
अपराजिता -146
अनिर्वान के कहने और अथर्व और मानव के समझाने पर रेशम ने केस को वापस खुलवाने का निर्णय ले लिया और छह साल पुराना वह केस वापस खोलकर जांच बैठा दी गई..
अनिर्वान ने अपनी तरफ से काफी सारी खोजबीन कर रखी थी और इसलिए वह पर्याप्त सबूत के साथ कोर्ट में दाखिल हुआ…
रेशम ने केस वापस खुलवाया था और साथ ही इस बार जांच की अपील की थी, और शक का दायरा धीरेंद्र प्रजापति के नाम पर बैठा था..!
इस बात से धीरेंद्र बौखला गया, उसका राजनीतिक कैरियर अच्छी पकड़ पा चुका था और आगे बढ़ रहा था! फिलहाल उसे सांसद के लिए लड़ने की टिकट मिलने के पूरे आसार थे। और उसके पहले ही यह केस लग गया।
उसका दिमाग खराब हो चुका था और अपने गुस्से को वह पूरी तरह से गीता पर उतार रहा था…
” तुम्हें क्या लगता है, हम कुछ नहीं जानते? अचानक से हमारे नाम से समन कहां से आ गया? हमारे पीठ पीछे तुमने क्या गुल खिलाये हैं, हम सब जानते हैं! इस सब के पीछे तुम ही हो.. !”
” तुम्हारे दिमाग का हम कुछ नहीं कर सकते! तुमसे किसने कहा कि हमने केस रिओपन करवाया है? यह तो जिस लड़की के साथ ज्यादती हुई थी उसके घर परिवार वालों ने उसे समझाया और उसने केस ओपन करवा दिया इसमें हम क्या कर सकते हैं?”
“इतनी भोली तो ना बनो तुम! हम सब जानते हैं कि तुम क्या चाहती हो, और क्या तुम्हारे दिमाग में चल रहा है? शादी को इतना साल बीत जाने के बावजूद तुमने कभी हमें पति का हक नहीं दिया, वह सम्मान नहीं दिया जिसके हम अधिकारी थे! और आज उस लड़की के साथ गुपचुप तरीके से मिलकर इस केस को खुलवा रही हो, जिससे हम सलाखों के पीछे जाए और तुम उस कमीने के साथ शादी कर सको !”
“भगवान की कसम हमने कभी ये नहीं सोचा, लेकिन हम तुम्हे किसी तरह की कोई सफाई भी नहीं देना चाहते हैं.. !
क्योंकि हम अच्छे से जानते हैं तुम्हारे दिमाग में जो है तुम उस बात को सच मानोगे। तुमने आज तक हम पर कभी भरोसा नहीं किया। हमसे शादी करने के बावजूद तुम्हारे दिमाग में यह चलता रहा कि हम शादी के बाद भी अखंड से ही प्रेम करते हैं।
सच कहे तो एक दो बार कोशिश भी की, कि तुम्हें पति का हक दे दे, लेकिन तुम्हारे सड़े हुए दिमाग और तुम्हारे घटिया स्वभाव को देखते हुए हमें लगा कि तुम हमारी जैसी लड़की डिजर्व ही नहीं करते। जरूरी नहीं की हर जोड़ी भगवान तय करके भेजें ।
कई जोड़ियां गलती से भी बन जाती है। जिन्हें औरत मजबूरी में ढोकर निभा भी ले जाती है। लेकिन कभी दिल से इस बात को मान नहीं पाती कि उसकी जोड़ी भगवान ने बनाई है।
हमें भी पूरा यकीन है कि तुम्हारी और हमारी जोड़ी भगवान ने नहीं शैतान ने बनाकर भेजी थी और इसीलिए चल भी नहीं पाई..।
और हम चलाना भी नहीं चाह्ते !”
“बहुत ज़बान चलने लगी है तेरी, बदजात औरत !”
“बदजात हम नहीं तुम हो, हम तो एक रईस खानदान से ताल्लुक रखते हैं, हमारे पिता का शहर में एक नाम था, तुम तो कौन कहाँ के आये कोई नहीं जानता.. पता नहीं किसका खून हो तुम ? आज तुम्हारे माँ बाप भी इस बात पर अफ़सोस करते होंगे की तुम्हे पैदा किया उन्होंने !
शायद इसलिए उन्होंने तुम्हारे बाद दूसरी औलाद पैदा नहीं की.. और ना तुम्हारे पहले !
क्यूंकि उन्हेँ लगा एक ही रावण काफी है, उनकी लंका में आग लगवाने के लिए.. !
अरे सॉरी मैं भूल कैसे गयी, एक बहन भी तो थी तुम्हारी, जाने कहाँ है ?कैसी है ? वैसे उन्हेँ कभी देखा नहीं हमने, मतलब तुम्हारे स्वभाव के कारण तुमसे तुम्हारे सगे रिश्तेदार भी संबंध नहीं रखना चाह्ते.. असल बात ये है !”
गुस्से में धीरेन्द्र आगे बढ़ा और उसका हाथ उठ गया, जिसे गीता ने पकड़ लिया..
“हमें मारने की सोचना भी मत, क्यूंकि ये जो तुम्हारी ओछी हरकते हैं ना, ये सब अब तुम्हारे ही ख़िलाफ़ खड़ी होंगी… एक एक सबूत तुम्हारे खिलाफ चीख चीख कर कोर्ट में गवाही देगा !”
“तुम हमारे ख़िलाफ़ कितने भी सबूत जमा कर लो, हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती.. हम अपना नॉमिनेशन भरने की डेट से पहले वहाँ से छूट कर बाहर आ जायेंगे !”
गुस्से में चीखता चिल्लाता धीरेन्द्र वहाँ रखें सामान को इधर उधर फेंकता रहा और गीता दोनों बच्चो के साथ अपने कमरे में चली गयी….
अगले दिन ही कोर्ट की तारिख थी..
सभी लोग पहुँच चुके थे, आखिर थक हार कर धीरेन्द्र भी पहुँच ही गया..
कोर्ट की प्रक्रिया शुरू हुई, और रेशम की तरफ से वकील ने वापस से सारी बातों को रखना शुरू किया..
अखंड के साथ यज्ञ आया हुआ था, वो ठीक अखंड के बगल में बैठा था, और उसे पल भर के लिए भी नहीं छोड़ना चाहता था..
रेशम के साथ अथर्व और मानव दोनो आये हुए थे..
अथर्व ने रेशम का हाथ थाम रखा था..
रेशम मन ही मन खुद को समझाती बैठी थी कि उससे चाहे कितने भी फ़िज़ूल सवाल पूछा लिए जाए वो अपना आपा नहीं खोयेगी और बिलकुल सहज बनी रहेगी….
धीरेन्द्र को कटघरे में बुलाया गया, और उसके बाद एक एक कर सबूत पेश किये जाने लगे..
पंकज के दो सबसे खास दोस्तोँ को बुलाया गया जिन्होंने सारी बातें सच सच बता दी..
अखंड और रेशम के फोटो को मॉर्फ़ करने से लेकर रेशम की फोटो को सोशल मिडिया में पोस्ट करने तक की सारी बातों के बीच रेशम की उस सहेली का उल्लेख भी हुआ जिसने ये सारी बातें सुन ली थी, और जो रेशम को ये सब बताने जा रही थी और उसका रोड एक्सीडेंट हो गया था जहां वो मृत पायी गयी..
उस लड़की की सारी जानकारी के साथ ही अनिर्वान उस वाहन चालक को भी पकड़ लाया था..
पहले एक बार ये केस बर्खास्त हो चुका था, इस बात पर की ये महज एक रोड एक्सीडेंट था, लेकिन आज पंकज के दोस्तों ने स्वीकार लिया कि वो लड़की सारी बात सुन चुकी है। ये पंकज जान गया था और पंकज ने तुरंत ही धीरेन्द्र को फ़ोन कर दिया था…..।
धीरेन्द्र की फैक्ट्री का ही ट्रक ड्राइवर था, जिसने उस वक्त धीरेन्द के एक फ़ोन पर तुरंत गाडी निकाली और चला आया..
उस ट्रक ड्राइवर को भी अभी गवाही के लिए बुलाया गया और इस बार उसने अपनी गलती मान ली और इसके साथ ही ये भी बता दिया कि धीरेन्द्र भैया ने ही कॉल कर के कहा था, कि जिस लड़की का फोटो भेज रहे हैं उसे उड़ाना है.. ..
उस ड्राइवर ने ये भी बताया की धीरेन्द्र ने पहले किसी और ड्राइवर को फ़ोन लगाया था, लेकिन वो यूनिवर्सिटी से उस वक्त काफी दूर था, इसलिए फिर इसको लगाया गया..
ये वहीँ कैंटीन का सामान वहाँ उतार कर वापस लौट रहा था, इसलिए उस समय वही था और इसके लिए ये काम आसान हो गया…
इस काम के बदले धीरेन्द्र ने उसे खूब सारे पैसे दिए थे। और शहर से बाहर भगा दिया था..।
उसे भी दूसरी जगह वापस ट्रक चलाने का ही काम मिल गया था, और इसलिए वो इस घटना के बाद शहर छोड़ कर चला गया था….
इस की गवाही के बाद धीरेन्द्र पर हत्या के अपराध की साजिश का आरोप सही पाया गया….
इन आरोपों के बाद धीरेन्द्र पर अगला आरोप अखंड के नाम का दुरुपयोग कर रेशम को डराने का लगा..
इस मामले में बहस शुरू हुई और एक के बाद एक गवाह प्रस्तुत किये जाने लगे..
गोलू को बुलाया गया जहाँ उसने बताया कि, वो उस दिन अखंड के साथ ही था, लेकिन किसी के फ़ोन आने के बाद अखंड मेडिकल स्टोर रूम की तरफ बढ़ गया, वो और लल्लन वहीँ खड़े रह गए..।
तभी उसे किसी पहचान के लड़के ने बहुत ज़रूरी काम है, कह कर दूसरी तरफ कहीं बुला लिया और वहीँ से निकलते समय धीरेन्द्र के गुंडों की आपसी बात उसके कान में पड़ी और उसे पता चल गया कि अखंड को फंसाने के लिए बुलाया जा रहा है..
गोलू की गवाही के बाद इसी तरह की दो चार गवाहियों के बाद गीता को बुलाया गया..।
गीता के सामने तो शादी के बाद धीरेन्द्र ने वैसे भी सारी बातें स्वीकार ली थी, इसलिए गीता ने वो सारी बातें वहां बता दी..
गीता को गवाह के तौर पर सामने देख कर धीरेन्द्र आश्चर्य चकित रह गया.. वो वहीँ उस पर गलत सलत आरोप लगाने लगा, लेकिन वकील के चुप करवाने पर उसे चुप होना पड़ गया..।
इन सब के बोलने के बाद वकील ने अनिर्वान को कटघरे में बुला लिया..
अनिर्वान इस सारे केस का मुख्य जाँच अधिकारी था इसलिए उसे गवाह के तौर पर बुलवाया गया था..
और फिर अनिर्वान ने बोलना शुरू किया..
“अब तक की सारी बातें यहाँ कहीं जा चुकी है… अखंड सिंह परिहार के साथ जो हुआ, वह यहां हर किसी को मालूम है। अखंड ने इतने साल तक गुमनामी की जिंदगी जी, अपने करियर को खत्म कर दिया। और सब कुछ छोड़कर एक अलग ही दुनिया में चला गया।
क्योंकि उसके नाम को खराब करने की कोशिश की गई थी। इसके पीछे धीरेंद्र प्रजापति का हाथ था। क्योंकि शुरू से लोगों को यह लगता आया कि धीरेंद्र प्रजापति कहीं ना कहीं अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए अखंड को किसी भी तरीके से पछाड़ नहीं पा रहा था, और अखंड से आगे बढ़ने का उसके पास यही एक रास्ता था कि वह अखंड के नाम को इतनी बुरी तरह से खराब कर दे कि अखंड खुद आगे बढ़ाने की जगह पीछे लौट जाए…।
धीरेंद्र ने छोटी-छोटी ढेर सारी चालें चलना शुरू किया और अखंड सिंह परिहार के चारों तरफ धीरे-धीरे एक जाल बनाता चला गया। अखंड को खुद समझ में नहीं आया कि वह कब इस जाल में अनजाने में उलझता चला गया। और अकेला अखंड ही नहीं उसके साथ-साथ डॉक्टर रेशम की जिंदगी भी धीरेंद्र प्रजापति के बुने जाल में फंसती चली गई।
लेकिन धीरेंद्र प्रजापति के अलावा उस पूरी यूनिवर्सिटी में एक और ऐसा इंसान भी था जो अखंड से एक किसी बात का बदला लेना चाहता था, और उसने धीरेंद्र प्रजापति का इसमें भरपूर साथ दिया..।
वह इंसान इतना शातिर था कि वह कभी कहीं किसी के सामने ही नहीं आया, उसने धीरेंद्र प्रजापति के कंधे पर रखकर बंदूक चलाई और बस एक निशाने में अखंड को चित कर दिया ।
लेकिन इतनी चालाकी और सफाई से गुनाह करने वाला गुनहगार यह सोचता जरूर है कि वह किसी की नजर में नहीं आया, लेकिन उससे भी कोई ना कोई ऐसी छोटी सी चूक हो ही जाती है कि वह कभी ना कभी पकड़ा जाता है।
कहा जाता है भगवान के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं। बस ऐसा ही कुछ इस केस में भी हुआ।
जब इस केस पर काम शुरू किया गया था, उस वक्त मुझे कई ऐसे सबूत मिलने लगे थे जिससे मैं असली गुनहगार को पकड़ सकता था। लेकिन उस वक्त अखंड सिंह परिहार की तरफ से केस लड़ने वाले वकील साहब को सिर्फ एक बात की जल्दी थी कि किसी तरह अखंड को बेगुनाह साबित कर दिया जाए।
अखंड के बेगुनाह साबित होते ही केस खत्म मान लिया गया ।
जबकि मैं चाहता था कि असली गुनहगार जेल के अंदर जाए, लेकिन वह नहीं हो पाया। मुझे भी ऊपर से दबाव डालकर इस केस से हटवा दिया गया।
मेरा तबादला करवा दिया गया। लेकिन मेरे दिमाग से यह केस कभी नहीं गया, और मैं धीरे-धीरे इस केस पर काम करता रहा ।
इत्तेफाक से अभी कुछ समय पहले मेरी पोस्टिंग वापस इस क्षेत्र में हो गई। और इसे क्या कहा जाए कि मेरी मुलाकात अखंड सिंह परिहार से हो गई। यह एक और बड़ा इत्तेफाक था कि डॉक्टर रेशम भी आसपास के गांव में ही मौजूद थी। इन लोगों को देखते ही मेरे दिमाग में इस पुराने केस की यादे ताजा हो गई, और मैंने जितने भी सबूत ढूंढ कर संभाल कर रखे थे, उन्हें वापस इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
उस वक्त मैंने अपने तरीके से जितनी भी जांच करवाई थी, उससे मुझे इतना समझ में आ गया था कि रेशम के साथ उस वक्त स्टोर रूम में अकेला धीरेंद्र प्रजापति नहीं बल्कि कोई और भी मौजूद था।
यह दो लोग थे जो वहां थे। उनमें से एक जो रेशम के साथ छेड़छाड़ करने में मशगूल था ,जैसे उसे छूना या कंधे से पड़कर इधर-उधर हिलाना डुलाना और दूसरा इंसान सिर्फ अखंड सिंह परिहार की आवाज निकाल रहा था।
यह बातें स्पष्ट होते ही मैं धीरेंद्र की आवाज और अखंड की आवाज की रिकॉर्डिंग को वॉइस एक्सपर्ट के पास लेकर गया और उससे जानना चाहा कि क्या यह दोनों लोग एक दूसरे की जैसी आवाज निकाल सकते हैं?
तब वॉइस एक्सपर्ट ने कुछ वॉइस माड्यूलेशन एप्स के बारे में मुझे बताया और यह समझाया कि मोबाइल में इन एप्स की सहायता से आवाज़ बदली जा सकती है।
उसने मुझे स्पष्ट तौर पर कहा कि धीरेंद्र और अखंड की आवाजे आपस में नहीं मिलती।
हां अगर इन दोनों में से कोई एक वॉइस ओवर आर्टिस्ट हो, तब वह अपनी आवाज को बदलकर दूसरे की आवाज निकाल सकता है..।
वहां से मेरे दिमाग में यह बात स्पष्ट हो गई कि यह जरूरी नहीं है कि धीरेंद्र ने अखंड की आवाज निकाली हो या उस दूसरे इंसान ने ऐसा कुछ किया हो। यह भी संभव है कि वॉइस माड्यूलेशन ऐप की सहायता से या उस तरह के किसी माइक की सहायता से वहां मौजूद वह इंसान अखंड सिंह परिहार की आवाज निकल रहा हो। और तब मुझे समझ में आया कि शायद वहां एक ही इंसान था, धीरेंद्र प्रजापति भी वहां बाद में पहुंचा था…
रेशम के शरीर पर, उसकी उंगलियों में मौजूद, बाल, त्वचा के ट्रेस की जाँच से ये स्पष्ट हो गया कि रेशम के साथ बदतमीजी करने वाला कोई लड़का नहीं बल्कि एक लड़की थी।
मैं उस लड़की की तलाश में था और आखिर मैंने उस लड़की को ढूंढ लिया…
इस केस में एक और इंसान भी अब परोक्ष रूप से जुड़ा हुआ था और वह है दीपक, यह औरत और कोई नहीं दीपक की पत्नी है..।
क्रमशः..

Pap ka ghara phutta hi hai,Ab pata chal gya ki kon Asli doshi hai,pata chala ki Dipak or uski patni Don hi apradhi hai.Nice n Very good part.
कहते हैं पाप का घड़ा आज नहीं तो कल भरत ही है ,धीरेंद्र प्रजापति के पाप का घड़ा भी भर ही गया आज।
रेशम को न्याय और अखण्ड को इंसाफ मिलकर ही रहेगा इन सबमे अनिर्वान की भूमिका बहुत बहुत बहुत महत्वपूर्ण है काश अधिकांश पुलिस अधिकारी अनिर्वान के समकक्ष ही होते तो भारतीय न्याय व्यवस्था इतनी लाचार नहीं हो पाती।
खैर कहानी अपने सुखद अंत की तरफ बद्व रही है तो ऐसे में प्रत्येक पात्र के साथही न्याय होने की अपेक्षा रहेगा और जिसमें आप भली भांति दक्ष हैं।
एबढिया है रेशम की कहानी में रेशम खरीदने का विज्ञापन आ रहा .. 👌👌मज़ाक कर रही ,आगे बढ़ती हूँ पिछड़ गई हूँ न
देर से ही सहीअनिर्वान को धीरेन्द्र के खिलाफ ठोस सबूत मिल गए और अब धीरेन्द्र अपने बुरे कर्मो की सज़ा भुगतेगा।धीरेन्द्र ने बस सता के लिए कितने लोगों की ज़िन्दगी की बर्वाद कर दी, पर कहते हैना सो दिन झूठ के एक दिन सांच का,बस वही एक दिन झूठ का पर्दा फाश करने किए बहुत है। आगे देखते है और क्या क्या खुलासे होते है….।
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻
सारे राज अब खुलकर सामने आ गए हैं बिचारे अखण्ड की कोई गलती न होते हुए भी उसने अपना जीवन होम कर लिया ग्लानि में पर सच को कोई नहीं छुपा सकता वो एक न एक दिन सामने जरूर आ कर रहता है
Beautiful part 🥰🥰♥️🥰 ye dhiru ki bahan to schi ki shurpnkha nikli
Khani may nya mod.kuch Amir log sochte h hum kisi ka pyar khrid lenge.pr nhi kuch Amir Akhand singh Parihar bhi hote hjo usulo pr chalte h.
Oh god deepak ki patni….?
Kya suspense tha… Too good
🥰😍🥰🥰🥰🥰🥰🥰
Very nice part
छोटी छोटी कड़ियाँ जुड़ती चली गई आखिर अनिर्वान ने केस को सुलझा ही लिया 👌👌