
जीवनसाथी -2 भाग -98
शेरी अपने कमरे में बैठा इसी बात पर विचार कर रहा था की वो कैसे अपने बच्चे तक पहुंचे कि उसी वक्त बाहर कहीं से विराट चला आया…
” क्या हुआ ? अब तक ऐसे बैठे हो,तैयार नहीं हुए ? तुमने तो कहा था ना तुम्हें रियासत घूमनी है ?”
“अब मन नहीं कर रहा ?”
“ये क्या बात हुई ? मैं सारी तैयारी करवा चुका हूँ.. कल रात ही समर से बात कर ली थी, उसने हमारे घूमने की तैयारी करवा ली है..
विराट और भी बहुत कुछ बोलता रहा लेकिन अब शेरी को कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा था..
उसके दिमाग में वहीं नीली आँखों वाला बच्चा घूम रहा था, और उसके साथ ही घूम रहीं थी रेवन..
विराट की कोई बात अब उसे सुनाई ही नहीं दे रहीं थी..
“शेरी लॉरेंट मै तुमसे बात कर रहा हूँ .. !”
विराट ने उसे कंधो से पकड़ कर झिंझोड़ दिया..
शेरी जैसे किसी दूसरी ही दुनिया से वापस आ गया…
“सॉरी विराट !”
“शेरी….. क्या फ़ायदा इतना सोचने का ! आज तक तो तुम्हें अपने बेटे के बारे में मालूम भी नहीं था और अब तुम… ?
अभी ये बात कन्फर्म भी नहीं है की वो रेवन का बच्चा है या नहीं !”
“मैं कन्फर्म हूँ की वो मेरा ही बच्चा है ! एक पिता अपने बच्चे में खुद को महसूस कर पाता है और यही सबसे बड़ा सबूत है की वो मेरा बच्चा है.. !
विराट ने अपना सर पकड़ लिया…..
“ठीक है… पहले एक बार मेरे साथ चलो, मैंने समर को भी बुलाया है.. उससे बात कर के पूछताछ कर लेते हैं, फिर सोचेंगे क्या करना है ?”
“करना क्या है ? मुझे मेरा बेटा वापस चाहिए ?”
विराट दुःखी हो गया था, उसे शेरी की ज़िद पसंद नहीं आ रहीं थी…
वो अपनी तरफ से उसकी मदद करने को तैयार था लेकिन वो इतने थोड़े से दिनों में ये भी जान गया था की समर और पिया के लिए उनका बच्चा क्या था !
उसने समर को फ़ोन कर के बुला लिया, और किसी तरह शेरी को भी साथ चलने के लिए मना लिया…
वो तीनों ही लोग रियासत घूमने निकल गये..
समर को साथ लेने के पीछे विराट का ख्याल ये ही था की वो एक बार समर से बच्चे के बारे में सारी जानकारी ले सके.. हालाँकि उसे ये भी लग रहा था कि मालूम नहीं समर एक अजनबी के सामने उसे सब बताएगा या नहीं ?
रियासत में घूमते हुए शेरी को भी अच्छा लगने लगा था…
कुछ पुराने किले थे जिन्हे अब राजा ने दुरुस्त करवा दिया था..
पुरानी दुकानों में तरह तरह के सामान मिल रहे थे..
पानी बिजली बच्चों के स्कूल सभी चीज़े देखते हुए शेरी ने कह ही दिया..
“ये तो इण्डिया लगता ही नहीं.. !”
और समर मुस्कुरा उठा..
“यही है असली इण्डिया ! आप लोग सर्फ मुंबई की झुग्गी में जाकर जो तस्वीरें लेकर सोचते है की आप असल इण्डिया देख रहें वो सच नहीं है.. !”
वहाँ से घूमते फिरते वो लोग प्रेम के घर पहुँच गए…
निरमा और प्रेम से मिलने के बाद वो लोग बैठे बातों में लगे थे और निरमा सभी के लिए नाश्ता ले आई..
सभी को नाश्ता परोसने के बाद प्रेम की तरफ उसने सिर्फ दलिया का कटोरा बढ़ा दिया..
“क्या हुआ भाभी.. ? प्रेम भैया सिर्फ दलिया क्यों खा रहें ?”
विराट के सवाल पर प्रेम ने लाचारगी से विराट की तरफ देखा और फीका सा मुस्कुरा दिया…
“भाई दो दिन पहले पूरा दिन काम में व्यस्त था, समय पर खा नहीं पाया तो रात में थोड़ी एसिडिटी हो गयी। अब उस दिन से हमें रोज़ सुबह नाश्ते में दलिया ही दिया जा रहा है.. ! क्या करें बोलों ?”
प्रेम की बात सुन सभी हॅंस पड़े… शेरी ने निरमा की तरफ देखा और पूछ लिया..
“आप नाश्ता नहीं कर रहीं! अब देर भी हो गयी है, आपने नाश्ता कर लिया होगा ना !”
मुस्कुरा कर निरमा ने चाय उन लोगों के सामने रखी और सुमित्रा की लायी ट्रे से अपना नाश्ते का कटोरा उठा लिया..
“ये है मेरा नाश्ता !”
शेरी ने देखा और विराट की तरफ देखने लगा..
“भाभी भी वहीं फीका दलिया खा रहीं जो भैया को दिया है… शेरी हमारे यहाँ आज भी ज्यादातर औरतें अपने पति को खिलाने के बाद ही खाने बैठती है.. ! इसलिए शायद अब तक भाभी ने नाश्ता नहीं किया था !”
शेरी ने हामी भरी और वापस निरमा से सवाल कर दिया..
“आप तो वर्किंग है ना ! फिर अपना नाश्ते का समय कैसे मैनेज करती हैं ?”
“सुबह मीठी के स्कूल जाने के बाद हम साथ ही अपने अपने काम पर निकल जाते हैं ! अगर लंच के लिए घर आने का समय होता है तो, हम दोनों ही एक साथ लंच कर लेते हैं वरना ऑफ़िस से ही पूछ लेती हूँ की खाया या नहीं..
वैसे ये हमारे यहाँ का कोई नियम नहीं है कि पति के खाने के बाद ही खाना है…और ऐसा कोई ज़रूरी भी नहीं ! लेकिन जाने क्यों मेरा मन नहीं मानता इसलिए कोशिश तो यही रहती है कि साथ ही खा लें !”
शेरी मुस्कुरा उठा..
“ये सारी बातें हमारे यहाँ नहीं होती.. हम तो जिसे जब भूख लगे अपना बना कर खा भी लेते हैं !”
उसकी बात सुन सभी मुस्कुरा उठे..
“ये बातें सिर्फ इण्डिया में ही नज़र आती है.. “
शेरी मुस्कुराने लगा..
“आपके घर में और कौन कौन है ? मतलब फैमिली कहाँ है ?”
निरमा ने उसकी तरफ चाय बढ़ाते हुए कहा
“मेरे मॉम डैड ने तलाक ले लिया था जब मैं सिर्फ पंद्रह साल का था.. ! उसके बाद मैं दो तीन साल हॉस्टल में रहा और फिर एक पीजी में रहने लगा..
अभी डैड ऑस्ट्रिया में है और मॉम हॉलेंड !
डैड से पिछले दो तीन सालों से बात नहीं हुई..!”
“ओह्ह माफ़ करना.. !”
“नो… माफ़ी की कोई बात नहीं.. वहाँ ये सब कॉमन है ! आप इंडियंस हर एक रिश्ते को बहुत गहराई से निभाते हैं.. लेकिन हमारे लिए रिश्तों से भी ऊपर ज़िन्दगी है..
हम लोगों की सोच होती है कि हमें ज़िंदगी अच्छे से गुज़ारनी है… !”
“ये तो बहुत अच्छी बात है !”
निरमा की बात पर शेरी आगे अपने बारे में बताने लगा…
“मैंने अकाउंट्स में पढाई की है… ख़ूब मेहनत कर के, स्कॉलरशिप लेकर पढ़ा हूँ.. कभी पैसों की ज़रूरत होने पर भी डैड से मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ी..!हमेशा मेरा कम बन ही गया !
और उसके बाद नीदरलैंड्स के एक बैंक के लिए काम करने लगा..
ख़ूब काम किया मैंने, वो लोग पैसे भी अच्छे खासे देते थे.. सुबह से रात तक बैंक का काम करो और रात में घर आ कर सो जाओ..
वीकेंड पर मैं अक्सर आसपास के देश घूमने निकल जाता था..
फिर अचानक एक दिन लगा की मैं किसके लिए कमा रहा हूँ….
मैं 32 साल का हूँ, उस वक्त 29 का था !
उस समय लगा मेरा सारा जीवन सिर्फ बैंक में ना ख़त्म हो जायें..
और मैंने एक दिन जॉब छोड़ दी.. !”
“ओह्ह… फिर.. अब क्या करते हो ?”
“कुछ पैसे अकाउंट में पड़े ही थे, कुछ के शेयर्स हैं.. उन्हीं में इन्वेस्ट कर के पैसे बढ़ाता रहता हूँ..
29 की उम्र में नौकरी छोड़ने के बाद मैंने सोचा की अब निकला जायें अपने खोल से बाहर और बस मैं निकल गया खुद को खोजने…!”
शेरी की कहानी सुन कर निरमा ज़रा भावुक सी हो गयी…
“मुझे लगता है आप इंडियंस हर बात का लोड बहुत लेते हैं.. रिश्तों का, ज़िम्मेदारियों का, यहाँ तक की खाने पीने का भी.. !”
उसने हॅंस कर निरमा के बाउल की तरफ इशारा कर दिया..
और निरमा भी हंसने लगी..
“जहाँ दिमाग में लोड आ जायें वहाँ फिर प्यार कहाँ ठहरता है !
मैंने बताया ना हमारे यहाँ इस बात का कोई नियम नहीं है.. हम हिंदुस्तानी औरतें बात बात पर अपने पति के गले में बाहें डाल कर झूलती नहीं, और ना ही हर बात पर उन्हें लव यू बोलती है..
हमारा तरीका ऐसा ही होता है..
पति के ऑफ़िस निकलने के पहले उसके तैयार होने से पहले उसका सामान तैयार कर देने में हमारा प्यार छलकता है !
बिना उसके बोले भी उसकी पसंदीदा सब्जियां खरीदने में हमारा प्यार छलकता है !
उसे अपनी कसम खिला कर उसकी बुरी आदते छुड़वाने में हमारा प्यार छलकता है !
कभी कहीं बाहर जाते समय अपनी ड्रेस से मैचिंग शर्ट उसे पकड़ाने में हमारा प्यार छलकता है !
मैं भी बार बार इन्हें फ़ोन लगा कर नहीं पूछती की कहाँ हो, और इनका नियम सा बन गया है शाम को मेरी छुट्टी के वक्त इनका फ़ोन आता ही है, कि मैं निकल गयी या नहीं..
और जिस दिन ये गलती से मुझे फ़ोन करना भूल जायें उस दिन इन्हें डांट डपट कर उनकी क्लास लगाने में मेरा प्यार छलकता है.. !
वैसे रिश्तों की क्या कहूं…
आप लोग भी गलत नहीं है.. कहीं ना कहीं ज़िंदगी ही सबसे महत्वपूर्ण है.. हमारी ज़िंदगी खुशहाल करने ही तो ये सारी ज़द्दोज़हद है, और हम पागल हिंदुस्तानी औरतें अपने प्यार और रिश्तों में ही अपनी ज़िंदगी को ढूंढते हैं !”
शेरी मुस्कुरा उठा..
“आपसे बात कर मुझे मेरी मॉम की याद आ गयी.. सोच रहा हूँ एक कॉल कर लेता हूँ… पिछले सात महीने से उनसे बात नहीं हुई !”
शेरी मुस्कुरा कर फ़ोन निकालने लगा..
“मैं अगर मेरी मामी जी को दो दिन फ़ोन ना लगाऊं तो वो मुझ पर बरस पड़ती हैं.. !”
निरमा वापस मुस्कुराने लगी…..
शेरी और उसकी बातें वहाँ बैठे सभी को पसंद आ रहीं थी..
“मैं मेरी लाइफ में सबसे ज्यादा उस समय को मिस करता हूँ जब मैं अपने डैड के साथ था..
वो समय बहुत प्यारा था, मेरा और उनका बांड भी बहुत अच्छा था..
वो मेरे साथ ख़ूब बातें करते थे.. मेरे साथ खेलते थे, मुझे पढ़ने में मदद करते थे.. हम दोनों साथ मिल कर खाना बनाते थे, वीकेंड पर बैकयार्ड साफ़ करते थे.. कभी पास की झील पर मछली पकड़ने जाते थे..
हम लम्बी लम्बी बाइक राइड्स पर भी जाते थे..
और मैं उनसे हमेशा कहता था, की आप दुनिया के सबसे अच्छे डैड हैं..
और वो कहते थे कि मैं उनसे भी बेहतर डैड बनूँगा !”
कह कर शेरी खामोश हो गया..
विराट उसका दुःख समझ रहा था, लेकिन वहाँ समर के सामने उसकी कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी..
” समर एक बात पूछना चाहता हूँ.. ?”
बड़ी हिम्मत जुटा कर विराट ने समर से पूछा..
“हाँ पूछो समर ?”
“ये शोवन…. तुम्हारा ही… मेरा कहने का मतलब.. !
विराट अपनी बात रख नहीं पा रहा था….
“विराट… शोवन मेरी एक दोस्त का बेटा है.. मेरी उस दोस्त से तुम मिल चुके हो.. उसका नाम रेवन है…
वो यहाँ हमारे महल भी आई थी.. बहुत सीधी और सच्ची सी थी..
शोवन उसी का बेटा है ! मेरा और पिया का नहीं !
लेकिन अब रेवन इस दुनिया में नहीं है, शोवन के आगे पीछे कोई नहीं था, इसलिए मैं उसे यहाँ ले आया.. ।
अब तो कानूनन उसे गोद भी ले लिया है…।
ये बात महल में भी सभी जानते हैं, तुम अब तक बाहर थे इसलिए तुम्हारी जानकारी में नहीं थी ये बात !”
विराट ने हामी भरी और धीरे से सर झुकाये अपनी मन की बात कह दी..
“शेरी, शोवन का बायलोजिकल फादर है !”
विराट की ये बात वहाँ बैठे सभी लोगों पर गाज की तरह गिरी..
निरमा ने शेरी की तरफ देखा, वो बेबसी में मुस्कुरा उठा..
गलती तो उसकी भी नहीं थी..
उसने अपनी ज़िंदगी में हर मुकाम खुद हासिल किया था..
उन दिनों जब वो नया नया नौकरी में आया था, तब अक्सर अपने वीकेंड्स पर वो आसपास के देशो को घूमा करता था, इसी दौरान एक पब में उसकी मुलाकात रेवन से हुई थी..
उसे रेवन अच्छी लगी थी.. बहुत अच्छी !
लेकिन उस रात के बाद वो लौट गया था..
हालाँकि अलग अलग तरीको से उसने रेवन से मिलने और बात करने की कोशिश की लेकिन रेवन उससे दुबारा मिलना ही नहीं चाहती थी और इसलिए उसने हर जगह से शेरी को ब्लॉक कर रखा था..
और उस सब के बाद शेरी भी अपने कामकाज में व्यस्त हो गया..
उसी दौरान एक बार किसी पेंटिंग एक्सिबिशन में उसकी मुलाकात विराट से हुई और दोनों की दोस्ती हो गयी..
समर ने शेरी की तरफ देखा लेकिन वो अचानक कुछ कह नहीं पाया…
उसके सामने पिया का चेहरा घूम गया.. !
उसी समय राजा के ऑफ़िस से समर के लिए फ़ोन आने लगा..
विजय से बात हुई और समर वहाँ से निकल गया
“मुझे कुछ ज़रूरी काम है !” कह कर उन लोगों से माफ़ी मांग कर समर वहाँ से निकल गया…
प्रेम और निरमा भी कुछ नहीं बोल पाए..
कुछ देर शांति से बैठे रहने के बाद विराट और शेरी वहाँ से निकल गए…
*****
राजा अपने कार्यालय में बैठा कुछ काम निपटा रहा था की उसके पीए ने किसी से फ़ोन पर बात की और राजा के पास चला आया…
“राजा साहब ! दिल्ली से फ़ोन है.. आपको बुलाया जा रहा है !”
“क्यों.. ? ऐसे अचानक क्या हुआ ?”कुछ बताया उन्होने ?”
“जी इस बार की यूपीएससी में कुछ धांधली हुई है… अंदर की खबर ये है की बेबी साहब का नाम भी शायद उस लिस्ट में है, जिनका सेलेक्शन गलत तरीके से किया गया है.. !”
“क्या बात कर रहें हो विजय ?”
“जी राजा साहब ! समर को बुला लिया है मैंने.. हम वहीं सब पता करने जा रहें हैं..!
बस आपसे छोटी सी रिक्वेस्ट थी…
अगर आप बेबी साहब से भी एक बार पूछ लेते.. ?
बहुत डरते हुए विजय ने राजा से ये कहा क्यूंकि वो जानता था राजा जैसे इंसान के आसपास के लोग भी चाह कर भी बेईमानी नहीं कर सकते… पर उसे तो अपना काम करना ही था…
दरवाज़े पर दस्तक हुई और समर दरवाज़ा खोल कर अंदर चला आया…
” क्या हुआ विजय अचानक ऐसे फोन क्यों किया..?”
राजा को बैठे देख समर ने झुक कर उसे प्रणाम किया और उससे भी पूछ लिया..
“हुकुम आज आप इतनी जल्दी कैसे आ गए..?”
” मैं अपने समय पर ही आया हूं समर आज तुम थोड़ा लेट हो गए । खैर….
वह छोड़ो विजय ने तुम्हें कॉल इसलिए किया है क्योंकि एक बड़ी समस्या हो गई है.. !”
राजा ने विजय की तरफ देखा और विजय ने समर से सारी बातें बता दी…
यह सब सुनकर समर भी कुछ देर के लिए भौचक रह गया! उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि पिंकी का नाम यूपीएससी के रिजल्ट की लिस्ट में डाला गया है, जिस में धांधली करके सेलेक्ट होने वाले विद्यार्थियों का नाम है…
अभी यह सारी बातें मीडिया और बाहरी लोगों से छुपा कर रखी गई थी। अंदरूनी तौर पर इन्हीं लोगों की शिकायत पर यूपीएससी का कार्यालय अपनी छानबीन करवा रहा था, जिसमें कुछ लोगों के नाम पर उन्हें शक हो रहा था ।
उन लोगों की लिस्ट में पिंकी का नाम भी मौजूद था…
और ये बात अंदरूनी तौर पर राजा के सेक्रेटरी को मालूम चल गयी थी..
समर अपने लोगों को फ़ोन कर बात की तस्दीक करने लगा और राजा विजय के साथ उस लिस्ट में मौजूद बाकी लोगों का बायोडाटा खंगालने में लग गया..
इसके साथ ही राजा ने समर को बुला कर शिकायत करने वालों की पतासाजी करने का भी फरमान जारी कर दिया..
क्यूंकि राजा को अच्छे से मालूम था उस पर बुरी नज़र रखने वालों की कमी नहीं थी..
उसकी अच्छाइयों से जलने वाले बस उसकी किसी एक गलती का इंतज़ार करते बैठे थे..
उन की आंखें यहीं लगी थी कि, राजा ज़रा सा फिसले और वो उसे उठा कर पटखनी दे दे..
“समर ज़रा रतन बाबू को भी फ़ोन लगाना.. उन्हें भी बुला लो.. पिंकी से तो नहीं लेकिन रतन बाबू से पूछ कर पता करते हैं की इस बात में कोई सच्चाई तो नहीं.. !”
समर ने हामी भर दी, लेकिन समर के दिमाग में रह रह कर निरमा की बात घूमने लगी थी..
कुछ दिनों पहले प्रेम और निरमा के घर पर डिनर के दौरान निरमा ने ऐसी ही किसी बात की आशंका जताई थी..
उस वक्त उसने बताया था की रतन बाबू निरमा को फ़ोन कर फ़र्ज़ी परीक्षा करवाने वालों के बारे में बहुत खोद खोद कर जानकारी ले रहें थे..
उस वक्त मजाक मजाक में निरमा ने ये भी कहा था कि रतन कहीं पिंकी के सलेक्शन के लिए तो ये जोड़तोड़ नहीं कर रहें…
उस समय लेकिन उन सभी ने बातों को हवा में उड़ा दिया था..
समर ने उस वक्त सोचा भी नहीं था कि इस तरह से कुछ दिनों बाद ही पिंकी का नाम इस फ़र्ज़ी लिस्ट के दावेदारों में आ जायेगा…
इस सबके लिए बैठी जाँच कमिटी अपना काम कर रही थी और उस लिस्ट के सही पाए जाने पर ये सेलेक्शन निरस्त हो जाना था..
उस कमिटी का काम होने से पहले पहले सच्चाई पता लगाना बेहद ज़रूरी था..
यही सब सोचते विचारते समर और राजा के माथे पर बल पड़ गए थे…
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लन्दन की ठण्ड में अलाव के ठीक सामने बैठा वासुकी बहुत देर से अपनी नन्ही कलि और सारिका की बहस सुन रहा था..
कलि सारिका के हाथ से सूप पीने को तैयार नही हो रही थी.. उसे उसकी मासी माँ चाहिए थी..
दर्श, काका सभी उसकी मिन्नतें खुशामदें कर कर के थक चुके थे !
वासुकी ने उसे बताया था कि मासी माँ कुछ दिनों के लिए बाहर गयी है, और जल्दी ही वापस आ जायेगी.. वो नन्ही सी मासूम उसकी बातों में आकर कुछ समय के लिए अपनी ज़िद भूल भी बैठी थी। लेकिन दिन बीतने के साथ ही उसकी ज़िद वापस शुरू हो गयी थी..
वासुकी अपनी जगह से उठा और अपनी नन्ही कलि को गोद में उठा लिया..
“मासी माँ से बात करनी है.. ?”
“यस डैडा.. !”
उसकी मीठी सी मुस्कान देख वासुकी ने फ़ोन में नंबर घूमा दिया….
रिंग बजने लगी, और वासुकी उसे गोद में उठाये टेबल तक ले आया..
उसके सामने ही मोबाइल को स्पीकर में डाल कर उसने अपनी कलि को सूप पिला दिया..
वो मुस्कुरा कर अपने अति अल्पभाषी पिता से कुछ भी ऊलजलूल कहानियां सुनते हुए पूरा सूप पी गयी..
उसे गोद में उठा कर टहलते वक्त वापस वासुकी ने फ़ोन लगा दिया.. एक बार रिंग जाने लगी..।
बाहर की ज़बरदस्त ठण्ड के कारण अलाव की तपन सुकून पैदा कर रहीं थी.. कुछ देर टहलने के बाद वासुकी खुद उस अलाव के सामने रखी आराम कुर्सी पर बैठा और कलि को खुद पर लिटा लिया.. वो नींद में जा चुकी थी.. हल्का सा कुनमुना कर वो अपने डैडा से लिपट कर सो गयी..
फ़ोन बंद कर एक किनारे रख वासुकी धीरे धीरे कुर्सी को हिलाने लगा…
“मिस्टर हस्बैंड… सो गए क्या ?” नेहा ने झुक कर वासुकी के माथे को चूम लिया…
चौंक कर वासुकी की नींद खुल गयी….
हॉल की बत्ती बुझ चुकी थी… कमरे में कोई नहीं था !
सारिका और दर्श अपने कमरे में जा चुके थे.. काका भी अपने कमरे में थे..
वासुकी ने धीरे से कलि को उठाया और अपने कमरे में चला गया..
उसे बिस्तर पर सुलाने के बाद वो खिड़की पर आकर खड़ा हो गया…
बाहर बर्फ पड़ रही थी… !
अजीब सा सुनसान सर्द रास्ता था जो दिल के अंदर एक खालीपन भर रहा था..!
वासुकी ने अपने मोबाइल पर नेहा के नाम का फोल्डर खोल लिया जिसमे नेहा ने कुछ गाने भेज रखे थे..
पहला ही गाना चलाते ही वासुकी उसे सुन उदासी भरी मुस्कान में डूब गया..
वहीं खिड़की के पास रखे काउच पर वो बैठ गया और मोबाइल पर चलता गाना जैसे उसकी दिल की आवाज़ बन गया…
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
वही आग सीने में फिर जल पड़ी है….
कुछ ऐसे ही दिन थे वो जब हम मिले थे
चमन में नहीं फूल दिल में खिले थे
वही तो है मौसम मगर रुत नहीं वो
मेरे साथ बरसात भी रो पड़ी है….
क्रमशः
aparna….

Jeevanasathi season 1 bhi upload kijiye please