जीवनसाथी -3 भाग -109

जीवनसाथी -3 भाग -109

“अच्छा है मत कर विश्वास वरना पल पल रोयेगी… तेरे बेटे की कुंडली में सर्प फन काढ़े बैठा जो है.. हालंकि ये सर्प रक्षक रहेगा उसका भक्षक नहीं..
मृत्यु योग में है तेरा बालक.. जो बच गया तो बहुत नाम करेगा तेरा, लेकिन बचने के योग बहुत कम है… बहुत कम!”

बांसुरी का शरीर अंदर तक कांप गया।
ये कैसी भविष्यवाणी कर गए थे महाराज… !?

बोलने से पहले सोचना तो चाहिए था ! ऐसा और इतना स्पष्टवक्ता बनने की क्या ज़रूरत ?
बांसुरी पल भर को चुप रह गयी, लेकिन रूपा के चेहरे पर घबराहट नजर आने लगी..

“ये क्या कह रहे है महाराज ? ऐसा नहीं हो सकता !”

“ये हम नहीं कह रहे, लड़के का प्रारब्ध कह रहा !”

“महाराज कोई उपाय तो होगा !”

रूपा ने गिड़गिड़ा कर गुरूजी के पैर पकड़ लिए

“कुछ तो कीजिये महाराज.. आपने सिर्फ उसकी माँ को देख कर बताया है, एक बार उसकी कुंडली भी पढ़ लीजिये !”

गुरूजी ने एक बार बांसुरी की तरफ देखा और फिर रूपा की तरफ देखने लगे..

“कुंडली लायी है बालक की ?”

“जी.. हम दोनों की कुंडली लेकर आये है !”

रूपा पहले पहले तो हर्षवर्धन की कुंडली की बात सुनकर ही जरा घबरा गई थी, लेकिन शौर्य की कुंडली की बात सुनकर उसका दिमाग ही घूम गया। उसने तुरंत एक गुलाबी बटुए से शौर्य की कुंडली निकाली और गुरु जी के सामने रख दी। गुरुजी ने कुंडली हाथ में पकड़ कर पल भर के लिए आंखें मूंद ली और उसके बाद कुंडली को सीधा खोलकर अपने सामने रखे पाटे पर बढ़ा दिया…

कुंडली को कुछ देर तक ध्यान से देखने के बाद गुरु जी के माथे पर बल पड़ गए।
वह स्वयं सोच विचार में पड़ गए थे, क्योंकि उनके मुंह से जो बात निकली थी वह दरअसल कुंडली में कहीं नजर नहीं आ रही थी। कुंडली पढ़ना जानने वाले जानते थे कि अगर कुंडली में मारकेश योग होगा तभी कुंडली का स्वामी तरह-तरह की चुनौतियों और मृत्यु तुल्य कष्ट को पाएगा, लेकिन इस कुंडली में तो अलग ही योग नजर आ रहे थे।
कुंडली के अनुसार जातक के नवम और दशम ग्रह में बहुत ही शुभ योग विराजमान थे…

जातक की कुंडली में सिंह लग्न के साथ बुध की युति कुंडली के स्वामी को बुधादित्य राजयोग प्रदान कर रही है..
फिर इतनी शुभ्र धवल कुंडली के स्वामी के लिए उनके मुहं से ये सब कैसे निकला.. ?

क्या ये क्षणिक विचार किसी प्रकार के अनिष्ट का संकेत मात्र थे ?

वो विचार कर रहे थे और रूपा का पल पल भारी हुआ जा रहा था..

“स्वामी जी कहिये ना क्या दिख रहा ?”

“कुंडली में तो कोई दोष नहीं दिख रहा.. कुंडली बिलकुल साफ़ है.. झूठ नहीं बोलेंगे हम, हमें खुद नहीं समझ आ रहा कि हमारे मुहं से ये शब्द निकले कैसे.. ?
जबकि कुंडली में कोई मारकेश नहीं है..
लेकिन फिर भी एक छाया सी दिख तो रही है… “

“गुरूजी आप कहना क्या चाहते है ?” फू साहब की गंभीर वाणी हवा में तैर गयी..

“कंचन लता, इस समय हम कुछ देर विश्राम करना चाहते है.. तुम सब अब जाओ यहाँ से.. !”

“लेकिन स्वामी जी.. !”

“अभी हम कुछ अस्वस्थता का अनुभव कर रहे है.. जैसे ही हमें लगेगा हम ठीक हैं, हम स्वयं तुम्हे बुला कर सब बताएँगे.. !”

इसके आगे बिना एक शब्द कहे गुरूजी अपनी जगह से उठ गए..
रूपा बांसुरी एक दूसरे की तरफ देखती रह गयी..

फू साहब के साथ वो दोनों वहां से बाहर निकल गयी..
लेकिन इस सब में एक बात हुईं, गुरूजी ने शौर्य की कुंडली सही ही बाँची थी..

एक बार पहले भी शौर्य की कुंडली देख कर एक पंडित जी ने ऐसा ही कुछ बताया था…
बांसुरी ज्यादा कुछ सोचना नहीं चाहती थी.. उसके  स्वभाव की विशेषता थी कि वो खुद को गैरज़रूरी लगने वाली बातों को अक्सर राजा से छुपा जाया करती थी।
शायद इसका एक कारण ये भी था कि वो जानती थी राजा के पास परेशानियों की कमी नहीं थी…

राजनीति में ऊँचा होता उसका कद उसे परेशानियों के पर्वत पर बैठाता जा रहा था..।

शौर्य को इन बातों से कोई लेना देना ही नहीं था, ना उसे इन बातों पर रत्ती भर भी विश्वास था !
वैसे भी उसे ये सब बताने का कोई अर्थ नहीं निकलता था.. इसलिए वो चुप थी, लेकिन रूपा के मन में हाहाकार मचा था..।

“बांसुरी एक बात कहे ?”

“कहिये भाभी सा !”

“शौर्य के लिए तो अब कुंडली का लिखा सुन कर हम निश्चिंत हो गए हैं। हो सकता है जल्दबाजी में बाबा जी के मुंह से कुछ गलत निकल गया हो, लेकिन कुंडली में उन्होंने कहीं से भी कोई दोष नहीं देखा। लेकिन…”

” लेकिन क्या भाभी सा ?”

“बांसुरी, उन्होंने हर्षवर्धन की कुंडली में जो बताया है, वह सुनकर हम परेशान हो गए हैं। उन्होंने कुंडली देखकर बताया है कि हर्ष की जिससे शादी होगी, वह लड़की शादी के तुरंत बाद…”

बांसुरी एकदम से कांप गई। पहले हर्ष की कुंडली सुनने के बाद उसके भी दिमाग में यह बात आई थी, लेकिन तभी शौर्य की बात निकल आई और वह एकदम से कुछ पलों के लिए भूल कर रह गई थी।

हर्ष की होने वाली पत्नी यानि मीठी!  और मीठी को कुछ भी होना, यह सोचना ही उसके लिए इतना दुष्कर हो रहा था कि वह कुछ समय के लिए अवश पङ गई थी।
    उसने गाड़ी में अपनी बगल में बैठी रूपा के हाथों पर अपना हाथ रख दिया।

” भाभी साहब क्या आप सच में इन बातों पर विश्वास करती हैं?”

रूपा कुछ जवाब दे पाती इसके पहले ही सामने वाली सीट पर बैठी बुआ जी पीछे की तरफ पलट गई।

” हम यकीन करते हैं, और बहुत यकीन करते हैं। इन गुरुजी महाराज के किस्से प्रचलित हैं। किवदंतिया बनने लग गई है उनके नाम पर।
    यह जिसके माथे पर हाथ रख देते हैं ना उसे फिर कुछ नहीं होता। इन्हें स्वयं श्री शनि देव का आशीर्वाद मिला हुआ है। यह जिसके लिए जो कह दे, फिर वह बात कटती नहीं है।”

बुआ जी ने अनजाने ही वह बात कह दी जो पीछे की सीट पर बैठी दोनों ही औरतों के दिल पर जाकर लगी। कुछ पलों के लिए सब खामोश हो गए ।
कुछ देर बाद बांसुरी ने हीं इस खामोशी को तोड़ा।

“रूपा भाभी साहब, मुझे लगता है कि हर्षवर्धन की कुंडली वाली बात…”

बांसुरी अभी अपनी बात पूरी कर पाती उसके पहले ही रूपा बोल पड़ी

” हां हम भी यही चाहते हैं कि कुंडली वाली बात मीठी के साथ-साथ निरमा और प्रेम को भी बता दी जाए। उसके बाद वह तीनों जो निर्णय लें वह हमें मान्य होगा।”

बांसुरी ने रूपा की तरफ देखा और चुप होकर खिड़की से बाहर देखने लगी। जाने कैसी अजीब सी मनहूसियत भरी शाम थी ये…।

बांसुरी ने अपनी घड़ी में वक्त देखा शाम के साढ़े पांच बज रहे थे..।

इस वक्त तो लंदन में आधी रात हो रही होगी, अब तक शायद शौर्य सो भी चुका होगा..

“क्या सोच रही हो बांसुरी ? शौर्य सो गया होगा या नहीं.. यही ना ?”

बांसुरी मुस्कुरा उठी.. ” कैसे सब जान लेती है आप ?”

रूपा ने मुस्कुरा कर शौर्य का नंबर लगा दिया..

“तुम्हे गुड नाईट बोले बिना कहां सोता है, बारह बज रहे होंगे अभी वहाँ.. है ना ?”

“हम्म !”

उतनी देर में रूपा का कॉल शौर्य को लग गया..
आज शौर्य गाडी चला रहा था…कली के घर से निकलने के बाद कुछ देर के विक्रम और शौर्य पास के ही एक रेस्त्रां में बैठ गए थे, जहाँ विक्रम का बहुत मन देख कर शौर्य ने उसे पीने की इजाजत दे दी थी।
लेकिन विक्रम को जरा ज्यादा चढ़ गई थी, इसलिए गाड़ी शौर्य चला रहा था। दोनों अपने फ्लैट की तरफ जा रहे थे कि उस वक्त रूप का कॉल आने लगा…।

उस वक्त गाडी एक नदी के ऊपर से गुज़र रही थी, ब्रिज के एक तरफ शौर्य गाड़ी चला रहा था, रास्ता सुनसान था और गाडी अपनी तेज़ रफ़्तार में थी..

और उसी वक्त शौर्य का फ़ोन बजने लगा.. फ़ोन उसकी रानी मॉम का था इसलिए नहीं उठाने का सवाल ही नहीं था….

शौर्य ने अपनी और विक्रम की सीट के बीच के हिस्से में रखे अपने फोन को उठाने की कोशिश की लेकिन फोन हाथ से गिर गया..।

रास्ता बिल्कुल सुनसान था इसलिए अपने पैरों की सहायता से फोन को धीरे से अपनी तरफ खिसका कर शौर्य फोन उठाने के लिए झुका ही था कि तभी स्पीड ब्रेकर पर गाड़ी जरा उछल गई… कहीं गाड़ी का संतुलन न बिगड़ जाए इसलिए हड़बड़ा कर शौर्य ने गाड़ी को संभालने की कोशिश की,और एक तरफ को मोड दी, और उसी वक्त रॉंग साइड से आती हुईं एक लम्बी सी लॉरी ने शौर्य की गाड़ी को ज़ोरदार टक्कर मार दी..

शौर्य की गाडी ज़ोर से उछली और ब्रिज से पलट कर नीचे नदी में गिर गयी..

क्रमशः

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Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

क्यो डरा रही हो डॉक्टर साहिबा
बाँसुरी के साथ साथ हमारा भी बेटा है शौर्य

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Ye kya hua😱😱😱😱😱

Nisha
Nisha
1 year ago

Please please mam shaurya ko kuch nahi hona chahiye.ager kuch hai Jo shaurya ke liye khatra hai toh uska upay bhi hoga sath hi mithi ki jaan bhi khatre me hai 😥😥😥😥

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very nice n Interesting and Imotional n Bahtareen and Lajabab part.

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

😳😳😳😳😢😢😢😢😢😢🥺🥺🥺🥺
अरे यह क्या हो गया इसकी तो उम्मीद ही नहीं की थी शोर्य इतन लापरवाह कैसे हो सकता है कि ड्राइव करते वक्त ऐसी गलती कर जाए और विक्रम ने भी यह गलती कैसे कि उसे इतना नहीं पीना चाहिए था अगर वह शौर्य का अंगरक्षक है तो उसे इसके नाते कभी भी अपनी सीमाएं पार नहीं करनी चाहिए पर जब वक्त खराब हो तो कुछ भी हो सकता है।😢😢😢
अब अगर रानी बांसुरी और रूपा रानी को यह बात पता चलेगी तो उनके दिमाग में महाराज वाली बात बिल्कुल बैठ जाएगी कि वह सही ही कह रहे थे माना यह एक संयोग था पर अब यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि शौर्य के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।
प्लीज डॉ साहिबा ऐसा मत कीजिए मेरा तो दिल घबराने लगा है शोर के बारे में सुनकर😢😢😢😢😢😨😨😨😨😨

Rashmi Hasija
Rashmi Hasija
1 year ago

Oh oh.. ye kya hua

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

जिस बाबा को मैं ढोंगी बाबा कह रही हूँ वो तो सिद्ध बाबा निकले,कुंडली नहीं वो तो ध्यान लगाकर ही भविष्य देख लेते है और उनका कहा सत्य ही हो रहा 🙏ईश्वर रक्षा करे शौर्य की। काश ये बस एक सपना ही हो।

Last edited 1 year ago by Manu Verma
Upasna
Upasna
1 year ago

होनी बड़ी प्रबल होती है ….जो नियति में प्रारब्ध में लिखा है वह तो मिलना ही मिलना है …फिर चाहे उसका वाहक कोई भी बने
जिस कुंडली को पढ़कर चित्त उद्विग्न हो चला था उसे शांति देने की इच्छा से ही लगाया हुआ कॉल कारण बन बैठा इस दुर्घटना का …
होइए वही जो राम रचि राखा …. प्रबल योग की जीत होगी या जीवन की

Ritu Jain
Ritu Jain
1 year ago

Ma’am next part jaldi send kijiye shourya ka soch kar raaton ki neend ud gyi hai pls pls pls

Radhika Porwal
Radhika Porwal
1 year ago

Wow superb episode
Oh no ye kya ho gaya
Kisi ko bhi kuch nhi hona chahiye
Na hi Shaurya ko or na hi mithi ko
Dekhte hai kya hota hai