
जीवनसाथी -3 भाग -92
कली सुबह उठ कर कॉलेज के लिए तैयार होने लगी…
उसे अपनी ज़िन्दगी में वापस लौटना था..
रोज़ के अभ्यास से सुबह सैर से लौट कर वासुकी अपनी लाड़ली के कमरे के बाहर पहुँच गया..
दरवाज़ा खोलने से पहले उसने धीमे से दस्तक दी, और दो बार दस्तक देने के बाद उसने धीरे से दरवाज़ा खोल दिया..
उसे लगा पहले की तरह कली अपने बिस्तर पर बेसुध सोई पड़ी होगी, और वो उसे जाकर हमेशा की तरह उठाएगा..।
फिर सारिका उन दोनों के लिए कॉफी लेकर आएगी और वो दोनों साथ बैठ कर कॉफी पिएंगे और उसके बाद कली भाग कर तैयार होने बाथरूम में घुस जाएगी…
और वो उसे जल्दी करने बोल अपने कमरे में तैयार होने चला जायेगा..
लेकिन उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, कली तैयार खड़ी थी…।
खिड़की के पास खड़ी कली बाहर देख रही थी… वो शायद अपने खयालो में इस कदर ग़ुम थी कि उसे दरवाज़े पर आने वाली दस्तक भी सुनाई नहीं पड़ी थी..
वो गुमसुम सी दरवाज़े की तरफ पीठ किये खड़ी थी… उसे वासुकी के कमरे में आने का अहसास ही नहीं हुआ..
“कली.. !” वासुकी ने उसका नाम पुकारा और वो झट से पलट गयी..
“डैडा आप ?” उसने आंखे फाड़ कर अपने डैडा को देखा और आगे बढ़ कर उसके गले से लग गयी..
“गुड मॉर्निंग डैडा !”
“मॉर्निंग कली! आज इतनी जल्दी रेडी हो गयी ?”
कली इस बात पर मुस्कुरा उठी..
“छुट्टियों का हर्ज़ाना पूरा करना है ना, वरना पढाई में पिछड़ जाउंगी। कल डेरिक रीना सब ने कहा कि कॉलेज टाइमिंग बदल गयी है, बस इसलिए आज जल्दी तैयार हो गयी.. !”
उसने अपनी उदासी अपने चेहरे पर नहीं आने दी..
उसी वक्त सारिका उन दोनों के लिए कॉफी लेकर चली आयी..
सारिका के आते ही रोज़ के अभ्यास से कली उसके गले से झूल गयी और अपनी कॉफी का कप उठाये सोफे पर बैठ गयी… वासुकी भी अपनी कप पकड़ कर बैठ गया..
इधर उधर की बातें सुनाते हुए कली कॉफी पीने लगी.. वासुकी के पास उसी वक्त किसी का फ़ोन आ गया और वो फ़ोन पर बात करते हुए कमरे में इधर से उधर टहलने लगा….
सरु कॉफी नहीं पीती थी, वो अपना जूस लिए बैठी कली की बातें सुनती रही..
कली बिलकुल वैसी ही चहकती बैठी बातें कर रही थी, जैसे पहले किया करती थी।
लेकिन उसकी बातो का खोखलापन, उसके अंदर फैला सन्नाटा सिर्फ वही जानती थी..।
बस अब वो ये चाहती थी कि उसके दिल की तकलीफ, उसके अंदर चलता कोलाहल, उसके डैडा को और बाकी घर वालो को परेशान ना करे..
वो सबको यही दिखाना चाहती थी कि वो सामान्य है, और उसे हिंदुस्तान से जुडी यादो और बातों से फर्क नहीं पड़ता..
उसने अपनी कॉफी लगभग आधी ख़त्म कर ली थी, तभी उसके डैडा वापस चले आये..
उन्होंने चहकती हुई कली के बालों पर प्यार से हाथ फेर दिया और अपनी कॉफी उठा कर मुहं से लगा ली..
“उफ़.. ये तो कड़वी है.. चीनी नहीं डाली क्या सारिका ?”..
वासुकी ने सारिका से पूछा और सारिका चौंक कर कली की तरफ देखने लगी..
उसे अचानक कुछ याद आया और उसने अपने माथे पर हाथ मार लिया..
“ओह्ह हाँ.. मैं चीनी डालना भूल गयी थी, रुकिए भैया अभी ले आती हूँ… कली तुझे नहीं पता चला.. ?”
सारिका ने कली से सवाल किया और चीनी लेने के लिए उठ खड़ी हुई..
कली आंखे फाडे सारिका को देखने लगी..
ऊपर से कितना भी चहक ले असल में वो मन से इतनी अस्वस्थ थी कि उसे कॉफी का बेस्वाद कड़वापन भी समझ नहीं आया..
सारिका के सवाल पर कली झेंप गयी…
“मुझे तो बिना चीनी के ही अच्छी लगती है सरु !”
“अच्छा कब से ? हमारी प्रिंसेस तो पहले चीनी के बिना मिली कॉफी को फेंक दिया करती थी, ये कब से नया शौक लगा लिया, बिना चीनी पीने का !”
सारिका ने पूछ लिया और कली कुछ नहीं कह पायी..
उसे वासुकी के सामने सरु का ऐसे पूछताछ करना पसंद नहीं आ रहा था..
वो झेंप गयी थी, वो अपने पिता के सामने किसी सूरत में अपनी ह्रदय की दुर्बलता आने नहीं देना चाहती थी…
“सब भूल जाती हो आप.. कल रीना कह रही थी ना कि मैं थोड़ी फैट हो गयी हूँ… ! बस उसी ने कहा शुगर छोड़ने को !”
“इधर तो आ ज़रा, किस एंगल से तू उसे फ़ैट दिख गयी, मैं भी देखूं ज़रा !”
“माँ को कभी अपने बच्चे में कमी दिखती है क्या? अब जाएं चीनी लेकर आइये, वरना डैडा भी फीकी कड़वी कॉफी पी लेंगे !”
“तुम्हारे डैडा पी चुके.. उन्होंने पहले ही इशारा कर दिया था चीनी नहीं लाने के लिए..।
अरे जब उनकी प्रिंसेस बिना चीनी के पी गयी तो वो कैसे चीनी लेते.. ?”
कली ने देखा वासुकी ने अपनी कप खाली कर ली थी..
“चलो मैं रेडी हो कर आता हूँ, फिर निकलते हैं !”
वासुकी वापस कली का सर सहला कर चला गया….
सारिका भी अपना काम निपटाने चली गयी.. अब दर्श के भी जागने का समय हो चुका था…
कली सारिका के सामने अपने बैग में सामान रखने लगी और उसके कमरे से निकलते ही वापस गुमसुम सी खिड़की पर खड़ी हो गयी..
जाने उसे किसका इंतज़ार था.. वो जानती थी लंदन हिंदुस्तान के इतना पास नहीं था कि शौर्य यूँ ही चला आये.. और अगर आ भी गया तो उसका घर कैसे ढूंढेगा.. ? शौर्य के पास उसके घर का पता नहीं था.. !!
वो देकर भी तो नहीं आयी थी..।
यहाँ आने के बाद उसका पुराना नंबर वापस शुरू हो गया था और वो पुराना नंबर भी उसने शौर्य को नहीं दिया था, आखिर वो फ़ोन करे भी तो किस नंबर पर.. ?
और वो फ़ोन करेगा ही क्यों… ?
ऐसा तो उन दोनों के बीच कोई करार नहीं हुआ था। शौर्य ने उसे किसी तरह का कोई भरोसा नहीं दिया था..।
ये तो उसके खुद के जज्बात थे, जो वो शौर्य के लिए तड़प रही थी, लेकिन सोच कर देखा जाए तो शौर्य ने कब उससे मुहब्बत का इजहार किया था.. ?
कभी नहीं..।
फिर वो क्यों उसका इंतज़ार कर रही थी….?
उसी वक्त उसकी नजर अपने घर के सामने वाली सड़क पर लगे ऊँचे दरख्त के नीचे पड गई।
आश्चर्य से उसकी आंखे बडी हो गयी.. वहाँ शौर्य खड़ा था ..
पलकें भींच कर उसने आँखे साफ कि और वापस आँखे फाडे उसी दिशा में देखने लगी..
***
सुबह हो चुकी थी.. हर्ष और शौर्य तैयार हो रहे थे, धनुष तैयार हो चुका था..।
तीनो साथ बैठे नाश्ता कर रहे थे कि हर्ष ने धनुष से पूछ लिया..
“कब तक पहुँच जायेंगे सब ?”
“दोपहर तक.. तब तक आप दोनों भी थोड़ा बहुत काम निपटा कर आ जाइएगा.. रानी माँ का हुकुम था कि रॉयल सेबेस्टीन होटल को शाम के लिए बुक कर लिया जाये तो वो मैंने करवा दिया है !”
“ओह्ह.. !! ” हर्ष के मुहं से एक ठंडी सी आह निकली..
“क्या माँ साहेब ये सगाई करवा कर ही मानेंगी ?”
“हम्म.. लगता तो यही है !”धनुष और हर्ष की बातों के बीच शौर्य चुप बैठा कुछ सोच रहा था..
“क्या सोचने लगे शौर्य ?”
हर्ष के सवाल पर शौर्य ने उसकी तरफ देखा और धीमे से बोल पड़ा..
“कल मॉम से बात हुई, उन्होंने काफी कुछ समझाया.. कहा कि हो सकता है प्रियदर्शिनी ही मेरा भविष्य हो ! हर किसी को उसकी पसंद का हमराही मिल जाये ऐसा ज़रूरी तो नहीं होता ना ?”
शौर्य के ऐसा बोलने पर हर्ष और धनुष एक दूसरे को देखने लगे..
“अगर तुम्हे कोई पसंद है तो बताओ, मैं बात कर लूंगा माँ साहेब से !”
“पसंद नापसंद का क्या है.. रानी मॉम का मन भी तो देखना होगा !”
“ऐसा क्यों सोचे बैठे हो कि तुम्हारी पसंद उन्हेँ पसंद ना आएगी.. हो सकता है वो इस बात के इंतज़ार में हो कि तुम उन्हेँ अपनी पसंद से मिलवा दो.. !”
“ये तो असम्भव ही है भाई !”
“आज कि दुनिया में और तुम्हारे लिए कुछ असम्भव नहीं !”
“असम्भव ही है.. इतनी जल्दी उन्हेँ कैसे इतना दूर लेकर जा सकता हूँ..।”
शौर्य की बात सुन धनुष और हर्ष एक दूजे को देखने लगे, उनकी आँखों में चमक सी थी..
धनुष चहक उठा..
“उतनी दूर ले तो जाओगे, लेकिन पास में पता भी तो होना चाहिए लड़की का.. आखिर कहाँ ले जाओगे रानी माँ को.. !”
“पता तो कली ने नहीं दिया था, लेकिन उसने विराट काका सा के पास एक फॉर्म भर कर दिया था, उससे उसका पता मिल जायेगा !”
शौर्य ने सोचते हुए कहा और धनुष और हर्ष के चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ गयी….
“तो क्या उस पते के सहारे लंदन पहुँच जाओगे.. ?
फ़ोन नंबर भी तो होना चाहिए ?”
हर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा और चिंतित सा खुद में खोया सा शौर्य अपनी ही धुन में कहता गया..
“हम्म फ़ोन नंबर पर ध्यान नहीं गया था, हो सकता है उसमे प्रिंट हो !”
धनुष ने मुस्कुरा कर एक पन्ना शौर्य के सामने कर दिया…
“कहीं वो फॉर्म ये तो नहीं !”
कली के इंटर्नशिप जॉइनिंग का वो फॉर्म देख शौर्य के चेहरे पर मुस्कान छा गयी..
“अरे ये तुम्हे कहाँ से मिला ?”
“जब भाई ज़रा खोया खोया सा रहने लगे तब उस पर और उसके क्रियाकलाप पर नजर रखनी ही पड़ती है.. !” हर्ष ने धनुष के कंधे पर हाथ रख कर कहा और शौर्य उन दोनों को देखने लगा..
“अरे नहीं नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है भाई !”
“अरे इसमें शर्माने वाली क्या बात है.. ?
मुहब्बत है तो है ! प्यार है ये कोई गुनाह नहीं !”
धनुष भी हलके हलके मुस्कुराने लगा..
“अरे वो सिर्फ दोस्त है मेरी.. कली के साथ ऐसा कुछ नहीं है !”
“कली का तो हम दोनों ने नाम तक नहीं लिया !” धनुष के ऐसा बोलते ही शौर्य उन दोनों की तरफ देखने लगा.. उसे समझ आ गया था वो बुरी तरह फंस चुका है..
वो धीमे से गुनगुनाने लगा..
‘”गुनगुनाने से काम नहीं चलेगा.. अब तो पूरा गाकर सुना दो.. !”
हर्ष के बोलते ही पहले धनुष फिर शौर्य दोनों गाने लगे..
प्यार में होता है क्या जादू
तू जाने या मैं जानू…
रहता नहीं क्यों दिल पर काबू
तू जाने या मैं जानू…
क्रमशः

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प्यार में होता है क्या जादू तू जाने या मैं जानू
याद आ गया बनारस से महल तक का सफर
उसी सफ़र में तो ये गाना गया था राजा और बांसुरी ने
भाई हों तो ऐसे
छोटे भाई के चेहरे पर उदासी कैसे देख सकते है
कली जिसका इंतजार है वो ढूँढ ही लेगा तुम्हें
विश्वास नहीं हो रहा की क्या सच में शौर्य कली के घर के बाहर खड़ा है या वो कोई सपना देख रही है।😳😳😳😳😳
डेड की बिटिया अपने मन को काबू में रखने में असफल दिखाई पड़ रही है तभी हर जगह शौर्य दिखाई दे रहा है 😞😞😞😞
मां का मन कितना विचलित हो रहा होगा की जब उसके बचे को कोई अनचाहे रिश्ते में बांधने की कौशिश करे ☹️☹️☹️☹️
Awesome superrrrrrrrrr 💙💛💚❤️🧡🧡💛💛💛💛💛💛💛 bbbbbbbbbbbbb part ❤️💛💛💚💚💙💛💛💚❤️🧡💛💛
Beautiful and interesting part🌹🥰👌🥰🌹🥰
Suppppeerrrrrbbbbbbbbbb part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Wah bahi kamal ho gaya
Sourya London
Ab aage;;!!???
Haye kitne pyare bhai mile hain shaurya ko 🥰🥰🥰.bina bole dono ne shaurya ke dil ka haal jaan liya ab toh ye sagayi hone se rahi.ye sab milkar kuch na kuch jarur soch lenge ya phir sagayi ho bhi gayi toh shadi toh bilkul nahi hogi.udhar kali ka bhi bura haal hai.ab Harsh aur dhanush hi dono ko mila sakte hain
Story bahut hi pyari hai shorya itna nasamjh nahin ki apni ranima ki baat ko aankhe band kar maan lega💕
So sweet and nice part .