
जीवनसाथी -3 भाग -97
अब तक आपने पढ़ा…
प्रियदर्शिनी और उसकी क्राइम पार्टनर का खुलासा होने के बाद एक एक कर मामला सुलझता गया, और सभी ने एक साथ मिल कर रानी रूपा को शौर्य के लंदन जाने के लिए मना लिया…
उन सब ने ऐसी भूमिका बाँधी कि रूपा को लगा विराट के पास लंदन पहुँच कर शौर्य का दुःख ज़रा कम हो जायेगा और इसलिए उन सभी ने ख़ुशी से शौर्य को लंदन जाने के लिए हाँ बोल दिया..
सारे लोग शौर्य को एयरपोर्ट छोड़ कर वापस लौट आये और अब आगे..
सभी लोग फ़्लैट पर बैठे खाना खा रहे थे कि
उसी वक्त फ्लैट की बेल बजी और किसी नौकर ने जाकर दरवाज़ा खोल दिया..।
अपने हाथ का सामान नौकर को थमा कर सधे हुए कदमो से चलता हुआ विराट अंदर चला आया..
उसने आते ही अपने बड़े भाइयों और भाभियों को प्रणाम किया, और वहीँ रखें एक सोफे पर पसर गया..।
उसे देखते ही रूपा की आंखे खुली की खुली रह गयी… वो कभी धनुष तो कभी विराट को देखने लगी….
“विराट सा आप ?”
“क्यों आप किसी और को एक्सपेक्ट कर रही थी क्या ?”
“नहीं.. हमारा मतलब, आपने खुद ही शौर्य को अपने पास बुलाया और आप खुद यहां चले आए।”
रूपा की बात सुनकर विराट ने पलट कर बाकी लोगों की तरफ देखा। हर्ष धीरे से रूपा के पीछे जाकर खड़ा हो गया था। उसने इशारों से विराट को फिलहाल चुप रहने को कहा और खुद ही अपनी माँ का समाधान करने लगा..
“मां साहब यह भी तो हो सकता है की डेट्स की कोई कंफ्यूजन हो गई हो। वैसे विराट काका ने शौर्य को लंदन बुलाया तो था ही लेकिन उस वक्त वह नहीं जानते थे कि शौर्य की सगाई टूट गई है।
उन्हें तो लगा होगा कि शौर्य अपनी होने वाली दुल्हन के साथ लंदन घूमने आने वाला है।
तो हो सकता है उन्हें यह लगा हो कि यह दोनों अकेले लंदन घूम लेंगे, और इसलिए उन्हें स्पेस देने के लिए यहां चले आए हो।”
हर्ष के मुंह में जो आता गया, वह बोलता गया। हालांकि इस बात से रूपा सहमत तो नहीं नजर आई, लेकिन बांसुरी युवराज और राजा के बातों में लग जाने के कारण फिर उसने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया। विराट भी उन सबके साथ खाने पीने और बातों में लग गया। हर्ष धनुष और बाकी लोगों ने राहत की सांस ली…।
***
आखिरकार लंदन की ज़मीन पर राजकुमार शौर्य की फ्लाइट लैंड कर गयी..।
यहाँ से तो वैसे ही सारी तैयारी थी, भले ही उसके विराट काका वहाँ नहीं हो, लेकिन यहाँ से पहले ही धनुष ने वहाँ के स्टाफ़ को सब कुछ बता दिया था..।
शौर्य एयरपोर्ट पर उतरा और बाहर उसे लेने के लिए लोग पहले ही मौजूद थे..
वो विक्रम के साथ विराट के फ़्लैट पर चला गया..
उसके वहाँ पहुँचने में उसे पता चल गया था कि विराट वापस हिंदुस्तान पहुँच गया है..।
उसे भी अपने भाइयों की शरारत पर हंसी आ गयी..
फ़्लैट में पहुँचने के बाद फ्रेश होकर वो बाहर निकल ही रहा था कि विक्रम ने उसे रोक दिया..
“लिटिल मास्टर एक कप कॉफी तो पी लेते !”
शौर्य ने उसकी तरफ देखा और “बाद में ” बोल कर बाहर निकल गया..
जाते जाते वो रुका और पलट गया.
“विक्रम तुम आराम कर लो ! यहाँ वैसे भी सिक्योरिटी की ज़रूरत नहीं है !”
“ऐसा आपको लगता है हुकुम, आपको हर जगह सिक्योरिटी की ज़रूरत है..। आजकल एक फिल्म हिट हो जाने पर हीरो हेरोइन ऐसे जेड प्लस सिक्युरिटी लेकर चलते हैं, जैसे ब्रम्हांड की सबसे कीमती चीज़ वहीँ है..।
फिर आप तो वाकई ब्रम्हांड की कीमती वस्तु हैं !”
विक्रम की बात पर शौर्य मुस्कुरा उठा..
“मानोगे नहीं तुम ?”
विक्रम ने ना में गर्दन हिलायी और अपनी जैकेट की ज़िप लगाते हुए शौर्य के पीछे चल पड़ा..
“आपको डिस्टर्ब नहीं करूँगा लिटिल मास्टर !”
शौर्य मुस्कुरा कर रह गया..
ड्राइविंग सीट पर विक्रम बैठ गया और गाड़ी उसने आगे बढ़ा दी..
“कहाँ चलना है ?”
“लोम्बार्ड स्ट्रीट चलना है !”
“लेकिन वह तो रेसिडेंशियल एरिया नहीं है ?”
“हाँ, मुझे भी एक मीटिंग के लिए ही जाना है !”
“मीटिंग ?” विक्रम चौंक गया, क्यूंकि बाकी लोगो की तरह विक्रम भी यही सोच रहा था कि शौर्य यहाँ कली से मिलने आया है..
लेकिन संकोच में वो कली का नाम लेकर पूछ नहीं पाया..
“विक्रम, मैं सिर्फ अपने पर्सनल काम से नहीं आया हूँ.. एक बिज़नेस मीटिंग भी यहाँ होनी थी। जिसमे पहले हर्ष भाई और धनुष आने वाले थे। लेकिन उन लोगो का वहाँ भी काम था और फिर कली से मिलना भी था, तो हम तीनो ने यह तय किया कि मैं ही आ जाऊं.. !”
“ग्रेट लिटल मास्टर.. आप हमेशा अपने स्वभाव से मुझे चमत्कृत कर देते हैं..।
जब भी मुझे लगता है मैं आप को समझने लगा हूँ, उसी समय आपके व्यक्तित्व का कोई नया पहलु मुझ पर उजागर होता है, और मैं आपका गुलाम हो जाता हूँ..।
सच कहूं तो एक तरफ अच्छा भी लग रहा था कि आप अपनी दोस्त के लिए इतनी दूर आ रहे। लेकिन दूसरी तरफ ये भी सोच रहा था कि सिर्फ इतने से काम के लिए यहाँ तक आना और इतने पैसे लगा देना कितना उचित है ?
हालाँकि आप हुकुम है, आपके लिए इतना पैसा उतना भी मायने नहीं रखता, लेकिन हम जैसो के लिए तो ये पैसा बहुत मायने रखता है !”
“नहीं विक्रम ऐसी बात नहीं है.. भले ही सबको लगता हो कि हम पैसे वालों के लिए पैसो की उतनी कीमत नहीं। लेकिन असल बात ये हैं कि हमें अपने खानदान का नाम बचाये और बनाये रखने के लिए और भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.. !”
विक्रम मुस्कुरा कर गाडी चलाने लगा… कुछ ही देर में वो लोग लोम्बार्ड स्ट्रीट पहुँच चुके थे..
वहाँ की सबसे ऊँची इमारत में बने पांच सितारा ऑफिस में शौर्य की मीटिंग थी.।
वो तेज़ी से आगे बढ़ कर मीटिंग वाली जगह पर पहुँच गया.. ।
ये मीटिंग कॉस्मेटिक्स कम्पनीस के मालिकों की थी..।
बिज़नेस के क्षेत्र में भी एक अदृश्य करार व्यापारियों के बीच होता है, कि वो सब व्यापार के कुछ नियमो का पालन करेंगे, और कभी अगर कोई भी इन नियमो का उल्लंघन करता है तो उसे समझा बुझा कर उसकी गलती को सुधरवाया जा सके..।
आए की मीटिंग भी इसी परिपेक्ष्य में थी..।
एक कॉस्मेटिक कम्पनी ‘द ट्यूलिप’ के कुछ उत्पादों में खतरनाक केमिकल्स पाए गए थे, ये केमिकल्स लगातार उपयोग में लाने पर त्वचा के लिए अति हानिकारक साबित होने थे..
इन उत्पादों को परिक्षण के उपरांत अमानक पाया गया था, और कम्पनी को इस बात का नोटिस इश्यू कर दिया गया था..।
लेकिन कम्पनी के मालिक ने महकमे को रिश्वत खिला कर खुद के लिये क्लीन चिट पा ली थी..।
उसके बाद “द ट्यूलिप” वालों ने वापस अपना काम शुरू कर दिया था।
लेकिन इन सारी बातों के बाद हर्ष ने इस कम्पनी के ख़िलाफ़ कॉस्मेटिक्स कम्पनी के अपने बिज़नेस ग्रुप में इस बात को रखा कि या तो ट्यूलिप वो उत्पाद बनाना बंद कर दे और या फिर उसमे ज़रूरी बदलाव कर के उसे सुधार ले..
इसी संबंध में आज मीटिंग होनी थी..
हर्ष की जगह पर शौर्य आया था और उसे भी ये सारी बातें मालूम थी..
अंदर कॉन्फ्रेंस हॉल में लोग आने शुरू हो गए.. अलग अलग देशो के नामी गिरामी ब्रांड्स के मालिक वहां मौजूद थे..
अभी कुछ दिनों पहले ही हर्ष की कम्पनी ने कॉस्मेटिक्स की दुनिया में कदम रखा था, इसलिए ट्यूलिप का मालिक फ़िलहाल हर्ष से काफी नाराज़ था
एक एक कर लोग आते चले गए, और सभी आगंतुकों के आने के साथ ही औपचारिक रूप से मीटिंग शुरू कर दी गयी..
शौर्य अपने नाम लगी कुर्सी पर बैठ चुका था.. उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं था..।
वासुकी भी लंदन के व्यापारियों के बीच एक अच्छा नाम था, इत्तेफाक से ट्यूलिप के मालिक का ऐसा मानना था की उसके वासुकी से अच्छे संबंध हैं..।
वासुकी ऐसा इंसान था जो गलती करने पर खुद को ही ना बख्शे, इसलिए उसके दोस्त कम नहीं बहुत कम थे..। उससे चिकनी चुपड़ी बातें भी नहीं होती थी..।
लेकिन पैसे कमाने में वो माहिर था.. सारा व्यापार ईमानदारी से कर के भी उसने और दर्श ने खूब पैसा बना लिया था और लंदन में एक जाना माना नाम बन चुके थे..।
इसलिए वहां के बड़े व्यापारी वासुकी का हाथ अपने सर पर पाने के लिए उसके आगे पीछे घुमा करते थे..।
इन्हीं में से एक ट्यूलिप वाला भदौरिया भी था..
उससे एक दो बार वासुकी ने ढंग से बात कर ली थी, बस उसके बाद से हर एक ऐसी मीटिंग और कॉर्पोरेट पार्टीस में वो वासुकी के बाजु वाली कुर्सी पर जम कर बैठ जाता था। हालाँकि वासुकी को उसका ये चिपकूपन ज़रा पसंद नहीं था, लेकिन उसने कभी इस बात के लिए भदौरिया को टोका भी नहीं..
आज भी वासुकी के आते ही वो वासुकी के पास बैठ गया..
लम्बे चौड़े से हॉल में सौ से ज्यादा लोग उपस्थित थे, इसीलिए शौर्य और वासुकी एक दूसरे को देख नहीं पाए..
और मीटिंग शुरू हो गयी..
****
कॉलेज से घर आने के बाद भी कली का कहीं मन नहीं लग रहा था..
इस वक्त घर पर भी कोई नहीं था..
उसके डैडा और दर्श अंकल काम पर गए थे, और सरु अपनी किसी सहेली के घर गयी हुई थी..
कली का मन नहीं लग रहा था..
वो चुपचाप घर के बाहर रास्ते पर लगी लैंपपोस्ट के नीचे बनी बेंच पर जाकर बैठ गयी..
यहाँ बैठने पर घर का एक हिस्सा जहाँ उसका कमरा था वो साफ़ नजर आता था…
अभी शाम नहीं ढली थी, लगभग चार बजे का समय था, आसमान में बादल थे, और ठंडी हवाएं चल रही थी..
वो चुपचाप बैठी मौसम को महसूस रही थी कि उसके कानो में शौर्य की आवाज़ पड़ी..
“मौसम बहुत प्यारा है ना, एक कॉफ़ी हो जाये ?”
वो चौंक कर पलटी उसके ठीक बगल में शौर्य बैठा था..
वो उसे देखती रह गयी..
“तुम… यहाँ कब आये ?”
“बस आ गया !”
“लेकिन कैसे ?”
“ऑफकोर्स फ्लाइट से !” शौर्य मुस्कुरा उठा और उसकी वो बच्चो सी मुस्कान पर कली एक बार फिर अपना दिल हार गयी..
“जाओ ना कॉफी बना कर लाओ.. यहीं बैठ कर पिएंगे ! तुम्हे बनाना सिखाया था ना, याद है ?”
हम्म सब याद है !” मुस्कुरा कर कली उठ कर घर की तरफ बढ़ गयी… जाते जाते वो पलटी
“सुनो चले मत जाना.. मैं वापस आउंगी !”
“हम्म !” शौर्य मुस्कुरा उठा..
.कली तेज़ी से घर की रसोई में घुस गयी..
उसने फ्रिज से दूध निकाल कर चूल्हे पर रख दिया, और खिड़की से झांक कर बाहर बैठे शौर्य को देखने लगी..
शौर्य नजर तो आ रहा था, लेकिन चेहरा साफ़ नजर नहीं आ रहा था….
वो वापस दूध के बर्तन के पास आयी तो उसकी नजर पड़ी, दूध फट चुका था..।
वो खीझ गयी..।
उसने दूध दुबारा चढाने के लिए चूल्हे पर के बर्तन को हड़बड़ी में उसने हाथ से उठा लिया और उसका हाथ जल गया..
वो ज़ोर से चीख पड़ी.. और सोफे पर थक कर बैठी कली की आँख खुल गयी…।
थकान से कब उसकी आँख लग गयी थी, उसे मालूम ही नहीं चला..
नींद से उठने पर इंसान कुछ देर तक एक असमंजस में ही रह जाता है। उसे अपनी सपने की दुनिया और वास्तविकता में तालमेल बैठने में वक्त लगता है…।
उसी असमंजस में कली भी उठ कर खिड़की पर चली आयी, इसने झांक कर नीचे लैम्पपोस्ट के नीचे वाली बेंच पर नजर डाली..
बेंच खाली थी..।
वो मुस्कुरा कर मुड़ने वाली थी कि एक लम्बी सी सफ़ेद गाडी उसके घर के सामने से गुज़री और उसे लगा जैसे पिछली सीट पर उसने शौर्य को देखा हो..
उसने ना में गर्दन हिला कर अपने माथे पर हाथ मार लिया और अपने लिए कॉफी चढाने चली गयी…
क्रमशः
आप पाठको के लिए सवाल..
हर्ष की कॉस्मेटिक कम्पनी का नाम बताइये, और जीतिए कहानी अगले ही दिन पढ़ने का मौका…
100 कमेंट और अगला भाग पोस्ट कर दूंगी..
लग जाइये काम पर, पढ़िए, लिखिए और खुश रहिये..

“बुंदेला “
Kali din me bhi jagti aakho se Shorya ke sapno me dubi rahti ,usaya Har pal yah ahsas hota ki Shorya yahi kahi hai,man vichlit rahta tha,ab aagya kya hota hai,seeing in the next part.
Superb part 8
Bahut badhiya part,harsh ki company ka name yad nahi hai didi..
कली को तो हर तरफ शौर्य ही दिख रहा,,, नींद मे खुली आँखों मे.. कली जानती नहीं उसका सपना जल्द ही पूरा होग़ा सच मे ज़ब शौर्य उसके सामने आएगा तो… क्या नज़ारा होग़ा👏🏻👏🏻 मैं तो सोचकर ही ख़ुश हुई जा रही 😄।
हर्ष और बाकी पलटन ने रूपा को बातों मे उलझा ही लिया वरना विराट रूपा भाभी के सामने कुछ भी बोल देते पर अच्छा लगा इन सब भाई बहनों का आपसी प्यार देखकर।
अब देखते है वासुकी और शौर्य का इस मीटिंग मे सामना होता है या नहीं..।
लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।
Bahut hi achha part tha 👍👍👌👌👌👌👌
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫
company name to yaad nahi aa raha
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Kitna romantic hai na har jagah usko dekhna jise hum chahte hain…aise wo person dikh bhi jata hai aur tasalli bhi ho jati hai
It’s lovely