
मायानगरी सीज़न -2 भाग -1
बहुत दिनों से माया नगरी को वापस शुरू करने का सोच रही थी लेकिन माया नगरी की पुरानी कहानी पूरी तरह से ब्लॉग पर शिफ्ट नहीं कर पाई थी, इसलिए काम अधूरा सा लग रहा था, लेकिन मैं जानती हूं मेरे बहुत से पाठक सिर्फ मायानगरी ही पढते हैं। ब्लॉग पर कहानी शिफ्ट करना और उन्हें एक लाइन में चलाते रहने में अभी बहुत समय लग रहा है।
इन्हीं सब कारणों से मायानगरी शुरू नहीं कर पा रही थी, लेकिन जो पाठक मायानगरी पढ़ते हैं उनका क्या कसूर? उन्हें इन सब कारणों से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। क्योंकि मायानगरी के नए पार्ट नहीं आ रहे थे।
इसलिए सोचा कि पुराने भाग जब शिफ्ट करूंगी तब करूंगी, फिलहाल नए भागों को नए सीजन के साथ शुरू कर लेती हूं। वैसे भी मायानगरी के पहले पाठ में कॉलेज की धूम थी…
विश्वविद्यालय के किस्से थे, छुटपुट रैगिंग और कॉलेज की परेशानियां थी। धीरे-धीरे उन सब की जिंदगियां आगे बढ़ने लगी ।
तो इस तरह मायानगरी का सीजन 1 यूनिवर्सिटी की लाइफ पर केंद्रित था। अब लगभग सभी कपल्स की शादी हो चुकी है तो माया नगरी सीजन 2 में हम उनकी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ की झलकियां देख पाएंगे यही सोचकर माया नगरी का दूसरा सीजन शुरू कर रही हूं.. ।
मायानगरी कहानी की लंबाई सामान्य धारावाहिकों की तुलना में कुछ ज्यादा लंबी हो जाने का कारण यही था कि इसमें अलग-अलग ढेर सारे जोड़ों की कहानी को मैंने दिखाया है। अलग-अलग सामाजिक परिप्रेक्ष्य से जुड़ी छोटी-छोटी कहानियों को इस लंबे धारावाहिक का हिस्सा बनाने के कारण यह धारावाहिक कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है। इस कहानी में जहां एक तरफ हम मेडिकल यूनिवर्सिटी के बारे में पढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक पार्टियों के किस्सों के बारे में भी हम पढ़ रहे हैं। कहानी के मुख्य किरदारों में जो सबसे पहला नाम मुझे याद आता है, वह है डॉक्टर मृत्युंजय।
डॉक्टर मृत्युंजय एक ऐसे चिकित्सक हैं जो अपने पेशे के सामने और किसी भी बात को तवज्जो नहीं देते। डॉक्टर मृत्युंजय का बचपन थोड़ा कठिनाई में बीता, इनके पिता अजेय कुलश्रेष्ठ ने मृत्युंजय की मां को उस वक्त अकेला छोड़ दिया था, जब मृत्युंजय उनकी गोद में था। तब से मृत्युंजय यानी जय की मां ने उसे अकेले पाल पोस कर इस लायक बनाया कि वह अपने नोबल प्रोफेशन से दुनिया के दुख दर्द को दूर कर सके।
लेकिन दुनिया के दुख दर्द को दूर करने वाला लड़का अंदर ही अंदर कितना खामोश और दुखी है इसका अंदाजा किसी को नहीं होता। कॉलेज में अपने साथ की जूनियर लड़की डॉक्टर गौरी के मानसिक अवसाद का इलाज करते-करते कहीं ना कहीं जय के मन में गौरी के प्रति कोमल भावनाएं पैदा होने लगती हैं। गौरी जो कि खुद भी एक उधङे से बचपन को जी चुकी है, किसी अजीबोगरीब दुनिया में खोई रहती है। उसका बचपन इतनी कठिनाई में बीता था कि अपनी उन कठिनाइयों से वह उबर नहीं पाती, और मानसिक अवसाद का शिकार हो जाती है।
उसे नींद में भयानक सपने नजर आते हैं, और इसके बाद वह रात रात भर सो नहीं पाती। इसके लिए वह साइकिएट्री डिपार्टमेंट में काम करने वाले रेजिडेंट डॉक्टर मृत्युंजय से मिलती है, और उनकी दवाई लेना शुरू करती है। कुछ दवाओं का असर और कुछ डॉक्टर मृत्युंजय की बातों के असर से गौरी काफी अच्छा अनुभव करने लगती है। मृत्युंजय दवाओ के साथ-साथ उसे जीवन शैली में बदलाव के भी सुझाव देता है। और इन सुझावों पर गौरी पूरा अमल भी करती है। गौरी की ही एक और बहन है प्राची जो कि उसी की क्लास में पढ़ती है, लेकिन दोनों की आपस में कभी बातचीत नहीं होती। दोनों ही बहनों के मन में एक दूसरे के प्रति क्या है यह वह दोनों कभी भी अभिव्यक्त नहीं कर पाती..।
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गौरी और प्राची जब बहुत छोटी रहती हैं, उस वक्त उनके माता-पिता में तलाक हो जाता है। म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग के साथ हुए इस तलाक के बाद पिता के पास गौरी रह जाती है, और मां प्राची को अपने साथ छीन कर ले जाती है।
समय के साथ गौरी के पिता भी दूसरी शादी कर लेते हैं, और प्राची की मां भी दूसरी शादी कर लेती है ।दोनों ही बच्चियों अपने नए अभिभावकों के साथ समायोजन नहीं बैठा पाती। गौरी की सौतेली मां बचपन से ही गौरी को बहुत तंग किया करती हैं। दूसरी तरफ प्राची के पिता उसके साथ अच्छे जरूर है, लेकिन वह खुद भी कुछ ऐसी परिस्थितियों से घिरे होते हैं जिसके कारण वह प्राची के लिए एक अच्छे पिता साबित नहीं हो पाए।
इन्हीं कारणो से गौरी और प्राची दोनों अलग-अलग मानसिक विकारों की शिकार हो जाती है। जहां गौरी एकदम ही शांत और अपने आप में ग़ुम रहने वाली लड़की बन जाती है। वहीं प्राची को शराब और सिगरेट की लत लग जाती है। प्राची अपनी मां के साथ रहना पसंद नहीं करती, इसलिए मेडिकल में चयन होने के साथ ही वह हॉस्टल में शिफ्ट हो जाती है। गौरी अपने घर में रहना जरूर चाहती है लेकिन उसकी मां नहीं चाहती की गौरी उनके साथ रहे और इसीलिए मेडिकल में चयन के साथ ही गौरी को भी हॉस्टल में शिफ्ट होना पड़ता है…।
दोनों के जीवन में अलग अलग लोग मौजूद है जो उनके लिए ज़रूरी हैं जिनमे से एक है अधिराज..।
प्राची का सबसे खास दोस्त अधिराज वह अकेला इंसान है जो शुरू से जानता है कि प्राची और गौरी बहने हैं।और इसीलिए वह हर वक्त इस कोशिश में रहता है कि इन दोनों बहनों के बीच सब कुछ सामान्य हो जाए और इसीलिए प्राची के जन्मदिन के मौके पर वह चुपके से गौरी को भी बुला लेता है।
यहां इस पार्टी में मौजूद बाकी लोगों को भी मालूम चल जाता है कि गौरी और प्राची बहने हैं। इस पार्टी में ही इंजीनियरिंग के दो लड़के अभिमन्यु और अधीर भी शामिल है ।अभिमन्यु अधिराज का खास दोस्त है और अधिराज ने ही अभिमन्यु और अधीर को वहां बुलाया हुआ है। अभिमन्यु की मुलाकात मेडिकल फर्स्ट ईयर की छात्रा रंगोली से एक रैगिंग के दौरान हुई थी जिसके बाद वह अक्सर रंगोली को देखने के बहाने ढूंढता है। प्राची की बर्थडे पार्टी से निकलकर गौरी अपने हॉस्टल जाती रहती है कि तभी कुछ लड़के उसे मस्ती मस्ती में ही किडनैप करके ले जाते हैं..।
यह लड़के और कोई नहीं बल्कि वेदांत और उसके दोस्त हैं। यह लोग गौरी को उठाकर वेदांत के फार्म हाउस पर ले जाते हैं। जहां यह लोग गौरी के साथ बदतमीजी करते रहते हैं। लेकिन बाकी लड़के गौरी के संग कुछ गलत ना करे इसलिए वेदांत खुद ही सामने होकर गौरी के साथ बदतमीजी करता रहता है। वह उसे डांटता डपटता रहता है कि उसी समय वहां पुलिस पहुंच जाती है। पुलिस को लगता है कि वेदांत और उसके दोस्त गौरी के साथ जबरदस्ती कर रहे थे। लेकिन इसी सब के बीच बचाव में भुवन यानी वेदांत का बड़ा भाई भी वहां पहुंच जाता है। वहां सभी लोग पुलिस को यकीन दिलाने की कोशिश करते हैं कि गौरी और वेदांत दोस्त हैं। इन्हीं सब गलतफहमियों के बीच कुछ ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं कि भुवन को असिस्टेंट कमिश्नर लीना से यह झूठ बोलना पड़ता है कि वेदांत और गौरी शादी करना चाहते हैं, लेकिन उनके परिवार वाले इस बात के लिए तैयार नहीं है। और तब पुलिस में मौजूद असिस्टेंट कमिश्नर लीना जो इन बातों को सच नहीं मानती होती है वह सच्चाई सामने लाने के लिए डीएम को वहाँ लेकर आ जाती है, और जिस कारण मजबूरी में भुवन को वेदांत और गौरी की शादी करवानी पड़ती है। इस तरह मजबूरी में बंधा यह रिश्ता इसी मजबूरी के साथ आगे बढ़ता है..
दूसरी तरफ जय की माँ की अचानक तबीयत खराब होती है, और वह अपने शहर में मौजूद सरकारी अस्पताल में जाती हैं जहां उनकी मुलाकात डॉक्टर छवि से होती है। डॉक्टर छवि को जांच करने पर मालूम चलता है की जय की मां की तुरंत सर्जरी करनी बहुत जरूरी है। छवि खुद जनरल सर्जन है। और इसीलिए वह किसी मरीज को बिना इलाज के तड़पते हुए नहीं छोड़ सकती, और इसीलिए उन्हें साथ लेकर माया नगरी हॉस्पिटल रवाना हो जाती है । वहां पहुंचकर वह उनका ऑपरेशन कर देती है। जय की मां का ऑपरेशन सफलतापूर्वक निपट जाता है, और यहीं से जय और छवि की मुलाकात होती है। आगे चलकर जय और छवि दोनों ही शादी कर लेते हैं..
मायानगरी कहानी के किरदारों में एक मुख्य जोड़ा अभिमन्यु और रंगोली का भी है..
हल्की-फुल्की नोक झोक के बीच दोनों की खट्टी मीठी दोस्ती आगे बढ़ती जाती है। दोनों के बीच कोई गंभीर रिश्ता बनता, उसके पहले ही रंगोली की मां की तबीयत बहुत खराब हो जाती है। वह चाहती हैं कि उनके सामने उनकी बेटी की शादी हो जाए। उनकी इस भावुक बात को रंगोली काट नहीं पाती है, और अभिमन्यु के सामने शादी का प्रस्ताव रख देती है। एकदम से आए इस प्रस्ताव को अभिमन्यु स्वीकार नहीं पाता और उसके और रंगोली के बीच कुछ गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं। लेकिन फिर धीरे से वह इस बात के लिए राजी हो जाता है और अभिमन्यु और रंगोली की शादी हो जाती है…
इस तरह से कहानी के मुख्य तीन किरदार जय और छवि अभिमन्यु और रंगोली और गौरी वेदांत इन तीनों के जीवन में शादीशुदा अध्याय की शुरुआत हो चुकी है…
बाकी कुछ ऐसे भी किरदार मौजूद हैं जिनकी शादी तो नहीं हुई और ना ही उनके लव एंगल की शुरुआत हुई है, लेकिन फिर भी कहानी में इन किरदारों का स्थान भी बहुत अहम है। अभिमन्यु और अधीर के कमरे में किन्ही परिस्थितियों के अधीन कुछ दिनों के लिए रहने आयी ज़ोया की धीरे धीरे अधीर से दोस्ती बढ़ रही है..
वही प्राची का हर मौके पर साथ देने वाला अधिराज भी कहीं न कहीं अपने दिल में प्राची के लिए कुछ एहसास छिपा रहा है..
माया नगरी कहानी के 252 एपिसोड हो चुके हैं, और इनमें आपने अब तक बहुत कुछ पढ़ा है ।कहानी की शुरुआत में जहां मेडिकल सीट की धांधली के बारे में आपने पढ़ा, वही इस धांधली को उजागर करने में अभिमन्यु और रंगोली की दोस्ती के बारे में भी पढ़ा धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए कहानी अलग-अलग मोड से गुजरती चली गई..
फिलहाल हम कहानी के जिस हिस्से पर थे उसमें आपने पढ़ा की भुवन अपने ताऊ जी की राजनीतिक पार्टी के एक गद्दार नेता के बारे में सब कुछ जान जाता है कि वह नेता दूसरी पार्टी से भी हाथ मिलाया हुआ है। और इसीलिए भुवन उसकी महिला मित्र के साथ मिलकर इसका पर्दाफाश करना चाहता है। उस नेता का एक एमएमएस लीक हो जाता है। जिसमें उस नेता का चेहरा साफ-साफ नजर आ रहा है। भुवन यह सब पहले से जानता है, और इसके बारे में वह वेदांत को सब कुछ बता देता है। वेदांत यह सब जानने के बाद भुवन पर और भी ज्यादा विश्वास के साथ यह बात कहता है कि उसके पिता की पार्टी में काम करने के लिए उससे कहीं ज्यादा उपयुक्त भुवन है..
और यह दोनों प्रेम के पंछी अपनी शादी के इतने समय बाद आखिर एक दूसरे में अपने सच्चे प्रेमी को पा लेते हैं और उनके प्रेम भरे जीवन की शुरुआत हो जाती है।
अब आगे…..
अगले भाग से नयी कहानी शुरू…

Mam Maya Nagari ka 2 second season 252 episode please de dijiye plz
Very nice part
Very very nice part of the story and very interesting too
After a long time
Waiting for this story
Intzar rahega mam 👌👌
बेसब्री से नए भाग का इंतजार
2nd part kab aayega
Eagerly waiting for season 2🙏
Exciting to read new one mayanagri.
अरे वाह मैने तो आज ही देखा😘😘बेसब्री से इंतजार है डॉक्टर साहिबा
Eagerly waiting
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