जीवनसाथी -3 भाग -91
अब तक आपने पढ़ा…
कली हिंदुस्तान की ढेर सारी यादें संजोये लंदन जा चुकी है, जहाँ अपने दोस्तों से मिलने पर उसे शौर्य का दिया बैग याद आता है..
और उसे खोलने पर उसके अंदर से ढेर सारे तोहफे निकलते है…।
उन तोहफों में शौर्य का दिया सबसे खास तोहफा भी मौजूद था, राजा साहब और रानी बांसुरी की तस्वीर उनके दस्तखत के साथ…
इन तोहफों को देख कर कली एक बार फिर महल और महल वासियों की याद में खो कर रह गयी..
दूसरी तरफ, शौर्य हर्ष और धनुष के साथ किसी ज़रूरी मीटिंग में मौजूद था..
उस मीटिंग में एक आवश्यक निर्णय था जो हर्ष के कारण अगले दिन पर टाल दिया गया..
धनुष चौहन्स के बारे में जानने की कोशिश कर रहा था की उसके पास किसी का फोन आया और उसे चौहान ग्रुप का कनेक्शन मालूम चल गया..
अब आगे..
“चौहान का कनेक्शन मिल गया है हर्ष..!”
हर्ष और शौर्य उसकी तरफ देखने लगे..
“क्या है ?”..
“वैसे तो चौहान्स ने कभी इस बात का ज़िक्र तक नहीं किया, हमेशा इस बात को दबाये रखा लेकिन ये लोग शेखावत परिवार के काफी करीब है..
और उनसे इनकी रिश्तेदारी भी है !”
“शेखावत ?”
“हम्म….. सुनील शेखावत !”
हर्ष के सवाल पर धनुष ने कहा और कप्यूटर स्क्रीन पर कोई पेज ढूंढने लगा, उसके साथ ही वो बोलता भी चला जा रहा था…
“चौहान ग्रुप कोई बहुत ज्यादा पुराना ग्रुप नहीं है… ये अभी पिछले पचास सालों में ही अस्तिस्त्व में आया है..
इनका संयुक्त परिवार है..दो भाई और एक बहन !!
इनके पिता का स्क्रेप का बिज़नेस था…
शेखावत के यहाँ की मेटल फैक्ट्री का स्क्रैप, चौहान ग्रुप उठाया करता था और रिसायकल कर के बेचा करता था.. उस वक्त शेखावत परिवार इन्हे अपने नीचे ही दबा कर रखता था..
उस वक्त बिज़नेस चौहान ग्रुप के मालिक धनंजय सिंह चौहान के हाथ में था..।
वो उतने में ही संतुष्ट थे.. लेकिन जब उनके बेटे बिज़नेस में जुड़े तब वो लोग सिर्फ एल्युमीनियम का कबाड़ बेच कर संतुष्ट होने वाले नहीं थे..।
खास कर चौहान का बड़ा बेटा, विजय..
वो बहुत ही ज्यादा महत्वकांक्षी था.. उसकी लालसा थी कि वो भी अपना एक बड़ा एम्पायर खड़ा करे.. उसने जूझ कर मेहनत की और स्क्रैप बेचने से थोड़ा आगे कदम बढ़ाया..
उसने शेखावत से ही मेटल का काम मांगना शुरू किया..
शुरू में इस बात पर शेखावत ने उस लड़के का खूब मजाक भी उड़ाया, लेकिन फिर उन्हें लगा कि यह ज्यादा क्या कर पाएगा इसलिए अपनी कंपनी की एक छोटी सी डीलरशिप चौहान के बड़े लड़के को दे दी।
उसके बाद चौहान के उस बड़े लड़के ने रात दिन एक करके उस कंपनी को साल भर के अंदर एक अच्छे खासे टर्नओवर के साथ स्थापित कर दिया।
तब शेखावत की नजर चौहान ग्रुप पर पड़ी, और उस वक्त उन्हें लगा कि यह लड़का उनके बहुत काम आ सकता है और उन्होंने चौहान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया..
विजय सिंह अपने काम का पक्का था लेकिन अपने आप को आगे बढ़ाने के लिए वह हर तरह के पैंतरे आजमाने को तैयार था। और इसलिए उसने शेखावत से आगे बढ़कर हाथ मिला लिया। शेखावत और चौहान के दिमाग में यह बात आ पाती, उसके पहले ही विजय ने अपनी सोच से कुछ ऐसी चाल चली कि शेखावत परिवार ने अपनी तरफ से रिश्तेदारी का प्रस्ताव भेज दिया..
शेखावत परिवार में सुनील की माँ ही एकलौती बहु थी..
उसके पति की छोटी बहन का विवाह प्रस्ताव जब चौहान परिवार में पहुंचा, तब विजय सिंह ने इस प्रस्ताव को तुरंत लपक लिया और शादी के लिए हाँ बोल दिया और इस प्रकार शेखावत परिवार की लड़की चौहान परिवार में बहु बन गयी..
और इस तरह इन दोनों परिवारों में रिश्तेदारी जुड़ गयी..
इसके बाद तो विजय सिंह लगातार तरक्की करता चला गया..
पहले एल्युमीनियम स्क्रेप के काम को ऊंचाइयों पर पहुँचाया और फिर आयल रिफायनरी के काम में उतर गया..
इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा..
अभी कुछ समय से वो अपनी कम्पनी का नुकसान दिखा रहा है, जिस पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा.. इसके पीछे ज़रूर कोई बात है..
उसके अलावा जैसे एक वक्त पर वो शेखावत के पीछे लगा हुआ था वैसे ही अब उसका निशाना बुंदेला ग्रुप है..
इसलिए इस पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है !”
धनुष ने अपनी बात ख़त्म की और हर्ष और शौर्य के माथे पर बल पड़ गए..
“ये क्यों ऐसा कर रहा, मालूम करना पड़ेगा !”
हर्ष की बात पर धनुष ने हामी भर दी और तभी वहाँ मीठी चली आयी..
“अब कुछ ज्यादा ही देर नहीं हो गयी ? सुबह वापस भी तो ऑफिस आना है ना.. तो अब चलिए सब उठिये घर निकलिए.. !”
“यस बॉस… !” हर्ष ने मीठी की तरफ देख कर कहा और मीठी खिलखिला उठी..
“मैं कहाँ की बॉस ? बॉस तो आप तीनो हैं !”
“नहीं, हर्ष हम सब का बॉस है, और इसकी बॉस आप हैं ! तो इस लिहाज से हमारी सुपर बॉस हुई आप !” धनुष बोल पड़ा..
“तुम्हे बातो में हराना मेरे बस का नहीं.. अब चलो कॉफी ख़त्म कर के निकलते हैं वापस !”
उसने वहाँ बिखरे पड़े पेपर्स समेटने शुरू कर दिए.. हर्ष ने उसके हाथ से सब छीन कर वापस रख दिया..
“तुम मेरी सेक्रेटरी नहीं हो, जो ये सब करती हो.. तुम्हे सिर्फ सारा काम सुपरवाइज करना है.. तुम्हारी सेक्रेटरी कहाँ चली गयी !”
“उसे छुट्टी दे दी मिस्टर बुंदेला… वो सुबह आठ बजे से काम करती है यहाँ.. !”
हर्ष ने मुस्कुरा कर मीठी को देखा और खड़ा हो गया..
“कम ऑन बॉयस, अब हम सब को निकलना ही पड़ेगा ! मीठी तुम्हे छोड़ते हुए हम लोग निकल जायेंगे !”
मीठी ने हामी भरी और वो सब वहाँ से निकल गए..
मीठी निरमा की सहेली के घर पर पीजी रहती थी, उसे वहाँ उतार कर वो लोग अपने फ़्लैट के लिए निकल गए..
रात हो गयी थी..
फ़्लैट पर पहुँच कर तीनो ही फ्रेश होकर खाने की टेबल पर बैठ गए, उसी वक्त हर्ष के मोबाइल पर कॉल आने लगा..
उसने “माँ साहब का फ़ोन है !” कह कर फ़ोन उठा लिया… थोड़ी देर उनसे बात करने के बाद परेशान से हर्ष ने फ़ोन रख दिया..
धनुष और शौर्य उसकी तरफ देखने लगे..
“क्या हुआ भाई, आप कुछ परेशान लग रहे !”
“कल सुबह माँ साहेब और बाकी लोग यहाँ आ रहे हैं !”
“ये तो ख़ुशी की बात है, वैसे भी रानी माँ का यहाँ आना कम ही हो पाता है.. !”
शौर्य की बात सुन कर हर्ष उसे देखने लगा..
“तुम्हारी सगाई के लिए आ रहे हैं वो लोग ?”
“क्या ? सगाई, किससे ?”
“प्रियदर्शिनी से !”
“व्हाट ?” शौर्य चौंक गया
“क्या कह रहे हैं आप भाई.. मुझे रानी मॉम से बात करनी पड़ेगी !”
“वो सब सुबह निकल जायेंगे.. माँ साहेब बहुत उत्सुक हैं, अभी भी उनकी आवाज़ से ही लग रहा था कि वो कितनी खुश हैं.. अब उनसे कुछ भी कहना मुश्किल होगा शौर्य.. तुम्हे पहले ही मना कर देना था !”
शौर्य सोच में पड़ गया..
वो वहाँ से उठा और अपनी माँ को फ़ोन लगाता हुआ एक तरफ को चल पड़ा..
बांसुरी ने तुरंत फ़ोन उठा लिया..
“मैं तुम्हे ही फ़ोन करने वाली थी शौर्य, उसके पहले तुम्हारा फ़ोन आ गया !”
“मॉम ये क्या हो रहा है ? मेरी सगाई की बात अचानक कहाँ से आ गयी, रानी मॉम तो पीछे ही पड़ गयी इस बात के.. !”
“गलती मेरी ही है शौर्य.. मैंने ही उन्हेँ कहा था कि तुम उनकी बात को नहीं टालोगे..
मैं तुम्हे सारी बात बताती हूँ.. हर्ष और मीठी के लिए जब मैंने उनसे बात की, तब वो एकदम से नाराज हो गयी.. उनकी नाराज़गी भी स्वाभाविक थी, कोई भी माँ कभी ये नहीं चाहेगी कि उनका इकलौता बेटा उनकी इच्छा के विरुद्ध कोई काम करें और फिर ये तो शादी का मामला था..
मुझे जब मालूम चला कि हर्ष और मीठी एक दूसरे को पसंद करते हैं, तब मैंने उन दोनों का पक्ष लेते हुए ये बात भाभी साहब के सामने रखी और उन्होंने पलट कर मेरे सामने ये प्रस्ताव रख दिया कि जैसे उनके बेटे हर्ष का विवाह प्रस्ताव मैं अपनी मर्ज़ी से करवा रही, वैसे ही मेरे बेटे यानी तुम्हारा विवाह वो अपनी मर्ज़ी से करेंगी..
मेरे पास उस वक्त उनकी बात पर हामी भरने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था, इसलिए मैं मान गयी..
मुझे नहीं पता था कि उन्होंने प्रियदर्शिनी को तुम्हारे लिए छाँट रखा था.. ।
मेरे हाँ बोलते ही उन्होंने प्रियदर्शिनी का नाम सामने रख दिया और मैं कुछ नहीं बोल सकी..
उसके बाद तो वो सब कुछ झटपट करती चली गयी..
शौर्य तुमसे बस एक बात कहना चाहती हूँ बेटा, अपनी माँ के वचन का मान रख लेना… आज तक कभी किसी ने मेरी बात नहीं काटी…
मैं तुम पर किसी तरह का दबाव नहीं डालना चाहती बेटा, अगर हर्ष की तरह तुम्हारी ज़िंदगी में कोई लड़की होती तो मैं बेहिचक तुम्हारे लिए भी भाभी साहब से बात कर लेती लेकिन जानती हूँ ऐसा कुछ नहीं है..।
देखो शौर्य हर किसी को अपने जीवन में एक जीवनसाथी की ज़रूरत तो होती ही है ना बेटा.. हो सकता है प्रियदर्शिनी ही वो लड़की है जिसके साथ तुम्हारा भविष्य लिखा है..।”
“लेकिन मॉम… “
शौर्य कि आँखों में कली का चेहरा घूम गया..
उसकी मुस्कान उसकी बातें सब कुछ उसकी आँखों के सामने से गुज़र गया..
लेकिन चाह कर भी वो उसका नाम नहीं ले पाया..
कैसे अपनी माँ से कहता कि वो भी किसी लड़की से प्यार करने लगा है..
कैसे कह देता जब उस लड़की से ही नहीं कह पाया…
कली खुद कहाँ जानती थी कि शौर्य उसे कितना याद कर रहा है.. उससे प्यार करने लगा है.. ?
शौर्य के चेहरे पर लाचारगी नजर आने लगी.. लेकिन वो कुछ कह नहीं पाया..
“क्या हुआ बाबा.. कुछ कहना चाह्ते हो ?”
“मॉम मुझे प्रियदर्शिनी से शादी नहीं करनी !”
“क्यों ?”
“नहीं मालूम.. मैं कोई कारण नहीं जानता, लेकिन मैं उसके साथ अपना फ्यूचर नहीं देख पाता हूँ मॉम.. प्लीज़ कुछ करिये ना.. !”
वो बिलख पड़ा और उसके आवाज़ की नमी बांसुरी के सीने को मरोड़ गयी..
.वो अपने लाड़ले से कैसे कहती आज से कई साल पहले ही उसने उसके लिए एक प्यारी सी दुल्हन पसंद कर ली थी…
अनिरुद्ध वासुकी की बेटी, उसकी कली!! जिसे सीने से लगाए जाने कितनी राते उसने जागते हुए काट दी थी..।
राजा साहब और अपने शौर्य से दूर रहने का सहस ही कली थी उस वक्त…।
उसका मासूम चेहरा, उसकी मीठी सी खुशबु में खो कर बांसुरी खुद को भूल बैठी थी उस समय, और उसे खुद मालूम नहीं चला था कि कब उसने मन ही मन कली को अपने महल की राजकुमारी मान लिया था..
हालाँकि आज ये सब बातें बेमानी हो चुकी थी। क्यूंकि ना कली का अता पता था और ना ही महल के रंग ढंग ऐसे बन रहे थे..
अब कैसे भी हो उसे शौर्य को प्रियदर्शिनी के लिए मनाना ही था..
वो गहरी सोच में डूबी थी कि तभी दस दिन के लम्बे टूर के बाद राजा साहब वापस चले आये….
वो चुपके से कमरे में आये और पीछे से बांसुरी को बाँहों में जकड लिया..
बांसुरी चौंक गयी..
“अरे आप.. कब आये ?”
बांसुरी के चेहरे पर राहत भरी मुस्कान चली आयी..
“मैं तो यहाँ हूँ, फिर फ़ोन पर किससे बातें हो रही ?”
राजा साहब मुस्कुरा उठे..
“मेरी ज़िन्दगी के सबसे महत्वपूर्ण पुरुष से.. !”.बांसुरी मुस्कुरा उठी और फ़ोन उसने राजा साहब कि तरफ बढ़ा दिया..
राजा ने फ़ोन थाम लिया..
“कैसे हो शौर्य ?”
“ठीक हूँ.. आप कैसे है ?”
.
“मैं भी ठीक.. कल ये सभी लोग तुम्हारे पास आने वाले हैं.. तुम्हारी बडी मॉम ने फ़ोन कर के स्पेशली मुझे बुलाया है.. !”..
“ओह्ह अगर वो फ़ोन नहीं करती तो आप नहीं आते.. आने के लिए थैंक्स डैड.. !”
व्यंग से शौर्य ने कहा और राजा साहब मुस्कुरा उठे…
उन्हेँ अपने लाड़ले की नाराज़गी समझ में नहीं आयी..
उन्होंने उसका हालचाल पूछ कर फ़ोन रख दिया और शौर्य अपने मन में चलते विचारों में खोया सा वापस चला आया..
क्रमशः.

Very nice n good n Excellent n Fantastic n Fabulous part
प्रियदर्शिनी को अपनी बहू बनाने की ज़िद में रूपा पागल हो गई है लग रहा है।ना शौर्य की इच्छा पूछी ना उसकी सलाह ली अब तो धनुष ही बचाएगा इस बला से।
🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳
क्या हो गया है रूपा को .. शौर्य को उस वक्त अपनी गोद में छुपाया था जब उसे माँ की सबसे ज्यादा जरूरत थी.. एक माँ होकर बच्चे को नही समझ पाई… शौर्य में भी राजा और युवराज भाई की गुण है…
खैर अब राजा ही शौर्य को प्रियदर्शनी नाम की मुसीबत से बचाएगा
हर्ष की मॉम बहुत गलत कर रही है उन्हे दोनो बच्चे प्यारे नहीं है बल्कि उन्हें तो बस अपने बदले से मतलब है क्यू कि अगर वह अपने हर्ष और शौर्य को दिल से चाहती होती तो कभी ऐसे अनुचित निर्णय नहीं लेती जिनसे उनके बच्चो का जीवन ही अस्त व्यस्त हो जाय 😞😞😞😞😞😞😞😞😞
Ye toh ulta ho gaya.rupa kuch jayada hi jaldi me hai par wo nahi janti ki kismat bhi koi chiz hoti hai aur usne apna faisla suna diya hai bus sabko manna hai 👌👌👌👌👌👌
Kaise Rani Rupa apni bhadaas nikaal rahi hai shaurya aur priyadarshini ka rishta tey karke
अरे ये शिखावत ओर चौहान का कुछ समाज नही आया शायद गैप हो गया है , मैं वापस पढ़ कर देखती हु,
अरे ये रानी मॉम भी न , शौरी को उस लड़की से ही क्यों बांधना चाहती है 🥺🥺🥺
आज बासुरी के मन की बात जानी की बचपन से ही उन्होंने तो काली को अपनी बहु मान ही लिया है🤩😍😍❤️❤️❤️
क्या सगाई हो जायेगी ? डर लग रहा है मुझे तो 🙈🙈🙈
लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
Excellent part 👌🏻 Ranimaa apni ichcha purti ke liye Shaurya ka istemaal Kiya hai kya🤔aur pls aap iss story ke part bhi likhte rahiye