जानी दुश्मन


जानी दुश्मन..

“मम्मी, ओ मम्मी !”

“क्या है रे, चैन से लेटने भी नहीं देते तुम दोनों.. अब आज क्या हो गया ?
   दोनों मेरी जान के दुश्मन, सारा काम कर के पल भर सुस्ताने की सोच बस लूँ, पाप हो जाता है! और ये दोनों तारणहार मेरा पाप काटने चले आते है !

मुहं फुलाए खड़ा बंटी कुछ बोल पाता उसके पहले उसकी झाँसी की रानी बहन चली आयी..

“मम्मी समझा दो अपने लाडले को अगर मेरे साथ रूम शेयर करना है तो सफाई से रहना पड़ेगा, वरना झाड़ू से मार मार के इसे बाहर निकालूंगी !”

“अब क्या कर दिया इसने ?” मैं तो इन दोनों टॉम एंड जेरी की लड़ाई से परेशान हो गई थी। दोनों बिल्कुल ही उत्तर और दक्षिणी ध्रुव थे। पल भर को तो एक दूसरे के साथ जम जाए। पर नहीं दोनों को बस एक दूसरे की कमियां निकाल कर लड़ने का मौका चाहिए होता था।
और कहीं टीना की सहेलियां चली आई, तो ये सारी लड़कियाँ मिल कर मेरे छौने को रामु काका बना कर छोड़ती थी..।

“बंटी जा दस रूपये की फ्रूटी ले आ, बंटी जा चौधरी के समोसे ले आ, बंटी जा ना प्रेस वाले के यहाँ से कपड़े ले आ, मेरा कुरता कर दिया होगा इस्त्री !
मतलब लड़का नहीं हुआ इन लड़कियों का नौकर हो गया. 
लेकिन बंटी था भी तो ये महा उपद्रवी..

लड़कियां अपनी जोड़ तोड़ की चवन्नियां अठन्नियां गिन गिन कर एक फैंटा मंगवाती, साहबज़ादे आधे रस्ते आधी बोतल निगल कर बाकी में गली बाहर लगे निगम के नल से शुद्ध पेय जल भर लाते..
अब क्या बौड़म थी छोरियां, जो इसका छल कपट बांच ना पाती..
फिर आकर मेरे सामने टीना हुमक जाती..

“सीखा दो अपने बद्तमीज को, मेरी सहेलियों का पैसा भी नहीं छोड़ता, चुरा कर पी गया रावण !”

“ए दीदी, मैं रावण हुआ तो तुम क्या हुई, शूर्पणखा ?”

और ही ही कर भाग जाता ये छुटका रावण !
उसके पीछे जो हाथ में आता वो उठा उठा कर फेंकती टीना पूरे घर को कुरुक्षेत्र का मैदान बना देती…

दोनों के सुर कभी नहीं मिले..
अब आज ये दोनों क्या राग अलापने वाले थे, मैं वही सोच रही थी कि टीना बोल पड़ी..

” मम्मी अब मैं बड़ी हो गई हूं, मुझे अपना अलग कमरा चाहिए। मैं इसके साथ कमरा शेयर नहीं कर सकती..।”

“क्यों ऐसा क्या हो गया?”

मैं आंखें तरेर कर बंटी की तरफ देखने लगी।
माना की टीना बड़ी हो गई थी, लेकिन बंटी तो अब भी छोटा ही था। मुझे समझ नहीं आया कि टीना को ऐसी क्या परेशानी हो गई..

“क्यों रे बंटी, दीदी को क्यों परेशान करता है तू?”

मेरे सवाल पर हर बार की तरह बंटी ने कूद कर कोई सफाई नहीं दी, बल्कि चुपचाप सर झुका कर खड़ा हो गया।
मेरे दिमाग में उसे इतना शांत देखकर भूचाल आ गया। पक्का इस गुंडे ने कोई ना कोई ब्रिज गिराने सा भयंकर पाप किया है।

मैं तुरंत टीना की तरफ घूम गई।

“क्या हुआ टीना, क्या किया इसने?”

टीना जिस तरीके से मुंह बनाकर खड़ी थी, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो गया है?

” अरे बोलती क्यों नहीं, क्या कर दिया इसने?”

“हमारा बाथरूम जाकर देखिए एक बार ।”

अब मेरे दिल में घबराहट के ढोल बजने लगे थे। दिमाग में कनस्तर पीटे जा रहे थे।
  एक पल को विचार आया कि लड़का ही तो है, हो सकता है फ्लश करना भूल गया हो। इसीलिए टीना इतना चीख चिल्ला रही है। क्योंकि वैसे भी लड़की मेरी बड़ी सफाई पसंद थी, लेकिन लड़का वाकई राक्षस था।

” क्या हुआ बाथरुम गंदा छोड़ दिया क्या?”

“आप हिलिए तो सही नूरजहां, कभी अपने इस महल को छोड़कर मेरी तुच्छ झोपड़ी में भी आकर देख लीजिए।”

और टीना मेरा हाथ पकड़ कर खींचते हुए अपने कमरे की तरफ ले गई। राम-राम जपते हुए मैंने उनके कमरे में प्रवेश किया और टीना ने जैसे ही बाथरूम खोला मैं दंग रह गई।
   क्योंकि मुझे वहां ऐसा कुछ नजर ही नहीं आया जिस पर टीना इतना बवाल कर रही थी ।

“क्या हुआ टीना, ठीक-ठाक तो है।”

“ठीक-ठाक है? ये आपको ठीक-ठाक लग रहा है।”
वो चीख पड़ी..

” वह देखिए उधर फर्श पर जहां ड्रेन होल था, वहां ढेर सारे कीड़ों का झुंड पड़ा है।”

मुझे देखते ही उबकाई सी आ गई।

“यह है आपके शहजादे की करतूत..
आपके शानदार बगीचे से जितने भी कीड़े उड़ उड़ कर हमारे बाथरूम में शरण पाते हैं, उन पर स्प्रे डालकर ये हत्यारा उनकी जान ले लेता है। और उसके बाद उन्हें बाथरूम में सहेज कर रख रहा है। बाद में इन्हें फॉर्मलीन में डूबा कर उनकी ऑटप्सी करेगा, ये खूनी देखना चाहता है कि उनके अंदर हार्ट है कि नहीं लंग्स है कि नहीं।..
मेरे बाथरूम को ग्रेवयार्ड बना रखा है !”

“ए दीदी, ये हमारा भी बाथरूम है, समझी ?”

“हाँ तुझे समझाऊँ अभी !” और टीना बाथरूम में रखे मग को उठा कर उसे मारने दौड़ पड़ी..

मुझे यह बात सुनकर ही उबकाई सी आ रही थी.. मैंने घूर कर बंटी की तरफ देखा।

बंटी कुछ बोलने वाला था कि मैंने अपने हाथ को घूंसे की शक्ल में बनाकर उसकी तरफ दिखा दिया और वह चुप रह गया..

“अभी के अभी जा कचरा उठाने वाली सूपली लेकर आ और इस कचरे को बाहर निकाल..।”

“मम्मी यह कचरा नहीं है, आखिर कीड़े हैं। और कीड़े भी तो इंसान ही होते हैं ।”

बंटी की अजीबोगरीब बात सुनकर मैं और टीना दोनों उसे घेर कर देखने लगे। लेकिन उसी समय घर की कॉल बेल बच गई। और दोनों बच्चे सब कुछ भूल-भालकर अपने पापा के स्वागत के लिए बाहर भाग गए।
सुपेली उठाकर झाड़ू के साथ मैं ही बाथरूम में घुसी। बाथरूम को साफ-सुथरा करके नहा धोकर बाहर निकली, तब तक अपने पिता को घेर कर बैठे दोनों अपने-अपने किस्से सुनाने में मशगूल थे..।

उन लोगो पर एक नजर डाल कर मैं रसोई में चाय बनाने चली गयी..।

शाम ढलने लगी थी.. टीना की सहेलियां उसे पार्क ले जाने बुलाने चली आयी और वो “तू मेरे पीछे भूल कर भी मत आना, वर्ना “, की धमकी देकर अपनी सहेलियों के साथ चली गयी..

कुछ देर बाद ही बंटी के दोस्त भी उसे क्रिकेट खेलने बुलाने आ गए.. और वो भी चला गया.. बच्चो की शरारत के कुछ किस्से इन्हे सुना कर मैं भी रसोई में चली गयी…

कुछ देर बाद डोर बेल बजी और मैं दरवाज़े पर चली आयी..।
दरवाजा खोला तो मैं सन्न रह गई। मेरे दोनों भूत सामने खड़े थे, लेकिन बंटी के सर से खून बह रहा था। उसने अपने एक हाथ से अपने माथे को दबा रखा था। उसके सर से बहती खून की धार देखकर मैं चीख पड़ी। मेरी आवाज सुनकर यह भी दौड़े चले आए।

उन दोनों को जल्दी से अंदर लेकर दरवाजा बंद किया और भाग कर मैं फर्स्ट एड बॉक्स लेने चली गई ।
     उतने में ‘यह’ उन दोनों से सवाल जवाब करने लगे। मैं बॉक्स लेकर आई और जल्दी-जल्दी बंटी का घाव साफ करते हुए उससे पूछने लगी

“क्या हुआ बंटी, कैसे चोट लग गई?
    गिर गया ना, मैंने तुझसे कितनी बार कहा है कि आराम से खेला कर, लेकिन तू दौड़ने भागने की धुन में ऐसा मगन रहता है कि होश ही नहीं रहता। देख कितना खून बह रहा है…।
तेरी करतूत देख कर गुस्सा तो इतना आ रहा है  लग रहा तुझे कूट दूं ,लेकिन क्या करूं मां हूं ना, यह सब झेलना ही है मुझे।
तेरी शैतानियों का तो कोई अंत है नहीं”

अब तक चुपचाप सुनती बैठी टीना चीख पड़ी।

” मम्मी बस करो, इसकी कोई गलती नहीं है।”

मेरे हाथ से मरहम छीन कर उसने अपनी उंगली में लिया और अपने छोटे भाई के माथे पर लगाने लगी।

    पता नहीं उस एक पल में ऐसा क्या था कि उन दोनों को देखकर मेरी आंखें भर आई। ऐसा लगा अगर कभी मैं ना रही तो मेरी बिटिया मेरे शहजादे की मां भी बन जाएगी।

अपने छोटे भाई को होने वाली जलन को मिटाने की कोशिश करती मेरी छोटी सी गुड़िया सच में उसकी मां बन गई थी। दवाई अच्छे से उसके माथे पर लगाने के बाद उसने छोटा सा रुई का फाया वहां रखा और टेप लगाकर चिपका दिया। जिससे वह अपनी जगह से हिले नहीं। मैं कुछ बोल पाती उसके पहले ही इन्होंने  धीरे से मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे चुप रहने का इशारा कर दिया।

मैं चुपचाप फर्स्ट एड बॉक्स संभाल कर अपनी जगह रख आई।
   अंदर जाकर मैंने हल्दी वाला दूध बनाया और दोनों के लिए लेकर बाहर चली आई। लेकिन इतनी देर में टीना उठकर अपने कमरे में चली गई थी। मुझे अचानक समझ में नहीं आया कि हुआ क्या है, जो यह दोनों जानी दुश्मन कुछ अलग सा ही बर्ताव कर रहे हैं।

    टीना के वहां से जाते ही मैं अपने जग्गा जासूस के बगल में बैठ गई।

” अब बता हुआ क्या है?”

” कुछ नहीं हुआ मम्मी, साइकिल चला रहा था पैर अड़ा और साइकिल से गिर गया।”

” तू झूठ बोल रहा है। देख सच सच बता दे तुझे चॉकलेट दूंगी वह भी रोस्टेड आलमंड। पुरी की पूरी अकेले खा लेना।”

“सच बोल रहा मम्मी, साइकिल से गिरा हूं।”

” लेकिन तू आज साइकिल लेकर नहीं गया था।”

” एक दोस्त की साइकिल चला रहा था।”

” अगर तू दोस्त की साइकिल से गिरा है तो टीना तेरी इतनी साइड क्यों ले रही है? उल्टा उसे तो तुझे और धुन देना था।”

” हां धुना था, नीचे धुन चुकी। पर चोट ज्यादा गहरी देखकर शायद उसे तरस आ गया होगा।”

पता नहीं क्यों लेकिन मुझे इन दोनों के बीच पकती यह दाल काली नजर आ रही थी। लेकिन मैं इतना समझ गई थी कि आज से मेरा यह जासूस अपना पाला बदल चुका है। रात का खाना निपटने के बाद बंटी को एक दर्द की गोली देकर सुलाया और अपने कमरे में चली गई..।
रात में जब तक मुझे नींद नहीं आई तब तक मेरे दिमाग में मेरे दोनों कबूतर फड़फड़ाते रहे..।

अगली सुबह ‘इनके’ ऑफिस निकलने के बाद बंटी को उसकी स्कूल बस में बैठा कर लौट रही थी कि टीना की सहेली ट्यूशन से लौटती हुई रास्ते में मिल गई। मैंने मौका देखकर उसे रोक लिया।

” शीतल, कैसी हो?”

” मैं ठीक हूं आंटी, टीना कैसी है ?”

मुझे उसका सवाल समझ में नहीं आया। क्योंकि चोट तो बंटी को लगी थी फिर यह टीना के बारे में पूछताछ क्यों कर रही थी?

“टीना तो बिल्कुल ठीक है बेटा, लेकिन टीना के बारे में क्यों पूछा तुमने?”

“आंटी आपको टीना ने कल बताया नहीं क्या?”

  शीतल के चेहरे पर संकोच देखकर मैं हल्का सा मुस्कुरा उठी

” हां बताया तो है लेकिन कौन सी वाली बात को पूछ रही हो तुम?”

” आंटी कल जब मैं टीना और ग्लोरी पार्क में बैठे थे, तब वहां से एक लड़का गुजर रहा था। वह बार-बार टीना को देखकर कुछ गाने गा रहा था..।
टीना को इस बात पर गुस्सा आ गया, उसने उस लड़के को वहां से जाने को कहा, तो वह लड़का हमारे सामने आकर खड़ा हो गया।
   अपने पास रखा गुलाब टीना की तरफ बढ़ाया और आई लव यू बोल दिया।
     लेकिन तभी पता नहीं कहां से बंटी आ गया और उस लड़के से बिल्कुल भिड़ गया। बंटी ने उस लड़के की इतनी पिटाई की, आंटी इतनी पिटाई की, क्या कहूं। वह लड़का जान बचाकर भागा वहां से, और बंटी ने उसे भागते समय भी जोर-जोर से धमकी दे दी कि अगर अगली बार यहां दिखाई दिया तो पुलिस को बुला लेगा।
     बंटी तो इतना बड़ा झूठा है आंटी, बोलता है मेरे पापा पुलिस में है तुझे छोड़ेंगे नहीं। लेकिन उस लड़के को भागते देखकर मुझे बहुत हंसी आई।
    पर हां बंटी को भी उस सब में थोड़ी ज्यादा ही चोट लग गई…।”

तो यह माजरा था।
इन दोनों जानी दुश्मनों के बीच यह खिचड़ी पकी थी कल। खैर दोनों ने ही मुझे नहीं बताया था, और अब मुझे भी इस सीक्रेट को उन दोनों का सीक्रेट ही बनाए रखना था।

” शीतल बेटा, मेरा एक काम करोगी?”

” हां आंटी।”

” तुम अभी मुझे मिली और मुझे यह सब बताया, यह प्लीज टीना से मत कहना। उसने मुझे यह बात बताई तो है, लेकिन बहुत अलग तरीके से।
इसलिए मैं नहीं चाहती कि उसे यह पता चले कि तुमने उसकी बात मुझे बता दी है।
    समझ रही हो ना बेटा, क्योंकि तुम लोग आपस में दोस्त हो। एक दूसरे पर भरोसा करते हो।”

” हां हां आंटी, मैं समझ रही हूं। मैं टीना या बंटी किसी से कुछ नहीं कहूंगी। आंटी अब चलती हूं स्कूल के लिए लेट हो जाऊंगी ना।”

” हां बेटा जाओ, आराम से।”

कल रात से दिल दिमाग में जमी बर्फ पिघलने लगी थी। अंदर से एक अलग सी तरंग मुझे गुदगुदा गई थी। तो मेरा छोटा सा छौना अब इतना बड़ा हो गया था कि अपनी दीदी के लिए दुनिया से भिड़ भी सकता था।

मुस्कुरा कर मैं घर की तरफ बढ़ गई। जानी दुश्मनों की जोड़ी में से एक पहले स्कूल निकल चुका था, लेकिन दूसरे को अब भी जंग में भेजना बाकी जो था…।

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Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

ओह्ह हृदय स्पर्शी रचना❤️

Aarti Srivastava
Aarti Srivastava
1 year ago

बिल्कुल अपने घर की ही बात लगती है, बात बात पर झगड़ना, गुस्सा करना, समान छीन लेना उसपर भी एक दुसरे का साथ देना 😍😍😍😍😍😍😍 सब याद आ गया😃😃😃😃😃😃 बहुत प्यारी सी कहानी

Upasna
Upasna
1 year ago

भाई बहन के निश्छल प्यार को दर्शाती हुई प्यारी सी कहानी।
एक मां कितनी खुश होती है अपने बच्चों को एक दूसरे से जुड़े हुए देखकर ,माँ की भाषा का वास्तविक और बढ़िया प्रयोग किया है आपने। अक्सर यही आता है देखने मे की बराबर के भाई बहन एक दूसरे के दुश्मन जैसे वर्ताव करते हैं लेकिन इनकी आपसी समझदारी हर बात पर भारी पड़ती है
बड़ी बहन तो फिर माँ के समान ही होती है

Shushma Priya
Shushma Priya
1 year ago

मेरी दीदी के भी दोनों बच्चे ऐसे ही हैं. बिलकुल जानी दुश्मन. एक मौका नहीं छोड़ते लड़ाई का. लेकिन किसी एक की तबीयत खराब हो जाए, या बाहर किसी से लड़ाई हो जाए तो दोनों एक हो जाते हैं.

Meera
Meera
1 year ago

बिलकुल अपने घर घर की कहानी जैसी थी , एक सच्चे भाई बहन जो लड़ते भी जम कर और प्यार भी जम कर करते है । 👌👌❤️

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Nice. A great bonding.

Poonam Agrawal
Poonam Agrawal
1 year ago

💞💞💞💞👌👌👌👌👻👻👻👻💯💯💯💯 it true story

Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

बहुत ही खूबसूरत कहानी 👌👌

Gurpreet Kaur
Gurpreet Kaur
1 year ago

😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍

Manju
Manju
1 year ago

❤❤❤