
जीवनसाथी -3 भाग -111
वैसे तो पूरा दिन कहाँ कब निकल जाता है, ये पता भी नहीं चलता लेकिन जिस दिन, दिन ढलने का इंतज़ार हो उस दिन एक एक पल भारी पड़ता है…
बांसुरी का आज यही हाल था, न उससे सुबह ढंग से नाश्ता किया गया न दोपहर का खाना..
राजा साहब वहां मौजूद नहीं थे, उनकी शाम तक में दिल्ली से वापसी होनी थी, इसलिए उनसे भी वो कुछ कह नहीं पायी थी..!
दोपहर के भोजन के समय उसने तबियत सही न होने का बहाना कर दिया.. पता नहीं उसका मन इतना व्याकुल क्यों हो रहा था..?
शौर्य का भी फ़ोन नहीं लग रहा था ! और अब उसकी व्याकुलता, बेचैनी एक अजीब सी घबराहट में बदलने लगी थी..।
धीरे धीरे दोपहर ढलने लगी…
शाम की चाय के वक्त पर रूपा के बुलावे पर वो भी पीछे वाले गार्डन में चली आयी।
उसके पहुँचने के पहले ही निरमा और मीठी वहां पहुँच चुके थे..
उन दोनों को देखते ही हमेशा की तरह बांसुरी मुस्कुरा नहीं पायी। जो खबर उन दोनों को आज सुनानी थी, उसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए थी और उसके बाद निरमा का क्या निर्णय होता, ये उससे भी ज्यादा कठिन सवाल था..?
रूपा ने खूब तैयारी कर रखी थी। नाश्ते की मेज पर तरह तरह के देशी विदेशी नाश्ते सजे हुए थे। कचौड़ियां पकौड़ियाँ अगर लगी थी तो, वहीँ कई तरह के फज केक पेस्ट्री विदेशी चॉकलेट्स और कुकीज़ से मेज पटी पड़ी थी..।
लेकिन बांसुरी इन सबसे विरक्त सूखी सूखी आँखों से मीठी को देख रही थी….
कहां तो एक तरफ उन गुरु जी को देखकर उन पर विश्वास करने का उसका बिल्कुल भी जी नहीं कर रहा था, और दूसरी तरफ उन्हीं का कहा सुनकर वह ऐसी बेचैन हो उठी थी।
उसके पिता भी तो कुंडली के अच्छे जानकार थे…।
लेकिन उसके पिता की यह बड़ी अजीब सी जिद थी कि वह अपने किसी भी बच्चे और नाती पोतों की कुंडली नहीं बांचा करते थे। उनका कहना था “मैं खुद अपने करीबियों का भविष्य नहीं देखना चाहता, क्योंकि मैं जानता हूं किसी भी तरीके से आप उस भविष्य को बदल नहीं सकते, ऐसे में अगर कुछ गलत दिख गया तो दिल में मलाल लिए जीना मेरे लिए कठिन हो जाएगा। इस बुढ़ापे में मैं शांति से अपने दिन काटना चाहता हूं।”
बस इसीलिए बांसुरी उनसे कोई चर्चा नहीं कर पा रही थी। लेकिन रह रहकर बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि एक बार शौर्य और हर्ष की कुंडली अपने पिताजी को दिखा दे।
वह चुपचाप उदास सी बैठी थी कि निरमा ने उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया।
” क्या बात है बांसुरी, इतनी गुमसुम सी क्यों है? राजा भैया तो आज शाम को लौटने वाले हैं ना?”
बांसुरी ने हां में गर्दन हिला दी।
मीठी की तरफ देखकर वह उससे पूछ बैठी
“तुम तो दिल्ली में थी ना, कब वापस आई मीठी?”
मीठी ने मुस्कुरा कर “कल आई हूं मौसी” जवाब दे दिया..
“मेरे कॉलेज के कुछ डाक्यूमेंट्स चाहिए थे और फिर स्कूल की प्रिंसिपल रिटायर होने वाली है..।
स्कूल के टीचर्स और कुछ पुराने स्टूडेंट्स मिलकर उनके लिए फेयरवेल पार्टी अरेंज कर रहे हैं। मैं भी हेड गर्ल रह चुकी हूं, इसलिए मुझे सानिया सिस्टर का फोन आया था, बस इसीलिए मैं उनके फेयरवेल को ज्वाइन करने के लिए आ गई.।
कल शाम उनकी फेयरवेल पार्टी है, बस उसके बाद परसों वापस निकल जाऊंगी..।”
मीठी की बात को सुनकर बांसुरी ने धीरे से हां में गर्दन हिला दी।
इसी वक्त रूपा भी आई और मीठी के बगल की कुर्सी खींच कर बैठ गई। निरमा की तरफ चाय बढाकर उसने कुकीज की प्लेट उठाकर मीठी की तरफ बढ़ा दी..
मीठी को कुकीज बिल्कुल पसंद नहीं थी, लेकिन वह अपनी होने वाली सास से जरा दबती ही थी, इसलिए उसने बिना कोई ना नुकर किया चुपचाप एक बिस्किट उठा ली।
” निरमा तुमसे हम कुछ कहना चाहते हैं, अच्छा हुआ कि तुम मीठी को भी साथ ले आई..।”
” रानी साहब आपने जब मुझे मीठी के बारे में पूछा तो मैंने इससे कहा कि आप याद कर रही हैं।
अब आई हुई है तो साथ में ही चले..।”
“बहुत अच्छा किया, जो इसे ले आई। हम जो बात तुमसे कहना चाहते हैं वह मीठी से जुड़ी हुई है, और कहीं ना कहीं दिल में यह आस थी कि काश मीठी भी सामने होती, जब हम तुमसे यह बात कहते। और देखो कैसा इत्तेफाक हुआ कि मीठी भी अपने किसी काम से यहां चली आई..।”
“ऐसी कौन सी बात है रानी साहब, जो आप सिर्फ मुझसे और मीठी से कहना चाहती हैं? यहां तक की इस वक्त रेखा बाई सा और जया बाई सा भी यहां मौजूद नहीं है…।”
“निरमा हमारी बात ध्यान से सुनना। कल हम और बांसुरी ‘फू साहब’ के साथ उनके गुरु जी के आश्रम गए थे। वहां प्रवचन के बाद गुरु जी ने अपने कुछ खास लोगों को मिलने के लिए बुलाया। वहां हमने हर्ष की कुंडली गुरु जी को दिखाई। गुरु जी ने हर्ष की कुंडली देखकर बताया है कि हर्ष की जिससे भी शादी होगी, वह लड़की शादी के बाद जिंदा नहीं रहेगी..”
रूपा कुछ देर के लिए एकदम शांत हो गयी..
निरमा के चेहरे पर हलकी घबराहट सी दिखने लगी..
“रानी साहब… “
कुछ कहते कहते वो चुप रह गयी और रूपा ने उसके कंधे पर हाथ रख कर आगे कहना शुरू किया..
” देखो निरमा, हम तुमसे कुछ भी नहीं छुपाना चाहते। अगर तुम गुरुजी की बातों पर विश्वास करना चाहो तब भी हम तुम्हें नहीं रोकेंगे। क्योंकि हमें अपनी ‘फू साहब’ और उन गुरुजी पर पूरा विश्वास है। दूसरी बात यह है कि हमारी तरह ही तुम्हारे पास भी एक ही संतान है। मीठी के लिए तुम्हारा प्यार कितना गहरा होगा यह हम अच्छी तरीके से समझ सकते हैं। इसलिए तुम इस बात को जानने के बाद जो भी निर्णय लो, हमें स्वीकार है। क्योंकि हो सकता है हम अगर तुम्हारी जगह होते तो हम भी इस शादी से खुद को वापस खींच लेते। हमारे लिए हमारी संतान के जीवन से बढ़कर कुछ भी नहीं। इसलिए अगर तुम इस शादी को तोड़ने में संकोच कर रही हो, तो हम यही कहेंगे कि किसी तरह का कोई संकोच न करो। यह न सोचना कि सामने महल के लोग खड़े हैं। यह मत सोचना कि हर्षवर्धन एक राजकुमार है, और उसका रिश्ता तुम फिरा नहीं सकती।
निरमा तुम भले ही एक सामान्य परिवार से हो, लेकिन हो तो एक औरत ही। और उसके भी पहले तुम एक माँ हो, और कोई भी माँ अपने बच्चों की सुरक्षा और उसकी जिंदगी को ही सबसे ज्यादा अहमियत देती है, इसलिए बिना किसी संकोच के तुम..”
रूप अभी अपनी बात पूरी कर पाती उसके पहले ही मीठी बोल पड़ी..
“नहीं मैं ये शादी नहीं तोड़ना चाहती, चाहे मेरी जिंदगी को कितना भी खतरा क्यों ना हो। लेकिन मैं हर्ष के बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकती..।”
बांसुरी के साथ-साथ रूपा निरमा भी चौंक कर मीठी को देखने लगे। मीठी रूपा क्या निरमा के सामने भी कम ही बोलती थी, लेकिन आज वह चुप नहीं रह पाई..।
“लेकिन मीठी गुरुजी की कही बात सच भी हो सकती है।”
मीठी के गालों को थपथपा कर बांसुरी ने कहा और मीठी ने अपनी प्यारी मासी की उंगलियों को थाम लिया..
“गलत भी तो हो सकती है ना मासी? उन्होंने एक भविष्यवाणी की है, जिसके सच होने के भी उतने ही चांसेस हैं, जितने गलत होने के।
और मान लिया कि उनकी भविष्यवाणी सच हो गई, तब भी मैं मरूंगी हर्षवर्धन की पत्नी के तौर पर ही ना। मुझे मंजूर है।
वैसे भी अगर उनसे शादी टूट गई, तब भी मैं मर ही जाऊंगी। तो अगर मुझे जिंदा रखना है तो मेरी उन्हीं से शादी करनी होगी।”
मीठी ने बांसुरी से हटकर अपनी मां के चेहरे को देखना शुरू किया, और अपनी बात पूरी कर दी।
दोनों मां बेटी एक दूसरे की आंखों को काफी देर तक पढ़ती रही और फिर मीठी अपनी जगह पर खड़ी हो गई।
रूपा की तरफ घूम कर उसने अपने दोनों हाथ जोड़कर झुक कर उन्हें प्रणाम किया, और बाहर निकलने को थी कि निरमा ने उसे रोक दिया।
” मीठी रुको, अगर तुम यही चाहती हो तो यही होगा। हम तुम्हारे माता-पिता है, तुम्हारे भले के लिए ही हर काम करते हैं। लेकिन अगर तुम्हारी खुशी इसी में है तो हम इस बात के लिए भी तैयार है।”
इतना कहकर निरमा रूपा की तरफ देखने लगी। उसने रूपा को देखते हुए अपने दोनों हाथ जोड़ दिए।
” रानी साहब जानती हूं, आप मेरी बेटी की चिंता कर रही है। आप जैसी हस्ती से जुड़ना ही मेरा परम सौभाग्य है।
आपके बेटे से मेरी बेटी का रिश्ता हो रहा है, इतना तो मैंने अपने जीवन में कभी सोचा भी नहीं था। लेकिन कहते हैं ना कि हर बच्चा अपनी किस्मत लेकर पैदा होता है। मीठी की किस्मत में हर्ष का ही नाम लिखा हुआ है। तो अब इस जोड़े को हम किसी भविष्यवाणी को देखकर कैसे अलग कर दें?
और अगर मान लीजिए, गुरुजी की भविष्यवाणी सच भी हो जाती है, तो यह हमारी खराब किस्मत ही होगी।
लेकिन पता नहीं क्यों अंदर से एक आवाज आ रही है, कि भगवान मेरे साथ इतना बुरा नहीं कर सकते। आपके एहसान कभी नहीं चुका पाऊंगी।”
रूपा के सामने हाथ जोड़े वो खड़ी हो गई। मीठी की बातें सुनकर उसका दिल रोने का कर रहा था। वह अपने आप को रोक नहीं पा रही थी, उसने झुक कर रूपा के पैर छूने चाहे, लेकिन रूपा ने उसे बीच में ही रोक कर अपने सीने से लगा लिया। उन दोनों को इस तरह मिलता देखकर बांसुरी के चेहरे पर भी हल्की सी राहत चली आई थी।
अपने हाथ पर बांधी घड़ी पर उसने वक्त देखा, एक बार फिर वही वक्त हो चला था जिस वक्त अक्सर शौर्य उसे फोन किया करता था। लेकिन आज फिर शौर्य का फोन नहीं आया था। पता नहीं यह पागल लड़का कहां है? क्या कर रहा है? सोचती हुई बांसुरी ने अपना फोन उठाया और शौर्य का नंबर मिलाने ही वाली थी कि मीठी आकर बांसुरी के गले से झूल गयी..
“लव यू मासी… !”
बांसुरी के गालों पर अपना प्यार अंकित कर वो बाहर निकल गयी..
***
वासुकी ब्रिज पर पहुंचा और नीचे झांक कर देखने लगा..
नीचे बोट और गोताखोर चारों तरफ से उस झील पर खोजबीन में लगे थे..
वासुकी तेज़ी से नीचे चला गया..
एक गोताखोर नीचे से तेज़ी से ऊपर की तरफ तैरता चला आया..
पानी के ऊपर आकर उसने अपने हाथो से कोई निशान बना कर दिखाया और दो तीन बोट्स उस तरफ बढ़ गयी..
कुछ देर बाद ही एक बडी सी हाइवा के सहारे नीचे कहीं फँसी पड़ी कार को बाहर निकाल लिया गया…
कार वही थी जिसे शौर्य चला रहा था ! वासुकी को फ़ोन करने वाले आदमी ने कार पहचान ली थी !
लेकिन कार का सामने का शीशा टूटा हुआ था, और उसमे अंदर कोई भी मौजूद नहीं था..!
एक तरह से खाली कार को देख कर वासुकी ने गहरी सी साँस ली लेकिन अब भी सवाल वही था कि आखिर शौर्य गया कहाँ ?
गाडी तो बाहर निकल आयी थी। हालाँकि खाली गाडी का करना क्या था?
दूसरी बात ये थी कि अगर गाड़ी के शीशे को तोड़कर शौर्य कार से बाहर निकल गया था तो, या तो वह सुरक्षित किसी स्थान पर पहुंच गया होगा। और या फिर इस गहरी नदी में कहीं गहराई पर डूब ना गया हो।
वासुकी लगातार गोताखोरों को भेज कर शौर्य की तलाश करवा रहा था। इस नदी के साथ एक बात और थी कि इसका एक हिस्सा बहते हुए आगे बढ़कर झरने में तब्दील हो जाता था..।
कही वहां तक ये लड़का बहते हुए पहुँच गया तो उसे ढूँढना मुश्किल हो जायेगा..
वासुकी ने फोन करके अपने और भी आदमियों को बुला लिया। अब उसके लोग गाड़ी पर नदी के किनारे किनारे जमीन पर भी आगे बढ़ते हुए अपनी तलाश जारी रखे हुए थे। इसी सब के बीच पुलिस भी वहां पहुंच गई। पुलिस को जैसे ही शौर्य प्रताप की गाड़ी के एक्सीडेंट का पता चला उन्होंने तुरंत ही केस दर्ज कर लिया…।
भोर होने लगी थी।
लेकिन अब भी शौर्य का कोई आता पता नहीं चल पाया था..।
वासुकी वहीँ एक ऊँचे पत्थर पर बैठ गया था..
उसने अपना फ़ोन निकाला और भदौरिया का नंबर मिला दिया..
भदौरिया गहरी नींद में सोया पड़ा था..
फोन की रिंग पर अधखुली आँखों से उसने फ़ोन देखा और डिस्प्ले में चमकता वासुकी देख कर वो हड़बड़ा कर उठ बैठा..
“बोलो वासुकी ?”
“बहुत गलत कर दिया है तुमने भदौरिया !”
“क्या.. क्या किया मैंने ?”
“अगर वो लड़का अगले चौबीस घंटे में ज़िंदा मेरे सामने नहीं पहुंचा, तो तेरा पूरा कुनबा एक साथ जला कर राख कर दूंगा..।
याद रखना ये वासुकी की ज़बान है। और तू अच्छे से जानता है वासुकी ज़बान से पलटने वालों में से नहीं है.. !”
अपने गले में अटकती हवा को निगल कर भदौरिया ने कट चुके फ़ोन की तरफ देखा और अपने खास आदमी को फ़ोन घुमा दिया..
उस ब्रिज से बहुत दूर झील का एक नीरव कोना था। जहाँ बडी बडी चट्टानें गिर कर अब शिलाओं का रूप ले चुकी थी…
ऐसी ही एक चौड़ी सी शिला पर विक्रम बेहोश पड़ा था…
कुछ चार पांच दोस्तों का एक ग्रुप वहाँ पिकनिक मनाने आया था.. जिनमे से एक की नजर विक्रम पर पड़ी और वो उसे लाश समझ कर चौंक गया.. फिर थोड़ी हिम्मत बटोर कर वो लोग उसकी तरफ बढे..
एक ने झुक कर धीमे से विक्रम के शरीर को सीधा किया और उसके सीने पर हाथ रख दिया..
विक्रम की साँस चल रही थी..
उसे ज़िंदा देख वो लड़के उसे उठा कर अपने साथ लिए आगे बढ गए…
क्रमशः

निरमा ने कितना कठोर मन किया होगा इस फैसले के लिए
रूपा ने भी ये उम्मीद ना की होगी कि हर्ष और मीठी की भावनाए इतनी गहरी है
शौर्य बिल्कुल ठीक होगा राजा का अंश है वो..अपने पिता की तरह fighter
अति सुन्दर रचना है
Vikram mil gaya par shaurya kahan hai 😱😱😱
गाड़ी का कांच टूटा सुन कर राहत तो हुई पर, वासुकी की धमकी भरा फोन भदौरिया को गया इस से सुकून मिला ।
अब भदौरिया तो गया काम से , पर ये शौरी कहा गया होगा? ओर वो और विक्कू अलग कैसे हो गए ? उन लड़कों को विक्कू मिल गया मतलब की शौरी भी वही कही ही तो होगा ? या फिर शौरी खुद कही गायब होना चाहता है ??
विक्रम मिल गया लेकिन शौर्य को ज्यादा दूर भेज दी क्या
👌👌👌👌👌
Vikram ji mil gaye par shaurya kahan hai.
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍haye ye suspense 😪
Bhut tensions wala part h ji