
जीवनसाथी -3 भाग -107
ये तुम्हारे लिए है !” शौर्य ने अंगूठी कली की तरफ बढ़ा दी…
अपने मन में मचा हाहाकार, पिता की एक दिन पहले की कहीं बातें, अपनी माँ का अतीत, अपने घर वालो की महल के प्रति नफरत सब कुछ एकबारगी वो उसे बताने को आतुर हो उठी, लेकिन फिर उसने खुद को जैसे तैसे संभाला और उस अंगूठी के डिब्बे की तरफ हाथ बढ़ा दिया..
कली ने धीरे से उस डिब्बे को पकड़ा ही था कि शौर्य ने उसमें से अंगूठी निकाली और कली की तरफ बढ़ा दी..
“लाओ अपना हाथ इधर लाओ !”
कली का गला घुटने लगा था, वो अपनी रुलाई रोक नहीं पा रही थी लेकिन उसे रोकना था..
जिस दिन का जाने वो कब से इंतज़ार कर रही थी, वो दिन आ चुका था। लेकिन वो उस दिन को त्यौहार सा मना नहीं पा रही थी, बल्कि उसे इन पलों का इस दिन का सत्यानाश करना था.. ।
कली ने अपना मन कड़ा किया और शौर्य की तरफ देखने लगी..
“आई एम सॉरी शौर्य, लेकिन मैं तुम्हारे लिए ऐसा कुछ नहीं सोचती !”
“ऐसा नहीं सोचती मतलब ? कैसा सोचती हो ?”
“तुम सिर्फ दोस्त हो मेरे, इससे ज्यादा कुछ नहीं.. !”
शौर्य के माथे पर बल पड़ गए, वो आश्चर्य से कली की तरफ देखने लगा..
“कली ये क्या कह रही हो !”
“जो तुम सुन रहे हो शौर्य.. सच कह रही हूँ। मैंने तुममे हमेशा एक अच्छा दोस्त ही देखा है बस.. !”
“बस… ? और कुछ नहीं ?”
गुस्से में शौर्य अपनी जगह पर खड़ा हो गया..
“हम्म !” कली ने धीमे से सर हिला दिया
“क्यों झूठ बोल रही हो खुद से और मुझसे भी !”
“मैं झूठ नहीं बोल रही, तुम्हे ग़लतफ़हमी हो गयी तो मैं क्या करूँ !”
शौर्य से नजर चुरा कर कली ने कहा…
शौर्य एकाएक कुछ कह नहीं पाया, लेकिन उसके दिल पर इस वक्त क्या बीत रही थी, ये वही जानता था.. ।
अचानक ही वो अपने उस काले बचपन में धकेल दिया गया जहाँ उसकी मदद के लिए उसके पास ना उसकी मॉम थी ना डैड…।
स्कूल के रेस्टरूम में वो अकेला पड़ा था और कुछ बच्चे उस पर इल्ज़ाम लगा कर उसे बुलि कर रहे थे..
वो बुरी तरह से रो रहा था, और रोते रोते ही उसने आँखे मूँद ली थी.. इन सब से बचने का उस वक्त उसे यही एक रास्ता नजर आया था कि उसने उस वक्त बेहोशी की चादर ज़बरदस्ती खुद पर ओढ़ ली थी..।
उसकी आंखे बंद ज़रूर थी, लेकिन अपने आसपास मौजूद बच्चो का हल्ला गुल्ला, टीचर्स का आकर सबको खदेड़ना, उनका उसे लेकर बातें करना और फिर गार्ड का उसे गोद में उठा आकर प्रिंसिपल के रूम तक लेकर जाना..
आज भी उसे सब कुछ याद था..।
जैसे सबकुछ कल की ही बात हो..
बारह साल पहले की वो घटनाये उसके जीवन का वो दर्दनाक पहलू था, जिससे वो बडी मुश्किल से उबर पाया था..
उसने खुद को अकेले ही संभाला था और अब जाकर खड़ा हो पाया था। लेकिन आज कली की बात ने उसे वापस बारह साल पीछे धक्का दे दिया था..।
उसके सर में दर्द की लहर सी उठने लगी… उसका सर घूमने लगा, उसे लगा वो खड़ा नहीं रह पायेगा…।
और अगर कुछ देर और वहाँ खड़ा रहा तो भरभरा कर गिर पड़ेगा..
खुद को मुश्किल से समेट कर उसने एक बार बडी तकलीफ के साथ कली की तरफ देखा और मुड़ गया…
वो अपने आप को संभालता हुआ वहाँ से चला गया, और उसे इस तरह जाते देख कर कली के आंसू बहने लगे…
बडी तकलीफ से वो भी दूसरी दिशा में मुड़ गयी…
धीरे धीरे कदम बढाती कली का दिल चीख चीख कर कह रहा था ‘वापस आ जाओ शौर्य, एक बार मुझे सीने से लगा लो, मैं सब कुछ हार जाउंगी..’
मन ही मन सोचती हुईं वो आगे बढ़ रही थी की उसके कंधे पर किसी ने हाथ रख दिया, पल भर में कली की धड़कन शताब्दी से होड़ लेने लगी…
उसकी बहती आँखे रुक गयी और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..
‘अच्छा हुआ शौर्य तुम वापस आ गए, अगर मैंने ऐसा कुछ कहा भी तो तुम्हारा फ़र्ज़ बनता है की मुझसे पूछो बात क्या है कली..?
ये क्या बात हुईं कि तुम भी मुहं घुमा कर चल दिए.. वैसे जाते समय तुम्हारी आँखों की कोरो को मैंने भी भीगा हुआ देख लिया था..।
जानती हूँ तुम मेरे बिना नहीं रह सकते..’
मन ही मन ये सब सोचती कली धीरे से पीछे घूम गयी…
उसके सामने विक्रम खड़ा था..
“क्या हुआ, लिटिल मास्टर को ?”
बिना किसी औपचारिकता के विक्रम ने कली से सवाल कर लिया..
” क्या हुआ मतलब ?”
कली अनजान सी पूछ बैठी
“क्या तुम कुछ नहीं जानती ?”
“किस बारे में पूछ रहे हो विक्रम ?”
विक्रम ने एक गहरी सी साँस भरी और कली की तरफ देख गर्दन हिला दी..
“उनका एक पास्ट है, जिसे आजतक उनके खुद के सिवा कोई नहीं जानता….
बचपन में जब उनकी मॉम जॉब के कारण उन पर ध्यान नहीं दे पाती थी तब लिटिल मास्टर बहुत ज़िद्दी और गुस्सैल बच्चे बन गए थे.. महल में वो किसी की पकड़ में नहीं आते थे..
उनकी खुराफाते इतनी ज्यादा बढ़ गयी थी कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया भेजने का निर्णय ले लिए गया था। हालाँकि रानी बांसुरी नहीं चाहती थी लेकिन उस वक्त वो अपने काम की मजबूरियों में इस कदर जकड़ी थी कि उनकी एक ना चली और लिटिल प्रिंस को बाहर भेज दिया गया..
लेकिन साल भर वहाँ रहने के बाद उनके साथ वहां कोई ऐसी दुर्घटना घटी जिसके बाद राजा साहब और रानी बांसुरी उनको वहाँ से वापस ले आये… उसके बाद रानी साहब ने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा जीवन सिर्फ अपने नन्हे राजकुमार के लिए लगा दिया..
महल में कोई नहीं जानता कि ऑस्ट्रेलिया में क्या हुआ था, पर वहाँ ऐसा कुछ हुआ था जिसका असर लिटिल मास्टर पर अभी कुछ सालो तक मौजूद था..।
तुमसे दोस्ती के बाद वो थोड़ा खुलने लगे थे, लेकिन आज बहुत दिनों बाद उन्हें मैंने वैसा ही परेशान देखा है जैसे पहले कई बार हुआ करते थे.।”
“तुम तो उनके साथ बहुत बाद में जुड़े फिर तुम्हे इतना सब कैसे पता ?”
“मैं महल में शुरू से था, समर सा की टीम का हिस्सा हूँ और प्रेम सर के लिए काम करता हूँ…
जब एक बार लिटिल मास्टर महल से यूँ ही बिना सिक्योरिटी के निकल गए थे, तब उनके पीछे मुझे प्रेम सर ने ही भेजा था, जिससे उन्हें पता भी ना चले और मैं उन्हें प्रोटेक्ट करता रहूँ !”
“ओह्ह.. अच्छा !” कली बात तो विक्रम से कर रही थी लेकिन उसका सारा ध्यान शौर्य की तरफ था..
शौर्य लम्बे लम्बे कदम भरता अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया था..
“मैं अब चलती हूँ, लेट हो जाउंगी ! तुम अपने लिटिल मास्टर का ध्यान रखना !”
कली ने विक्रम से कहा और वहाँ से तेज़ी से निकल गयी….
कली अपने घर पहुँच गयी, शौर्य अपने फ़्लैट पहुँच गया लेकिन दोनों का ही दिल नहीं लग रहा था..।
रात खाने की टेबल पर बैठी कली का कुछ खाने का मन नहीं था.. लेकिन अपने डैडा के सामने वो ये भी नहीं दिखा सकती थी कि उसका मन अच्छा नहीं है..
इसलिए उसकी प्लेट में सरु ने जो सब परोसा वो सब कुछ चुपचाप खाती रही…
उसे यूँ शांति से खाते देख वासुकी को उस पर तरस आ गया, लेकिन वो इस वक्त कुछ भी कह कर माहौल को गमगीन नहीं करना चाहता था..
“सन्डे का प्लान पक्का है ना कली ? हम सब घूमने चल रहे है ना वेनिस ?”
“हाँ डैडा.. !” अपने चेहरे पर ढेर सारी ख़ुशी दिखाती कली चहक कर बोली और वासुकी मुस्कुरा कर रह गया…
शौर्य अपने घर पर खाने की टेबल में बैठा लेकिन उससे भी कुछ खाया नहीं जा रहा था, उसने कुछ नहीं खाया.. कुछ सोच कर वो अपनी जगह से खड़ा हुआ और बाहर निकल गया..
विक्रम समझ गया कि इस वक्त शौर्य को रोकना मुश्किल है, वो भी चुपचाप अपनी गाड़ी की चाबी लिए उसके पीछे निकल गया..
शौर्य जिस वक्त कली के घर के सामने वाली सड़क पर पहुंचा तब तक कली खाना खा कर अपने कमरे में आ चुकी थी….
पता नहीं किसके इंतज़ार में कली खुद अपनी बालकनी में खड़ी आसमान की तरफ देख रही थी..
उसकी बालकनी रोड की तरफ ही खुलती थी… उसकी बालकनी के नीचे सामने रोड पर शौर्य अपनी गाडी में बैठा उसी तरफ देख रहा था कि, कली की नजर उसकी गाडी पर चली गयी…
कली गाडी को पहचान गयी… वो बड़े ध्यान से उस तरफ देख रही थी कि शौर्य गाडी से बाहर निकल आया..
कली ने शौर्य को देखा और पल भर के लिए देखती रह गयी..
फिर जैसे अचानक उसे होश आया..
उसने धीमे से शौर्य को देख हाथ हिला दिया, शौर्य ने भी मुस्कुरा कर हाथ हिला दिया..
कली इस वक्त ऐसे दिखा रही थी जैसे कुछ देर पहले कुछ हुआ ही नहीं..।
कुछ देर दोनों एक दूसरे को देखते रहे फिर शौर्य ने इशारे से कली से पूछा की “उसने खाना खाया ?”
कली ने हाँ में गदर्न हिला दी..
कुछ सोच कर यही सवाल कली ने शौर्य से पूछा और शौर्य ने ना में गर्दन हिला दी..
कली के माथे पर बल पड़ गए..
उसने इशारे से ही वापस पूछा.. की शौर्य ने खाना क्यों नहीं खाया… शौर्य ने बस कंधे उचका दिए..
कली ने उसे जाकर खाना खाने का इशारा किया और शौर्य ने ज़ोर से ना में गर्दन हिला दी..
विक्रम भी कार से लग कर एक तरफ खड़ा चुपचाप इस तोता मैना की जोड़ी को देख रहा था..
कली ने शौर्य को वहीँ रुकने का इशारा किया और अपने कमरे में अंदर चली गयी…
“लगता है चली गयी !” विक्रम ने धीरे से बोला और शौर्य घूर कर विक्रम को देखने लगा
“मेरे लिए खाना लेने गयी है, देख लेना !”
शौर्य ने कहा और आई विश बोल कर विक्रम वापस बालकनी की तरफ देखने लगा….
कली चुपचाप अपनी रसोई में पहुँच गयी.. अब तक सारिका रसोई समेट कर सोने चली गयी थी..
उस वक्त नीचे हॉल और रसोई में कोई नहीं था..
यही तो कली को चाहिए था… उसने फ्रिज खोला और शौर्य के खाने के लिए कुछ ढूंढने लगी..
उसे एक भगोने में पास्ता मिल गया.. उसने पास्ता निकाला उसे फटाफट गर्म किया और पिछले दरवाज़े को खोल कर बाहर गार्डन को पार कर शौर्य तक पहुँच गयी..।
उसने शौर्य को देख उसकी तरफ पास्ता वाला बॉक्स बढ़ा दिया…
शौर्य ने विक्रम की तरफ देखा और पास्ता का बॉक्स अपने हाथ में लेकर उसे दिखाने लगा..
“क्या हुआ ? अब जल्दी से खा लो, कहीं कोई देख ना ले.. !”
कली के ऐसा बोलते ही शौर्य ने हामी भरी और पास्ता खाने लगा.. विक्रम शौर्य को ही देख रहा था..
कली ने विक्रम की तरफ देखा और तभी विक्रम उसकी तरफ देखने लगा..
“क्या हुआ ?”..
“मैंने भी खाना नहीं खाया है !” ठंडी सी आह भर कर विक्रम ने बोला और कली ने अपने माथे पर हाथ मार लिया..
“पहले क्यों नहीं बताया ?”
“तुमने पूछा ही नहीं !”
“रुको.. अब तुम्हारे लिए भी कुछ लेकर आती हूँ !”
विक्रम ये सुन कर मुस्कुरा उठा..
और कली एक बार फिर छुपते छुपाते अंदर चली गई… एक बार फिर फ्रिज में खाना खोजने की कवायद में वो जुट गयी और इस बार उसे एक डोंगे में रखे छोले नजर आ गए.. दूसरे बर्तन में थोड़े चावल भी थे.. उसने दोनों बाहर निकाला और एक कांच के भगोने में चावलों के ऊपर छोले डालकर उसने माइक्रोवेव में गरम करने रख दिया..
गर्म छोले चावल निकाल कर उसने थोड़ा घी ऊपर से डाला और एक चम्मच लेकर उस भगोने को लिए बाहर चली आयी…
उसने बाहर आकर वो बॉक्स विक्रम की तरफ बढ़ा दिया..
विक्रम ने जैसे ही अपना बॉक्स खोला वो ख़ुशी से चहक उठा..
“अरे वाह मेरे में छोले चावल है !”
छोले चावल देख कर शौर्य ने घूर कर विक्रम की तरफ देखा और उसके बॉक्स को लेने उसकी तरफ हाथ बढ़ा दिया..
“नो नो.. लिटिल मास्टर.. बड़े दिन बाद इंडियन खाना मिला है.. मै नहीं दूंगा !”
‘अच्छा.. मुझे नहीं दोगे.. ?” शौर्य ने घूर कर कहा और अपना पास्ता का बॉक्स विक्रम की तरफ बढ़ा कर छोले वाला बॉक्स उससे छीन लिया..
मुहं लटका कर विक्रम ने पास्ता देखा और बेमन से खाने लगा..
“अच्छा सुनो.. !” और शौर्य ने अपने में से थोड़े से चावल विक्रम को दे दिए और वापस बड़े मन से खाने लगा..
कली शौर्य को तृप्ति से खाते देख हलके से मुस्कुरा उठी…
क्रमशः

पलपल रंग बदल रही है दोनों की जिंदगी
पहले दिल दुखाना फिर खाना
Great 😀
कली ने मना तो कर दिया दिल पर पत्थर रखकर पर पता है कि उसका भी दिल नहीं लगने वाला अपने शौर्य का दिल दुखा कर।😞😞😞
प्रेम एक ऐसा एहसास है जो नसीब वालों को ही मिलता है दुनिया में से कई लोग होंगे जिन्होंने सच्चा प्रेम शायद ही किया हो आजकल का प्रेम तो दैहिक सुख तक सिमट कर रह गया है😏😏😏😏
पर बहुत बुरा लगा जब शौर्य को कली ने मना किया बेहद चाहता है वह अपनी कली को और यहां तक वह सिर्फ इसीलिए आया था कि कली को अपना बना सके😔😔😔😔
और सब्र भी नहीं हुआ कि चला आया वह अपनी कली के पास ,कली को भी कहां चैन है उसके बिना अब तो अपने भूखे प्रेमी का पेट भरना भी जरूरी है तो पास्ता और छोले चावल से ही काम चलाना पड़ेगा अभी प्रिंस को😊😊😊😊😊🥰🥰🥰🥰🥰
लाजवाब भाग 👌👌👌👌👌💐💐💐💐💐
Bahut khoob surat part hai
Mam
Padhne me itna man lag jata hai
Aisa lagta hai part khatm hi n ho
In donon ki story bahut achhi lag rahi hai
Harsh or midhi ka bhi likhiye
Hii, part to dijiye
Very nice part
Bahut hi Khubsurat and Shandaar n Jaberdast n Fantastic n Fabulous part, Dr Aperna ji Jivansathi 2 ka agala bhag (108) kub aayaga,please bataya,Aap se kaisaya contact hoga please bataya.
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌💐💐💐💐
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻