
अपराजिता -137
अनिर्वान अपनी यूनिफार्म में नहीं था, बावजूद उसके डीलडौल और ऊँचे पूरे व्यक्तित्व को देख कर ही अनंत को अंदाज़ हो गया कि ये कोई साधारण आदमी नहीं है.. अनंत की आँखों में खौफ की लहर दौड़ गयी..
“कौन ?”
“तेरा काल !”
अनिर्वान मुस्कुरा उठा.. अनंत कुछ कर पाता उसके पहले अनिर्वान ने उसके हाथों में हथकड़ी डाली और उसे खींचते हुए अपने साथ ले गया..
अनिर्वान के सामने किसकी चली थी जो इस नीच की चलती..
***
अपने थाने में पहुँच कर उसने वीर के बगल में अनंत को भी बैठा दिया..
और खुद वहां से जरा अंदर की तरफ चला गया..
अनंत वहाँ उस कुर्सी में बैठने में आनाकानी करने लगा…
उसने बगल में बैठे वीर को देखा और फट पड़ा..
“तुम ही ने हमारा नाम बताया है ना ? शर्म नहीं आती तुम्हे, खुद फंसे तो हमें भी फंसा गए !”
“काण्ड तो आप ही ने किया था अनंत बाबू, फंसे तो हम है आपके चक्कर में.. साला अच्छा भला चले जा रहे थे, जाने कैसे उसी पल ग्रह नक्षत्र बदले कि हमको आप दिख गए। और आपको गाडी में बिठा कर हमने ये पाप कर लिया !”
“ज्यादा दूध के धुले ना बनो वीर… तुम भी अपने मन की करने को मशहूर हो..।
और अगर पकडे भी गए तो थोड़ा तो अपने खून की इज्जत रखते, थोड़ा चुप ही रह लेते.. हमारा नाम बकने की क्या ज़रूरत थी ? मतलब ये तो वही बात हुई ना हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे!”
“अजीब ही आदमी है आप.. एक तो खुद गलती किये हैं उस पर हमें चार बात सुना दिए.. अच्छा किये रहे जो यज्ञ भैया आपके मुहं पर दरवाज़ा बंद कर दिए रहे….।”
वहां मौजूद वीर के दोनों दोस्त एक दूसरे का मुहं देख रहे थे.. उन दोनों को ये लग रहा था कि वीर के चक्कर में वो दोनों बेकार फंस गए थे..।
उनमे से एक ने दूसरे को धीरे से किनारे होने का इशारा किया और उसके सामने अपनी भड़ास निकालने लगा..
“कहाँ से इस रईसजादे के चक्कर में फंस गए हम दोनों, अच्छा खासा घर लौटने का सोच रहे थे !”
” एक न एक दिन तो फंसना ही था। मैं तो तुझे शुरू से कहता था कि इसके साथ रहेंगे तो हम जरूर फसेंगे। लेकिन तू मानता ही नहीं था। तुझे तो बस फ्री की दारू और फ्री की गाड़ी चाहिए थी। हमेश तो उसके साथ घूमता रहता था, दारु पीता रहता था…
और तुझे क्या चाहिए, मैंने कितनी बार टोक था..!”
” अब बस कर.. और ये सब जो तू मुझे बोल रहा है.. बाकी तुझे खुद घूमने का शौक नहीं था क्या?
तू खुद मुफ्त की दारु नहीं उड़ाता था क्या? अब तो ऐसे बन रहा है जैसे इन सब चीजों से तुझे कोई लेना देना ही नहीं था..?”
“अब एक दूसरे को ब्लेम करने से बेहतर है, उस पुलिस वाले के पैर पकड़ लेते हैं कि भाई हमने तो कुछ नहीं किया! जो किया इन दोनों ने किया, आप इन्हें सजा दीजिए हमें माफ कर दीजिए..।”
“तुझे क्या लग रहा है वीर को कोई फांसी की सजा होने वाली है? अरे यहां से वह छूट जाएगा, अभी इसके दोनों भाई आ रहे होंगे उसे छुड़ाने के लिए, और अगर अभी हमने इसका साथ छोड़कर उस पुलिस वाले के पैर पकड़ लिए ना, तो यह हमें यहां से बाहर निकलने के बाद जिंदा नहीं छोड़ने वाला है।
इसलिए चुपचाप जिसके साथ है उसी के साथ बना रह। वैसे भी अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में मिलने वालों को कोई नहीं पूछता..।”
“हां तेरी यह बात भी सही है, और पुलिस वालों का क्या भरोसा? पता चला इसके भाई आए, इसके नाम से अच्छी मोटी रकम दी और यही पुलिस वाला जो अब तक अपना रौब जमा रहा था, इसके भाइयों के पैर पड़ने लग गया..!”
उस वक्त उन दोनों के कंधों पर किसी का हाथ रखा गया दोनों ने पीछे पलट कर देखा, तो अनिर्वान खड़ा मुस्कुरा रहा था..
“हाँ तो बच्चो तुम दोनों जरा बाहर निकलो, यहाँ हमें आपके चीप गेस्ट लोगो की खातिरदारी करनी है !”
उन दोनों को कॉलर से पकड़ कर अनिर्वान ने बाहर कर दिया..
उनमे से एक लड़का धीमे से बोल पड़ा.. -“चीप नहीं चीफ बोलते हैं सर !”
अनिर्वान ने उस लड़के की तरफ देखा…
“कान बड़े तेज़ हैं तुम्हारे लेकिन बेटा दिमाग कमज़ोर है ज़रा.. मैंने चीफ नहीं चीप ही बोला, ये दोनों मेरे आज तक के सबसे चीप गेस्ट ही हैं ! अब तुम लोग निकलो पहले इनकी खातिरदारी होगी, उसके बाद तुम दोनों का भी नंबर आएगा !”
अनिर्वान ने एक झटके में दोनों को बाहर फेंका और दरवाज़ा बंद कर अगले ही पल वीर और अनंत के सामने आ बैठा..
वीर आंखे फाडे उसे देख रहा था..
“ये तो बचपन में पढ़ी कॉमिक्स के भूतनाथ जैसा है.. पल भर में यहाँ से वहाँ !” अनंत वीर के कान में फुसफुसा उठा..
“भूतनाथ जैसा नहीं भूतनाथ ही हूँ.. फैंटम !”
वो कुर्सी खींच कर उनके सामने बैठ गया..
“बाबूराव असलम के यहाँ तुम्हे कल कुछ लेने भेजा था, ले आये या नहीं ?”
“साहब वो नुक्कड़ पे जिसकी चिकन मटन की दुकान है वो असलम ?”
“हाँ वहीँ.. सामान लाये या नहीं !”
वीर और अनंत एक दूसरे को देखने लगे.. खातिरदारी वाली बात उनके भी कानो में पड़ी थी और फिर ये लोग अभी अनिर्वान से असल में परिचित भी नहीं थे.. अनिर्वान के पहले जितने भी पुलिसवाले यहाँ आये थे, उन्होंने कभी परिहारो के सामने गर्दन नहीं उठायी थी..
वीर को लगा कहीं ना कहीं उसके दमदार भाइयों ने फ़ोन खडका दिया है और बस कुछ औपचारिकताओं के बाद ये ऐंठिया पुलिस वाला भी उन लोगो को छोड़ देगा..
मुर्गे आदि की बात सुन वो अब जरा तन कर बैठ गया..
उसने बडी अदा से वहीँ खड़े बाबूराव को देखा..
“पानी मिलेगा ? और सुनो ज़रा ठंडा पानी देना फ्रिज का!”
बाबूराव ने हाँ में गर्दन हिला दी..
“साहब पानी खाना सब खिलाते हैं.. खूब बढ़िया खातिर होगी आप लोगो की..है ना साहब ?”
“बाबूराव यार तुम तो हमसे ज्यादा हमको जानने लगे हो दोस्त.. वो क्या गाना है.. तुम क्या मिले जानेजां, प्यार ज़िन्दगी से हो गया.. !”
“साहब आगे का मैं गा लूँ ?” बाबूराव ने पूछा और बड़े आराम से अपने दोनों हाथो को गर्दन के पीछे लगा कर अपनी रिवोल्विंग चेयर को इधर से उधर घुमाते हुए अनिर्वान ने उसे गाने की इजाजत दे दी..
“अजी इज्जत अफजाई का शुक्रिया, शुक्रिया इस नाचीज़ को आपने काबिल तो समझा !”
“वाह बाबूराव दिल लूट ले जाते हो दोस्त.. तो इन लोगो के ऊपर आया शब्द ‘य’ तो बताओ तुम दोनों में से कौन गायेगा अगला गाना !”
अनंत और वीर एक दूसरे का मुहं देखने लगे.. ये कैसा अजूबा पुलिस वाला था, अब तक तो हाथ पैर की भाषा बोल रहा था अब अचानक गाने गाना शुरू कर दिया..
“ये क्या है.. हम समझे नहीं !” वीर ने अकड़ कर कहा..
“बाबूराव… ये किस सदी के लोगो को उठा लाये हो यार.. कमबख्त अंताक्षरी खेलना नहीं जानते.. इन्हे बताओ कि हम इनके साथ गेम खेल रहे हैं.. और असलम वाला माल भी ले आओ.. !”
बाबूराव ने हामी भारी और बाहर निकलने लगा की वीर ने उसे टोक दिया..
“पानी लेते आना !”
बाबूराव ने मुड़ कर अनिर्वान की तरफ देखा और अनिर्वान ने उसे सर हिला कर पानी भी लाने की अनुमति दे दी..
“हाँ तो गाओ भाई.. य से आया है तुम दोनों पर.. !”
वो दोनों चुप अपनी अकड़ में बैठे थे..
और अनिर्वान उन दोनों को देख कर मुस्कुरा रहा था..
“गाओ बेटा गाओ !”
पर वो दोनों चुप थे, और तभी बाबूराव सब सामान लेकर अंदर चला आया..
उसने एक बड़ा सा खूब गहराई वाला चाकू सामने टेबल पर रख दिया..
“साहब अब गेम शुरू कीजिये, वैसे हमारे साहब गज़ब का गेम खेलते हैं, एकदम लाजवाब, इनका कोई निशाना खाली नहीं जाता, हर एक वार ऊँगली पर ही पड़ता है, एकदम खूना खून रंगीन होली.. !”
“चाकू का वार.. ऊँगली पर, काहे ?” अबकी बार अनंत ने मुँह खोला..
“काहे नहीं.. जब तुम गलत गाना गाओगे तो तुम्हे सजा नहीं देंगे क्या.. ? अब जल्दी से गाओ वरना साहब नाराज़ ना हो जाये !”
बाबूराव की बात पर वीर गुस्से में टेबल पर हाथ मारता खड़ा हो गया..
“अजीब सनकी आदमी हो.. !”वो अभी अपनी बात कह भी नहीं पाया था कि उसने जिस हाथ को टेबल पर पटका था उस हाथ पर कलाई को अनिर्वान ने अपनी मजबूत हथेली से पकड़ा और चाकू की नोक से उंगलियों को फैला दिया और उसके साथ ही चाकू को उंगलियों के बीच में से फटाफट गुज़ारने लगा..
वीर एकदम से घबरा गया और ज़ोर से चीखने लगा..
“अरे चिल्लाओ मत, साहब का कानसनट्रेसन मत बिगाड़ो, वरना ऊँगली की जगह हथेली कट जाएगी। फिर तुम लोग हम पुलिस वालो को दोष देने लगते हो, हम कोई काम सफाई से नहीं करते.. खुद को नहीं देखते.. एक गाना गाने बोले रहे साहब वो तक तो हुआ नहीं तुम लीचड़ो से.. !”
“लीचड़ किसको बोला बे.. !” घबराया हुआ सा वीर गुस्से में चीख पड़ा।
और उसी समय उसकी तर्जनी ऊँगली पर सट से चाकू की नोक गड गयी.. वो बिलबिला कर अपना हाथ छुड़ा कर उसे ज़ोर ज़ोर से हिला कर और फूंक कर दर्द कम करने का प्रयास करने लगा… खून की धार बह चली..
अनंत ऐसे तो खुद को बहुत बड़ा गुंडा समझता था, लेकिन आज उसकी बोलती बंद थी..
उसे लग रहा था किसी तरह जान छूटे तो वो पहली गाड़ी पकड़ कर अपने गांव निकल जायेगा..
भाड़ में गए ये परिहार और इनका पैसा !!
जान से बढ़ कर पैसा थोड़े ना है..?
वीर का चीख चिल्ला कर बुरा हाल था..
“ठाकुर साहब को पानी पिलाओ बाबूराव… मेहमान नवाज़ी भूलते जा रहे हो बाबूराव !”
“हुज़ूर रिटायरमेंट नजदीक है ना ! यही कोई पन्द्रह बीस साल बचे होंगे !”
वीर दर्द से कलबला रहा था उस पर इन पुलिस वालों के भद्दे मजाक उसका दर्द और बढ़ा रहे थे। वो ज़ोर से चीख पड़ा..
“अभी मेरा वकील आएगा, और तुम सब की खबर लेगा.. !”
बाबूराव ने पानी का गिलास उसकी तरफ बढ़ा दिया..
पानी में खूब सारी मिट्टी रेत मिली हुई थी..
“छि: थू ये पीने लायक है भी ? पानी पीने के लिए होता है, और पीने लायक पानी देना चाहिए किसी को !” वीर उबल पड़ा
“अच्छा ये मालूम है कि पानी पीने के लिए होता.. तो फिर ये भी मालूम होगा कि रेत किस काम आती है ?”
अनिर्वान के चेहरे पर की हंसी गायब हो गयी और उसका चेहरा सपाट हो गया..
“रेत…. रेत तो बहुत से काम में आती है !” अब की बार अनंत बोल पड़ा..
उसके मुहं से स्वतः ये बात निकल गयी और तभी उसका ध्यान बाबूराव पर गया..
बाबूराव के होंठो पर शातिर मुस्कान चली आयी.. और अनंत घबरा कर जल्दी जल्दी बोलने लगा..
“नहीं नहीं… मैंने कुछ नहीं बोला.. माफ़ करो !”
बाबूराव मुस्कुरा उठा.. -“गेम तो शुरू हो चुका है मोटा भाई.. हुज़ूर ने सवाल किया और आपने जवाब दे दिया.. अब जवाब को पूरा कीजिये और अगर आपने जवाब नहीं दिया तो इस बार आपकी ऊँगली और साहब का अचूक निशाना !”
अनंत ने जल्दी से अपने हाथ पीछे बांध लिए और अपना गला साफ करके बोलने ही जा रहा था कि अनिर्वान ने उसकी गर्दन पर अपना शिकंजा कसा और उसकी गरदन को टेबल पर रख दिया..
वो एकदम से तड़पने लगा और चिल्लाने लगा..
“हुज़ूर गर्दन पर चाकू मत चला देना, मैं हाथ ही दे रहा हूँ.. !”
मुस्कुरा कर अनिर्वान ने उसकी गरदन छोड़ी और जान बची तो लाखो पाए वाली तर्ज़ पर अनंत ने अपने हाथ आगे टेबल पर रख दिए..
“जल्दी जल्दी बोल रेत किस किस काम आती है ?”
बाबूराव उसके कान के पास आकर चीखा और अनंत फटाफट जो जो पता था उगलने लगा..
“साहब, रोड बनाने में, पत्थर की जुड़ाई में, सीमेंट में मिला कर घर बनाने में… !”
वो और भी कुछ बोलता उसके पहले उसकी आँख के ठीक सामने चाकू लाकर अनिर्वान ने रोका और अनंत के गालों को अपने हाथो में दबोच कर उसे घूरने लगा..
“फिर लड़की की आँख में क्यों फेंकी रेत ? अगर वो अंधी हो जाती तो ?”
अनिर्वान की गहरी सी आवाज़ पूरे कमरे में गूंज गयी…
वीर और अनंत एकदम से खामोश रह गए..
तो इसका मतलब इस भूतनाथ को सारी बातें मालूम है !! वो दोनों पल भर के लिए एक दूसरे की तरफ देखने लगे कि तभी अनंत का चेहरा पीछे कुर्सी पर टिका कर अनिर्वान ने एक हाथ में गन्दा मटमैला पानी का गिलास लिया और उसकी आँख में डालने को तैयार हो गया कि अनंत वापस माफ़ी के लिये फरियाद करने लगा..
“आँख बंद मत करना वरना दूसरे हाथ में पकड़ रखे खंजर को सीधा तेरी आँख में घुसा कर बीच में जो गोल पुतली है ना उसे बाहर निकाल लूंगा.. !”
अनंत भय से जड़ हो गया.. और अनिर्वान कि बात सुन वीर को उबकाई सी आने लगी..
बाबूराव उसके पास ही खड़ा था..
“गलती से भी उलटी मत कर देना.. हमारे साहब बहुत सफाई पसंद है और जो गंदगी फैलता है उसके किये कराये पर उसी से पानी फिरवाते हैं !”
वीर ने घूर कर उसे देखा.. -” जानते नहीं हो अभी, किससे पाला पड़ा है तुम्हारा?”
बाबूराव हलके से मुस्कुरा उठा..
“लेकिन तुमको तो अब तक समझ में आ गया होगा ना कि तुम्हारा किससे पाला पड़ा है। हमारे साहब के बारे में अफवाह है कि ये रात रात भर मसान में धूनी रमा कर भूतो प्रेतों से आशीर्वाद लेकर पुलिस में भरती हुए हैं.. महादेव के भक्त हैं, रोज़ शिवतांडव स्त्रोत का पाठ कर के घर से निकलते हैं… हमें तो इनकी झलक में ही महामृत्युंजय के दर्शन हो जाते हैं..
वैसे पक्के औघड़ है, श्रीमान भूतनाथ !”
“डरा रहे हो ?”
“नहीं सच्चाई बता रहे हैं !
उसी समय अनंत की चीख पूरे कमरे में गूंज गयी.. वीर घबरा कर अनंत तक पहुँच गया कि कहीं सच में इस अवधूत औघड़ ने अनंत की आँख निकाल तो नहीं ली.. उसी समय यज्ञ और अखंड भी अंदर दाखिल हुए..
अखंड ने जैसे ही अनिर्वान को देखा मुस्कुरा कर आगे बढ़ा और उसके पैर छू लिए..
अनिर्वान ने मुस्कुरा कर उसके कंधे थपथपा दिए..
वीर जो अब तक ये सोचे बैठा था कि अनिर्वान उसके भाइयो के पैरो में गिर पड़ेगा के पैर उसका बड़ा भाई छू गया था..
वीर भौचक्का सा अनंत की तरफ भागा और अखंड और यज्ञ को भी आवाज़ लगाने लगा..
क्रमशः..

वाह वाह मजेदार, शानदार भाग 👌👌😊
वाह बहुत मजेदार ,औघड़ अवधूत महामृत्युंजय सदाशिव सृदशय अनिर्वान से पाला पड़ा है इन लोगों का ..अब होगा भले बुरे का ज्ञान
लाजवाब, कमाल धमाल बेमिसाल भाग 👌🏻👌🏻👌🏻मजा आ गया अपर्णा क्या मसालेदार तड़का लगाया है 👏🏻👏🏻और ऊपर से बाबूराम ने जो मसाला लगाया ना आहा.. क्या बात 👌🏻साक्षात भूतनाथ, महाकाल 🙏🏻जय हो 🙏🏻।
वीर और अनंत ने कभी सोचा नहीं होग़ा कोई इंसान ऐसा भी हो सकता है और वीर जो अकड़ रहा अपने परिहार होने पर अब पता चलेगा ज़ब अखंड और यज्ञ भी उसका साथ नहीं देंगे।
अब देखते है आगे क्या होता है । आपकी कलम का जादू ऐसे ही चलता, बढ़ता रहे 😊🙏🏻।
👏👏👏👏👏👏👏👌👌👌👌👌❤❤❤❤❤❤anirvan ji k liye🧡🧡🧡🧡💛💛💛💛💛💛❤❤❤❤
सुपर से भी ऊपर बेहद शानदार भाग 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
अभी तो इंस्पेक्टर की मस्ती शुरू ही हुई है वीर और अनंत के साथ जितना गेंदा को तड़पाया था उसका दुगना भुगतान करना पड़ेगा का दोनों को।
अभी तक वीर अपने परिहार होने पर अकड़ ही रहा है। पर यज्ञ और अखंड के आने पर ये गलतफहमी भी खत्म हो जायेगी।
आय हाय , dr साहिबा , क्या खा कर ये पार्ट लिखे हो महादेव की सो , इतना मज़ा आ गया की पूछो ही मत , इस हद तक परेशान करना तो कोई भूतनाथ से ही सीखे , या आपसे , लव यू dr साहिबा ❤️🥰😘
इस लीचड़ अनंत को तो ऐसे ही परेशान करना चाहिए था , और उस लाइन पर तो 100 सीटी 🌬️🌬️🌬️🌬️🌬️ की आंख बंद मत करना वरना दूसरे हाथ में पकड़ा चाकू है उससे आंख की पुतलियां निकल दूंगा ,,🫡🫡🫡🤭👁️👁️👁️👁️🫡🫡 और साथ दे रहे बाबूराव को भी जयगढ़ टॉप की तीन सलामी बनती है ,🫡🫡🫡 की उल्टी मत कर देना 😅🤣🤣🤣🤣🤣 आज तो हस हस के पेट दर्द कर लिया मज़ा आ गया धीरे धीरे मैं शैतान बनती जा रही हू , इन सब टॉर्चर में मुझे मज़ा आने लगा है पर इन 🤬🤬🤬🤬 ने गेंदा के साथ काम भी तो ऐसा किया है 😤😤😤😤
वीर को अभी अंदाजा नहीं है कि उसने कितना बड़ा किया है छोटी सी लड़की के साथ इतना बुरा सलूक करके अनिर्बन बहुत जल्द ही वीर को उसकी औकात दिखा देगा और उसे पछताने पर भी मजबूर कर देगा दोनों कमीनों को पता चलना चाहिए कि जब किसी को तकलीफ होती है तो कैसा लगता है आंखों में रेत जाती है तो कैसा लगता है पैर छीलते हैं तो कैसा लगता है गालों पर चांटे पड़ते हैं तो कैसा लगता है सिर् फूटने पर कैसा महसूस होता है।
Very nice part
Sahi tudai ho rahi hai dono ki. Yaad rakhenge ki kisi ladki ke sath Aisa karne ka neteeja