जीवनसाथी-3 भाग-100

जीवनसाथी -3 भाग -100

तो दोस्तों चलते-चलते हम जीवन साथी के तीसरे सीजन के भी 100 में भाग में पहुंच गए और लिखते समय अब भी मुझे लग रहा है की कहानी की शुरुआत तो अब तक हुई ही नहीं लेकिन अगर पढ़ने में आप लोगों को मजा आ रहा है तो इससे बढ़कर खुशी की दूसरी बात भी नहीं….
एक लंबी कहानी या धारावाहिक क्या होता है अपने आसपास मौजूद छोटे-छोटे किस्सों के मोतियों को समेट कर बनाई गई एक लंबी माला जिसमें हर दिन एक नया शोरगुल होता है एक नया किस्सा होता है..
यहां तक पहुंचने में आप लोगों ने बहुत साथ दिया है जीवनसाथी के सीजन वन से शुरू करके अब तीसरे सीज़न तक आप लोगों का साथ और प्यार बढ़ता ही गया इसलिए मेरी भी कोशिश रहेगी कि मैं कहीं पर भी कहानी को बेवजह ना खींचूं और कहानी को जितना अधिक रोचक बना सकूं उतना बना लूँ..
दिल की बात को यहीं रोक कर अब चलते हैं कहानी की तरफ कहानी के सौंवे भाग की आप सभी प्रिय पाठक जनों को हार्दिक शुभकामनाएं..

****

कली और सरु वापस हॉल में आ गए थे। दोनों को समझ में आ गया था कि शौर्य चला गया है..।
इत्तेफाक से वासुकी के अंदर आने में वो जा चुका था, और दोनों का ही आमना सामना नहीं हुआ था…

वासुकी आने के बाद हमेशा की तरह अपने हॉल में बैठने की जगह सीधे अपने ऑफिस की तरफ बढ़ गया… उसके दिल दिमाग में राजा अजातशत्रु के लड़के ने कोहराम मचा दिया था.. ।
लड़का वाकई बवाल था !
इतने सारे लोगो के बीच कैसी निर्भीकता से उसने एलान कर दिया कि वो उस अमानक कॉस्मेटिक को मार्किट में नहीं आने देगा..

वासुकी स्वयं निर्भीक था! किसी समय उसके भी दिल दिमाग में किसी बात का डर नहीं था.. लेकिन नेहा के आने के बाद उसे लेकर वासुकी ज़रा परेशान रहने लगा था और नेहा के जाने के बाद कली के लिए तो वो हद से ज्यादा भयत्रस्त रहने लगा था..।

वासुकी ने खुद नहीं सोचा था कि उसकी नन्ही सी गुड़िया उसके जीवन को इस कदर बदल कर रख देगी..

वो कली को कहीं बाहर खाने पीने नहीं देता था… अगर कली कुछ ज्यादा ज़िद पर अड़ जाये, तब पहले खुद चखता तब जाकर अपनी बेटी को खाने देता, बिलकुल पहले के ज़माने के राजवैद्यों की परिपाटी को निभाता था वो…

आज इतने दिनों बाद अपने प्रतिबिम्ब को देख वो चकित था.. देखने सुनने में राजा साहब का बेटा बिलकुल उन्हीं की प्रतिलिपि था।
लेकिन निर्णय लेने और बोलने में वो राजा साहब से ज्यादा निर्भीक और आत्मविश्वासी लग रहा था..।
राजा साहब भी ऐसे ही थे, लेकिन वो इतने बेलाग और बेपरवाह से नहीं थे..।

इस लड़के को तो जैसे किसी बात का डर ही नहीं था..
वासुकी ट्यूलिप के मालिक को अच्छे से जानता था.. उस स्वार्थी और हद दर्जे के मतलबपरस्त इंसान की रग रग से वाकिफ था वासुकी, इसलिए कुछ सोच कर उसने किसी को फ़ोन लगा दिया..।

सामने वाले के फ़ोन उठाते ही वासुकी ने उसे शौर्य की सुरक्षा को लेकर चेतावनी दी और साथ ही उसे चुपके से शौर्य पर नजर बनाये रखने भी कह दिया..।
उस लड़के ने उत्सुकता से पूछ लिया कि वासुकी उसकी सुरक्षा को लेकर इतना चिंतित क्यों है ? एकदम से वासुकी इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाया, लेकिन फ़ोन रखने के बाद वासुकी ने बाहर के हॉल में झांक कर कली को देखा, वो सरु के साथ बातों में लगी डायनिंग टेबल पर खाने की प्लेट सजा रही थी..
उसे हँसते मुस्क़ुरते देख कर वासुकी के दिमाग से बोझ सा हट गया..
इसका मतलब उसकी कली नहीं जानती कि शौर्य यहाँ लंदन में है ?

वासुकी के दिल में राहत छ गयी..

उसने बात कर के फ़ोन रखा ही था कि कली उसे  बुलाने चली आयी..

“डैडा.. खाने चलिए !”

“हम्म.. चलो, मैं अभी आया !”

वासुकी ने फ़ोन पर उस लड़के को शौर्य की निगरानी का मेसेज एक बार फिर भेजने के बाद जाती हुई कली को देखा और हल्के से मुस्कुरा कर बाहर आ गया..

वहीँ कली जब वासुकी के ऑफिस में आयी तब भी वहाँ मौजूद खिड़कियों से बाहर देखती हुई वो यही सोच रही थी की ऐसे अचानक शौर्य गायब कहाँ हो गया?
लेकिन उसे राहत इस बात की थी की वासुकी की नजर से वो फ़िलहाल बच गया था..

****

शौर्य बात करता हुआ बाहर निकल आया..
हर्ष उससे बहुत ज़रूरी बात करना चाहता था। उसे मीटिंग हॉल में हुई सारी बातचीत मालूम चल गयी थी और इसीलिए वो शौर्य को समझाना चाहता था..

“तुम हमारी बात समझ नहीं रहे हो शौर्य !”

“आपकी सारी बात समझ रहा हूँ !”

“तो फिर तुम्हे ट्यूलिप के अगेंस्ट जाने की क्या ज़रूरत थी ?”

“ज़रूरत थी हर्ष भाई, ये लोग पुरे मार्केट को अपनी जागीर समझ बैठे हैं, इन्हे लगता है ये कुछ भी कहेंगे या करेंगे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा..ये लोग अपनी जागीर समझ बैठे हैं मार्केट को..
और इसलिए इन्हे सबक सीखाना भी ज़रूरी है !”

“शौर्य ये लोग खतरनाक है.. ट्यूलिप के साथ उसकी पूरी फ़ौज खड़ी है, और ये लोग बहुत घटिया मानसिकता के लोग हैं.. इनकी अपनी मुर्गी की एक टांग है… इन्हे लगता है ये लोग सही है और बाक़ी दुनिया गलत है..।
ट्यूलिप एक ऐसी कंपनी है जो अपने से आगे किसी को बढ़ते देख नहीं सकती..
उनके प्रोडक्ट्स सही नहीं है.. अमानक पाए गए हैं, बावजूद वो आदमी इतना एरोगेंट है कि उसे अपनी कमी माननी ही नहीं है..।
उसने बिना किसी बदलाव के बस पैकेजिंग में थोड़ा कुछ बदला और अपना प्रोडक्ट वापस लांच कर दिया..

“हाँ और अपने साथ वालों को ज़बरदस्ती अपने सपोर्ट में खड़ा कर रहा.. कुछ तो इसके डर से कुछ नहीं बोलते और कुछ झंझट में पड़ना नहीं चाह्ते, इसलिए चुपचाप इसकी बात सुन लेते है। लेकिन अब बहुत हुआ..
इसकी मोनोपोली अब नहीं चलेगी..।
अगर ये गलत है तो इसे अपनी गलती स्वीकारनी होगी..।
ये बहुत अपनी मनमानी कर चुका.. अब बस !”

“हम्म कह तो तुम ठीक रहे हो, लेकिन ये खतरनाक आदमी है, इससे सामने से उलझना सही नहीं है। बस ये कहना चाहता था.. ।
ऐसा करो, कल की मीटिंग के बाद तुम अपना पर्सनल काम निपटा लो और जल्दी से वापस आ जाओ !”

“भाई आप इतनी टेंशन क्यों लेते है ?”

“क्यूंकि तुम मेरे छोटे भाई हो, मेरी ज़िम्मेदारी हो ! मैं दो दिन में वहाँ पहुँच जाऊंगा.. !”

“नहीं भाई.. आप परेशान न हो.. मैं मैनेज कर लूंगा !”

हर्ष के बाजु में खड़े धनुष को हर्ष ने  देखा,धनुष भी कॉल सुन रहा था..
धनुष के माथे पर चिंता की लकीरे खिंच गयीं..
वो अपने लैपटॉप को खोल कर ट्यूलिप के बारे में जानकारी निकालने लगा…

शौर्य हर्ष से बात करता हुआ कली के घर से निकल चुका था..
वैसे भी उसे अपने फ़्लैट पर पहुँचाना था..
उसने बात करते हुए ही अपनी गाड़ी ली और निकल गया..
उसके साथ विक्रम मौजूद था..
विक्रम उसके साथ मीटिंग में भी था और उसी ने वहाँ की एक एक बात हर्ष को बता दी थी.. विक्रम को शौर्य की चिंता थी.. वो उसका सिक्युरिटी गार्ड था आखिर..

घर पहुँच कर शौर्य अपने कमरे में जा रहा था कि विक्रम ने उसे टोक दिया..

“कॉफी बनवा ले आपके लिए, या कहीं बाहर जायेंगे !”

एकदम से शौर्य विक्रम की बात नहीं समझ पाया, और जैसे ही उसे समझ में आया कि उसका इशारा कली की तरफ है वो मुस्कुरा उठा..

“कॉफ़ी पियूँगा !”

शौर्य अपने कमरे में चला गया..
फ्रेश होकर उसने कली का नंबर लगा दिया..

अनजान नंबर से कॉल आते देखा कली ने फ़ोन उठाने में वक्त लगा दिया..
लेकिन उसके फ़ोन उठाते ही शौर्य उधर से बोल पड़ा..

“बहुत वक्त लगा दिया.. अब भी यही सोच रही हो क्या कि मैं तुम्हारे सपने में आया था.. !” बोल कर शौर्य हंसने लगा..

शौर्य की हंसी की खनक कली को भीतर तक गुदगुदा  गयी..
वो फ़ोन लिए तेज़ी से अपने कमरे की तरफ बढ़ गयी.. उसी समय वासुकी खाने की मेज तक चला आया.. उसे लगा कली  कुछ देर में लौट आएगी..

“अचानक गायब कहाँ हो गए ? डैडा से मिलवा भी नहीं पायी !”कली ने पूछ लिया

“हर्ष भाई का फ़ोन आ गया था, बात करते करते पता ही नहीं चला मैं कब तुम्हारे गार्डन से बाहर चला आया.. !”

“इतनी भी क्या बेहोशी ? किसी के घर से यूँ ही चले गए.. एक कप कॉफी भी नहीं पी ढंग से !”

“अबकी बार आऊंगा, तब पिला देना !”

“कब आओगे अब ?”

“तुम कहो तो अभी आ जाऊं !”

“आ जाओ !”
.”सच ?”
“हम्म.. देखती हूँ कितनी हिम्मत है तुममे !”

“मतलब ?”

“मतलब डैडा घर पर है !”

“ऑब्वियस्ली रात के वक्त वो घर पर ही होंगे ना !”

“हाँ इसीलिए तो कह रही कि उनके रहे में आ जाओ, तो जानू तुम्हारी हिम्मत !”

“चैलेन्ज किया जा रहा है मुझे !”

‘जी हाँ.. निभाइये अब अपना चैलेन्ज !”

“ओके.. वो तो मैं निभा लूंगा ! पर वहाँ पहुँचने के बाद तुम कोई नाटक मत शुरू कर देना !”

“सवाल ही नहीं उठता..!” कली खिलखिला कर हंस पड़ी..

कली को मालूम भी नहीं चला था कि उससे बात करते हुए शौर्य अपने घर से कली के घर के लिए निकल चुका था… वो तो अब भी उसकी बातें सुन सुन कर उस पर मोहित हुई जा रही थी..।
वो जानती थी कि इस वक्त उसके घर शौर्य का आ पाना असम्भव सा है, इसलिए सिर्फ कल्पनाओ में उसे खुद के करीब सोच कर ही वो खुश और संतुष्ट हुई जा रही थी…..

वो उससे बात करते हुए अपने कमरे की बालकनी में पहुँच गयी थी….

नीचे सरु खाना लगा रही थी..
बात करते हुए कली के चेहरे से मुस्कान नहीं जा रही थी..

कि तभी उसकी खिड़की के सामने वाले रास्ते पर एक लम्बी सी गाडी आकर रुकी और उसका शीशा नीचे उतर गया…

शौर्य ने अंदर से झांक कर कली की खिड़की की तरफ देखा और कली का मुहं खुला रह गया..

“शौर्य तुम ?”

“तुमने ही तो बुलाया था !”

“अरे.. ये थोड़े ना बोला था मैंने !”

“अच्छा तो फिर क्या बोला था.. मुझे तो लगा यही बोला था !”

अपनी बात कहते कहते शौर्य गाड़ी से नीचे उतर गया और बड़ी शान से चलते हुए गार्डन के उसी दरवाज़े तक पहुँच गया, जहाँ से वो बाहर निकला था..
उस दरवाज़े पर इत्तेफाक से गार्ड नहीं था..
शौर्य बड़े मजे से अंदर चला आया..
अपनी खिड़की से उसे देखती कली उसे आगे बढ़ते देख डर के मारे उछलने लगी थी..

“अरे बाबा मैं मजाक कर रही थी.. तुम जाओ !”

“लेकिन मैं मजाक नहीं कर रहा था !”

“डैडा देख लेंगे तो गोली मार देंगे तुम्हे !”

“मंजूर है, मैं भी ऐसे ज़िंदादिल आदमी के हाथ से गोली खाने तैयार हूँ !”

“शौर्य प्लीज़ समझो ना.. किसी ने देख लिया तो ?”

“तो उसकी ज़िम्मेदारी तुम्हारी..तुमने बुलाया है अब तुम जानो !”

शौर्य बड़े मजे से कली की खिड़की के ठीक नीचे पहुंच गया, उसने अपना फ़ोन अपनी जेब में डाला और इधर उधर लगी छत और पाइप के सहारे चढ़ कर कली के कमरे तक पहुँच गया..
खिड़की से कमरे में कूद कर आने के बाद उसने कली को देखा उसका चेहरा मुरझा गया था..
कली ने भाग कर अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और पानी की बोतल उठा कर एक साँस में गटक ली..

शौर्य से वो कुछ बोल पाती उसके पहले दरवाज़े पर दस्तक होने लगी..
घबरा कर उसने पूछ लिया.. 

“क.. कौन.. ?”

“कौन मतलब ? “कड़कती आवाज़ में वासुकी बोल पड़ा.

“मैं हूँ कली.. चलो डिनर लग गया है.. तुम्हे लेने आया हूँ !”

वासुकी अगर खाने के वक्त घर पर है तो वो कली को खुद डिनर के लिए लेने आता था… उसी रीत को आज भी उसने निभाया था, लेकिन शौर्य के रंग में रंगी खड़ी कली इस नियम को भूल बैठी थी, इसलिए  सवाल पूछ गयी..

उतनी देर में वासुकी ने वापस दरवाज़ा खटखटा दिया..

अपने दिल की धड़कनो को संयत करने की कोशिश करती कली इधर उधर शौर्य को छुपाने की जगह ढूंढने लगी, और दीवार से लग कर खड़ा शौर्य मजे से मुस्कुराता खड़ा रहा..

क्रमशः

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Vandana
Vandana
1 year ago

Really itna daring h shaurya ….vasuki jo sooch rha h ….uske ulat hi ho gya h sab kuch ….. shaurya toh Ghar pahunch kar mil. Bhi liya h Kali se

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Bahut hi Khubsurat or Mast kahani Ab kaha chupayagi Mr Souraya ko,Interesting and Shandaar part

Shanu singla
Shanu singla
1 year ago

😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁

Nisha
Nisha
1 year ago

Bechari kali phans gayi apni hi baat me.ab wo kaise milwaye use apne pita se.super part mam 😘😘😘👌👌👌👌

Jayshree Bhargava
Jayshree Bhargava
1 year ago

सबसे पहले तो 100 भाग की बधाई Dr Sahiba, वाकई कहानी भी अपने century को सेलीब्रेट करती हुई एकदम जबरदस्त
रोमांचित करने वाली थी, आपने तो जाने कितनी धड़कनों को बढ़ा दिया सबके पुराने दिन ताजा हो गए❤️❤️❤️

Radhika Porwal
Radhika Porwal
1 year ago

Wow superb episode

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Very interesting.

Anuja rashmi
Anuja rashmi
1 year ago

Bhut bhut subhkamna 100 bhag ke liye

इंदु कपूर
इंदु कपूर
1 year ago

वाह, लेखन के सभी रंग इस भाग में आ गए हैं।
कहानी के शतक की शत शत बधाई।

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

बधाइयाँ जी बधाइयाँ 💃🏻💃🏻💃🏻💃🏻💃🏻100 भाग पुरे हो गए और पता भी नहीं चला👏🏻, यही खासियत है आपकी लेखनी की आप कितना भी लिखो हमें कभी नहीं लगा कि बहुत खींच रहे कहानी को, कभी भी नहीं बल्कि ऐसा लगता क्या ही हो जाता अगर कहानी के थोड़े और भाग आ जाते तो,बस जी आप ऐसे ही लिखती और बुलंदियों को छू लो 😘,मातारानी का आशीर्वाद आप पर बना रहे, खूब बधाई 💐।

क्या बात है 👏🏻👏🏻वासुकी को शौर्य खुद सा लगा और इत्तेफाक से हर बेटी सोचती है कि उसका पति उसके पापा का प्रतिरूप हो, दामाद बाबू बिलकुल आपकी तरह ही है वासुकी और देखो कितना ख़ुश हो रहा वासुकी कि कली को नहीं पता शौर्य लंदन आया है पर वासुकी क्या जाने शौर्य और कली एक दूसरे से मिल भी चुके है 😄अब तो गाना गाओ वासुकी जी… दामाद जी अंगना है पधारे.. 😄।
कली का मजाक कली पर भारी पड़ गया, शौर्य को चैलेंज कर गई पगलो और वो आ भी गया 🤦🏻‍♀️अब भुगतो….. बेहद लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻इंतज़ार रहेगा अगले भाग का 🙏🏻।