
जीवनसाथी -3 भाग -94
वैसे भी यहाँ पहुँचने वाले मेहमानो को अब तक नहीं पता था कि हमने उन्हेँ किस लिए बुलवाया था.. इसलिये सोचा पहले प्रियदर्शिनी से एक बार बात कर लेते है..
लेकिन जब हम प्रियदर्शिनी के कमरे में पहुंचे तब वहां हमने जो सुना….
हमारे मन में ये बात ज़रूर चलने लगी थी कि हमें प्रियदर्शिनी से माफ़ी मांग लेनी चाहिए, और इसीलिए हम उसके कमरे में गए थे, लेकिन वहाँ जो सुना.. !”
रूपा पल भर के लिए खामोश हो गयी, प्रियदर्शिनी के माथे पर पसीने की बूँदे छलक आयी..
“आपने कुछ सुना ?” उसने रूपा से पूछा और रूपा के चेहरे पर व्यंग भरी मुस्कान चली आयी..
“कुछ नहीं, बहुत कुछ सुना है राजकुमारी प्रियदर्शिनी जी…. !” रूपा बोल पड़ी..
और फिर रूपा ने बोलना शुरू किया..
“प्रियदर्शिनी और उसकी माँ गीता बातें कर रहे थे.. और हम सब कुछ बाहर खड़े खड़े सुनते रहे और हमारे पैरों तले ज़मीन ही खिसक गयी.. !
आइये हम आप सब को वो रिकॉर्डिंग ही सुना देते हैं, हालाँकि शुरुवाती कुछ बातें हम रिकॉर्ड नहीं कर पाए, लेकिन हम वहां खड़े क्या करें क्या नहीं ये सोच पाते उसके पहले हमारे पीछे खड़े दो हाथों ने अपने मोबाइल का वॉइस रिकॉर्डर शुरू कर के आगे बढ़ा दिया..
आप लोग भी सुन लीजिये..
प्रियदर्शिनी और उसकी माँ.. मतलब गीता की बातें…
[ ” बस आज ये सगाई हो जाये और महीने भर के अंदर शादी, उसके बाद तो तू इस एम्पायर कि रानी हो जाएगी, और फिर बिना किसी रोक टोक के हम इस राजमहल के ख़ज़ाने से अपनी तिजोरी भरेंगे..!”
“अरे लेकिन मुझे उस लड़के पर भरोसा नहीं है.. पता नहीं ऐसा लगता है, ये शौर्य कहीं सगाई के पहले पलट ना जाये !”
“राजपरिवार के लोग हैं ये, इनके लिए इनकी ज़बान से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता..।
लड़का पलट भी गया तो रूपा का गला तो मेरे हाथ में है ना, उसे मैं ऐसा मरोड़ूँगी कि तड़प कर हमारे पैरो में गिर कर भीख मांगेगी कि अपनी लड़की की शादी हमारे बेटे से करवा दो !”
“लेकिन शौर्य तो उस बांसुरी का बेटा है ना ?”
“उसकी चलती ही कहाँ है? ये घमंडी रूपा अपने सामने किसी कि चलने ही कहाँ देती है.. लड़का भले ही बांसुरी का है, लेकिन उसकी शादी का निर्णय लेने वाली तो रूपा ही है..।
ये औरत अपने रुतबे और शान के चक्कर में इस कदर घमंड में डूबी है कि उसे कुछ समझ नहीं आता कि क्या सही या क्या गलत.. ?
तभी तो दुबारा भी हमारे ही पांव पकड़ने चली आयी !”
गीता ज़ोर से हंस पड़ी..
“लेकिन मुझे एक बात समझ नहीं आती, कि वो इस कदर आपके पीछे क्यों पड़ी थी.. क्या मैं इतनी सुंदर हूँ ?”
बडी अदा से प्रियदर्शिनी ने कहा
“बात खूबसूरती कि नहीं है, वैसे तुम बुरी तो बिलकुल नहीं हो, खूबसूरत दिखती हो, चमचमाता गोरा रंग है। और तुम्हारी इस खूबसूरती के साथ तुम्हारी फ़र्ज़ी डिग्रियां भी तो टांग रखी है हम लोगो ने.. हालाँकि इन सब से कहीं ज्यादा उस मूर्ख औरत को हमारे परिवार का नाम और रुतबा पसंद आया, जो असल में हमारा है ही नहीं… !”
गीता ने ज़ोर से अट्टहास किया..
“अरे धीमे धीमे बोलो, कहीं किसी ने सुन लिया तो बवाल हो जाना है अभी !”
“कहाँ से कोई सुनेगा, सब तो वहाँ जश्न कि तैयारी में लगे हैं…।
वो घमंडी रानी रूपा तो इतनी खुश है कि उसे कुछ और दिखाई ही नहीं दे रहा है..।
कभी कभी लगता भी है कि ये औरत इतनी अक्ल की अंधी होगी ये पहले मालूम होता तो अब तक तुम इसके एम्पायर पर राज कर रही होती !”
“लेकिन इस सब के लिए मुझे अच्छा बलि का बकरा बनाया आपने ?”
“ओ बेवकूफ लड़की, जिस जिम ट्रेनर के साथ तू भागने वाली थी ना, उसके साथ तेरा भविष्य पूरा चौपट था! मैं तो उस लड़के को देख कर सोच में पड़ गयी थी कि इस काले कलूटे चौपड़ लड़के में तूने क्या देखा जो दस हज़ार कमाने वाले के प्यार में भाग खड़ी हुई..।
एहसान मान मेरा कि मैंने तुझे उस दलदल से निकाल लिया। वरना घर घर जाकर बर्तन घिसने की नौबत थी तेरी !”
“ठीक है ठीक है, अब ये सब बोल कर क्यों गड़े मुर्दे उखाड रहीं है आप..?
मिलर से प्यार हुआ था मुझे, और वो तो किसी को भी हो सकता है।
मानती हूँ उसके पास पैसे नहीं थे लेकिन बेचारा मेहनत तो कर ही रहा था मेरे लिए.. !”
“खाक मेहनत कर रहा था.. मेहनत करता तो तुझे छोड़ कर भाग नहीं जाता..?
बस एक चिट्ठी छोड़ दी, मुंबई जा रहा हूँ अपना भविष्य संवार कर तुम्हे वापस लेने आऊंगा और निकल गया..।
ये मेहनत करना होता है ?.
अगर मैं तुझे अपने साथ नहीं लाती तो उसी सड़ी सी चॉल में आजू बाजू वालो के बर्तन घिस कर पेट पालना पड़ता राजकुमारी प्रियदर्शिनी जी।
बलि का बकरा तू नहीं बनी, बल्कि इस घर के राजकुमार बने हैं।
पहली बार हर्ष और अब शौर्य !
वो तो पहली बार कि सगाई के समय पुलिस आ गयी वरना अब तक हर्ष से शादी होकर हम सब राजमहल में होते.. !”
“हाँ और पुलिस को देख कर आप जो घबराई कि सीधा वहां से भाग कर ही दम लिया !”
प्रियदर्शिनी ज़ोर से हंसने लगी..
“हाँ फिर… अगर पुलिस हमें पहचान लेती तो दिक़्क़त हो जाती ना.. सारी पोल पट्टी खुल जाती !”
“बिलकुल आपका इतनी मेहनत से चुराया नाम मिट्टी में मिल जाता.. अच्छा ये बताइये कि ये नाम और ये पहचान चुराई कहाँ से आपने ?”
“और कहाँ से? सोशल मिडिया से… रानी रूपा के अकाउंट से इतनी जानकारी मिल गयी कि इनकी एक बहुत खास दोस्त थी जिनसे बचपन के बाद से इनका मिलना जुलना नहीं हुआ..
वो दोस्त शादी के बाद से विदेश चली गयी थी, और उसका कोई अता पता इनके पास नहीं था..
एक बार कभी रूपा ने अपनी उस दोस्त के साथ का फोटो अपने सोशल मिडिया अकाउंट पर डाला था..
मैंने इनके अकॉउंट को अच्छे से स्टडी किया और ध्यान से परखने पर रूपा का स्वभाव और बाकी बातें समझ में आ गयी..
बस फिर इनकी उसी दोस्त का फेक अवतार मैंने धारण कर लिया..।
पहले तो सोचा था बस बातों ही बातों में कभी रोना रो दूंगी कि बिज़नेस में घाटा हो गया है, कुछ पैसों की दरकार है। और करोड़ दो करोड़ ऐंठ लुंगी।
लेकिन बातों ही बातों में समझ में आ गया कि रूपा रानी ऐसा कुंआ है जहाँ से ज़िन्दगी भर मीठे पानी की बाल्टी भरी जा सकती है…
जब हमारी बातचीत शुरू हुई तब मालूम चला कि इनका शादी लायक लड़का भी है। और वो गीता के परिवार जैसा नामचीन परिवार ही शादी के लिए चाहती हैं..
बस फिर एक नया आईडिया दिमाग में घूमने लगा !”
“लेकिन आपको ये डर नहीं लगा कि कहीं असली गीता और उसका परिवार आ गया तो ?”
“नहीं… रूपा से गीता बन कर बात करने से पहले मैंने गीता को जानना शुरू किया..
रूपा के पास गीता कि जो दो चार तस्वीरें थी उसके अलावा सोशल मीडिया में गीता के परिवार का कहीं कोई ज़िक्र नहीं था.. ये बात थोड़ा दिमाग को खटकी, कि ऐसा कैसे सम्भव है ? आज के ज़माने में कोई कैसे सोशल मिडिया से अलग रह सकता है..।
तब फिर उसके बारे में पूरी छानबीन शुरू कि मैंने और फिर मुझे मालूम चला कि गीता शादी के बाद विदेश चली गयी थी, और चार महीने बाद ही उसका तलाक हो गया था।
अपने में घुटती गीता फिर वापस लौट कर इण्डिया नहीं आयी और वही उसने अपना काम शुरू कर दिया..।
वो शुरू से अंतर्मुखी ही थी, इसलिए कभी कहीं उसने अपनी तस्वीरें नहीं डाल रखी थी..।
और कुछ सालो बाद वो नहीं रही..।
अपनी शादी के लगभग चार साल बाद वो नहीं रही थी…
बस उसी समय से मैंने गीता का रूप धर लिया..
हम बहुत बहुत समय बाद इण्डिया आते हैं और वक्त कम रहता है, कह कर मैं रूपा से मिलने से बचती रही.. क्यूंकि मुझे सही वक्त का इंतज़ार था..
“हाँ और जब सही वक्त आया तब पुलिस आ गयी.. !” प्रियदर्शिनी खिल्ली उड़ाती सी हंस पड़ी..
गीता ने उसे घूर कर देखा..
“चुप कर मुहंजली, तेरे ही करम थे जो उस दिन हर्ष से सगाई होते होते रह गयी.. वरना आज हम कहाँ से कहाँ होते..
उतना सब स्वांग रचने में भी तो मेरे कितने पैसे बह गए हैं !”
“वो सब तो आप रूपा रानी से निकलवा ही लेंगी !”
“निकलवा चुकी हूँ… कभी तेरे गहनों के नाम पर, कभी कपड़ो के नाम पर… बस अब ये सगाई होकर जल्दी से शादी हो और हम परमानेंटली महल में घुस जाये !”
“मानना पड़ेगा आपको, बहुत निडर है आप।
फिर पुलिस को देख कर क्यों डर गयीं ? हर्ष से सगाई होने से क्यों मना किया ? वो लोग तो तब भी सगाई के लिए तैयार थे !”
“हाँ ये बात तो सच है कि वो लोग तैयार थे, लेकिन सच कहूं तो पुलिस के वहाँ पहुँचते ही मुझे लगा हमारा सच सामने आ गया है। और पुलिस हमें ही पकड़ने आयी है। इसी घबराहट में मेरे पांव वहां जमे रह गए थे।
लेकिन जब पुलिस हर्ष को पकड़ कर ले गयी, तब राहत तो मिली लेकिन जल्दबाजी में वहाँ से भागने के चक्कर में और कुछ कहा ही नहीं गया..।
दिमाग में बस पुलिस ही घूम रही थी, ऐसे में लगा अगर किसी बहाने से यहाँ से निकले नहीं, तो कहीं हम भी ना फंस जाए..।
बस वहां से जल्द से जल्द भागने के लिए यही बहाना मार दिया कि हम ये सगाई तोड़ते हैं..।
लेकिन उसका भी तो फायदा ही मिला..
रूपा इस बात को अपने ईगो पर ले बैठी कि राजपरिवार को हमने ना कह दिया…
जबकि सच्चाई ये थी कि हम लोग भागना चाहते थे वहां से…।
लेकिन उस बात का ये असर हुआ कि इन लोगो को ये लगा कि हम अपने परिवार की शान के कारण हर्ष से सगाई के लिए मना कर रहे.. !
और देखो ना जैसे ही सारा मामला निपटा अपने ईगो को संतुष्ट करने रूपा वापस चली आयी, शौर्य का रिश्ता लेकर !”
गीता हंसने लगी..
“लेकिन मानना पड़ेगा रानी रूपा अंधी है बिलकुल.. लेकिन एक बात बताइये आपको इस बात का डर नहीं लगा कि एक बार सगाई से मना कर देने के बाद कहीं रूपा वापस लौट कर नहीं आयी तो ?
फिर तो आपका सालों से रचा ये षड्यंत्र फेल हो जाना था, पूरी तरह से !”
“उसके लिए मेरे पास बैक अप प्लान था, लेकिन उस प्लान के पहले ही माफ़ी मांगती हुई रूपा चली आयी और मैं चकित रह गयी इस औरत के गंवारपने पर.. !”
दोनों एक साथ खिलखिला कर हंसने लगी..
“बताओ… इन राजपरिवार वालों को ये तक नहीं मालूम कि, ना मैं आपकी बेटी हूँ और ना वो आदमी आपका पति।
तीन अलग लोगों ने मिल कर एक परिवार बनाया और इन महलवासियो की आँखों में धूल झोंकने चले आये और इन मूर्खों को पता तक नहीं चला।
चलिए अब ज्यादा बुराई नहीं करती, अब से एक घंटे बाद ये मेरा परिवार बन जायेगा और मैं इन मूर्खो के घर कि बहु बन जाउंगी.. !”
प्रियदर्शिनी एक बार फिर कहकहा लगा कर हंसने लगी..
“लेकिन मॉम.. मैं इनके घर कितने दिन तक टिक पाऊँगी पता नहीं… !”
“अरे जब तक महल में ऐश करनी है, तब तक रहना.. घूमना फिरना.. और वहाँ रहते हुए अपने सारे गहने जेवर मेरे हवाले कर देना.. ।
उसके बाद अपने पति पर कुछ भी झूठा इल्जाम लगा कर अलग होने की धमकी देने लगना..
उस वक्त हम लोग सीधा कोर्ट कचहरी की धमकी देंगे.. ये लोग अपना नाम तो ख़राब करना नहीं चाहेंगे, चुपचाप जितनी अलुमिनी हम लोग कहेंगे, इन्हे देना ही पड़ेगा..।
बस तीस चालीस करोड़ की गठरी बांध कर हम निकल भागेंगे !”
“वाह.. ज़बरदस्त जीनियस हैं आप..।
कभी कभी तो सच में आपको माँ मान कर पांव पड़ने का दिल करता है..।
जब इतने रूपये मिल जायेंगे तब अपना हिस्सा लेकर मैं भी बॉम्बे निकल जाउंगी.. !”
“उसी कलूटे को तलाशने !” गीता ने अपने माथे पर हाथ मार लिया..
“चल अब एक बार टच अप कर ले, फिर चलते हैं नीचे !”
“हम्म.. !”]
सारी रिकॉर्डिंग वहाँ हॉल में चलती रही और वहां मौजूद सारे लोग साँस रोके एक एक बात सुनते रहे…
प्रियदर्शिनी पसीने से भीग चुकी थी..
रूपा ने मुड़ कर उसकी तरफ देखा और फिर गीता की तरफ देखने लगी..
“अब आप दोनों अपना असली नाम भी बता दीजिये या उसके लिए किसी और को बुलाएँ हम !”
गीता चुपचाप खड़ी थी, प्रियदर्शिनी वहां से भागने की फ़िराक में थी, लेकिन उसका हाथ रूपा ने पकड़ रखा था…
“धनुष… उस एक सरप्राइज को भी ले ही आओ… ! मैं तो बेवकूफ अंधी हूँ लेकिन ये दोनों औरते तो बडी शातिर हैं ना !”
“जी रानी माँ.. अभी लाया.. !”
और धनुष वहाँ से निकल कर बाहर चला गया..
क्रमशः

Bahut sa tana Bana bunti kahani me us nakli Ma beti ki Pol khul gyi,Ab Rupa rani ki aankh khuli,ki Kitna Bari sazis se bach gyi,Very Marblus part
अरे बाप रे ये तो हद्द ही हो गई।इतना गहरा षडयंत्र।अच्छा हुआ शौर्य हर्ष और राजपरिवार तीनों बच गए। वरना ये लुटेरी मां बेटी आ जाती तो महल का नाश कर डालती।
😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
वो रिकार्डिंग के लिए उठे दोनों हाथ धनुष के ही होंगे.. ये ही है समर का उत्तराधिकारी
क्या ज़बरदस्त प्लान बनाया इस गीता ने
Kya ye sach hai matlab Mai kya kahun bahut hi khushi ho rahi hai ki ye sach is tarah sabke samne aaya.jarur ye dhanush ya phir raja sahab ne record kiye hoga.jisne bhi kiya jite raho yaar maza aa gaya.harsh ka rasta toh pahle se hi saf tha ab shaurya bhi bach gaya . super part mam 😘😘😘😘😘👌👌👌👌👌👌
Kya baat hai dhaush salut hai tumko
बाप रे इतना बड़ा षड्यंत्र रचाया इन घटिया औरतों ने सिर्फ पैसे के लालच में 😱😱😱😱😱😱
पर अब तो रूपा रानी ने ही इनकी पोल खोल कर रख दी है अब जेल मे जाकर सपने सजाना शादी के 😠😠😠😠😠😠
Shaurya Bach gaya.
Wah kya jabardast khulasa hua …rani roopa ko waise sach ka Aina hi dikha diya …..
Mast kyu pakda hai un dono ko maza aa gaya