
अपराजिता -143
यज्ञ और अखंड वापस घर लौट गए…
रास्ते भर रेशम का चेहरा याद कर के यज्ञ मुस्कुराता रहा, लेकिन उसकी अपने भाई से और कुछ पूछने की हिम्मत नहीं हुई..
अखंड पर क्या बीत रही थी, ये वही जानता था..।
किसी से टूट कर मुहब्बत करना, और फिर उसे ना पा सकने की पीड़ा अपनी जगह है, लेकिन उसको किसी और के साथ खुश देख कर दिल में जो टीस उठ रही थी, उसका कोई उपाय नहीं था…।
लेकिन मन के किसी कोने में अथर्व को देखने के बाद एक राहत भी थी, कि रेशम को एक सच्चा और प्यारा जीवनसाथी मिला है…
अखंड को आज कॉलेज के दिन वापस याद आ गए थे, एक एक बात याद आ रही थी…।
उसके भक्त गोलू और लल्लन उसके पीछे पीछे लगे रहते थे, उसके एक इशारे पर वो दोनों पूरी दुनिया हिला देने की बात कहते थे..!
आज गोलू तो वापस मिल गया, लेकिन लल्लन का अब तक कोई पता नहीं चला था..।
पता नहीं लल्लन कहाँ चला गया था..
उसके केस चलने तक तो वो था, उसके बाद कहाँ गया, किसी को मालूम नहीं चला था…?
अखंड ने अनिर्वान से इजाजत लेकर गोलू को अपने साथ ले लिया था..
गोलू को सुरक्षित रखने के किये अनिर्वान ने उसे थाने में रखा था, लेकिन जब अखंड ने उसकी पूरी जिम्मेदारी खुद पर ले ली, तब अनिर्वान ने उसे साथ ले जाने की मंजूरी दे दी..
वो तीनो लोग घर पहुँच गए..।
घर पहुँचते ही अखंड ने गोलू को ऊपर अपने कमरे में भेज दिया, वो जानता था अभी घर भर के लोग उससे वीर के बारे में पूछताछ करने लगेंगे…
गोलू भी इतने दिनों से थका हारा था..अखंड चाहता था वो आराम कर ले..
घर के नौकर से बोल कर उसने गोलू के लिए खाने का इंतज़ाम करवा दिया..
कुसुम बहुत देर से यज्ञ का इंतज़ार कर रही थी.. उसने दो तीन बार उसके मोबाइल पर फ़ोन भी लगाया लेकिन यज्ञ थाने में बैठा होने के कारण फ़ोन नहीं उठा पाया…
वो लोग घर पहुंचे, और बरामदे में ही इंतज़ार करते घर के लोग उन लोगो को बिना वीर के आये देख कर सवाल करने लगे..!
सबसे पहले काकी ही आगे चली आयी..
“क्या हुआ अखंड… बाबू को नहीं लाये तुम लोग ? अरे ऐसा हो क्या गया जो पुलिस उसे पकड़ कर ले गयी.. सुबह से अभी रात हो गया और तुम लोग अकेले ही वापस आ गए ?”
काकी के सवाल के साथ ही बड़े ठाकुर की रुआबदार आवाज़ कमरे में गूंज गयी..
“कहाँ है वीर ? बोलते क्यों नहीं तुम दोनों?”
उनकी कड़कती आवाज़ सुन अखंड ने उनकी तरफ देखा और धीमे से अनिर्वान की बात बताने लगा, लेकिन उसकी बात बीच में ही काट कर वापस बड़े ठाकुर गरज उठे..
“ऐसा कौन सा पुलिस वाला पैदा हो गया जो परिहारों के लड़के को पकड़ कर सलाखों के पीछे डाल गया.. !”
बड़े ठाकुर की आवाज़ के साथ ही अखंड और यज्ञ चुप खड़े रह गए और काकी ने रोना धोना मचा दिया..
उसी समय सुराज भी वहाँ चली आयी..
उसे घर आये मुश्किल से चार दिन भी नहीं बीते थे और घर पर इतना बड़ा कांड हो गया था..
“वीर तो शुरू से ही बिगड़ा हुआ था, लेकिन आज तक कभी थाना कचहरी की नौबत नहीं आयी थी.. ये सब क्या नया नया लगा लिया, आप लोगों ने ? हैं…? अखंड भैया ये क्या सुन रहे है हम! वीर कोई आज का पैदा हुआ लड़का है क्या, जो गलती किया तो थाने में बैठा दिए..!
बताइये तो सही, हम भी तो जाने की आखिर किया क्या है हमारा भाई !”
सुराज जब से आयी थी उसे कुसुम बेहद खटक रही थी..
सुराज बहुत पहले से अपने यज्ञ भैया के लिए अपनी एक रिश्ते की नन्द का रिश्ता सोचे बैठी थी.।
सुराज की बुआ सास की इकलौती बेटी को बड़े जतन कर बुआ सास ने पढ़ने लिखने बाहर भेजा था, पर शहर रह कर भी लड़की कुछ खास गुल नहीं खिला पायी थी… लड़की चमचमाती हुई गोरी थी, इसके अलावा उसमे और कोई गुण नहीं था। लेकिन सुराज को उसके गुणों से कोई लेना देना भी नहीं था, लड़की अपने साथ ट्रक भर कर दहेज़ लाने वाली थी, वहीँ उसका सबसे उज्वल पक्ष था। जो सुराज को सबसे अधिक भाया हुआ था..
वैसे तो उसका मन वीर के लिए ये रिश्ता करवाने का था, लेकिन वीर के जैसे लक्षण थे उससे वो खुद समझ गयी थी, कि अपनी इकलौती लड़की को सब जान देख कर कोई माँ ऐसे कुंए में धक्का नहीं देगी। बस इसीलिए उसने वीर की जगह यज्ञ के नाम का डंका पीट रखा था अपनी बुआ सास के सामने।
लेकिन जब अचानक यज्ञ और कुसुम के ब्याह की बातचीत हुई और उसे उसकी माँ ने तस्वीर भेजी, तब अपने दिल की जलन की वजह से वो उस तस्वीर को पसंद करने का कोई कारण ढूंढ़ नहीं पा रही थी..
“छि लड़की तो सांवली है.. क्या देखा आप लोगो ने अम्मा..? और बडी अम्मा को और कोई लड़की नहीं भाई.. यही काली कलूटी मिली ?” कुसुम की तस्वीर देखने के बाद ये सुराज के शब्द थे, उसकी माँ ने उसकी आवाज़ धीमी करवा दी थी..
“अरे धीरे बोलो, कोई सुन ना ले.. दूर्वागंज के चंद्रभान की बहन है.. इंद्रभान सिंह ठाकुर का नाम सुना है की नहीं..।
आसपास के गाँवो के सबसे बड़े जमींदार है.. दूर्वागंज छोड़ो बाकी के भी पन्द्रह बीस गांव इन्हीं के हैं.. घर भर की इकलौती लड़की है.. !”
“अरे तो क्या वो लोग गांव तुम्हारे नाम लिख देंगे अम्मा ? तुम भी अजीब बात करती हो.. हम इत्ता अच्छा रिश्ता बताये रहे, लेकिन तुम लोगों का तो मति मारा गया है। अम्मा अगर मधुलिका से यज्ञ भैया का रिश्ता जुड़ जाता ना तो पैसों की नदी बहा देती हमारी बुआ सास..
हमसे उन्होंने बोला था अगर तुम्हारे किसी भाई के यहां जुड़ जाता है रिश्ता, तो तुम्हें 10 तोले का हार देंगे..
अब सोच लो, जब हमें 10 तोले का हार दे रही है तो लड़के की मां और काकी को क्या-क्या देते ? लेकिन नहीं तुम लोग तो सांवली सलोनी पर लट्टू हुए बैठे हो..
“अरे हम इसमें का कर सकते हैं.. जिज्जी और भाई साहब जाने, उनका लड़का है जहाँ वो करना चाहेंगे, वहीँ ना शादी होगी यज्ञ की !”
“वाह तो ये जॉइंट फैमिली का मतलब ही क्या हुआ फिर ?”
“वो सब छोडो ये बताओ, तुम्हारी बुआ सास वीर के लिए हाँ नहीं बोलेंगी क्या ? अगर वीर के लिए बोल दे तो यही करवा दो रिश्ता.. पा लेना अपना दस तोले का हार !
“पहले अपने लड़के को कुछ काम धंधा करने तो बोलो..
कितनी बार कहा है, यज्ञ भैया के पीछे लग कर काम सीख ले पर तुम्हारे लड़के को मटरगश्ती से फुर्सत मिले तब ना कुछ करेगा.. !
वैसे हम तो बात चलाये रहे लेकिन सुकीर्ति भी बहुत है ना तुम्हारे लड़के की.. का करें ?
हम तो पहले वीर का ही चर्चा किये रहे, लेकिन हमारी बुआ भी इसके लक्षण जाती है उन्होंने सीधा अखंड भैया के नाम की अर्जी लगा दी..
हमने कह दिया वो ब्याह नहीं करना चाह्ते, तब फिर उन्होंने यज्ञ भैया का नाम सामने कर दिया और हम भी मान गए.. लेकिन यहाँ आप सब ने उलटी ही गंगा फिरा दी.. अब क्या करे !”
और इसीलिए जब यज्ञ और कुसुम का ब्याह हुआ रूठी बैठी सुराज शादी में नहीं आयी, हालाँकि उसके पास उस वक्त बहाना भी था कि वो भारत से बाहर है, लेकिन आना चाहती तो आ सकती थी..
बाद में वापस भारत लौटने के बाद जब अपनी बडी अम्मा की तबियत का उसने सुना तब उसकी माँ ने उसे घर आने के लिए बहुत ज़ोर दिया और वो बडी अम्मा को देखने के बहाने चली आयी..
लेकिन जब से आयी थी, उसे कुसुम का कोई काम, उसका बोल चाल कुछ नहीं भा रहा था….
वो हर गलत बात का दोषी कुसुम को बनाने पर ही तुली थी। आज भी वीर के घर ना आने का ठीकरा उसने कुसुम पर ही फोड़ दिया..
“ताऊ जी हमें तो घर का माहौल ही बदला बदला सा लग रहा… ऐसा लग रहा जैसे वीर को जानबूझ कर घर से बाहर निकालने ही ये सब किया गया है.. ।
सुबह जब पुलिस लेने आयी थी तो भाभी को क्या ज़रूरत था ठुमक कर वीर को उठाने जाने का..
अरे पुलिस वाले से बोला भी तो जा सकता था कि वीर घर पर नहीं है.. लेकिन कोई कुछ बोलता उसके पहले ये सीढ़ियां चढ़ कर पहुँच गयी वीर को उठाने..
और इतना जोर जोर से बोल कर उठाया कि बाहर खड़े पुलिस वाले को भी सुनाई दे गया की हाँ घर पर लड़का मौजूद है !”
“इसमें हमारी क्या गलती दीदी ? हम तो बस वीर को बुलाने गए थे.. हमने पुलिस को थोड़ी बुलाया ?”
“ये देखो… इसे कहते हैं चोर की दाढ़ी में तिनका.. हमने तो ऐसा कहाँ भी नहीं की आप पुलिस बुलाई है फिर आप खुद पर काहे ले ली हैं… मतलब कहीं सच में आप ही तो नहीं बुलाई है ?”
“आप हम पर इल्ज़ाम लगा रही है ?” कुसुम की आवाज़ धीमी ज़रूर थी, मगर आवाज़ में गंभीरता थी और उसकी बात पर सुराज चीख पड़ी..
“ये देखिये अब हम पर ये तोहमत भी लग गयी कि हम घर की नयी नयी आयी बहु पर इल्जाम डालने लगे हैं.. छि छि अम्मा हमारा सामान लगा दो, हम निकले यहाँ से.. वैसे भी जब मायके में भौजाई अनादर करने लगे तो ऐसे मायके में रहने का कोई शौक नहीं है हमें.. !”
अखंड और यज्ञ घर पहुंचे ही थे और सुराज ने बवाल कर दिया..
“सुराज इतना बात काहे बढ़ा रही हो.. ऐसा तो कुछ नहीं बोला कुसुम ने !” यज्ञ ने कहा और ये सुनते ही सुराज बौरा गयी..
“बस यही बाकी था.. कल की आयी बीवी के लिए बहन को खरी खोटी सुना दी.. अब हम क्या करें अम्मा यहाँ रह कर.. हम आज ही चले जायेंगे.. अब नहीं रहना.. पहले भाभी ने सुना दिया अब भाई बोल रहे.. हम इतने कड़वे वचन सुन कर नहीं रह सकते.. ।”
अखंड इस सब के बीच पहले ही वहाँ से हट कर ऊपर चला गया..
ऊपर अपनी माँ के कमरे में पहुँच कर वो उनके पास जाकर बैठ गया..
“क्या हुआ अखंड… बोलो बाबू ! क्या हुआ ?”
अखंड चुप बैठा रहा, उसकी अम्मा फिर से वही सवाल करने लगी..
वो थोड़ा आगे सरका, और अपनी माँ के गले से लग गया..
वो धीरे धीरे उसके बाल सहलाने लगी… और वो चुपचाप आंसू बहाने लगा..
एक माँ ने अपने लाड़ले के दिल का दर्द समझ लिया..
फिर ना उन्होंने कुछ पूछा ना अखंड ने कुछ कहा, लेकिन दोनों ही अपना अपना दर्द बहाते रहे..
नीचे भयंकर उत्पात मचा हुआ था, सुराज जो मुहं में आ रहा था बोलती चली जा रही थी कि बड़े ठाकुर जोर से गरज पड़े..
“अरे बस.. चुप हो जाओ सब.. कोई कहीं नहीं जा रहा..। बहु जाओ सबके खाने का बंदोबस्त देखो.. अब यहाँ कोई कुछ नहीं बोलेगा.. ! लड़के सुबह के गए अभी लौटे हैं, उनके खाने की कोई फिकर करेगा भी या नहीं.. !”
बड़े ठाकुर के गरजने के साथ ही सुराज चुप रह गयी..
और कुसुम चुपचाप रसोई में चली गयी..
यज्ञ भी अपने कमरे में चला गया…
आज सुबह के बाद से एक के बाद एक ऐसा कुछ हो रहा था की यज्ञ भी परेशान हो गया था.. सुबह वीर को पुलिस के द्वारा पकड़ कर ले जाना…
उसके बाद अखंड भैया की ज़िन्दगी से जुड़े इतने बड़े राज से पर्दा हटना.. सब कुछ ऐसे एक साथ होता चला गया की यज्ञ जैसे धैर्यवान आदमी का भी धैर्य चूक गया था।
और कभी अपनी बहनों को कुछ ना बोलने वाला लड़का आज सुराज की बात पर तिलमिला गया था..।
अपने कमरे में जाते वक्त उसने भी अपनी आदत के अनुसार अपनी माँ के कमरे में झांक लिया.. अखंड माँ के पास ही लेटा था और उसके बगल में बैठी अम्मा उसके सर पर हाथ फेर रही थी…
यज्ञ भी वहां दाखिल हो गया.. अपनी अम्मा के पैर छूकर वो निकल गया..।
अखंड सो गया था इसलिए कहीं वो आवाज़ से जाग ना जाये ये सोच कर ना यज्ञ ने कुछ बोला और ना अम्मा ने..
कुछ ही देर में खाना परोसने की तैयारी करने के बाद कुसुम यज्ञ को बुलाने चली आयी..
घर के सारे मर्द एक साथ खाना खाने बैठ गए। लेकिन आज ठाकुर परिवार में एक चुप्पी सी छायी हुई थी….
कुसुम अपनी सास की थाली परोस कर ऊपर ही ले गयी.. कुसुम को देख शची धीमे से बोल पड़ी….
“वीर को नहीं छुड़वा पाए है ना कुसुम ? उसी बात पर नीचे कलह हो रही थी ना ?”
“जी अम्मा जी !”
“फिर हम यहाँ खा ले, अच्छा नहीं लगता ना.. हम भी नीचे ही चलते हैं ! शकुन के साथ खा लेंगे !”
“ठीक है अम्मा जी !” कुसुम ने थाली उठा ली.. अखंड गहरी नींद सो गया था, उसके खाने के लिए कुसुम ने इशारे से अपनी सास से पूछा और उन्होंने “उसे सोने दे” का इशारा कर दिया, और दोनों सास बहु नीचे चली गयी..
घर की औरते खाने बैठी, शची के बहुत कहने पर शकुन थाली लेकर तो बैठी लेकिन एक दो कौर खा कर उसने थाली सरका दी और आंसू बहाने लगी..
सुराज का मुहं फुला हुआ था, वो बिना खाये पिए ही अपने कमरे में बैठी थी…
अपनी सास का मुहं देख कर आखिर कुसुम सुराज की थाली परस कर उसके कमरे में ले गयी..
भूख तो सुराज को भी लग रही थी.. इसलिए जैसे ही कुसुम थाली लायी, थोड़ा नाज नखरा कर उसने झटपट थाली पकड़ ली…
उसे भी लगा जैसा इस नैकी भौजाई का स्वभाव है, अगर ज्यादा नानुकुर की तो पता नहीं अगली बार खाना देगी भी या नहीं..
कुसुम भी मुस्कुरा कर रह गयी..
क्रमशः
दोस्तों जानती हूँ, आज का पार्ट छोटा हो गया है, लेकिन मैं एक छोटी सी छुट्टी पर हूँ.. ट्रैवल कर रही इसलिए लिखना मुश्किल हो रहा था, एक बार डेस्टिनेशन पर पहुँच कर शायद ठीक से पार्ट दे पाऊँगी..
मुझे पढ़ने के किये शुक्रिया नवाज़िश..
aparna…

Veer ke ghar nahi aanaya per ghar sub dukhi ho gya,khas kar Veer ki Ma,orBahan ne to bakhara khara kar diya,Waiting for the next part.
🤦🏻♀️हाय ये क्लेशी लड़की सुराज 🤦🏻♀️बिना बात का बतंगड़ बनाए जा रही, मन मे क्लेश तो यही है बेचारी का 10 तोले का हार छीन गया। और यज्ञ ने भी कुसुम का साथ दिया गुस्सा और बड़ गया पर ये कुसुम कुमारी को जानती नहीं है अगर वो अपनी पर आ गई ना तो तेरा बोरिया बिस्तर गोल हो जाएगा यहाँ से।
आज अखंड अपनी माँ की गोद मे सुकून की नींद सो रहा, मन हल्का जो हुआ है आज उसका।
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।
Next part kab aayega mam, kahani bahut ache jagah par aakar ruk gai hai.please kuch to update dijiye ki next part kab aayega.
Super
Pyara part.. 👌👌👌👌👌
सुराज जैसी नंदो का क्या ही करे , पर यज्ञ ने साथ दिया वो अच्छा लगा , अपनी पत्नी अगर सही हो तो उसका साथ देना ही चाहिए , फिर चाहे जो भी हो सामने , बहन या मां उनको बताना चाहिए कि पत्नी गलत नहीं इस जगह , और वोही कम यज्ञ ने किया ।
आज अखंड ने अपना सारा दिल खोल के रख दिया अपनी मां के सामने , ❤️👌👌
Very nyc part👌👌
यह सूराज क्यों बिना फिजूल में सुरसा सा मुंह फाड़ रही है ज्यादा नंद बनने का शौक चल रहा है पर यह भूल रही है कि यह कुसुम कुमारी है जो हर किसी की वाट लगाना जानती हैं नंदवाई जरा संभल कर नहीं तो भाभी जी के जब बोल निकलना शुरू होंगे ना तो आप अपने विदेश यात्रा की टिकट करती नजर आएंगे।
घर का माहौल वैसे ही खराब है वीर की वजह से और अगर कुछ बात आगे बड़ी तो फिजूल में ही बवाल हो जाएगा
Abhi hi aana tha suraaj naam ki bla ko …ab ye kon sa kaand karne wali h …Ghar me kalesh karwayegi …veer ke kaarname nhi jaanti ….jo kusum per ilzaam lga rhi thi ….sach h kusum hi akal thikane lga sakti h
nice part 👌👍😍❤️