मायानगरी -2 भाग -3

मायानगरी -2 भाग -3

उसे आईसीयू में शिफ्ट कर के वहां के स्टाफ को सारी बात समझा कर जय और छवि निकल गए.. अब तक प्रिया और गौरी भी निकल गए थे..।

पर उनमे से कोई नहीं जानता था कि अगला दिन उनके लिए कितना बड़ा सरप्राइज लेकर आने वाला है..

****

गौरी ज़रा घबराई सी थी कि कहीं वेदांत उससे नाराज़ ना हो, लेकिन घर पहुँचने पर ऐसा कुछ नहीं लगा… वेदांत वैसे भी आजकल भुवन के साथ कुछ ज्यादा ही व्यस्त हो गया था..
भुवन का सारा वक्त पार्टी कार्यालय के काम में निकल रहा था.. उसने अपना रात दिन सब कुछ यहीं झोंक दिया था.. ..

अगले दिन टिकट का बाँट बंटवारा होना था… भुवन बहुत मेहनत से एक एक सीढ़ी चढ़ रहा था, उसे और वेदांत को पूरा यक़ीन था कि इस बार भुवन के नाम पर एक टिकट पक्की है, लेकिन किस्मत को क्या मंजूर था, ये कोई नही जानता था..।

सुबह सवेरे से ही पार्टी कार्यालय में उत्सव सा माहौल था.. सारे कार्यकर्त्ता अपने प्रिय नेता की तरफ से इकट्ठा हो रहे थे।
ठीक ग्यारह बजे से सभी को पार्टी के मुख्य कार्यालय पहुंचना था, जहाँ पर पार्टी के मुख्य कर्ता धर्ताओं की मीटिंग होनी थी..
भुवन सुबह ही निकल गया था, आज वेदांत भी बहुत खुश था.. सुबह जब वो नाश्ते की टेबल पर आया तब वहाँ उसके बाबूजी और सुकान्त के साथ भुवन को ना पाकर वो अचकचा गया..

“भुवन भाई कहाँ है ?”

“पता नहीं, हमे तो सुबह से नहीं दिखा !” वेदांत के पिता ने कहा और वेदांत अपनी माँ की तरफ देखने लगा..

उन्होंने भी नहीं पता का इशारा कर दिया, वेदांत अपनी दादी की तरफ देखने लगा

“दादी आप कुछ जानती है ?”

“हाँ… हम कैसे नहीं जानेंगी भला.. हम घर से निकलने वाले एक एक सदस्य पर नजर रखते है, और पूछताछ करते है, तभी तो बहुओं को खटक जाते है। लेकिन फिर भी हम किसी को बिना बताये जानें नहीं देते…।
क्यों पृथ्वीराज, सच कह रहे है ना ?”

“आप कब झूठ बोलती है ?”

“हाँ नहीं बोलती हम झूठ, पर उसमे इतना मुहं सड़ाने  की क्या बात..? वेद सुनो.. भुवन सुबह सुबह हनुमान जी के मंदिर गया है !”

“ओह्ह आज टिकट आबंटन है ना ?”

वेदांत ने मुस्कुरा कर नाश्ते की प्लेट की तरफ देखा और सिर्फ चाय का प्याला उठा लिया..

“क्या हुआ, नाश्ता नहीं करोगे ?” गौरी के सवाल पर वेदांत ने ना में गर्दन हिला दी..

“हम ज़रा भुवन भैया के पास जा रहे है, तुम्हे अस्पताल छोड़ते हुए जायेंगे,! तुम तैयार हो ना ?”

गौरी अपना टिफिन बॉक्स बैग में डालती हुईं हाँ में गर्दन हिला उठी….

वो दोनों लोग घर से निकल गए..
वेदांत के पिता आज चुप बैठे थे, इस बात पर गौरी का ध्यान ज़रूर गया..

“वेदांत, आज बाबूजी कुछ ज्यादा ही चुप से नहीं लगे ?”..

“हम्म ध्यान नहीं दिया हमने ! लेकिन क्यों ?”

“आज तो टिकट बाँटने का दिन है, और एक तरह से वो ही तो सारे निर्णय लेंगे, हो सकता है इसी सब सोच में हों !”

“हाँ हो सकता है, सुनो गौरी !”

“बोलो !”

“तुम मंदिर चलोगी ?”

“लेकिन फिर मैं हॉस्पिटल के लिए लेट ना हो जाऊं… अच्छा थोड़ा तेज़ चला लो गाडी !”

वेदांत हल्के से मुस्कुरा उठा, हालाँकि आज वो भी अंदर से परेशान ही था, सुबह से उसे उसके भुवन भाई के दर्शन नहीं मिले थे..
दोनों तेज़ी से मंदिर की तरफ निकल गए..
मंदिर में दर्शन करने के बाद वेदांत गौरी को लेकर अस्पताल की तरफ निकल गया…. मंदिर में उन लोगो की भुवन से मुलाकात नहीं हुईं, दर्शन कर के  वापस निकल गया होगा ये सोच कर वेदांत ने उसे फ़ोन भी नहीं लगाया..

अस्पताल में गौरी को उतार कर वो निकल गया… अस्पताल पहुँच कर गौरी सीधा इमरजेंसी की तरफ बढ़ गयी..।
कल के केस का क्या चल रहा, यह जानने की उत्सुकता उसे सीधा वहीँ ले गयी..
प्रिया भी पहुँच चुकी थी..
वो प्रिया के पास जाकर खड़ी हो गयी…

“कैसी है वो लड़की ?”

“कौन?”

“कल के पॉइज़निंग केस वाली ?”

“उसकी रात में डेथ हो गयी !”

“व्हाट ?” गौरी एकदम से चीख उठी..

“लेकिन वो तो ठीक होने लगी थी !”

“रिकरेंट अटैक था, उसे रात में कार्डियक स्ट्रोक हो गया !”

“नो… लेकिन !” घबराई सी गौरी इधर उधर देखने लगी..

“क्या हुआ ?”

“जय सर कहाँ है ? उन्हें पता है, ऐसा हो गया !”

“हाँ, उनकी आज सुबह की सर्जरी शेड्यूल थी, वो पांच बजे से ओटी में है ! उन्हें वहीँ बता दिया गया है !”

“और छवि मैडम ?”

“वो कुछ देर पहले यहीं थी… अभी एक और केस आया है, उस में ही व्यस्त है वो !”

“कहाँ है, चल वहीँ चलते है !”

गौरी और प्रिया आपातकालीन कक्ष में भीतर चले गए..
वहां उसी वक्त एक प्रसूता को लाया गया था…
गांव में उस की डिलीवरी करवाने की कोशिश की गयी थी जो नाकाम साबित हुईं थी। उस औरत को ठीक से होश भी नहीं था, और उसकी हालत बहुत ख़राब थी..
छवि उसके परिजनों के साथ खड़ी पेपर पर कुछ ज़रूरी बातें लिखती हुईं उन लोगो पर बरस रही थी…

“इसे कहाँ लेकर गए थे डिलीवरी के लिए ? या घर पर ही करवा रहे थे ?”

छवि ने गुस्से में पूछा और उस औरत के साथ आये लोग कुछ बोल नहीं पाए..

“क्या हुआ मैडम ?” एक नर्स ने छवि से पूछा..

“इतना ऑक्सीटोसिन दे दिया है कि क्या कहूं, पता नहीं डिलीवरी करवाना है या इसकी जान लेनी है.. ! सिस्टर जी तुरंत नायरा मैडम को बुलवाइए, आज गायनेक वो ही है ना.. उन्ही की ड्यूटी होगी !”

“लेकिन मैम वो तो नौ बजे तक आती है !”

“उन्हें कॉल कीजिये तुरंत आने के लिए, आधा घंटा और रुके तो इस लड़की को बचाना मुश्किल हो जायेगा.. !”

“जी मैडम !”

छवि जल्दी से उस औरत के पेपर तैयार करने लगी.. प्रिया और गौरी सहमे हुए से खड़े थे..
सुबह सुबह का ये समय वैसे गौरी को बड़ा पसंद आता था..।

सुबह सुबह ज़मीन तुरंत पोंछा हुए रहने से हल्की गीली रहती थी, और फिनायल की खुशबु उठती रहती थी। ज्यादातर विभागों में उसी समस्य पहुंचीं नर्स अगरबत्ती या गुग्गुल कपूर जला कर धुआं किये रहती थी, फिनायल के  साथ अगरबत्ती की मिली जुली खुशबु उसे बहुत भाती थी, लेकिन आज अस्पताल का माहौल बदला सा था…

गौरी और प्रिया ने देखा, कॉलेज की तरफ से द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी एक पंक्ति में चलते चले आ रहे थे..

“ये तो कॉलेज वाले बच्चे है ना ?”

“हाँ अब क्लिनिकल की क्लासेस शुरू हो गयी ना इनकी !”

हाँ… आपस में बातें करती वो दोनों छवि के साथ ही बनी हुईं थी, लेकिन आज छवि का दिमाग बहुत ज्यादा ख़राब था…
एक तो कल उनकी देखी मरीज़ का आधी रात में ख़त्म हो जाना, दूसरा आज बिगड़ी हुईं डिलिवरी वाले केस का अब तक यूँ ही पड़ा रहना।
प्रोटोकॉल नहीं होता तो वो अब तक नर्स के साथ मिल कर डिलीवरी करवा चुकी होती..

वो वहीँ एक तरफ बैठ कर रजिस्टर में सारी औरपचारिकताये पूरी करती जा रही थी, जिससे डॉक्टर के आते ही प्रोसीजर शुरू हो जाये.. इसके अलावा मरीज़ की सहूलियत के लिए वो जो सब कर सकती थी, वो भी उसने करना शुरू कर दिया था कि तभी नायरा तेज़ी से वहाँ दाखिल हो गयी..

“क्या हुआ ? क्या केस है ?” उसने नर्स की तरफ देख कर पूछा और नर्स उसे उस औरत के पास ले गयी..

“नाम क्या है तुम्हारा ?” डॉक्टर नायरा ने उस औरत से पूछा लेकिन वो हलकी बेहोशी में थी…

उसने पलट कर छवि की तरफ देखा, छवि वहां चली आयी..

“इसका सी सेक्शन करना पड़ेगा !”

“हम्म.. इन लोगों ने इसे खूब सारा ऑक्सीटोसिन दिलवाया है, और शायद नार्मल डिलीवरी के लिए भी बहुत फ़ोर्स किया है.. लड़की अब थक चुकी है, पेंस नहीं ले पायेगी !” छवि की बात पर नायरा ने हामी भरी और नर्स को देख ओटी रेडी करने बोल दिया..

“मैंने पहले ही रेडी करवा दी थी, बस आपका ही वेट कर रहे थे सब !” छवि के ऐसा कहते ही नायरा के चेहरे पर राहत के भाव चले आये..

“शुक्रिया छवि.. वैसे आप भी सर्जन है, आप भी ये काम आराम से कर सकती थी !”

“हाँ मैम, लेकिन प्रोटोकाल भी देखना होता है ना, सी सेक्शन देखे तो है लेकिन परफॉर्म नहीं किया.. यहाँ उतने बड़े हॉस्पिटल में अगर मैं ये काम करूँ, तो मुझ पर किसी और स्पेशलिस्ट का काम करने का चार्ज लगा कर मुझे बाहर का रास्ता दिखा देंगे !”

छवि हल्का सा मुस्कुरा उठी.. उसकी बात बिलकुल सच थी..
वैसे तो वो इतनी प्रतिभावान थी कि बड़े आराम से इस केस को निपटा सकती थी, लेकिन अपने विषय के बाहर जाकर अगर वो चिकित्सा करती तो चिकित्सा सही हो या गलत वो नियमों के घेरे में फंस जाती और उसे अपनी नौकरी गंवानी पड़ जाती, बस इसलिए उस मरीज़ को कष्ट में देख कर भी वो कुछ नहीं कर पा रही थी….
लेकिन अब नायरा के आ जाने से वो सहज हो गयी थी..

वो आपातकालीन कक्ष का अपना काम निपटा कर निकली ही थी कि उसे बुलाने के लिए एक वार्ड बॉय चला आया..
उसके साथ ही प्रिया और गौरी को भी बुलाया गया था..

वो सभी वहाँ से डीन के कक्ष की तरफ बढ़ गए..
वो लोग वहां पहुंचे तब जय वहां पहले से मौजूद था.. जय को देख छवि ने इशारे से पूछा कि वो यहाँ क्या कर रहा है..
जय ने छवि को बैठने का इशारा कर दिया..
वो सभी लोग वहां बैठ गए.. कुछ देर बाद डीन थापर सर के साथ बाक़ी सीनियर डॉक्टर्स भी वहां चले आये..

जय और बाकी लोगों ने उन सब का अभिवादन किया और वापस बैठ गए…
थापर उन लोगों को बुरी तरीके से घूर रहा था..

“कल इमरजेंसी में आया केस आप दोनों ने देखा था ना ?”

“जी सर !”

“ऐसा क्या ट्रीटमेंट किया की रात में लड़की को कार्डियक अरेस्ट हो गया ?”

थापर का सवाल ही ऐसा था जैसे वो जय पर इल्जाम लगाना चाहता हो

“सर ट्रीटमेंट तो वही दिया जो इसमें दिया जाता है, पेट साफ कराने के बाद एंटीडोट ही दिया था.. लेकिन सर ऐसे केस में ज्यादातर पोस्ट ट्रीटमेंट कार्डियक अरेस्ट आने की संभावना रहती है !”

“जब ये पता था तो आप वहां रुके क्यों नहीं ? क्या ये आपकी जवाबदारी नहीं थी ?”

“सर मेरे बाद आये डॉक्टर को सब कुछ बता कर मैं रात बारह के बाद वहां से निकला था, सुबह पांच से मेरी सर्जरी शेड्यूल थी, जिसकी वजह से मुझे रात में वापस निकलना पड़ा।”

“ये तो तुम्हारी लापरवाही मानी जाएगी !”

“सर मेरी क्यों ?”

“तुम्हारी नहीं तो फिर किसकी.. तुमने उस मरीज़ को एडमिट किया था, तो पूरी ज़िम्मेदारी तुम्हारी ही है..
पहली बात तो हर एक मरीज़ को एडमिट नहीं किया जाता,  ये बात कब समझोगे तुम लोग.. ? अगर कोई क्रिटिकल केस लग रहा तो सीधा हायर सेंटर को रिफर कर दो ना.. जब खुद से हैंडल होता नहीं तो सारे केस लेते क्यों हो.. पहले केस लोगे फिर लापरवाही से उस पर ध्यान नहीं दोगे, मरीज़ मरता है तो ज़िम्मेदारी तो हम पर आती है ना !”

“लेकिन सर इसे मेडिकल नेग्लिजेंस नहीं माना जा सकता ! और अगर माना भी जायेगा तब भी डॉक्टर मृत्युंजय इस दायरे में नहीं आते.. ऐसा है तो वो डॉक्टर  जिम्मेदार होंगे जो उस वक्त ड्यूटी पर थे.. !”

अब तक चुप बैठी छवि बोल पड़ी

“आपको ज्यादा बोलने की ज़रूरत नहीं है डॉक्टर छवि क्यूंकि आप भी इस गुनाह में बराबर की शामिल है.. ! इस वक्त जवाबदेही के तौर पर मैं सिर्फ डॉक्टर मृत्युंजय को सस्पेंड कर रहा हूँ, आप ज्यादा बोलेंगी तो आपका भी यही हश्र होगा !”

“बेशक सर मुझे भी सस्पेंड कर दीजिये..! मुझे नहीं पता आप ऐसा क्यों कर रहे है, लेकिन आप जो भी कर रहे ये गलत है सर..।
डॉक्टर मृत्युंजय की इसमें ज़रा सी भी गलती नहीं है, और आप उन्हें इतनी बडी सजा दे रहे है.. !”

“आप को क्या लगता है डॉक्टर छवि, हम लोग इतनी ऊपर की पोजीशन पर है तो बड़े आराम से है ? हर वक्त सूली में टंगे रहते है हम लोग…।
उस औरत के पति ने मेडिकल फोरम में शिकायत डाल दी है…।
अगर मैं मृत्यंजय को सस्पेंड नहीं करता हूँ, तो अस्पताल के नाम पर सवाल खड़ा हो जायेगा..।
मैं कुछ नहीं कर सकता, आप लोग जा सकते है..।
डॉक्टर मृत्युन्जय आप अगले हफ्ते भर के लिए अपनी सारी सर्जरीस कैंसल कर दीजिये.. वापस ज्वाइन करने के बाद शिड्यूल कीजियेगा !”

मृत्युन्जय का खून खौल रहा था लेकिन वहां कुछ बोलने का कोई फायदा नहीं था, यही सोच कर वो चुप रह गया…
वो उठा और तेज़ कदमो से बाहर निकल गया..
छवि ने गुस्से में वहां बैठे सभी की तरफ देखा और वो भी बाहर निकल गयी.. उसी के पीछे गौरी और प्रिया भी निकल गए..
छवि दरवाज़े तक पहुंची थी कि थापर ने उसे आवाज़ लगा दी..

“डॉक्टर छवि, तुम्हारा काम अच्छा है इसलिए तुन्हे बख्श दिया है.. तुम अपना काम कर सकती हो !”

ये सुन कर छवि का दिमाग पूरी तरह ख़राब हो गया..
वो पलटी और खड़ी हो गयी..

“सॉरी सर, लेकिन अगर आप मुझे ससपेंड नहीं कर रहे है, तो भी मैं हफ्ते भर के लिए काम पर नहीं आ पाउंगी..
वैसे भी हम दोनों ने बहुत समय से छुट्टी नहीं ली थी। अब जब आपने जय सर को हफ्ते भर की छुट्टी दे ही दी है, तो मैं भी छुट्टी ले लूंगी.. हम बाहर कहीं घूम कर आ जायेंगे..। अब जब हम पर आपदा आयी ही है तो उसमे अवसर क्यों ना ढूंढ़ लिया जाये !”

छवि हल्का सा मुस्कुरा उठी और थापर के चेहरे का रंग बदल गया..

“लेकिन आप ऐसे कैसे छुट्टी ले सकती है ?”

“सर मेडिकल तो ले ही सकती हूँ.. वैसे भी मेरी तबियत ख़राब लग रही है… आप ठहरे एडमिन वाले, आप इन सब में परेशान ना हो..!
मैं मैनेज कर लूंगी.. मेरा छुट्टी का आवेदन आप तक पहुँच जायेगा सर.. !
बाय द वे, थैंक यू!  आपके कारण मुझे और जय सर को समय साथ बिताने का मौका तो मिला !”

छवि ही जानती थी उसके दिल पर जय के सस्पेंशन से क्या बीत रही थी….
वो जानती थी इस वक्त जय कितना बुरा महसूस कर रहा होगा..
उसे खुद रोना आ रहा था, भले ही उसने वहां डीन के सामने इतनी लंबी लम्बी हांक डाली थी, लेकिन एक डॉक्टर के लिए सस्पेंड होना कितनी ख़राब बात थी, यही सोच सोच कर उसका दिल डूबा जा रहा था..।

बाहर निकलते ही वो ज़रा सा डगमगा गयी, साथ चल रही गौरी और प्रिया ने उसे थाम लिया..
अपना सर पकड़ कर वो बाहर डली कुर्सियों पर बैठ गयी..
इस वक्त एक एक कदम उस पर भारी पड़ रहा था..
वो वहां बैठी गहरी सी साँस लेती आंखे मूंदे थी कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया..
उसने आँख खोली, सामने जय खड़ा था..

“इतनी सैड क्यों हो ? तुम्हारा प्लान था ना कहीं घूमने जाने का.. चलो चलते है !”

जय हल्का सा मुस्कुरा उठा, और उसे मुस्कुराते देख छवि के चहरे पर भी हल्की सी मुस्कान चली आयी..

क्रमशः

4.7 35 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

59 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

ये तो गलत बात है
एक डॉक्टर ईमानदारी से अपना फर्ज निभा रहा है उसपर भी इन सिनियर को दिक्कत है
अपने बेटे की गलती नही दिखाई दी उन्हे या देखना नही चाहते

अपने जूनियर पर अपना रौब डाल लो बस

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

मुझे लगा यह था कि पक्का वह विजय थापर अपने बेटे का बदला लेने के लिए जय और छवि को टारगेट करेगा और उसने बिल्कुल वैसा ही किया।😡😡😡😡
मैंने कुछ भी समीक्षा में भी यही लिखा था मुझे उसके इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे थे अपने बेटे का बदला निकालने के लिए उसने इतना घटिया काम करना जरूरी समझा कोई ऐसे कैसे कर सकता है इतना अनुभव होने के बाद भी एक डॉक्टर होने के बाद भी इतनी घटिया हरकत ।😞😞😞😞
अपने बच्चों की गलती नहीं दिखी क्या आए ने जो एक ऐसे इज्जतदार डाक्टर के ऊपर ऐसा घटिया इल्जाम लगाने चले आए 😠😠😠😠
मुझे तो लग रहा है उसे लड़की के करने में भी नहीं करना है उसे मार कर अपने बेटे के लिए बदला ले रहे हैं ये घटिया इंसान।🥺🥺🥺😏😏😏😏😏😏
छवि ने बोल तो दिया कि आपदा में अवसर ढूंढ रही हूं पर उसकी शकल देख कर ही पता लग रहा है वह कितनी तकलीफ में है😓😓😓😔😔😔

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Nice part

Kavita
Kavita
1 year ago

Dirty politics

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Bahut badhiya ,aafat mai avsar…

जागृति
जागृति
1 year ago

थापर जैसे लोग अपने ऊपर किसी की काबिलियत सहन नहीं कर पाते हैं बहुत ही शानदार भाग

Meera
Meera
1 year ago

जय छवि को साथ समय बिताते तो हम भी देखना चाहते थे पर ऐसे डॉ जय को सस्पेंड होते देख तो बिलकुल नहीं , ये थापर न कोई खुन्नस निकल रहा है , पर छवि को यूं sad देख जय का यूं नॉर्मल बिहेव करना एक अच्छे जेंटलमैन की निशानी है , पति कितना भी दुखी हो पर जब वो अपनी संगिनी का मायूस चेहरा देखता है तो अपना दुख भूल कर अपने जीवन साथी के चेहरे की मुस्कान ढूंढने में जुड़ जाता है ♥️👌🏼👌🏼👌🏼

Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

Very very nice part 👌👌

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Sweet but sad also. Hamare pyare Dr. Jai ko suspend kar diya jo apna kaam pooja ki tarah karte hain.