मायानगरी सीजन -2 भाग -1

मायानगरी सीजन -2 भाग -1

    आपको याद होगा, थर्ड लास्ट पार्ट में गौरी थोड़ा परेशान थी, उसे कुछ लड़के सिम बदल बदल कर संदेश भेज रहे थे और ब्लैंक कॉल्स कर रहे थे, जिसके बारे में जैसे ही वेदांत को मालूम चलता है वो उसे तुरन्त पुलिस थाने ले कर जाता है, जहाँ लीना उन लड़को के सिम के नंबर तुरंत ही ट्रैक पर डाल देती है,  वहां से निश्चिन्त होकर वेदांत और गौरी घर लौट गए..

अब आगे..

सुबह गौरी का अलार्म बजता उसके पहले उसका फ़ोन बजने लगता है.. एक नया नंबर देख कर गौरी परेशान हो गई, वेदांत की भी नींद इस रिंग से खुल गई, और वो गौरी के परेशान चेहरे की तरफ देख कर सब समझ गया..

“क्या हम उठा लें ?” वो पूछता है और गौरी हामी भर देती है..

वेदांत के फ़ोन उठा कर हेलो बोलते ही दूसरी तरफ से फ़ोन काट दिया गया..

वेदांत गौरी के बालो को सहला कर बाथरूम चला गया..
गौरी को अब घबराहट सी हो रही थी.. पता नहीं इन लड़को का उसने ऐसा क्या बिगाड़ दिया, जो ये लोग उसके पीछे ही पड़ गए..
सोचते सोचते वो बालकनी में आ खड़ी हुई..

भोर हो रही थी.. हवा में अब भी ठंडक थी..
नीचे गार्डन की घास ओस में भीगी हुई थी, नीचे गार्डन में घर के नौकर घास छील काट कर तैयारियों में लगे थे..
आज उसके ससुर जी की पार्टी के कुछ गणमान्य नेता उसके घर नाश्ते कम मीटिंग के लिए आने वाले थे..। इसके साथ ही आज उसके ससुर जी का जन सामान्य की अर्जियां देखने का अंतिम दिन था..
चुनाव पास आ चुका था और कभी भी अचार संहिता की घोषणा हो सकती थी..
आज नामांकन भरने का भी आखिरी ही दिन था !!

बस उन्ही सब तैयारियों में घर भर के लोग लगे हुए थे, यह सब काम होते हुए गौरी देख रही थी तभी उसकी नजर घर के मुख्य गेट पर चली गई। गेट के ठीक बाहर के रास्ते पर से बाइक पर सवार दो युवक उसी की तरफ देखते हुए निकल रहे थे। वह बड़े ध्यान से उन लोगों को देखने लगी। वह लड़के कुछ आगे जाकर वापस मुड़े और एक बार फिर गेट के सामने से निकलने लगे। ऐसा उन्होंने दो-तीन बार किया।

उन लोगों का ऐसा करना गौरी को ठीक नहीं लगा, और वह मुड़कर अंदर चली आई। एक बार फिर गौरी का फोन बजने लगा। गौरी को अचानक यह महसूस हुआ कि उसे फोन करने वाले कहीं यही लड़के तो नहीं? उसने फोन उठाने के साथ ही अपनी खिड़की के पीछे छिपकर एक बार फिर उन लड़कों को देखना शुरू किया। उसका अंदाजा सही निकला। वह लड़के गेट के बाहर अपनी बाइक रोककर खड़े हो गए थे। और उनमें से एक लड़का अपने कान पर मोबाइल लगाए खड़ा था। गौरी के माथे पर पसीने की बूँदे छलक आई।
   पता नहीं क्यों लेकिन उसे यह बात वेदांत को बताने में डर लगने लगा। उसे लगा अगर उसने वेदांत को लड़कों के बारे में बता दिया, तो वेदांत घर के नौकरों को लेकर इन लड़कों को मारने पीटने चला जाएगा। और बेकार में ही छोटी सी बात का बतंगङ बन जाएगा। पूरे घर में हंगामा हो जाएगा। इसीलिए उसने चुपचाप फोन काटा और फोन को स्विच ऑफ करके बालकनी का दरवाजा बढ़ा दिया।

     वो परेशान सी अपने पलंग पर जा बैठी उसी समय वेदांत बाथरूम से निकला और उसके माथे को चूम कर  अपने स्पोर्ट्स शूज अलमारी से निकाल कर कमरे से बाहर निकल गया….

   आठ बजे के आसपास जन दर्शन के लिए गेट को खोल दिया गया। हालांकि बाहर का कोई भी व्यक्ति विधायक जी से सीधे तौर पर नहीं मिल सकता था। विधायक जी का सेक्रेटरी मुन्ना गेट पर ही खड़ा था। वह वहां मौजूद लोगों की अर्जियां पहले खुद पढ़ रहा था, उसके बाद भुवन को लाकर दे रहा था। भुवन के देखने के बाद ही अर्जियां विधायक जी तक पहुंचती थी… ।

लगभग बीस-तीस आवेदनों में से भुवन में चुनकर दस अर्जियां विधायक जी तक भिजवा दी। विधायक जी गार्डन में ही बैठे थे, एक के बाद एक लोग आने लगे और अपनी समस्याएं उन्हें बताने लगे।

यह वह समय था जब लोगों को भी मालूम था कि विधायक जी उनकी समस्या जरूर दूर करेंगे। क्योंकि चुनाव का वक्त आ चुका था, और अगर अब विधायक जी ने लोगों को खुश नहीं किया तो उनकी गद्दी छीननी पक्की थी। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग उनसे मिलने आना चाहते थे। सुबह गौरी को दिखे वह दोनों लड़के भी अपनी अर्जी लेकर अंदर चले आए थे….

गौरी उस वक्त अपने हॉस्पिटल के लिए निकल रही थी, वह एक तरफ से होकर बाहर जा रही थी कि उसे लगा भीड़ में मौजूद दो आंखें उसे ही घूर रही है।
अचानक उसने उस तरफ देखा तो वह दोनों लड़के उसे नजर आ गए ।
वह दोनों भुवन से बात तो कर रहे थे लेकिन उनकी नजर गौरी पर ही थी..

गौरी ज़रा घबरा सी गयी, लेकिन अपने साथ चल रहे वेदांत को उसने अपना भय नहीं दिखाया..।
वो तेज़ी से चल कर वहाँ से बाहर निकल गयी..
वेदांत ने अपनी गाड़ी निकाली और गौरी को साथ लेकर निकल गया..
उसके अस्पताल में उसे उतार कर वेदांत अपने काम के लिए निकल गया..

अस्पताल पहुंचकर गौरी सीधे मेडिसिन विभाग की तरफ बढ़ गई। आज उसके इंटर्नशिप मेडिसिन विभाग में पूरी हो चुकी थी। और आज से उसे न्यूरोलॉजी में काम करना था। अपने पेपर वहां से समेट कर वह अपनी सहेली प्रिया के साथ न्यूरोलॉजी विभाग की तरफ बढ़ने लगी। उसके चेहरे पर की परेशानी देखकर प्रिया ने उस से पूछ लिया कि वह किस बात पर इतनी गुमसुम सी लग रही है।

गौरी से रहा नहीं गया और उसने प्रिया को सब कुछ बता दिया।

” बड़ी अजीब है यार तू, इतना केयरिंग हसबैंड और तूने वेदांत को नहीं बताया?”

“यार वेदांत का नेचर तू जानती है ना, वह लड़का कोई चीज थोड़ी बहुत करके मानता ही नहीं। हर बात को बढ़ा देने में उसे यकीन है।”

” शट अप, इतना केयरिंग है वेदांत। इतना प्यार करता है तुझे, कितना पजेसिव तेरे लिए ।”

“जानती हूं और इसीलिए उसे नहीं बताया। अगर उसे सुबह बता देती ना कि लड़के बाहर खड़े हैं, तो वह घर के नौकरों के साथ जाकर उन्हें कूट पीट कर चला आता, फिर पूरे घर को पता चल जाता।
मुझे कितनी शर्म आती ,सोच तो।”

“तुझे शर्म आती यह सोचकर तूने वेदांत को नहीं बताया?
जब वह लड़के तेरे घर तक आ चुके हैं तो,  सोच कि वह कितने खतरनाक है। वह तो यहां अस्पताल में भी आ सकते हैं ना..?”

प्रिया की यह बात सुनकर गौरी भी घबरा गई।

” अब तू डरा मत यार। घर तक पहुंचना अलग बात है। आज पापा जी का जन दर्शन कार्यक्रम था ना, बस उसी में पहुंच गए।
  वो लोग यहां हॉस्पिटल नहीं आएंगे।”

” अच्छा है, ना आए। क्योंकि अगर यहां आ गए ना, तो मैं सीधा वेदांत को कॉल करूंगी। तेरा पागल पति आकर उन दोनों का खून ही कर देगा सीधा।”

” भगवान से मना कि वह लोग ना आए।”

गौरी और प्रिया बातें करते हुए न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में पहुंच गए। वहां इस वक्त मृत्युंजय मौजूद था। उन लोगों ने अपने पेपर मृत्युंजय के सामने रख दिए।
  जय ने एक नजर दोनों के पेपर्स देखें और राइट टिक करके दोनों को उस दिन की जॉइनिंग दे दी। वह लोगों को अपने साथ लेकर अपने भर्ती किए मरीजों को दिखाने ले गया..

मरीज के बारे में सारी जानकारी प्रिया और गौरी को देने के बाद जय इंडोर रूम से बाहर निकल आया। उसके पीछे ही गौरी और प्रिया भी बाहर चली आई। वह लोग वहां से ऑपरेशन थिएटर की तरफ बढ़ रहे थे कि पीछे से किसी ने गौरी को आवाज लगा दी..

“मैडम सुनिए !”
  इस आवाज को सुनकर गौरी प्रिया के साथ जय भी पीछे पलट गया।

सामने वही दोनों लड़के खड़े थे। गौरी उन्हें देखकर घबरा गई, और वह दोनों उन लोगों के पास चले आए।

” मैडम हम भी मरीज़ है, आपको दिखाना चाह्ते हैं..।”

उन लोगो को देखते ही गौरी की जबान सूखने लगी, उसके माथे पर पसीना छलक गया, उसकी परेशानी देखकर जय ने उन लोगों से सवाल कर लिया।

” कौन हो तुम? पहले जाकर नीचे से पर्ची बनवा कर लाओ। उसके बाद दिखाना।”

उन लड़कों ने जय को घूरा और गौरी की तरफ देखने लगे।

” मैडम बताइए ना आप कहां बैठते हैं? हमें अपना मर्ज दिखाना है।”

जय ने लड़कों को फिर टोक दिया।

” तुम लोगों को समझ में नहीं आ रहा, मैंने क्या कहा?”

” अबे तू होता कौन है? हमें टोकने वाला? हम इससे बात कर रहे है। तू क्यों बीच में बोल रहा है?”

उन लड़कों के ऐसा बोलते हैं जय का एक जोरदार थप्पड़ उस लड़के को पड़ा और वह गोल घूम कर नीचे गिर पड़ा। दूसरा लड़का आंखें फाड़े उन दोनों को देखने लगा। दूसरे लड़के ने तुरंत अपना घूंसा बांधा और जय की तरफ बढ़ा दिया। जय ने उसके घूंसे को अपनी चौड़ी हथेली में समेटा उसका हाथ मरोड़ दिया..।
लड़का कलप कर रह गया..
उतनी देर में ज़मीन पर गिरा पड़ा लड़का उठ खड़ा हुआ..
खुद को संभाल कर उसने अपना हाथ जय को मारने के लिए बढ़ाया ही था कि जय ने उसके हाथो को अपने हाथो में पकड़ कर पूरी तरह घुमा दिया..।

वो लड़का चीख कर रह गया..
उसकी बांह मोड कर उसी के कंधे पर रख कर जय ने उसका सर पास की दीवार पर दे मारा..
लड़का कलबला कर रह गया..
दूसरा लड़का पहली चोट से ही घबराया सा था..

जय तबीयत से उन लड़कों की धुलाई कर रहा था कि उसी समय वेदांत भी भागा हुआ  वहां चला आया। वेदांत को देखते ही गौरी उसके पास पहुंच गई। वेदांत ने उन लड़कों को देखा और फिर गौरी की तरफ देखा और गौरी बोलने लगी

” वेदांत यह दोनों वही लड़के हैं जो मुझे कॉल करके परेशान कर रहे थे।”

यह सुनते ही वेदांत भी जय के साथ उन लड़कों को पीटने में लग गया। उन दोनों लड़कों को कूटने पीटने में वेदांत और जय ने कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों लड़के जमीन पर निढाल से पड़े थे। वह तो अच्छा था कि न्यूरोलॉजी विभाग में ज्यादा आवाजाही नहीं थी, वरना यहां भी भीड़ लग जानी थी तमाशाबिनो की।

जय ने दोनों लड़कों को जमीन पर से उठाया और खींचकर पास वाले कमरे की तरफ ले जाने लगा और दोनों ही डर के मारे गिड़गिड़ाने लगे..

उन दोनों को लगा कि यह भूतनाथ अब उन्हें जान से मारने के लिए ले जा रहा है।

“दीदी, हमें बचा लो दीदी,  माफ कर दो दीदी अब हम ऐसा कभी नहीं करेंगे बहुत गलती हो गई!!
हमें इस काल भैरव से बचा लो दीदी !”

गौरी कुछ कहती उसके पहले प्रिया बोल पड़ी..

“आज के बाद फ़ोन कर के किसी लड़की को परेशान करोगे ?”

“आइंदा आपको क्या किसी लड़की को फोन नहीं करेंगे दीदी.. बस इन भैया से बचा लो..  इन भैया को बोलो कि हमें छोड़ दें..।”

जय ने उन लड़कों को एक नजर देखा और कमरे को खोलकर उन्हें अंदर ले जाकर वहां रखी बेंच पर पटक दिया। दोनों लड़के एक दूसरे पर गिरते संभलते उस बेंच पर बैठ गए..

वेदांत सोचने लगा कि आखिर जय इन लड़को को यहाँ क्यों ले आया, अब वो और कौन सा टॉर्चर उन पर करने वाला है..
जय ने उस कमरे में मौजूद फर्स्ट एड बॉक्स खोलकर कॉटन रोल निकाला और नर्स को उनके घाव साफ करने की हिदायत देने लगा….

“सिस्टर इन लड़को की ड्रेसिंग करने के बाद इन्हे टिटेनस का इंजेक्शन भी लगा देना !”

“नहीं इंजेक्शन नहीं !” उनमे से एक रिरियाया..
जय ने उसे घूर कर देखा और जय को देख वो दोनों डर गए…

“और खानी है क्या मार ? “

“नहीं सर.. माफ़ कर दीजिये !”

नर्स ने टिंचर में रुई का फाया भिगोया और उनमे से एक के घाव पर रख दिया…. वो लड़का जलन से तड़प गया..

“सर एक बात बताइये… ये एक्सीडेंट केस है या ?”

“एक्सीडेंट ही समझ लो.. एक्सीडेंटली मुझसे टकरा गए और मैंने इनका भरता बना दिया..
अब दर्द मैंने दिया है तो दवा भी मैं ही दूंगा ना, ऐसे ही थोड़े ना मम्मी ने मृत्युंजय नाम रखा है !”
नर्स ने मुस्कुरा कर हाँ में सर हिला दिया..

वेदांत भी मुस्कुराने लगा, उस पर भी धीरे धीरे इस जादूगर डॉक्टर का जादू चढ़ने लगा था.. अब उसे मृत्युंजय से शिकायत नहीं थी, उल्टा वो उसकी प्रतिभा का, स्वभाव का, प्रशंसक होने लगा था..

उसी वक्त गौरी चीख पड़ी..
सब एकदम से उसे देखने लगे.. -“क्या हुआ गौरी ?” वेदान्त ने पूछा और गौरी ने वेदांत के बाजु को खींच कर आगे कर दिया..

“देखो कितनी चोट लगा ली तुमने और बताया तक नहीं? हॉस्पिटल में होकर भी चुपचाप खड़े हो?”

” अरे हमें पता ही नहीं चला गौरी कि हमें चोट लगी है।”

“इतना खून बह गया, तुम्हे पता भी नहीं चला। “

गौरी ने घूर कर वेदांत को देखा। वही टेबल पर रखें ड्रेसिंग ट्रे से उसने कॉटन निकाली और उसे भीगा कर वेदांत का जख्म साफ करने लगी।

जय ने उन दोनों को देखा और मुस्कुरा कर वहां से बाहर निकल गया। प्रिया गौरी को देखकर मुस्कुराने लगी। वह दोनों लड़के चुपचाप मुंह लटकाये वहां बैठे थे..

मरहम पट्टी करवाने के बाद वह लड़के भी खड़े हो गए और वहां से बाहर निकल गये।
उन लोगों के जाते ही वेदांत ने गौरी की तरफ देखा और नाराजगी में उससे सवाल कर बैठा ।

“यह लड़के तुम्हारे अस्पताल तक कैसे पहुंच गए?”

” मुझे नहीं पता, लेकिन सुबह इन्हें मैंने अपने घर पर देखा था।

“क्या बात कर रही हो?” वेदांत आश्चर्य से गौरी की तरफ देखने लगा।

” इन लड़कों को तुमने घर पर देखा था?”

” आज सुबह जन दर्शन के कार्यक्रम में पापा जी से मिलने आए लोगों में यह दोनों लड़के भी थे, और यह उस वक्त भी मुझे घूर रहे थे, लेकिन उस वक्त मुझे नहीं पता था कि यही लड़के मुझे कॉल कर रहे हैं।”

वेदांत का गुस्सा बढ़ने लगा और गौरी ने धीरे से उसका हाथ थाम लिया।

” प्लीज तुम गुस्सा मत करना अब। यह लोग इतनी कुटाई खा चुके हैं तुम दोनों के हाथ से की, अब यह लोग वापस कभी नहीं आएंगे।”

” आना भी नहीं चाहिए इन लोगों को।”
वेदांत का गुस्सा अभी संभल नहीं रहा था। गौरी ने अपने बैग में से पानी की बोतल निकाली और वेदांत की तरफ बढ़ा दी।

” गुस्से को पानी समझकर पी जाओ, समझे?”
गौरी के इस भोलेपन पर वेदांत मुस्करा उठा, उसने पानी की घूंट भरी और वहां से बाहर निकल गया। उसके साथ ही गौरी और प्रिया भी बाहर चली आयी।

इधर वो दोनों लड़के भी अपनी बाइक की तरफ बढ़ रहे थे लेकिन उन दोनों में से एक बुरी तरह से अपमान की आग में जलने लगा था..

तभी उस लड़के को किसी परिचित सी आवाज़ ने हांक लगा दी..

“अखिल यहाँ क्या कर रहे हो ?”

“डैड.. वो.. एक्चुली !”

उसे इतना अटकते देखा और उसके पिता उसके पास आये और उसकी पीठ थपथपा कर वहाँ से अपने विभाग की तरफ निकल गए..

क्रमशः

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Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

अखिल कौन है जो गौरी को तंग कर रहा है
एक पति एक guardian वो भी मृत्युंजय तो क्या हाल होगा बेचारो का

मायानगरी के साथ साथ मेरी भी वापसी हुई है उम्मीद करती हूँ मै भी रेगुलर रहूं 😀

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

यह लड़के इस तरीके से गोरी के पीछे क्यों पड़े थे कुछ तो बात है के उसके लिए यह लोग उसके पीछे पड़े होंगे।🙄🙄🙄🙄
पर आप साक्षात महादेव के दर्शन होने के बाद यह कंजरे लोग दोबारा गौरी के पास नहीं फटकेंगे उसके पति ने भी अच्छी मालिश दी है इन दोनों को और इतना पीटने के बाद भी अपमान की आग में जलन,मुझे तो लग रहा है शायद यह फिर कुछ करेंगे।🙄🙄🙄🙄
सॉरी अगर पहले ही वेदांत को सब कुछ बता देती तो बात यहां तक नहीं आती पर उसका डर भी अपनी जगह जायज था तो बेचारी चुप रह गई और बात यहां तक आ गई अच्छा हुआ कुटाई मिल गई उन दोनों को अब कुछ अकल लग गई हो तो ठीक है।😠😠😠😠😠

Kavita
Kavita
1 year ago

बढ़िया है, जिसने दर्द दिया दवा भी उसी ने दी
मजा आया

Nisha
Nisha
1 year ago

Jay aur vedant ne bahut achha kiya ki dono ko kut kar.👌👌👌👌👌😘😘😘😘😘

Ankita
Ankita
1 year ago

वाह
मजा आ गया कुटाई पढ़कर … थोड़ी और करवानी थी ना

Neelu
Neelu
1 year ago

Thank you so much mam mayanagri start Karne k ly… aparajita too good

जागृति
जागृति
1 year ago

Very nice lovely part मजेदार धुनाई हुई लेकिन लगता है बाकी है अभी कुछ ठुकाई तभी ना बदले और अपमान की आग में झुलस रहा है

Reena singla
Reena singla
1 year ago

Nice..,im waiting for next part

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Bahut badhiya

Rekhapradeepsrivastava
Rekhapradeepsrivastava
1 year ago

बहुत इंतजार था माया नगरी का अपर्णा
और शुरुवात हुई भी वेदांत गौरी और जय से 👏👏👏
अब ये अखिल कौन है जो गौरी को परेशान कर रहा और जिसकी जम कर धुलाई भी कर दिया जय और वेदांत ने।
इंतजार है अगले पार्ट का👌👌👌👌👌❤️❤️❤️❤️❤️