
मायानगरी-46
पुरोहित मैडम अभिमन्यु और झनक से बातें कर रही थी कि दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी पुरोहित मैडम एकाएक चौंक उठी…
” इस वक्त कौन हो सकता है?”
उन्होंने इशारे से पुरोहित सर को जाकर देखने को कहा…
पुरोहित ने दरवाजे के अंदर से ही झांककर देखा तो सामने एक वेटर खड़ा दिखाई दिया, जिसके हाथ में ट्रे थी, उन्हें लगा वह शायद पानी की बोतल या इसी तरह का कुछ सामान लेकर आया है और उन्होंने निश्चिंत होकर अपनी पत्नी की तरफ देख कर अंगूठा दिखाया और इनके इशारा करते ही उन्होंने दरवाजा खोल दिया….
दरवाजा खुलते ही चार पांच पुलिसकर्मियों के साथ एक महिला आईपीएस अधिकारी अंदर दाखिल हो गई…
“जो जहां बैठा है, खड़ा है, वही रहे किसी ने भी इधर-उधर भागने की कोशिश की तो मैं गोली चला दूंगी..”
“अरे लेकिन आप हैं कौन..?”
पुरोहित मैडम की बेवकूफाना सवाल पर लीना मुस्कुरा उठी..
“मैं यूनिफॉर्म में नहीं हूं, यह बात ठीक है लेकिन यह सारे पुलिस वाले तो यूनिफॉर्म में है । इन्हें देख कर भी आपको समझ नहीं आ रहा कि पुलिस ने रेड डाल दी है और आपका यह जो गोरखधंधा चल रहा है वह पकड़ा गया है…”
“किसने कहा यहां गोरखधंधा चल रहा है। हम तो कॉलेज के बच्चों को पिकनिक के लिए लेकर जाने के लिए इकट्ठा किए हुए…।”
“जी हाँ!! मैं भी उसी पिकनिक की बात कर रही हूं…क्या इन सारे बच्चों की पिकनिक का सेंटर एक ही है..या सबको अलग अलग जगह ड्रॉप करना है आपको..?”
” देखिए आप जो भी हैं, हमें कोई फर्क़ नहीं पड़ता, आप जाइए यहां से …ये हमारी यूनिवर्सिटी के बच्चे हैं…।”
” ओह अच्छा, तब तो इनके सब के पास इनका आईडी भी होगा ..? दिखा बेटा ,अपना कॉलेज आईडी दिखा…।”
लीना ने वहीं बैठे एक बच्चे से उसका आईडी पूछा और उतने में ही पीछे बैठे कुछ बच्चे बाल्कनी के रास्ते भागने की कोशिश करने लगे , जिन्हें पुलिस वालों ने तुरंत पकड़ लिया …
” क्यों बेटा पिकनिक से इत्ती जल्दी मन भर गया ..?”.
लीना ने उन बच्चों को गन से इशारा कर वापस बैठने को कहा और पुरोहित मैडम की तरह घूम गई…
” तो मैडम अभी और वादविवाद में पड़ना है कि चलें पुलिस स्टेशन..?”
” आपके पास वारंट है ..?”
पुरोहित मैडम ने एक और पासा फेंका ..
” मैडम आपको मेरे माथे पर क्या लिखा दिख रहा है ? या तो मैं आपको बेवक़ूफ़ लग रही हूँ या आप खुद को.कुछ ज्यादा ही होशियार समझ रही हैं…इसलिए आपसे पहले ही पूछा कि और वादविवाद करना है या चलें…
ट्रेनिंग के दौरान वैसे भी हमने खूब वादविवाद में हिस्सा लिया है इसलिए हर तरह की फालतू बकवास कर लेते हैं…
हाँ तो आप क्या पूछ रहीं थीं? वारंट …?
ये कह कर लीना अपनी चौड़ी और मजबूत हथेली की तरह देखने लगी ..उसे खुद की तरह बढ़ते देख पुरोहित मैडम घबरा गई और इतने देर से उनकी बात सुनते पुरोहित जी आगे चलें आए …
” मैडम जरा इधर आएँगी क्या …?
” क्यों ..?”
” एक बहुत जरूरी बात थी !”
” तो बको ना !”
” मैडम वो जरा एकांत में कहना था …”
लीना की एक भौंह जरा ऊपर हो गई….
” शादीशुदा होते हुए मुझसे एकांत में बात करना चाह रहे हो…शर्म कर लो थोड़ा …!”
” नहीं मैडम वैसी कोई बात नहीं , दरअसल मैडम हम कह रहे थे कि अगर कुछ ले देकर मामला सुलटा लेते तो…!”
” अब आए ना लाइन पर!हाँ ठीक है…आप लोग गवाही दे दीजिए और मामला सुलट जाएगा …
…
लीना ने ताली बजाते हुए सबको खड़े होकर साथ चलने को कहा ..और धीमे से बाहर निकल गई…
” चलो भई बहुत गप्पे हो गईं अब काम पे चलें…!”
पुलिस वालों के घेरे में दोनों कमरे से बच्चे बरामद कर लिए गए और उन सबको पुलिस की गाडियों में बैठा कर पुलिस स्टेशन रवाना कर दिया गया….
पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद सबको थाने में अंदर कर दिया गया
सबके अंदर जाने के बाद झनक और अभिमन्यु को बाहर ही खड़ा देख पुरोहित मैडम आंखों में सवाल लिए उन दोनों को देखने लगी ….
” ये दोनों बाहर कैसे ..?”
पुरोहित मैडम के सवाल पर लीना ने उन्हें घूर कर देखा …
” अंदर जगह जो नहीं बची..!”
” अरे तो इन्हीं दोनों को बाहर क्यों रखा ..?
पुरोहित मैडम की जलन देख लीना हंस पडी..
” यही हमारी इंसानी फितरत है…खुद को.मिलने वालीं सजा से तकलीफ उतनी नहीं होगी जितनी सामने वाले को मिली माफी को देख कर आग लग जाती है..क्यों पुरोहित मैडम …?
वैसे आपको ज्यादा सस्पेंस में नहीं रखती…आपका सस्पेंस खत्म करने किसी खास को बुलवाया है…ये लो वो आ भी गईं …
निरमा को वहां आया देख पुरोहित मैडम को कुछ थोड़ा बहुत समझ में आने लगा लेकिन उनका दिल मानने को तैयार नहीं था कि उन्हें इस तरह बुद्धू बनाया जा चुका है…
” बहुत गहरी चाल चली है आपने पुरोहित मैडम। यूनिवर्सिटी में कोई सोच भी नहीं सकता था कि आप वहाँ ये खेल रच रहीं हैं…”
अब पुरोहित मैडम थोड़ा ढीली पड़ गई थी, समझदारी दिखाते हुए पुरोहित सर पहले ही चुपचाप से खड़े थे …
निरमा झनक और अभिमन्यु की तरह देख कर मुस्करा उठी…
” वेरी वेल डन !”
झनक को मुस्कराते देख पुरोहित मैडम एक बार फिर सुलग उठी…तो ये लड़की इतना सब नाटक कर रही थी….
” तो ये सब तुम्हारा नाटक था ..रोने का डरने का ..?”
झनक मुस्कराने लगी…
” अगर मैं रोती और घबराती नहीं तो आप अदिति की मौत से जुड़ी बातेँ हमें कैसे बताती… अब ये मत बोलिएगा की मैंनें तो कुछ कहा ही नहीं क्योंकि आपकी कहीं सारी बातेँ यहां बैठी लीना मैडम पहले ही देख चुकी हैं….
पुरोहित मैडम की नज़रें अब अभिमन्यु पर थी…
” हाँ आपने सही समझा मैडम, ये मेरी पेन में लगे कैमरा से सम्भव हो पाया….”
और अभिमन्यु ने अपनी पेन निकाल कर
पुरोहित मैडम को दिखाते हुए लीना के हाथ में दी …और आगे कहने लगा…
” आप लोगों ने हम लोगों के फोन तो अपने पास रख लिये लेकिन पेन पर आपका ध्यान गया ही नहीं…”
पुरोहित सर की तरह घूरते हुए पुरोहित मैडम अभिमन्यु की तरफ देखने लगी…
” मुझे ये ओवर स्मार्ट लड़का शुरू से सही नहीं लग रहा था , पर आप जाने क्यों इस पर इतना भरोसा कर रहे थे …अखिर दे ही गया ना धोखा!”
उन लोगों को आपस में झगड़ा करते छोड़ कर लीना उन सभी को साथ लेकर अपने केबिन में चली आयी…
” बैठिए निरमा जी… कलेक्टर साहब भी आ रहे हैं, वो भी इस मैटर पर बहुत ज्यादा फोकस कर रहे थे ..”
निरमा ने हाँ में सिर हिला दिया …उसी वक़्त शेखर भी लीना के केबिन में चला आया ..उसे देखते ही सभी ने उठ कर उसका अभिवादन किया और मुस्करा कर शेखर भी एक कुर्सी खींच बैठ गया …..
” देख लीजिए निरमा जी , राजा अजातशत्रु जी के एक बार ग़रजते ही पुलिस विभाग ने तुरंत लीना को यहां बुला कर इन्हें केस सौंप दिया जिससे केस जल्दी जल्दी आगे बढ़े …!
” शेखर जी , इस केस में पर्सनली आपने रुचि ली उसके लिए आपका भी आभार….
अदिति की मौत को मैं भी एक समान्य आत्महत्या ही मान रही थी, और उसे एक स्वाभाविक आत्महत्या ही मानती रहती अगर पुरोहित मैडम ने ऑटोप्सी ना करने की इतनी ज्यादा जिद ना की होती। आत्महत्या का केस था, इसलिए बॉडी का पोस्टमार्टम होना जरूरी था… लेकिन पुरोहित मैडम इस ढंग से जिद पर अड़ गई की उन्हें देखकर मेरा माथा ठनकने लगा…
पुरोहित मैडम ने अदिति की जो कहानी सुनाई थी उस पर मैंने भी शुरुआत में यकीन कर लिया मुझे भी लगा कि जवान लड़की है हो सकता है कोई अफेयर का ही मामला रहा होगा।
इतनी दूर तक सोचने की तो मैंने उस समय सोची भी नहीं थी और पुरोहित मैडम के बार-बार पोस्टमार्टम को मना करने से मुझे लगा हो सकता है उनकी जान पहचान का या उनका खुद का लड़का इनवॉल्व होगा, लेकिन जब तफ्तीश की तो मालूम चला कि उनके तो बच्चे ही नहीं है..
यहीं आकर मेरी सुई अटक गई, मुझे लगा आखिर क्यों वह पोस्टमार्टम नहीं होने देना चाहती हैं और तब मैंने एक प्लान सोचा… हालांकि वह पूरी तरह से अंधेरे में तीर चलाने जैसा ही था। लेकिन वैसा करना जरूरी था । अदिति की मौत के बाद उसकी रूममेट प्राची को पुलिस अपने साथ पूछताछ के लिए ले गई थी और अदिति का कमरा सील कर दिया गया… उसके ठीक पहले मैंने फर्स्ट ईयर के बच्चों की लिस्ट कुछ समय पहले देखी थी और मेरा ध्यान इस बात पर गया था कि अदिति की तरह ही झनक भी टॉपर थी और अपनी क्लास के बच्चों से उसके परसेंटेज बहुत ज्यादा थे, इसलिए मैंने झनक को बुलाया और उससे बातचीत की और उसे पुरोहित मैडम से अच्छे संबंध बनाने के लिए कहां..
अदिति की मौत के दो-चार दिन बाद झनक लैबोरेट्री में पुरोहित मैडम से टकरा गई और बातों ही बातों में उनके सामने उसने अपना दुखड़ा रोना शुरू कर दिया… कि इतनी ज्यादा इंटेलिजेंट होने के बावजूद पैसों की कमी के कारण वह अक्सर परेशान रहा करती है। पहली मुलाकात में पुरोहित मैडम ने उससे ज्यादा कुछ भी बातें नहीं की लेकिन उन्हें झनक में अगली अदिति नजर आने लगी थी…
धीरे-धीरे लैब में मुलाकातों के दौरान झनक पुरोहित मैडम को इम्प्रेस करने में लगी रही…उसकी मेहनत रंग लायी और पुरोहित मैडम ने मन ही मन झनक को अदिति की जगह तैयार करने का निश्चय कर लिए ..अपने पति से बात करने के बाद उन्होंने झनक से बात चीत की..पहले तो झनक ने इस सब से डरने का अभिनय किया और फिर पैसों और पहली पोजीशन के लालच में झनक ने पुरोहित मैडम की बात मान ली…..
अब बात ये थी की मुझे अभिमन्यु को भी इस सब में घुसाना था….
अभिमन्यु बहुत ही निडर और समझदार लड़का है… एक बार अस्पताल में उसने झनक और पुरोहित मैडम की बातें सुन ली थी और उसने तुरंत ही उन बातों को रिकॉर्ड कर लिया और बस सीधा मेरे ऑफिस में आया उसने मुझे वह सारी रिकॉर्डिंग सुना दी थी..
तब मैंने झनक को भी अपने ऑफिस में बुलाया और उन दोनों को बैठा कर इस बात को समझाया कि मुझे पुरोहित मैडम और उनके पति पर पूरा शक है कि वह कोई ना कोई कांड तो करने वाले हैं… और जिसके लिए मुझे समझदार बच्चों की जरूरत है ।
झनक तो मेरा काम कर ही रही थी अभिमन्यु ने भी मंजूरी दे दी और इस तरह झनक और अभिमन्यु मेरे प्लान में शामिल हो गए….”
अभिमन्यु ने अपना पेन पहले ही लीना के हाथों सौंप दिया था जिसमें उसने सारी बातें रिकॉर्ड कर रखी थी…
उसी समय एक हवलदार भीतर चला आया..
” मैडम सभी बच्चों का स्टेटमेंट ले लिए है..सभी के पेरेंट्स को भी बुला लिया गया है…ये सारे बच्चे और उनके पेरेंट्स कल की परीक्षा देने जाने की अनुमती मांग रहे हैं…?”
हवलदार की बात सुन शेखर और लीना एक दूसरे की तरह देखने लगे …
” मजिस्ट्रेट साहब के ऊपर है सब कुछ…अगर आप इजाजत दें दे तो ये बच्चे कल इम्तिहान दे सकते हैं…”
” मैं तो इजाजत दे दूँगा पर जब इन लोगों ने कुछ पढ़ा लिखा ही नहीं तो ये क्या खाक इम्तिहान देंगे ..?”
” लेकिन इम्तिहान नहीं दिया तो इनका पूरा साल खराब हो जाएगा शेखर!”
लीना अब भी उन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित थी जो बच्चे खुद अपना भविष्य चौपट किए बैठे थे..
” ठीक है एक काम करतें हैं..कल हर सेंटर के लिए चार चार पुलिस वालों के साथ इन बच्चों को एक्जाम देने भेज देते हैं..एक्जाम के बाद सभी सीधे यहीं लौट कर आयेंगे और कहीं नहीं जाएंगे..अगर इनमें से किसी ने भागने की कोशिश की तो उन पर लगाए जाने वाले चार्जेस और कठोर हो जाएंगे ..ये इन लोगों को समझा देना …
” थैंक्स शेखर, एक शिक्षित व्यक्ति ही शिक्षा का इतना महत्व समझ सकता है …वरना अगर हमारी सोच भी इनके अभिभावकों जैसी होती तो हम भी शिक्षा को सिर्फ पैसों से ही तोलना जानते…
लीना गंभीर कदम रखती पकड़े गए बच्चों के पास पहुंच गई…..
क्रमशः
aparna

Mayanagri- 46 ke baad aagey ka part Mayanagri-47 kaha milega??
जी वो अभी ब्लॉग पर नहीं ला पायी हूँ… आप प्रतिलिपि पर उसे पढ़ सकते हैं…
Thanks for your reply. kya iske aagey ke parts aap blog per nahi la sakti hain…??
Mam mayanagri k aage k parts b laiye na ye story to aage badh hi ni rahi h.🙏
Aprajita 143 aa gyi h pr show kyu nhi ho rhi ,kese padhe plz btaye