मायानगरी -2 भाग -2

मायानगरी 2,भाग -2

“कैंटीन चले ?”

गौरी ने पूछा और वेदांत ने हामी भर दी..

” मुझे साथ लेकर चल रहे हो ना, या कहीं तुम दोनों को यह तो नहीं लग रहा कि मैं कबाब में हड्डी हूं ?”

प्रिया ने वेदांत को छेड़ते हुए पूछा और वेदांत हंस कर उसे चिढ़ाने लगा

“कबाब में फंसी हड्डी तो तुम हो, लेकिन ऐसे हम बोलेंगे तो अच्छा नहीं लगेगा ना ?”

प्रिया ने उसे घूर कर देखा

“तुम चाहोगे भी ना कि, तुम दोनों को अकेले छोड़कर मैं चली जाऊं, तो भी मैं नहीं जाने वाली समझे? घर में तुम दोनों को अकेले रहने का बहुत मौका मिलता है! तुम्हारा बेडरूम भी काफी बड़ा और खूबसूरत सा है, तो कॉलेज में तो इसे मैं अकेले नहीं छोडूंगी!”

प्रिया हंसकर गौरी की बात कह आगे बढ़ गई..
तीनों हंसते बात करते हुए वहां से कैंटीन की तरफ बढ़ गए! वह दोनों लड़के जो बुरी तरह से पिट चुके थे, अपनी बाइक की तरफ बढ़ रहे थे! लेकिन उनमें से एक का खून जबरदस्त तरीके से खौल रहा था…

“क्या हुआ, अब इतने गुस्से में क्यों है?”

” छोड़ूंगा नहीं मैं इस डॉक्टर को, समझता क्या है खुद को? यह जानता नहीं कि उसने किस से पंगा लिया है!”

” मेरे भाई, तेरे पापा यहां डॉक्टर हैं, तू नहीं! तू इन लोगों से कैसे बदला ले सकता है?”

” मेरे पापा डॉक्टर नहीं डीन है, और अब तू देख अगर मैंने इस मृत्युंजय को रास्ते पर नहीं ला दिया ना, तो मेरा नाम भी अखिल नहीं!”

” अखिल, काम तो यार हमने गलत किया था..
तुझे भी क्या जरूरत थी, इस लड़की को सिम बदल बदल कर परेशान करने की!”

” फन था यार! मजाक था, उसे इतना सीरियसली लेने की क्या जरूरत थी?”

” अगर मजाक ही था तो एक बार फोन करता और बात खत्म करता! तूने तीन बार सिम बदलें, उसे बार-बार परेशान किया उसके व्हाट्सएप पर मैसेज भेजें! उसके बाद उसका पीछा भी करने लगा! यह सब थोड़ा ज्यादा ही हो गया ना!”

” हां जानता हूं, थोड़ा ज्यादा हो गया! इतना मैंने भी नहीं सोचा था, लेकिन इन दोनों लड़कों ने जैसे हमारी आरती उतारी है ना, वह ज्यादा नहीं बहुत ज्यादा है! और उसका बदला इन दोनों को चुकाना पड़ेगा!”

” जिसको भी जिस चीज का बदला चुकाना है, वह चुकता रहेगा, फिलहाल तुम दोनों थाने चलो!”

वह अपनी बाइक पर बैठने वाले थे कि, उनके ठीक पीछे पहुंच चुकी लीना ने अपना फरमान सुना दिया…
दोनों लड़के चौंक कर पीछे पलट गए।

” आप ?”

“जी हां, मैं तुम दोनों को तुम्हारे ससुराल ले जाने आई हूं। अब इस बाइक को छोड़ो और चलकर जिस डोली को मैं लेकर आई हूं, उसमें सवार हो जाओ।”

” मैडम आप जानते नहीं मैं कौन हूं?”

उस लड़के के ऐसा बोलते ही, लीना का एक जोरदार तमाचा उसके चेहरे का भूगोल बिगड़ गया। उस लड़के ने भद्दी सी एक गाली दी, लेकिन उसे समझ में आ गया कि लीना के सामने कुछ भी कहना बेकार है।

वह दोनों लड़के चुपचाप जाकर लीना की गाड़ी में सवार हो गये, और लीना उन्हें लेकर अपने स्टेशन की तरफ निकल गई….

लीना उन दोनों को लेकर स्टेशन पहुँच गयी लेकिन मुश्किल से डेढ़ दो घंटे के अंदर ही अखिल के पिता अपने लॉयर को लेकर पुलिस थाने चले आये और अपने रसूख और पैसों के दम पर अपने बेटे और उसके दोस्त को बचा ले गए..
वकील अपने दाव पेंच इतने पुख्ता कर लाया था कि लीना की कोई दलील काम नहीं आयी.. और वो उन दोनों लड़को अखिल और शुभम को साथ लेकर चला गया.. ।

इनमें से अखिल थापर के पिता विजय थापर मायानगरी मेडिकल कॉलेज में डीन के पद पर कार्य करते थे..।
वो एक पुराने और अनुभवी चिकित्सक थे, उन्होंने अब  तक खूब पैसा बनाया था। और अब अपनी शासकीय सेवा से सेवनिवृत्त होने के बाद से मायानगरी का कार्यभार संभाल रहे थे..

***

शाम हो चुकी थी, इंटर्न्स की ड्यूटी आज के लिए पूरी हो चुकी थी.. अपना अपना काम समेट कर प्रिया और गौरी भी बाकी लोगो के साथ बाहर निकलने वाले थे, लेकिन उन्हें जय की ओपीडी में रजिस्टर नहीं दिखा.. सिस्टर से पूछने पर उसने बताया की आज जय की इमर्जेंसी ड्यूटी है, और शायद वो रजिस्टर वहाँ ले गया होगा..
ये सुन कर गौरी और प्रिया भी इमरजेंसी की तरफ बढ़ गए..
वो लोग वहां पहुंचे, उसी वक्त छवि भी वहां चली आयी..

“आओ आओ.. तुम दोनों भी आ जाओ.. हम लोग बस कॉफी ही पीने जा रहे थे, मैं घर से कॉर्न सेंडविच भी बना कर लायी हूँ !”

छवि ने चहक कर अपना टिफिन बॉक्स खोल दिया..
उन चारों के अलावा वहां दो नर्सेज भी मौजूद थी, सभी की तरफ टिफिन बढ़ाने के बाद आखिर में बचे दो सेंडविच छवि और जय ने उठा लिए..
गौरी खाते हुए छवि की तारीफ कर उठी…

“बहुत टेस्टी बने है मैम.. आप तो खाना बहुत टेस्टी बनाते है !”

“सब कुछ नहीं, पर हाँ कुछ चीजे बना लेती हूँ.. ।”

सबका खाना पीना हुआ ही था कि हङबङाते हुए एक लड़का आपात चिकित्सा विभाग में पहुँच गया..

“मैडम मेरी वाइफ को बचा लीजिये प्लीज !”

वो घबराया सा रोता हुआ गिड़गिड़ाने लगा। उसी के पीछे अस्पताल का स्टाफ़ उसकी बीवी को स्ट्रेचर पर डाल कर दौड़ते हुए अन्दर की तरफ ले आया..

जय तुरंत अपनी जगह से खङा हुआ और उस लड़की के पास पहुंच गया..
क्या हुआ है इन्हे ?”

जय के पूछते ही वो लड़का रोते हुए सब बताने लगा..

“डॉक्टर साहब, झगड़ा हुआ था हमारा सुबह, अब तक बस वही बातें लिए बैठी थी, गुस्से में इसने कीटनाशक पी लिया.. बचा लीजिये डॉक्टर साहब, अब कभी नहीं झगड़ा करूँगा, महादेव की कसम !”

एक गहरी सी साँस लेकर जय ने उसके कंधे थपथपाए और तेज़ी से उस लड़की की तरफ बढ़ गया..
अब तक में उसके मुहं को खोल कर उसमे मशीन डाल कर छवि ने उसके स्टमक वाश की तैयारी कर ली थी..

उसे उल्टियां करवाने के साथ ही तेज़ी से इसके दूसरे हाथ पर इसका बीपी और पल्स मॉनिटर किया जानें लगा..
जय ने टॉर्च लेकर लड़की की आँखों को खोल कर जाँच किया और उसके चेहरे को हिला डुला कर उसे जागते रहने को कहने लगा..

कुछ देर पहले का इमरजेंसी रूम जहाँ सब सुकून से बैठ कर खा पी रहे थे, अब जंग के मैदान में बदल गया था…

“मैं इसे वाश करवा रही आप हैंडबुक देख लो !”

छवि ने जय से कहा और वापस अपने काम में लग गयी..
जय ने तुरंत रजिस्टर निकाला और लड़की का नाम उम्र सब उसमे दर्ज़ करने लगा..
उस लड़के को बुला कर बाकी सारी जानकारी लेने के साथ ही उसने एक फॉर्म भर कर उस लड़के के सामने कर दिया..

“ये क्या है डॉक्टर साहब ?”

“इमरजेंसी अडॉप्शन फॉर्म है.. आपको इसमें दस्तखत करने होंगे !”

“क्या लिखा है इसमें ?” उस लड़के ने पूछा और वही खड़ी बुज़ुर्ग नर्स चिढ कर बोल पड़ी..

“पढ़ लो ना.. इंग्लिश हिंदी दोनों में तो लिखा है !” जय ने उस नर्स की तरफ देख कर उसे शांत रहने का इशारा किया और उस लड़के को बताने लगा..

“इसमें लिखा है हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे है, लेकिन चूँकि ये एक इमरजेंसी केस है इसलिए हम इस बात की कोई गारंटी नहीं दे सकते कि हम इन्हे बचा पाएंगे या नहीं..।
फिर भी हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे और इस सब में जितने ज़रूरी प्रोसीजर होंगे, सब कुछ फॉलो करेंगे जिसके लिए आप अनुमति देते है..।
इसके अलावा अगर आपके मरीज़ को प्राणहानि या और कोई हानि होती है तो उसके लिए डॉक्टर्स या अस्पताल जिम्मेदार नहीं होगा..।
देखिये ये एक औपचारिकता है, जो हमें करनी ज़रूरी है, आप बिना समय गंवाए इस पर हस्ताक्षर कीजिये, उसके बाद मुझे पुलिस को भी इन्फॉर्म करना होगा..।”

जय ने उस लड़के को सब समझाने के साथ ही उसी नर्स को पुलिस को फ़ोन करने भी कह दिया..
नर्स ने तुरंत पास के पुलिस थाने में फ़ोन लगा दिया..

वो लड़का दस्तखत करने तैयार नहीं हो रहा था, लेकिन जय के समझाने पर बडी मुश्किल से वो तैयार हो गया  

लड़की भी तड़पते हुए लगातार मुझे बचा लो की प्रार्थना कर रही थी..
अचानक आये इस केस के कारण गौरी और प्रिया भी निकल नहीं पाए और वही अटक कर रह गए…

वो दोनों भी भाग कर छवि की मदद कर रहे थे.. कोई एंटीडोट का इंजेक्शन भर रहा था,कोई नार्मल सेलाइन की बोतल में दवा डाल रहा था..
जय बाकी सारी औपचारिकताएं देख रहा था…..
उसी समय  डॉक्टर विजय थापर अपने राउंड पर थे, वो वहाँ चले आये..
उन्होंने इमरजेंसी में इतनी भागदौड़ देखी तो वहाँ रुक कर नर्स से जायज़ा लेने लगे.. और उसके बाद जय के पास पहुँच गए…

“क्या केस है डॉक्टर मृत्युंजय ?”

“सर पॉइज़निंग केस है, सुसाइडल !”

“पुलिस को इन्फॉर्म किया ?”
.
“जी सर, कर दिया है, पुलिस आती ही होगी !”

“कंसेंट अप्रूव करवाया ?”

“जी सर, करवा लिया है !”

“हायर एथोरिटी को इन्फॉर्म किया ?”

“बस सर वही करने जा रहा था !”

“करने जा रहा था मतलब ? अब तक किया नहीं ? जबकि चालीस मिनट से ये केस तुम्हारे हाथ में है और तुमने अब तक सुपर स्पेशलिस्ट को इन्फॉर्म करना ज़रूरी नहीं समझा !”

“ऐसी बात नहीं है सर, सिंपल पॉइज़निंग है, स्टमक वाश के साथ ही एंटीडोट दिया जा चुका है, कुछ देर में ही वाइटल्स नॉर्मलाइज हो जायेंगे, और लड़की खतरे से बाहर हो जाएगी..
सुपर स्पेशलिस्ट को बुलाने लायक कुछ लगा नहीं !”

“अच्छा मतलब अब तुम इतने बड़े डॉक्टर हो गए हो कि, तुम्हे और किसी की ज़रूरत ही नहीं रही ।”

“नहीं सर वो मतलब नहीं था मेरा,  मैं बस ये कह रहा था की सुपर स्पेशलिस्ट की ज़रूरत नहीं है, लेकिन हायर अथॉरिटी को तो इन्फॉर्म करूँगा ही।”

“इतना घमंड सही नहीं है मृत्युंजय, जिस दिन ऊंचाई से गिरोगे सीधे खाई में जाओगे ।”

“सर घमंड वाली कोई बात ही नहीं है।”

“तो अब तक इन्फॉर्म क्यों नहीं किया ?”

सर मैं उसी सब में लगा हूँ.. मरीज़ को भी तो देखना है…. ।”

“अब तुम मुझे बताओगे कि मरीज़ को कैसे देखना है, कुछ ऑपरेशन कर लिए तो खुद को बहुत बड़ा डॉक्टर मान बैठे, है.. ।”

“नहीं सर गलत लग रहा आपको।”

“तुम्हे ही बस पता है गलत सही सब.. है ना ! जाओ अपना काम करो, बाकी मैं देख लूंगा ।”

“सर ये मरीज़ ऑलमोस्ट स्टेबल है।”

“मुझे सिखाने बताने की ज़रूरत नहीं, तुम जाओ ।”

जय की समझ से बाहर था कि डॉक्टर थापर उससे इतना चिढ कर बात क्यूं कर रहे है..? अब तक में मरीज़ के और परिजन भी वहाँ पहुँच गए थे.. लड़की की हालत अब पहले से बेहतर थी, इसलिए उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था..
साँस लेने में उसे अब भी तकलीफ थी, इसलिए उसे फ़िलहाल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था..

उसे आईसीयू में शिफ्ट कर के वहां के स्टाफ को सारी बात समझा कर जय और छवि निकल गए.. अब तक प्रिया और गौरी भी निकल गए थे..।

पर उनमे से कोई नहीं जानता था की अगला दिन उनके लिए कितना बड़ा सरप्राइज लेकर आने वाला है..

क्रमशः

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Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

बिना सरप्राइज के जय का जीवन कहाँ
डॉक्टर अपने पर्सनल इशू मे अपना कर्तव्य नही भूलते डॉक्टर थापर को भी ये याद रखना चाहिए

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

करने को तो इंसान बहुत कुछ कर लेता है लेकिन जब उसे अपनी मौत खड़ी दिखती है तो बाद में पछताने के अलावा उसके पास कुछ नहीं रह जाता।🥺🥺🥺
उसे लड़की ने गुस्से में आकर इतना बड़ा कदम उठा जरूर लिया है पर अब इतनी बड़ी मुसीबत देखकर वह भी घबरा गई है और बचाने की गुहार लगाने लगी।😢😢😢😢
माना की केस में डॉक्टर मृत्युंजय के हाथ में है और वह उसे बचा लेंगे इतना यकीन भी है पर फिर भी पता नहीं क्यों एक अजीब सी घबराहट मन में भारी है कि ऐसा ना हो तो उसे लड़की को कुछ हो जाए और उसे डॉक्टर मृत्युंजय पर बात आ जाए क्योंकि विजय थापर के इरादे मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं ।😠😠😠
🙄🙄🙄बिना बात के उन्होंने डॉक्टर मृत्युंजय को डांट भी दिया वह बात का बतंगड़ भी बना दिया अब मुझे लग रहा है कि यह विजय थापर शायद इस कंजरे अखिल के पिता है जो बिना फालतू में बात बढ़कर जय से बदला ले रहे हैं अपने बेटे की पिटाई का।😡😡😡

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

बहुत समय के बाद सबसे मिलकर अच्छा लगा।वही अस्पताल की आपाधापी कईं दिनों बाद देखने को मिली।

Meera
Meera
1 year ago

पता नहीं था , की डॉ लोग को इमरजेंसी कैस हैंडल करते समय मरीज़ के साथ साथ इतनी सारी ओर बातो का भी ध्यान रखना होता है ? अगर डॉ लोग ये सब देखने बैठे की मरीज़ को देखे?? ये थापर क्यों इतना चिढ़ा हुआ है ? बल्कि जब तो उसे पाने अच्छे डॉक्टर लोग से अच्छे से बना कर या उनकी तकलीफें दूर करने के बारे में ज्यादा सोचना चाहिए !! डॉ जय ओर छवि की मेहनत से आज एक जान बच गई 🫡🫡🫡👌🏼👌🏼👌🏼🙌🏼🙌🏼

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Nice.

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very nice n good n Shandaar and Jaberdast part

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

Dr. थाप्पर अपने लडके को ना समझाकर डॉ. मृत्युंजय को डांटने लगा और ये नहीं देखा कितनी मेहनत मशक्त के बाद उस लड़की की जान बचाई है मृत्युंजय और उसकी टीम ने।ऐसा ना हो dr. मृत्युंजय से बदला लेने के उस लड़की को कोई नुकसान पहुंचा दे। बेटे के प्यार मे अंधा बाप ये भी भूल जाएगा क्या वो खुद भी एक डॉक्टर है।
बहुत बेहतरीन भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।

Ashok Garg
Ashok Garg
1 year ago

ye Thaper jarur gadbad karega nice part Maya nagari ki Maya

जागृति
जागृति
1 year ago

Dr Thapar jaroor apne bete ka badla lene ke liye socha hoga kitne bhrasht log hote hai har kshetra mein fir bhi Drs. ko sulut hai kyunki Prithvi k dev vaise hi nahi kahlate hai vo log ek sahi or saccha dr mariz ki antim sans tak usei bimari se ladta or bchana chahata hai

Neeta
Neeta
1 year ago

🙏🙏🙏sab sahi ho