
जीवनसाथी -3 भाग -112
विक्रम की साँस चल रही थी…
उसे ज़िंदा देख वो लड़के उसे उठा कर अपने साथ लिए आगे बढ गए…
अपनी गाडी में डाल कर वो उसे हॉस्पिटल ले गए..
दूसरी तरफ भदौरिया ने अपनी पूरी टीम को शौर्य को खोजने में लगा दिया..
वो इस वक्त अपने मैनेजर के साथ खड़ा था..
“आप ही ने तो उसे मरवाया है, अब आप ही उसे ढूंढने की बात कर रहे है !”
“चुप करो.. ऐसी बातें यूँ बोला नहीं करते.. न जानें कब कौन कहाँ से सुन कर उस नागराज तक बात पहुंचा दे..। सुना नहीं, कैसे धमकी दे कर गया है ?”
“वासुकी आया था क्या यहाँ ?”
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“शुक्र मनाओ नहीं आया, अभी तो बस फ़ोन पर धमकी दी है, लेकिन कहीं आ गया न तो मेरे इस पूरे सम्राज्य को ख़तम करने में उसे समय नहीं लगने वाला..।
भूतनाथ है वो.. कभी कभी तो मुझे उसके इंसान होने पर भी डाउट होता है !”
“मुझे तो वो कभी इंसान लगा ही नहीं.. वैसे भी मुझे बेताल सा लगता है…।
इंसानी रूप में राक्षस..। जब भी आप लोगों की मीटिंग में ये पहुँचता है, ऐसा लगता है इसे देख कर ही बाकियों की साँस रुक जाती है..।
चलता है तो लगता है आपके तीन हज़ार स्क्वेयर फ़ीट के हॉल को दो कदम में ख़त्म कर लिया..
कुर्सी पर झुक के बैठने के बावजूद सबसे ऊँचा नजर आता है, और जब खड़ा होता है तो लगता है हमारी आकाश चूमती इमारत के पार इसका सर निकल जायेगा… ये वासुकी कुछ अस्वाभविक लम्बा नहीं लगता आपको !”
“साढ़े छः फ़ीट का ही है, तुम चार फुटिया हो इसलिए तुम्हे ज्यादा लम्बा लगता है !”
“ओह्ह.. मुझे तो उसकी खुनी आंखे भी बहुत बडी लगती है.. जब देखता है लगता है खा जायेगा.. !!”
“अब ये सब छोडो और अपने लड़को को काम पर लगा दो ! आई बात समझ में ?”
“जी मालिक !”. वो वहाँ से निकल गया..
वासुकी अब तक घर नहीं लौटा था, वहीँ उस झील के किनारे बैठा वो जाने क्या सोच रहा था.. शाम ढलने लगी थी.. लेकिन वो जस का तस बैठा था। तभी उसका मोबाइल बजने लगा..।
फ़ोन भदौरिया का था..
वासुकी ने फ़ोन उठा लिया..
“क्या है ?”
“वो लड़का मिल गया है !”..
“क्या ? कहाँ ?” वासुकी अपनी जगह पर खड़ा हो गया..
” 36 लेक टाउन पहुँच जाओ.. !”
“ठीक है.. मैं अभी आ रहा हूँ !”
वासुकी तुरंत भदौरिया के बताये पते पर पहुँच गया..
वहां भदौरिया उसका इंतज़ार कर रहा था..
“कहाँ है ?” वासुकी ने उसे देखते ही पूछा..
“चलो मेरे साथ !”
“मतलब ? यहाँ नहीं है ?”
.”बहुत ख़राब हालत में मिला था, शुकर मनाओ जान बच गयी…. “
भदौरिया के चेहरे पर वासुकी का ज़ोरदार मुक्का पड़ा और उसकी नाक से रक्तधार बह चली..
वो तिलमिला कर रह गया..
“वासुकी… !” वो ज़ीर से चीख पड़ा और वासुकी ने अपने एक ही हाथ से उसकी गरदन दबोच ली..
दर्द से भदौरिया कलप उठा…
उसे साँस नहीं आ रही थी… अपने हाथ लगातार चलाते हुए वो रहम की भीख मांगने लगा…
वासुकी को भी शौर्य का अता पता चाहिए था, इसलिए उसने भदौरिया को छोड़ दिया..
आज तक भदोरिया ने वासुकी को शांत गंभीर कॉर्पोरेट सलीक़े में ही देखा था..
वो मन ही मन वासुकी के गंभीर व्यक्तित्व के कारण उससे दबता तो था, लेकिन वासुकी गुस्से में कभी उस पर हाथ भी छोड़ सकता है ये उसने सपने में भी नहीं सोचा था..।
आज वासुकी का बस एक हाथ पड़ा और भदौरिया के सारे ग्रह नक्षत्र उसके चारों तरफ घूमने लगे। उसे अपनी नानी दादी सब याद आ गई।
जैसे ही वासुकी ने भदौरिया को छोड़ा, भदौरिया उसे साथ लिए वहां से निकल पड़ा।
वासुकी को इस वक्त सिर्फ और सिर्फ शौर्य की ही फ़िक्र थी..।
उसे नहीं मालूम था कि भदौरिया उसे कहां लिए जा रहा है? लेकिन भदौरिया की गाड़ी में उसके साथ बैठा हुआ वासुकी चुपचाप खिड़की से बाहर पीछे छूटते शहर को देखता जा रहा था।
लगभग घंटे भर के सफर के बाद वह लोग एक सामान्य से अस्पताल के सामने खड़े थे। अस्पताल को देखकर वासुकी के माथे पर बल पड़ गए। उसने पलट कर भदौरिया की तरफ देखा और भदौरिया ने कंधे उचका दिए।
” पानी में बहता हुआ वह कहीं दूर निकल गया था। यहीं कहीं आसपास के लोगों ने उसे पकड़ा और इस अस्पताल में भर्ती करवा दिया।”
वासुकी का मन किया भदौरिया का जबड़ा तोड़ दें, लेकिन अपने गुस्से पर काबू करके उसने खुद को संभाल लिया। वह तेजी से अस्पताल की सीढ़ियां चढ़कर अंदर की तरफ बढ़ गया, और उसके पीछे भदौरिया भी चलने लगा…
भदौरिया ने अपने फोन से किसी को कॉल किया और तुरंत ही एक आदमी ऊपर की सीढ़ियां उतरकर उन लोगों के सामने चला आया।
” कहां है वह लड़का?”
भदौरिया के सवाल पर उसने ऊपर की तरफ इशारा कर दिया।
” ऊपर आईसीयू में।”
वह तीनों लोग एक साथ आईसीयू की तरफ बढ़ गये। आईसीयू के पारदर्शी दरवाजे के बाहर पहुंच कर वासुकी ने कांच के अंदर से जैसे ही सामने बेड पर लेटे शौर्य को देखा। उसकी आंखों में ममता की लहर सी दौड़ गई..।
शौर्य के शरीर पर पट्टियां बंधी हुई थी। चेहरे पर भी जख्मों के निशान थे। माथे पर सर को पूरी तरह ढकती पट्टी बंधी थी। इसके अलावा कई जगह छोटे-छोटे अलग-अलग आकार के टेप लगे हुए थे।
शौर्य की हालत बहुत खराब थी। जितना ही शौर्य को देखता जाता था, वासुकी का गुस्सा भदौरिया पर उतना ही बढ़ता जा रहा था।
उसने वापस भदौरिया की तरफ देखा और इस बार भदौरिया ने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए।
” मुझे माफ कर दो वासुकी, मैं नहीं जानता था कि यह लड़का तुम्हारे लिए इतना खास है। अगर मुझे थोड़ा भी मालूम होता तो, मैं कभी इस पर आंच नहीं आने देता। बस एक बार माफ कर दो, मैं इस लड़के को पूरी तरह ठीक करके तुम्हें दिखाऊंगा..।”
“वह तो तुम्हें करना ही पड़ेगा। चाहे लंदन में इलाज करवाओ या अमेरिका ले जाओ। लेकिन यह लड़का दस दिन के अंदर अंदर अपने पैरों पर खड़ा मिलना चाहिए, और अगर इसे कुछ भी हुआ तो तुम्हें मैं ना जीने लायक छोडूंगा, ना मरने लायक।
याद रखना..।”
भदौरिया भय से से कांपते हुए हामी भरने लगा।
उसी वक्त वहां डॉक्टर चले आए।
भदौरिया के साथ वाले आदमी ने उस डॉक्टर को भदौरिया और वासुकी के सामने लाकर खड़ा कर दिया। उनसे शौर्य का हाल-चाल पूछने पर वह डॉक्टर उसके बारे में बताने लगे…
“इसे परसो आधी रात के वक्त कुछ लोग लेकर आये थे.. लड़का बेहोश था, लेकिन सांसे चल रही थी.. ।
सर पर गहरी चोट लगी थी। ऐसा लगा जैसे ये तैर कर पानी पार करने की कोशिश में किसी चट्टान से टकराया और फिर बेहोश हो गया।
चेहरे पर पत्थरो के टकराने से चोटे उभर आयी है..।”
डॉक्टर की बात सुन कर वासुकी वापस शौर्य की तरफ देखने लगा..
“अभी इसकी तबियत कैसी है ? कोई इंटरनल प्रॉब्लम तो नहीं ?”
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“नहीं.. हम लोगो ने जाँच कर ली है.. सर पर ही ज्यादा गहरा ज़ख्म है, बाकी ठीक है..।
हो सकता है एक दो रोज़ में इसे होश आ जाये !”
वासुकी ने एक बार भदौरिया की तरफ देखा और वापस आईसीयू की तरफ देखने लगा..
डॉक्टर ने फीस भरने के लिए जैसे ही अपना मुहं खोला भदौरिया तुरंत उसके पास पहुँचा और उसे फीस की चिंता न करने की सलाह देने लगा…।
और अपने आदमी को इशारा कर दिया..
अब भदौरिया कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था..
अब उसे किसी भी हाल में शौर्य को बचाना ही था।
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मीठी अपने कमरे में तैयार हो रही थी, कि निरमा चली आयी..
“फेयरवेल में जानें के लिए रेडी ?”
“हम्म !” उसने मुस्कुरा कर कहा..
निरमा उसके पास आयी और उसे अपनी तरफ घुमा कर नजर भर कर देखने लगी..
‘”मीठी मैं कुछ कहना चाहती थी.. !”
“मम्मा… प्लीज़.. मैं जानती हूँ, आप क्या कहना चाहती हो !”
निरमा के चेहरे पर रुआंसे से भाव थे..
“मम्मा प्लीज़, मैं इन सब कुंडली वुन्डली के चक्करों पर भरोसा नहीं करती।
आप भी जानती है। बल्कि आप तो खुद नहीं मानती ये सब.. फिर अब क्या हो गया ?”
“बेटा जब किसी अपने पर बात आये न, तो एक माँ के सारे नियम एक तरफ पड़े उबासी लेने लगते है.. दिमाग काम करना बंद कर देता है, और दिल उन्ही बातो को मान लेने की ज़िद करता है, जिनके पीछे कोई लॉजिक नहीं होता !”
मीठी निरमा के पास चली आयी और बिना कुछ बोले उसके गले से लग गयी..
“आपकी मीठी को कभी कुछ नहीं होगा मम्मा… डोंट वरी !”
निरमा के चेहरे पर भी फीकी सी मुस्कान चली आयी..
मीठी निरमा के गालों को चूम कर बाहर निकल गयी..
उसकी सहेली उसे लेने चली आयी थी.. मीठी ने सतरंगी हलके रंगो की बेहद खूबसूरत साड़ी पहनी थी..
आज उसे देख देख कर निरमा का मन नहीं भर रहा था..वो दरवाज़े तक चली आयी..।
मीठी की गाडी जब तक नजरो से ओझल नहीं हुईं वो वहीँ खड़ी रही…
दूर महल की छत पर खड़ी “फू साहब” की नजर भी निरमा के साथ साथ मीठी पर थी..
उनकी आँखे क्रूरता से छोटी हो गयी थी लेकिन चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी..
उनके दिमाग में इस वक्त क्या चल रहा था, ये वो ही जानती थी..
क्रमशः

शुक्र है शौर्य मिल गया और वो ठीक है🙏🏻🙏🏻भदौरिया तुम्हारी खैर नहीं थी अगर शौर्य को कुछ हो जाता तो।वासुकी के मन में ममता के भाव आए शौर्य को देखकर❤️🧿
ये फू साहेब तो कुछ खतरनाक प्लानिंग कर रही हैं शायद😱मीठी की रक्षा करना ठाकुरजी🙏🏻
ये कही फू साहेब की कोई चाल तो नही….गुरू जी के नाम पर इमोशनली निरमा और मीठी को तोड़ना चाहती हो
क्या रूपा भी उनका साथ दे रही है
शौर्य को देखकर वासुकी के मन मे ममता आना …ये भाव ही कली और शौर्य की मोहब्बत का साथ देगा
Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Bahut sundar
Sab thik ho methi aur shaury k sath 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
Mithi shadi ke baad thik rahegi.shauray ki chinta ho rahi hai.vasuki ki tatparta se wo mil gya lekin halat buri hai uski.bas wo jaldi se thik ho Jaye
thank God कि शौर्य सही सलामत है
बना जी ने गलती से ही सही शौर्य की कुंडली सही पद li par फू साहब की कातिलाना मुस्कान बता रही कि
हर्ष की कुंडली में हेर फेर नही की देन है
शुक्र है भगवान् का आभार शौर्य मिल गया ठीक भी हो जायेगा
बाँसुरी, राजा साहेब या शौर्य कोई भी जब किसी का बुरा नहीं करते तो उनका भी ईश्वर अच्छा ही करेंगे
Thank God shaurya mil gaya…
Yeh Roopa ki bua kuchh jyada hi khatarnak lagg rahi hai…kuchh to planning chal rahi hai usake dimaag mai
लाजवाब भाग 👌👌👌👌👌👌👌🥰🥰🫶🫶🫶💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌