राम आये हैं…


   आज सुबह से वो भयानक उत्साह में डूबा इधर से उधर भाग रहा था..
पिछले कुछ दिनों से उसके शहर गली मोहल्ले में गजब रौनक थी..
महीने की 22 तारीख को आखिर इतने सालों के संघर्ष के बाद रामलला अपने मंदिर में विराजने जो वाले थे..।
.
वह खुद बाइस साल का था, और इसलिए रामलला के मंदिर में विराजने के पीछे के संघर्ष को उसने ना देखा था, ना जाना था।
जितना कुछ वह इस बारे में जानता था वह सब अपनी दादी के मुंह से ही उसने सुन रखा था। लेकिन सच कहे तो उसे इन सब बातों में बहुत ढूंढने पर भी श्रद्धा नहीं हो पाती थी।
अपने घर में सुबह शाम की आरती पूजा देखने के बाद भी वह अंदर से बहुत ज्यादा भक्ति नहीं कर पता था। हां बचपन से घर के देखे संस्कार थे, इसलिए कभी मन आया या कोई विशेष अवसर हुआ तो घर पर बने मंदिर के सामने सेकंड भर के लिए हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता था।
लेकिन यह श्रद्धा बस इन कुछ पलों की ही होती थी।

अपने हर सुख दुख का साक्षी भगवान को मानने वालों में से वह नहीं था। वह क्या शायद उसकी जनरेशन में ज्यादातर लोग ऐसे ही होते होंगे ऐसा वह सोच करता था…।

लेकिन अभी पिछले दो दिन से वह भी बड़ी शिद्दत से रामलला के विराजने की तैयारी में लगा था। उसका उत्साह रामलला के प्रति कम और मोहल्ले में नई-नई रहने आई लड़की चांदनी की तरफ ज्यादा था..।

चांदनी को पहली बार उसने कॉलेज जाते समय देखा था। वह अपनी बाइक पर निकल रहा था और चांदनी अपने घर का गेट बंद कर अंदर जाने को मुड रही थी। उसकी आंखें खुली की खुली रह गई थी। क्या इतनी भी खूबसूरत कोई लड़की हो सकती है?
उसे देखता रह गया था वो और उसी शाम उसके नाम से लेकर उसकी सारी जन्म कुंडली उसने पता कर ली थी..।

” कितना सुंदर नाम है यार, चांदनी!! लगती भी बिल्कुल श्रीदेवी है। वह भी मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां हैं, गाने वाली चंचल शोख बिजली सी तेज, कड़क..!”

“राजाराम तुम भी ना.. कहां इस सब में दिमाग लगा रहे हो ?”

उसके दोस्त सोनू ने उसे टोक दिया…

उसने घूर कर सोनू को देखा..

” तमीज से हमारा नाम लेना नहीं आता ना?  इतना बड़ा नाम लेने की जरूरत क्या है? रॉकी बोला करो हमें.. और सुनो दिमाग नहीं दिल लगा रहे हैं।
रॉकी को चांदनी से प्यार हो गया है।वह गाना है न, दिल तेरे बिन कहीं लगता नहीं, वक्त गुजरता नहीं.. क्या यही प्यार है, हां यही प्यार है..!”

“वाह बेटा, नाम तुमको मॉडर्न चाहिए, भले गाने अपनी दादी के जमाने के सुनते हो?”

” हां तो क्या करें, दादी हमारी फिल्मों की और फिल्मी गीतों की गजब शौकीन है? जब देखो तब रेडियो में बजती रहती हैं। तो यही सब सुन सुन के अच्छा ही लगने लग गया। बस यार नाम हमारा बड़ा बेकार सा रख दिए हमारे घर वाले..।”

” अब क्या बोले, इतना अच्छा तुम्हारा नाम रखा है, तुम्हारे घर वालों ने कि हम साला चाह कर भी तुमको गाली देते हुए नाम नहीं ले सकते।
तुम्हारा राजा राम बोलते ही अद्भुत सी छवि सामने चली आती है,भगवान की।
जानते हो राम जी सच में अयोध्या के राजा थे..।

” हां तो हम कहां मन कर रहे । हम भी तो अपने भरतपुर के राजा हैं। और सुनो भगवान के टॉपिक पर नाम से बात मत किया करो, मजा नहीं आता है..।”

“ठीक है, तब तो फिर 22 तारीख को जो भोग भंडारा होना है, उसमें तुम्हारा नाम हटा देते हैं।
तुम तो तैयारी में आओगे नहीं? अपने घर में लेटे-लेटे क्या यही प्यार है, हां यही प्यार.. करते रहना, सुनते रहना..।”

“सोनू यार सच बताएं तो हम नास्तिक भले नहीं है, लेकिन पूरी तरह से आस्तिक भी नहीं है। इसलिए ना हमारा नाम रहने दो। इस सब में पड़कर क्या करेंगे हम यार..?”

“अच्छी बात है, वैसे दो-तीन दिन गजब की तैयारी होने वाली है। एक दिन पहले मोहल्ले की लड़कियां मोहल्ले के मंदिर के ठीक सामने 10 फीट की रंगोली बनाने वाली है। मोहल्ले की हर एक लड़की आएगी, पर ठीक है तुम्हें इससे क्या? तुम जाओ यार अपना गाने वाने सुनो, बढ़िया ऐश करो..।”

“क्या बात कर रहे हो ? सभी लड़कियाँ आएंगी ?”

” हां अब उस दिन कमेटी की बात चल रही थी तो लिस्ट में तो सारी ही लड़कियों के नाम है..।”

“उसका नाम भी है क्या.. ?”

“किसका.. ?”

‘”अबे बौडम आदमी..चांदनी का ?”

“हाँ है ना.. काहे नहीं होगा.. ?
पर तुम फ्री कहां हो? तुम तो, हमारा मतलब तुम तो बहुत बिजी आदमी हो, और सुना आजकल पीसीएस की तैयारी कर रहे हो। तो जाओ यार पढ़ो लिखो। बीच-बीच में गाना बजाकर अपने पुराने जमाने के मेलोडी सुनते रहना। हम मोहल्ले के लड़के लड़कियां मिलकर रंगोली भी बना लेंगे, फूलों से मंदिर को भी सजा लेंगे, और दूसरे दिन सुबह बढ़िया पुलाव और टमाटर की चटनी का भोग लगाएंगे, और शाम के भोग में सेव और बूंदी छनेगी।
इस तरह से दो दिन मोहल्ले के हर घर से हर एक व्यक्ति मंदिर में सहभागिता देने आएगा, पर बिजी पर्सन तुम जाओ..।”

“तुम्हारा मुंह ना तोड़ दे?
पहले बताना चाहिए ना काम की बात। हमारा भी नाम डालो मंडली में। हम भी कल से पहुंच जाएंगे, कल ही रंगोली बनेगी ना..?”

“हां अब परसों सुबह रामलला विराजने वाले, तो कल शाम से रंगोली बन जाएगी मंदिर के चारों तरफ।
फूल लग जाएंगे मंदिर में, और परसों सुबह से तो जो पूजा पाठ शुरू होगा कि फिर यह सब करने का टाइम कहां मिलेगा..?”

“ठीक है फिर हम भी आ जाएंगे शाम के वक्त.. “

“इतना भी एहसान न कीजिए डोनाल्ड ट्रंप जी। अगर आना है तो कायदे से सुबह से कमेटी के सदस्य बनकर सारे काम में भाग लीजिये..।
भोग भंडारे के लिए कितना राशन आएगा, चावल तेल फल फूल सामग्री रंगोली हर एक चीज कितनी लगेगी? क्या लगेगी? कितने घरों से कितना चंदा है? सब हिसाब किताब करना है।
तो हम 8-10 लोग सुबह से इन सब कामों में जुड़ने वाले है।
कायदे से काम करना है, चले आओ। वरना राम-राम..”

“तुम तो यार धमकी चमकी में लग गए.. चलो आ जायेंगे फिर… तुम भी क्या याद करोगे.. ?”

बस उसके बाद से राजाराम उर्फ़ रॉकी भी मुहल्ले की मण्डली के साथ भिड़ गया..

रामलला के आने की ख़ुशी पुरे मुहल्ले में बह रही थी… हर एक चेहरा उद्भासित था, उत्फुल्लित था.. रॉकी भी खुश था, लेकिन उसकी ख़ुशी का कारण दूसरा था..
सुबह से शाम हो गयी..।

रॉकी का दिल धड़कने लगा.. उसे यक़ीन था अब चांदनी आयेगी..।
एक एक कर मुहल्ले की चाची, भाभी दीदी और बाकी लड़कियाँ आने लगी लेकिन वो नहीं आयी.. ।
वो कभी मंदिर के अंदर फूलो की लड़ियाँ लगाता, कभी बाहर आकर रंगोली और तो नहीं चाहिए पूछ जाता, बार बार यहां से वहाँ होने पर भी वो नहीं दिख रही थी..
आखिर कहाँ बैठी काम कर रही थी वो.. ?

मंदिर में थोड़ा नहीं बहुत काम था..
उसे कोई न कोई कुछ न कुछ काम बता कर निकल रहा था और वो भागते हुए सबके बताये काम करता जा रहा था..

काम की अधिकता में समय बीतता जा रहा था, और बीतते हुए वो शाम ढल कर रात बन गयी..।
जितने लोग आये थे काम निपटा कर जाने लगे..।
और धीरे धीरे सभी लड़कियां और महिलाये चली गयी…

लेकिन वो नहीं आयी..

ये मंदिर श्री राम मंदिर था ! इसलिए तैयारियों का प्रकार भी अद्भुत अप्रतिम था !
मंदिर को आज बंद नहीं करना था, इसलिए दो लड़के वहीँ रुक गए..!
रॉकी भी वहीँ रुक गया…

रात में उसे बाहरी परिसर में ठण्ड सी लगने लगी, और वो अपना कंबल तकिया लिए मंदिर के अंदरूनी हिस्से में सोने चला गया…!

रात उसे अचानक लगा जैसे किसी ने उस पर कोई मोटी सी चादर डाली हो… लेकिन पल भर में उसकी सर्दी दूर भाग गयी और वो चैन की नींद सो गया…!

अपने घर वालों की कोई बात नहीं मानने वाला, घर पर हमेशा अपनी मन मर्जी चलाने वाला, हर बात में बेपरवाह बेलौस सा रॉकी आज मंदिर परिसर में कैसे रुक गया था? यह उसके घर वालों के लिए चमत्कार का विषय था। लेकिन जो भी हो उसकी मां और दादी खुश थे कि चलो रामलला के मंदिर में विराजने से कम से कम उनके बेटे में एक सुधार तो नजर आया कि उसे मंदिर भी जाने लायक जगह दिखने लगी थी..।

अगली सुबह पांच बजते ही मंदिर में रुके सारे लड़के उठकर अपने घर गए, और नहा धोकर वापस मंदिर चले आए।
आज तो पूरे शहर भर की रौनक ही अलग थी।
एक तरफ भोग प्रसाद बन रहा था, दूसरी तरफ मंदिर में पूरे जोर-शोर से हवन पूजन चल रहा था। पूरा वातावरण ही शुद्ध और पवित्र हो गया था। धूप गुग्गुल की खुशबू हर तरफ फैली हुई थी…।

शाम में लगभग पांच हजार दिए जलाने की तैयारी लड़कों और लड़कियों ने मिलकर शुरू कर दी थी। इन सब के बीच उसने चांदनी को ढूंढने की कोशिश भी जारी रखी।
     काम की अधिकता में भी वह बार-बार चांदनी को देखने आ ही जाता था …

पूरा दिन इसी सब में निकल गया…।
यहां तक की कार्य की अति व्यस्तता में उसे यह तक ध्यान नहीं रहा कि सुबह से उसने कुछ खाया नहीं है..।

देखते देखते शाम ढल गई ।
सुबह का भोग प्रसाद सब कुछ खत्म हो गया था। उसके दोस्तों ने भी बीच-बीच में वक्त निकाल कर प्रसाद खा लिया था। लेकिन जाने कैसे अकेला वहीं रह गया था। शाम होने के बाद पंडाल को समेटने का काम शुरू हो गया था, और तब सोनू उसके लिए दोने में प्रसाद लेकर चला आया।

“लो अब तो खा लो..सुबह से भूखे प्यासे भटक रहे.. इतनी भक्ति तो हम में से किसी ने नहीं की, जितनी आज तुमने कर दी।
जब तक रामलला नहीं विराजे आज, तब तक ना तुमने पानी की एक बूंद ग्रहण की और ना अन्न ग्रहण किया। अब तो रामलला की शाम की आरती भी हो गई। अब कुछ खा लो..।”

अब जाकर रॉकी को होश आया कि वाकई उसे कितनी तेज भूख लगी थी? उसने दोना हाथ में लिया ही था कि एक बूढी कमजोर सी औरत ने अपने कांपते हुए हाथ उस दोने की तरफ बढ़ा दिए..।

रॉकी को इतनी तेज भूख लगी थी कि उसकी अंतडियां कुलबुलाने लगी थी।
ऐसा लगने लगा था कि अब अगर वह नहीं खाया तो चक्कर खाकर गिर जाएगा। लेकिन सामने खड़ी उस बुढ़िया की हालत रॉकी से भी खराब थी। वह इतनी निर्बल थी कि उसके हाथ बुरी तरीके से कांप रहे थे। झुर्रिया और हाथ की नसों में फर्क तक नजर नहीं आ रहा था..।

अपनी छोटी-छोटी आंखों पर जोर देते हुए वह रॉकी की तरफ बड़े दया भाव से देख रही थी..

“रामलला के नाम का प्रसाद चाहिए था बेटा..?”

एक ठंडी सी आह भर के रॉकी ने प्रसाद का दोना उस बुढ़िया के हाथ में रख दिया।
वह वापस मुडने को था कि उस बढ़िया ने उसे आवाज दे दी..

वह रुका और उसे बुढ़िया की तरफ देखने लगा।
उसने दो उंगलियां उन चावलों में डालकर थोड़े से चावल अपने मुंह में रखें, और वापस उन्ही उंगलियों से थोड़े से चावल और उठाकर अपने मुंह में रख लिए। कांपते हाथों से वह पूरा भरा हुआ दोना वह रॉकी को वापस करने लगी…

“प्रसाद बहुत स्वाद बना है बेटा, तुम भी खा लो..।”

पल भर के लिए रॉकी को उबकाई सी आ गई।
जो लड़का अपने घर पर चार बार की धुली सब्जियों के पकने पर भी बहुत बार सफाई पर अपनी मां को लेक्चर दे दिया करता था, आज वह एक गरीब भिकारन बुढ़िया का जूठा प्रसाद कैसे खा सकता था? उसने बड़ी अजीब आंखों से उस प्रसाद की तरफ देखा और उस बुढ़िया को देखने लगा।

कितनी अजीब औरत थी।
भिकारन होते हुए अपना जूठा खाने के लिए मुझे दे रही है?
उसने धीरे से ना में गर्दन हिला दी।

“नहीं अम्मा आप खा लो…।”

“खा लो बेटा प्रसाद कभी जूठा नहीं होता। जूठा है यह सोचकर छोड़ रहे हो क्या..?”

हद बेहूदा बुढ़िया है यह। भाई मुझे जूठन नहीं खाना तो नहीं खाना। पीछे क्यों पड़ गई है?
      लेकिन इतना सब सोचने के बावजूद आज पूरे दिन जो शांति उसने अपने मन में महसूस की थी, उसे याद कर उसने इतना गंदा जवाब देना सही नहीं समझा। और बिना कोई जवाब दिए मुड़ गया। लेकिन तभी उसे एक आवाज सुनाई थी…

“रुको राजाराम..।”

अपना असली नाम सुनकर रॉकी भड़क कर पलट गया। उसके ठीक सामने एक पच्चीस छब्बीस साल का तरुण खड़ा था।
सांवला चेहरा, घुंघराले जरा लंबे कान तक आते बाल, माथे पर लगा तिलक और होठों पर खिली  मुस्कान ऐसी लग रही थी जैसे कमल का फूल खिल हो..।
बड़ी-बड़ी गहरी आंखों को ध्यान से देखने पर लग रहा था कि उन दो अक्षिगोलकों के भीतर पूरा संसार समाया हुआ है..।

उस दाड़िमदशन ने ही रॉकी को आवाज़ दी थी..

“कहिये.. !”

” राम का प्रसाद ठुकरा कर जा रहे हो?”

गहरी शहद सी आवाज़ रॉकी के अंदर उतरने लगी..

“और वह भी उस राम का प्रसाद जिसने शबरी के जूठे बेर खा लिए थे, बिना किसी आपत्ति के।
यहां तो फिर भी माताजी ने अपने हाथों से लेकर प्रसाद खाया है। प्रसाद वैसा भी जूठा नहीं है, जैसे बेर खाए थे राम ने..।

आज पूरा दिन जिसकी भक्ति में डूबे रहे हो, शाम होते-होते ही उसके आचरण से विलग कैसे होने लगे? राम की भक्ति करना चाहते हो तो थोड़े से राम अपने अंदर भी लाने होंगे, बस इतनी सी शर्त है कि राम सी सहजता और सरलता को अपने भीतर जगाना होगा।

    मत जलाओ दिया रोज उनके सामने पर, उनकी मर्यादा का एक हिस्सा तो अपने अंदर लाओ।
जिसने उस बुढ़िया का प्रेम देखा, उसके जूठे बेर नहीं देखे, उसकी मर्यादा का पार लाओगे, तभी तो एक दिन तुम भी राम भक्त कहला पाओगे…।
पिता के एक वचन पर जिसने पलट कर कोई सवाल नहीं किया, जिस दिन अपने माता-पिता को उतना सम्मान दे जाओगे, समझ जाना तुम कि, तुम भी राम भक्त कहला जाओगे..
अहंकारी रावण को भी जिसने वध करने की जगह पहले संधि प्रस्ताव भेजा..
उस पत्नी वियोगी पति की व्यथा को जब अन्तस् में उतरा पाओगे..
समझ लेना तुम उसी पल, तुम रामभक्त कहला जाओगे..
अनुज को अपने पुत्र सा माना, छल कपट परपंच ना जाना,
वैसा प्रेम अगर कर पाओगे उसी क्षण तुम राम भक्त कहला जाओगे..।”

पता नहीं उस युवक की बातों में ऐसा क्या था लेकिन राजा राम की आंखों से आंसू बह रहे थे। और वह हाथ जोड़े उनकी सारी बातें सुनता जा रहा था। अपनी बातें खत्म करने के बाद उन्होंने उसकी तरफ देखा और रॉकी ने आगे बढ़कर वह प्रसाद उठा लिया ।
उसने इधर-उधर देखा वह बूढी औरत जा चुकी थी। प्रसाद के दोने की तरफ देखकर, उसने आंखें मूंद ली और प्रसाद एक बार में ग्रहण कर लिया..
भगवान राम का स्मरण कर उसने आंखें खोली, सामने खड़ा युवक मुस्कुरा रहा था। उसने धीरे से रॉकी के सिर पर हाथ रख दिया ..

“चिरंजीवी भव !!”

एक लगभग सम वयस्क युवक के मुंह से अपने लिए यह आशीर्वाद सुनने के बाद भी हर किसी का मजाक उड़ाने वाले रॉकी को हंसी नहीं आई…
श्रद्धा से आंखें मूंद कर उसने आंखे खोली, लेकिन अब वहाँ कोई नहीं था.. ।
ना वो बुढ़िया और ना वह तेजस्वी शांत सुंदर युवक कहीं दिख रहा था..।
वो इधर उधर आंखे मारता उन दोनों को ढूंढने की कोशिश कर रहा था कि तभी किसी ने उसकी बांह पकड़ कर झकझोर दिया..

“रॉकी… रॉकी ? सुन रहा है ?”

उसने चौंक कर आवाज़ की दिशा में देखा..

” कितना थक गये थे यार तुम, यहां कुर्सी पर बैठे बैठे ही सो गये ?”

“हम सो गए थे.. नहीं..।अभी सेकंड भर पहले तो हमने प्रसाद खाया है। वह देखो दोना वहां रहा।

रॉकी ने दोने की तरफ दिखाया और सोनू ने देखा भी।

“हां हम बोल रहे हैं कि तुमने खाया और खा पीकर मस्त सो गए थे तुम।”

” यहां ? अरे नहीं यार, कैसी बात कर रहे हो? हम जाग रहे थे, अभी यहां एक युवक आया था, और बहुत पहचाना सा चेहरा लग रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे अभी-अभी कहीं देखा है उन्हें… “

कहते-कहते अचानक रॉकी थम गया। वह मुड़कर मंदिर के अंदर प्रवेश कर गया। जहां बहुत बड़ी सी श्री राम की प्रतिमा रखी हुई थी,धनुष हाथ में पकड़े हुए।

उस प्रतिमा को देखते हुए रॉकी का मुंह खुला का खुला रह गया। ऐसा लगा वह प्रतिमा उसे देखकर मुस्कुरा रही है। रॉकी की आंखें झिलमिलाने लगी, और उसने झुक कर उस मूर्ति के पांव में अपना सर रख दिया। उसके आंसुओं से मूर्ति के पैर धुलने लगे।

अपने माथे को बार-बार उस मूर्ति के पैरों पर रगड़ता रॉकी पता नहीं अपनी किन भूलो और गलतियों की माफी मांग रहा था।
लेकिन आज उसका मन स्वच्छ पावन हो गया था। उसी वक्त उसके कंधे पर किसी ने हाथ रख दिया। अपने आप को संभाल कर आंसुओं को पोंछकर वह पलटा और सामने खड़ी चांदनी को देख चौंक गया।

     वह धीरे से खड़ा हो गया। चांदनी ने मुस्कुरा कर उसे देखा और श्री राम की मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई।
चांदनी को देखने के बाद उसने श्री राम की मूर्ति को देखा और उन्हें प्रणाम कर मन ही मन उनसे कुछ बातें करता हुआ बाहर निकल गया..।

वह बाहर पहुंचा ही था कि पीछे से आवाज आई..

“रॉकी जी.. प्रसाद मिलेगा.. !”

वह मुस्कुरा कर पलट गया..

“भोग तो खत्म हो गया है, अब सिर्फ नारियल बचा है।”

“प्रसाद तो प्रसाद होता है, नारियल ही दे दीजिए रॉकी जी…।”

रॉकी ने नारियल निकाल कर चांदनी की खुली हथेली पर रखा और अपने हाथ जोड़ लिए।

” सुनिए हमारा नाम रॉकी नहीं, राजाराम है..।”

रॉकी के मुंह से यह बात सुनते ही वहां एक तरफ खड़े उसके सारे दोस्त आश्चर्य से एक दूसरे को देखने लगे। उन्होंने जैसे ही रॉकी की तरफ देखा, रॉकी ने धीरे से हां मैं गर्दन हिला दी।

चांदनी मुस्कुरा कर मंदिर से वापस चली गई, और राजाराम एक बार फिर अपने आराध्य श्री राम के सामने हाथ जोड़ पूरी श्रद्धा से नतमस्तक हो गया…!

जय श्री राम…

aparna…






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Kanchan
Kanchan
1 year ago

Bahut hi badiya

Yashita Rawat
Yashita Rawat
1 year ago

Jai shree ram. Nice.

Poonam Gupta
Poonam Gupta
1 year ago

बहुत सुन्दर

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

लाखों करोड़ों भक्त होते हुए भी भगवान के पास हर एक व्यक्ति के लिए समय होता है यह बात सच है भगवान हर किसी का ख्याल रखते हैं और मुसीबत पढ़ने पर स्मरण करने से ही उसकी हर परेशानी का हल भी देते हैं।
रचना बेहद अद्भुत लगी मन प्रसन्न हो गया राम जी को देखकर। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
जय श्री राम 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 जय श्री राम 😊😊😊😊

Anu
Anu
1 year ago

Bahut badhiya 👌👌

Rashmi Hasija
Rashmi Hasija
1 year ago

Maine pratilipi per padi thi aapki ye rachna

Alka
Alka
1 year ago

Jai Shree Ram 🙏…. Bohot sunder

कांति
कांति
1 year ago

साक्षात् प्रभु के दर्शन हो गए 🙏🏻🙏🏻 अद्भुत, अप्रतिम, राजाराम के साथ साथ हम भी राममई हो गए 🙏🏻🙏🏻 निशब्द

Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
1 year ago

बहुत ही अद्भुत और राममय एहसास है कहानी में दीदी, आनंद ही आनंद हैं दी, बेहतरीन स्टोरी लिखी हैं आपने, बेस्ट वन दी…👍💐🙏

Kirti tiwari
Kirti tiwari
1 year ago

निशब्द बस अदभुत ऐसा लगा साक्षात प्रभु के दर्शन कर रहे