जीवनसाथी-3 भाग-90

जीवनसाथी 3 भाग 90

  कली अपने दोस्तों के बीच से उठ कर गयी और अपना बैग खोल कर बैठ गयी..
बैग खोलते ही उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा..
चुन चुन कर हर वो सामान उस बैग में मौजूद था जो सब उसने अपने दोस्तोँ के लिए लाने का प्रॉमिस किया था..
उन चारों के लिए छोटे छोटे ताजमहल थे, चिकनकारी की कुर्तियां थी, और कुछ विशेष तरह की सूखी मिठाइयां थी…
इन सब के साथ ही कली का ध्यान एक छोटे से रेशमी पैकेट पर भी चला गया..

कली ने वो रेशमी पैकेट हाथ में ले लिया.. उसके दोस्त अपने अपने तोहफे देखने में व्यस्त थे, डेरिक तो मिठाइयों को ही चखने में लगा हुआ था..
अपने उस रेशमी पैकेट को पकड़ कर कली मुस्कुरा कर एक तरफ को घूमी और उसने उसे खोल लिया..

अंदर एक छोटी सी गिटार थी, और एक तस्वीर रखी थी.. उसने तस्वीर उठा कर देखी !!
और वो तस्वीर देखती ही रह गयी..
राजा अजातशत्रु और रानी बांसुरी की तस्वीर थी.. रानी साहब एक ऊँची सी चमड़े की कुर्सी पर बैठी हुई थी.. उनकी गुलाबी नग और मोती जड़ी साड़ी कैमेरा की रौशनी में झिलमिला रही थी.. गुलाबी साड़ी की आभा बांसुरी के चेहरे को भी रंगती जा रही थी..

उसके दायीं तरफ काले टक्सिडो में राजा साहब खड़े  बिलकुल बांसुरी की खूबसूरती को टक्कर दे रहे थे.. राजा महाराजाओ की प्रचलित फोटो की तरह उन्होंने ना गले में कोई हार डाला ना था ना उंगलियों में हीरे माणिक फिर भी उनके चेहरे का तेज़ अद्भुत था..

कली कुछ पलों के लिए उस सुंदर राजसी जोड़े को देखती रह गयी..
उसने यूँ ही तस्वीर को पलट दिया..
पीछे राजा साहब के दस्तखत थे..

वो दस्तखत देख कली की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा.. इसका मतलब शौर्य ने उससे जो वादा किया था निभा दिया था..
वो इसी सपने को लेकर तो महल तक चली गयी थी.. एक दो बार मुलाकात होने पर भी वो राजा साहब का ऑटोग्राफ नहीं ले पायी थी..
उस तस्वीर को उसने सीने से लगा लिया..

“क्या हुआ कली ? इण्डिया में बॉयफ्रेंड बना लिया क्या जो उसकी फोटो को हमसे छिपा रही हो ?”

रीना ने कली को टोक दिया..

“नहीं… !” मुस्कुरा कर कली उन लोगो तक चली आयी.. और इस तस्वीर को उनके सामने कर दिया..

“वाओ” “ब्यूटीफुल” “सुपर्ब” “गॉर्जियस” जैसे शब्दों से कमरा गूंज उठा..

“ये ब्यूटीफुल कपल कौन है कली ?”

डेरिक के पूछने पर कली हल्का सा मुस्कुरा कर रह गयी..

“इन्ही के महल में रुकी थी मैं, राजा अजातशत्रु और रानी बांसुरी !”

“लेकिन महल तक गयी कैसे ?”

“इनके बेटे राजकुमार शौर्य के साथ !”

“ओह्ह तो असली फोटो छिपा रखा है.. है ना ?”

कली कुछ नहीं कह पायी, लेकिन डेरिक ने उसका फ़ोन छीन लिया…

“डेरिक फ़ोन वापस करो, अच्छा रुको मैं खुद दिखा देती हूँ !”

कली ने शौर्य की जो तस्वीरें खींची थी उन्हेँ मोबाइल में लेकर उसने विराज को भेजी थी.. वही तस्वीरें उसने खोल कर अपने दोस्तों के सामने रख दी, लेकिन एक भी तस्वीर ऐसी नहीं थी जिसमे शौर्य का चेहरा दिख रहा हो… अलग अलग एंगल की ढेर सारी मॉडलिंग फोटोग्राफ्स थी लेकिन चेहरे के बिना..

“ये क्या है कली ? हम नजर थोड़े ना लगा देते यार !” रीना ने उदासी से कहा और कली के गले से लग कर झूल गयी..

“कल से कॉलेज चलेगी ना वापस ?”

“हाँ.. अब तो सारा रूटीन वापस !” कली मुस्कुरा उठी, लेकिन उसकी फीकी सी मुस्कान कितनी बेमतलब है ये वही जानती थी..

****

प्रियदर्शनी को निरर्थक इधर-उधर घुमाने के बाद आखिर शौर्य उसे साथ लेकर अपने ऑफिस की तरफ बढ़ गया, धनुष ऑफिस में उसी का इंतजार कर रहा था! मीठी के पास प्रियदर्शनी को छोड़कर शौर्य मीटिंग रूम में दाखिल हो गया। वहां उस वक्त हर्ष धनुष और शौर्य के अलावा उनके कंपनी बुंदेला के बाकी शेयरहोल्डर्स भी मौजूद थे। यह मीटिंग मुख्य रूप से एक दूसरी कंपनी को ओवरटेक करने के विचार विमर्श के लिए रखी गई थी..।
आयल रिफायनरी की एक बडी जानी मानी कंपनी थी चौहान्स एंड ग्रुप।

इस कंपनी में पिछले कुछ समय से लगातार नुकसान दिखाया जा रहा था, और इस नुकसान के कारण कंपनी के शेयर एकदम से नीचे गिरने लगे थे। कंपनी में आपस में भी कुछ पारिवारिक मतभेद था। जिसका फायदा बाकी की कंपनी उठाना चाहती थी। आज मीटिंग में बाकी लोगों का यही कहना था कि चौहान्स कंपनी को अपनी कंपनी बुंदेला में मर्ज करने के लिए उसके सारे शेयर्स खरीद लेना चाहिए। पहले भी एक बार इसी बात पर शौर्य ने आपत्ति दर्ज की थी और आज भी उसने अपना वही मत दोहरा दिया…

इसके पहले जब धनुष ने बाकी शेयरहोल्डर्स के विचार हर्ष के सामने रखे थे, तब भी शौर्य ने उन सब की बातों का प्रतिवाद करते हुए अपनी बात रखी थी और आज भी उसने वही कहा..

” मैं आप सब से यही कहना चाहता हूं कि हमें चौहान को खरीद कर बुंदेला में मर्ज नहीं करना चाहिए, मेरे ख्याल से कुछ तो ऐसा है, जो हमें साफ तौर पर नजर नहीं आ रहा।  कंपनी का लॉस और उनके शेयर ट्रेडिंग नीचे जा रही है। इसका कोई स्पष्ट कारण मुझे समझ में नहीं आता।
पारिवारिक मतभेद अपनी जगह है, लेकिन मतभेदों के कारण इतनी बड़ी कंपनी ठप नहीं हो सकती। उनका तेल रिफाइनरी का काम है। मानता हूं कि इसमें थोड़ा बहुत उठापटक हो सकती है, लेकिन जब तक पूरी दुनिया में गाड़ियां हैं, लोगों के घरों में खाना बन रहा है, होटल में खाना बन रहा है, एयरप्लेन उड़ रहे हैं, गाड़ियां इधर-उधर भाग रही हैं। तब तक यह तेल रिफाइनरी के काम कभी लॉस में नहीं जा सकते।
आप सोच कर देखिए, हमारी सुबह उठकर रात होने तक के ज्यादातर काम में कहीं ना कहीं इन ऑइल्स का हम प्रयोग करते हैं, रिफाइन हो या क्रूड ऑयल। सबका कहीं ना कहीं बहुत ज्यादा महत्व है। और अगर क्रूड ऑयल मिलना कम या बंद होता है, तब उस केस में ऐसी कंपनी का फायदा और बढ़ जाता है। क्योंकि यह अपने उत्पाद की प्राइस बढ़ा देते हैं। तो आखिर उनके नुकसान के पीछे का कारण क्या है, यह सोचकर देखने वाली बात है। और मुझे पता नहीं क्यों कहीं ना कहीं लग रहा है कि यह अपने शेयर्स के रेट जो दिखा रहे हैं वो असल में है नहीं।
    मैंने पहले भी यही कहा था कि इन्हें हम बुंदेला में मर्ज नहीं करेंगे, इसकी जगह पर हमे उनके कुछ शेयर्स खरीद लेने चाहिए। जैसे ही चौहान के साथ बुंदेला का नाम जुड़ेगा, इनके शेयर्स के दाम अपने आप ऊपर जाने लगेंगे, और अगर इनके दाम ऊपर जाने लगे और वाकई कंपनी नुकसान में होगी तो वह स्टेबल हो पाएगी। और अगर वह स्टेबल होती है और उनके नुकसान नफे में बदलने लगते हैं, तो अल्टीमेटली हमारे शेयर्स के दाम बढ़ जाएंगे..।”

” लेकिन शौर्य  तुमने अभी कहा कि तुम्हें उनके शेयर्स के दाम गिरने पर भरोसा नहीं है, तो फिर तुम उनके शेयर्स पर पैसे क्यों लगाना चाहते हो..!”

वहीँ मौजूद कम्पनी के पुराने शेयर धारक गुप्ता जी बोल पड़े.. वो काफी अनुभवी और कार्यकुशल विद्वान् थे.. और बुंदेला के बोर्ड मेंबर्स में से एक थे..

“अंकल अगर चौहान्स जो दिखा रहे, वही सच्चाई है तो हमारे साथी बिज़नेसमैन होने के नाते हमें उनका साथ देना चाहिए..।
मैं हमेशा से इस बात पर यकीन करता हूं कि हम जिस किसी प्रोफेशन से जुड़े हो, उनमें अगर एक दूसरे के साथ प्रतियोगिता करने की जगह हम एक दूसरे का साथ निभाते आगे बढ़े, तो हमें कहीं ज्यादा सफलता मिल सकती है।
बाकी यहां मौजूद सभी की अपने-अपने सोच है। मैंने बस अपना पॉइंट रखा है, आप सब भी अपनी अपनी बात रखें..!”

शौर्य के इतना कहने के बाद हर्ष अपनी जगह पर खड़ा हो गया।
उसने सारे बोर्ड मेंबर्स की तरफ देखने के बाद अपने पीछे दीवार पर लगी स्क्रीन की तरफ सबका ध्यान खींचा और बोलने लगा..
वहीँ बैठा धनुष एक के बाद एक स्लाइड बदल कर दिखाता चला गया…

” जैसा की शौर्य ने कहा मैं भी इस बात से इत्तेफाक रखता हूं कि चौहान्स के पिछले लंबे समय से शेयर्स काफी अच्छे चल रहे थे। और अभी पिछले 6-7 महीने में अचानक उनके शेयर्स में गिरावट आई है। इसके पीछे का कारण क्या है, वह मेरी समझ से बाहर है।
लेकिन शौर्य के ध्यान दिलाने के बाद मुझे भी यह लग रहा है कि कोई तेल कंपनी अचानक से इतनी नुकसान में नहीं जा सकती। जितना नुकसान यह लोग दिखा रहे हैं।

इसलिए उनकी कंपनी को खरीद कर बुंदेला में मर्ज करने के पक्ष में मैं भी नहीं।
बाकी आप सभी मेंबर्स बराबरी से बुंदेला के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए आप सब का वोट मायने रखता है, आपमें से जितने भी लोग शौर्य की बात के पक्ष में है, अपना राइट हैंड टेबल पर रख कर अपनी सहमति दिखा सकते है!”

” हर्ष तुम्हारी और शौर्य की बातों के बीच तुमने हमें सोचने का मौका ही नहीं दिया। तुम दोनों ने यह बात रखी जरूर है, लेकिन हो सकता है कि यहां मौजूद बाकी लोगों के अपने विचार हो। तो हम सब आपस में बातचीत करने के बाद ही यह बता सकते हैं कि हम सहमत हैं या नहीं।”

गुप्ता जी ने वापस अपने मन की बात कह दी, हालांकि वहां मौजूद ज्यादातर लोग शौर्य के कहने के बाद टेबल पर दो बार थाप देकर शौर्य की बात का समर्थन कर चुके थे। बावजूद गुप्ता जी चाहते थे कि वह बाकी लोगों से एक बार बातचीत कर लें। हर्ष ने उनकी बात पर सहमति जता दी। यह मीटिंग हॉल काफी बड़ा था, जिसके एक तरफ बहुत लंबी सी टेबल लगी थी..
उस अंडाकार टेबल के चारों तरफ कुर्सियां लगी हुई थी। इसी टेबल में ज्यादातर मीटिंग संपन्न हुआ करती थी। कमरे के एक तरफ कॉफी और चाय स्नेक्स आदि लेने की सुविधा थी। गुप्ता जी उठकर उस तरफ निकल गए, उन्होंने जाते-जाते अपने साथ के कुछ लोगों को अपनी तरफ आने का इशारा कर दिया। यह सारे लोग उस तरफ जाकर कॉफी के कप पड़कर आपस में बातें करने लगे। दूर बैठे हर्ष धनुष और शौर्य का ध्यान उन सब की तरफ था।
धनुष ने हर्ष की तरफ देखा और अपने मन की बात कहने लगा।

” मैं जानता था गुप्ता जी इस बार भी कोई ना कोई रोडा जरुर लगाएंगे।”

” नहीं धनुष उनकी बात भी सही है, मुझे पहले सब की अनुमति लेनी थी और उसके बाद पोलिंग के लिए कहना था।”

” देखो हर्ष इस बात पर पहले भी मीटिंग हो चुकी है, और उस समय इन सब ने अपने-अपने मन की बात रखी थी। और तब मैंने कहा था कि इन सारी बातों को मैं एक साथ तुम्हारे और शौर्य के सामने रखकर बात आगे बढ़ाऊंगा। उसके बाद तुम्हारे और शौर्य के साथ भी मेरी मीटिंग हुई थी। और तब मैंने इन्हीं की बातें रखी थी और उस समय मुझे शौर्य का कहा ज्यादा सही लगा था।

    आज तो उसी मीटिंग का फाइनल एजेंडा ही तय करना था। लेकिन आज फिर गुप्ता जी ने बातों को पीछे खींच लिया ऐसे में तो हम कभी कोई निर्णय ले ही नहीं पाएंगे..।”

“शायद कुछ लोगों का काम ही होता है इस तरीके से पीछे की तरफ खींचना।
     वैसे हर्ष भाई बाकी सब की तुलना में आपके शेयर्स दो परसेंट ज्यादा है, इस लिहाज से आपको थोड़े से ज्यादा राइट्स मिले हुए हैं। तो आप एक काम और कर सकते हैं कि आज सबके वोट्स ले लें और उसके बाद आप अपना वोट तब तक गुप्त रखिए जब तक सभी के विचार हमें मालूम नहीं चल जाते।

   अगर आपको लगता है कि मैंने जो कहा वह सही है तो आप अपना वोट मुझे दे सकते हैं। लेकिन अगर गुप्ता जी की बातें सही लगती हैं, और आपको यह लगता है कि चौहान को खरीद लेना चाहिए, तब फिर आप अपना मत वहां पर प्रयोग कर सकते हैं।”

हर्ष शौर्य को देखकर मुस्कुराने लगा।

” एक्जेक्टली, यही मैं भी सोच रहा था कि मैं अपने वोट को फिलहाल एक तरफ रखकर बाकी लोगों के विचार जान लूंगा। लेकिन सच कहूं तो तुम्हारी बातों के बाद अब मेरा भी चौहान को बुंदेला में मर्ज करने का मन नहीं है। ऐसा लग रहा है कि यह लोग जो दिखा रहे हैं वह सच्चाई नहीं है। धनुष 2 दिन के अंदर अंदर चौहान के चेहरे के नकाब के पीछे क्या छुपा है, पता करके बताओ। “

“यस बॉस!”

कुछ देर बाद ही गुप्ता जी और बाक़ी अनुभवी लोग वापस चले आये..
हर्ष ने उन सब के विचार जानने के लिए उन सभी को बोलने का मौका दिया। एक-एक कर सभी लोग बोलते चले गए। जिनमें से कुछ लोग शौर्य की बात पर रजामंद थे, लेकिन कुछ लोग गुप्ता जी की तरफ भी थे। आखिर हर्ष को वोटिंग करनी पड़ी और वोटिंग का नतीजा यह निकला की मामला लगभग बराबरी पर आकर रुक गया। बहुत से लोग शौर्य की तरफ थे लेकिन बहुत सारे लोग गुप्ता जी के डर और संकोच के कारण शौर्य का साथ नहीं दे पा रहे थे..।

शौर्य के विचार सभी को सही लग रहे थे। लेकिन शौर्य का आज ऑफिस में पहला दिन था, इसके पहले वह जब भी आता था अनौपचारिक तरीके से आता था, मीटिंग का हिस्सा भी बनता था, लेकिन कभी अपने विचार नहीं रखता था।
आज पहली बार पूरी तरह औपचारिकता के साथ उसने ऑफिस मीटिंग ज्वाइन की थी। इसलिए लोगों का भरोसा भी अब तक उस पर नहीं बन पाया था।
उसकी बात में मजबूती जरूर थी, लेकिन लोगों का भरोसा उस पर नहीं था। गुप्ता जी के अनुभव और विश्वसनीयता के कारण ज्यादातर गुप्ता जी की उम्र के लोग उनके तरफ चले गए थे। इन सब के बीच अब हर किसी की निगाह हर्ष पर टिकी हुई थी। और हर्ष ने अपना मत अब तक छुपा कर रखा हुआ था..।

” मैं आप सब से सिर्फ एक दिन का समय चाहता हूं। मैं जानता हूं कि मेरे मत पर बहुत कुछ निर्भर करता है। बावजूद मैं आप सबको यकीन दिलाता हूं कि मेरा मत इस तरफ होगा जिससे बुंदेला को फायदा हो।

मैं कभी किसी निजी रिश्ते या स्वार्थ को देखते हुए अपना निर्णय नहीं लूंगा। बस आप सबसे इतनी ही रिक्वेस्ट करता हूं कि मुझ पर अपना विश्वास बनाए रखिएगा। कल सुबह दस बजे हमारी यह मीटिंग एक बार फिर से शुरू होगी, और तब मैं अपना विचार आपके सामने रख दूंगा.. इसके बाद हम सब आसानी से इस बात पर कोई निर्णय ले पाएंगे..।”

हर्ष ने अपनी बात कही और मीटिंग के समापन की घोषणा कर दी..
सारे लोग उठ कर चले गए और धनुष अपने तीनो मोबाइल लेकर काम पर लग गया..
उसके जितने भी कॉन्टेक्ट्स थे सबसे उसने चौहान्स की जन्मकुंडली निकलवाने की बात कह दी..

उस दिन शाम ढल गयी, रात हो गयी लेकिन धनुष अपनी जगह से हिला नहीं..
हर्ष और शौर्य भी उसके साथ वहां बैठे काम पर लगे थे.. बीच बीच में मीठी आकर उन लोगों के लिए चाय कॉफी स्नेक्स का इंतज़ाम करवा कर फिर बाहर निकल जाती थी..

बाहर खाली बैठे-बैठे प्रियदर्शनी बोर होने लगी थी। गेस्ट रूम में बैठे-बैठे उसने टीवी पर एक मूवी पूरी देख ली। वही खाते पीते अब उसे ऊब होने लगी थी। उसने मिठी की तरफ देखा और उससे सवाल पूछ लिया..

“और कितना टाइम लगेगा ?”

मीठी ने कंधे उचका कर इशारा कर दिया कि उसे नहीं मालूम

“रिडिक्युलस, कौन ऐसे काम करता है ? ये लोग वाकई अंदर काम कर रहे या पार्टी कर रहे हैं ?”

मीठी ने प्रियदर्शिनी की तरफ देखा और कोई जवाब नहीं दिया..

“तुम ही से पूछ रही हूँ… बीच बीच में अंदर झांक कर देख रही हो ना !”

“तुम्हारे सवाल पर आश्चर्य हो रहा मुझे.. तुम खुद भी तो बिज़नेस क्लास हो, क्या तुम्हे नहीं पता कि कोई बड़ा प्रोजेक्ट हो तो उसमे डिसीज़न लेने में वक्त लगता है.. हर बात की बारीकी से छानबीन करनी पड़ती है.. ऐसे ही तो कुछ नहीं हो जाता ना ?”..

“ओह्ह प्लीज़ लेक्चर मत दो मुझे.. शौर्य को बोलो बाहर आये और मुझे छोड़ने चले !”

“तुम खुद भी तो बोल सकती हो.. नंबर तो होगा ही !”

“नंबर तो है लेकिन उसने अपना फ़ोन बंद कर रखा है !”

मीठी को प्रियदर्शिनी की खीझ पर हंसी भी आ रही थी..
कैसी लड़की थी ये, अगर ये वाकई शौर्य से शादी करना भी चाहती है, तो उसके काम के महत्व को समझना होगा, उसकी प्राथमिकताओं को जान कर समझ कर उसका साथ देना होगा और अगर उसकी जगह ये हर वक्त सिर्फ खुद के बारे में सोचती रही तो कैसे शौर्य के साथ कदम से कदम मिला कर चल पायेगी..

“मुझे अंदर जाना है !” प्रियदर्शिनी ने ज़िद में भर कर कहा..

“लेकिन अंदर जाने की अनुमति किसी को भी नहीं है,और सच बोलूं तो कोई फायदा भी नहीं है !”

“मैं बस मेरी तसल्ली के लिए जाना चाहती हूँ !”

मीठी खड़ी हुई और आगे बढ़ गयी, प्रियदर्शिनी भी उसके पीछे निकल गयी..
आगे बढ़ कर मीठी ने मीटिंग रूम का भारी भरकम दरवाज़ा खोल दिया..

उस दरवाज़े के भीतर जाते ही एक गलियारा था.. जहां एक तरफ कांच की भारी भरकम दीवार सी थी.. जिसमे एक तरफ कांच का ही दरवाज़ा लगा था.. उस कांच के पार बडी आसानी से देखा तो जा सकता था, लेकिन अंदर बैठे लोगो की कोई बातचीत बाहर सुनाई नहीं पड़ रही थी..

उस गलियारे के अंत में एक और दरवाज़ा था जो फ़िलहाल अंदर से ही बंद था। उस दरवाज़े के पार इस कमरे के लिए बनी स्पेशल पेंट्री थी जहाँ से यहाँ के लिए चाय कॉफी स्नेक्स की सप्लाई थी..
बीच बीच में अंदर आकर मीठी उसी दरवाज़े को अंदर से खोल कर वेटर को अंदर आने देती थी और उनके जाते ही वापस वो दरवाज़ा लगा कर बिना उन तीनो को डिस्टर्ब किये निकल जाती थी..

प्रियदर्शिनी ने देखा, वो तीनो ही लड़के ढेर सारी पुरानी फाइल्स, लैपटॉप में स्क्रॉल करती उंगलियों के बीच उलझे पड़े थे..

शौर्य और हर्ष, चौहान ग्रुप के पुराने बिज़नेस हैंडल्स को जाँच परख रहे थे और धनुष किसी अलग ही खोजबीन में लगा था..

प्रियदर्शिनी ने एक दो बार बाहर से आवाज़ देने की कोशिश की, फिर थक कर बाहर निकल गयी… वो पैर पटकती हुई वहाँ से बाहर निकल गयी.. मीठी ने ऑफिस की गाडी और ड्राइवर उसके साथ भेज दिया..

अंदर बैठे धनुष के पास एक फ़ोन आया और उसकी आँखों में चमक चली आयी..

“चौहान का कनेक्शन मिल गया है हर्ष..!”

हर्ष और शौर्य उसकी तरफ देखने लगे..

“क्या है ?”..

“वैसे तो चौहान्स ने कभी इस बात का ज़िक्र तक नहीं किया, हमेशा इस बात को दबाये रखा लेकिन ये लोग शेखावत परिवार के काफी करीब है..
और उनसे इनकी रिश्तेदारी भी है !”

“शेखावत ?”

“हम्म सुनील शेखावत !”
.
क्रमशः 

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Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

Waah waah kya maza chakhaya priydarshini ko👍🏻

Jagriti
Jagriti
1 year ago

Waw akhir shorya nanha Rajkumar bda bna gyi hmari kali jo ab atmnirbhar bnega paise ki ahamiyat ko samjhne k sath

Kalpana pachauri
Kalpana pachauri
1 year ago

Hello ma’am bahut hi sundar kahani h Aisa lagta h Puri kahani ek baar m hi pad lu. Jeevan saathi season 3 bhag 90 se aage kab aayega ?

Madhuri Baranwal
Madhuri Baranwal
1 year ago

Nice and interesting part🥰

Madhuri Baranwal
Madhuri Baranwal
1 year ago

Agla part kab aayega

Sooch brar
Sooch brar
1 year ago

Ma’am aage v likheeye na please 🙏

Nisha
Nisha
1 year ago

Wow shaurya mujhe pura yakin tha ki tum jab bhi koi kaam suru karoge dil se use pura karoge.ab sabko wiswas hoga ki shaurya sirf apne pita ke paise udane walon me se nahi hai balki wo apne pita ki tarah khud ko duniya ke samne ek jimmedar insaan sabit hoga aur dusmano ka pardafans toh hokar rahega.rahi baat priyadarshini ki toh uska kuch nahi ho sakta chahe rupa kitni hi jor laga le

Neha Moolchandani
Neha Moolchandani
1 year ago

Bhut time se aapki story dhund rhi thi ab jakr mili h thank u

Seema Kawatra
Seema Kawatra
1 year ago

शेखावत तो वही है जिसके पिता ने बांसुरी को मारने की कोशिश की थी…. नेहा के accident में भी इनलोगो का हाथ था… राजा को फिर से टारगेट बनाया इन्होंने.
कली को तो शौर्य ने राजा बाँसुरी की फोटो with autograph देकर खजाना ही दे दिया.. सबसे कीमती gift है ये..
शौर्य में आने तो राजा के गुण ही है ना.. चाहे office में आज पहला दिन हो
हर्ष शौर्य और धनुष को पढ़ते पढ़ते राजा प्रेम और समर की तिकड़ी याद आती है