अतिथि -8

अतिथि -8

   घर पर सुबह से हंगामा मचा हुआ था…
सुलोचना आज जी जान से सफाई में जुटी हुई थी, एक तो इतवार का दिन वैसे ही उसके लिए जी का जंजाल हो जाता था..
पूरी वानर सेना घर पर मौजूद होती थी, जो कि समय समय पर उसके अशोक वन में अग्निकांड करने से ज़रा नहीं चुकती थी….

विनोद सोफे पर फैला हुआ अख़बार में मुंडी गङाये मशगूल था..

“सुनो एक चाय पिला दो !”..

“सुबह से तीन चाय डकार चुके है, मैं घिस घिस कर घर चमकाने की कोशिश में हूँ, और आप लोग है कि..

“प्रेशर ही नहीं बन रहा यार, बस एक.. उसके बाद सीधा बाथरूम में घुसूंगा !”

“हाँ और नहा कर तमीज के कपड़े पहन लेना.. ये बनियान लूंगी आज नहीं चलेगी आपकी.. !”

“अरे तुम्हारी बहन ही तो आ रही, कोई परायी थोड़े न है, वो !”

“अच्छा तो क्या आपका ऑफिस पराया है, जो सलीके से कपड़े पहन कर जाते है..।
मुझे तो आपकी इस लूंगी को देख कर आग लग जाती है.. सौ दफा कहा है आपसे, नए ज़माने के चलन वाला लोअर टी शर्ट पहना करो, पर नहीं !”

“तो तुम क्यों दिन भर ये सूती गाउन लटकाये घूमती हो..? तुम भी तमीज से सलवार कमीज पहना करो !”

“मुझसे तो खुद की तुलना करिये ही मत.. मैं जितना काम करती हूँ न, आप तीनो मिल कर नहीं कर सकते..।
और.. ये.. ये दोनों आपके राजकुमार और राजकुमार, इनकी तो पूछो मत..
डिंकी, जा अपना कमरा साफ़ कर !”

“मेरा कमरा बहुत साफ़ है अम्मी जान !”

“अम्मी जान की बच्ची.. तेरे सारे कपड़े, पलंग पर पड़े है.. मैं अगर रूम में घुसी न, कसम से तेरे उन चीथड़ों को आग लगा दूंगी..।”

“उफ़ तौबा, वो डिज़ाइनर कपड़े है मम्मी.. कदर कर लो अपनी बेटी की.. कल को जब मैं बड़ी डिज़ाइनर बन जाउंगी न, तो लाइन लगेगी लोगो की मुझसे औटोग्राफ लेने के लिए.. !”
.
“तेरे सर से टेलर बनने का भूत उतरा नहीं,  विम्मो की बेटी बढ़िया फार्मा का कुछ कोर्स कर के नौकरी पा गयी है.. तू भी नर्स का कोर्स कर ले, किसी अस्पताल में नौकरी मिल ही जाएगी ! खैर अब नहीं भी करेगी तो चलेगा !”

“क्यों भाई.. ऐसा क्या हो गया?”..

“शादी कर देंगे तेरी !” मुस्कुरा कर सुलोचना ने कहा और डिंकी के तेवर चढ़ गए

“हद करती हो मम्मी… अब ये तुम्हारा जमाना नहीं है ! बीस साल की उमर में लड़कियों की शादी होना, ज़माने पहले से बंद हो चुका है.. मैं बच्ची हूँ अभी, और अगले दस साल मेरी शादी की सोचना भी मत !”

पैर पटकती डिंकी अपने कमरे में घुस गयी, और मम्मी का राजदुलारा अपनी माँ से आ कर लिपट गया

‘ये तो है ही भूतनी, मम्मी!  तुम मेरी शादी कर के अपनी इच्छा पूरी कर लेना.. मेरी क्लास में श्रुति पढ़ती है, वो मुझे पसंद भी है !”

अपने चश्मे को ज़रा नीचे सरका कर विनोद ने माँ बेटे के इस अजूबे जोड़े को देखा..

सुलोचना घूर कर खुद से लिपटे अपने नन्हे राजकुमार को देख रही थी…

“एक से बढ़ कर एक नमूने मेरे ही हिस्से लिखे है भगवान ने ।
एक बचपन में ही लड़की पसंद किये बैठा है, और दूसरी बुढ़ौती तक शादी नहीं करना चाहती..।
हमारा ही ज़माना भला था, जहाँ माँ बाप ने बोला चुपचाप सर झुका कर चल दिए… मैं तो सच में गाय थी गाय.. जिस खूंटे से बांधा वहीँ बंध गयी !”

“गाय को खूंटे के आसपास चलने की जगह तो मिलती है.. मैं तो साला वो खूंटा हूँ, जो आज तक एक ही जगह गड़ा खड़ा हूँ !” विनोद की इस बात पर सुलोचना उसकी तरफ देखने लगी

“क्या बोला आपने ?”

“नहीं कुछ नहीं.. कुछ भी नहीं.. देखो लगता है रसोई में कुछ जल गया.. !”

बर्नर पर चढ़ी चाय याद आते ही सुलोचना रसोई की तरफ भागी और उसी समय दरवाज़े पर घंटी बज गयी

“देखिये ज़रा दरवाज़े पर कौन है.. मैं आ रही हूँ !”

चिंटू ने भाग कर दरवाज़ा खोल दिया..

“हाय चिंटू कैसा है ?” उसके गाल पर चिकोटी काटती उसकी मौसेरी बड़ी बहन सामने खड़ी थी..
चिंटू ने गाल फुला लिया और ‘ठीक हूँ’ कह कर अंदर भाग गया..

सुलोचना फटाफट हाथ पोंछती बाहर निकल आयी.. बाहर उसकी बड़ी बहन विम्मो यानि विमला खड़ी थी.. विम्मो के साथ ही उसकी बेटी मंजरी भी खड़ी थी..

सुलोचना अपनी बहन से लिपट गयी !!

“कोई परेशानी तो नहीं हुई विम्मो ? “

“नहीं बिलकुल भी नहीं.. आजकल हाइवे इतने सुंदर बना दिए है कि पता ही नहीं चलता, कब मेरे घर से निकली और कब तेरे घर पहुँच गयी..।
वैसे तो दो घंटे का रास्ता है लेकिन पौने दो घंटे में ही मंजरी उड़ा कर ले आयी !”

“अच्छा..? गाड़ी मंजरी ही चला कर लायी क्या ?”

सुलोचना को बड़ा आश्चर्य हुआ, साथ ही दिल में एक हूक सी उठ गयी..
उसकी बेचारी डिंकी जाने कब से स्कूटी के लिए झींक रही है, पर विनोद का हमेशा इस साल नहीं, अगले साल का बहाना लगा रहता है। और यहाँ देखो मंजू कार चला कर ले आयी..।
अपनी अपनी किस्मत है..!!
विम्मो उससे दो साल की ही तो बड़ी है, पर बचपन से ही भगवान ने जैसे उसकी और सुलोचना की किस्मत अलग अलग कलम से लिखी थी..।

सुलोचना हल्का सा मुस्कुरा कर अंदर चली गयी..

“चाय लेकर आती हूँ, तुम लोग बैठो !”

मेहमानों की आवाज़ सुन कर डिंकी भी बाहर चली आयी थी.. आते ही वो अपनी मंजू दी से लिपट गयी.. दोनों बहनों की खूब यारी थी..
वो तो मंजू को अपने कमरे में ले जाना चाहती थी, लेकिन सुलोचना चली आयी

“अरे दो घड़ी मेरे साथ भी बैठ लेने दे, जी भर कर देख तो लूँ.. कितनी निखर गयी है मंजू! बड़ी प्यारी लग रही है !”

“हाँ.. आज कल स्किन केयर कोई सस्ता है भला? मैं तो देख कर दंग रह जाती हूँ, सात आठ हज़ार के तो इसके प्रोडक्ट आते है, और ये छोटी छोटी डिब्बियां..। नहा कर आने के बाद आधे घंटे का तो मैडम जी का स्किन केयर चलता है !” विम्मो शान से बता कर हंस पड़ी, जैसे उसकी मंजरी किसी बहुत बड़े युद्ध का पूर्वाभायस कर रही हो..

सुलोचना को न जाने क्यों ये बातें चुभ सी रही थी.. वो सहज भाव से मंजरी की सम्पन्नता में डिंकी की विपन्नता को देख पा रही थी और शायद इसीलिए उसका मातृत्व अपनी लाड़ली के लिए दयनीय हुआ जा रहा था..
हालाँकि आसपास बैठने पर डिंकी ही बीस थी, लेकिन रुपयों की चमक मंजू के चेहरे को भी कांतिमय कर चुकी थी..

उसने चाय का प्याला उन सब की तरफ बढ़ा दिया..

“मासी मैं चाय नहीं पीती, कभी कभी ग्रीन टी पी लेती हूँ !”

“ओह्ह.. कोई बात नहीं बेटा, चिंटू से मंगवा कर बना देती हूँ !”

“नहीं नहीं मासी.. आप परेशान न हो.. मुझे चाय पीनी ही नहीं और मम्मी भी फीकी चाय पीती है.. !”

“फीकी क्यों ?” सुलोचना ने सवालिया नजर से अपनी बहन को देखा.

“ये मुई डायबिटीज़ जो निकल आयी !”

“अरे.. कब ? तूने बताया नहीं विम्मो ?”

“इसमें क्या बताने की बात है, आजकल तो साँस लेने जैसा हो गया है शुगर और बीपी होना.. मुझे तो डाक्टरों की बदमाशी भी लगती है, जहाँ देखा कि मोटा असामी है, इससे अपना उल्लू सीधा किया जा सकता है तुरंत सामने वाले मरीज़ को शुगर और प्रेशर का मरीज़ बना देते है !”

विनोद को इन बातो में हंसी सी आ रही थी, वो उन सब से इजाजत लेकर नहाने घुस गया..

डिंकी भी अपनी प्यारी बड़ी बहन को साथ लिए अपने कमरे में घुस गयी और बाहर दोनों बहने रह गयी..
दोनों बातों में लग गयी..।

विम्मो की कोई रिश्ते की ननन्द की तबियत ख़राब थी, उसे ही देखने दोनों मां बेटी सुबह से अपने घर से निकले थे। अस्पताल में ननंद से मिलकर फलों का टोकरा उनके हाथ में पकड़ा कर फिर विम्मो अपनी बहन के घर आई थी।
   दोपहर का खाना खाने के बाद शाम तक दोनों ही वापस निकल जाने वाले थे..।

पहले ही यह सारी बातें तय हो चुकी थी, इसीलिए सुलोचना सुबह से अपनी बहन का मनपसंद खाना बनाकर घर की साफ-सफाई में लग गई थी। और अब सारा काम जब निपट चुका था, दोनों बहने अपनी अपनी चाय हाथ में लिए सुकून से बातों में लग गई थी। इधर डिंकी के कमरे में पहुंचकर मंजू खिड़की के पास खड़ी हो गई..

“और बताओ मंजू दी, क्या चल रहा… आपका बॉयफ्रेंड कैसा है?”

“कौन ?” मंजू चौंक कर पलट गयी 

“नाम तो मुझे याद नहीं, जिसके बारे में आपने पिछली बार बताया था !”

“सुहास ?”

“हाँ शायद.. जो मिलिट्री में था !”

मंजू ज़ोर से हंसने लगी.. -“अच्छा वो, मनप्रीत ?”

“अच्छा मनप्रीत नाम था, तो ये सुहास कौन ?”

मंजू मुस्कुरा कर डिंकी के पास आ बैठी..

“मनप्रीत से एक कॉमन दोस्त की पार्टी में मिली थी, दोस्ती हुई प्यार हुआ, लेकिन फिर किन्ही कारणों से ब्रेकअप हो गया !”

“ओह्ह… और सुहास ?”

“इससे ड्राइविंग क्लास में मिलना हुआ था.. !”

“आपका इंस्ट्रक्टर था क्या ?”

“हम्म.. नहीं.. ये क्लास का ओनर है.. !”

“ओह्ह.. तो इसी ने गाड़ी सिखाई है आपको ?”
.
“गाडी चलानी तो मुझे चार पांच साल से आती थी, लेकिन लाइसेंस के लिए इसके वहां जाना पड़ा, दोस्ती हो गयी.. ही इस अ नाइस गाई!
अब देखो, कब तक दोस्ती कायम रहती है !”

“मतलब प्यार व्यार.. ?”

“हाँ है न.. मुझे अच्छा लगता है वो.. तुझे रोमित याद है, जो मेरे साथ स्कूल में था?
ये कुछ कुछ उसके जैसा लगता है… !”

“नहीं दी मुझे याद नहीं.. तो क्या, इससे शादी का सोच रहे हो ?”

“अब यार डिंकी मैं क्या बताऊँ… शादी का सोचती हूँ लेकिन इन सभी में आगे चल कर कुछ न कुछ प्रॉब्लम निकल ही आती है..।
आज तक मुझे कोई ढंग का मैरिज मटीरियल टाइप लड़का मिला ही नहीं शायद !”

“डिंकी मुस्कुरा कर रह गयी..

“तू बता, तेरी लाइफ में कोई आया?  या अब तक ‘दिल ये बेचैन है रस्ते पे नैन है, ज़िन्दड़ी बेहाल है सुर है न ताल है…  चल रहा !”

मंजू के अधूरे गाने को डिंकी ने हामी भरते हुए पूरा कर दिया

“आ जा सांवरिया आ आ आ आ… “

तभी दरवाजे पर घंटी बजी, चिंटू एक झटके में दरवाज़ा खोल कर वहीँ से चिल्ला उठा..

“मम्मी माधव भैया आये है !”

चिंटू की गगनभेदी हुंकार अंदर बैठी डिंकी और मंजू तक भी पहुँच गयी..

क्रमशः

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Nisha
Nisha
1 year ago

Kahin madhav pe nazar na daal de ye ladki

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Nice.

seema Kawatra
seema Kawatra
1 year ago

कहीं प्यारे माधव पर विम्मो की नजर ना पड़ जाए

साँवरिया को पुकारा और वो चले आए

Jagruti
Jagruti
1 year ago

अब तो दोनो लड़कियां जपटेगी माधव के लिऐ ।😀😀😀😀😀

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Bahut sundar

Seema Srivastava
Seema Srivastava
1 year ago

Very beautiful

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

लाजवाब भाग 👌👌👌👌
आज का भाग पढ़ते पढ़ते एक बात मन मे आई,..जो लोग चाय नहीं पीते उनको प्रेशर कैसे बनता होगा 🤔विनोद जी को चाय पिलाओ भई 😄😄।सुलोचना की बहन आ रही है खूब सफाई, तैयारी चल रही,बिलकुल ऐसा ही होता है जब हमारे घर भी कोई मेहमान आने वाले होते है तो हम भी जी जान से लग जाते है।छोटी छोटी बातें से हंसी की फुहार सी बन जाती कहानी पढ़कर,अपना चिंटू तो देखो डिंकी भूतनी है उसको रहने दो श्रुति से इसकी शादी करवाओ 😄😄👏👏बच्चे मन के सच्चे।आ गए अतिथि मतलब सुलोचना की बहन विमला…सच मे एक ही माँ के जन्मे बच्चों की किस्मत बहुत अलग अलग होती,।मन मे एक बात आई कहीं सुलोचना का सपना विमला ना चुरा ले कहीं डिंकी की जगह मंजरी…🤷‍♀️।
देखते है आगे क्या होता है 😊

ROOPSAGAR
ROOPSAGAR
1 year ago

👌👌👌👌👌

जागृति
जागृति
1 year ago

मस्त मजेदार कहानी है
ये अब आया मैरिज मैटेरियल दोनों बहनों के बीच कंपीटीशन न हो जाए वैसे डिंकी को अपने सपने से प्यार है लेकिन मंजू मोहतरमा शायद कुछ खेल खेले और मयंक भी कहीं दौलत के रुप रंग में न फस जाए देखते हैं क्या होगा आगे

Upasna
Upasna
1 year ago

पहली तो नहीं लिख सकी लेकिन अतिथि 5 से शुरू करके आज का भाग भी पढ़ लिया यही उपलब्धि है।
आज का भाग पढ़कर एक बात मन मे उठ रही कि….
क्यों आखिर ईश्वर इतना विभेद करता है ,क्यों किसी को कम तो किसी को जरूरत से ज्यादा देता है और चलो मान भी लिया कि अपनी अपनी किस्मत लेकिन दो बहनों के सम्बन्धों के बीच प्रगाढ़ता न होकर प्रदर्शन क्यों आ जाता है ।
क्यों रिश्ते से अधिक धन हो जाता है ,वैभव प्रदर्शन और अहम अच्छे खासे रिश्तों को चौपट कर देते हैं।
मंजरी…इस नाम से वैसे ही कुछ ज्यादा अच्छा अनुभव नहीं है मेरे पास ,ये मंजू भी अच्छे अच्छों के कान काटने वाली लग रही ।
अपनी dinki चंचल है पर बदमाश नहीं और हो न हो ये मंजुलिका माधव पर भी अपनी बुरी नजर डालने ही वाली है ।
सुलोचना के साथ अब इतना गलत मत करना