मायानगरी -30

मायानगरी-30

      शाम का समय था, पंखुड़ी को पिया ने शॉपिंग के लिए बुलाया था, अपनी शाम की ओपीडी निपटा कर वो फटाफट स्कूटी निकाले मार्केट के लिए निकल पडी..
   पिया ने उसे पहले ही दुकान का आता पता बता दिया था..
  पंखुड़ी ने उस बाजार की पार्किंग में गाड़ी डाली और तभी उसे लगा की उसकी गाड़ी पंक्चर हों चुकी हैं। उसने अपने गर्दन को झटका दिया और दुकान के अंदर घुस गई..
  अंदर पिया साड़ियों के ढेर के आगे बैठे उसी का इंतजार कर रही थी.. उसे देखते ही पिया ने मुहँ फुला लिया …

” क्या है पाखी , मैं आधे घंटे से तेरा इंतजार कर रही हूं…”

“सॉरी यार,  आज शाम को ही सारे मरीज उमड़ पड़े क्या करूँ..आज जय भी नहीं था। अच्छा तू बता तू कबसे जॉइन करने वालीं है?”

“मैंने तो यार पीजी की तैयारी  के लिए छुट्टियां डाली और उसी समय मम्मी ने पीछे पड़ के शादी की डेट निकलवा दी , अब पढ़ाई और किताबें कमरे के एक कोने में सुस्ता रही हैं और मैं टिपीकल ल़डकियों की तरह ब्युटी पार्लर में ब्राइडल सिटिंग ले रही हूं , क्या करूँ?”

” हम्म चल दिखा क्या पसंद किया अब तक?”

“कुछ समझ ही नहीं आ रहा ! ये शॉप वाले भैया सिल्क कांजीवरम और बनारसी दिखा रहे हैं,  और मुझे ना यार ये सब पहनी नहीं जाती! मैं ने बंधेज, लहरियां, शिफान कहा तो कहते हैं आजकल ट्रेंड में नहीं है।”

  पाखी पिया की बात सुनते हुए सामने पसरी पडी साड़ियों को भी खंगालती रही। उसे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था, उसे भी यूँ गुमसुम देख पिया वहां से उठने को हुई,  उसे उठते देख पंखुड़ी ने उसका हाथ पकड़ कर उसे बैठा दिया…

” क्या हुआ ? रोक क्यों रही है , चल ना वो सामने वालीं शॉप वामा में चलते हैं ।”

“अरे दो मिनट रुक तो सहीं! “

पंखुड़ी पिया के जरा नजदीक सरक आईं और उसके कान के पास एकदम धीमे आवाज में फुसफुसा के कह उठी

” थोड़ा रुकते हैं ना,  इस शॉप में बड़ी अच्छी चाय पिलाई जाती है..चाय पीकर निकल जाएंगे। ओके?”

पिया ने घूर कर पंखुड़ी को देखा  ..

” मैं शौपिंग करने आईं हूं चाय पीने नहीं….

“मैं भी तेरी शॉपिंग ही करवाने आईं हूं, अब अगर मुफ्त की चाय मिल जाती है तो क्या गलत हो गया मैडम..”

पिया ने पंखुड़ी को घूरा और अपना फोन निकाल लिया,  पंखुड़ी साड़ियां देखने का अभिनय करती रही ..
    वो सामने लगे रैक पर से चुन चुन कर कपड़े निकलवाती गई और आखिर कुछ देर में उसने उनमें से ढूंढ कर सात आठ अच्छी साड़ियां एक तरफ़ करवा ली..

“भैया चाय नहीं आयी अब तक।।?”

“मैडम  वो बस बन रही है , आ ही रही होगी…

उतनी देर में एक लड़की ट्रे में पानी की छोटी बोतल ले आईं , उसमें से बोतल उठा कर पंखुड़ी ने पानी पिया की तभी तक में चाय भी चली आईं..

चाय लेकर पंखुड़ी ने पिया की तरफ़ ट्रे करवा दी,  और पिया ने मना कर दिया, उसके मना करते ही पंखुड़ी ने वो चाय उठा ली … ” चाय पी ले तब तो तेरा दिमाग खुलेगा, और कुछ पसंद आयेगा…. ये देख जितनी देर में तू अपने मेसेज चेक कर रही थी मैंने कुछ साड़ियां  निकाली हैं, एक नजर मार ले ..

पिया ने चाय हाथ में ली और साड़ियां देखने लगी … उसे वो सभी साड़ियां वाकई पसंद आ रही थीं … उनमें से दो तीन उसने छांट कर अलग करवा ली …

   आखिर वहाँ  से कपड़े पिया को पसंद आई ही गए और खरीद कर वो दोनों बाहर निकल गईं …
  पिया का हाथ पकड़ पंखुड़ी उसे एक के बाद दुसरी शॉप पर लेकर जाती रही और कुछ ना कुछ खरीदवाती रहीं…..
   सारा सामान पिया की गाड़ी की पिछली सीट पर पटक कर पंखुड़ी उसे खिंच कर सामने बने कैफे में ले गई…

” मुझे भूख नहीं है यार पाखी!”

“लेकिन मुझे तो है..!”

दोनों आमने सामने बैठ गईं और पंखुड़ी इत्मीनान से मेन्यू कार्ड उठाए एक एक डिश का नाम पढ़ने लगी , पिया अब भी उदास सी अपना मोबाइल ही देख रही थी …
  कुछ दो चार चीज़ें ऑर्डर करने के बाद पंखुड़ी पिया की ओर घूम गईं…

” हाँ तो मैडम क्या आप मुझे बताएंगी की आपकी प्रॉब्लम क्या है ? अच्छा खासा शादी हो रही है , लड़का भी अच्छा है , दिखता भी ठीक है, मोटा कमाता है , और क्या चाहिए तुझे नकचढी मेढ़की …

” मुझे भी नहीं पता पाखी की मुझे चाहिए क्या ? मेरा शादी करने का बिल्कुल मूड नहीं है पर मम्मी अब मान नहीं रहें हैं.. पापा की भी तबियत ऊपर नीचे रहती है उनकी सोच है एक ही बेटी है उसकी जिम्मेदार निपटा कर फुर्सत पा लें लेकिन यार मेरा मन भी तो माने ना …?

“तो मना ले ना , या तो अपने मन को या अपने पेरेंट्स को .. किसी को तो मानना पड़ेगा ही ..ऐसे रोनी सूरत बना कर तो फेरे नहीं ले सकती ना , पूरा एल्बम बर्बाद हो जाएगा। अच्छा वैसे एक बात बता तू एक बार समर से बात क्यों नहीं कर लेती?”

” नेवर!! मैं भूल चुकीं हूं वो सब , अब तू प्लीज याद मत दिला!”

“अगर तू भूल चुकी होती ना तो तेरे चेहरे के रंग ऐसे बदल नहीं जाते ..अगर तू भूल चुकी होती तो अभी खुशी से शॉपिंग कर रही होती , तू अगर समर को भूल चुकी होती ना तो अभी मजे से ये पास्ता खा रही होती….
  उसी वक्त पंखुड़ी का ध्यान पास्ता पर चला गया …

“अरे यार मैंने तो व्हाइट सौस पास्ता मंगवाया था ये क्या ले आया..”

  उसे देख पिया के चेहरे पर पल भर को हंसी खेल गई …

“मतलब कितनी भी सीरियस बात हो मैडम को खाने के आगे कुछ नजर नहीं आता है ना!  तू रुक मैं अभी वेटर को बुलवा कर तेरा ऑर्डर बदलवा देती हूँ, तब तक तू अपनी कॉफ़ी पी ले…”

“हाँ पी लूँगी लेकिन पास्ता के साथ कॉफ़ी का मजा ही कुछ और है .. हाँ  तो मैं कहाँ थी पिया..?”

“तू यहीं थीं पाखी मेरे साथ, और जो तूने इतना सारा अनाप शनाप ऑर्डर किया है ना मैं कुछ नहीं खाने वालीं हूँ याद राखियों …”

“अरे don’t worry मैं खा लूँगी, सब एडजस्ट हो जाएगा । तो मैं ये कह रही थी कि तूने समर से ब्रेकअप क्यों किया यार ..बंदा सही तो था.. इतना डैशिंग है उतना ही सुपर इंटेलिजेंट भी। 

” उसके पास वक्त नहीं था, मेरे लिए तो बिल्कुल भी नहीं । ऐसे आदमी से शादी करने का क्या मतलब यार? , मतलब उसे सुबह गुड मॉर्निंग मेसेज के साथ ईमोजी भेजो, तो चार दिन बाद शाम को उसका गुड evening आता था।
   एक तो बन्दा खुद कभी लंच डिनर प्लान करता नहीं था, उस पर अगर मैं कुछ प्लान कर के समय और जगह उसे बता कर सुबह से बार बार रिमाइंड करवा कर फिर वहाँ  उसका वेट करती बैठी रहूं तो भी साहब से टाईम नहीं निकाला जाता था .. और चल यहां पर भी अगर वो कॉल कर के माफी मांग ले तो मैं भी चुपचाप खाना खा कर निकल जाऊँ अपने काम पर।
     लेकिन जब उसे फोन करो तो ये कह कर की मेरा वेट करो मैं पहुंच रहा हूँ मुझे वहाँ बिठाने रख कर अपनी मम्मी और पापा को भेज देता था .. और फिर पूछता था कैसा लगा सरप्राइज?  ..
  अब बोल, किस लड़की को शादी से पहले अपनी रोमांटिक डेट पर होने वाले सास ससुर के साथ बैठ कर खाना अच्छा लगेगा ?
  उस पर भी होने वालीं सासु माँ की उम्मीदों का घड़ा जब तब मुझ पर छलकता ही रहता था ।

” हाय सच्ची? ऐसा किया उस बदतमीज समर ने।”

” हाँ और क्या ? पर बदतमीज मत बोल, तमीज तो कूट कूट के भरी हैं,  बातेँ करने और बहलाने में कोई सानी नहीं उसका!  लेकिन उसकी मम्मी यार  क्या बताऊँ.. अब उस दिन जब उसने अपनी जगह अपनी मम्मी को भेज दिया , तब ये तक नहीं सोचा कि मैं उससे मिलने जा रही हूं तो ओबवियसली मेरे कपड़े भी कुछ मॉडर्न तरीके के होंगे।  घोंचु  ने बिना सोचे समझे उन्हें भेज दिया … अब मेरी होने वालीं सासु मेरी ड्रेस को घूर कर बोलती हैँ, साड़ी पहनी होती तो ज्यादा अच्छी लगतीं ..
  कौन से ज़माने में जी रहे हो यार , क्या लड़कियाँ साड़ी पहन कर डेट पर जाती हैं..

“बस इसी बात पर तूने ब्रेकअप कर लिया ?”

” अरे नहीं यार, बातेँ तो बहुत सारी थी. .. एक एक कर दिमाग में भर्ती जा रही थी. फिर मुझे लगा अगर इस आदमी से शादी की तो मेरी जिंदगी बस इसका इंतजार करते ही बीत जानी है.. इसे तो सिर्फ और सिर्फ राजा अजातशत्रु से प्यार है , उनके और उनके महल के अलावा इसे किसी और के बारे में सोचना नहीं है तो मैंने सोच लिया कि इस आदमी से शादी कर के जिंदगी भर अपने कमरें में पड़े पड़े इसका इंतजार करने से अच्छा है किसी और के साथ शादी कर लाईफ में आगे बढ़ जाऊँ..

” पर पहली मुहब्बत याद बहुत आती है?”

“तुझे कैसे पता? तुझे किससे पहली मुहब्बत हो गयी ?”

” मुझे अब तक नहीं हुई इसीलिए ही तो बता रही हूँ , और तू खुद सोच तुझे इतना अच्छा मौका मिला है , अपने पसंदीदा लड़के को डेट करने का उससे शादी करने का और तूने खुद अपने पैरों कुल्हाड़ी मार ली। एक बार समर से बात तो कर ले, मुझे लगता है वो तेरा अब भी इंतजार कर रहा है!”

” वो उन लड़कों में से है ही नहीं पाखी।, वो अब भी अपने ऑफिस में बैठा किन्ही फाइलों पर नजर गड़ाए पढ़ता बैठा होगा या फिर संसद भवन के चक्कर लगा रहा होगा , उसे प्यार मुहब्बत रिश्ते नातों की कोई समझ नहीं है..

“हम्म तो ठीक है फिर इस वाले पर फोकस कर । यार कम से कम तुझे सही उम्र में शादी के लिए लड़का तो मिल गया,  अब मुझे देख अट्ठाइस की लग गईं हूं, एक साल में अट्ठाइस पूरा हो जाएगा अभी तक एक अदद अच्छे लड़के की तलाश में हूं , जैसे ही मिलेगा चट मंगनी पट ब्याह!!”

“तो ढूंढ क्यों नहीं रही ?”

“ढूंढ तो रहीं हूं,  शादी डॉट कॉम में प्रोफाइल भी है जीवनसाथी  में भी बना रखा है , मिलते रहते हैं कुछ बबलू डबलू टाइप के लड़के.. पसंद भी तो आने चाहिए ना,  अब तेरी जैसी किस्मत कहाँ हमारी, की एक्स भी हैंडसम और वुड बी भी।”

” नहीं तुझसे किसने कह दिया कि वुड बी हैंडसम हैं!”

” मुझे लगा ऐसा ! अच्छा फोटो दिखा जरा ..

और ये कह कर पाखी ने पिया का फोन अपनी तरफ़ घुमा लिया .. पिया ने गैलरी खोल कर उस लड़के की तस्वीरें खोजना शुरू की लेकिन एक के बाद एक समर के ही फोटो से पूरी गैलरी भरी पडी थी ..
  पंखुड़ी  ने एकदम गंभीर चेहरा बनाया हुआ था और पूरी तन्मयता से उस लड़के की तस्वीर ढूंढ रही थी , लेकिन उसकी तस्वीर ना मिलती देख पिया ने अपना फोन खिंच कर अपने पास कर लिया …

“मम्मी से मँगवा कर तुझे भेज दूंगी .. चल अब निकलते हैं, आज के लिए काफी शॉपिंग हो गई.. मुझे पढ़ाई भी करनी है , और चल तुझे तेरी मायानगरी छोड़ दूँ !”

” हाँ छोड़ना ही पड़ेगा,  वैसे तो मैं अपनी स्कूटी से आयी थी, लेकिन आने के बाद देखा कि वो पंक्चर हो गई है, अब उसे यहीं पार्किंग में डाल कर निकल जाते हैं कल किसी को भेज कर पीक करवा लूँगी !”

दोनों पिया की गाड़ी में सवार हो मायानगरी के लिए निकल पड़े .. गाड़ी में बैठते ही पिया ने गाने चला दिए ..

    खो गया, गुम हो गया
    वक्त से चुराया था जो
     अपना बनाया था
     हो तेरा, वो मेरा
    साथ निभाया था जो
    अपना बनाया था

    चदरिया झीनी रे झीनी
   चदरिया झीनी रे झीनी
   आँखें भीनी ये, भीनी ये, भीनी
    यादें झीनी रे, झीनी रे, झीनी…..

गाने के बोल सुनकर कर पंखुड़ी ने पिया को देखा और चुपचाप बाहर देखने लगी …

“मुझे समझ नहीं आता कुछ लोग अपना प्यार इतना छिपाते क्यों है ? अरे भई जो सोच रहे हो वो सामने  वाले को बोल दो, बता दो..आसान हो जाती है जिंदगी! लेकिन नहीं खुद ही अपनी जिंदगी को कठिन बना लेंगे! इसमें किसी को मालूम नहीं क्या मज़ा आता है ..”

“तू क्या बड़बड़ कर रही है पाखी?”

“कुछ खास नहीं ! बस थोड़ी फ़िलासफ़ी झाड़ रही थी,  पर सोचा तुझे तो मेरी बातेँ समझ में आएँगी नहीं…

पाखी अभी अपनी बात बोल रही थी कि उसके मोबाइल पर किसी का मेसेज आया और मेसेज पढ़ कर उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी.

” पिया थोड़ा गाड़ी तेजी से भगा ले, एक पेशेंट सीरियस हो गया है …

पिया ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी , और बस कुछ ही पल में वो लोग मायानगरी के  अस्पताल में थे ..
  गाड़ी पार्किंग में डाल दोनों एक तरह से दौड़ती हुई अंदर की तरफ़ भागी, पंखुड़ी के अंदर पहुँचते ही नर्स भाग कर उस तक आ गयी और उसे नेता जी के भतीजे के बारे में  बताने लगी …
   पंखुड़ी भागती सी उसके कमरें में पहुंची , वहां उसके पहुंचने से पहले ही नर्स और वार्ड बॉय उसके बेड को घेर कर खड़े थे , और मरीज को हल्के झटके से आ रहे थे .. 
   उसके वाईटल मोनिटर करते हुए पंखुड़ी ने तुरंत नर्स से मांग कर एक इंजेक्शन लिया और उसे लगा दिया..इंजेक्शन लगते ही कुछ देर में मरीज शांत हो गया और शांति से सो गया ….

उस की फ़ाइल पढ़ते हुए पंखुड़ी ने उसके लिए कुछ जरूरी जाँचें लिख कर नर्स को पकड़ाई और उसकी फ़ाइल अपने हाथ में लिए अपने केबिन की तरफ़ बढ़ गयी…
   उस मरीज़ के कमरे के बाहर खड़े उसके चेलों की समझ से बाहर था कि क्या हुआ है.. और वो सब बिना जाने बुझे ये समझ बैठे की ये अस्पताल की लापरवाही है कि उनके भैया जी की तबीयत सुधरने की जगह और बिगड़ गई ।
   वो लोग अंदर कमरें में घुसने वाले थे कि मृत्युंजय के साथ  पंखुड़ी वापस अंदर जाने लगी और मृत्युंजय ने हाथ बढ़ा कर उन सब को अंदर जाने से रोक दिया ..
   कांच के दरवाजे के बाहर खड़े वो लोग अंदर मृत्युंजय और पंखुड़ी को भैया जी के बारे में कुछ बातेँ करते बस देख पा  रहे थे , उन्हें सुनाई कुछ भी नहीं दे रहा था और अब उन सबका गुस्सा उफान पर था ….

“इस डॉक्टर को तो जिंदा नहीं छोड़ना है मैंने!”

उनमें से वहीं थप्पड़ खा चुका चेला गुस्से में चिल्लाया और बाकी लोगों ने उसके कन्धे पर हाथ रख उसका समर्थन कर दिया…

क्रमशः

aparna…..

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Neha
Neha
1 year ago

Mam episode 252 se start ktna h se to bahut puche h😭