मायानगरी -44

मायानगरी-44

  अपना हल्का फुल्का सा बैग कंधे पर टाँगे भागता हुआ सा अभिमन्यु बाहर निकल गया,  जाते जाते वो अपना आई कार्ड, पेंसिल ज्योमेट्री बॉक्स,कैलकुलेटर  लेना भी नहीं भूला…

अधीर उसे तेजी से जाते देखता रह गया…..

*****

झनक इधर-उधर देखती हुई जल्दी जल्दी आगे बढ़ रही थी , उसके फोन पर कुछ देर पहले ही ये मेसेज आया था कि उसे एक टैक्सी लेकर निकलना है ..कुछ आगे से पहुंचने के बाद उसे निर्देश मिल जाएंगे कि उसे क्या करना है ..?
  वो रोड पर खड़ी थी कि एक टैक्सी गुज़री और उसने हाथ दिखा कर उसे रोक लिया …वो जैसे ही दरवाजा खोल अंदर बैठी कि दुसरी तरफ का दरवाजा खोल अभिमन्यु अंदर आ बैठा …

” तुम ? तुम इस टैक्सी में क्या कर रहे हों ?”

” वहीं जो तुम । मुझे भी कहीं जाना है ..।”

” लेकिन मैं दुसरी तरफ जा रही हूँ..तुम उतरो..!”

” अरे डरो मत,  मेरे साथ चलो ..बस !”

अभिमन्यु ने टॅक्सी वाले से गाड़ी आगे बढ़ाने बोली और फोन निकलने लगा …..

  झनक गुस्से में अभिमन्यु को घूर रही थी…उसने भी अपना मोबाईल निकाला और किसी को एक मेसेज भेजा और बाहर देखती बैठी रही….

   टैक्सी में ड्राईवर ने गाना चला  दिया था …

   गोलमाल है भाई सब गोलमाल है..
    सीधे रास्ते की ये
    टेढ़ी ही चाल है…..

” भैया ये गाना बंद करो …!”

” अरे क्यों ? चलने दो भाई..?

झनक जितना ही नाराज हो रही थी , अभिमन्यु उसे उतना ही चिढा रहा था ……
  अखिर एक जगह पहुंच कर टैक्सी एक तरफ को कर अभिमन्यु ने रुकवा दी और खुद नीचे उतर गया….झनक अब भी गाड़ी के अंदर ही थी..

” उतरिए मैडम,  यहीं उतरना है…!”

अभिमन्यु के कहते ही वो उसे पलट कर कुछ जवाब देने वालीं थी कि उसे एक तरफ लगी लंबी सी काली कार  दिख गई…जिसके बाहर पुरोहित मैडम के पति खड़े थे और अभिमन्यु उन्हीं की तरफ बढ़ रहा था ..
झनक भी उसी के पीछे चल पडी….

उन्होंने बिना दोनों से कोई बात किए उन दोनों को एक बार देखा और गाड़ी की अगली सीट पर बैठ गए …
  उनके ड्राइविंग सीट पर बैठते ही अभिमन्यु उनके बाजू वालीं सीट की ओर जा बैठा और झनक ने पीछे अपनी जगह बना ली……
  झनक को अब भी अभिमन्यु का साथ चलना खटक रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि पुरोहित सर ने भी उसे कुछ भी बिना पूछे कैसे अपने साथ की सीट पर बैठा लिया…

    लगभग डेढ़ घंटे के सफर के बाद वह लोग शहर के किसी बड़े होटल में पहुंच चुके थे..
  पुरोहित सर ने गाड़ी पार्किंग में डालने के बाद उन दोनों को साथ लिया और रिसेप्शन में पहुंचकर अपनी चाबी मांगी और लिफ्ट की तरफ बढ़ गये..
  माया नगरी से निकलने के बाद से उन तीनों की आपस में कोई भी खास बातचीत नहीं हुई थी..
लिफ्ट से निकलते ही एक तरफ को पुरोहित सर आगे बढ़ने लगे,  अभिमन्यु और झनक भी चुपचाप उनके पीछे हो लिये ।उन्होंने एक कमरे के बाहर कुछ विशेष तरह से तीन बार दस्तक दी और लगभग 5 मिनट बाद उस कमरे का दरवाजा खुल गया….
  कमरे में पुरोहित सर के घुसने के बाद झनक और अभिमन्यु भी अंदर चले आए। वहां खड़ी एक लड़की ने झनक की तलाशी लेनी शुरू की और एक लड़के ने अभिमन्यु की…
   उन दोनों के मोबाइल फोन उन लोगों ने अपने कब्जे में ले लिए…
उन दोनों की तलाशी लेकर जब उन लोगों को पूरी तस्दीक हो गई कि यह लोग अपने साथ कुछ भी और नहीं लेकर आए हैं तब लोगों को साथ लेकर वह लोग अंदर बने एक बड़े कमरे की तरफ बढ़ गए…..

…. एक बड़े से कमरे में लगभग 40 बच्चे मौजूद थे… और एक तरफ  एक कुर्सी पर पुरोहित मैडम बैठी थी..

” आओ झनक और अभिमन्यु तुम दोनों का स्वागत है….

पुरोहित मैडम ने वहीं खड़े अपने पति की तरफ देखा और उन दोनों के लिए कुछ खाने पीने का लेकर आने का इशारा किया और उसके बाद वापस झनक की तरफ मुड़ गई…

” झनक जैसा कि मैं पहले ही तुम्हें सब कुछ बता चुकी हूं.. तुम्हें बस वही सारा काम करना है। पहले मैंने तुमसे जो बात की थी उसके आधार पर तुम्हें कल मेडिकल एंट्रेंस देने जाना है, तुम किसकी जगह बैठने वालीं हो?तुम्हारा आई कार्ड क्या होगा? यह सब कल सुबह सात बजे तुम्हारे हवाले कर दिया जाएगा।  तुम एग्जामिनेशन हॉल के जिस कमरे में बैठी होगी वहां तुम्हारी सीट इस तरह से डिजाइन करवाई गई है, कि तुम्हारे चारों तरफ हमारे कुछ विद्यार्थी बैठेंगे । तुम्हें अपना पेपर बनाने के साथ ही उन सात विद्यार्थियों को भी मदद करनी है। तुम किस तरह से उनकी मदद करोगी यह भी मैं तुम्हें अभी बता दूंगी..
सबसे पहले शुरुआती एक घंटे में तुम्हें अपना पेपर सॉल्व करना है, बाकी बचे दो घंटों में तुम्हें उन सातों विद्यार्थियों को सही आंसर बताने हैं..
जैसे ही पहला घंटा पूरा होने की बेल बजेगी उसके बाद वह सभी विद्यार्थी तुम्हारी तरफ देखेंगे तुम्हें पहले क्वेश्चन का आंसर देना है,  उसके लिए अपनी लेफ्ट हैंड की इंडेक्स फिंगर को अपने लेफ्ट कान पर रखना है … इसका मतलब वह सारे विद्यार्थी समझ जाएंगे कि तुम पहले क्वेश्चन का आंसर बता रही हो.. और आंसर बताने के लिए तुम राइट हैंड की फिंगर यूज़ करोगी।
   इंडेक्स फिंगर का मतलब होगा ऑप्शन ए ,मिडल फिंगर का मतलब होगा ऑप्शन बी, अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर का मतलब होगा ऑप्शन सी, और सबसे छोटी उंगली का मतलब होगा ऑप्शन डी…

” लेकिन मैडम क्वेश्चन नंबर बताने में दिक्कत होगी? क्योंकि लेफ्ट हैंड की पांच उंगलियों के बाद की संख्या में कैसे बताऊंगी…?

” उसका भी प्रबंध है हमारे पास… 5 सवालों के जवाब देते ही तुम एक बार अपनी पेंसिल नीचे गिरा दोगी। उसे उठा कर ऊपर रखने के बाद वापस इंडेक्स फिंगर रखोगे उसका मतलब होगा छठवां क्वेश्चन मिडल फिंगर का मतलब होगा सातवां क्वेश्चन रिंग  का मतलब होगा आठवां क्वेश्चन और इसी तरह से बढ़ते हुए 10 क्वेश्चन के बाद वापस तुम्हें पेंसिल अपनी गिरानी होगी…!

” ओके इसका मतलब 100 क्वेश्चन करने के लिए मुझे हर 5 क्वेश्चन के बाद बाद पेंसिल गिरानी  पड़ेगी..!

” इसी पेंसिल गिराने के तो पैसे मिल रहे हैं तुम्हें..

पुरोहित मैडम मुस्कुराने लगी लेकिन झनक के चेहरे पर अब भी घबराहट के भाव नजर आ रहे थे… उसने अभिमन्यु की तरफ देखा अभिमन्यु बड़े आराम से वहां बैठा अपने बालों पर हाथ फ़िरा रहा था…

   ” मैडम एक बात और पूछनी थी, यह लड़का यहां क्या कर रहा है? कहीं इतने यूनिवर्सिटी में किसी से कुछ कह दिया तो..?”

  “अरे नहीं अभिमन्यु से मत डरो, यह किसी से कुछ नहीं कहेगा। यह भी  तुम्हारी तरह इंजीनियरिंग एंट्रेंस क्लियर करवाने के लिए आया हुआ है..।”

“अच्छा मुझे तो पता ही नहीं था..।”

“हां !! तो मुझे भी कहाँ पता था कि तुम भी यहां मिलोगी?”

“चलो अब आपस में परिचय तुम बाद में करते रहना। फिलहाल यहां आज तुम लोगों को बुलाने का कारण मैं बताने जा रही हूँ….
   कल जो एंट्रेंस एग्जाम होने जा रहा है, उसका पेपर आज रात में दस बजे ऑनलाइन लीक हो जाएगा..
वह पेपर ठीक 10 बजे मेरे मोबाइल पर आएगा, और ठीक 10 मिनट बाद वह पेपर डिलीट कर दिया जाएगा। उस पेपर के फटाफट स्नैपशॉट लेने के बाद तुम दोनों को ही डेढ़ से दो घंटे मिलेंगे, उस पेपर को सॉल्व करने के लिए। क्योंकि यहां बैठे जो बच्चे हैं इन लोगों ने एक अलग पैकेज लिया है, इसमें यह सभी लोग अपना एंट्रेंस एग्जाम खुद देने जाएंगे, लेकिन इन्हें लीक हुआ पेपर  और उसके आंसर आज मिल जाएंगे आज रात भर ये सारे बच्चे यही बैठेंगे….
     तुम लोगों को सवा दस तक मैं एग्जाम पेपर के स्नैपशॉट दे दूंगी, उसके बाद तुम सवा दस  से कोशिश करना कि साढ़े ग्यारह तक में पूरा पेपर सॉल्व कर दो। जिससे साढ़े ग्यारह से रात भर में जब तक चाहे यह लोग उन आंसर्स को रट लें… और कल पेपर में सिलेक्ट हो सके…

” ओके!! लेकिन मैडम ये पेपर लीक कौन करवा रहा है?”

झरना ने चौक कर मैडम से सवाल किया और मैडम मुस्कुराने लगी…

   “इस सब से हमें क्या लेना देना… हमें बस इस बात की जिम्मेदारी सौंपी गई है, कि इन सारे बच्चों को सेलेक्ट करवाना है।
     यह सारे के सारे बच्चे एमबीशन एकेडमी के हैं।  और इस अकैडमी का रिकॉर्ड है कि हर साल सबसे ज्यादा मेडिकल सीट और इंजीनियरिंग सीट्स उन्हीं के यहां के बच्चे ले जाते हैं…. कुछ दो चार बच्चे अपनी मेहनत से पढ़कर भी पास होते हैं। और कुछ इनकी तरह होते हैं, जिन्हें सही वक्त पर पेपर मिल जाता है। और पेपर सॉल्व करके देने वाला भी…
     बस यह आज की रात बैठ कर सही आंसर याद करेंगे और कल जाकर पेपर दे लेंगे और सेलेक्ट हो जाएंगे। क्यों बच्चों इतना कॉन्फिडेंस तो है, ना कि अगर तुम लोगों को आंसर मिल जाए तो 2 घंटे में रट के आप लोग कल पेपर बना सकते हो…..

उन बच्चों ने दबी घुटी से आवाज में हां में सिर हिला दिया..

अभिमन्यु ने उन लोगों को देखने के बाद पुरोहित मैडम से सवाल कर दिया..

“मैडम क्या इंजीनियरिंग वाले बच्चे भी यही मौजूद है..?”

पुरोहित मैडम ने ना में सिर हिलाया और उस कमरे से एक तरफ लगे एक दरवाजे की तरफ इशारा कर दिया..
उनके इशारा करते ही पुरोहित सर उठकर उस दरवाजे तक चले गए और उन्होंने दरवाजे को खोल दिया दरवाजे को खुलते ही अंदर लगभग ढाई तीन सौ बच्चों की भीड़ थी…
वह कमरा इस कमरे से लगभग तीन गुना बड़ा था, और बच्चे भी बहुत सारे थे.. सभी बच्चों के हाथों में किताबें दिखाई दे रही थी और सब धीरे-धीरे पढ़ने की कोशिश कर रहे थे…

“इंजीनियरिंग एंट्रेंस क्लियर करने के लिए भी इतनी मारामारी है यह मुझे मालूम नहीं था..!”

अभिमन्यु के ऐसा कहते ही पुरोहित मैडम मुस्कुरा उठी

“गॉड गिफ्टेड हो तुम जो इतनी आसानी से एंट्रेंस क्लियर कर लिया! वरना यहां फिजिक्स की किताब खोलने में ही लोगों के दिमाग का दही हो जाता है..!”

“यस मैम!! और मैं उस दही का रायता बनाकर पी जाता हूं ।
         पेपर मिलते ही मैं फटाफट सॉल्व करके इन लोगों को दे दूंगा, लेकिन मैं यह जानना चाहता था मैडम की कल क्लासरूम में बैठने के बाद मुझे कितने लोगों को कॉपी करवाना है….

   “अभिमन्यु बेटा तुम्हें तो पूरी क्लास को ही कॉपी करवाना है।”

पुरोहित मैडम अपनी बात पूरी कर के हंसने लगी उनकी बात सुन अभिमन्यु भी हंसने लगा..

“ओके मैम!! अगर मेरी क्लास रूम में बैठने वाले स्टूडेंट्स के साथ मुझे एग्जामिनेशन हॉल में घुसने के पहले दस मिनट मिल जाए तो मैं अपने कोड कि मैं उन्हीं किस ढंग से कॉपी करवाना है, वह बता लूंगा..

“वेरी स्मार्ट बॉय! अभिमन्यु तुम वाकई बहुत स्मार्ट हो और तुम देख लेना एक दिन बहुत आगे जाओगे..!””

“मैं जानता हूं ,  एक दिन मुझे बहुत आगे जाना है ..और उसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं..”

अभिमन्यु जितने आराम से पुरोहित मैडम से बात कर रहा था झनक उतनी ही घबराई हुई सी लग रही थी..

“क्या हुआ तुम इतना घबराई हुई थी क्यों हो….?”

अभिमन्यु के सवाल पर झनक ने उसे देखा और ना में सिर हिला कर चुपचाप बैठ गई । फिर कुछ देर रुक कर  उसने अभिमन्यु से ही सवाल कर दिया..

  “इतनी टेंशन वाली सिचुएशन में भी तुम इतने कूल कैसे हो?”

“ऐसा ही हूं मैं! बहुत हैंडसम टाइप का..!”

अभिमन्यु की बात सुन झनक और चिढ गई और पुरोहित मैडम हंसने लगी…
“परेशान मत हो झनक!! तुम पहली बार यह काम करने जा रही हो, इसलिए थोड़ा घबराई हुई हो। लेकिन डरो मत वहां हर तरफ हमारे लोग ही रहेंगे, जो तुम्हारी मदद करेंगे । इसलिए तुम्हारे पकड़े जाने का कोई सवाल नहीं होता, तुम वहां पूरी तरह से सुरक्षित हो…!”

“हमें पैसे कब मिलेंगे मैम?”

झनक के सवाल पर पुरोहित मैडम मुस्कुरा उठी। उन्होंने धीरे से अपना सिर हिलाया और उठ कर एक दरवाजा खोल दूसरे कमरे में चली गई…. उन्होंने जाते-जाते अभिमन्यु और झनक को अंदर आने का इशारा कर दिया उनका इशारा पाते ही वह दोनों भी उनके पीछे चले गए…

  “यह बच्चे हमारे कस्टमर है झनक, इनके सामने हम रुपयों पैसों की बात नहीं करेंगे। इनके पेरेंट्स ने हमें बहुत सारा पैसा दिया है इसलिए तुम चिंता मत करो..!”

पुरोहित मैडम ने अपना पर्स खोलकर  रुपए निकाले और झनक के हाथ पर रख दिए…
इतना सारा रुपया एक साथ देख कर झनक की आंखें फटी की फटी रह गई।  अभिमन्यु भी झनक के सामने आकर ऐसे खड़ा हो गया कि उसे आसानी से सब कुछ दिखाई देता रहे, उसने पुरोहित मैडम की तरफ देखा और मुस्कुराने लगा…

“और मेरे पैसे?”

उन्होंने एक बड़ा सा बंडल उठाकर अभिमन्यु की हथेली पर भी रख दिया।  अभिमन्यु ने उस बंडल को चारों तरफ से अच्छे से देखने के बाद मुस्कुराकर पुरोहित मैडम को थैंक यू बोला और पैसे अपनी बैग के हवाले कर दिए…..

क्रमशः

aparna

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