जीवनसाथी -3 भाग -104

जीवनसाथी -3 भाग -104

अब तक आपने पढ़ा,

   शौर्य कली के कॉलेज पहुँच जाता है जहाँ से कली कॉलेज बंक कर के उसके साथ उसकी बाइक पर निकल जाती है..
वो लोग अपने में मगन एक कैफे में पहुँचते है, वहां उनका पीछा करते हुए कुछ गुंडे भी पहुँच जाते है..
शौर्य उन सबका मुकाबला करता है और सभी को धूल चटा देता है..
इसके बाद वो जैसे ही पीछे पलट कर कली के पास पहुँचता है वो बेहोश हो जाती है..

अब आगे..

उन लोगो के भागते ही शौर्य जैसे ही पीछे पलटा और कली की तरफ देखा, कली का सर घूम गया और वो चक्कर खा कर गिरती उसके पहले शौर्य ने उसे संभाल कर थाम लिया..

कली को गोद में उठाये फिर वो उस एसयुवी की तरफ बढ़ गया….

वो लोग भाग कर अपनी गाडी में पहुँच चुके थे, लेकिन शौर्य को कली को गोद में लिए देख उनमे से ड्राइविंग सीट पर बैठे गुंडे ने चाबी निकाल कर उसकी तरफ बढ़ा दी..!
शौर्य ने पीछे बैठे सभी को इशारा कर पीछे की सीट से सबको उतरवा दिया, कली को वहाँ लिटाया और खुद ड्राइवर को उतार कर उसने वहां पहुँच चुके विक्रम की तरफ देख कर कुछ इशारा किया और गाडी को चलाते हुए वहां से निकाल लिया..

बाक़ी लोग वहीँ उतर गए और शौर्य कली को साथ लिए डॉक्टर के पास निकल गया..

डॉक्टर ने कली की जाँच करने के बाद शौर्य की तरफ देखा..

“डोंट वरी, बस बीपी लो हो गया था, उसकी वजह से इन्हे चक्कर आ गया था !”

उस डॉक्टर ने नर्स से कह कर शौर्य के ज़ख्मों पर भी ड्रेसिंग करवा दी..
कली ने आँखे खोली और चौंक कर उठ बैठी..

“मैं कहाँ हूँ ?” उसने शौर्य को देख कर अपनी आंखे मिचमिचा कर पूछा

“हॉस्पिटल में !”

“ओह्ह गॉड!! टाइम क्या हुआ.. ? अगर मैं पांच मिनट भी लेट हुईं ना, तो डैडा कॉलेज पहुँच जायेंगे.. !”

उसने तुरंत अपने हाथ में बंधी घडी की तरफ देखा लेकिन इस वक्त उसकी कलाई सूनी थी..

“मेरी घडी कहाँ गयी.. लगता है कहीं गिर गयी !”

वो तुरंत पलंग से उतर कर खड़ी हो गयी..

“मुझे तुरंत घर जाना है !”

“हाँ हाँ चलते है.. मैं बस बिल्स देख लूँ !”

“वो मैं देख लूंगा लिटिल मास्टर, आप जाइये !”

अब तक विक्रम भी वहाँ पहुँच चुका था.. पीछे खड़े विक्रम ने शौर्य से कहा… ..
शौर्य ने पलट कर विक्रम की तरफ देखा और गर्दन हिला कर कली को साथ लिए निकल गया…

कली के चेहरे पर घबराहट देख कर शौर्य को हंसी आ रही थी, लेकिन उसने खुद को संभाला हुआ था…

“जल्दी चलना.. !”

“हम्म !” शौर्य ने छोटा सा जवाब दिया..

“अरे लेकिन हम लोग जायेंगे कैसे ?”

“क्यों यहाँ टैक्सी नहीं चलती क्या ?” शौर्य ने उससे सवाल किया और आगे बढ़ गया..
कली के दिमाग में उस वक्त ये चल रहा था कि शौर्य की बाइक तो पिछले कैफे में ही छूट गयी, वो अपने माथे पर हाथ मार कर तेज़ी से शौर्य के पीछे बढ़ गयी..

टैक्सी में सवार दोनों वहाँ से निकल गए..

कली चुप थी, वो अब तक सदमे में थी.. शौर्य ने अपना फ़ोन निकाला, इतनी सारी उठापटक में उसका फ़ोन भी थोड़ा ख़राब सा हो गया था.. वो उसे साफ़ करने लगा..
कली चुपचाप उसे देख रही थी..
अपना मोबाइल साफ करते हुए ही शौर्य ने पूछ लिया

“क्या हुआ ?”

‘हम्म.. कुछ नहीं !”

“कुछ तो हुआ है.. वरना तुम और इतनी चुप ?”

“हम्म… कुछ पूछना था ? तुम नाराज़ तो नहीं हो जाओगे ना ? मतलब मैं ये कहना चाहती थी, सॉरी पूछना चाहती थी, एक्चुली बात ये है कि, वो.. जो..

शौर्य ने चुपचाप अपनी गन निकाली और कली की तरफ बढ़ा दी

“इसी के बारे में जानना था ना तुम्हें ?”

कली इस तरह गन को देख उछल पड़ी..

“हाँ.. ये तुम्हारे पास.. कैसे ?” बड़े संकोच से कली ने कहा और शौर्य कली की तरफ मुहं घुमा कर बैठ गया..

“कली मैं कौन हूँ यह तो तुम जान चुकी हो। मैं सिर्फ एक चीफ मिनिस्टर का बेटा ही नहीं हूं, मैं हमारी रियासत के राजा साहब का भी इकलौता बेटा हूं, और आज से नहीं मेरे पैदा होने के पहले से ही डैड के हजारों-हजार दुश्मन थे। हर वक्त मॉम इसी डर में रहती थी कि कभी कोई डैड का या मेरा नुकसान न कर दे। डैड को भी सिक्योरिटी लेकर चलना पसंद नहीं था। लेकिन उन पर कई बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। और इसलिए सिक्योरिटी में रहने के बावजूद उन्हें अपनी खुद की सुरक्षा के लिए अपनी गन कैरी करनी पड़ती है।
    मेरी सुरक्षा के लिए मेरे अठारहवें जन्मदिन पर डैड ने हीं मुझे यह गिफ्ट में दी थी। हालांकि मेरे आस-पास भी सिक्योरिटी हमेशा रहती है, लेकिन मैं भी आखिर हूं तो डैड का ही बेटा।
   पता नहीं क्यों मुझे दस लोगों के घेरे में चलना कभी पसंद ही नहीं आता। स्कूल से भी अक्सर मैं अपनी सिक्योरिटी को चकमा देकर भाग जाया करता था। कॉलेज में भी मेरा वही हाल था, और लंदन में भी तुमने देखा ही था।
     बस इसलिए मॉम ने मुझे कसम दे रखी है कि मैं इस गन को खुद से कभी अलग नहीं करूंगा। वह चाहती हैं कि मैं हर वक्त अपनी सिक्योरिटी के साथ रहूं, और अगर सिक्योरिटी के साथ नहीं हूं तो कम से कम यह गन तो मेरे पास रहे। बस इसीलिए मुझे इसे रखना पड़ता है..।”

“वह तो ठीक है, लेकिन तुम इतनी अच्छी फाइटिंग कैसे कर लेते हो? मतलब तुमने यह सब कब सीखा..?”

“हमारे यहां पढ़ाई के साथ-साथ हमें आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जाते हैं। यह हमारी बेसिक ट्रेनिंग है कि हम पर दस लोग भी एक साथ टूट पड़े तो हमें उनका मुकाबला करना आना चाहिए, और मैं अकेला नहीं मेरी फैमिली के सारे लड़के और लड़कियों को भी सेल्फ डिफेंस आता है..।”

“लड़कियों को भी ?”

आश्चर्य से आंखें फाड़े कली शौर्य की तरफ देखने लगी।

” हां वह छुटकी सी परी जो तुम्हें नजर आती है ना, वह नाजुक ऊपर से नजर आती है, लेकिन अगर उसे पन्द्रह  लड़के भी घेर लेंगे ना, वह उठाकर सबको पटक देगी। बल्कि मैं तो कहता हूं तुम्हें भी सेल्फ डिफेंस सीखना चाहिए।”

” मुझे? लेकिन मुझे क्या जरूरत है ? मेरे डैडा हर वक्त मेरे साथ ही रहते है !”

“अभी कहां है तुम्हारे डैडा?”

” लेकिन अभी तो मैं तुम्हारे साथ हूं!”

“इतना विश्वास कैसे कर लेती हो,  हर किसी पर?
  मान लो मैं अगर तुम्हारा फायदा उठाना चाहूं तो?”

” उठा लो ना!”  कली के दिल से आवाज आई लेकिन सामने वह कुछ नहीं कह पाई…
   आंखें फाड़े वह शौर्य को देखते रही!

” क्या हुआ जवाब दो, मेरी बात का? मुझे तो आश्चर्य इस बात पर होता है कि सेल्फ डिफेंस को हमारे देश में एक कंपलसरी सब्जेक्ट के तौर पर स्कूल में पढ़ाया क्यों नहीं जाता ? इसे अनिवार्य शिक्षा का एक हिस्सा होना चाहिए! 
    लेकिन हां, हमारे महल के बच्चों के लिए यह बिल्कुल कंपलसरी था! जहां रानी मां हम सबकी लैंग्वेज और  कर्टेसी पर ज्यादा फोकस करती थी, वही बड़े पापा हम सबकी फिजिकल ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान देते थे!”

” तब तो तुम सब बिल्कुल सर्वगुण संपन्न होगे।”

” नहीं!  हम सर्वगुण संपन्न नहीं है, हम लोगों को सर्वगुण संपन्न बनाया जाता है। और इसके लिए हम सब बचपन से ही बहुत मेहनत करते हैं। बचपन में कई बार मैं गिर जाता था, मुझे चोट लग जाती थी और उस वक्त ना मॉम होती थी.. और न डैड!”

“क्यों ?”

“क्योंकि डैड अपने काम पर होते थे, और मॉम अपने काम पर। रानी मां अक्सर मुझे संभाल लिया करती थी, लेकिन सबसे ज्यादा मुझे अपूर्व मामा सा ने संभाला है। उन्होंने कितना कुछ किया है मेरे लिए, यह मैं ही जानता हूं।
    मेरे साथ स्कूल में कुछ ऐसी घटना हुई थी कि इसके बाद मैंने स्कूल जाना बंद कर दिया था। मैं मॉम से कहना चाहता था कि स्कूल में मुझे क्या तकलीफ है? लेकिन अफसोस उस वक्त मॉम मेरे पास नहीं थी। वह अपनी किसी ट्रेनिंग में बाहर गई हूं थी। डैड दिल्ली में थे। और मैं अपने कमरे में अकेले रो रहा था। उस वक्त अपूर्व मामा सा ने मुझे संभाला। उन्होंने ही जिद करके मुझे विदेश पढ़ने भेज दिया….।
उस वक्त मॉम डैड इतने व्यस्त हो चुके थे कि उन्होंने बड़े पापा के कहने पर मामाजी की बात मान ली और मैं विदेश चला गया, अकेला !”

“तुम अकेले पढ़ने गए थे ?”

“हाँ उस समय मैंने जिद पकड़ ली थी कि मैं स्कूल वापस नहीं जाऊंगा। मिड सेशन में बाकी किसी का एडमिशन वहां करवाने का कोई औचित्य नहीं था, बस इसलिए अपूर्व मामा सा ही मेरे साथ गए थे। मैं लगभग दो-तीन साल वहां रहा, लेकिन फिर वहां भी मेरे साथ कुछ ऐसा घट गया कि मुझे…”

कहते कहते शौर्य चुप हो गया। कली समझ गई कि इससे ज्यादा वह कुछ नहीं बतायेगा। कली ने धीरे से उसके पैर पर अपना हाथ रख दिया..।

“आई एम सॉरी प्रिंस, मेरी एक बात मानोगे। जो बातें तुम्हें दुख देती हैं, उन्हें याद ही मत किया करो। वैसे पता नहीं क्यों, लेकिन मुझे तुम्हारे अपूर्व मामा पसंद नहीं आते।”

” तुम उन्हें जानती ही कितना हो? तुमसे उन्होंने जरा ऊंची आवाज में बात की थी ना, इसलिए तुम्हें वो पसंद नहीं है। लेकिन वह दिल के बहुत साफ है। मैं कभी तुम्हें उनसे जरूर मिलवाऊंगा ।”

कली ने हाँ में गर्दन हिलाई और खिड़की से बाहर देखने लगी। उसे अपने घर का जाना पहचाना रास्ता नजर आने लगा था…

“शौर्य यहाँ से मैं चली जाउंगी.. !”

“मतलब मैं वापस लौट जाऊं ?”

“हाँ डैडा देखेंगे तो नाराज़ हो सकते है ।”

“क्या मेरी शक्ल इतनी बुरी है कि तुम्हारे डैडा देखकर नाराज हो जाएंगे?”

” नहीं नहीं, वह बात नहीं है शौर्य, लेकिन…

” लेकिन क्या?”

“शौर्य, मुझे याद आया, तुम वहाँ कैफे में कुछ कह रहे थे ना ? क्या बोल रहे थे तुम?”

“मैं क्या कह रहा था? याद दिला दो?”शौर्य ने शरारत से कहा और कली की आँखों में झाँकने लगा, वो कली की तरफ एकटक देख रहा था..
कली भी उसे ही देख रही थी, लेकिन फिर उसकी धड़कने बढ़ने सी लगी और वो दरवाज़ा खोल कर टैक्सी से बाहर निकल गयी..

“मुझे देर हो रही है, मैं घर जाकर फोन पर तुम्हें बताऊंगी। ठीक है?”

” ओके!” कली ने मुस्कुरा कर अपना हाथ शौर्य की तरफ बढ़ा दिया! शौर्य ने मुस्कुरा कर कली की नाजुक सी हथेली देखी और धीरे से थाम ली..
    बड़ी नजाकत से उसने कली के हाथ को धीरे से हिलाया और छोड़ दिया..
  कली शौर्य पर से अपनी नज़रें नहीं हटा पा रही थी… घर के सामने खड़ी तो थी लेकिन उसका टैक्सी से हट कर घर जाने का मन नहीं कर रहा था..

” क्या हुआ टैक्सी में वापस बैठना है क्या? अब तुम्हें देर नहीं हो रही ?”

   शौर्य की बात पर उसने धीमे से हाँ में सर हिलाया और आगे बढ़ गयी.. लेकिन तुरंत ही वो पलटी और वापस टैक्सी तक चली आई

“सुनो! कल मिलोगे?”

” हां !”
.
” लेकिन कहां?”

” तुम्हारे कॉलेज ही आ जाऊंगा! वैसे भी तुम्हारे कॉलेज में जो पढ़ाई होती है, उससे कहीं ज्यादा तो मैं ही तुम्हें पढ़ा दूंगा! कल तुम्हें एक नई जगह लेकर जाऊंगा।”

” कहां ?”

“वह तो कल तुम्हें पता चलेगा।”

“ओके !”

कली ने धीरे से हाथ हिलाया और अपने घर की तरफ बढ़ गई।

      वासुकी विला के अंदर अपने कमरे की खिड़की पर खड़े वासुकी को शौर्य और कली साफ नजर आ रहे थे। एक ठंडी सी सांस भरकर वासुकी ने खिड़की पर का पर्दा खींच दिया।
कली का ध्यान इस बात पर बिल्कुल नहीं था कि वासुकी के कमरे में खड़ा वासुकी उसे देख रहा है। वह चहकती हुई घर के अंदर दाखिल हो गई।

आज सुबह से उसके दिमाग में फ़िल्मी गीत चल रहा था वही वो गुनगुनाने लगी..

सोयी सोयी पलकों पे चलके,
मेरे सपनों की खिड़की पे आ गया
आते जाते फिर मेरे दिल के,
इन हाथों में वो खत पकड़ा गया
प्यार का, लफ़्ज़ों में रंग है प्यार का
बहारा बहारा हुआ दिल पहली बार वे,
बहारा बहारा के चैन तो हुआ फरार वे….

जैसे ही वह हाल में पहुंची, हॉल से लगी रसोई में मौजूद सारिका ने उसे देखा और कॉफी के लिए पूछ लिया..

“कली तुम्हारे लिए भी कॉफी ले आऊँ ?”

“नहीं सरु, मैं कॉफी पीकर ही आ रही हूँ.. !”

“कॉलेज से कॉफी पीकर आ रही हो ?” सरु के सवाल पर सीढ़ियां चढ़ती कली अपनी जीभ काट कर रह गयी..

“हाँ वो कैंटीन में.. ! आज एक्चुली क्लास ख़त्म होने के बाद कॉफी पीने गयी थी !”

“इससे अच्छा घर आ जाती ! चलो ठीक है, मैं तुम्हारे डैडा और दर्श जी के लिए कॉफी भेज रही हूँ.. !”

ये बात सुन कर कली थम कर खड़ी हो गयी..

“डैडा घर में है ?”

“हाँ… क्यों ?” सरु के इस सवाल पर कली बिना कुछ कहे चुपचाप अपने कमरे में चली गयी..

उधर कली के टैक्सी से उतरते ही शौर्य भी गाडी से उतर गया.. उस टैक्सी के ठीक पीछे विक्रम की गाडी खड़ी थी!
   वो जाकर उसमे बैठा और उसके बैठते ही विक्रम ने गाडी आगे बढ़ा दी..

“कहाँ चलना है लिटिल मास्टर ?”

शौर्य ने गहरी आँखों से विक्रम की तरफ देखा और शौर्य की बात समझ कर विक्रम ने गाडी उन लड़को को जहाँ पकड़ कर रखा था उसी जगह के लिए आगे बढ़ा दी..

क्रमशः

4.9 47 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

81 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Jagruti
Jagruti
1 year ago

Bahut badhiya part

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

ये बात बिलकुल सही है कि सेल्फ डिफेंस बेहद जरूरी है सभी के लिए और ये सभी school college में कंपलसरी भी होना चाहिए ।
शौर्य ने बिलकुल सही सलाह दी है कली को।
दोनों घर पहूंच कर भी जुदा होने को तैयार नहीं है यही तो प्यार है ❤️❤️❤️😍😍😍🥰🥰🥰🥰 जिससे अभि दोनों ही अनजान हैं कि उन दोनों की कितनी अहमियत है एक दुसरे की जीवन में।
डैड ने दोनों को साथ देख लिया है अब उनका क्या रिएक्शन होगा ये तो ane vala bhag बताएगा।
इतने प्यारे भाग के लिए आपका बहुत बहुत आभार

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻
आज ज़ब शौर्य कली को अपनी परवरिश के बारे मे बता रहा था तो मुझे रामायण का वो सीन याद आ गया ज़ब राम जी अपने भाइयों के साथ बचपन मे गुरुकुल मे रहे थे।हम अक्सर सोचते है रईस खानदान के बच्चों के लिए कि ये तो सोने का चम्मच मुंह मे लेकर पैदा हुए है पर शायद हमारा सोचना बहुत गलत है,उनकी ज़िन्दगी तो खतरों से भरी होती है और शायद इसलिए आत्मरक्षा के उनको स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है।
कली तो अपूर्व मामा की असलियत जानती है पर शौर्य की आँखों पर अपूर्व ने जो विश्वास की पट्टी बाँधी है वो जल्दी ही हट जाए तो अच्छा है। जिस राजा साहब को पूजा जाता है उन्ही का बेटा उनके लिए इतनी नफ़रत लिए बैठा है पर कहते हैना झूठ कितनी भी सफाई से बोला गया हो सच एक दिन सामने आता ही है।
कली तो पागल हो गई है शौर्य के प्यार मे इन दोनों की अनोखी जोड़ी को किसी की नज़र ना लगे.. 🧿।
😲अरे… वासुकी की नज़र से कुछ बच सका है क्या.. लो पड़ गई नज़र 🤦🏻‍♀️अब होग़ा स्यापा…।
देखते है आगे क्या होता है 😊।

Nisha
Nisha
1 year ago

Achha hai mahal ke sare bachhon ko self defence aata hai warna aaj shaurya ka bachna muskil tha.kabhi kabhi lagta hai ki najuk kali kaise hamare prince ke sath mahal me rahegi.basuri ki tarah kali utni himmati nahi hai aur insaano ko parkhne me bhi thodi nadan hai.vasuki sab dekh raha hai kahin wo dono ko alag toh nahi karega na

Archana
Archana
1 year ago

बहारा बहारा यह दिल पहली बार वे
कितना खूबसूरत भाग था लग रहा था जैसे मेरा और शौर्य का सफर कभी खत्म ही ना हो पर मुझे डर ही था डैडा देख लेंगे और आखिर डैडा ने देख ही लिया…
उनको बुरा लगेगा ना , पर वह तो शौर्य को पसंद करते हैं पर उन्हें राजमहल नहीं पसंद,,

मेरी नेहा मां को ले आई ना काफी दिन हो गए डैडा को अकेले रहते हुए उन्हें भी तो प्यार की जरूरत है प्लीज उन्हें उनके प्यार से मिला दीजिए और इस बार नेहा मॉ से दिल की बात कहने कह दिजिएगा डेडा को जो इन बीते साल में उन्होंने नहीं कहा🩷🩷🥰🩷🥰🥰🩷🩷🥰🥰😘😘😘😘😘😘

Unika seth
Unika seth
1 year ago

Mind blowing 💙💛💚💚💙💙💛💛 awesome superrrrrrrrrr ❤️💛💚❤️💚💚💙💛 bbbbbbbbbbbbb part ❤️💛💛💛💚❤️💚💚💙💙💛

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Very sweet.

Prerna sharma
Prerna sharma
1 year ago

Nice

Sooch
Sooch
1 year ago

Shukar H part Aa gya
Maine to uneed hi chod di thi

Aisha
Aisha
1 year ago

Waiting for next part…. Nice episode