अतिथि-9

अतिथि -9

   माधव ने जैसे ही अंदर कदम रखा, एक अनजान औरत पर नजर पड़ते ही वो ठिठक कर खड़ा रह गया..

“आओ बेटा आ जाओ !”

“मैं बाद में आता हूँ आंटी, आप लोग आराम से बैठिये !”

“अमा आओ यार, तुम भी कितनी फॉर्मेलिटी कर रहे हो ! ये कोई बाहरी नहीं है.. हमारी साली साहिबा है, तुम्हारी आंटी की बड़ी बहन, श्रीमती विमला जी !”..

माधव ने आगे बढ़ कर विम्मो के भी पैर छू लिए..

“ठीक है ठीक है.. मैं इतनी भी बुज़ुर्ग नहीं हूँ कि पैर छुवा लूँ !” विम्मो ने भौंह चढ़ा कर कहा..
और माधव कट कर रह गया..
विनोद का कोई फ़ोन आया और वो अंदर चला गया..

“आंटी ये सामान घर से आया था, मैंने सोचा थोड़ा यहाँ पहुंचा दूँ !”

“हाँ बेटा, बैठो न ! खड़े क्यों हो ?”

अपनी बहन का इस तरीके का व्यवहार सुलोचना को पसंद नहीं आया.. हर जगह रूपये का ताप थोड़े न दिखाना चाहिए..
विम्मो के खुरदुरे शब्दों को भरने के लिये सुलोचना और भी विनम्र हो गयी!

“नहीं आंटी, मैं वापस जाऊंगा! “

माधव बिना बैठे ही वापस मुड़ गया और सुलोचना हड़बड़ा कर खड़ी हो गयी

“नहीं नहीं, ऐसे कैसे चले जाओगे.. केदार भाई साहब को मैं क्या मुंह दिखाउंगी भला..?
बैठो माधव ! मैं चाय लेकर आती हूँ !”

माधव को आदेश सा देकर वो रसोई में घुस गयी और जाते जाते विमला को भी साथ ले गयी..

माधव ने अपने हाथ में पकड़ रखा सामान सामने टेबल पर रख दिया था.. वहीँ खड़े चिंटू का पूरा ध्यान उसी बैग पर था।
वो टेबल के इर्द-गिर्द चक्कर लगाता हुआ बैग को ही घूर रहा था..।
उसकी हरकत पर माधव की नजर थी, माधव के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी.. उसने इशारे से चिंटू को आपने पास बुला लिया !

चिंटू लजाती हुई चितवन के साथ माधव के पास चला आया..

“मिठाई खाओगे ?”
.
“इसमें मिठाई है माधव भैया ?”

“हम्म.. खाओगे ?”

चिंटू ने भोलेपन से हामी भर दी.. उस शैतान को अच्छे से पता था कि वो कैसा चेहरा बनाने पर सबसे भोला नजर आता था..

माधव ने हंस कर उस बैग से मिठाई का डिब्बा निकाला और चिंटू की तरफ बढ़ा दिया। चिंटू ने न में गर्दन हिला दी..
माधव समझ गया, उसने मिठाई का डिब्बा खोला और चिंटू के आगे कर दिया.. चिंटू ने शरमा कर पहले एक टुकड़ा उठाया फिर धीरे से दूसरा भी उठा लिया..
अपनी लड़कियों जैसी बड़ी बड़ी पलकों को झपका कर उसने माधव की तरफ देख कर डिब्बा बंद करने का इशारा कर दिया..

“चिंटू एक बात बताओगे ?”

चिंटू का एक एक रोआँ माधव का कर्ज़दार हुआ जा रहा था, वो आंखे बड़ी कर उसके हर सवाल का जवाब देने को सतर खड़ा हो गया..

“घर के लोग बाहर गए है क्या ?”

चिंटू ने न में गर्दन हिला दी..

“फिर… दिख नहीं रहे कोई ?”

माधव ने डिंकी के कमरे की तरफ झांक कर पूछा, लेकिन चिंटू इस वक्त अपनी मिठाई के स्वाद में आकंठ डूबा पड़ा था..
उसे माधव का इशारा समझ नहीं आया..

“मम्मी अभी तो किचन में गयी है.. पापा शायद बाथरूम में होंगे !”

इसके आगे चिंटू चुप हो गया… 

माधव जिसकी खोजखबर लेना चाहता था, उसके बारे में चिंटू ने कुछ बताया ही नहीं…
उसी समय विनोद भी बाहर चला आया..
विनोद माधव से उसके काम और कमरे के बारे में बातें करने लगा..।

इधर रसोई में चाय बनाते हुए सुलोचना अपनी बड़ी बहन को अनजाने ही माधव के एक एक क्रेडेंशियल्स थमाने लग गयी..

“इनके एक दोस्त है न केदार मिश्र, उन्हीं का लड़का है.. क्या बताऊँ विम्मो, लड़का खरा सोना है !”

“तुझे बरेली वाली बुआ की बहु का किस्सा पता चला या नहीं ?” विमला का मूड माधव पर टिक ही नहीं रहा था, वो सुलोचना की बात पर ध्यान दिए बिना अपना राग अलापने लगी..

“क्या हुआ उसे ?”

“ठाठ है भाई.. जब से नौकरी लगी है, पैर घर पर नहीं टिक रहे.. सुना है, उसकी बेटी पांच महीने की हुई है और ऑफिस ज्वाइन कर लिया !”

“हे भगवान, इत्ती छोटी बच्ची को कैसे छोड़ जाती है !”

“अब कोई क्या बोले, इस बुढ़ौती में बुआ को अब बच्चे के पोतड़े धोने पड़ रहे ! खुद तो ऊँची एड़ी की हील खटकाती जींस पेंट पहन कर ऑफिस निकल जाती है.. !”

“अब तो सब डायपर पहनाते है विम्मो.. कौन हमारा जमाना चल रहा?
अब नैपी धोने सुखाने का झंझट कौन पालता है? लेकिन पांच महीने की बच्ची तो बहुत छोटी हो जाती है !”

“हाँ और क्या ? बस मॉडर्न कपड़े पहनें और निकल गए घूमने, यही तो आजकल का चलन है !”

“कपड़े तो हमारी लड़कियाँ भी यहीं पहनती है विम्मो, कपड़ो के लिए क्या इन लोगो को हम टोक पाते है..? अब जैसा आज़ पहन रही, ऐसा ही तो ससुराल में भी पहनना चाहेंगी..
मैं तो बस यही चाहती कि कोई अच्छा सीधा सा परिवार मिल जाये मेरी डिंकी के लिए भी..
बस इतनी ही प्रार्थना है कि लड़का सीधा सरल हो, वरना आजकल के लड़को को देख कर डर ही लगता है..।”

“अमा चाय कहाँ है यार तुम्हारी ? आसाम के बागान चली गयी हो क्या, चाय की पत्तियां लाने !”

बाहर से विनोद ने पुकारा और खुद ही अपने जोक पर हंस पड़ा..

माधव किसी तरह उठ कर निकलने की फ़िराक में था, कि चाय लिए सुलोचना बाहर चली आयी…

डिंकी और मंजरी अब तक बाहर नहीं आयी थी..
एक आध बार डिंकी अंदर से झांक चुकी थी, लेकिन उस वक्त माधव उसे देख नहीं पाया था..
चाय जैसे तैसे ख़त्म कर माधव उठने को था कि सुलोचना उसे रात के खाने के लिए रोकने लगी.. लेकिन आज माधव का मन वहाँ लग ही नहीं रहा था..
वो खड़ा हो गया।

“नहीं आंटी, मैं चलता हूँ ! आज एक और लड़का कमरा देखने आने वाला है..  अगर उसे जम गया तो हम दो लोग हो जायेंगे ! वैसे भी मेरे अकेले के लिए कमरा बड़ा है !”

“हाँ और फिर रेंट भी तो आधा हो जायेगा !”

“जी रेंट की फ़िक्र नहीं है, दस हज़ार एच आर ए मिलता है !” माधव ने बेखयाली में यूँ ही कह दिया लेकिन ‘दस हज़ार’ सुन कर विमला के कान खड़े हो गए..

“कहाँ नौकरी करते हो ?”विमला ने पूछ ही लिया

“पी डब्ल्यू डी में सेक्शन इंजीनियर हूँ….आप जूनियर इंजीनियर भी कह सकते है !”

जूनियर इंजीनियर को लात मारो पी डब्ल्यू डी ही अपने आप में बहुत बड़ा नाम था..।
विमला की आंखे चमक गयी..।
नंबर दो का रुपया तो बांध तोड़ कर बहता है इस विभाग में। और यहाँ काम करने वाला इंजीनियर मतलब अगले दो साल में अपना बंगला गाड़ी सब खड़ा कर लेगा..।
अगले पांच साल में बड़ी बड़ी दो तीन जमीने खरीद लेगा और दस साल में अपना महल खड़ा कर के शहर की आधी ज़मीन का मालिक बन जायेगा।

विम्मो को माधव में बिल गेट्स नजर आने लगा..

हे भगवान, इतना रूपवान गुणवान भाग्यवान लड़का उसके सामने था और वो उसे नजर भर देख भी नहीं रही थी..। लानत है।
लड़के की आंखे तो बिलकुल मैंने प्यार किया के सलमान खान सी लग रही है, शक्ल भी कुछ कुछ वैसी ही है.. सुंदर तो बहुत है !

उसी वक्त चिंटू की किसी बात पर अपनी हंसी रोकते हुए भी वो हंस पड़ा और उसके गाल पर लम्बा सा गढ्ढा पड़ता चला गया।

माधव की झेंपती हुई सी हंसी किसी को भी मोह जाती, फिर ये तो विमला थी, जो जी जान से अपनी राजकुमारी के लिए सुयोग्य वर की तलाश में थी..।

माधव निकलने के लिए दरवाज़े पर पहुँच चुका था कि डिंकी अपने कमरे से बाहर निकल आयी..

“अरे आप आये और चल भी दिए ?” डिंकी के चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ गयी..

“मैं तो काफी देर से बैठा था !” धीमे से माधव गुनगुना कर रह गया..
उसका मन किया कुछ देर बैठ जाये, लेकिन दरवाज़े तक जाकर वापस लौटना अशोभनीय लगेगा।
यही सोच कर वो बाहर की तरफ मुड़ गया और उसी समय डिंकी की आवाज़ उसके कानो में गूंज गयी..

“मम्मी मैं और मंजू दी, आइसक्रीम खा कर आते है ! हम लोग जाये ?”

डिंकी ने ऐसे पूछा कि मना करने का सवाल ही नहीं उठता था..

“जाओ इस बंदर को भी ले जाओ.. और सुन डिंकी विम्मो के लिए चॉको बार ले आना, इसे बचपन में बहुत पसंद थी.. है न विम्मो !”

विमला तो जैसे अब वहाँ थी ही नहीं.. नशे की सी हालत मे उसने गर्दन हिला दी..
अब तो मंजरी की शादी के हसीन सपने थे और थी विमला..।

माधव दरवाज़ा खोल कर बाहर निकला और उसके साथ ही डिंकी, मंजरी और चिंटू भी बाहर चले अये..

वो चारों लोग एक साथ गली के बाहर बने आइसक्रीम पॉइंट की तरफ बढ़ गए…

क्रमशः


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Nisha
Nisha
1 year ago

Lagta hai madhav ko dinki bha gyi ☺️☺️

seema Kawatra
seema Kawatra
1 year ago

जिसका डर था वही बात हो गई

दोनों बहने एक ही सपना देख रही है
किसका सपना पूरा होगा

कांति
कांति
1 year ago

माधव का पीडब्ल्यूडी में होना ही विमला जी को भा गया और उसमे भावी दामाद। ठीक से बातचीत ना करने का मलाल भी रह गया।
चिंटू और उसकी नज़रे, माधव के कारण मिठाई का स्वाद मिल ही गया।
बेहद शानदार भाग 👏👏👏👏👏

Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

Very very nice part 👌👌

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

सबसे पहले तो एक बात कहना चाहूंगी अपर्णा…मैंने जब जब आपकी कोई भी कहानी पढ़ी है मैंने हमेशा उन किरदारों को ऐसे महसूस किया है जैसे मैं उनके बीच मे बैठी हूँ कुछ भी काल्पनिक नहीं लगता,आप ऐसे जान डाल देती हो अपने किरदारों मे 😊👏👏👏🫡🫡🫡।ये बात कहने की नहीं है फिर भी ना जाने क्यों मन मे आया तो कह दी 😄।
माधव..कोई फ़िल्मी हीरो तो नहीं लगा मुझे,, मुझे तो आज जैसे नाम के अनुरूप ही लगा माधव..😊।
चिंटू की बचकानी हरकते मुझे बहुत अच्छी लग रही 😘।,माधव की नज़रे जैसे डिंकी को.ढूंढ रही थी उससे तो लग रहा माधव के मन मे कुछ तो है डिंकी के लिए पर विमला की नज़र आखिर ठहर ही गई माधव पर 🤦अब क्या होगा…🙄सुलोचना का सपना..🤔अरे यार ऐसे अतिथि नहीं चाहिए जो खुशियों पर डाका डाल जाए,भगाओ ऐसे अतिथि को।
बहुत अच्छा भाग 👏👏👏👏👏👏👏👏।

Jagruti
Jagruti
1 year ago

विमला का हवाई किल्ला बनाना शुरु हो गया ।😀😀😀👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌

Neeta
Neeta
1 year ago

Dr sahiba vimmo acchi nhi lg rhi ☹️🙏🙏🙏🙏🙏

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Bahut sundar

जागृति
जागृति
1 year ago

Super duper good

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏