
जीवनसाथी -3 भाग -96
अब तक आपने पढ़ा…
रानी रूपा की सहेली गीता का नाम और पहचान ओढ़ कर समीक्षा और देविका ने अपनी जालसाजी का जाल बुना जिसमे रानी रूपा फंस गयी, लेकिन धनुष और उसके बाक़ी साथियों को शुरुवात से ही प्रियदर्शिनी बनी देविका पर शक हो गया था और इसलिए उसने उनके बारे में खोजबीन की और उसका सच मालूम कर लिया…
कुणाल नाम का पुलिस वाला जो इन दोनों औरतों की तलाश में था, के आ जाने से वहाँ मौजूद सभी लोगो को उन दोनों की सारी सच्चाई मालूम चल गयी। और इस तरह शौर्य की प्रस्तावित सगाई रुक गयी..।
शौर्य खुद इस सगाई को करना नहीं चाहता था, और इसलिए उसके सारे भाई बहन उसकी जान बचाने में लगे थे..
सगाई के निरस्त हो जाने के बाद शौर्य खुश तो था, लेकिन अब भी उसकी समझ से बाहर था कि, वो बांसुरी और राजा के सामने लंदन जाने का प्रस्ताव कैसे रखे ?
अब आगे….
“अच्छा तो तुम सब इस साजिश में शामिल थे ?” शौर्य ने धनुष के अलावा बाकियों को देख कर सवाल किया और सब मुस्कुरा उठे..
वो सब हँसते मुस्कुराते कब कैसे क्या किया ये सारी बातें उसे बताने लगे..
पुलिस देविका और समीक्षा को पकड़ कर ले गयी.. ये दोनों ही औरतें सर्वाधिक वांछित आरोपियों की सूचि में शामिल थी और पुलिस बहुत समय से इनकी तलाश में थी..
पुलिस उन्हेँ साथ पकड़ कर ले गयी..।
रूपा अब तक सदमे में थी.. बांसुरी और रेखा उसे संभाल रहे थे, लेकिन उसकी आँखों से आंसू बहे जा रहे थे.. वो खुद को संभाल नहीं पा रही थी…।
रूपा खुद को दोष दे रही थी, और वहाँ मौजूद बाकी लोग उसे समझा रहे थे कि उसकी कोई गलती नहीं थी..।
“कैसे गलती नहीं थी हमारी.. अगर कहीं सच में शौर्य की शादी उस चालाक लड़की से हो जाती, तब क्या होता ?”
“ऐसे कैसे हो जाती भाभी साहब, हम सब क्या आंखे मूंदे बैठे थे?” राजा के ऐसा बोलते ही रूपा ने राजा की तरफ देखा
“लेकिन, आप लोगो ने पहले मना भी तो नहीं किया ना !”
“रूपा, अगर तुम्हे पहले से मना किया जाता, तो क्या तुम हमारी बात सुनती ?” अबकी बार युवराज ने कहा
“तुम बहुत भोली हो, आसानी से किसी पर भी विश्वास कर लेती हो और विश्वास भी इतना कि फिर किसी से उस इंसान के ख़िलाफ़ कुछ नहीं सुनती हो।
अब ऐसे में तुमसे कोई कुछ कहता भी कैसे, बताओ.. बस इसीलिए हम सब ने सोचा कि जब तक सारे सबूत गवाह इकट्ठा न कर ले, तुम्हे परेशान ना करे !”
“अच्छा मतलब आप भी शमिल थे इस सब में.. और हमे खबर तक नहीं होने दी !”
“अरे नहीं महारानी सा, हम कोई शमिल नहीं थे। ये सब तो बच्चो ने ही किया है। लेकिन जब धनुष ने बांसुरी को बताया तब उसने अपने साहब को बताया और कुमार ने हमे..।
हम तीनो बहुत ज्यादा कुछ नहीं जानते थे, ये धनुष कम बदमाश है क्या?
ये पूरा समर की कॉपी है.. सिर्फ बताने लायक ही बातें बताता है..
इसने बांसुरी को उतनी ही बातें बताई, जिससे बांसुरी आकर आपसे कह सके कि आप राजा को फौरन बुला ले और बस वह हो गया, जो धनुष चाहता था।
आपको यहां आंसू बहाने की जगह जाकर धनुष के कान उमेठने चाहिए कि जब उसने इतनी सारी सच्चाई पता कर ली थी, तो आज के दिन तक रुका क्यों रहा? उसने आकर आपसे सीधे तौर पर कहा क्यों नहीं..?”
” हम जानते हैं क्यों नहीं कहा..!”
मुहं बना कर रूपा ने कहा और वहां मौजूद सभी के चेहरे पर हंसी खेल गयी..
“हम अभी आये !” रूपा दूर बैठे शौर्य और बाक़ी लोगो की तरफ देखती हुई खड़ी हो गयी..
युवराज ने हल्के से गर्दन झुका कर उसे जाने की इजाजत दे दी..
रूपा जिस तरफ शौर्य और बाकी लोग बैठे थे उस तरफ चली आयी..
उसे देखते ही धनुष अपनी जगह पर खड़ा हो गया..।
रूपा धीरे से शौर्य के पास वाली कुर्सी पर बैठ गयी, और उसके बाल सहलाने लगी..
“शौर्य हमें माफ़ कर दो.. हमें नहीं पता था कि प्रियदर्शिनी इतनी चालाक लड़की निकलेगी। उसने इतना बड़ा झूठ का मुखौटा पहन रखा था। अगर हमें पहले पता हो जाता तो हम तुम्हें इन सब में घसीटते ही नहीं। हम जानते हैं, तुम्हें इस तरह से सगाई टूटने पर बहुत बुरा लगा है। और हम यह भी जानते हैं कि तुम्हें इस सबसे उबरने में बहुत वक्त लगेगा। इसलिए हम दिल से तुमसे माफी मांगते हैं। हमें पहले उन लोगों के बारे में जांच परख कर लेनी थी, उसके बाद तुमसे बात करनी थी। हमें माफ कर दो बेटा, तुम अपने दिल में किसी तरह का कोई बोझ मत रखना। हम इससे भी अच्छी लड़की तुम्हारे लिए ढूंढ कर लायेंगे..।”
रूपा भावुक होकर शौर्य को समझा रही थी और रूपा के ठीक पीछे हाथ बंधे खड़ा धनुष अपनी हंसी रोकने का प्रयास कर रहा था। उसके साथ-साथ वहां बैठी परी, शोवन हर्ष मीठी और यश भी बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकने की कोशिश कर रहे थे..।
रूपा की बीच में हर्ष पर नजर पड़ी और हर्ष अपने चेहरे की हंसी रोक कर बिल्कुल सपाट चेहरे के साथ अपनी मां की तरफ देखने लगा।
रूपा बहुत भावुक होती जा रही थी। वह शौर्य को वापस समझाने लगी..।
” हम जानते हैं वह लड़की बहुत सुंदर थी, लेकिन हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती ना। हम इससे भी सुंदर लड़की तुम्हारे लिए ढूंढ कर लायेंगे, देखना।
और उस वक्त तुम खुद हमसे कहोगे, रानी मॉम अच्छा हुआ जो हमारी शादी प्रियदर्शनी से नहीं हुई।”
शौर्य चुपचाप सर झुकाए सब कुछ सुन रहा था। उसके मन में जो लड्डू फूट रहे थे, उनके बारे में वह कैसे अपनी बड़ी मां को कुछ बताता?
उसने धीरे से अपना चेहरा उठाया और अपनी रानी मॉम की आंखों में देखने लगा।
“रानी मॉम आप किसी तरह की गिल्ट मत लीजिए, जो होना होता है वह होकर ही रहता है ।”
हर्ष शौर्य के पास आकर खड़ा हो गया। उसके कंधों पर अपने हाथ रखकर उसने अपनी मां की तरफ देखा और बोल पड़ा।
” ऐसा करते हैं माँ साहब, शौर्य का मूड अच्छा करने के लिए इसे एक ट्रिप पर भेज देते हैं। थोड़ा घूम कर आएगा तो इसका मूड भी अच्छा हो जाएगा।”
रूपा हर्ष की तरफ देखने लगी कि तभी परी बोल पड़ी
” हां हर्ष भाई, सही बोल रहे हैं। ऐसा करते हैं शौर्य को लंदन भेज देते हैं ।”
परी के ऐसा बोलते ही यश भी कूद कर सामने आ गया
” रानी मॉम वैसे भी विराट चाचू ने शौर्य को बुलाया भी था। वह चाहते थे कि शौर्य लंदन घूम ले। क्यों शौर्य, ठीक कह रहा हूं ना मैं?”
शौर्य खुद बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकने का प्रयास कर रहा था, और यह सारे भाई-बहन उसे लंदन भेजने पर अमादा थे।
रूप ने सब की तरफ देखा और अपने दोनों कंधे उचका दिये।
” ठीक है अगर आप सबको यह सही लगता है, तो हम अभी टिकट के लिए बोलते हैं। हफ्ते भर बाद की टिकट्स मिल जाएंगी तो शौर्य लंदन भी घूम आएगा। बल्कि अगर वह अकेला न जाना चाहे, तो हम भी साथ चले जाएंगे।
क्यों शौर्य ठीक है ना?”
शौर्य कुछ बोल पाता उसके पहले ही धनुष ने अपनी जेब से निकालकर टिकट सामने रख दिया। और टिकट्स को देखते ही रूपा आश्चर्य से धनुष की तरफ देखने लगी।
” यह क्या तुमने टिकट्स भी करवा लिए?”
रूपा के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। शौर्य धनुष को घूर रहा था और धनुष बालों पर हाथ फिराता रूपा को देख रहा था।
“माफी चाहते हैं रानी मां, लेकिन पहले ऐसा सोचा था की सगाई होने के बाद शौर्य एक छोटी सी ट्रिप पर लंदन घूम कर आ जाएगा। और अपनी शादी के लिए थोड़ी शॉपिंग भी कर लेगा। विराट सा ने कहा था कि वह शौर्य को लंदन में शॉपिंग करवाना चाहते हैं। बस इसलिए मैंने हर्ष सा से पूछा और टिकट्स करवा ली। मेरी इसमें कोई गलती नहीं है।”
धनुष अपने दोनों हाथ खड़े करके खड़ा हो गया। उसे घूरने के बाद रूपा पलट कर हर्ष की तरफ देखने लगी।
” अच्छा तो अब आप इतने बड़े हो गए हैं हर्ष कि आप खुद ही यह निर्णय ले लेते हैं कि शौर्य को कहां जाना है और कहां नहीं?
आपने जरूरत नहीं समझी एक बार भी कि हमसे या अपने पिता साहब से पूछ ले? यहां तक की शौर्य के माता-पिता से भी पूछने की आप लोगों को जरूरत नहीं लगी?
कुछ ज्यादा जल्दी बड़े नहीं हो रहे हैं आप लोग..?”
रूपा की इस बात पर शौर्य उठकर रूपा के पीछे जाकर खड़ा हो गया, उसने प्यार से हमेशा की तरह रूपा के कंधों पर अपनी बांहे डाल दी और धीरे-धीरे झूलने लगा..
” रानी मॉम आप ऐसे प्यार से हुकुम चलाती हुई ही अच्छी लगती हैं। अभी कुछ देर पहले आप जो यह सॉरी सॉरी कर रही थी ना, मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। सच कहता हूं आपके मुंह से ना जब झिड़की खाते हैं यह सब लोग, तब मेरे दिल को सुकून मिलता है।
मैं तो वैसे भी आपका अच्छा वाला बच्चा हूं, जो कभी डांट नहीं खाता..।”
” देख रही हूं आजकल इसी बात का फायदा उठाया जा रहा है…!”
अब तक बांसुरी भी वहां चली आई..शौर्य की बात का जवाब उसने दिया और धनुष के हाथ से टिकट लेकर देखने लगी..
” देख लीजिए भाभी साहब, सब बच्चे अपनी मनमर्जी करने लगे हैं।”
बांसुरी ने मुस्कुरा कर रूपा की तरफ देखा और रूपा ने शौर्य की बल्लैया लेकर उसे खींच कर अपने सामने खड़ा कर दिया..
” कोई बात नहीं, तुम्हारी मां मना भी करेगी ना, तो हम कहते हैं कि तुम जाओ लंदन घूम के आओ। वैसे भी तुम्हारे विराट काका सबसे ज्यादा तुम ही से प्यार करते हैं।
एक तुम और एक परी। तुम दोनों ही तो उनके सबसे ज्यादा लाडले हो। हम तुम्हारी जाने की सारी तैयारी करवा देंगे। ठीक है, वैसे कब निकलना है..?”
“परसों !” हर्ष यश मीठी परी और धनुष एक साथ बोल पड़े..
रूपा ने सब की तरफ देखा और फिर वो सभी लोग एक साथ हंसने लगे..
*****
कली अपनी कॉलेज की कैंटीन में बैठी थी.. उसके सारे दोस्त उसके आसपास थे..।
सभी लोग कुछ न कुछ बातों में लगे थे। पर उसका मन किसी बात में नहीं लग रहा था।
बाहर बेहद सर्द मौसम था… हलकी हलकी बर्फ गिर रही थी…
सब की बातो के बीच कली की नजर खिड़की से बाहर चली गयी…वो अपना गर्म कॉफी का प्याला होंठो से लगाए बाहर पड़ती बर्फ देख रही थी..।
रास्ते पर गिरने वाली बर्फ को एक लड़का बड़ी शिद्दत से हटाता जा रहा था..।
कली की उस पर नजर पड़ गयी..।
और तभी उस लम्बे ओवरकोट और कैप के पीछे छिपे चेहरे ने मुड़ कर कली को देखा और कली की कॉफी छलक गयी..
उसके सामने शौर्य खड़ा था.. !!
वो चौंक कर आंखे साफ़ किये वापस उसकी तरफ देखने लगी.. लेकिन इस बार उसे शौर्य नजर नहीं आया, बल्कि कोई और ही आदमी उस काम को अंजाम दे रहा था..।
कली ने अपने माथे पर अपना हाथ मार लिया..
“अब तो हद हो गयी है, हर जगह शौर्य क्यों नजर आने लगा है ? ये सब, कुछ ज्यादा ही फ़िल्मी नहीं हो रहा ! ऐसा तो सिर्फ फिल्मों, टीवी सीरियल्स में ही होता है! असल ज़िन्दगी में कोई ऐसे किसी को दिखाई थोड़े ना देता है !”
कली खुद से बातें करती खिड़की से बाहर देख रही थी, और उसके सारे दोस्त मुहं खोले उसे देख रहे थे..
डेरिक ने नैना को कुहनी मारी और इशारे से पूछा कि इसे क्या हो गया और नैना ने मुझे नहीं पता कर इशारा कर दिया..
खुद में खोयी कली ने अपना बैग उठाया और वहाँ से उठ कर अपने घर के लिए निकल गयी..
उसके सारे दोस्त उसे देखते रह गए..
“बाहर गिरती बर्फ में ये पागल लड़की कैसे घर चली जाएगी ?” नैना ने जैसे ही ये कहा, डेरिक बोल पड़ा..
“इस पागल का एक सनकी बाप भी तो है !” इतना बोल कर डेरिक ने खिड़की से बाहर की तरफ इशारा कर दिया..
कली के बाहर पहुँचते में एक लम्बी काली लिमोज़ीन आकर खड़ी हो गयी..
वहां मौजूद सभी लोग वासुकी की शाही सवारी को पहचानते थे और साथ ही उसके स्वभाव को भी..।
मौसम ख़राब होते देख कली का पिता समय से पहले ही कली को लेने आ जायेगा, ये वो लोग भी जानते थे..।
कली यंत्रचलित सी बाहर पहुंची और कार में बैठ कर घर चली गयी..
“ये जब से वापस लौटी है, कुछ उखड़ी उखड़ी सी नहीं लगती ?”
“लगती तो है, पर पूछने पर कुछ बता भी नहीं रही !” नैना ने डैरिक के सवाल पर जबाब दे दिया..
“हम्म पता करना पड़ेगा, वैसे नैना ये शौर्य कौन है, तुम जानती हो उसे ?” डेरिक ने पूछा और नैना ने ना में सर हिला दिया..
“क्यों ?”..
“कभी नोटिस करना, आजकल कली अपनी उंगलियों से खाली समय पर टेबल पर यही स्पेलिन्ग लिखती रहती है.. !”
“ओह्ह.. अब तो नोटिस करना पड़ेगा !” कली के सारे दोस्तों ने एक दूसरे के हाथ पर ताली दी और वहाँ से निकल गए..
****
शौर्य के जाने की सारी तैयारी हो गयी और नियत तिथि पर महल की महिलाओं और अपने भाई बहनों के साथ पूरे ठाठ से शौर्य एयरपोर्ट पहुँच गया…
रूपा उसे तरह तरह की समझाइश दे रही थी और बांसुरी चुपचाप खड़ी मुस्कुरा रही थी..
हर्ष, परी यश और धनुष अलग ही मस्ती में डूबे थे..
रूपा की उपस्थिति के कारण मीठी वहाँ नहीं आयी थी…
रूपा ने हर्ष और मीठी का रिश्ता स्वीकार जरूर लिया था, लेकिन मीठी जानती थी कि अब भी रूपा उसे बहुत ज्यादा पसंद नहीं किया करती थी।
इसके अलावा जब तक उन दोनों की शादी ना हो जाये, उन दोनों का साथ दिखना भी रूपा या महल के किसी अन्य सदस्य को खटक सकता था।
इसलिए भी मीठी रूपा के सामने हर्ष से मिलने को टाल जाती थी।
शोवन अपने किसी मेडिकल में साथ पढ़े दोस्त से मिलने चला गया था, वैसे वो भी भीड़ भाड़ से बचता ही था ये और बात थी कि महल की सारी राजसी महिलाओं का फेवरेट था शोवन..
खास कर रूपा का !!..
फ्लाइट का वक्त हुआ और हर किसी से विदा लेकर शौर्य रुखसत होने लगा.. उसके पहले एक एक कर सबसे गले मिलते हुए जब वो हर्ष के गले से लगा, हर्ष ने प्यार से उसे बाँहों में बांध लिया..
“अब दुल्हन लेकर ही आना !” हर्ष के ऐसा बोलते ही वो झेंप गया….
“क्या भैया आप भी… ?” शौर्य आधी बात बोल कर चुप हो गया और यश ने आगे का वाक्य पूरा कर दिया..
“एकदम ही सच बोल जाते हैं !”
यश के ऐसा बोलते ही परी हंसने लगी..
“और क्या, अब कितना छिपाओगे शौर्य, अब हम सब से तो मत छिपाओ ! हमे तो बता ही सकते हो !”
“बताने लायक जब बात बन जाएगी ना, सब से पहले तुम सब को ही बताऊंगा, प्रॉमिस !”
परी के सर पर एक हलकी सी चपत लगा कर शौर्य आगे बढ़ गया.. इस बार अपने साथ किसी भी सिक्योरिटी गार्ड को ले जाने से उसने मना कर दिया था… लेकिन विक्रम के लिए वो भी ना नहीं कह पाया… वो और विक्रम सबको हाथ हिलाते हुए अंदर चले गए.. !
रूपा ने उन दोनों को जाते देखा और बांसुरी से मुखातिब हो गयी..
“कितनी अजीब बात है ना, अगर प्रियदर्शिनी फ्रॉड नहीं होती तो आज इन दो टिकट्स में से एक उसकी रही होती और विक्रम की जगह हमारे शौर्य के साथ वो सफर कर रही होती !”..
बांसुरी ने सुना और चुपचाप हाँ में सर हिला दिया…
वो सारे लोग वापस लौट गए..
उस दिन महल वालो का वापस महल लौटना नहीं हुआ.. अगली सुबह सबको वापस जाना था.. आज की रात सभी एक साथ समय बिताना चाहते थे …
रूपा के आदेश पर फ़्लैट में शाही दावत का इंतज़ाम हो रहा था….
आज बहुत दिन बाद सारा परिवार एक साथ था।
सभी साथ बैठे बातों में लगे थे कि नौकरो ने आकर रानी रूपा से खाना परोसने की बात पूछ ली..?
रूपा के हाँ कहने पर शाही दावत सजने लगी..
वो सभी लोग एक साथ उस लम्बे चौड़े से हॉल में बैठ कर खाने लगे..
खाना भी आज युवराज और राजा की पसंद का बना था.. वो दोनों भाई आपस में बिलकुल बचपन के दिनों के जैसे साथ बैठ कर खा रहे थे और साथ ही बच्चो को अपने बचपन के किस्से भी सुनाते जा रहे थे..।
सभी को उनके किस्से सुन कर बड़ा मज़ा आ रहा था.. बीच बीच में रूपा या बांसुरी कोई न कोई तड़का लगा जाती थी..।
उसी वक्त फ्लैट की बेल बजी और किसी नौकर ने जाकर दरवाज़ा खोल दिया..
अपने हाथ का सामान नौकर को थमा कर सधे हुए कदमो से चलता हुआ विराट अंदर चला आया..
उसने आते ही अपने बड़े भाइयों और भाभियों को प्रणाम किया और वहीँ रखें एक सोफे पर पसर गया..।
उसे देखते ही रूपा की आंखे खुली की खुली रह गयी… वो कभी धनुष तो कभी विराट को देखने लगी..
क्रमशः

Bahut hi Masti me Pura Parvati khana kha rahaya hai Usi samay Virat sa ka aagaman hya,Mast part.
Excellent part 👏🏻 par Dhanush ki band bajnewali hai😃
मजा आ गया कसम से
Best part
Amazing story. ….. Please post next episode soon
Ab rupa ko kya batayen sab bachhe ki kya khichdi pak rahi hai unke dil me aur shaurya uske dil ka haal toh behaal hai.dhanush bilkul samar ki tarah hai.. tabhi toh London ki ticket tak usne karwa rakhi thi.maza aa gaya.shauray toh London ke liye nikal gaya par virat ke achanak aa jane se dhanush fansh gaya.i hope ki uske paas koi thos bahana maujood ho bachne ke liye kyunki jawab toh use hi dena hai.kali ka haal bhi bura hai.aasan nahi hoga rajkumar ke liye kali ka sath pana uske pita ke rahte.vasuki aasani se nahi manega.dekhte hain ye pyar dono ko kaise aur kab ek sath milata hai.super part mam .next part ka intzar rahega 👌👌👌👌👌👏👏👏🥰🥰🥰🥰
बेचारे बच्चे
जिसकी कंधे पर बंदूक़ रखकर रूपा को अपनी बातो में उलझाया था वो तो साक्षात सामने आकर बैठ गया … अब क्या जबाव देंगे ये बच्चे …
रूपा के स्वभाव से सभी वाक़िफ़ है तभी बाँसुरी जो बात करवानी हो उसी दूसरे ही रूप से कहती है..
जब शौर्य कली के सामने पहुँचेगा क्या रियेक्शन होगा उसका..
इंतजार है अगले भाग का
Lovely story
Mam jivansathi k new part b dijiye
Maza aa jata hai padhne me..kitni light aur loving story hai ..lagta hai bass padhte raho..bahut badhiya aparna ji