
अपराजिता -139
अनिर्वान ने यज्ञ को देखा और अपने माथे पर उंगली से स्क्रैच करने लगा।
“परसो तो मुश्किल होगा यज्ञ बाबू, क्योंकि परसो शनिवार है और शनिवार जमानत के कागजात तैयार करवाने में आप लोगों को दिक्कत आ सकती है।”
” हां तो फिर हम आज ही वकील बाबू से मिल लेते हैं। और कल जमानत के पेपर तैयार हो जाएंगे..!”
अबकी बार अखंड ने परेशान होते हुए कहा और यज्ञ अखंड की तरफ घूम गया!
” माफ कीजिएगा भैया, लेकिन अब आज का पूरा दिन निकल गया। ऐसे बेवक्त वकील साहब को जाकर परेशान करना हमें ठीक नहीं लग रहा। इसलिए हम परसों ही चलेंगे उनसे मिलने।”
” ठीक है यज्ञ अगर तुम आज नहीं जाना चाहते तो कोई बात नहीं, लेकिन कल तो जा सकते हैं ?”
“कल हमारा एक बहुत जरूरी काम फंसा हुआ है। इसके लिए हमको कचहरी जाना है भैया।
कल तो मुश्किल है।”
” कोई बात नहीं यज्ञ, अगर तुम कल नहीं जा पाओगे तो हम चले जाएंगे।”
” नहीं भैया कल जिस काम से हमको जाना है उसमें आपके दस्तखत भी होने जरूरी है। इसलिए आपको हमारे साथ जाना पड़ेगा।”
यज्ञ अनिर्वान की तरफ घूम गया।
” सर आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं इन दोनों को बिल्कुल टॉर्चर मत कीजिएगा। बड़े आराम से रखिएगा, क्योंकि दोनों ही आराम तलब इंसान है। जिंदगी के कठोर धरातल से अभी इनका परिचय हुआ नहीं है। और अगर आप वह परिचय ना करवाए तो बेहतर ही होगा।
आप समझ सकते हैं, वह दोनों हमारे भाई हैं। उनके लिए हमारे मन में ममता है। लेकिन क्या करें, कल का काम हमारा इतना जरूरी है कि हम परसों के पहले वकील बाबू से मिलने नहीं जा पाएंगे।
बस कल एक दिन आप इन्हें संभाल कर रख लीजिए।”
अनिर्वान अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे यज्ञ को देख रहा था। मुस्कुरा कर उसने गर्दन एक तरफ झुका दी।
” आप निश्चिंत रहिए यज्ञ बाबू, आपके दोनों भाई हमारी इस काल कोठरी में बहुत सुरक्षित है…। मुझे भी आपकी, इनके लिए चिंता साफ़ साफ़ नजर आ रही है.. आखिर यही तो होता है परिवार !”
अखंड को यज्ञ की सारी बातें समझ में आ रही थी.. लेकिन वो क्या करे, यही नहीं समझ पा रहा था..
“हम तो यह सोच रहे हैं कि हम अभी घर जाकर काकी को क्या जवाब देंगे?
काका जी भी हमारी तरफ बड़ी उम्मीद से देखेंगे, घर पर सब वीर का इंतजार कर रहे हैं!
सर हमारे घर पर आप खुद आए थे और वीर को जिस तरीके से उठाकर घर से लेकर आए हैं, उसके बाद घर में सब ने बड़ी उम्मीद से हम दोनों को यहां भेजा था…
अगर हम वीर को वापस नहीं लेकर गए तो हम क्या मुंह दिखाएंगे घर वालों को…?”
“आपका चेहरा बहुत खूबसूरत है अखंड बाबू.. यही दिखाइयेगा…!
आपके चेहरे पर अभूतपूर्व तेज़ है, एक चमक है सच्चाई की।
ईमानदारी की आभा है.. दुनिया से अलग, निष्कलंक निष्पाप है ये चेहरा अखंड बाबू, और आपको दुनिया के सामने ये विचारने की कतई आवश्यकता नहीं कि आप ये चेहरा कैसे दिखाएंगे.. ?”
अनिर्वान अपनी बात कह रहा था कि तभी उस केबिन के दरवाज़े पर रेशम ठिठक कर खड़ी रह गयी..
****
रेशम को बाबूराव ने फ़ोन कर के बुलाया था…
जिस वक्त रेशम के पास बाबूराव का फ़ोन आया वो घर पर मानव और अथर्व के साथ बैठी चाय पी रही थी..
जब से मानव आया था अथर्व भी काफी कुछ सामान्य हो गया था।
मानव के साथ अथर्व इधर उधर की बातों में लगा रहता, हालाँकि गेंदा वाले केस के बाद उनकी बातों का मुख्य मसला फ़िलहाल गेंदा और उसके साथ हुआ हादसा ही था..
रेशम इन बातों से खुद को अलग रखे रहती.. लेकिन उसे इसी बात का सुकून था कि अपनी नाराजगी को अथर्व ने मानव के ऊपर जाहिर नहीं किया था.।
वह मानव के साथ बिल्कुल सामान्य बना हुआ था। मानव को भी अब तक रेशम से कुछ भी पूछने का मौका नहीं मिला था। हालांकि उस दिन गेंदा की हालत सुनने और देखने के बाद रेशम ने जिस तरह रिएक्शन दिया था, उससे मानव के मन में यह बात जरूर आई थी कि पता नहीं अथर्व क्या सोच रहा होगा?
लेकिन अथर्व के दिमाग में क्या चल रहा था, यह मानव और रेशम दोनों नहीं जानते थे।
तीनों साथ बैठे चाय पी रहे थे कि तभी रेशम का फोन बजने लगा। फोन पुलिस थाने से आ रहा था। रेशम ने अनजान नंबर देखकर पहली बार में फोन नहीं उठाया, लेकिन दूसरी बार फोन बजने पर अथर्व ने फोन उठाकर रेशम के हाथ में थमा दिया।
” देख लो, हो सकता है किसी मरीज का फोन हो। कोई अर्जेंसी भी हो सकती है।”
रेशम ने हामी भरी और फोन उठा लिया। दूसरी तरफ से बाबूराव बोल पड़ा।
” हेलो डॉक्टर रेशम बोल रही है?”
” जी, आप कौन?”
“मैं बाबूराव बोल रहा हूं। आपको थाने में अनिर्वान सर ने बुलवाया है। जितनी जल्दी हो सके हाजिर हो जाएंगे।”
” ठीक है।”
रेशम में इतना कहकर फोन रख दिया। उसने सामने बैठे मानव और अथर्व की तरफ देखा। दोनों ही समझ चुके थे कि किसका फोन है? दोनों एक साथ खड़े हो गए।
“आप दोनों आराम कीजिए, मैं जाकर आ जाती हूं।”
रेशम के ऐसा कहने पर मानव और अथर्व दोनों बड़े आश्चर्य से उसे देखने लगे।
“ऐसा कैसे संभव है? पुलिस थाने तुम अकेले क्या करने जाओगी? मैं चलता हूं।”
अथर्व अपनी गाड़ी की चाबी उठाकर खड़ा हो गया। उसने मानव की तरफ देखा और हल्के से मुस्कुरा उठा।
“आप जब से आए हैं तब से इसी सब भागम भाग में लगे हैं। ऐसा कीजिए कुछ देर आराम कर लीजिए।तब तक मैं रेशम के साथ जाकर वहां की औपचारिकता निभा कर चला आऊंगा।”
मानव ने भी धीरे से हामी भर दी। वह भी चाहता था कि अथर्व और रेशम को एक दूसरे के साथ समय मिले। रेशम और अथर्व पुलिस स्टेशन के लिए निकल गए….
रेशम जिस वक्त पुलिस स्टेशन पहुंची, उसी समय गीता भी वहाँ पहुंची थी, लेकिन वो अनिर्वान के केबिन के बाहर वाले प्रतीक्षा कक्ष में बैठी अनिर्वान के बुलावे का इंतज़ार कर रही थी..।
गीता वहां बैठी थी कि तभी उसके फ़ोन पर किसी का फ़ोन आने लगा..
वो बहुत धीमी सी आवाज़ में किसी से फ़ोन पर बात करने लगी..
“हाँ ठीक है, वो सब हम जानते हैं, लेकिन तुमसे जो कहा है उतना तो कर सकते हो ना !”
“दीदी हम कोशिश पूरी कर रहे हैं, लेकिन धीरेन्द्र बाबू इतने चाकचौबंद आदमी है कि अपने खिलाफ कहीं कोई सबूत नहीं छोड़ते, हर एक दाग बडी सफाई से साफ़ कर जाते है !”
“बस उसी सफाई के बीच से हमें दाग निकालने पड़ेंगे.. तुम सब कुछ तो जानते हो..
अगर उस आदमी ने सिर्फ हमारी जिंदगी खराब की होती तो फिर भी हम उसे शायद माफ कर देते। लेकिन उसने जितनी जिंदगियां बर्बाद की है, उसका तो कोई हिसाब किताब ही नहीं रहा।
उस आदमी का जल्द से जल्द पकड़ना बहुत जरूरी हो गया है। इस बार के चुनाव में उसे टिकट मिल चुकी है.. लेकिन हम चाहते हैं कि चुनाव होने से पहले इस आदमी की सच्चाई सारी जनता के सामने आ जाए। जिससे इसे दोबारा जीत कर राजगद्दी पर बैठने का मौका ना मिले। पता नहीं क्यों लेकिन इसने अखंड के साथ जो भी किया उसे सोचकर ही हमारी रूह कांपने लगती है।
हमने अखंड को देखा है। वह कितना बदल गया है। कॉलेज के जमाने में जो तेजी, जो दबंगई, जो जुनून उसके अंदर था, अब इसका एक प्रतिशत भी नहीं बचा। वह लड़का पूरी तरह से बदल चुका है।
हर बात में संतुष्ट, हर बात से निर्लिप्त।
अपनी जिंदगी से कोई चाह ही नहीं रह गई हो जैसे।
बस रोज सुबह उठकर उसे अपने दिन को काटना है, और रात में वापस सो जाना है। उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे अपने दिन गिन रहा है कि जैसे तैसे जिंदगी गुजार दूं और चला जाऊँ इस दुनिया से..।
उसकी आंखों की उदासी ने हमारे कलेजे को चाक कर रख दिया था। जब हम अस्पताल में उसे देखने गए थे, ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वह बंदा जिंदा रहना भी चाहता है।
ऐसा लग रहा था कि वह खुश था, अपने एक्सीडेंट से। कि शायद इसी बहाने से मुक्ति मिल जाए ।
उसके अंदर इतना बड़ा गिल्ट है उस अपराध का जो उसने कभी किया ही नहीं।
अरे वह तो उस लड़की से प्यार करता था। और वह लड़की आज भी यही सोचती है कि अखंड ने उसका जीवन बर्बाद किया है। इस बात की गिल्ट को महसूस करते अखंड अंदर से खोखला होने लगा है। और जब तक यह बात कोर्ट में साबित नहीं हो जाती कि इस कांड के पीछे अखंड नहीं बल्कि धीरेंद्र था और धीरेंद्र ने उस लड़की को अंधेरे का फायदा उठाकर अखंड के नाम से डराया है। तब तक शायद अखंड के दिमाग से उस हादसे की कालिख नहीं मिटेगी।
इसलिए हम चाहते हैं कि किसी तरीके से धीरेंद्र का कोई गुनाह मय सबूत हम पुलिस में दे सकें।
इसके बाद कम से कम उसे कोर्ट में पेश किए जाने का समन तो जारी होगा।
एक बार उसे कोर्ट में पेश कर दिया गया, तब फिर हम खुद उस केस को वापस खुलवाएंगे।
क्योंकि हमें इतना समझ में आ गया है कि अखंड को अगर वापस अखंड सिंह परिहार बनाना है तो उसके दिमाग से उस सदमे को धो पोंछ कर बाहर निकालना ही होगा। और इसके लिए जरूरत है कि हम उस लड़की से भी संपर्क करें जो इस हादसे का शिकार बनी थी।
जब तक उस लड़की के सामने यह सच्चाई नहीं आ जाती कि उसके साथ अखंड सिंह परिहार ने नहीं बल्कि धीरेंद्र प्रजापति ने यह सारी हरकतें की थी, तब तक अखंड कभी नॉर्मल नहीं हो पाएगा…।”
” ठीक है दीदी हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। वैसे पैसों का हेर फेर तो चल ही रहा है, लेकिन यह ऐसा कोई मामला नहीं है जिसके लिए आप उन्हें समन भिजवा सके..!”
“हम्म धीरेंद्र का एक पीली कोठी वाला मामला है। उस मामले के कागजात उसके ऑफिस में ही कहीं छिपे हुए हैं। किसी तरीके से उन कागजातों को निकालो, उससे हमें मालूम चलेगा कि पीली कोठी वाला वह मामला है क्या?
हम ज्यादा इसके बारे में नहीं जानते। क्योंकि धीरेंद्र हमें कुछ भी नहीं बताता। एक दो बार वह किसी से बहुत परेशानी में उस कोठी के बारे में कुछ बात कर रहा था। तब हमने सुना था।
अगर वह मामला हम पुलिस तक पहुंचा देते हैं, तो हमारे लिए आसानी हो जाएगी..
अभी हम तुमसे बाद में बात करेंगे, हम फिलहाल पुलिस स्टेशन में बैठे हैं…!”
गीता को मालूम नहीं था कि उस प्रतीक्षालय के दरवाजे पर रेशम खड़ी थी।
जिस वक्त गीता धीरेंद्र के उस खास लड़के से बातचीत कर रही थी, ठीक उसी वक्त रेशम और अथर्व भी पुलिस स्टेशन पहुंचे। बाबूराव ने रेशम को देखने के बाद उसे अंदर प्रतीक्षालय में जाने का इशारा कर दिया।
अथर्व के मोबाइल पर उसके हॉस्पिटल से कोई कॉल आने लगा था, जिसके कारण अथर्व फोन पर बात करते हुए बाहर की तरफ निकल गया।
रेशम अकेले ही प्रतीक्षा कक्ष की तरह बढ़ गई।
वह दरवाजे पर पहुंची थी कि उस वक्त गीता फोन पर बात करने लगी ।कोई व्यक्तिगत बातचीत कर सकता है, यह सोचकर वह बाहर ही खड़ी रह गई। लेकिन गीता प्रतीक्षा कक्ष में टहलती हुई बात कर रही थी। इसलिए जब वह दरवाजे के पास से होकर गुजरती उस वक्त बाहर खड़ी रेशम को सारी बातें साफ-साफ सुनाई पङने लगती।
शुरुआती एक दो पंक्तियों को सुनने के बाद रेशम खुद ही दरवाजे के और पास सिमट कर खड़ी हो गई।
और चुपके से उसने गीता की सारे बातें सुन ली।
यह सारी बातें सुनते ही उसे एक बड़ा झटका सा लगा। उसका सर घूमने लगा। उसे लगा उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा है।
उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था। उसे एक-एक कर अपने कॉलेज फर्स्ट ईयर की सारी बातें याद आने लगी।
वह हंसता मुस्कुराता लड़का याद आने लगा जो उसके करीब रहने के लिए ब्लड डोनेशन डे पर तीन बार खुद ही ब्लड डोनेट करके मुस्कुराता हुआ चला गया था।
रंगोली प्रतियोगिता में जिसने अपने साथ वाले लड़के से जबरदस्त बेवकूफाना सी रंगोली बनवा दी थी..।
उसे भी तो उस समय अखंड की इन हरकतों को देखकर गुस्से से ज्यादा हंसी आने लगती थी। लेकिन फिर पूर्वा और बाकी लड़कियों ने बताया कि वह बहुत बिगड़ा हुआ रईसजादा है। और कॉलेज पॉलिटिक्स से जुड़ा हुआ एक छुटपुट राजनीतिज्ञ है। तब से उस पर ध्यान देना कम कर दिया था रेशम ने..
रेशम को अचानक वह फोटो वाली बात याद आ गई। उसकी और अखंड सिंह परिहार की फोटोग्राफ उसके कॉलेज की ही एक दोस्त ने उसे भेजी थी। जिन तस्वीरों को देखकर वह बहुत विचलित हो गई थी। लेकिन इन्हीं तस्वीरों के बारे में सच्चाई बताने आई हुई उसकी उस सहेली की रोड एक्सीडेंट में मौत होने के बाद यह मामला अचानक दब गया था। उसने बहुत कोशिश की थी लेकिन उसे इस फोटो के पीछे की सच्चाई मालूम नहीं चल सकी..।
हालाँकि एक बार अखंड सिंह के साथ अक्सर नजर आने वाला दुबला पतला सा लड़का उसके पास भागता हुआ आया था और उसने इतना ही कहा था कि आपकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ अखंड भैया कभी नहीं कर सकते। बस इतना विश्वास कर लीजिए।
लेकिन पूर्वा ने उसकी बात हम पूरी होने से पहले ही रेशम का हाथ पकङ कर खींचा और उसे दूसरी तरफ लेकर चली गई थी।
लेकिन वह लड़का एक बार फिर चिल्ला कर वही बात दुहरा गया था।
अखंड भैया बुरे आदमी नहीं है, और वह कभी आपकी तस्वीरों के साथ ऐसा नहीं कर सकते।
आज वह सारी बातें याद आते ही रेशम की आंखे भीगने लगी थी..
उसे लगने लगा की सच ही तो था उस अँधेरे स्टोर रूम में उसने किसी को भी देखा कहाँ था.. ?
जो सब उसे महसूस हुआ वो सब उसने सुना था..
वो गन्दी सी ज़र्दे और पान तम्बाकू की तीखी गंध, वो लटपटी सी आवाज़ में उसे बार बार धमकी देना, अपने नाम का चीख चीख कर उच्चारण करना.. इस सब में उसने देखा तो किसी को भी नहीं था..
बस महसूस किया था…
एक घिनौना स्पर्श..!!
और उस स्पर्श में उसे एक बात आज भी याद रह गई थी। उस आदमी के उल्टे हाथ की चीनी उंगली का नाखून लंबा था।
हालांकि इस बात का आज कोई औचित्य नहीं रह जाता, क्योंकि आज गलत करने वाला आदमी सामने आ भी जाए तो पता नहीं उसने अब भी नाखून इस तरह रखा होगा या नहीं। लेकिन अब उसे अपनी सोच पर, अपने दिमाग पर और खुद पर गुस्सा आने लगा था…।
और ये अखंड सिंह परिहार कैसा अदमी था, जो एक बार आकर उसके सामने उसे सच नहीं बता सका..
वो अपने ख़यालो में ग़ुम दरवाज़े पर खोयी खोयी सी खड़ी थी कि बाबूराव चला आया..
“मैडम आपको तो अंदर बुलाया है साहब ने.. आइये ना !”
वो रेशम को लेकर अंदर दाखिल हुआ, उसी वक्त गीता और रेशम की नज़ारे मिली और रेशम आगे बढ़ गयी..
उसी के पीछे गीता भी चली गयी..
रेशम अनिर्वान के केबिन के दरवाज़े पर ही खड़ी थी उसी समय अनिर्वान के शब्द उसके कानो में पड़े..
“आपका चेहरा बहुत खूबसूरत है अखंड बाबू.. यही दिखाइयेगा…!
आपके चेहरे पर अभूतपूर्व तेज़ है, एक चमक है सच्चाई की, ईमानदारी की आभा है.. दुनिया से अलग निष्कलंक निष्पाप है ये चेहरा अखंड बाबू और आपको दुनिया के सामने ये विचारने की कतई आवश्यकता नहीं कि आप ये चेहरा कैसे दिखाएंगे.. ?”

बहुत ही सुंदर भाग है 👌👌👌👌😊
आखिरकार रेशम पर भेद खुल ही गया अंखण्ड कि सच्चाई का ,और अनिर्वानके शब्द कहीं भीतर गहरे उतरते हुए महसूस हुये…
ये तो सच है कि निष्पाप चेहरों पर तेज और कांन्ति होती है ,अब देखते हैं रेशम की क्या प्रतिक्रिया होने वाली है
झूठ कितना भी ताकतवर हो पर सच से कभी नहीं जीत सकता, एक ना एक दिन असलियत सामने आ ही जाती है, आज रेशम को कुछ कुछ सच पता चल गया और देखो… अखंड का वो पाक चेहरा उसकी मासूमियत को वो खुद याद करने लगी 😊उम्मीद है अब सब सही हो जाएगा,धीरेन्द्र का कपटी चेहरा सबके सामने आ जाएगा और अखंड के दिल पर जो बोझ है वो कम होग़ा और कम से कम अब तो चैन की सांस लेगा।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻⭐⭐⭐⭐⭐🙏🏻।
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Fabulous part..
👌👌👌👌👌👌👌❤❤❤❤❤❤❤💛💛💛💛💛💛💛💛💛🧡🧡🧡💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
Behtareen action by arnivaan….akhand की sachhai आने का besabri से intizaar….rochak mod pr आ रहीं khaani
Ye anirvan ji akhand Babu ko nirdosh sabit karke hi manege….ek aprajita hmare akhand Babu b h….har jagha ladke bhi galat ni hote….
बेहतरीन भाग
🤗👍bahut badiya part.Yagya aur Anirwan jiss tarah se Veer ki baat kar rahe hain uss se lagata hai ki Yagya chahata hai ki Veer ko sabak mile aur Anirwan ye kaam kare.Geeta bhi police station mae hai aur Resham ne usaki sari baate sun li.oh sach pata chala bhi toh kaise Resham ke samane bita kal ghum gaya uss par Baburav ke kahane se andar jane par Anirwan ke shabd jo wo Akhand se usake khubsurat aur nirdosh,imandar,sach se chamakate chehre ke liye bol raha tha sun naa…. aah kya tarif ki hai Anirwan ne Akhand ki. Resham ke dimag ke sare jaale saaf ho jayenge…