
अपराजिता -147
“इस केस में एक और इंसान भी अपरोक्ष रूप से जुड़ा हुआ था और वह है दीपक, यह औरत और कोई नहीं दीपक की पत्नी है..।
अब इन महोदया की कहानी मैं शुरू से बताता हूँ !
ये दीपक की दूसरी पत्नी है जिनसे दीपक बाबू ने कब शादी की कैसे की इस बारे में कोई कुछ नहीं जानता..
दीपक दूर्वागंज में रहने वाला वहां के ठाकुर चंद्रभान का ख़ास आदमी माना जाता था..
असल में चंद्रभान ने कभी दीपक को कोई बहुत तवज्जो नहीं दी थी, लेकिन खुद आगे बढ़ बढ़ कर वो उसका खास बनने की कोशिश करता रहा..
दीपक ने धीरे धीरे चंद्रभान का काफी काम संभाल लिया था, यहाँ तक की उसके रुपये पैसो की साज संभाल भी वही देखा करता.. उसने छोटी मोटी धांधली तो बहुत पहले ही करनी शुरू कर दी थी, और ऐसे ही छोटा मोटा कांड करते हुए उसने खूब पैसे बना लिए..।
उसका सपना था उसका भाई डॉक्टर बन जाये.. छोटे भाई का दिमाग तेज़ था, लेकिन पढाई लिखाई में उसके दीदे नहीं लगते थे..।
थोड़ा उसकी प्रतिभा और थोड़े पैसों की बदौलत दीपक ने अपने भाई पंकज को मेडिकल में दाखिला दिलवा दिया…
बस अपने भाई के कारण दीपक का बीच बीच में शहर का दौरा लगता रहता था..।
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यहाँ युनिवर्सिटी में दो अलग अलग छात्र नेताओ के बीच अपनी गुटबाजी चला करती थी, जिनमे से एक था अखंड सिंह परिहार का गैंग और दूसरा था धीरेन्द्र प्रजापति का गैंग..।
धीरेन्द्र प्रजापति की बहन भी उसी यूनिवर्सिटी की छात्रा थी..।
उसे लगता था वो बहुत सुंदर है, पैसेवाली है तो वो कुछ भी कर सकती है।
दूसरी तरफ उसे अपने भाई के पद का गुरुर भी था.. .
धीरेन्द्र की बहन का नाम था मान्या प्रजापति ! ये धीरेन्द्र से छोटी थी और पहले अपने मामा के घर रह कर पढाई किया करती थी..
जब कॉलेज पढ़ने के लिए ये अपने शहर वापस आयी तो इसका एडमिशन भी धीरेन्द्र ने अपने ही कॉलेज में करवा दिया।
वहां ये खुद को सबसे मशहूर छात्र नेता की बहन मान कर गर्वित थी।
कॉलेज में चार दिन हुए थे कि उसकी टक्कर अखंड से हो गयी..
कॉलेज कैंटीन में इत्तेफाक से हुई भेंट के बाद अखंड तो बिना मान्या पर ध्यान दिए निकल गया, लेकिन वो अखंड को नहीं भूल पायी..
कुछ दिन उसने अखंड से दूर रहने की सोची लेकिन अपनी ही इच्छा शक्ति से वो हार गयी।
अब उसका कॉलेज जाने का उद्देश्य ही अखंड को देखना और किसी बहाने से उससे बात करना हो गया..
वो कॉलेज जाती और किसी ना किसी बहाने से अखंड से बात करने पहुँच जाती, हालाँकि अखंड उस पर ध्यान दिए बिना निकल जाया करता था..
बस यही बात उसे चुभने लगी।
धीरेन्द्र भी घर से सम्पन्न था, उसके यहाँ कोई कमी नहीं थी… मान्या की आज तक हर ज़िद पूरी होती आयी थी, इसलिते एकदम से अखंड का उसे नजरअंदाज करना उसे पसंद नहीं आ रहा था..।
वो अपनी तरफ से भरसक प्रयास कर रही थी कि अखंड उससे दोस्ती कर ले लेकिन अखंड मान्या की तरफ ध्यान ही नहीं देता था.।
आखिर एक दिन मान्या ने अखंड से अपने दिल की बात कह दी..
लेकिन उस सब में एक गड़बड हो गयी..
उस समय यूनिवर्सिटी में यूथ फेस्ट की तैयारियां चल रही थी..
मान्या जब अखंड से मिलने के लिए आयी उस वक्त उसे अखंड को अकेला बैठे देख कर लगा कि वो अकेला ही स्टेज पर मौजूद है, वो उसके पास बैठ गयी….
और…
[ ” अखंड हम तुमसे कुछ कहना चाह्ते है !”
“हमसे.. ? क्या ?”
“हम तुम्हें कैसे लगते हैं ? सच सच बोलना ?”
“देखो मान्या, हम इन सब बातों में उलझना नहीं चाह्ते, पहले ही धीरेन्द्र के साथ हमारा छत्तीस का आंकड़ा है। अगर उसे मालूम चला कि तुम हमारे साथ यहाँ बैठी हो तो वो तुम पर भी नाराज़ होगा और हम पर भी !”
“भैया के बारे में मत सोचो.. उन्हेँ हम संभाल लेंगे.. वो वैसे भी हमारी कोई बात नहीं टालते !”
“उसे संभालने की बात कहाँ से आ गयी ? हमें बस ऐसा कोई काम नहीं करना कि दुश्मनी और बढ़ जाए, इसलिए तुम जाओ यहाँ से !”
“नहीं… आज तो हम अपने मन की कह कर ही जायेंगे, चाहे कुछ भी हो जाये..
अखंड सिंह परिहार, हम तुमसे प्यार करने लगे है, हमारी दोस्ती कबूल कर लो..
अखंड हम तुमसे शादी करना चाह्ते हैं !
प्लीज़ हमारी बात मान लो.. अगर तुमसे हमारी शादी हो गयी तो तुम्हारे और भैया के बीच की दुश्मनी भी खत्म हो जाएगी.. !”
अखंड आश्चर्य से सामने खड़ी मान्या को देखता रह गया..
“नहीं ये सम्भव नहीं है मान्या.. हमे माफ़ कर दो !”
“अखंड समझने की कोशिश करो.. हम तुमसे वाकई बहुत प्यार करते हैं !”
“लेकिन भैया जी तो नहीं न करते, फिर काहे उनके पीछे पड़ी हैं आप !”
परदे के पीछे कुछ काम करता लल्लन पीछे से सामने चला आया..
उस वक्त अखंड स्टेज पर बैठा कुछ काम कर रहा था और पर्दे के पीछे खड़े लल्लन गोलू बाकी काम देख रहे थे…
लल्लन बडी देर से ये सब सुन रहा था, उससे नहीं रहा गया और वो बीच में बोल पड़ा..
“तुम कौन होते हो हमारे बीच में बोलने वाले ? अपने काम से काम रखो !”
“यही तो आपको समझा रहे हैं, अपने काम से काम रखिये ना.. काहे भैया जी के पीछे पड़ी हैं ! वो धीरेन्द्र पहले ही इनको परेशान किये रहता है अब आप और चली आयी !”
“तुम्हे उस सब से क्या लेना देना, अखंड इस लड़के से कहो अभी के अभी जाये यहाँ से !”
“मान्या हम उसे कह देंगे, लेकिन तुम भी हमारी बात को समझो !”
“कैसे समझे, हम प्यार करने लगे हैं तुमसे.. हर वक्त तुम्हारे साथ रहना चाहते हैं.. तुमसे शादी करना चाहते हैं..
अखंड हमसे शादी कर लो.. बदले में हमारे भाई का पूरा राजनैतिक कैरियर तुम्हारा !
वो तुम्हारा चेला बन कर रहेगा, कुर्सी पर हमेशा तुम ही बैठोगे… !!
“मान्या तुम हमें गलत समझ रही हो.. कुर्सी के लालच में हम तुमसे शादी कर ले ये कैसा प्रस्ताव है ?
तुमसे शादी के बदले अगर कुर्सी मिले तो हमें वो कुर्सी नहीं चाहिए, हम अपने बलबूते आज तक जीतते आये हैं। और हमें पूरा यक़ीन है की आगे भी हमारा राजनैतिक कैरियर शानदार तरीके से आगे बढ़ता चला जायेगा।
हमें तुम्हारे नाम की बैसाखियों की ज़रूरत नहीं है..। हरगिज़ नहीं ! हम में इतनी क्षमता है कि हम अपने बलबूते अपना करियर बना सकते हैं उसके लिए किसी लड़की की मदद की ज़रूरत नहीं है..।”
अखंड ने जरा खीझ कर कहा,और मान्या बोल पड़ी..
“खुद पर बहुत घमंड है तुम्हे अखंड !”
और वहीँ खड़े लल्लन ने उसी बात पर मान्या का मजाक उड़ा दिया..
“आपको शादी की ज्यादा ही तलब लगी है, तो हम भी खड़े हैं लाइन में.. हम पर भी नजर डाल लीजिये !”
लल्लन ने मजाक में कहा और मान्या उसे घूर कर देखने लगी, तभी गोलू भी चहकने लगा..
“लेकिन लल्लन एक ठो बात बताओ.. अगर तुम शादी मान्या से कर लोगे तो फिर ससुर तुम रहोगे किसकी टीम में..?
काहे की भैया जी को तुम छोड़ नहीं सकते और धीरू तुम्हारा साला बन जायेगा तो उसे तुमसे छोड़ा नहीं जायेगा !”
“हाँ यार गोलू बात तो पते की बोल गए बे तुम.. मान्या जी एक बात स्पष्ट करें दे रहे हैं हम… शादी भले आपसे कर ले और धीरू हमारा साला भले बन जाये, लेकिन हम रहेंगे अखंड भैया की टीम में ही, काहे की हम भी ना जरा ईमानदार किस्म के हैं और धिरुआ साला महा कमीना है…।
छप्पन कमीने मरे होंगे तब जाकर ये पैदा हुआ है.. ! नहीं नहीं आपको गाली नहीं दे रहे है… ज़रूरी थोड़े ना है कि रावण के घर हमेशा शूर्पणखा ही पैदा हो ! काहे गोलू… सही बोले की नहीं !”
“अरे गज्जब ही बोले दिए लल्लन !”
उन दोनों की बातें सुन कर मान्या का खून खौलने लगा, था, अखंड ने उन दोनों को आँख दिखा कर चुप रहने का इशारा किया और तभी अपनी सहेलियों के साथ स्टेज की साजसज्जा जांचने रेशम चली आयी..
रेशम को आता देख अखंड के चेहरे के भाव ही बदल गए..
रेशम ने आते ही गोलू की तरफ देख तैयारी के बारे में पूछना शुरू कर दिया, और अखंड के साथ साथ गोलू और लल्लन भी बडी सभ्यता से उससे बात करने लगे…
वो कुछ जरुरी बातें नोट कर के वहाँ से चली गयी….
मान्या आश्चर्य से सबको देख रही थी…
तभी उसके कान के पास आकर लल्लन बोल पड़ा..
“ये हमारी होने वाली भाभी जी है.. अखंड भैया शादी करेंगे तो इन्ही से करेंगे, वरना किसी से नहीं करेंगे.. समझ गयीं आप..
वो इज्जतदार डॉक्टर है, और उनकी नजर में अखंड भैया की भी बहुत शानदार इमेज है.. !”
“बेवकूफ लड़को.. अगर वो डॉक्टर है तो तुम्हारे अखंड भैया से शादी काहे करेगी ?”
“जाहे के लिए आप करना चाहती है.. सोने की लंका की मालकिन तो आप भी है ना… पर अखंड भैया की कुटिया में रोटियां बेलना चाह रही है ना.. फिर, वो डाक्टरनी होकर काहे नहीं करेगी..?
हमारे अखंड भैया का नाम ही इतना है कि कोई भी लड़की उनको मना नहीं कर सकती.. जाइये आप कहीं और टिराइ कीजिये !”
“ज़ाहिल लड़के, बात करने की तमीज नहीं है तुमको !”
“आपको और आपके भाई को जितनी तमीज है उससे ज्यादा ही हमारे पास.. बाक़ी रही बात दिखाने की तो आप जैसे इज्जतदार लोगों को दिखाने के लिए ना तमीज है हमारे पास ना इज्जत ! जाइये निकलिए यहाँ से !”
मान्या लल्लन को घूरती खड़ी थी और लल्लन ने मजाक में आगे बढ़ कर मान्या को धक्का दे दिया..
मान्या इस धक्के के लिए तैयार नहीं थी, वो लड़खड़ा कर सम्भल गयी लेकिन उसकी आँखों में खून उतर आया..
आज तक कभी उसके बिना मन के उसके घर पर कोई काम नहीं होता था.. आज एकदम से उसकी बात का ऐसे काट दिया जाना उसे असहनीय लगने लगा..
लल्लन के धक्का देते ही अखंड थोड़ा आगे बढ़ा ज़रूर लेकिन उसने मान्या को पकड़ कर संभालने की जगह बस खड़े ही खड़े उसे सम्भलने को बोल दिया..
“आराम से.. कहीं लग ना जाये.. मान्या लल्लन की बातों पर ध्यान मत दो… ये लोग हमारी कुछ ज्यादा ही इज्जत करते हैं और इसीलिए किसी को भी कुछ भी कह जाते हैं.. !”
“तुम्हारी इज्जत करते है इसका मतलब किसी की भी बेइज्जती कर जायेंगे क्या ? तुम्हे भी कम घमंड नहीं है अखंड सिंह परिहार ! तुम्हारा घमंड भी टूटना ज़रूरी है !”
“काहे नहीं करेंगे घमंड… घमंड करने वाली बात भी तो है उनमे !”
“वो तो अब हम देख लेंगे… तुम सब को !”
“देख लीजियेगा… शाम को आ जाइये बॉयज हॉस्टल में… हम अपना कमरा नंबर भी बताये देते हैं !”
लल्लन की बात पर गुस्से में मान्या ने उस पर हाथ उठा दिया… मान्या के हाथ का थप्पड़ खा कर लल्लन ने उसे घूर कर देखा और वापस बोलने लगा..
“बस इतनी ही औकात है तुम दोनों भाई बहन की।
किसी के विचार, किसी की इच्छा अनिच्छा से तुम्हे कोई लेना देना नहीं..।
अरे अगर भैया जी तुमसे प्यार नहीं करते है तो काहे उन्हेँ पर्लोभन दे रही हो.. हम पर गुस्सा काहे निकाल रही..?
जाओ अपने घर वालो से बोल दो तुम्हारी शादी करवा दे..।
ये जो मन भटक रहा है ना दुरुस्त जो जायेगा !”
मान्या ने लल्लन को देखा और गुस्से में पलट कर पांव पटकती वहाँ से निकल गयी.. !]
लेकिन मान्या कोई साधारण लड़की नहीं थी.. इस बात के बाद मन ही मन उसने बैर पाल लिया…
उसे अखंड अच्छा तो लगता था, लेकिन अखंड और उसके दोस्तोँ के साथ उसका अनुभव बहुत कड़वा था, और इसलिए मन ही मन उससे बदला लेने की मान्या ने ठान ली..
लल्लन ने ज़रूर मान्या का मजाक उड़ाया था लेकिन अखंड ने उस वक्त भी उसके प्रस्ताव को नकारने के अलावा ऐसी कोई बात नहीं बोली थी जिससे मान्या इतना बैर पालती, लेकिन वो जरा हठी किस्म की थी.. उसने बात अपनी अना पर ले ली…
अब उसके दिमाग में अखंड से बदला लेने का विचार घूमने लगा…
लेकिन वो जानती थी अकेले वो बदला नहीं ले सकती… इसके लिए उसे अपने भाई की ज़रूरत थी..
धीरेन्द्र मान्या को सम्मान देता था, बहुत स्नेह भी करता था लेकिन मान्या सोच में पड़ गयी कि क्या धीरेन्द्र उसका साथ देगा ?
अगर धीरेन्द्र ने भी उसे ये समझाइश दे दी कि इन बातों को भूल कर आगे बढ़ जाये तो फिर वो क्या करेगी..
मान्या खुद में उलझी सी मन ही मन धीरेन्द्र को अपनी बातों में उलझा कर अखंड से बदला लेने की सोचने लगी..
और फिर इसने जो सोचा, उस बात ने सिर्फ अखंड ही नहीं रेशम के जीवन की भी बर्बाद कर दिया..
क्रमशः

अहंकार में डूबी मान्या के एक तरफा प्यार की जिद्द ने ही तो कही अखंड और रेशम के जीवन को बर्बाद नही किया। मतलब दीपक के साथ मिलकर अखंड को इसने ही तो नही फसाया अब तो कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए दोनों भाई, बहन को।
विनाश काले विपरीत बुद्धि ,और दुर्जनो से सज्जनता की आशा करना भी बेकार है लेकिन इतना हठ की किसी का जीवन ही अंधकार में धकेल दे।
उम्मीद है मान्या को भी पेश करके कड़ी सजा दी जाएगी
ओह..तो धीरेन्द्र की बहन भी मिली हुई थी इस षड्यंत्र मे, मतलब दोनों भाई बहन एक से है। बहुत गंदा खेल गए ये दोनों भाई बहन। मान्या ज़िद और बदले की आग मे इतनी जल रही थी कि उसे इतना समझ नहीं आया कि रेशम भी तुम्हारी तरह एक लड़की है, अपनी जलन भाव मे तुमने कितने लोगों कि ज़िन्दगी खराब कर दी, भुगतो अब होने किए की सज़ा।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻.।
Fabulous part 👌👌🙏🙏
Is जाहिल गंवार किस्म की लड़की ने अपने हठ में आकर एक दो नहीं कई जिंदगियां तबाह कर दी और अब दीपक की कीप बनकर रह रही है चोरी छिपे।😡😡😡
सच की सुपर्णखा निकली ये महारानी तो इसने अपना घटियापन एक लड़की पर निकाला और उसे जीवन भर का गम देकर खुद दीपक के साथ छुपी बैठी है पर अब और नहीं 😠😠😠
अब तो इनका भी हिसाब होगा क्यू कि अनीर बाबू ने पहले ही खोजबीन लिया है इस डायन को 🤬🤬🤬🤬
हमको लगा ही था कि ऐसा ही कुछ हुआ होगा।। कमीनेपन में मान्या अपने भाई से दो कदम आगे निकली।।इन दोनों की वजह से अखंड और रेशम की जिंदगी पर तो असर पड़ा ही,गोलू भी मरते मरते बचा,,,ओर लल्लन का आज तक पता नही चल पाया है।।।।।।हमे तो लगता है कि उसके साथ कुछ बहुत बुरा हो गया है।।।।क्योंकि मान्या का उसने कुछ ज्यादा ही मजाक उड़ा दिया था।।।।।
बेहतरीन पार्ट👌👌
ये धीरेंद्र और उसकी बहन ने बहुत ही गंदा खेल खेल कर अखंड और रेशम की जिंदगी बर्बाद कर दी।
कहानी का एक एक सच सामने आ रहा है ये सब अनिर्वान की वजह से हो रहा।
बेहतरीन पार्ट 👌👌👌👌❤️❤️❤️❤️
अरे रावण के घर सुरपंखा ही पैदा हुई है , ये मान्या और धीरू के बच्चे ने मिल कर अखंड की लंका लगा दी है 😤😤😤 बेचारे रेशम और अखंड की जिंदगी बर्बाद कर दी ,हूं ।
अब कहा गई ये लोमड़ी लड़की ??
Nice one.
Fantastic part good job dear
Aparna ji samidha bhi yaha padhna chahate hai please continue kijeye