
जीवनसाथी -3 भाग -114
पार्किंग में रौशनी नहीं थी..
मीठी को लगा उसके पास पर्ची हर्ष ने ही भेजी होगी.. वो तीन दिन से यहाँ थी और हर्ष उसे बहुत मिस कर रहा था….।
मुस्कुराती हुई वो आगे बढ़ने लगी..
तभी एक गाड़ी का दरवाज़ा खुला, और दो लड़को ने उस पर हमला सा कर दिया… ।
एक ने पीछे से उसके मुहं को पकड़ कर दबोचने की कोशिश की, वहीँ दूसरे ने सामने से उसके दोनों हाथ अपनी मजबूत पकड़ में ले लिए..।
उन दोनों ही आदमियों के चेहरे ढके हुए थे..।
बेबसी से मीठी ने इधर उधर देखते हुए खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उन लोगो की पकड़ मजबूत होने लगी….
मीठी एकदम से ठहर गयी, उसने खुद को संतुलित किया, अपनी आँखे मूंदी, एक गहरी साँस ली, और उसके बाद एक झटके में उसने अपने ठीक पीछे खुद को जकड रखे आदमी की नाक पर अपने सर से ज़ोर से वार कर दिया..
उस आदमी की नाक फ़ूट गयी, उसकी नाक से खून की धार बहने लगी! वो तिलमिला कर गाली देते हुए अपनी नाक पकड़ बैठा और इसी सब में उसकी पकड़ ढीली पड़ गयी..।
उसने मीठी को छोड़ दिया..।
लेकिन सामने खड़े लड़के का ध्यान पूरी तरह मीठी पर ही था.. वो कुछ सोच समझ कर अगला कदम उठा पाता, उसके पहले ही मीठी ने अपनी बालों में लगा रखी हेयर पिन को निकाला और बिना रुके लगातार सामने खड़े लड़के के हाथ कंधे और चेहरे पर वार करना शुरू कर दिया..।
पिन छोटी सी थी लेकिन तीखी थी..।
वो लड़का उस वार से छटपटा गया.. तभी उनका तीसरा साथी जो गाडी की ड्राइविंग सीट पर बैठा था उतर कर आया और मीठी को पकड़ने आगे बढ़ा।
मीठी ने अपने कंधे पर टाँग रखें बैग को ज़ोर से घुमा कर उस लड़के के मुहं पर निशाना साधा, और वो लड़का इतना तेज़ चमाट खा कर गोल घूम गया। वो वापस पलट कर मीठी को पकड़ने आ रहा था कि मीठी ने फटाफट अपनी ऊँची एड़ी की सेंडिल उतारी और उसकी पैनी सी नोक से सीधा उस लड़के के माथे के ठीक बीचोबीच वार कर दिया..।
सेंडिल की नोक बहुत तेज़ थी, वो लड़का खुद को संभाल नहीं पाया और गिर पड़ा..। अब तक में पहले और दूसरे लड़के ने एकसाथ मीठी को पकड़ने की कोशिश में कदम आगे बढ़ाया, और मीठी ने अपने पर्स की लम्बी स्ट्रेप को घुमा कर एक की गर्दन के इर्द गिर्द लपेट कर जोर से खींच लिया…
वो लड़का धड़ाम से नीचे गिर पड़ा… उसके गिरते ही मीठी ज़ोर से उछल कर उसके पेट में घूंसा मारने ही वाली थी कि इधर उधर छिटके से खड़े दोनों लड़को के साथ उस लड़के के मुहं से चीख निकल गयी..।
और मीठी ने अपना घूंसा उसे बिना मारे समेट लिया..
तभी किनारे खड़े दोनों लड़के उस पर झपटने वाले ही थे कि पीछे से किसी ने उन दोनों को इतनी ज़ोर से धक्का दिया कि दोनों गिर पड़े..
उनके गिरते ही उनके ठीक पीछे खड़े हर्ष पर मीठी की नजर पड़ी, और वो नीचे पड़े लड़के को एक तरफ करती भाग कर हर्ष के पास पहुँच गयी और उससे लिपट गयी..
हर्ष ने भी उसे बाँहों में भींच लिया..।
कुछ वक्त के लिए जैसे वक्त ठहर सा गया.. गहरी गहरी सांसे लेती मीठी के आंसू बहने लगे..
“अरे मेरी स्ट्रांग गर्ल,तुमने तो छक्के छुड़ा दिए सब के.. अब क्यों रो रही हो… चुप हो जाओ !”
मीठी के कान में हर्ष गुनगुना उठा..
वहां इधर उधर छिटके पड़े लड़के हर्ष को आया देख उठ कर भागने को थे कि मीठी को एक तरफ कर हर्ष ने उनमे से एक को दबोच लिया..
और अपनी गन निकाल कर उसकी कनपटी पर लगा दी..
“कोई भागने की कोशिश नहीं करेगा ! चुपचाप एक लाइन में आकर यहाँ खड़े हो जाओ, वरना मैं गोली चला दूंगा !”..
बाकी दोनों फटी फ़टी आँखों से हर्ष की तरफ देखने लगे, उनमे से एक अपने साथ वाले से बोल पड़ा..
“तेरी गन कहाँ रह गयी ? मैंने पहले ही बोला था गन लेकर चलना,तुझे ही ज्यादा होशियारी चढ़ी थी !”
“मुझे क्या पता था ये लड़की नहीं लडाका निकलेगी.. इसे देख कर कोई सोच भी सकता था कि ये पिन चुभा चुभा कर हमारी नाक में दम कर देगी..। तेरी नाक से तो अब तक खून बह रहा है…!”
“इधर आओ !” हर्ष ज़ोर से दहाड़ उठा..
और वो दोनों गिरते पड़ते से वहां चले आये..
“अब बताओ, किसने भेजा है तुम लोगो को ?”
“हमें नहीं पता, हमारे पास बस एक फ़ोन आया था, और इतना ही कहा गया था कि इस लड़की को किडनैप करना है !”..
ये सुन कर हर्ष के माथे पर बल पड़ गए, वो सोचने लगा, उसने मीठी की तरफ देखा और उसके और करीब जाकर उसका हाथ कस कर थाम लिया, उसी वक्त अचानक पार्किंग की बिजली चली गयी..
मौका देख कर तीनो लड़के सर पर पैर रख कर भाग खड़े हुए..
हर्ष का ध्यान से एकदम से उधर गया, लेकिन साथ ही सहमी सी खड़ी मीठी पर भी उसका ध्यान था.. मीठी वाकई डरी हुई थी, वो मीठी को लिए अपनी गाड़ी तक चला आया..
उसे बैठा कर पानी की बोतल उसे पकड़ाने के बाद वो उसके सर पर हाथ फेरते हुए उसे दिलासा देने लगा..
“तुम ने उन तीनो को धूल चटा दी, फिर अब क्यों परेशान हो ?”
मीठी ने भरी भरी आँखों से हर्ष की तरफ देखा..
” हर्ष… मैं बहुत ज्यादा डर गयी थी, उस वक्त लगा मेरी ज़िन्दगी ख़त्म हो गयी। लेकिन फिर सोचा अगर मेरी ज़िन्दगी खत्म होनी ही है, तो भी मैं खुद को किस्मत के भरोसे क्यों छोडूं, खुद को बचाने का प्रयास तो कर ही सकती हूँ.. ।
अपनी जान लगा दी मैंने, जो जैसे मार सकती थी, सब से वार कर दिया.. बस सोच लिया था कि इन लड़को को चैन से नहीं रहने देना है..।
लेकिन इतना लड़ने के बाद भी अपनी इज्जत चले जाने का एक डर तो मन में बैठा ही था न..।
कहीं मैं नहीं लड़ पाती, और उनके मंसूबे कामयाब हो जाते तो.. ?
बस वही सोच कर.. “
“कामयाब हुए तो नहीं न, इसलिए अब सोचो भी मत.. चलो हम घर चलते है !”
“सुनो.. घर पर ये सब नहीं बताना है !”
“क्यों ?”
“माँ को जानते हो न, वो वैसे ही बहुत पज़ेसिव है। ये सब पता चलने पर उनका रिएक्शन पता नहीं कैसा होगा..? हर्ष ये जो सब हुआ है, ये हमारे अलावा किसी को पता नहीं चलना चाहिए.. प्लीज़ ! यहाँ तक की धनुष को भी नहीं !”
“धनुष को क्यों नहीं ?”
“बस ऐसे ही.. मैं नहीं चाहती हम दोनों के अलावा किसी को मालूम चले !”
.
“चलो ठीक है.. किसी को पता नहीं चलेगा !” हर्ष ने मीठी को अपने सीने से लगा लिया..
कुछ देर बाद दोनों घर की तरफ निकल गए..
****
दिन बीत रहे थे, लेकिन इन बीतते दिनों के साथ ही कली की बेचैनी भी बढती ही जा रही थी..
शौर्य का अता पाता नहीं था…
न हमेशा की तरह वो उसके कॉलेज के चक्कर लगा रहा था न घर के..।
कई बार कली ने सोचा उसका फ़ोन मिला ले, लेकिन फिर चुप रह गयी..
लेकिन मन की बेचैनी थी कि बढती ही जा रही थी..
न कली का मन कॉलेज में लग रहा था न घर में.. ।
न वो कुछ खा पी पा रही थी, न हंस ही रही थी..।
उसका दिल डूबता जा रहा था !! किससे पूछे? क्या पूछे? ये नहीं समझ पा रही थी, और फिर उसने पंद्रह दिन के लम्बे अंतराल के बाद आखिर शौर्य को फ़ोन लगा ही लिया..
दूसरी तरफ से फ़ोन शौर्य की जगह विक्रम ने उठाया..
“क्या मैं शौर्य से बात कर सकती हूँ ?”
“आप कौन ?”
.
“मैं.. कली.. !”
विक्रम ने शौर्य की तरफ देखा..
“कली का फ़ोन है लिटिल मास्टर !”
पल भर के लिए शौर्य सोच में पड़ गया और फिर उसने तुरंत ही फ़ोन ले लिया..
“कली.. !”
अपना नाम शौर्य के मुहं से सुनते ही कली एकदम से पिघल गयी..
उसकी रुलाई गले तक आकर अटकने लगी.. न उसके मुंह से शब्द निकल रहे थे, न वो चाह कर भी कुछ बोल पा रही थी…
“क्या हुआ, कुछ बोलोगी नहीं !”
एक गहरी सी साँस भर कर कली ने धीरे से पूछ लिया
“कहाँ थे ? मुझसे मिलने क्यों नहीं आये ?”
शौर्य के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..
“तुम ही ने तो कहा था न, कि हम सिर्फ दोस्त है.. एंड ब्ला ब्ला ब्ला.. !”
“तुम बुरा मान गए क्या, उस बात का ?”
“हम्म… !” शौर्य इतना कह कर चुप रह गया..
“सॉरी.. शौर्य.. मैं तुमसे ये कहना चाहती.. “
कली की बात आधे में ही काट कर शौर्य बोल पड़ा..
“हम मिल सकते है.. ?.. आज ? “
“अहह.. वो.. !”
“शाम पांच बजे ब्रिज कैफे में तुम्हारा इंतज़ार करूँगा ! समय पर आ जाना, मुझे पंक्चुअल लोग पसंद आते है !”
अपनी बात कह कर शौर्य ने फ़ोन रख दिया….
कली पल भर के लिए सोचती रह गयी..
शौर्य से मिलने जाना तो था, लेकिन घर पर क्या बोलेगी..
वो सोच ही रही थी कि उसके कमरे का दरवाज़ा खोल कर सारिका अंदर चली आयी..
“तुम अब तक यही बैठी हो.. चलो नाश्ता तैयार है, और आज तुम्हारे डैडा और दर्श जी बाहर जा रहे है.. इसलिए वो लोग खा कर तुरंत निकलेंगे.. तुम लेट मत करो !”
“डैडा कहाँ जा रहे ?”
” साउथवार्क जा रहे है, कल शाम तक वापस भी आ जायेंगे.. स्टॉक एक्सचेंज से जुड़ा कोई काम है उनका !”
कली के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आते आते रह गयी..
वो तुरंत उठ कर नीचे की तरफ भाग चली.. इसके पीछे ही सारिका भी नीचे चली आयी..
क्रमशः

अरे वाह मीठी👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻🥳🥳क्या मजा चखाया उन सबको👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻अब डरो मत तुम कर सकती थी और तुमने किया🥳🥳हर्ष भी आ गया💓💓
कली को शौर्य से मिलना है🥳💓
अब यह काम किसने कराया मीठी को फोन किडनैप कर सकता है मीठी से किसी की क्या दुश्मनी जहां तक है मुझे यह काम फु साहब का ही लग रहा है पता नहीं यह कितने और षडयंत्र रचे बैठी हैं बेचारी मीठी को देखकर तो एक बार दिमाग सुन्न पड़ गया था पर मीठी ने जो मार मार कर तीनों का सीक कबाब बनाया है और और उनके छक्के छुड़ा दिए देखकर बेहद खुशी हुई बीच में हर्ष का आ जाना जैसे के जान में जान आई हो। 🥺🥺🥺🥺
मीठी को ये बात प्रेम को तो जरूर बतानी चाहिए ताकि उसका चेहरा सामने आये जो हर्ष और उसे अलग करना चाहते है
विक्रम ने शौर्य को कली के एहसास जगाने के लिए थोड़ी दूरी बनाने की सलाह दी थी…शौर्य ने ऐसी मानी कि सीधा हास्पिटल पहूँच गए
बेहतरीन पार्ट
❤❤❤❤❤❤❤💕💕💕💕👌👌👌👌👌
Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
लाजवाब भाग 👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏🥰🥰🥰🥰
Beautiful part …ek pal ke to bohat dar lga ki pta nhi mithhi k sath kya ho jana pr jo dhunayi mithhi ni ki he mja aa gya
सारे कांड इशारा कर रहे हैं कि कोई सुपर विलन है जो मीठी और शौर्य के साथ राजमहल से दुश्मनी निभा रहा है उसको ये दोनों कोई खास पसन्द नहीं लगते हैं शायद
थोड़ा तो अंदर से पता ही था की प्रेम की बेटी को ऐसे ही कोई पकड़ नही सकता , पर फू साहेब का कुछ पता नही अब तक तो sure नहीं थे, पर क्या फाइट करी है मीठी ने 🫡🫡🫡🫡 पर ये बात धनुष से भी छिपाना है ? मतलब कोन था इसके पीछे , पता नही चल पाएगा फिर तो!!
ओर आज 15 दिन बाद ही सही कली , ने फोन लगाने की हिम्मत तो दिखाई!
अब ये वासुकी और दर्श घर पर नहीं होने पर , छुप के से अपने राजकुमार को मिलने जायेगी wow 💫✨❤️❤️❤️❤️😍😍😍 👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏