
जीवनसाथी -3 भाग -105
वो जाकर उसमे बैठा और उसके बैठते ही विक्रम ने गाडी आगे बढ़ा दी..
“कहाँ चलना है लिटिल मास्टर ?”
शौर्य ने गहरी आँखों से विक्रम की तरफ देखा और शौर्य की बात समझ कर विक्रम ने गाडी उन लड़को को जहाँ पकड़ कर रखा था, उसी जगह के लिए आगे बढ़ा दी..
कुछ देर बाद शौर्य और विक्रम उस कमरे में मौजूद थे, जहाँ विक्रम उन चारों लोगो को बंद कर के गया था..
शौर्य ने एक एक कर सबकी तरफ देखा, बाकी तो सबके चेहरे सामान्य नजर आ रहे थे, लेकिन एक ज़रा डरा हुआ सा नजर आ रहा था। शौर्य की नजर से वो नहीं बच पाया..।
शौर्य उसकी बगल वाले लड़के तक पहुँच गया.. वो दर्द से बिलबिला रहा था, उसी के हाथ को छूकर गोली निकली थी, शौर्य ने उसका हाथ पकड़ लिया..।
“दर्द हो रहा है ?”
उस अदमी ने शौर्य की तरफ देखा और हाँ में गर्दन हिला दी..
“तो क्यों करते हो ये काम ? क्या मिलता है ? पैसे ना ?”
वो फिर हाँ में गर्दन हिला गया…
“तो अगर मैं उससे ज्यादा पैसे दूँ, तो क्या मेरे लिए काम करना शुरू कर दोगे ?”
वो चारों लोग एक दूसरे की तरफ देखने लगे..
“हम लोग उनके साथ दगा क्यों करे ?”
उनमे से एक ने कहा और शौर्य झटके से ज़मीन की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा…
“ठीक है मत करो, फिर ईमानदारी दिखाते हुए उसके लिए मर जाओ !”
शौर्य ने गन निकाल कर सामने बैठे एक लड़के के सर पर तान दी और उसके बगल में बैठा लड़का चीख पड़ा..
“आप ऐसा नहीं कर सकते ? लॉ भी कुछ है या नहीं ?”
“ये तब नहीं सोचा जब मुझे मारने आये थे.. चलो कोई बात नहीं, तुम चारों को मार कर ही निकलेंगे अब हम लोग !”
शौर्य ने जैसे ही उस लड़के की तरफ गन तानी वो चीख पड़ा..
“मैं आपकी गैंग में आने को तैयार हूँ !”
शौर्य ने उसकी तरफ देखा और फिर बाकियों की तरफ देखने लगा और सबने एक एक कर हाथ उठा दिया..
शौर्य ने विक्रम की तरफ देखा और वो दोनों हलके से मुस्कुरा उठे ..
“पहली बात हमारी कोई गैंग नहीं है, दूसरी बात जिस गैंग में अभी हो उसी में रहना है, काम बस हमारा करना है… समझे ?” विक्रम ने उस लड़के के माथे पर गन रख कर पूछा और उसके साथ सभी ने हामी भर दी…
शौर्य ने अपनी घड़ी में वक्त देखा..
उसे देख विक्रम बोल पड़ा
“आप जाइये लिटिल मास्टर, मैं इन्हे देख लूंगा !”
“हम्म.. एक बहुत ज़रूरी सामान लेने जाना था !”
विक्रम हल्का सा मुस्कुरा उठा और शौर्य विक्रम की तरफ देख बाहर निकल गया…
*****
खिड़की से कली को शौर्य की गाडी से उतरते देखने के बाद वासुकी अपने ऑफिस में चला आया..
वहाँ बैठा दर्श उसी का इंतज़ार कर रहा था.. दोनों शांत थे, चुप बैठे थे.. उसी समय सरु वहाँ चली आयी..
“लीजिये कॉफी.. क्या हुआ आप दोनों इतना चुप क्यों बैठे है ?”
दर्श ने सारिका की तरफ घूर कर देखा और सारिका के प्राण हलक में सूख गए।
उसे दर्श की ये नजरें बहुत खतरनाक लगती थी..।
“तुम्हे पता था, वो लड़का इण्डिया से यहाँ आ चुका है ?”
“कौन लड़का ?” सारिका पत्ते सी कांपने लगी.. बडी मुश्किल से अपने चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करती वो कभी वासुकी कभी दर्श को देख रही थी..
“सारिका, सामान बांध लो !” वासुकी का आदेश सारिका के कानो में सीसा पिघला गया
“सामान… किसका ?” उसे ये चार शब्द बोलने में मौत आ रही थी..
ये दोनों ही मर्द जितने ही खुशमिजाज, मुहब्बती और विनम्र थे, गुस्सा आने पर उतने ही बड़े जब्बर हो जाते थे..।
ऊपर से दोनों एक साथ नीम के पेड़ पर चढ़ी करेले की बेल से थे..।
सारिका अपनी खैर मनाना चाहती थी.. साथ ही मन ही मन ये प्रार्थना भी कर रही थी कि बस कली यहाँ न चली आये।
लेकिन मन की इच्छा इतनी आसानी से कबूल हो गयी तो भगवान को कोई याद करेगा कैसे ?
सारिका के दिल दिमाग में उथल पुथल मची थी कि कली भी वहाँ धमक पड़ी..
कमरे में घुसते ही उसकी नजर अपने डैडा पर पड़ी और उसके बाद एक तरफ खड़ी सरु पर..
“क्या हुआ ? सब इतने चुप से क्यों लग रहे ?”
उसने पारी पारी से तीनो की तरफ देखा..
“डैडा… बोलिये ना क्या हुआ ?”
वासुकी धीमे से उठ कर कली तक चला आया… उसने प्यार से कली के बालों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया..
“वो देख रही हो कली, सामने लगी तस्वीर.. जिसमे मैं तुम्हारे बाल बना रहा हूँ।”
“हम्म ।”
“मुझे तुम्हारे बाल बनाने नहीं आते थे, लेकिन उस दिन तुम स्कूल जाने के पहले अड़ गयी कि डैडा बाल नहीं बनाएंगे तो स्कूल नहीं जाउंगी.. और फिर ये.. “
वासुकी के चेहरे पर एक पीड़ा भरी मुस्कान चली आयी.. वासुकी के ऑफिस का वो हिस्सा वासुकी और कली की बचपन की तस्वीरो से अटा पड़ा था.. ।
किसी में वो उसे गोद में लिए खड़ा सुला रहा था,किसी में बाल बना रहा था, किसी में उसके साथ भालू बना हंस रहा था, किसी में दोनों खिलौने वाली गिटार बजा रहे थे.. किसी में उसे अपने हाथ से केक खिला रहा था,! उन हर एक तस्वीर के पास से गुज़रते हुए वासुकी भावुक होता रहा और हर एक तस्वीर की कहानी अपनी लाड़ली को सुनाता गया…
पता नहीं वासुकी की आवाज़ या उन बचपन की यादो में क्या जादू था, कली की आंखे खुद ब खुद बहने लगी..
उसे रोते देख वासुकी ने तुरंत उसके आंसू पोंछ दिए..
“नहीं बेटा रोने की क्या बात है… ये समय हर एक पिता के जीवन में आता ही है। जब उसे अपनी आँखों के तारे को बिदा करना पड़ता है… मैं कोई अलग थोड़े ना हूँ..। मेरी चिड़िया को मैं हमेशा अपने आंगन में कैद तो नहीं कर सकता ना ?”
“आप ये सब क्यों कह रहे है डैडा ?”
“कली मुझे बातें बनाना नहीं आता.. बस एक बात कहूंगा तुम शौर्य की जगह किसी भी लड़के को कहोगी तो मैं खुद आगे बढ़ कर तुम्हारी शादी करवा दूंगा। लेकिन शौर्य प्रताप से तुम्हारी शादी मेरी मर्ज़ी से तो कभी पॉसिबल नहीं..।
बेटा तुम्हारा डैडा तुझसे इतना प्यार करता है कि वो तुझे दुखी भी नहीं देख सकता, इसलिए सरु से कह रहा था की तुम्हारा सामान पैक कर दे…
कल सुबह उसे बुला कर तुम उसके साथ यहाँ से हमेशा हमेशा के लिए चली जाना..।
और वापस अपने डैडा के पास कभी मत आना !”
वासुकी एक साँस में सब कह गया और उसकी बात सुन दर्श सारिका और कली उसे स्तब्ध देखते रह गए..
कली जिसके अब तक आंसू बह रहे थे, अब सब कुछ भूल कर अपने डैडा के सीने से लगी ज़ोर ज़ोर से रोने लगी..
“नो डैडा नो… ऐसा कभी नहीं हो सकता.. कभी नहीं.. मुझे आपको छोड़ कर किसी के साथ नहीं जाना.. कभी नहीं.. !”
“कली डोंट वरी, तुम्हारा डैडा तुमसे नाराज़ नहीं है !”
लेकिन वासुकी की बात का कोई असर कली पर नहीं हुआ। वो अपने डैड के गले से लगी सुबकती रही…
रोते रोते उसकी हिचकियाँ बंध गयी..
“आई एम सॉरी डैडा, अब मैं शौर्य से कभी नहीं मिलूंगी.. कभी नहीं ! आप मुझे माफ़ कर दीजिये, मुझसे बहुत बडी गलती हो गयी.. !”
रोते रोते कली अपनी बात दुहराती रही, और फिर उसे समझा कर वासुकी उसके कमरे में ले गया… वहां उसके बालों को धीरे धीरे सहलाते हुए उसने कली के कानो में पहली बार अपना एअर पॉड लगा दिया.. नेहा का वो गीत जो अक्सर वो सुना करता था कली के लिए आज पहली बार खुला था..
“ये तुम्हारी माँ गाती थी… सुनना चाहोगी ?”
कली ने हामी भर दी, और उसने उसके कानो में अपना एअर पॉड लगा दिया…
कुछ देर बाद ही थकी हुईं कली सो गयी…
उसके सोते ही वासुकी बाहर चला आया.. बाहर मौजूद दर्श और सरु उसी का इंतज़ार कर रहे थे।
“ये क्या था अनिर ? कली को इतना इमोशनल क्यों किया ?”
वासुकी ने दर्श की तरफ देखा
“ये तू पूछ रहा है ?”
“हाँ हम भी पूछेंगे अनिर भैया, ऐसी क्या बुराई है शौर्य में… एक रियासत का राजकुमार है.. भावी राजा है लेकिन घमंड का लवलेश नहीं है उसमे..
इससे अच्छा लड़का कली के लिए मिलेगा भी नहीं ! आपने ऐसा क्यों किया भैया ? “
“ज़रूरी था..
मुझे शौर्य से या उसके पेरेंट्स से प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन उनके महल से है..।उनका महल षडयंत्रो का अड्डा है। वहाँ बाहर से अंदर जाने वाला फिर वापस नहीं आता..। मैं अपनी बेटी को वापस उसी कुंए में कूदने की इजाजत नहीं दे सकता, जिस में उसकी माँ कूद चुकी है..।
मेरे लिए मेरी बेटी की ख़ुशी बहुत मायने रखती है, लेकिन उससे ज्यादा उसका जीवन ज़रूरी है मेरे लिए..।
मैं नेहा को तो नहीं बचा पाया था, लेकिन अब कली की ज़िन्दगी के साथ मैं कोई रिस्क नहीं ले सकता..।
जानता हूँ, शौर्य से अच्छा लड़का कली को नहीं मिलेगा लेकिन ये भी जानता हूँ कि शौर्य के साथ जुड़ते ही कली का जीवन कितना क्षणभंगुर हो जायेगा, किसी को नहीं पता !
जानता हूँ वहाँ सिक्योरिटी है, पर्याप्त सुरक्षा के प्रबंध है बावजूद जाने कितनी बार राजा साहब पर हमले हुए, रानी साहिबा…
बोलते बोलते वासुकी की आवाज़ लड़खड़ा गयी… फिर खुद को संभाल कर वो बोल पड़ा..
“चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बाद भी महल के लोग सुरक्षित नहीं है, मैं वहाँ अपनी बेटी को नहीं भेज सकता। भले ही ज़िन्दगी भर मेरी बेटी कुंआरी रहेगी, लेकिन मैं उसकी ज़िन्दगी के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता !
दूसरी बात इन महल वालो के अपने कायदे होते है, ये महल से बाहर अपने संबंध जोड़ना नहीं चाहते। आज अगर शौर्य कली से दोस्ती कर भी लेता है तो, कल जब वो अपने महल में इस बारे में बात करेगा, तब इस बात की क्या गारंटी कि महल के लोग कली को अपना ले..?
वो लोग अपनी आन के सामने दूसरों के सम्मान का नहीं सोचते..।
मेरी बेटी आज तो ख़ुशी के दो घूंट भर लेगी और कल को महल जाने के बाद उसे वही घूंट जहरीले महसूस होने लगे, तब क्या करूंगा। बस ये नहीं चाहता मैं..।
मेरी कली मेरी जान है, और उस पर मैं कभी आँच नहीं आने दूंगा !”
अपनी बात पूरी करते करते वासुकी आवेश में आ गया, उसकी आँखे अंगारों सी धधकने लगी और उसकी बात सुन कर दर्श और सारिका को समझ में आ गया कि शौर्य और कली का मिलना वाकई इतना आसान नहीं है….
अपने दरवाज़े से लग कर खड़ी कली सब सुन रही थी,और उसकी आंखे लगातार बह रही थी…
वाकई उसने अपनी बेवकूफी में अपने डैडा का कितना दिल दुखाया था…
वो चुपचाप अपने बिस्तर पर लेट गयी… खिड़की से बाहर मौसम बहुत प्यारा था, लेकिन उसका दिल रो रहा था…
दूसरी तरफ शौर्य इस सुन्दर से मौसम में अपने ज़बरदस्त मूड में गाडी तेज़ी से चलता चला जा रहा था… उसने हार्ट ऑफ़ लंदन के सामने पहुँच कर गाड़ी रोक दी …
शॉप अभी बंद नहीं हुईं थी, लेकिन अब स्टाफ एक एक कर सामान चेक करना शुरू कर चुका था..
माफ़ी मांगते हुए शौर्य अंदर दाखिल हो गया.. वहां मौजूद स्टाफ ने भी उसका स्वागत किया..
“डायमंड रिंग देखनी थी !” उसके बोलते ही स्टाफ उसके पास तितलियों सा मंडराने लगा
वहां मौजूद ब्रितानी लड़कियाँ अपने सजीले ग्राहक को एक से बढ़ कर एक अंगूठियां दिखा रही थी, और शौर्य कभी किसी तो कभी किसी अंगूठी को इधर उधर से देख कर उसे मन ही मन कली की उंगलियों में इमेजिन करता हुआ एक प्यारी सी अंगूठी तलाश रहा था।
जिसे अगले दिन कली की ऊँगली में पहना कर वो उसे प्रपोज कर सके….
ढेरों अंगूठियों के बीच आखिर उसने एक अंगूठी कली के लिए चुन ही ली…
क्रमशः

Oh ab kya hoga. Kaise milenge Shaurya aur kali.
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हमारे यहाँ कहते है आग से जला जुगनू से भी डरेगा वैसा ही कुछ वासुकी महसूस कर रहा होग़ा,उसे शौर्य से कोई परेशानी है उसे तो महलो मे होने वाले षड्यंत्रो का डर है, अपनी नेहा को तो वो पहले ही खो चुका है । वासुकी कभी नहीं चाहेगा जिन लोगों की वजह से उसकी नेहा की जान गई उसकी कली वहाँ जाए।
कली ने सब सुन लिया है वो कभी अपने डैडा को दुखी नहीं करेगी शायद इसलिए कहते है प्यार की राहें इतनी आसान नहीं होती ना जाने कितने उतार चढ़ाव के बाद इन दोनों को मंजिल मिलेगी पर इतना भरोसा तो हमें भी है प्रेम लिखने वाली हमारी डॉक्टर साहिबा इनका मिलन करवा ही देगी 😊।
अच्छा..!! तो हमारे शौर्य बाबू अपनी कली से अपने प्रेम का इज़हार करने की तैयारी मे है..।
“”इन सबसे अलग आज वासुकी का कली को एक एक तस्वीर दिखाना.. 👌🏻👌🏻लाजवाब पल थे वो 👌🏻👌🏻।
बहुत खूबसूरत लिखा आपने 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।””
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Bahut Acha part tha👌👌
Aj kafi lambe wakt ke baad jeevansathi ke 2no bhag pdhne ko mile…bahut sukun aya dil ko…mgr ab vasuki ne jo decision liya ha Kali ke liye vo Rhoda painful ho gya.. ab jaldi se Neha ko Vadukike samne kar do taki Vaduki ki metal ke liye soch bdl jaye aur Rani bansuri bhi Vasuki se Lali ko mang le
Bechare kali or shourya 👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏
चलो आज इतनी तो राहत हुई की वासुकी , शौरी से कोई प्रॉब्लम नहीं रखता था बल्कि उसे तो शौरी पसंद है , अब मजप वालो से प्रोबलम है तो उसके तो हजार रास्ते है , जैसे रहा साहब के पास भी तो थे , महल वाले कली को न अपनाएं ! ये तो अब होने से रहा , तो वासुकी के सारे डर में से अब बचा एक ही की महल में जो जाता है wo wapis nahi आता , तो जब रानी बासूरी खुद आकर अपनी कली को अपने आंखो के चिराग के लिए वासुकी से मांगे गी swal hi nahi hota ki वासुकी उसे मना कर पाए , उसमे भी समर और प्रेम जब नेहा को सही सलामत वासुकी को सौंपेंगे तब तो बिलकुल ही नही , हाय मेरी सपनो की दुनिया 😍😍😍♥️♥️♥️🥰🥰😂😂 👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼
Bahut sundar bhag👌👌👌👌👌👌👌