
अपराजिता -142
“लेकिन वो तीसरा आदमी कौन हो सकता है?” अथर्व ने पूछा और अनिर्वान उसकी तरफ देखने लगा..
“त्वचा और बालों की जांच की रिपोर्ट से जितना समझ में आया,, उसके अनुसार रेशम के साथ हादसे वाली जगह में कोई लड़की मौजूद थी.. !”
अनिर्वान के इतना कहते ही सब घोर आश्चर्य में डूब गए..
और अनिर्वान ने एक और बम फोड़ दिया
“रेशम जी आपके डाउट्स क्लियर करने के किये आपको किसी से मिलवाना भी चाह्ते हैं..
और अखंड बाबू आपके लिए सरप्राइज है.. !”
अनिर्वान के इशारे पर बाबूराव अंदर चला गया और कुछ ही देर में गोलू को साथ लिए हाज़िर हो गया…
गोलू के आते ही बाकी तो सब सामान्य ही थे, लेकिन अखंड अपनी जगह से तुरंत खड़ा हो गया..
“गोलू तुम… ?”
अखंड ने आगे बढ़ कर गोलू को अपने सीने से लगा लिया.. गोलू भी अपने अखंड भैया के गले से लगा रोने लगा..
उसके लिए तो अखंड भैया उसका पूरा संसार थे।
अनाथ गोलू की सिर्फ पढाई लिखाई का नहीं सारा खर्च अखंड ही उठाया करता था…।
अखंड गोलू से बहुत प्यार करता था, लेकिन गोलू तो अखंड को पूजता था।
उसके लिए अखंड सिंह परिहार भगवान था…
गोलू के अचानक गायब हो जाने के बाद सभी के साथ साथ अखंड ने भी मान लिया था कि गोलू ज़िंदा नहीं बचा..।
कहीं न कही उसके मन में ये बात भी बैठ गयी थी कि उसी की वजह से गोलू की जान गयी थी..
उस समस्य यूनिवर्सिटी में एकदम से इतना कुछ बदला था कि अखंड का पूरा गैंग हिल गया था..
अखंड पर लगे इल्जाम और गोलू की गुमशुदगी ने अखंड के पुरे ग्रुप को हिला कर रख दिया था… हर कोई इधर उधर हो गया था..
जब तक अखंड का केस लगता रहा, तब तक लल्लन बराबर कोर्ट में मौजूद रहा, लेकिन अखंड के बरी हो जाने के बाद जब अखंड के पिता उसे अपने साथ ले गए। उसके बाद से लल्लन को भी किसी ने नहीं देखा था।
इन सारे ही लोगों का जीवन जैसे बिलकुल बदल गया था.।
आज अपनी आँखों के सामने जीवित खड़े गोलू को देखने के बाद अखंड की आंखे ख़ुशी के आंसू से भीग गयी थी..।
कुछ समय बाद जब माहौल थोड़ा सामान्य हुआ, तब बाबूराव ने उन दोनों के सामने पानी का गिलास बढ़ा दिया..।
“बैठ जाइये आप सब लोग..।
गोलू!! तुमने उस दिन कुछ ऐसा देखा या सुना था जो तुम सभी से कहना चाह्ते थे, लेकिन कह नहीं पाए थे वही बात आज यहाँ कह दो !”
गोलू ने रेशम की तरफ देखा और अपना गला साफ़ कर कहने लगा….
” रेशम दीदी आप शुरू से ही अखंड भैया को गलत समझती आई थी। जबकि उनकी कभी कहीं पर भी कोई गलती नहीं थी। आपको याद है, एक बार आप कैंटीन में अपनी सहेलियों के साथ बैठी थी, तब आपको किसी ने फूल भेजे थे। और उन फूलों के साथ अखंड भैया के नाम की पर्ची लगी थी। जबकि वह फूल अखंड भैया ने नहीं भेजे। बल्कि धीरेंद्र ने भेजे थे। और धीरेंद्र शुरू से ही अखंड भैया के नाम से आपको परेशान कर रहा था। लेकिन आपको कभी भी नहीं पता चला।
आपके कॉलेज में पढ़ने के दौरान एक बार आपकी और अखंड भैया की कुछ अजीबोगरीब तस्वीरे आपकी किसी सहेली ने आपको दिखाई थी, और आपको यह बताया गया था कि वह तस्वीर यूनिवर्सिटी में हर किसी के मोबाइल पर भेज दी गई है, और यह काम अखंड भैया ने करवाया है।
आप बहुत नाराज हो गए थे। लेकिन इस सब के पीछे अखंड भैया का हाथ नहीं था। इस सब के पीछे पंकज था, जो आपकी ही क्लास में पढ़ता था।
पंकज आपसे अपने किसी अपमान का बदला लेने के लिए तड़प रहा था..।
आपको याद होगा, एक बार आप यूनिवर्सिटी के यूथ फेस्टिवल के समय कैंटीन में गई थी…
और उस वक्त पंकज आपके पास आकर बैठ गया था। आप शायद अपनी सहेलियों का इंतजार कर रही थी। लेकिन वह सब नहीं आ पाई थी, पंकज ने आपसे बड़े प्रेम से पूछा कि क्या वह वहां बैठ सकता है ?
और अपने इजाजत दे दी।
आप नीचे देखते हुए अपने मोबाइल में कुछ काम कर रही थी, और पंकज ने आपके साथ दो-तीन सेल्फी खींचकर तुरंत ही अपने दोस्तों को भेज दी थी। इसके साथ ही उसने अपने फ्रेंड बुक में भी वह तस्वीर लगाकर नीचे लिखा था अपनी बेस्ट फ्रेंड के साथ।
इस बात के बाद उसके दोस्त उसे आपके नाम से छोड़ने लगे थे और वह यह सब सिर्फ आपसे उस दिन का बदला लेने के लिए कर रहा था।
जब आपने किसी बात पर उसे एक थप्पड़ लगाया था।
जब उसके दोस्त उसे आपके नाम से छेड़ रहे थे, तब अखंड भैया वहां से गुजर रहे थे और उन्होंने यह सब सुनने के बाद पंकज से सारी सच्चाई उगलवा ली।
आपको मालूम भी नहीं था और उसने आपके साथ अपनी तस्वीर खींचकर फ्रेंड बुक में डाली है, जब ये बात अखंड भैया को मालूम चली, तब अखंड भैया ने इसकी जबरदस्त पिटाई की..
उसी समय से वो अखंड भैया से भी चिढ गया…
असल में जब आप लोगों के पास वह तस्वीर जा रही थी, तब पंकज ने अपने दोस्तों को भी उन तस्वीरों को भेजा था, और इत्तेफाक से लल्लन के फोन पर भी किसी ने उन तस्वीरों को भेज दिया था..
उसके पहले तक अखंड भैया को इन तस्वीरों के बारे में नहीं पता चल पाया था, लेकिन लल्लन को पता चल गया था…!
लल्लन से अखंड भैया को यह सब मालूम चल गया और उन्होंने पंकज को बेहिसाब मारा पीटा और उससे कहकर सभी के मोबाइल से तस्वीर डिलीट करवा दी ..
जब यह सब चल रहा था, तब हमने सोचा हम आपको इस बारे में सब कुछ बता देते हैं। लेकिन जब हम आपको बताने के लिए जा रहे थे, उस समय हम आप तक पहुंच नहीं पाए।
काश उस वक्त हम आप तक पहुंच जाते तो आपके दिमाग से अखंड भैया की गलत छवि कम से कम दूर तो हो जाती।
क्योंकि उसके बाद जो हुआ, उसने न सिर्फ आपकी जिंदगी बदल दी, बल्कि अखंड भैया को तो सर से पैर तक पूरा ही बदल दिया।
धीरेंद्र प्रजापति जब किसी के साथ फोन में बात कर रहा था कि वह आपको स्टोर रूम में बुलाकर किस तरह परेशान करेगा, और उसके बाद वह उस पर अखंड भैया का नाम चढ़ाएगा, तब ये बातें हमने चुपके से सुन ली थी।
लेकिन हम जब तक सब कुछ सही करने जा पाते, तब तक सारा कांड हो चुका था।
अखंड भैया को पुलिस पकड़ कर ले जा चुकी थी। आपको अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया था। हमने सोचा पहले अखंड भैया को सारी बातें सच-सच बता देते हैं, और उसके बाद आकर आपको बता देंगे। लेकिन हम नहीं जानते थे कि उन लड़कों ने हमें सब सुनते हुए देख लिया था।
हम अखंड भैया से मिलने के लिए थाने जा ही रहे थे कि थाने के बाहर से हमें हम लड़कों ने अगवा कर लिया। और अपने साथ ले गये।
हम हर एक सच्चाई जानते थे, और शायद इसीलिए धीरेंद्र प्रजापति ने लड़कों को आदेश दिया कि हमें मार डाला जाए।
उन लड़कों ने हमें बहुत मारा बहुत पीटा, और दूर ले जाकर एक खाई से नीचे धकेल दिया।
उन लोगों को लगा कि हम मर गए, लेकिन हम खाई से नीचे नदी में गिरे, और बहते हुए बनारस पहुंच गए।
उसके बाद की हमारी जिंदगी बहुत कठिन रही।
इतनी चोटें लगी थी हमें कि हमारा दिमाग काम करना बंद कर चुका था। हम सुन्न हो गए थे। वहां पहुंचने के बाद हमें खुद को नहीं पता था कि हम कौन हैं? हम किसके साथ रहते आए थे? हम क्या करते थे?
कुछ भी होश नहीं था।
जिन्हे हम बहते हुए मिले, उन काका जी ने हमारी बहुत सेवा की।
एक तरह से हमें जीवन दान मिला है उनसे।
वहीं हमारी गीता दीदी से भेंट हुई। गीता दीदी ने हमारा इलाज करवाया। हर महीने का हमारा खर्च भेजा। और धीरेंद्र के आदमियों से हमारी सुरक्षा का सारा इंतजाम कर हमें तब तक वही रखा, जब तक यहां गवाही के लिए हमारी जरूरत नहीं पड़ती।
गीता दीदी का हमारे ऊपर उतना ही एहसान है, जितना अखंड भैया का।
आप दोनों ही हमारे जीवन के आधार है।
रेशम दीदी हम आपसे बस यही बताना चाहते थे, कि आप अखंड भैया के बारे में जो सब सोचती है, वह सब बिल्कुल गलत था।
अब आज आपकी शादी हो चुकी है आपका एक अलग घर संसार है इसलिए वह सारी बातें बेमानी हो जाती है। लेकिन फिर भी इतना तो कहेंगे कि अखंड भैया ने आपसे सच में प्रेम किया था।
और वो आपको तकलीफ पहुँचाने की सोच भी नहीं सकते.. ! आप बस उनके लिए अपना मन साफ़ रख लीजिये !”
रेशम की समझ में ही नहीं आ रहा था, यह सब क्या हो रहा है ?
गोलू की बात सुनते हुए पता नहीं कितनी बार उसकी आंखें अखंड की तरफ उठी, लेकिन वह चुपचाप जमीन पर देखता बैठा था।
वैसा ही निर्लिप्त, वैसा ही बैरागी। जैसे उसे अब किसी चीज से कोई फर्क नहीं पड़ता।
रेशम सोच में पड़ गई कि उसे इतनी मोहब्बत करने वाला लड़का आज उसकी तरफ देख तक नहीं रहा।
यही तो शायद उसकी मोहब्बत की ताकत थी कि वह आज इस बात को पूरी तरह से स्वीकार कर रहा है कि जिससे कभी उसने प्रेम किया था, किसी और से प्रेम करती है.।
और उसके प्रेम का भी उतना ही महत्व है..
धन्य है अखंड सिंह परिहार और धन्य है उसका प्रेम!!
आजकल के लड़के जहाँ इतने अधीर हो चुके हैं कि अपने एकतरफा प्रेम में असफल होने पर अपने ही प्रेम का चेहरा तक तेज़ाब से नहलाने में नहीं चूकते, वहाँ अखंड जैसा निराला लड़का भी मौजूद है!
जो अपने प्रेम को उसके प्रेम के साथ खुश देख कर संतुष्ट है..
अपने बहते आंसुओं को पोंछकर रेशम ने पास बैठे अथर्व की तरफ देखा और आंखों में ही उससे इजाजत ले ली…
अथर्व ने पलकें झपक कर उसे आगे बढ़ने का इशारा कर दिया।
रेशम चुपचाप खड़ी होकर अखंड के सामने चली आई।
अखंड अब भी जमीन ही देख रहा था।
इसलिए उसे रेशम के आने का पता नहीं चला।
वो उसके सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई।
” आपको बहुत गलत समझा। मैं नहीं जानती थी कि, आप क्या हैं?
मुझे शब्द नहीं मिल रहे है कि मैं कैसे आपसे माफी मांगू ?
अब तक मैंने पता नहीं कितनी बार आपको कोसा है। गलत बोला, गलत सोचा, लेकिन आज मुझे इन बातों पर पछतावा हो रहा है। अगर हो सके तो मुझे माफ कर दीजिए। “
रेशम की आवाज सुनकर अखंड हड़बड़ा कर खड़ा हो गया। उसने रेशम के जुड़े हुए हाथ देखे और उन्हें थामने के लिए अपने हाथ उठाने वाला था कि उसे याद आ गया कि नहीं, अब रेशम के हाथों को नहीं पकड़ सकता, अब इन हाथो की उंगलियों के बीच की जगह भरने वाले हाथ रेशम के साथ खड़े हैं..
धीरे से उसने अपने हाथ जोड़ दिए!
वह कहना तो बहुत कुछ चाहता था…
लेकिन उसके शब्द गले में अटक रहे थे! और वह हमेशा की तरह ख़ामोश खड़ा रह गया..
रेशम वापस मुड़कर अथर्व के पास चली गयी.. अनिर्वान की तरफ देखकर उसने घर जाने की इजाजत मांग ली..
वक्त बहुत बीत चुका था, अनिर्वान ने सबको अपने अपने घर लौटने को कहा और खुद बाबूराव के साथ कहीं बाहर जाने की तैयारी में लग गया..
“देखिये अखंड बाबू कल आप और यज्ञ व्यस्त रहेंगे, और परसों शनिवार हो जाएगा। इसलिए अब आप लोगों से सोमवार को ही मुलाकात होगी।
अनंत और वीर को दो-तीन दिन हमारा मेहमान रहने दीजिए। बात यह भी है कि मुझे अभी के अभी बाबूराव के साथ कहीं बाहर निकलना पड़ रहा है।
और मुझे वापसी में दो-तीन दिन लग जाएंगे।
तो आप लोग भी घर जाकर आराम कीजिए, और अखंड बाबू आप इस बात की चिंता मत कीजिए कि आप वीर को साथ लेकर नहीं जा पा रहें हैं। आप घर पर सारी बातें सच-सच बता दीजिएगा।
पहले भी आपकी चुप्पी के कारण बहुत से क्लेश हुए हैं। तो अब जरा बोलना सीखे। पहले वाले अखंड सिंह परिहार बन जाइए।
डॉक्टर रेशम और डॉक्टर अथर्व आप दोनों से भी मैं यही कहूंगा कि आप अभी घर जाइए, और कल आप अपने वकील से मिलकर एक वाद दायर कीजिएगा और उस केस को वापस खुलवाने के लिए एक अर्जी डाल दीजिएगा।
मैं अपने लेवल पर यह प्रयास करूंगा कि यह केस जल्दी ही कोर्ट में लगे और हमें डेट मिल जाये… ।”
अनिर्वान की बात पर हामी भरने के बाद वो सारे लोग एक एक कर चले गए.. उन सब के जाने के बाद गीता भी वहाँ से जाने लगी..।
अनिर्वान ने उसे टोक दिया..
“गीता जी.. आपने मेरी बहुत मदद की है, आप अगर सामने नहीं आती तो इस केस को आगे बढ़ाना नामुमकिन ही था..।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
आगे भी आप ऐसे ही साथ देंगी इस बात की उम्मीद है मुझे !”
“ज़रूर सर… मैंने तो अपना सारा जीवन ही होम कर दिया इस आदमी के चक्कर में.. ।
उसने रेशम और अखंड के साथ जितना किया उससे कहीं ज्यादा पाप इसने बाहर की दुनिया में भी किये है…!”
“जी हाँ और अब इसके पाप का घड़ा भर गया है..।
बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो सफलता पाने के लिए कई तरह की चाले चलते हैं, और इत्तेफाक से उन्हें इन जालसाजियों और षडयंत्रों के बाद सफलता मिल भी जाती है। लेकिन वह सफलता कभी भी स्थिर नहीं रहती।
हो सकता है दो साल, चार साल, दस साल वह सफलता का आनंद जरूर ले लेता है, लेकिन उसके बाद उस ऊंचाई से उसे गिरना ही पड़ता है। क्योंकि उसे खुद को नहीं मालूम होता कि उसके झूठ, उसके छल कपट, उसकी सफलता के पहाड़, के नीचे खोदने का काम कर रहा है।
और जिस दिन उसकी नींव खुद गई, वह खुद बहुत नीचे गिर जाएगा।
अपना ख्याल रखिएगा..।”
गीता ने मुस्कुरा कर अनिर्वान के सामने हाथ जोड़ दिए..
उसके वहाँ से जाने के बाद अनिर्वान भी बाबूराव को साथ लिए निकल गया..
“साहब एक बात सोच रहा हूँ.. बोल दूँ ?”
“बोलो बाबूराव.. !”
“आपने बताया रेशम जी के साथ कांड करने वाली कोई लड़की थी, वो कौन हो सकती है भला ? “
“वही पता करने तो जा रहे हैं बाबूराव !”
“हुज़ूर, कहीं ये लड़की गीता तो नहीं… क्यूंकि ये भी अखंड को पसंद तो करती थी, लेकिन अखंड इसे भाव नहीं देता था, तो धीरेन्द्र को फंसा कर कहीं इसने अपना उल्लू तो सीधा नहीं किया ना ?”
अनिर्वान ने मुस्कुरा कर बाबूराव को देखा..
“मेरे दिमाग में भी ये बात आयी थी बाबूराव.. और बहुत पहले ही आ गयी थी। क्यूंकि मुझे तो उस वक्त ही मालूम चल गया था कि उस स्टोर रूम में रेशम के दिमाग में डर बैठाने वाली असल में एक लड़की थी..
गीता से जब पहली बार सम्पर्क किया, तब भी मेरा शक उस पर ही था और उसी वक्त बातों के दौरान उसके बाल का सेम्पल ले लिया था मैंने.. ।
लेकिन जाँच के बाद मालूम चला कि वो लड़की गीता नहीं थी.. !”..
“ओह्ह तो साहब फिर वो लड़की कौन हो सकती है.. ?”
“बस उसी तलाश में निकले है बाबूराव.. ! देखो हमारी तलाश कहाँ ख़त्म होती है !”
क्रमश:
*****

Kahin ye ladki purvi toh nahi.wo resham ke bahut karib thi na
Ab saraya bhad khul kar samnaya aa gya,,Very nice n interesting and Bahtareen n Lajabab and superb part.
डॉक्टर साहिबा कभी कभी तो आप बहुत ज्यादा रुला देती हो यार। आज दो लोगों की ज़िन्दगी मे गलतफहमी के जो घने बादल छाए थे वो छट गए… रेशम की नज़रों मे अखंड की बेगुनाही सामने आ गई तो दूसरी तरफ अखंड के मन का बोझ भी हल्का हो गया, कम से कम अब तो अखंड कुछ चैन की सांस लेगा।
अथर्व… जैसे लोग भी होते है क्या दुनिया मे 🤔, इतना कुछ पता भी था पर कभी रेशम को एहसास भी ना होने दिया और हमेशा उसका साथ दिया उसको संभलने मे।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।
Ab kab aayega next part
अरे गीता नहीं तो और कौन ?? , में तो आज तक उसे ही मान रही थी की गुनाह गर है , पर अब वापिस एंटीना घूमना पड़ेगा , सामने आओ भाई ?? कोन हो तुम आखिर ? कोन चहरहा था , रेशम की बरबादी ?
पर आज खुश हु की रेशम के दिल से अखंड के लिए जो मलाल था वो दूर हो गया ! आज से अखंड शायद खुल कर सास के सकेगा , और अपने पुराने वाले अखंड सिंह परिहार को हम वापस से देख पाएंगे आगे 😍
अगर सब कुछ सही जाता तो आज रेशम ही अखंड सिंह परिहार की घर की बड़ी बहू बनकर कुसुम की जेठानी बनकर हंसी-खुशी जीवन यापन कर रही होती और अखंड की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता उसे लड़के ने जीवन भर सिर्फ खोया ही है और आज जब सब बातें क्लियर हो भी गई है तब भी उसके हाथ में कुछ नहीं लगा अखंड के लिए बहुत दुख हुआ 😞😞😞😞और अखंड के जीवन का वह खालीपन शायद ही कभी कोई भर पाएगा प्लीज डॉक्टर साहिबा ऐसा कुछ कीजिए कि अखंड भी कुछ खुशी नसीब हो☹️☹️😥😥😥🥺🥺🥺
रेशम के जीवन में जो ग्रहण लगा था वह तो शायद छट गया है और अब सारी बातें खुलने के बाद शायद रेशम भी अपने उसे दुख से डर से और आत्मग्लानि से उबर पाएगी जिसे मन में दबे हुए वह अथर्व के करीब नहीं जा पाती थी
👌👌👌👌👌
Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Happy ending ki or jaa rahi story but very interesting you are amazing
Superb part, sab ke gile sikwe dur ho gaye. Next part jaldi dijiye please