मायानगरी -32

मायानगरी  – 32

       राजमहल में राजा अजातशत्रु के ऑफिस में समर फाईलों को इधर उधर पलटते बैठा था , उसके ठीक सामने युवराज प्रेम और राजा बैठे थे …

“अब बताओ भी समर की हम सब को यहां बुलाने का क्या कारण था,  तुमने कहा था तुम्हें कुछ पता चला है..”

“जी युवराज सा ! अभी चुनाव में हमने जिस गुट से हाथ मिलाया है वो सत्ताधारी गुट था ..आप सभी जानते ही है कि पहले सभी को ये लगा रहा था की हमारी पार्टी विरोधी पार्टी से हाथ मिला कर आगे बढ़ेगी लेकिन ऐन मौके पर सब उल्टा हो गया ।
   मैं आप लोगों को यह बताना चाहता हूँ कि राजा साहब से पहले जो सी एम सत्ता में थे उनका नाम एक बहुत बड़े कांड से जुड़ने जा रहा था कि उन्होंने जांच कमेटी बैठाई और जांच पूरी ना हो पाने की स्थिति में अपने पद से त्यागपत्र देने की घोषणा कर दी। उन्हें पता था कि  जांच सही तरीके से नहीं होने वाली थी और इसीलिए उन्होंने तुरंत त्यागपत्र दे दिया। चुनाव का समय था ही उन्हें पता था कि अब चुनाव होने हैं और वह यह  अच्छे से जानते थे कि राजा अजातशत्रु भी चुनाव में खड़े होने वाले हैं, इसलिए उनका शुरू से यह मन था कि किसी तरीके से राजा साहब उनकी पार्टी में शामिल हो जाएं जिससे उनके ऊपर लगे कलंक के धब्बे साफ हो सके।
    आप सभी जानते हैं कि उन पर मेडिकल सीट्स के खरीद-फरोख्त का इल्जाम लगा था। उनके स्वयं के छोटे भाई के बेटे को इसी ढंग से मेडिकल सीट दिलवाई गई थी इसके अलावा भी उनकी पार्टी के कई प्रत्याशियों के रिश्तेदारों के बच्चों को मेडिकल और इंजीनियरिंग सीट्स दिलवाई गई उस समय बड़े पदों पर आसीन कई बड़े परिवारों के बच्चे भी इसी तरह  से सेलेक्ट हुए … कुल कितने बच्चे इस तरह से सेलेक्ट होकर आए हैं, उन्हें बाकी बच्चों में से छांट कर निकालना अभी पूरी तरह से संभव नहीं हो पाया है, लेकिन वह जांच अब भी चल रही है।  उस सारी जांच प्रक्रिया में निष्कलंक निकलना जब मुश्किल लगा तब उन्होंने त्यागपत्र दे दिया और बड़ी चालाकी से सारा माहौल ऐसा बना दिया की मुझे उस वक्त पर लगा कि वह सही व्यक्ति हैं और उनकी पार्टी से हाथ मिलाना ही राजा साहब के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
       सबसे बड़ी और अहम बात ये है की  उन्हें मालूम चल चुका था कि हम लोग चाहते हैं कि किसी भी तरीके से राजा अजातशत्रु मुख्यमंत्री का पद पा जाए। मैं जानता हूं यह मेरा अपना लालच था लेकिन उन्हें इस बारे में मालूम चल गया था, और वह इस बात को समझ रहे थे कि मैं राजा साहब को मुख्यमंत्री बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दूंगा। और उन्होंने अपने खास आदमी को भेज कर मुझसे एक मीटिंग की। उस मीटिंग में जब मैंने उनसे इस तरह से मेडिकल और इंजीनियरिंग सीट की धोखाधड़ी के बारे में बात की तब उन्होंने इस बात से साफ इंकार कर दिया और मुझे कई ऐसे दस्तावेज दिखाए जिससे उस वक्त मुझे लगा के उन्हें जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। उस वक्त उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि अगर हमारी पार्टी उनके पार्टी से हाथ मिला लेगी तो वह राजा साहब को ही सीएम बनाएंगे।
     मैं जानता हूं मुझे इतनी आसानी से उन पर विश्वास नहीं करना चाहिए था और उनके दस्तावेजों के बारे में थोड़ी और जांच  पड़ताल कर लेनी चाहिए थी, लेकिन उस वक्त हमारे पास समय बहुत कम था और एक साथ सारी चीजें चल रही थी इसलिए मेरा ध्यान उनके कागजों से भटक गया और मुझे लगा कि शायद यह आदमी सही कह रहा है।
    क्योंकि इतने बड़े पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ अपोजिशन अक्सर ऐसे ही भद्दे इल्जाम लगाया करता है जिससे उसके चरित्र पर कलंक लगे और उसे उसके पद से हटाया जा सके और बस यही सब सोचकर मैंने उनसे हाथ मिला लिया और यही मेरी चूक हो गई।”

“मतलब ? तुम कहना क्या चाहते हो समर?”

राजा अजातशत्रु के माथे पर समर की बात सुनकर बल पड़ गए और उनके सवाल को सुनकर समर थोड़ा और परेशान  हो गया..

” राजा साहब उस समय उन्होंने मुझसे जो कुछ भी कहा था वह सब झूठ था.।
   सच्चाई तो यही है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग सीट की खरीद-फरोख्त में वह और उनके खास लोग पूरी तरह से लिप्त हैं जब उनके राज का पर्दाफाश होते उन्होंने देखा तो उन्होंने त्यागपत्र दिया और जानबूझकर आपकी पार्टी से हाथ मिलाया क्योंकि आपकी पाक साफ  छवि के कारण आप पर कोई भी इस तरह का इल्जाम लगाने से पहले सौ बार सोचेगा , और जब एक बार आपकी पार्टी उनकी पार्टी से हाथ मिला कर एक साथ खड़ी होगी तो आपके ऊंचे पूरे व्यक्तित्व के पीछे वह छुप कर दुनिया से मुंह छुपा सकेंगे। जब एक बार फ्रेम में राजा अजातशत्रु आ जाएंगे तब किसी का ध्यान उन पर लगे इल्जाम की तरफ नहीं जाएगा और इस तरह से आपके पीछे छुप कर बैठे वह बड़ी आसानी से इन सारे इल्जामों से बच जाएंगे।  जाहिर है कि उन पर और उनके खास लोगों पर जो जांच बैठाई गई है वह सरकार की तरफ से यानी आप की तरफ से बैठाई गई है और वह आपके ही कैबिनेट के मंत्री हैं उनके अलावा उनके वह खास लोग जिनके रिश्तेदार इस तरह से मेडिकल और इंजीनियरिंग की सीट पाकर पढ़ रहे हैं वह भी आपकी कैबिनेट में मौजूद है। जाहिर सी बात है एक साथ इतने सारे लोगों को आप कटघरे में खड़ा नहीं कर सकते क्योंकि इससे आप के मंत्रिमंडल के कार्य पर प्रभाव पड़ेगा इससे आपका और आपके मंत्रिमंडल का काम अटकने लगेगा।
    वो आदमी बहुत शातिर है उसने यह सब कुछ चुनाव आचार संहिता लगते ही सोच विचार लिया था और बल्कि मैं यह कहता हूं कि वह आदमी कहीं मन ही मन आपको चुनाव में खड़ा देखकर बहुत खुश भी हुआ होगा क्योंकि उसे पता था कि आप जितनी भी सीट से खड़े होंगे सभी सीट जीत जाएंगे और आप से हाथ मिला कर वो अपनी जनता के सामने अपनी छवि सुधार पाएगा।

”  लेकिन मुझे एक बात समझ में नहीं आई समर? उन्होंने जो किया खुद को बचाने के लिए किया,  लेकिन उन्हें यह विश्वास कैसे है कि मैं यानी सरकार उन पर केस नहीं करेगी और उनकी जांच को मैं निष्पक्ष ना करवा कर उनका साथ दूंगा?

” वह अच्छे से जानते हैं हुकुम कि आप ऐसा कभी नहीं करेंगे इसलिए तो उन्होंने एक चाल और चली और वह अभी से नहीं लगभग साल भर से उस चक्रव्यू को रच रहे थे और वो चक्रव्यू रचा है उन्होंने आपकी माया नगरी में?

” यह क्या कह रहे हो समर? साफ-साफ बताओ बात क्या है”

युवराज का धैर्य छूटने  लगा था समर ने युवराज की तरफ देखा और आगे की बात कहनी शुरू की..

“मायानगरी विश्वविद्यालय लगभग 10 साल से बन रहा था। आपके पिता साहब ने बनवाना शुरू किया था और उसे पूरा किया है आप दोनों भाइयों ने मिलकर ।
  ..राज महल के बाहर भी यह कहा जा सकता है कि इस पूरे राज्य में लगभग हर एक अभिजात्य वर्ग के परिवार को माया नगरी के बारे में मालूम था, तो जाहिर है कि उन्हें भी इस यूनिवर्सिटी के बारे में मालूम था वह अच्छे से जानते थे कि यह आप दोनों भाइयों का सपना है।
    यूनिवर्सिटी शुरू होते ही उन्होंने अपने गुर्गे अंदर भेज कर अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया था उनका जाल मेडिकल में बिछ भी गया …..
        उन्होंने ये सोच रखा था कि उनका जाल पूरी यूनिवर्सिटी में फैल जाए और आपको इस ढंग से फंसा ले की आप उनके ख़िलाफ़ कुछ कर ही ना पाएं, यहीं उनका मुख्य उद्देश्य था ..
    लेकिन उनका सपना पूरा होता उसके पहले ही मेडिकल गर्ल्स हॉस्टल में एक हादसा हो गया और यह बात सामने आ गई कि मेडिकल कॉलेज में मैनेजमेंट कोटे की कुछ सीट पर कोई धांधली तो चल रही है!”

” तुम किस हादसे की बात कर रहे हो समर?”

राजा अजातशत्रु के चेहरे पर अब नाराजगी उभरने लगी थी क्योंकि उन्हें अब तक यह मालूम नहीं था कि मेडिकल हॉस्टल में क्या हादसा घटा था?

  समर अपने चेहरे पर आए भाव छुपाते हुए राजा अजातशत्रु को अदिति की मौत के बारे में बताने जा ही रहा था कि उसका फोन बजने लगा….
… उसने फोन देखा, पिया का फोन आ रहा था..
   उसने फोन कट किया और वापस अजातशत्रु से हादसे के बारे में बताने हीं जा रहा था कि एक बार फिर पिया का फोन आने लगा और अब की बार समर ने फोन उठा लिया…

” अभी बहुत जरूरी काम में हूं मैं बाद में बात करता हूं!” यह कह कर समर ने फोन रख दिया।

  उधर समर के फोन रखते ही पिया के चेहरे पर गुस्सा भड़कने लगा !
   
   समर को मालूम नहीं था कि पिया उसे फोन लगा क्यूँ रही है , यानी एक बार भी ये जानते की कोशिश नहीं की । क्योंकि उसके हिसाब से इस वक़्त राजा अजातशत्रु की खोली गई यूनिवर्सिटी में चलने वाली धांधली के बारे में समर ने पिछले सात महीनों मे जो रिपोर्ट तैयार की थी उससे राजा साहब और युवराज सा को अवगत करवाना बहुत आवश्यक था,  और इसलिए उसने सोचा कि पिया को बाद में फोन कर के वो बात कर लेगा लेकिन इधर तो पिया और पंखुड़ी की अलग ही खिचड़ी पक रही थी।

  असल में जब से पंखुड़ी ने सुना था कि पिया और समर का ब्रेकअप हो गया है उसे अच्छा नहीं लग रहा था वो चाहती थी कि उन दोनों की टूट चुकी सगाई फिर जुड़ जाए और पिया की शादी समर से ही हो जाए…
    उसे पिया की कठोरता समझ नहीं आ रही थी। और इसलिए एक शाम जब वो अस्पताल से अपनी ड्यूटी कर खाली हुई तब उसने पिया को फोन कर मिलने के लिए बुला लिया …
   अस्पताल के पास ही एक कैफे था , वहीं पंखुड़ी ने पिया को बुला लिया था ।
   दोनों लगभग एक ही समय पर वहाँ पहुँच गईं..

” क्या बात है पंखुड़ी? अभी पिछले हफ्ते ही तो हम मिले थे,  अब अचानक तूने मुझे फिर मिलने बुला लिया ?”

“क्या करूँ पिया ? जब से तेरे ब्रेकअप का पता चला है ना मुझे कुछ ठीक नहीं लगा रहा । सोचा तुझ ही से पूछ लूँ.. यार मैं एक बात बोलूँ , लड़कियाँ चाहे चांद पर क्यों न पहुंच जाये उन्हें कहीं न कहीं थोड़ा तो समझौता करना ही पड़ता है। लड़कियाँ क्या लड़कों को भी करना पड़ता है !”

“ओह ज्ञानवती अम्मा जी, आपका ज्ञान आपके पास ही रखिए,  मुझे उस आदमी से कोई लेना देना नहीं है, इसलिए अगर तू ये सोच रही है कि समर से सुलह करने की तू सलाह देगी और मैं मान जाऊंगी तो तू गलत है, और अगर इसीलिए तूने मुझे यहां बुलाया है तो मैं बस अभी वापस जा रही हूं!”

” पागल है क्या?  समर के बारे में समझाने के लिए मैं तुझे इतने महंगे कैफे में क्यों बुलाऊंगी। यहां बुलाने का असली कारण है यहां मिलने वाला स्पेशल सिजलर !”

“व्हाट , तूने  सिजलर के कारण यहां बुलाया है? तू सच में पागल है पंखुड़ी !”

  “अब देख पिया, यहां एक नया कैफे खुला और मैंने सुना कि यहां का सिजलर बहुत टेस्टी है। उसी समय मैंने यह भी सुना कि तेरी सगाई टूट गई है तो मैंने सोचा टेस्टी सिजलर खाते हुए अगर बात करते हैं तो हो सकता है बात बन जाए । पर सुन मेरी तरफ से किसी भी तरह का कोई लोड लेने की जरूरत नहीं है। मैं कोई तेरे पीछे नहीं पड़ जाऊंगी क्योंकि ना तो मैं तेरी मां हूं ना चाची फूफी ताई हूं कि तेरी शादी देर से होगी तो मुझे कोई फर्क पड़ जाएगा।
      तू पच्चीस पार कर या पचास मुझे क्या फर्क़ पड़ना हैं। आंखों के आसपास कुछ झुर्रियां पड़ जाने से या मांग पर के पास के बाल सफेद हो जाने से शादी पर कोई असर शायद ही पड़ेगा , है ना ?”

पिया ने घूर कर पंखुड़ी की तरफ देखा और वेटर की ला कर रखी कॉफी उठाकर पीने लगी..

” मैं तेरी बात समझ रही हूं पाखी, लेकिन मैं भी क्या करूं? वह आदमी पूरी तरह से सनकी है! मैंने काफी कोशिश की ठीक इसी तरह से मैनेज कर लूं पर तुझे पता है उसने क्या किया मेरे साथ?

पंखुड़ी टेबल पर पिया के और नजदीक सरक आई

“ऐसा क्या किया। “

पंखुड़ी की आंखों की चमक देख पिया के चेहरे पर मुस्कान आ गई…

“क्या बताऊं यार? मेरा बर्थडे था और मुझे लगा समर मुझे कोई बर्थडे सरप्राइज  दे कर रहेगा वैसे एक बात मैं पहले से बता दूं कि वह भले ही दिमाग का कितना भी तेज हो कितना भी ब्रिलियंट हो लेकिन उसे मेरा बर्थडे तक याद नहीं रहता, और इस बात के लिए मैं नाराज भी नहीं हूं क्योंकि मुझे पता है कि वह सिर्फ अपने काम की चीज ही याद रखता है। खैर इसीलिए मैंने अपने बर्थडे के एक हफ्ते पहले से उसे याद दिलाना शुरू कर दिया था और इसीलिए उसने मेरे लिए एक बर्थडे सरप्राइस प्लान किया! “

” वाओ! कैंडल लाइट डिनर विद रेड वाइन?”

  पंखुड़ी की चमकती आंखें देख पिया  वापस मुस्कुराने लगी..

हाँ डिनर ही प्लान किया था लेकिन सरप्राइस क्या था तुझे मालूम है?”

” क्या था ?”

” पहला तो उसने मुझे रेस्टोरेंट में जो टाइम दिया था उस पर वह पहुंचा नहीं। मैं मेरे बर्थडे की सरप्राइज पार्टी में अकेली पहुंचकर रिजर्व टेबल पर बैठी उसका इंतजार कर रही थी। दूसरा सरप्राइज मुझे यह मिला कि वह एक बार फिर अपने मॉम डैड के साथ वहां आया था।”

  “थैंक गॉड! मुझे तो लगा था इस बार सरप्राइस में वह डायरेक्ट राजा साहब और उनकी बेगम को डिनर के लिए भेजने वाला था। “

“वह भी चल जाता यार, क्योंकि रानी बांसुरी बहुत इंटरेस्टिंग है।  मुझे राजा साहब और बांसुरी हुकुम कि कंपनी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन होने वाले सास ससुर के साथ कौन सी लड़की रेड वेलवेट शॉर्ट ड्रेस में बर्थडे मनाने में कंफर्टेबल होगी? तू सोच तो भला ?
  और मुझे वो अपने पेरेंट्स साथ लेकर आया इससे भी प्रॉब्लम नहीं थी, लेकिन उसने जो एक्सक्यूज दिया वो इतना जानलेवा था कि मेरी जगह कोई और लड़की होती तो वहीं उसका गला दबा देती!”

“क्या कारण बताया उसने?”

” मुझसे कहता है,  मम्मी पापा के साथ सालों से बाहर डिनर पर नहीं गया था तो सोचा चलो दोनों काम निपटा देता हूं तुम्हारा जन्मदिन भी मन जाएगा और मम्मी की बात भी रह जाएगी कि मैं उन लोगों को समय नहीं देता !”

पंखुड़ी पिया की बात सुन हंसने लगी ..

” हँस ले बेटा,  लेकिन जिस लड़की पर ये बीतती है ना वही इस दर्द को समझ सकती है! उस के बाद भी समर साहब का दिमाग या दिल हमारे साथ डिनर करने में कम और अपने फोन कॉल पर ज्यादा था।  उनके सभी कारिंदो को भी उसी वक़्त मरना होता है… जब समर मेरे साथ होता है। मैं वहाँ उसके पेरेंट्स के साथ बैठ कर बात कर रही थी और वो अपना ऑफ़िस निपटा रहा था ..
  कभी उसकी मम्मी के ऊलजलूल सवालों कि,  बेटा लाल मिर्च का भरवां अचार बनाना आता है?  बेटा खीर में किशमिश भी डाल देती हो क्या? के जवाब सोच रही होती की उसके पापा अपनी तोप दागना शुरु कर देते ..
   की वैसे बेटा आपके घर पर किस राजनैतिक पार्टी के चर्चे होतें हैं?
   अब तू बोल जो लड़का अपनी होने वाली बीवी को गब्बर और मोगेम्बो के बीच छोड़ कर दूर खड़ा ऑफ़िस की फाइल्स हैंडल करता मुस्करा रहा हो उस पर दुनिया की किसी भी लड़की को प्यार कैसे आ सकता है?
   मैं अपनी सास से क्या बोलूँ की सासु जी अचार का अ भी नहीं पता मुझे।
  अरे जिसे आज तक यह समझ नहीं आया कि आम हम खाते है तब तो मीठा लगता है फिर उसका अचार तीखा कैसे ? उससे सासु जी मिर्च का भरवा पूछ रही।
 

“तू ठीक कह रही है पिया, सामने वालों को भी सोच समझकर सवाल करना चाहिए। अरे भाई पहले लड़की की औकात तो देख लो। जिस लड़की को यह नहीं पता कि दाल पीली नजर इसलिए आती है क्योंकि उसमें हल्दी पड़ती है, और चावल पकाने के लिए उसमें  पानी डाल कर उबालना पड़ता है उस लड़की से आप भरवा मिर्च की रेसिपी पूछेंगे तो यही होगा ना? “

  पंखुड़ी अपनी हंसी छुपाते अपनी बात कह रही थी कि उसके आर्डर पर वेटर हॉट सिजलर प्लेट लेकर आ गया…
    सामने कोई खाने की चीज हो और पंखुड़ी इधर-उधर की बात में समय बर्बाद करें यह संभव ही नहीं था। प्लेट आने के बाद उसने प्लेट की तरफ देखा और पिया को देख कर मुस्कुराने लगी..

  “चल अब पहले कुछ खाते हैं उसके बाद तेरी प्रॉब्लम का भी कोई सलूशन निकालेंगे।”

   उसने एक बड़ा सा निवाला मुहँ में भरा ही था कि शेखर सामने से आता नजर आ गया  ..

” सत्यानाश ! जब सोचती हूं सुकून से फैल कर आराम से खाऊँ तभी ये हैंडसम लड़के मेरी टेबल के आगे आकर मरते हैं ! और फिर इनके सामने बैठ कर वहीं फार्मलेटी वाला स्टाईल मार मार के खाओ, जिसमें खाने का मज़ा तो पूरा ही खत्म समझो। “

हालांकि पंखुड़ी ने मन ही मन ये बात कही थी पर उसके चेहरे के भाव देख पिया को कुछ कुछ समझ आने लगा , और वो पीछे मुड़ पड़ी….
    शेखर ने अब तक पंखुड़ी को देखा नहीं था और किसी का फोन आ जाने से वो उल्टे पैर वापस बाहर की ओर निकल गया ..उसके निकलते ही राहत की साँस ले पंखुड़ी फटाफट खाने लगी।
   उसने खाते हुए पिया को भी खाने के लिए इशारा किया लेकिन पिया ने मना कर दिया ।
   पिया को ऐसे गुमसुम बैठे देख पंखुड़ी से रहा नहीं गया ।।

” पिया एक काम कर , तू अभी समर को फोन लगा !”

” तू पूरी पागल है पाखी,  हमारा ब्रेकअप हो चुका है !”

“तू एक बार फोन लगा तो सही! प्लीज मेरे लिए ही लगा ले।

  पंखुड़ी की बात मान पिया ने फोन लगा दिया, लेकिन वो समय शायद सही नहीं था ।
  समर व्यस्त था और वो राजा साहब को मायानगरी में फैल रहे जाल के बारे में बता रहा था और उसी वक़्त आए पिया के फोन को उसने काट दिया…
   पिया की आंखों में आंसू उतर आए और वो चुपचाप कैफे की खिड़की से बाहर देखने लगी कि पंखुड़ी ने उसके होंठो के सामने कॉफ़ी रख दी..

“पी ले! कड़वी कॉफ़ी दिल की कड़वाहट को भस्म कर देती है!”

पंखुड़ी की बात सुनकर पिया के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई और वो भी उसके साथ थोड़ा कुछ खाने लगी…

क्रमशः

aparna….
   




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