बच्चा इससे इतना चिढ़ता क्यों हैँ ?” रथ ने कहा

“असल बात यही है कि थापर का बच्चा इससे चिढ़ता है, और अपने बच्चे के कारण ही थापर भी इससे चिढ़ा बैठा है.. उसका बस चलता तो डॉक्टर मृत्युंजय को नौकरी से ही निकाल फेंकता, लेकिन उसके ऊपर बैठे प्रेजिडेंट को भी जवाब देना होगा। और कहीं सीइओ मैडम को पता चल गया, तो थापर का पत्ता ही कट जायेगा..। बस इसीलिए ये सब चाले चल रहा है !” मंडल बोल पड़ा

“हम क्या कर सकते हैँ, हमे तो वही करना है जो ये बोलेगा !” दोनों ने एक दूसरे कि बात पर हामी भरी और वहां से निकल गए..

****

  सुबह दरवाजे पर बेल बजने से प्राची की नींद खुली..
उसने पास रखी घड़ी में वक्त देखा, सुबह के साढ़े सात बज रहे थे..
वो आंखे मलती दरवाज़ा खोलने पहुँच गयी..
सामने अधिराज खड़ा था..

“तुम.. इतनी सुबह ? और वो भी इतना सज धज कर ?”

प्राची के माथे पर दो उँगलियाँ रख अधिराज ने उसे अंदर की तरफ धक्का दिया.. और उसके फ़्लैट में घुस गया..

“अरे रुको, ऐसे घुसे कहाँ चले आ रहे हो..? एक लड़की के रूम में ऐसे घुस कर आना कर्टसी नहीं है.. समझे ?”

“लड़की ? कहाँ है ?”

अधिराज ने चारों तरफ देखते हुए कहा और अपने साथ लाया हुआ सामान वही एक तरफ बने ओपन किचन की प्लेटफॉर्म में रख दिया..

“तुम्हे मैं क्या नजर आती हूँ ?” अपनी कमर पर दोनों हाथ रख कर खड़ी प्राची ने उसे घूरा

“जाओ लड़की, जाकर नहा लो, तुम्हारे पास सिर्फ पन्द्रह मिनट है.. तुम्हारे एचओडी का नहीं पता, मेरा एचओडी बहुत खूंखार है !”

अधिराज रसोई की तरफ बढ़ गया और प्राची नहाने घुस गयी..
कुछ देर में ही वो फटाफट तैयार होकर आ गयी..
तब तक में अधिराज ने ऑमलेट टोस्ट सेंक कर चाय बना ली थी..

जिस गद्दे पर प्राची रात में सोई थी, उसी के सामने ज़मीन पर अधिराज ने नाश्ता और चाय रख दिया था.. वो आकर वहां बैठ गयी..
चाय का प्याला उठाते ही उसे रंगोली याद आ गयी..

“पता है अधिराज, रोज़ सुबह और शाम की चाय रंगोली ही बनाती थी.. कितनी अच्छी चाय बनाती है वो और उस पर भी हम सब उसकी चाय का मजाक बनाते थे !” प्राची के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान चली आयी..

वहीँ उसके सामने बैठे अधिराज ने एक निवाला खाया और चाय सुड़कते हुए हामी भर दी..

“तुम्हारी तो आदत ही है, जो तुम्हारा काम करे उसका मजाक उड़ाने की !” उसने धीरे से एक फुलझड़ी छोड़ दी..

“हम्म क्या कहा तुमने ?” मुहं में नाश्ता ठूंसे उसने पूछा

“नहीं कुछ नहीं.. जल्दी खाओ, फिर निकलना है !” अधिराज फटाफट अपना नाश्ता खाते हुए बोल पड़ा..

अपना नाश्ता निपटा कर दोनों एक साथ फ़्लैट से हॉस्पिटल के लिए निकल गए..
  सीढ़ियों से नीचे उतर कर अपनी बाइक में बैठते ही अधिराज को कुछ याद आया और उसने प्राची से फ्लैट की चाबी मांगी और वापस फ़्लैट की तरफ बढ़ गया .

अधिराज को ऐसा लग रहा था उसने गैस चूल्हे को बंद किया या नहीं बस यही देखने वो ऊपर गया था..।
वो लौट कर आया तब तक में प्राची ने अपनी गाड़ी निकाल ली..

“आओ बैठ जाओ !” प्राची के ऐसा कहने के बाद अधिराज ने अपनी बाइक नहीं निकाली और प्राची के पीछे बैठ गया..
वो दोनों अस्पताल की तरफ निकल गए..

क्रमशः

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Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

neeta
1 year ago

Aparna ji aapne jeevanasathi aur mayanagari ko to bhula hi diya kaafi samay se agle bhag ka intzar hai ……… thoda jaldi jaldi post ker diya kariye utsukta bani rehti hai

Nisha
Nisha
1 year ago

Super part 😘😘😘. mrityunjay ke sath achha nahi kiya ja raha hai

seema Kawatra
seema Kawatra
1 year ago

मृत्युंजय को कोई क्या रोक सकता है
कोशिश कर के देख ले थापर
उसके हाथो का हुनर लोगो की जान बचाने के लिए है

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌👌👏👏👏⭐⭐⭐⭐⭐

जागृति
जागृति
1 year ago

Fantastic part

Rekhapradeepsrivastava
Rekhapradeepsrivastava
1 year ago

थापर सुधरेगा नहीं जब तक अपनी अच्छी खासी बेइज्जती न करा लें सब के सामने, जय तो नहीं बोलेगा पर छवि इसको नहीं छोड़ेगी अभी भी समय है सुधर जाओ थापर
अधिराज और प्राची अब तो एक ही अपार्टमेंट में रहने लगे है, इनकी नोक झोंक तो ऐसे ही देखने को मिलती रहेगी दोनो एक साथ बहुत अच्छे लगते है।
खूबसूरत पार्ट👌👌👌👌👌❤️❤️❤️❤️❤️

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very nice n Marblus and Fantastic part

Dhara kundaliya
Dhara kundaliya
1 year ago

Bahut hi Behtarin part..lajawab story..jabardast part..eagerly waiting for new part 👏 ❤️

Meenakshi Sharma
Meenakshi Sharma
1 year ago

lovely part 👌👍🤩😍