अपराजिता-153

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अपराजिता -153

  बन्दुक की नोक पर रेशम को रख कर धीरेंद्र ने अनिर्वान को गाड़ी निकालने के लिए मजबूर कर दिया, अनिर्वान ने चाबी गाड़ी में लगायी और धीरेंद्र और रेशम के पीछे बैठते ही उसने गाड़ी वहां से निकाल दी..

न्यायालय परिसर से गाडी के बाहर निकलते ही धीरेन्द्र की जान में जान आ गयी…।

वो यही सोच कर डरा हुआ था कि अगर एक बार जेल  दाखिल हो गया, तब वहां से किसी तरह छुटकारा  नहीं मिलना है..।
अगर भागना है तो जेल जाने के पहले ही भागना होगा..
जब तक न्यायालय में ट्रायल चल रहा था, उतनी देर में धीरेंद्र की शैतानी खोपड़ी अपने आप को बचाने के उपाय सोचने में लग गई थी। वहां पर केस की सुनवाई के समय उसे अच्छे से समझ में आ गया था कि अब न्यायालय से किसी तरह की उम्मीद नहीं की जा सकती। हालांकि उसका वकील अब भी उसे सलाह दे रहा था कि वह इससे ऊपर के न्यायालय में वाद पेश कर देगा।

लेकिन धीरेंद्र खुद भी जानता था कि वह सच में आरोपी था। यहां भले ही उस पर कत्ल का इल्जाम पूरी तरह से साबित नहीं हो पाया था, लेकिन जितनी भी बातें साबित हुई थी, उनके लिए भी उसे दस साल के लिए कैद में रहना बिलकुल मंजूर नहीं था। इन दस सालों में उसके करियर को पूरी तरह से समाप्त हो जाना था।

हालांकि इस वक्त वह अपने करियर के बारे में कुछ नहीं सोच रहा था। इस वक्त तो उसके दिमाग में सिर्फ किसी भी तरीके से अपनी जान बचाने की तरकीब घूम रही थी। कोर्ट में खड़े-खड़े ही उसने विचार कर लिया था कि यहां से बाहर निकलते ही किसी तरीके से उसे भाग खड़ा होना है ।

उसने अपने कुछ पैसे इंडिया से बाहर के मुल्कों में भी जमा कर रखे थे। इसलिए रूपए पैसे का उसे कोई भय नहीं था। यहां से भागने के बाद बस किसी तरीके से उसे गायब हो जाना था। चोरी छिपे वह कुछ नकली दस्तावेजों और नकली पासपोर्ट के जरिए हिंदुस्तान से बाहर भाग जाना चाहता था। वह अच्छे से जानता था कि एक बार वह हिंदुस्तान से बाहर भाग गया, फिर कानून के हाथ कितने भी लंबे हो उस तक पहुंचने नामुमकिन थे…।
वह खुद को बचाने की तरकीबे सोचने में इस कदर मसरूफ था कि उसकी बहन मान्या उसके बगल से भाग कर सीढ़ियां चढ़कर ऊपर चल गई, लेकिन उसने ध्यान नहीं दिया..।

धीरेंद्र के अलावा वहां मौजूद हर कोई मान्या के भागने से समझ गया था कि न्यायालय की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाने वाली मान्या वहां से भाग नहीं रही, बल्कि आत्महत्या करने के लिए ऊपर छत पर जा रही है।
         लेकिन उसका सगा भाई धीरेंद्र इस बात को भी अपने भागने के लिए भुना गया, और पुलिस वालों के वहां से जाते ही वह भाग खड़ा हुआ, लेकिन वह उस वक्त नहीं जानता था कि वह अपनी काबिलियत के बल पर वहां से नहीं भाग रहा है।

    क्योंकि उसे पकड़ कर रखने के लिए तो अकेला अनिर्वान ही काफी था। अनिर्वान खुद चाहता था कि धीरेंद्र भाग जाए, इसीलिए धीरेंद्र प्रजापति वहां से भाग पाया था। हालांकि यह बात अनिर्वान के अलावा और किसी को मालूम नहीं थी इसलिए रेशम बहुत ज्यादा घबराई हुई थी..।

धीरेंद्र ने गाड़ी में पीछे बैठते ही गन को एक हाथ से अनिर्वान की कनपटी पर लगा दिया, और दूसरे हाथ से रेशम का एक हाथ पकड़ लिया। लेकिन रेशम बड़ी तेजी से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी कि तभी अनिर्वान ने उसे रोक दिया..

” रेशम ऐसा कुछ भी मत करो, जिससे धीरेंद्र तुम्हें या मुझे चोट पहुंचा सके। प्लीज शांति से बैठी रहो मुझे गाड़ी चलाने दो..।
धीरेंद्र तुम यह सही नहीं कर रहे हो। कानून को अपने हाथ में लेकर अगर तुम्हें लग रहा है कि तुम बच जाओगे तो तुम गलत हो..।”

” सही तो हम कभी भी नहीं रहे।
  तो आज कैसे सही हो जाएंगे, लेकिन कानून की दी हुई सजा हमें नामंजूर है। बस हमें यहां से निकलना है..।”

“लेकिन जाओगे कहाँ ?”

“तुम्हे इससे क्या लेना देना ?”

” अरे मेरा पूछने का मतलब है, यह गाड़ी कहां निकालकर ले जाऊं?  अपने घर ले जाऊं..?”

“सीधा हमारे निवास ‘गीता भवन’ चलो.. !”

“घर जाकर भोजन करना है क्या ?”.

“अबे यार तुम बोलते बहुत हो.. घर जाएंगे तभी ना अपना सामान ले पाएंगे.. ! अच्छा सुनो.. तुम दोनों का मोबाइल कहाँ है ?”

अनिर्वान के चेहरे पर हंसी खेल रही थी, जिसे बड़ी सभ्यता से वो छुपा ले रहा था…

“मेरा मोबाइल मेरी जेब में है.. क्या हुआ, मोबाइल का क्या करोगे ?”

“अबे तुम बाप हो हमारे, जो इत्ता सवाल जवाब कर रहे हो ?”

“अब जो चाहे समझ लो !”

अनिर्वान के जवाब पर धीरेन्द्र ने गन के पिछले हिस्से से अनिर्वान की गर्दन पर ज़ोर से वार किया, और उस वार को देख कर रेशम चीख उठी, लेकिन अनिर्वान हलके से कंधे को झटक कर वापस गाड़ी चलाने पर ध्यान देने लगा..

उसी समय रेशम ज़ोर से चिल्लाने लगी..

“तुम पागल हो क्या, पुलिस वाले पर हाथ उठाने का अंजाम जानते हो ?”

“अब तू हमे बताएगी की पुलिस वाले को मारने से क्या होता है.. अरे इतने लंबे चौड़े केस में तुझे पता नहीं चला कि हमने क्या-क्या किया है? और इतना सब करने के बाद भी हमें फांसी पर नहीं चढ़ा पाई तुम्हारी कोर्ट। और इसके बाद तुम हमें धमकी दे रही हो कि पुलिस वाले पर हाथ उठाने का अंजाम क्या होगा? धीरेंद्र प्रजापति कोई ऐसा वैसा छुटपुट भैया जी टाइप नेता नहीं है कि जिसे कोई भी थपड़िया के निकल ले।
धीरेंद्र प्रजापति जितना जमीन के ऊपर नजर आता है ना, उसका दुगना जमीन के अंदर है। इसलिए हमें देखकर लोगों को कभी नहीं लगता कि हम क्या-क्या कर सकते हैं? ऐसे हमारे कारनामे तुमने कोर्ट में तो सुनी लिए होंगे, उसके बाद भी तुम हमसे डरने की जगह हमें डरा रही हो..?”

धीरेन्द्र के ऐसा कहने पर रेशम भी बोलने लगी..

“धीरेन्द्र प्रजापति, तुम खुद को जो भी समझ रहे हो समझते रहो, लेकिन जिन पर हाथ उठाया है ना, वो भी कोई साधारण पुलिस वाले नहीं है !”

रेशम की बात सुन कर धीरेन्द्र हंस कर अनिर्वान की तरफ देखने लगा, जो उसकी गन की नोक पर बैठा चुपचाप गाडी चला रहा था…

अनिर्वान बड़े आराम से गाडी चला रहा था, उसकी स्पीड बहुत ज्यादा नहीं थी, और अब तक रेशम की बकबक और अपनी शेखी बघारने में मसरूफ धीरेन्द्र का इस बात पर ध्यान ही नहीं गया..।
उसी समय उनकी गाडी के बाजू में बाबूराव बाइक लहराता हुआ चला आया..

वो हाथ हिला हिला कर गाडी रोकने का इशारा करने लगा..

अनिर्वान ने उसे देखा और धीरेन्द्र की तरफ ज़रा सा मुड़ गया..

“गाडी रोकना पड़ेगा ?”

“अरे ऐसे कैसे.. क्या हो गया ?”

पूछते पूछते ही धीरेन्द्र की नजर साथ साथ चलते बाबूराव पर पड़ गयी..

‘”नहीं… कोई गाडी नहीं रोकेगा.. अगर तूने गाड़ी रोकी तो हम तुझे शूट कर देंगे !”

“और नहीं रोकी, तो गाडी खुद रुक जाएगी.. !”

“मतलब ?”

“मतलब गाडी में डीज़ल ख़त्म हो रहा है.. मुश्किल से आधे किलोमीटर चल कर गाडी रुक जाएगी !”

“तो ये बाइक वाला क्या धक्का देने के लिए साथ चल रहा है? या हमारी गाडी को खींच कर ले जायेगा ?”

अनिर्वान ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी, और जवाब देने लगा..

“रोक कर पूछ लेते है ?”

“नहीं, चलते चलते पूछो.. और अगर ज्यादा स्मार्ट बनने की कोशिश की ना, तो हम भून देंगे तुम सब को !”

अनिर्वान ने हाँ में गर्दन हिलायी और साथ साथ बाइक पर चलते बाबूराव की तरफ देख कर सवाल पूछ लिया..

“क्या हो गया बाबूराव ?”

“हुज़ूर गाडी रिज़र्व में थी, तेल ख़त्म होने वाला होगा..

“हाँ फिर ?”

“हुज़ूर बोतल में भर कर तेल लाये हैं !”

“गज़ब कर दिए बाबूराव.. मतलब इस तरह से तो हमारी बीवी भी होती तो भी हमारा ध्यान नहीं रखती, जैसे तुम रखते हो यार.. सच्ची.. मम्मी कसम कभी कभी लगता है पिछले जन्म में तुम कहीं हमारी बीवी तो नहीं थे.. !”

अनिर्वान की बात सुन बाबूराव मुस्कुरा उठा..

“हुज़ूर गाडी रोकिये, तनिक तेल डाल दे ?”

“बाबूराव तेल नहीं डीजल कहो यार !”..

“जी हुज़ूर वही !”

उन दोनों की लच्छेदार बातें सुन कर धीरेन्द्र को मन ही मन बहुत गुस्सा आ रहा था.. लेकिन उसे किसी का डर नहीं था.. क्यूंकि उसके हाथ में कानून का सबसे बड़ा खिलौना जो था..

अनिर्वान ने झटके से गाडी रोक दी..
एक बार फिर धीरेन्द्र सतर्क होकर बैठ गया..
बाबूराव अपने पास से डीज़ल की बोतल लाया और जीप में डालने लगा…

धीरेन्द्र को समझ नहीं आ रहा था की ये क्या नौटंकी है..?

“अब ज़रा ये बताएँगे कि डीज़ल बोतल में लाने की क्या ज़रूरत थी, पेट्रोल पम्प से क्या हम पेट्रोल नहीं ले सकते थे ?” धीरेन्द्र ने दांत चबाते हुए कहा और इस बात पर बाबूराव कूद पड़ा..

“देखो प्रजापति, पेट्रोल पम्प पर ज्वलनशील पदार्थ ले जाना मना है..।
हमारे हुज़ूर उसूल पसंद आदमी है।
तुम्हारे हाथ की गन के कारण वो फ्यूल स्टेशन नहीं जाते और अगर कहीं रास्ते में डीज़ल खत्म हो जाता, तो उनको उतर कर धक्का लगाना पड़ता। और ये बात हमें मंजूर नहीं, बस इसलिए भागे भागे चले आये.. !”

.”हाँ तो अब आगे भी हमारे साथ चलोगे.. तुम क्या सोच रहे, यहाँ से हमे चकमा देकर निकल लोगे, फिर पीछे से आकर हम पर गोली चला दोगे !”

“नहीं अभी तक तो ऐसा कुछ नहीं सोचे थे, लेकिन.. “

“लेकिन वेकिन कुछ नहीं… चुपचाप अपनी बाइक एक किनारे रख कर चले आओ..!”

“कहाँ बैठे हम ?” बाबूराव के सवाल पर धीरेन्द्र ने उसे भी आगे बैठने का इशारा कर दिया..

चेहरे पर लाचारगी के भाव लाते हुए बाबूराव सामने बैठा और अनिर्वान ने हल्के से मुस्कुरा कर गाडी आगे बढ़ा दी…

वो लोग थोड़ा आगे बढे ही थे कि बाबूराव का फ़ोन बजने लगा..

“तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे !”

“किसका फ़ोन बज रहा है ?” धीरेन्द्र चीख पड़ा..

“हमारा !” बाबूराव ने धीमे से कहा

” तो उठा क्यों नहीं रहे..?”

“ये गाना सुनने में नीक लगता है हमको !”  बाबूराव के जवाब पर धीरेन्द्र ने अपने माथे पर हाथ मार लिया..

और उसी वक्त बाबूराव ने फ़ोन उठा लिया…
उसके पास न्यायालय परिसर में मौजूद पुलिस वाले का फ़ोन आया था..

***

मान्या अपना अपमान नहीं सह पाने के कारण तेज़ी से सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर पहुँच गयी..
सबसे ऊपर की मंजिल पर पहुँच कर वो रेलिंग पर पहुँच गयी..
वैसे तो न्यायालय परिसर में सबसे ऊपर की छत पर जाने वाला दरवाज़ा अक्सर बंद ही रहता था, उस पर ताला डला होता था, लेकिन पिछले कुछ समय से छत के फर्श पर गर्मी से बचाव के लिए चलने वाले पेण्ट के काम के कारण दरवाज़े पर ताला नहीं डला था..।

हालाँकि इस वक्त कोई मजदूर ऊपर नहीं था, सभी खाना खाने गए हुए थे..

मान्या भाग कर वहाँ पहुंची और रेलिंग पर पहुँच कर वो उस पर चढ़ गयी…
इतनी देर में पुलिस वाले भी वहाँ छत पर पहुँच चुके थे..

“कोई गलत हरकत मत करना मान्या.. आत्महत्या जुर्म है.. !”

“क्या सजा देगी तुम्हारी अदालत ? आत्महत्या की कोशिश में अगर असफल होकर हम पकडे गए तो क्या फंसी चढ़ा देगी ?” मान्या ज़ोर से हंसने लगी, उसके ऊपर जैसे पागलपन सवार हो चुका था…

अपने काम में मिली असफलता, कोर्ट में मिली सजा और ज़माने से मिलने वाली रुसवाई को वो संभाल ना पायी और आंखे  मूँद कर आगा पीछा सोचे बिना उस ऊँची सी छत से नीचे कूद गयी..

उसने पल भर के लिए कुछ नहीं सोचा…

नीचे दीपक का हाथ पकडे खड़ा पुलिस वाला ऊपर  मान्या के पीछे गए पुलिस वालों का इंतज़ार कर रहा था। कि तभी ज़ोर की आवाज़ हुई और दीपक का ध्यान वहां ज़मीन पर आकर गिरी मान्या पर चला गया..
इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण मान्या का शरीर ज़मीन से जरा सा उठा और फिर गिर गया..
आसपास के क्षेत्र में कंपकंपी छूट गयी..
दीपक फटी फटी आँखों से उसे देखता खड़ा रह गया..

एक गहरी सी साँस लेकर दीपक ने अपनी आंखे मूँद ली… होंठो ही होंठो में कुछ बुदबुदाने के बाद उसने धीमे से अपने मन की बात कह दी..

“इसके भाई को किसी तरह खबर कर दो.. अंतिम संस्कार करने वो आ ही जायेगा.. चाहे जहाँ से आये !”

दीपक की बात सुन उसके साथ खड़े पुलिस वाले ने बाबूराव को फ़ोन लगा लिया..

बाबूराव ने फ़ोन स्पीकर में डाल कर उठाया..

उधर से दूसरे पुलिस वाले ने सब बता दिया….

अनिर्वान और बाबूराव एक दूसरे की ओर  देखने लगे….
रेशम भी परेशान सी हो गयी.. लेकिन धीरेन्द्र के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे..
जैसे उसे इस सब से कोई फर्क नहीं पड़ता हो.. फ़िलहाल उसके दिमाग में बस इण्डिया से भाग कर किसी और कंट्री में छुपने का ख्याल ही घूम रहा था…

कि तभी एक आधी बनती सी बिल्डिंग के सामने गाडी एक दम से खड़ी हो गयी..
धीरेन्द्र चौंक कर सामने देखने लगा..

“यहाँ किसने कहा रोकने को ?” धीरेन्द्र चीख पड़ा और अब अनिर्वान अपने असली तेवर में आ गया..

“अनिर्वान को ऑर्डर दे सके, वो अभी पैदा नहीं हुआ ?”

“साले मुझे डरा रहा है, मेरे हाथ में गन है… देख रहा है ना ?”

“मेरी ही है, और मैं जानता हूँ कि ये कितने काम की हैं !”

“साले ज्यादा ही होशियारी मार रहा है… गाडी यहाँ से निकाल और मेरे घर की तरफ ले चल !”

“गाड़ी तो अब यहाँ से कहीं नहीं जाएगी !”

अनिर्वान भी अड़ गया.. और इसी के साथ एक छलांग लगा कर वो गाडी से उतर गया

अनिर्वान के गाड़ी से उतरते ही धीरेन्द्र हड़बड़ा सा गया… वो किसे अपने गनपॉइंट पर रखे यही सोचने लगा और फिर उसे अनिर्वान को काबू में रखना ज्यादा ज़रूरी लगा..

वो रेशम को खींचता हुआ गाड़ी से उतर गया.. उसने गन रेशम की कनपटी पर लगा रखी थी…

“तुम दोनों ने जरा भी होशियारी दिखाई तो इस लड़की को जान से मार दूंगा !”

“और उसके बाद ?” अनिर्वान ने पूछा और धीरेन्द्र चीख पड़ा

“उसके बाद तुम दोनों को गोली मार देंगे !”

“लेकिन ये तो बताओ कि बिना गोली वाली गन से निशाना लगाओगे कैसे ?”

अनिर्वान के ऐसा बोलते ही धीरेन्द्र सकपका गया..

उसने गन को उलट पुलट कर देखना शुरू कर दिया और उसके बाद गन की जाँच करने के लिए उसने सामने खड़े बाबूराव के तरफ गन तानी और एक फायर कर दिया…

क्रमशः

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कांति
कांति
1 year ago

इतने ट्रेजेडी और सीरियस सीन में भी हंसी आ गई जब बाबू राव डीजल लेकर आ गया।
पूर्व जन्म के पति – पत्नी 🤣🤣 सच में बहुते खयाल रखता है ये बाबूराव तभी तो साथ हो लिया खेल देखने अनिर्बान का।
धीरेंद्र जिसे अभी तक समझ नहीं आया की उसने रेशम को फसाया है बल्कि खुद फस गया है इंस्पेक्टर के झांसे में।
मज़ेदार भाग 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻

Upasna
Upasna
1 year ago

गज़ब सेंस ऑफ ह्यूमर बिखेरीं हैं आप आज के भाग में . .मतलब कतई वबाल …अनिर्वाण और बाबूराव की जोड़ी एकदम धमाल है इतनी टाइट सिचुएशन में भी हंसी नहीं रोके रुक रही।
पूर्व जन्म के पति पत्नी ….बढ़िया कंसेप्ट् है भई 👌
रही बात धीरेंद्र की तो पापियों का कोई धर्म नहीं होता ,सारे जज्बात मर जाते है उनके …केवल एक ही चीज उनके लिए अहम होती है उनका पाप की दुनियां में कद और उनकी अपनी सुरक्षा संपत्ति ।
शेष सब व्यर्थ …अपनी ही बहन की मृत्यु के समाचार से भी जिसके माथे पर शिकन न आये समझ लो कैसा होगा वह शैतान…
चढ़ तो गया है है धीरेंद्र अब अनिर्वाण के हत्थे ,देखते हैं बस इस पापी का अंत कैसे होने वाला है उसके हाथों।

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

धीरेन्द्र जानता नहीं अनिर्वान को तभी इतना उछल रहा उसके सामने अब तो बुरी तरह से फंसा वो, अनिर्वान के सामने बड़े बड़ो की हेकड़ी निकल गई तो ये तो है ही कुत्ता। अनिर्वाण की गन से उसी को डरा रहा, जिसने सारा खेल रचा उसी को डरा रहा 😄,। लो जी एक और बम बंदूक मे गोलियां ही नहीं 🤷🏻‍♀️। अब आएगा मज़ा….।
लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।

Neeta
Neeta
1 year ago

Gajab gajab 😍🥰🥰🥰🥰👌👌👌👌👌👌

Hetal shah
Hetal shah
1 year ago

🤗👍 bhai Dr.sahiba kya kamal dhamal part likha hai.maja he aa gaya khub taliya pitane ka man kiya aur mari bhi 👏👏 muskarahat nahi jaa rahi thi.Anirwan ki gun aur usse pata nahi ki kitana kaam karegi aur kitana nahi…..Dhirendra ki band toh bajani he hai.udhar Maanya ka bhi bolo ram ho gaya.bacha Dipak wo shayad saja bhugat le….superb part…..

राहुल अग्रवाल
राहुल अग्रवाल
1 year ago

Sorry Mam I don’t use insta

Tripti dubey
Tripti dubey
1 year ago

Bhai लंबी लंबी sameeksha मेरे बस की बात नहीं…नहीं to hum भी water बन जाते…gajab का दीमाग है आपका. … khani आँख के सामने deekhne लगती है….khaani me इतना involve हो जाता है ki next part मे तुरंत Jane के कारण नहीं likh paata….और जो लोग ज्यादा बोलने वाले नहीं होते वो likh नहीं पाते
Gajab की turning ली है story ne

Rekhapradeepsrivastava
Rekhapradeepsrivastava
1 year ago

अनिर्वाण के सामने कोई टिक सका क्या, ये धीरेंद्र क्या चीज है, सारी प्लानिंग कर रखी थी बाबू राव और अनिर्वाण ने मिलकर, बेचारी रेशम को भी बता देते तो थोड़ा कम डरती वो।
धीरेंद्र को अब समझ आएगा कि कोर्ट की सजा तो कुछ भी नही थी, जो सजा उसको अब मिलने वाली है सारे गुनाह एक एक कर याद दिलाएगा अनिर्वाण उसको।
मान्या का यही हाल होना ही था, यही सोच कर ही वो ऊपर भागी थी।
बहुत ही बेहतरीन पार्ट 👌👌👌👌♥️♥️♥️♥️

Meera
Meera
1 year ago

जे बात, अरे बाबूराव के लिए तो आज तीन सीटी बनती है 🌬️🌬️🌬️ क्या दिमाग लगाया है साथ में आने का डीजल साथ ले कर आया बाइक पर , क्या ख्याल रखता है अनिर्वाण का 😅😅😅
मान्या का सुन कर दुख हुआ ….. ऐसा हरगिज़ नहीं बोलूंगी 🫣🫣🫣 थोड़ी सी मैं भी शैतान खोपड़ी हो गई हूं।
रेशम को इशारे से बता दिया होता तो बेचारी डरती नही इतना , पर जब जब अनिर्वाण की शैतानी मुस्कान दिखाए देती , पता नही अंदर ही अंदर बड़ी खलबली मचती की ये बांदा आगे कैसे धोएगा इस धीरू को , साले ने (ups shiv , shiv, shiv,) ने अखंड और रेशम को कितनी पीड़ा दी है, कीड़े पड़ेंगे इसे तो, नर्क में भी जगह न मिले , गंजा हो जाए, सात पुस्ते (ek minute wo to ab aane se rahi) छोड़ो इस बद्दुआ को 🤭🤭 हां तो , मैं कहा थी , हां साला दवाई खाने के लिए मुंह भी न खोल पाए , डाइपर भी न साथ दे उसका ,,🫣🫣🙈🙈🙈 ज्यादा हो गया क्या ?? हां तो इतना ही अनिर्वाण उसे सजा दे बस , इत्तु 🤏 सी ही ख्वाहिश है बस 😜😜😜🤪🤪🤪

राहुल अग्रवाल
राहुल अग्रवाल
1 year ago

क्या प्लानिंग किए अनिर्वाण बाबू
धीरेंद्र यही सोचते रहा कि प्लानिंग उसकी है भागने की