
जीवनसाथी -3 भाग -106
ढेरों अंगूठियों के बीच आखिर उसने एक अंगूठी कली के लिए चुन ही ली…
उस अंगूठी में एक छोटी सी अधखिली कली थी जिस कली के बीचोबीच हीरा जड़ा था..
वो अंगूठी हाथ में लिए वो बडी देर तक उसे देखता रहा..
“सर बहुत सुंदर चॉइस है आपकी, एकदम रॉयल.. ये क्वीन विक्टोरिया की अंगूठी की फर्स्ट कॉपी है.. !”
“मुझे फर्स्ट कॉपी क्यों, मैं तो रियल रिंग ही खरीदना चाहूंगा !”
“सर वैसे तो राजपरिवार के गहनों की कॉपी बनती ही नहीं। जो उन लोगो ने पहन लिया उसे या उस डिज़ाइन को कोई और नहीं पहन सकता।
लेकिन ये एक अकेली अंगूठी है, जिसके लिए क्वीन ने अपने बर्थडे पर इसकी फर्स्ट कॉपी इश्यू की थी.. सर आप बहुत लकी है, कि ये अंगूठी आपको मिली !
ये कल ही हमारी शॉप पर आयी है !”
एक गहरी सी साँस लेकर शौर्य ने उस अंगूठी को पैक करने कह दिया..
“अब ये मेरी क्वीन की ऊँगली में होगी !”
शौर्य ने मुस्कुरा कर उस गुलाबी बक्से को अपने हाथ में लिए और कोई इंग्लिश धुन गुनगुनाता हुआ वहां से बाहर निकल गया..
गाड़ी अपने घर की तरफ ले जाते किसी बेखयाली में उसने गाडी कली के घर की तरफ घुमा ली…
रात गहरा रही थी, कली के घर पर सब उदास थे…
सब अपने अपने कमरों में अपने बिस्तर पर लेटे सोने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन नींद सबकी आँखों से कोसो दूर थी..
वासुकी अपनी आरामकुर्सी पर आंखे मूंदे बैठा था, और नेहा की आवाज़ उसके कानो में गूंज रही थी…
“गोरी-गोरी बइयां, हरी – हरी चूड़ियाँ
बइयां पकर हर लीन्हीं रे, मोसे नैना मिलाइ के…”
ये उदास सी धुन वासुकी के कमरे से गूंजती बाहर की हवाओं में घुल मिल रही थी..
मेन गेट के बाहर शौर्य ने अपनी लम्बी गाडी लाकर रोकी और अनजाने ही उसकी नजर कली की खिड़की की तरफ उठ गयी..
कली को नींद नहीं आ रही थी, करवटें इधर से उधर पलटते हुए वो बेचैनी से उठी और खिड़की पर चली आयी..।
उसी वक्त नीचे रास्ते पर आकर रुकी शौर्य की कार का शीशा नीचे हुआ और शौर्य पुलक से कली की खिड़की की तरफ देखने लगा..
दोनों की नज़रे मिली और शौर्य मुस्कुरा उठा..
कली के दिल में राहत उतर गयी.. लेकिन पल भर में उसने खुद को संभाला और खिड़की के पट बंद कर लिए..
शौर्य कली की इस हरकत पर मुस्कुरा उठा।
उसे लगा कली उसके साथ शरारत कर रही है.. रात ढल रही थी, इसलिए वो भी वहाँ से घर के लिए निकल गया..
अगली सुबह कली अपने कमरे में उदासी में डूबी तैयार हो रही थी, लेकिन कुछ सोच कर उसने खुद को संभाला और कमरे से निकल कर चहकती हुईं नीचे उतर आयी..
नीचे सारिका नाश्ता तैयार कर रही थी..।
दर्श वहीं बैठा अख़बार पढ़ रहा था.. वासुकी अब तक अपने कमरे में ही था..
कली भागकर सरु के गले से झूल गयी, एक बार फिर वो इस घर की नन्ही सी बच्ची बन गयी..।
“क्या बनाया सरु नाश्ते में ?”
“चीज़ चिली टोस्ट और ग्रिल्ड वेजिज़..लाऊँ ?”
“हम्म… मुझे बहुत भूख लगी है !” मुस्कुरा कर कली ने अपनी प्लेट निकाली और सरु के पास ले आयी….
सरु ने उसकी प्लेट में परोसा और धीरे से दर्श की तरफ देखने लगी, दर्श भी उसे ही देख रहा था…
उसी समय वासुकी भी बाहर चला आया..
“अरे मेरी गुड़िया रानी अब तक तैयार नहीं हुईं ?” कली की ही तरह वासुकी ने भी बिलकुल ऐसा व्यवहार रखा जैसे बीती रात कुछ हुआ ही न हो.. यही तो खासियत थी इन बाप बेटी की..।
एक रात पहले चाहे भूचाल आया हो, लेकिन अगले दिन इनके चेहरे से कोई जान नहीं सकता था कि ये रात कितनी तकलीफ में बीता कर आये है..।
कली का चुलबुलापन भले ही नेहा की देन हो लेकिन उसके स्वभाव का ये दबा छिपा सा हिस्सा उसे उसके धीर गंभीर पिता से मिला था..।
“तैयार कहाँ के लिए डैडा ?”
“क्यों आज कॉलेज नहीं जाना ?”
“मैंने सोचा दो चार दिन छुट्टी कर लेती हूँ !”
“नहीं.. अभी छुट्टियां वेस्ट मत करो, अगर और कोई बात नहीं तो जाकर रेडी हो जाओ, मैं तुम्हे ड्राप कर दूंगा..। छुट्टियां अगले हफ्ते लेना, हम सब छुट्टियां मनाने वेनिस चलेंगे.. !”
“सच्ची ?”
“हम्म !” मुस्कुरा कर कली वासुकी के गले से लग गयी.. प्यार से उसके बालो पर हाथ फेर कर वासुकी ने उसे थपकी दी और वो उससे अलग होकर कपड़े बदलने चली गयी…
कुछ देर बाद ही वो दोनों कली के कॉलेज में थे..
उसे कॉलेज में उतार कर वासुकी अपने काम के लिए निकल गया..
कॉलेज पहुँच कर कली के चेहरे पर वापस वही उदासीनता छा गयी..।
घर पर वो अपने आपको सामान्य दिखाने का अभिनय कर रही थी जो यहाँ करने की कोई ज़रूरत नहीं थी..।
वो क्लास के लिए बढ़ रही थी कि निशा और डेरिक भी चले आये…
“हाँ तो अब बताओ.. क्या किया कल सारा दिन ?”
निशा ने कली की गर्दन के इर्दगिर्द बाँहों का घेरा डाल दिया..
“कुछ नहीं.. !”
“व्हाट कुछ नहीं.. ऐसे नहीं चलेगा.. बताना तो पड़ेगा ही !” डेरिक उछल पड़ा.
“सच कह रही हूँ.. बस थोड़ा घूमे फिरे डिनर किया और वापस लौट गए !”
“उसने तुम्हे प्रोपोज़ नहीं किया ?”
“नहीं… क्यों करेगा.. वो बस दोस्त है, और कुछ नहीं !”
“हम तुझे उल्लू नजर आ रहे है !” निशा कली का हाथ पकड़ कर झूम रही थी..
“ठीक है, ऐसी कोई बात नहीं.. चलो क्लास में चलते है !”
डेरिक और निशा एक दूसरे को देखते रहे और कली अपना बैग थामे क्लास की तरफ बढ़ गयी.. वो दोनों यही सोच रहे थे कि आज कली को क्या हुआ, उसी समय शौर्य वहाँ पहुँच गया…
उसने पीछे से डेरिक के कंधे पर हाथ रख दिया..
डेरिक चौंक कर पलट गया..
“तुम आ गए ?”
“हाँ.. क्यों तुम मेरा वेट कर रहे थे ?”
“आह.. हाँ.. मतलब कली तो क्लास में चली गयी !”
“वो तो कल भी क्लास में ही थी !” शौर्य ने मुस्कुरा कर कहा.. और उसकी बात पर निशा और डेरिक भी मुस्कुरा उठे..
“मैं उसे बुला लूंगा !” शौर्य ने अपना मोबाइल निकाला और कली को मेसेज कर दिया
“क्या कुछ देर के लिए बाहर आ सकती हो ?”
कली ने मेसेज देखा और क्लासरूम की खिड़की से बाहर उसकी नजर चली गयी..
बाहर शौर्य खड़ा था..
शौर्य को देखते ही उसके दिल में दर्द की लहार सी उठी लेकिन दूसरे ही पल खुद को संभाल कर कली ने मेसेज का रिप्लाई कर दिया..
“नहीं आ पाउंगी, आज की क्लास इम्पोर्टेन्ट है !”
“मतलब कल की नहीं थी ?”
“वो इतनी नहीं थी ! लेकिन आज की क्लास छोड़ना मेरे लिए मुमकिन नहीं !”
“हम्म !” कली का रुखा सा जवाब पढ़ कर शौर्य ने इधर उधर देखा और फिर डेरिक और निशा को वहीँ छोड़ आगे क्लासरूम की तरफ बढ़ गया..
“ये लड़का कहाँ जा रहा है ?” निशा ने डेरिक से पूछा
“कहीं क्लासरूम तो नहीं ?”
“ओह्ह गॉड, इसे वहाँ नहीं जाना चाहिए ! टीचर और बाक़ी स्टूडेंट इसे क्लास में देख क्या सोचेंगे !”
वो दोनों भी शौर्य के पीछे भाग चले..
क्लासरूम के दरवाज़े पर पहुँच शौर्य रुक गया, उसने क्लास में पढ़ाते टीचर से अनुमति मांगी और हल्का सा क्लास के अंदर चला आया..
“सर, मैं कली को बुलाने आया था, इनके डैड ने मुझे भेजा है.. मैं इनका फैमिली फ्रेंड हूँ.. !”
उस प्रोफेसर ने कली की तरफ देखा..
कली अपनी जगह पर खड़ी हो गयी.. प्रोफेसर कली से इस बारे में कुछ पूछते, उसके पहले शौर्य बहुत विनम्रता से वापस अपनी बात दुहरा गया..
“सर आप इन दोनों से पूछ सकते है, इन्हे मालूम है मुझे मिस्टर अनिरुद्ध वासुकी ने भेजा है !”
शौर्य के ऐसा कहने पर कली आंखे फाडे उसे देखती रह गयी.. कैसे बिना किसी झिझक के बड़े आराम से झूठ पर झूठ बोल रहा था..
लेकिन इतने लोगो के बीच उसकी बात काटने की कली की भी हिम्मत नहीं हुई, और वो अपना बैग लिए चुपचाप उतर कर नीचे प्रोफेसर के पास तक चली आयी..।
उन्होंने उसे जाने का इशारा कर दिया और इसके साथ ही देर से आने के लिए निशा और डेरिक को डाँट लगाते हुए क्लास के अंदर कर लिया..
क्लासरूम के बाहर कली को आया देख शौर्य मुस्कुरा उठा..
“वेलकम कली !”
“हम्म.. बोलो क्या बात है ?” कली ने रुखाई से कहा
“कहीं चल कर बैठते है ना ?”
“नहीं मैं क्लास मिस नहीं कर सकती !”
“मैं पढ़ा दूंगा सब.. डोंट वरी ! अब चलो मेरे साथ !”
वो उसका हाथ पकड़ कर चलने लगा लेकिन कली ने अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ा लिया..
“शौर्य ये मेरा कॉलेज है !”
“जानता हूँ, और ये भी जानता हूँ कि ये लंदन में है। जहाँ किसी को किसी से कोई फर्क नहीं पड़ता !”
“लेकिन मुझे पड़ता है !” कली ने इठला कर कहा और शौर्य उसके गाल पर झुक गया..
“फिर तो मुझे भी पड़ता है..! आओ कली, तुम्हे कुछ दिखाना है !”
वो उसे एक तरह से खींचते हुए अपनी गाडी तक ले गया..
“बाहर कम्फर्टेबल नहीं हो ना, तो गाडी में बैठो !”
“नहीं… !”
“अरे ज़िद क्यों कर रही हो ?” अपनी मुहब्बत में दीवानगी की हद तक डूबे शौर्य का इस बात पर ध्यान ही नहीं गया था कि आज कली का रंग बदला हुआ सा था, उसके सुर बिगड़े हुए थे.. ।
“बैठो ना अंदर, तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है !”
बिना मन के कली उस लम्बी सी गाड़ी की पिछली सीट पर अंदर चली आयी… अंदर आमने सामने चार बडी आरामदायक चमड़े की मढ़ी हुईं सीट्स थी.. जिनके बीच में हाथ रखने की जगह के बाद एक छोटा सा केबिन बना था..
दूसरी सीट के सिरे पर छोटा सा फ्रिज था…
गाड़ी बहुत आरामदायक और महंगी नजर आ रही थी..
कली के पिता के पास भी पैसो की कोई कमी ना थी, ना गाड़ियों की कमी थी। बल्कि वासुकी का गाड़ियों के प्रति पैशन देखने योग्य था..।
गाड़ियों के प्रति अपनी दीवानगी में उसने हर बडी ब्रांड की महंगी गाडी अपने कलेक्शन में खरीद रखी थी। लेकिन ऐसी रॉयल गाडी कली पहली बार देख रही थी..
उसकी चुप्पी देख शौर्य ने फ्रिज खोला और पानी की बोतल उसकी तरफ बढ़ा दी..
“लो पी लो !”
“क्या है ये ?” कली ने चौंक कर पूछा और उसके इस तरह चौंक जाने पर शौर्य ज़ोर से हंस पड़ा..
“पानी है यार ! और तुम्हे क्या पिला दूंगा, बोलो तो ?”
इस बार कली अपनी बेवकूफी पर बुरी तरह झेंप गयी..
“सॉरी.. मैंने बस यूँ ही.. !”
“हम्म… सुनो कली, तुम्हारे लिए मैं कुछ लेकर आया हूँ !”
शौर्य ने धीरे से अपनी शर्ट की जेब से एक छोटा सा बक्सा निकाला और उसे कली की तरफ घुमा कर खोल दिया..
“ये क्या है ?” अंगूठी देख कली का दिल किया रो पड़े, लेकिन खुद को संभाल कर उसने एक बार फिर बेवकूफी भरा शिगूफा छोड़ दिया..
और उसका सवाल सुन शौर्य अपने अनोखे अंदाज़ में झटके से ज़मीन की तरफ देखते हुए मुस्कुरा उठा..
उसके मुस्कुराने पर उसके बांये गाल पर एक गहरा और लम्बा सा गड्ढा बन जाता था, जो गाल से शुरू होकर नीचे ठोङी तक चला आता था।
और उस वक्त वो दुनिया का सबसे भोला और मासूम इंसान नजर आता था..
उसकी इसी मुस्कान के लिए अक्सर उसकी रानी माँ कहा करती थी….
“बांसुरी, अगर ये लड़का खून करके भी खड़ा हो गया और ऐसे ही नीचे देख कर मुस्कुर उठा ना, तो जज भी इसे बिना सबूत देखे बेगुनाह मान कर छोड़ देंगे.. देख लेना.. !”
आज एक बार फिर उसकी उस मुस्कान का जादू जज साहब पर चल तो गया था, लेकिन इस पेशी का जज भी ज़रा ज़िद्दी किस्म का था, जो अपनी हार स्वीकारना ही नहीं चाहता था…..
“ये तुम्हारे लिए है !” शौर्य ने अंगूठी कली की तरफ बढ़ा दी…
अपने मन में मचा हाहाकार, पिता की एक दिन पहले की कहीं बातें, अपनी माँ का अतीत, अपने घर वालो की महल के प्रति नफरत सब कुछ एकबारगी वो उसे बताने को आतुर हो उठी, लेकिन फिर उसने खुद को जैसे तैसे संभाला और उस अंगूठी के डिब्बे की तरफ हाथ बढ़ा दिया..
क्रमशः

बेहद तकलीफ़ में है कली पर बता नही सकती की उसके मन में क्या द्वंद चल रहा है 🥺🥺🥺🥺🥺🥺🥺
एक तरफ़ पिता जो अपनी जिन्दगी से ज्यादा प्यारे हैं और उनसे किया वादा, दूसरी तरफ कली का प्यार।😞😞😞
किसे चुने किसे नहीं ये तो तय कर पाना लगभग नामुमकिन सा है उसके लिए।
मुझे सबसे ज्यादा बुरा शौर्य के लिए लग रहा है जो सारे हालातो से लड़ने को तैयार बैठा है पर कली से केसे लड़े अब।😓😓😓😓😞😞😞😞😞😞😞🥺🥺🥺🥺🥺
Very beautiful part
Ab kali kya karegi.
Kali aur shaurya ko alag mat kijiyega…
Jaldi se next part le aayiye mam
Mam plz ab ise continue rakhana plz
😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔
बहुत सुंदर भाग
🤗👍 good part.Wasuki ke inkar se Kali ka dil tut gaya hai par wo dikhayegi nahi 😰 idhar Shourya Kali ke liye ring Kharid raha hai.usake college pahunch kar usse class mae se utha laya.Kali rude hone ki koshish mae hai.ring dekh kar toh rona he aane laga.normal days mae ye huaa hota toh Kali khushi se naach rahi hoti lekin aaj…….🥺🥺
Bahut khubsurat part ❤️❤️❤️❤️
Very beautiful