अपराजिता -164

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अपराजिता -164

    वक्त की ये खास बात हैं कि वक्त बीतने में वक्त नहीं लगता.. वक्त अच्छा हो या बुरा हो बीत ही जाता है ! ये और बात हैं की अच्छे वक्त को हम नहीं चाहते की बीत जाये और बुरा वक्त काटे नहीं कटता हैं !

ऐसे ही दीपक का वक्त था जो कट नहीं रहा था…उसे  लम्बी सजा हुई थी ! उस पर बहुत तरह के आरोप सिद्ध हुए थे और अलग अलग धाराएं लगी थी..।

जेल में अपने दिन काटता दीपक अब भी अपनी गलतियां मान कर पश्चाताप करने की जगह मन ही मन यहाँ से छूटने के बाद क्या करना है, के मंसूबे  बना रहा था। लेकिन किसी के सोच भर लेने से सत्य छिपता नहीं हैं..

दीपक ने एक मनगढ़ंत बात को अपने दिमाग में बैठा कर अखंड के ख़िलाफ़ पूरी कहानी बुन ली और उसी को सत्य मान बैठा, लेकिन उसके मान लेने से क्या हो जाना था…
सत्य तो अब बाहरी दुनिया में अखंड के रूप में चमक रहा था !!

अखंड और गीता की रात दिन की मेहनत रंग लायी..।
उनकी पार्टी में से जितने उम्मीदवार खड़े हुए थे, उनमे से एक दो को छोड़ कर अधिकतर की जीत हुई थी.. और इस जीत का सबसे ज्यादा श्रेय जाता था अखंड को..
उसने वाकई जी तोड़ मेहनत की थी और अब परिणाम सामने था..
गीता के साथ साथ अखंड ने भी विधायक का पद प्राप्त किया था.. पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल था..
पार्टी के मुख्य कर्त्ता धर्ताओं के साथ पार्टी प्रमुख भी उस जश्न में सम्मिलित हुए थे.. सभी तरफ उमंग का माहौल था…

बड़े बड़े लोग वहाँ शामिल थे। इतने बड़े आयोजन की व्यवस्था भी वैसी ही तगड़ी थी…। लोगो के हाथों में विदेशी गिलास चमक रहे थे।
महंगी सिगरेट,चुरूट और परफ्यूम्स की मिली जुली खुशबु माहौल को मदमस्त कर रही थी..
लोग खाते पीते बातों में व्यस्त थे..
अखंड पार्टी प्रमुख के साथ खड़ा था कि तभी गीता हाथ में दो गिलास लिए उस तक चली आयी..।

बडी नजाकत से उसने वहां खड़े बाकी लोगो से अखंड को साथ ले जाने की अनुमति ली और अखंड को साथ लिए वहां से दूसरी तरफ निकल गयी..

भीड़भाड़ भरे हॉल से बाहर निकल कर वो दोनों गार्डन में चले आये.. यहाँ भी जगह जगह लोग फैले तो थे पर भीड़ अपेक्षाकृत कम थी….

गीता ने गिलास अखंड की तरफ बढ़ाया, अखंड ने गिलास थाम लिया और थोड़ा आगे बढ़ कर एक खाली टेबल पर रख दिया, गीता उसे देखने लगी..

“क्या हुआ ?”

“कुछ नहीं !” अखंड ने जवाब दे दिया

“तुमने बिना पिए ही ग्लास रख दिया !”

“हम ये सब नहीं लेते !”

“अब तक नहीं शुरू की ?”

“नहीं और ना शुरू करेंगे, पर एक बात बताओ तुमने कब शुरू कर दी ?”

“पता ही नहीं चला, कब शुरू कर दी.. ज़िंदगी ने इतने तमाचे लगाए कि एहसास ही सारे ख़त्म हो गए..
जब तक सह सकी सहती रही, फिर ये लत लगा ली। जिससे इतना होश ही ना रहे कि तकलीफ महसूस भी हो सके.. !”

गीता की बात पर अखंड ने उसे देखा और बिना कुछ कहे चुपचाप आगे बढ़ने लगा….

गीता भी चुप हो गयी..

“अखंड तुमसे एक बात कहनी थी !”

“हम्म कहो !”

“आगे के लिए कुछ सोचा हैं ?”

अखंड गीता की तरफ देखने लगा..

“मतलब, अब आगे क्या करना हैं ?”

अखंड ने ना में गर्दन हिला दी..

“ज़िन्दगी जहाँ ले चलेगी बस चलते जाना हैं !”

“ऐसे बेमकसद भटक कर क्या फायदा ? परिंदे भी आसमान में ऊँचा उड़ते हैं, क्योंकि उन्हें मालूम हैं शाम ढलने पर उन्हें अपने घोंसलों में लौटना हैं.. वही लौटने कि ख़ुशी उन्हें इतनी ऊँची उड़ान भरने की प्रेरणा देती हैं !”

“हम्म देती होगी !”

“हम चाहते हैं, तुम्हारे पास भी तुम्हारा एक घोंसला हो !”

अखंड चुप सुनता रहा

“अखंड… !” गीता की आवाज़ लरजने लगी..

“हम तुम्हे पसंद करते हैं, आज से नहीं बहुत सालों से लेकिन कभी कहने कि हिम्मत नहीं हुई.. अगर तुम चाहो तो हम अपना एक सुखी संसार बसा सकते हैं.. !”

अखंड चौंक कर गीता की तरफ देखने लगा.. उस मासूम को वाकई आज तक ये बात मालूम नहीं चली थी कि गीता उसके लिए अपने मन में कोई कोमल भावनाये रखती हैं !

वो एकाएक कोई जवाब नहीं दे पाया..

“बोलो ना अखंड, क्या हमसे शादी करोगे ?”

अखंड कुछ बोलता उसके पहले उसका फ़ोन बजने लगा !

*****

भावना के इम्तिहान हो चुके थे, उसकी तरफ से उसने पेपर अच्छे ही बनाये थे, लेकिन इस बार कोचिंग वालों ने जो कट ऑफ़ निकाला था उसके अनुसार भावना के नंबर कम आ रहे थे !

हालाँकि वो तब भी खुश थी, क्यूंकि अब जाकर उसे अपनी जिंदगी का लक्ष्य मिल गया था..!
राजेंद्र के साथ वो अपने विवाहित जीवन की नींव मजबूत करने की राह पर चल पड़ी थी..
आज तक उसके जीवन में जो एक उषर भाव था, नीरसता थी, वो अचानक ही गायब हो गयी थी….
आजकल तो उसे उन सब्जियों में भी रस मिलने लगा था जिन्हे कभी वो थाली में देख कर ही मुहं बिचका कर थाली खिसका देती थी।
चाहे उन सब्जियों को उसकी माँ ने कितने ही मनोयोग से बनाया हो..।

अचानक राजेंद्र ने ऐसी कौन सी जादू की छड़ी उस पर घुमा दी थी..।
उसका रंग रूप नखशिखांत बदल गया था..।
अब राजेंद्र के आने के पहले वो हाथ मुहं धोकर बाल काढ़ कर संवार लेती थी..
अब राजेंद्र के साथ खरीदारी करने जाते हुए वो कुर्ते के साथ कभी कभी झुमके तो कभी लटकन डाल लिया करती थी..।
आजकल उसे एक नया नया शौक और सूझने लगा था, कपड़ो के रंग से मिला कर बिंदी लगाने का…।

राजेंद्र भी अपने साथ वालो को बदला बदला सा लगने लगा था..
सदा का मितभाषी राजेंद्र अब बात बात पर खिलखिला उठता था।  कभी साथ वाले किसी की बात पर जोर का ठहाका लगा उठता, तो किसी की बात पर लम्बी चौड़ी बात कह उठता..।
बात बेबात उसे लोगों ने गुनगुनाते हुए भी पकड़ा था..।
अनुभवी नर्सो की आँख से कैसे छिपता आखिर.. वो लोग भी समझती थी कि डॉक्टर साहब अपनी ताज़ातरीन बीवी के साथ सावन के हिंडोले ले रहे हैं। 
लेकिन जो भी हो अस्पताल को भी अब ये हँसता मुस्कुराता युवा डॉक्टर पसंद आने लगा था…

गेंदा को भावना ने ज़िद कर के सिलाई कढ़ाई की कक्षा में भेजना शुरू कर दिया था, इसके साथ ही उसे दंसवी का परचा भी भरवा दिया था..
प्राइवेट से इम्तिहान देने के कारण गेंदा का स्कूल जाना तो होता नहीं था, भावना ही उसे रोज़ दिन में कुछ देर और शाम को कुछ देर पढाने बैठाती थी….

आज भी भावना गेंदा को साथ लेकर बैठी थी.. गेंदा घरेलु कामकाज में जितनी चुस्त थी, पढाई करने में उतनी ही उसे मौत आती थी…।

एक आसान सा सवाल भी उसके भेजे में घुसाने के लिए भावना को बडी मशक्कत  करनी पड़ती थी..।
लेकिन भावना भी सबर की देवी थी, अपने निपट कोरे अजिज्ञासु विद्यार्थी को देख कर भी उसने हथियार नहीं डाले थे…
और आज ऐसा ही कोई कठिन सवाल गेंदा को समझाने में भावना को अपने सारे देवी देवता याद आ गए थे..।

दोनों ही तल्लीन थे, भावना पढ़ाने में और गेंदा सब समझ में आ रहा हैं ये दिखाने में, कि तभी राजेंद्र दरवाज़ा खोल कर चला आया…

दोनों लड़कियाँ चौंक गयी, भावना मुस्कुरा कर खड़ी हो गयी.. लेकिन रोज़ की तरह आज राजेंद्र नहीं मुस्कुराया !

गेंदा उठ कर चाय बनाने चली गयी और भावना पानी का गिलास लिए राजेंद्र के बाजू में आ बैठी..

“क्या हुआ, कुछ परेशान लग रहे हैं ?”

“हम्म !”

“बोलिये न, क्या हुआ ?”

राजेंद्र ने भेद भरी आँखों से भावना की तरफ देखा…
भावना ज़रा डर गयी..

“आप बोलिये ना क्या हुआ ?”

“भावना एक बात पूछूं ?”

“पूछिए !” डरते हुए भावना ने कहा

“तुम खुश तो हो ना ? कोई ऐसी ख्वाहिश कोई इच्छा ऐसी तो नहीं जिसका मलाल हो ?”

“पगला गए हैं क्या ? हम आपके साथ जितने खुश हैं इतने तो कभी नहीं रहे.. ! अब पहेलियाँ मत बुझाइये, साफ़ साफ़ बताइये क्या हुआ !”

घबराई सी आवाज़ में भावना ने कहा और राजेंद्र कंधे झुकाये ज़मीन को घूरते हुआ कहने लगा..

“मेडिकल एंट्रेंस का रिज़ल्ट आ गया हैं भावना !”

भावना ने एक ठंडी सी साँस ली और राजेंद्र की कुर्सी के पास आकर ज़मीन पर उसके घुटनो पर सर रख कर वो चुपचाप बैठ गयी…

“कोई बात नहीं.. अगर आप चाहेंगे तो हम दुबारा तैयारी कर के फिर से परीक्षा देंगे.. लेकिन आप उदास मत  रहिये.. आपके चेहरे की उदासी हम नहीं देख सकते..। आपकी खुशी के लिए हमसे जो बन पड़ेगा, हम सब करेंगे। बस आप मुस्कुराते रहिए।
डॉक्टर साहब हम वादा करते हैं, अगले साल हम फेल नहीं होंगे। हम दुगनी तैयारी करेंगे, हम अपने जोश को बिल्कुल कम नहीं होने देंगे। आप यकीन रखिए हम पर बस…!”

राजेंद्र ने भावना को कंधो से पकड़ा और उसे खड़ा करते हुए खुद भी खड़ा हो गया..

“तुमसे ये किसने कहा कि तुम फेल हो गयी !”

डबडबायी आँखों से भावना राजेंद्र की आँखों में देख रही थी..

“तुम सेलेक्ट हो गयी हो भावना !”

राजेंद्र ने कहा और हलके से मुस्कुरा उठा, भावना का मुहं खुला का खुला रह गया..

“मतलब… आप हमसे.. !”

वो और कुछ बोलती उसके पहले राजेंद्र उसके चेहरे पर झुक गया..

रसोई के दरवाज़े पर साँस रोके ये सारी बातें सुनती गेंदा ने जब राजेंद्र को भावना को अपनी बाँहों में भींचते देखा, वो मुस्कुरा कर रसोई में चली गयी..

उसी वक्त धड़ाम की एक तेज़ आवाज़ हुई और गेंदा वापस भाग कर दरवाज़े तक चली आयी..
राजेंद्र के तीन चार दोस्त पार्टी पॉपर फ़ोड़ कर भावना को बधाई देने चले आये थे..
उन लोगो के आते ही भावना राजेंद्र से अलग होकर खड़ी हो गयी..
राजेंद्र के साथ काम करने वाले डॉक्टर्स कम उसके  दोस्त अपने साथ मिठाई का बड़ा सा डिब्बा, कुछ और खाने पीने की चीज़े और केक भी ले आये थे..
उन लोगों ने एक एक कर भावना का मुहं मीठा कराना शुरू कर दिया..
भावना इस आकस्मिक प्रहार से बुरी तरह शरमा गयी थी..
राजेंद्र के साथ काम करने वाली डाक्टरनियाँ भी भावना के मुहं में मिठाई ठूंस रही थी और भावना ज़रा सा टुकड़ा काट कर हाथ में समेटती जा रही थी..
राजेंद्र ने उसकी समस्या देखी और उसके हाथ से मिठाई लेकर अपने मुहं में डाल ली..

“क्या बात हैं राजी.. बीवी का जूठा खा लिया !” एक दोस्त ने छेड़ दिया और दूसरे ने नहले पे दहला जड़ दिया..

“खुद बीवी के जूठे हुए बैठे हैं अब इन्हे क्या चिंता ! ” डॉक्टर समुदाय का हास परिहास मर्यादाओ की सीमा लाँघता जा रहा था और शरमा कर राजेंद्र को देखती भावना लाल पड़ी जा रही थी..।

राजेंद्र ने एक बार फिर उसे खींच कर अपने सीने से लगा लिया और वो उसकी बाँहों में मुहं छिपा कर मुस्कुरा उठी..

कुछ देर में ही सभी ने मिल कर पार्टी का सारा इंतज़ाम कर लिया…
कुछ खाने की वस्तुएं गेंदा ने बना ली कुछ बाहर से मंगवा ली गयी और बाहर वाले कमरे के टेबल पर एक एक कर सारी चीजे सज गयी.. ।

बड़े से बैग से बियर की बोतले भी निकाल ली गयी.. राजेंद्र ने धीरे से भावना की तरफ देखा.. और उठ कर अंदर रसोई की तरफ चला गया..
भावना उसका इशारा समझ कर उसके पीछे चली आयी..

“क्या हुआ, कुछ कहना था ?”

“भावना ये लोग कभी कभी ड्रिंक कर लेते हैं, तुम्हे कोई प्रॉब्लम तो नहीं ?”

“आप भी करते हैं ?”

भावना के सवाल पर राजेंद्र ने ना में गर्दन हिला दी..

“आज तक तो कभी नहीं की, और आगे करूँगा भी नहीं !”

“फिर हमें कोई प्रॉब्लम नहीं !”

राजेंद्र ने भावना के सर पर हाथ रख कर ज़रा सा थपक दिया, और मुस्कुरा कर बाहर चला आया..

भावना के बार बार बुलाने पर भी सबको खाना पीना परोस कर गेंदा अपना खाना लिए अपने कमरे में चली गयी..

बाहर बैठे सारे डॉक्टर्स खाते पीते गाते बजाते भावना के सुखद भविष्य की कामनाओं के साथ अपनी पार्टी मनाते रहे….

आधी रात बीतने पर सब अपने अपने घर चले गए….
भावना ने गेंदा के कमरे में झांक कर देखा वो गहरी नींद सोई पड़ी थी..।
राजेंद्र की मदद से बाहर वाला कमरा साफ़ कर वो भी अपने कमरे में चली आयी…।

राजेंद्र भी उसके पीछे चला आया..
बिस्तर पर बैठी भावना राजेंद्र की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी… राजेंद्र उसके पास आया और उसके बाजू में बैठ गया..
उसने अपने हाथ में एक बैग रखा था, उस बैग में से उसने एक बड़ा सा गिफ्ट निकाला और भावना के हाथ में रख दिया..

आश्चर्य से गिफ्ट को देखती भावना ने राजेंद्र की तरफ देखा..

“खोल कर देख लो.. क्या हैं ?”

भावना ने उस सुंदर सी पैकिंग को खोल लिया..
उसके सामने एक सफ़ेद रंग का स्टेथोस्कोप चमक रहा था..

भावना की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, उसने तुरंत उसे अपने गले से लटका लिया..

“कैसी लग रही हूँ ?”

“बहुत सुंदर !”

आईने के सामने इठलाती खड़ी भावना खुद को देख कर ही मोहित हुई जा रही थी और राजेंद्र उसके चेहरे की हंसी पर वारा जा रहा था..

“प्रॉमिस करता हूँ भावना,तुम्हारी ये हंसी कभी खोने नहीं दूंगा !”

राजेंद्र का आभार व्यक्त करने फिर उसकी दुल्हन उसके पास उसकी बाहों में चली आयी….।

क्रमशः

अगला भाग कल सुबह….
इंतज़ार कीजिये और इस भाग पर बढ़ चढ़ कर समीक्षाएं लिख दीजिये

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Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very interesting and Fantastic n Fabulous n Bahtareen and Lajabab n Shandaar n Jaberdast part, waiting for the next part eagerly.

Nisha
Nisha
1 year ago

Aakhir bhawna aur rajendra ki mehnat safal ho gayi.upar se dono ne genda ko bhi jine ki nayi rah dikhayi.best part tha mam 😘😘😘😘😘😘👌👌👌👌👌👌👌👌👌❤️❤️❤️❤️

Samiksha Jain
Samiksha Jain
1 year ago

What an awesome beginning of a new journey

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

दीपक जितना चाहे खियाली पुलाव बनाता रहे पर उसका जेल से बाहर निकलना तो नामुमकिन है, वो अपने करनी की सज़ा पाकर ही रहेगा।
दूसरी तरफ अखंड की मेहनत रंग लाई और वो राजनीति मे अपनी जगह बना ली, रेखा ने सच्चे मन से अखंड को चाहा है, उसने अखंड की हर कदम पर मदद की है देखा जाये तो उसने खुद की ज़िन्दगी होम कर दी…। रेखा ने बहुत किया जो अखंड से अपने मन की बात कह दी।
वाह.. 👏🏻👏🏻👏🏻भावना को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए राजेंद्र का ही सबसे बढ़ा सहयोग है बिना राजेंद्र के ये सब सम्भव ही नहीं था, कभी कभी बिना कुंडली मिले,बने रिश्ते बहुत लाजवाब जीवनसाथी साबित होते है, इनके जीवन मे आए उतार चढ़ाव मे इन्होने धैर्य बनाए रखा जिसका नतीजा…आज ये बेहतरीन जीवनसाथी साबित हुए।
आज कहानी अपने अंत तक पहुंच गई, आपकी लिखी कहानियों से हम इतने दिल से जुड़ जाते है डॉक्टर साहिबा कि दिन रात उन्ही किरदारों मे खोय रहते है, ज़ब वो हँसते है तो हम भी उस दिन बहुत ख़ुश हो जाते और ज़ब कभी वो दुखी होते है तो आंसू हमारे भी निकल आते और कितनी ही दुआएं कर देते कि उनके साथ सब सही हो ये भूल जाते है कि ये कहानी है 😊यही है आपकी लेखनी जो हमें बिलकुल अपने रंग मे रंग देती 🙏🏻। वक़्त बड़ी जल्दी बीत गया डॉक्टर साहिबा…अपराजिता का अंत भी आ गया पर क्या कर सकते है आपने ही कह दिया वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता… 🙏🏻। अपराजिता एक ऐसी कहानी है जो कभी खत्म नहीं हो सकती, किसी ना किसी रूप मे हमारे आस पास मिल ही जाएगी, आप हम भी अपराजिता ही है 😊🙏🏻।
इतनी खूबसूरत कहानी को हम तक पहुंचाने के लिए आपका बारम्बार शुक्रिया डॉक्टर साहिबा 🙏🏻।

Last edited 1 year ago by Manu Verma
जागृति
जागृति
1 year ago

भावना की mahnat और dr साहब का साथ रंग लाया जिंदगी को सही दिशा मिल गई भावना ने अपनी ही नहीं गैंदा को भी दिशा प्रदान की मस्त पार्ट

Ritu Jain
Ritu Jain
1 year ago

Rajendra ne bhawna ka hosla badha kar usko bhi aaj doctor bhawna bana hi diya bhawna ki mehnat aaj rang la hi gyi. Akhand ko bhi ab apni life ke bare mein soachna chahiye Geeta usko bahut pasand karti hai uska praposal accept karna chahiye. Wonderful part

Deepali
Deepali
1 year ago

Bhawna ko uski mehnat ka fal mil gaya. Thode samay baad vo bhi Dr bhawan kahi jaygi.kismst ne bhawna ko kaha se kaha pahucha diya. Dr sahab ne bhawna ko na keval pyar diya balki usko jeevan ki raah bhi dikhai. Bahut sunder kahani hai. Akhand ke samne Geeta ne apna Dil kholker rakh diya .

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Bahut sundar

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Bahut hi khoobsurat.

ROOPSAGAR
ROOPSAGAR
1 year ago

👌👌👌👌👌