जीवनसाथी -2/70

जीवनसाथी 2 भाग 70

खड़े होकर उसने दुपट्टे को पेट के सामने खींचा और वहीँ खड़ी पंकजा को साथ लिए वहाँ से बाहर निकल गयी…
  वहाँ बैठी सारी औरतें उसे जाते देखती रह गयी….

  बाँसुरी मुस्कुरा कर आगे बढ़ गयी…

वो गाड़ी के पास पहुंची और ड्राइवर को गाड़ी से बाहर आने कहने लगी…

“चलिए आप बाहर निकलिए, गाड़ी हम खुद चलाएंगे !”

ड्राइवर ने आश्चर्य से बांसुरी को देखा और उसकी आंखें फटी की फटी रह गई..

” लेकिन हुकुम आप आप कैसे गाड़ी चला सकती हैं?

” जैसे आप चलाते हैं..!
   हम भी उसी तरह दोनों हाथ से स्टेयरिंग घुमाते हैं… और यह तो वैसे भी ऑटोमेटिक है !”

” मेरा पूछने का ये मतलब था कि आप रानी है, और हम सब आपकी सेवा के लिए ही नियुक्त किए गए हैं, मेरे रहते आप क्यों गाड़ी चलाने का कष्ट करेंगी?

बाँसुरी का चेहरा बन गया…

” क्योंकि हम शिद्दत से इस कष्ट को महसूस करना चाहते हैं.. ! अच्छा ठीक है हम पीछे बैठ रहे हैं आप चलाइए गाड़ी.. !”

तुनक कर बांसुरी पीछे बैठ गई  और उसका साथ देने के लिए पंकजा भी उसके साथ ही बैठ गयी !
ड्राइवर ने गाड़ी महल से आगे बढ़ा दी…

महल से थोड़ा बाहर पहुंचते ही बांसुरी ने ड्राइवर से कहकर गाड़ी एक तरफ रुकवा कर उसे गाड़ी से नीचे उतार दिया..

” हम यानी रानी बांसुरी आपको हुकुम देती है कि, आप हाथ बांधकर चुपचाप हमारी वापसी तक यही खड़े रहें..
    जब हम वापस लौटेंगे तो यहां से महल तक गाड़ी आप ही चलाएंगे.. ठीक है.. ?”

” लेकिन रानी साहेब यह ठीक नहीं है ! अगर महल में किसी को भी पता चल गया तो मेरी नौकरी चली जाएगी!”

” अब आप हमें बताएंगे कि क्या ठीक है क्या नहीं? हद है, हम रानी क्या बन गए अब हम अपने हिसाब से गाड़ी भी नहीं ड्राइव कर सकते,?
अपने मन के कपड़े नहीं पहन सकते ?  अपने मन का खा नहीं सकते, पी नहीं सकते, किसी से बोल नहीं सकते, बता नहीं सकते !
  इतने मोटे-मोटे जेवर पहनो, यह लहंगे पहनो, इस पर बैठो, उस पर बैठो, ऐसे बोलो, वैसे ना बोलो..!
हद करके रखी है यहां सबने…. ..
    महल के लोगों को छोडो यहाँ तो नौकर भी हम पर हुकुम चला रहे हैं.. !
  फिर कहां की रानी हुए हम ?.. बोलों पंकजा ?
  हमसे तो बेहतर पंकजा है, कम से कम जब अपने कमरे में जाती है तो अपने मन के कपडे तो पहन सकती है.. !
  अपने मन के गाने सुन सकती है, जो मन की है वह खा सकती है !अपने हिसाब से रह सकती है अपनी जिंदगी खुद जी सकती है.. !
यहां महल में तो लोगों की जिंदगी कैद होकर रह गई है |  घुट घुट कर कैसे रहते हैं यहां के लोग. ?  बोलो पंकजा.. ?”

अपनी बकबक में लगी बांसुरी ने ड्राइवर को एक तरफ कर गाड़ी फर्राटे से आगे बढ़ा ही दी,  और पंकजा चुपचाप बैठी उसकी सारी बातें सुनती रही….

” तुम सुन रही हो ना पंकजा.. ?  क्या तुम्हें नहीं लगता कि महल के लोगों का जीवन बहुत कठिन सा है |बाहरी दुनिया को लगता है कि महल की औरतें कितनी खुश है, लेकिन उन्हें नहीं पता कि हम इतने भी खुश  नहीं, जितने बाहर के लोगों को नजर आते हैं..!

    बाहर की दुनिया में आजकल की औरतें, यानी हमारी उम्र की औरतें, जींस टॉप स्कर्ट फ्रॉक ड्रेसेस पहन कर घूम रही हैं और हम यहां पर शिफॉन की महंगी महंगी साड़ियों  में सज धज कर घूमते रहते हैं..
इतने गहने जेवर पहन लेते हैं जितना तो हमारा खुद का वजन नहीं है !
   अब बताओ इतना सब पहन कर हम अपने बच्चे को गोद में तक नहीं उठा पाते |  हमें डर लगता है हमारे बच्चे को हमारे जेवर न चुभ जाए..|
रोज सुबह 8 बजे आकर कमरे के बाहर एक घंटा बज जाता है !  इसका मतलब यह है कि अब आपको नीचे जाना ही है!
रात में आप चाहे कितनी देर से सोए या ना भी सोए तब भी आपको सुबह अपने वक्त पर उठना ही है…  नाश्ते का जो वक्त है उस पर ही आपको खाना है, चाहे आपको भूख हो या ना हो |
     दूध देखकर चाहे आपको कितनी मौत आये लेकिन राजमहल का नियम है इसलिए दूध पीना ही पड़ेगा..!
   चाय पीते वक्त भी ऐसे बैठो, चाय का कप इस हाथ से उठाओ, कुकीज़ उस हाथ से उठाओ.. कई बार तो हमें लगता है हम कहीं इनके नियम कायदे याद करते-करते पागल ना हो जाए..! एक दिन हमनें कोई सस्ता बिस्किट मांग लिया तो महल की औरतों को छोड़ो सहायिकाएं भी आँखे फाड़े हमें यूँ घूरने लगी जैसे हमनें कोई पाप कर दिया हो !

    एक दिन हमने गलत हाथ से चाय का प्याला उठा लिया तुरंत बड़ी रानी साहेब ने हमें टोक दिया..
महल की औरतों को तो छोड़ो इन की संगत में रहने वाली बाहरी औरतें भी बिल्कुल इन की कॉपी हो गई है..!”

” जी हुकुम आपकी सारी समस्याएं राजा साहब के वापस आते ही दूर हो जाएंगी !”

” कहां से दूर होंगी?  आपके राजा साहब को तो फुर्सत ही नहीं है महल में रहने की..!
  जाने कितने दिन हो गए वह किसी ना किसी काम से महल से बाहर ही रहते हैं ! तभी दिल्ली गए रहते हैं ! कभी देहरादून, कभी बेंगलोर चले जाते हैं ! और अभी फिलहाल पिछले 15 दिनों से अपने पिता साहब को लेकर ऑस्ट्रेलिया में बैठकर उनका इलाज करवा रहे हैं..!
अब उन्हें भी क्या ही कहे हम ! जबसे हमारी प्रेगनेंसी की खबर हुई है तब से हमें कान में भी थोड़ी सी दिक्कत होने लगी है..!
   हम फोन पर ज्यादा देर बात नहीं कर पाते, इसलिए उनसे भी फोन पर कम ही बातचीत होती है |

   एक बात बताएं पंकजा, अगर कोई हमसे ये पूछेगा न कि हम अगले जन्म में क्या बनना चाहेंगे तो हम कहेंगे कुछ भी बन जाएँ पर रानी तो कभी नहीं बनना चाहेंगे !”

बाँसुरी फर्राटे से गाड़ी चलाती हेडक्वार्टर पहुँच गयी… वहाँ अनिर्वान के ऑफ़िस की तरफ गाड़ी खड़ी कर वो अंदर दाखिल हो गयी.. पंकजा भी हड़बड़ाई सी उसके पीछे भाग चली..

“ये देखो पंकजा ! महल की बुराई में हम अपनी दोस्त के ऑफ़िस भी पहुँच गए और उसे कॉल करना भी भूल गए.. रुको अभी कर लेते है !”

बाँसुरी ने लीना का नंबर लगाया और कुछ बातें करने के बाद फ़ोन रख कर सीधे अनिर्वान के केबिन की तरफ बढ़ गयी..

“मैडम एक मिनट रुकिए, साहब अभी व्यस्त है.. !”

बाँसुरी ने घूर कर उस गार्ड को देखा और फिर अचानक मुस्कुरा उठी…

“महल से कोई अपनी शिकायत ले कर आये तब भी आपके साहब व्यस्त रहते हैं.. !”

वो अर्दली एकदम से चुप रह गया.. और बाँसुरी दरवाज़ा खोल कर धड़धडाते हुए अंदर चली गयी…

उस वक्त अनिर्वान किसी ठेकेदार को तबियत से धमका रहा था, और वो ठेकेदार अनिर्वान के पैरों पर गिरा उसे मनाने की कोशिश में लगा था.. अनिर्वान की गुस्से में मुट्ठियां भिंची हुई थीं…
उसकी आँखों में ख़ून उतर आया था.. ! ठेकेदार शराब का ठेका लेता था और गाँव के कई लोग एक कार्यक्रम में उसकी ज़हरीली शराब का सेवन कर भगवान को प्यारे हो गए थे.. !
   अनिर्वान इसी बात पर उसे जेल में डालने उसके ठिकाने से उठा लाया था, लेकिन अपनी ऊँची पहचान का हवाला देता हुआ वो खुद को बचाने में लगा था कि बाँसुरी अंदर चली आई..

“कैसे हैं मिस्टर भरद्वाज ?”

अनिर्वान उसे अपने सामने देख चौंक गया..

“आप इस वक्त यहाँ ? कैसे ? मेरा मतलब क्यों.. ?”

अनिर्वान ने ठेकेदार को कॉलर से पकड़ कर उठाया और दरवाज़े से बाहर कि तरफ धकेल दिया.. बाहर खड़ा स्टाफ उसे पकड़ कर ले गया.. !

“शिकायत दर्ज़ करवानी है.. ?”

“जी.. आपको.. ? मेरा कहने का मतलब था किसकी.. ?”

अनिर्वान का गला सूखने लगा था, उसने पानी का गिलास उठा कर अपने होंठो से लगा लिया… पंकजा को बाँसुरी बाहर ही छोड़ कर आई थीं..
और फ़िलहाल उस केबिन में अनिर्वान बाँसुरी के अलावा बाबूराव ही था जो उसी ठेकेदार की फाइल को अनिर्वान के सामने खोल कर उसे दिखा रहा था…..

“अपने मिस्टर हस्बैंड की… !”

गले में गयी पानी की घूंट फंस कर रह गयी और अनिर्वान को हल्का सा ठसका लग गया… उसे खांसते देख बाबूराव जरा परेशान सा हो गया..

“साहब कुछ लाये आपके लिये.. ?”

“मैडम के लिए चाय ले आईये.. !”

“जी हुजूर ! “

बाबूराव मुड़ने को था की बाँसुरी ने उसे टोक दिया…..

“आपका नाम क्या है.. ?”

“मैडम, बाबूराव नाम है हमारा !”

” हां तो बाबूराव जी, क्या आप शादीशुदा हैं..? वैसे  उम्र देखकर तो समझ में आ रहा है कि आप शादीशुदा हैं फिर भी पूछ लेना चाहिए !”

अनिर्वान टेबल पर हाथ रखे अपनी उंगलियों को अपने माथे पर चला रहा था..

” जी मैडम हैप्पिली मैरिड है!”

” अरे वाह !!  पहली बार किसी आदमी के मुंह से यह सुना है कि हैपिली मैरिड है, वरना शादी के बाद औरतें तो जरूर खुश रहती हैं लेकिन मिस्टर हस्बैंड अक्सर अपनी वाइफ की कोई भी बात सुनकर अपने माथे को खुजाने लग जाते हैं..! क्यों बाबूराव जी सही कहा ना मैंने..?”

” जी मैडम !”बाबूराव ने धीरे से हां में गर्दन हिला दी..

” तो बाबूराव जी, अगर आप शादीशुदा हैं तो आपके बच्चे भी होंगे..?”

” है मैडम.. दो बच्चे हैं..! बड़ा लड़का इस साल कॉलेज फर्स्ट ईयर में पहुंच गया है और बेटी दसवीं कक्षा में है !”

” अरे वाह गजब!!  बाल बच्चों का, हर चीज का अनुभव है फिर आपको !
      अच्छा एक बात बताइए क्या आपको आपकी वाइफ की प्रेगनेंसी वाला टाइम याद है..!”

बाबूराम ने झेंप कर अनिर्वान की तरफ देखा और वापस बांसुरी की तरफ देखने लगा..

” याद है मैडम..!  वह तो स्वर्णिम पल था हमारी जिंदगी का..!”

” है ना बाबू राव जी..!”

“जी मैडम !”

” अच्छा क्या आपको याद है आपके बच्चे ने जब वाइफ के पेट के अंदर पहली बार किक मारा था तब कैसा लगा था..?  क्या आपने महसूस किया था बाबूरावजी..?”

बाबूराव मुस्कुराकर खयालों में खो गया…

” जी मैडम उन यादों की तो बात ही क्या करूं..?  उस समय हमारी श्रीमती जी से पराठे नहीं बनाए जाते थे और हम रोज पराठा खाने वाले इंसान..! इसलिए हमने उनकी समस्या दूर करने के लिए खाना बनाने वाली रख ली थी..! और उस समय जो खाना बनाने वाली रखी उसे आज तक नहीं निकाल पाए..! अब उसे देख कर यूं लगता है कि यह भी हमारे उस समय की यादगार है..!
   उस वक्त हमारी मैडम को जो खाने का वक्त होता था और जिस वक्त खाने का मन करता था हम उसी वक्त खिलाने ले जाते थे ! कई बार तो रात में बारह  बजे उठकर बोलती थी कि हमें रबड़ी खानी है |  अब रात में रबड़ी कहां से मंगवाते? लेकिन फिर एक होटल वाले से जान पहचान कर के रख लिए थे, कि वक्त बेवक्त हमारी मैडम अगर फरमाइश करें तो उनके लिए हम उस होटल से मंगवा सके.. !”

” अरे वाह !  बाबूराव जी, दिल खुश कर दिया आपकी याद ने… .!
…. प्रेगनेंसी एक औरत के साथ-साथ एक आदमी की जिंदगी के भी सबसे स्वर्णिम पल होते हैं..! जिस वक्त पत्नी प्रेग्नेंट होती है पति भी उस हर एक पल को उतनी ही शिद्दत से महसूस कर पाता है |  काश दुनिया के हर पति को अपनी पत्नी के साथ उस हर एक स्वर्णिम पल को जीने का मौका मिल पाता |
    लेकिन बाबूराव जी हर एक हस्बैंड इतना किस्मत वाला नहीं हो पाता जितने आप हैं..!
   और ना ही हर कोई वाइफ आपकी वाइफ जितनी खुशकिस्मत होती है..!

” मैडम जी हम आपके लिए चाय लेकर आते हैं..! वैसे आपको कुछ और चाहिए तो बताइए,  हम ढूंढ ढांढ कर ले ही आएंगे..!”

बांसुरी के पेट के उभार पर बाबूराव का भी ध्यान चला गया था और बांसुरी के ना में गर्दन हिलाते ही वह खुद मुस्कुरा कर बाहर निकल गया….

बांसुरी ने सामने बैठे अनिर्वान की तरफ चेहरा घुमाया अनिर्वान उसे ही अपलक देख रहा था…..

” हां तो हम अपनी शिकायत दर्ज़ करवाना चाहते हैं..  लेकिन उसके पहले अभी-अभी बाबूराव जी जो वक्त बेवक्त बोल कर गए ना,  उस पर एक गाना याद आ गया और एकदम गुनगुनाने का मन कर रहा है | क्या करें……?
        गुनगुना ले ?”

बाँसुरी ने बड़े भोलेपन से पूछा और आगे कहने लगी.. 

   ” प्रेगनेंसी में ना ऐसे ही होता है, दूसरों को कुछ कुछ खाने पीने का मन करता है… और हमें गाने गुनगुनाने का मन करता है |
   हम जानते हैं हमारा बेटा या बेटी जो भी पैदा होगा ना वह सिंगर ही बनेगा..!”

बांसुरी अपनी बात कह कर मुस्कुरा उठी और अनिर्वान परेशानी से इधर-उधर देखने लगा…

” अरे आसपास कोई नहीं है, हम अपना गाना गुनगुना सकते हैं…

               नाम सारे मुझे भूल जाने लगे,
               वक़्त बेवक्त तुम याद आने लगे….
               रात भर हाय मुझको जगाने लगे
                वक़्त बेवक्त तुम याद आने लगे….

“ये लीजिये, बाबूराव आपके लिए चाय लेकर आ गया है… .. !”

बाँसुरी ने बनावटी गुस्से से अनिर्वान को देखा और अपना गाना बंद कर दिया….

चाय के आते ही वो बिना पिये ही खड़ी हो गयी..  उसके खड़े होते ही अनिर्वान भी खड़ा हो गया….

” अब हमें चलना चाहिए, महल के नियमों के अनुसार सभी औरतों को एक साथ शाम की आरती में मौजूद रहना जरूरी है |
   कहीं हमें देर हो गई तो फिर सब हमें घूर कर देखेंगे..!”

अनिर्वान ने बांसुरी की इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया और वह भी आगे बढ़ गया !
    बांसुरी आगे चलने लगी और अनिर्वान उसके ठीक पीछे..
.. लेकिन बांसुरी की सैंडल मुड़ी और संतुलन बिगड़ जाने से वो गिरने को थी कि तभी अनिर्वान ने उसे थाम लिया… !
   अनिर्वान की एक हथेली अचानक बांसुरी को थामने में उसके पेट पर रखा गयी….
    पेट के अंदर बच्चे की हलचल उसे अपनी हथेली पर महसूस हुई और वह चौक कर पीछे सरक गया…..
  लेकिन उसके चेहरे की रंगत में फर्क साफ नज़र आने लगा…
   उसकी आँखों में एक नयी ज़िन्दगी की आहट लहराने लगी !!

बांसुरी ने धीरे से उसकी तरफ देखा और अनिर्वान ने बांसुरी को देखकर नजरें धीमे से नीचे झुका ली….. ..
    अनिर्वान की आँखों की कोर पर कुछ आकर ठहर सा गया !

” थैंक यू मिस्टर भारद्वाज ! अभी तो हम गिर ही गए होते..!”

” मेरे रहते ऐसा सम्भव नहीं है !
    आप अपना ध्यान रखा कीजिए रानी साहेब !  वैसे  मैं ज्यादा तो नहीं जानता लेकिन आपको इस वक्त ऊंची एड़ी की सैंडल नहीं पहननी चाहिए..!”

    बाँसुरी ने बड़ी अदा से मुंह घुमा कर अनिर्वान को देखा और कंधे उचका दिये….

”  अब क्या करें ? हमारे मिस्टर हस्बैंड हमारे साथ है नहीं… उन्हें अपने काम से फुर्सत नहीं मिलती, इसलिए हमें महल में  छोड़कर इधर-उधर अपने काम के लिए भटकते रहते हैं !
   वह साथ होते तो शायद हमें बिना एड़ी की सैंडल गिफ्ट कर देते… खैर जाने दीजिये !  किसी से भी मांग कर अपनी केयर थोड़ी ना करवाई जाती है..?”

और बांसुरी बालों को पीछे झटक कर आगे बढ़ गई..! बाहर बैठी पंकजा इधर से उधर चहलकदमी करती हुई उसी का इंतजार कर रही थी, जैसे ही उसने बांसुरी को आते देखा हड़बड़ा कर उसकी तरफ बढ़ गई..

” रानी हुकुम आपने बहुत देर लगा दी..!
   देखिये शाम ढलने को है ! कहीं महल से फोन ना आ जाए, हमें इसी बात की चिंता लगी हुई थी..!”

” अब तो हम आ गए ना चलिए..!”

बांसुरी ने सीढ़ियां उतरते हुए एक बार पलट कर अनिर्वान को देखा और गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर जाकर बैठ गई | अनिर्वाण ने उसे ड्राइविंग सीट पर बैठे  देखा और अनिर्वान के माथे पर बल पड़ गए |
   वह लम्बे लम्बे डग भरता हुआ बांसुरी की गाड़ी तक चला आया ! उसने दरवाजे पर हाथ रखा और बांसुरी को गाड़ी चलाने से रोक दिया..!

” रानी साहब !! आपका ड्राइवर कहां है..?”

” हम अपनी गाड़ी खुद चलाना चाहते थे..!”

” आप गाड़ी से नीचे उतरिये….. प्लीज़  !” पहले आदेशात्मक बोलते हुए अनिर्वान ने अपनी आवाज़ को भरसक विनम्रता देते हुए अंत में प्लीज़ भी जोड़ दिया.. !

बांसुरी ने अनिर्वान को देखा और ना में जोर से गर्दन हिला दी !
    अनिर्वान ने उसे घूर कर देखा लेकिन पीछे बैठी  पंकजा का ख्याल आते ही अनिर्वान ने अपनी नजरें  नीचे कर ली…

” रानी हुकुम आप से मिन्नतें करते हैं…  प्लीज गाड़ी से नीचे उतर जाइये !”

“ना, नो, नेवर !”

अनिर्वान ने गहरी सी सांस छोड़ी और दूसरी तरफ देखते हुए अपने माथे पर अपने अंगूठे को चलाने लगा….

” मुझे राजा साहब को फोन करने के लिए मजबूर मत कीजिए…. प्लीज..!”

बांसुरी ने घूर कर अनिर्वान को देखा और दरवाजे को खोल दिया… दरवाजे के ठीक दूसरी तरफ अनिर्वान खड़ा था…
   इसलिए बांसुरी ने जैसे ही दरवाजा खोला अनिर्वान एक झटके से पीछे सरक गया..
बांसुरी दरवाजा खोलकर तुनक कर चलती हुई, दूसरी तरफ गई और ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठ गई..!  अनिर्वान ने ड्राइविंग सीट का दरवाजा खोला और खुद बैठकर गाड़ी को महल की तरफ भगा दिया..

गाड़ी के आगे बढ़ते ही बांसुरी ने अपने मोबाइल से गाड़ी के साउंड सिस्टम को कनेक्ट किया और अपनी मर्जी का एक गाना गाड़ी में बजा दिया…

इस दीवाने लड़के को कोई समझाये,
प्यार मोहब्बत से ना जाने क्यूँ ये घबराये
दर्द-ए-दिल, जाने ना, पास मैं जितना आऊँ
उतनी दूर ये जाये….जाये…हाँ जाये…

इश्क में इसके बावरी हूँ मैं,ये भला है तो क्या बुरी हूँ मैं 
ये लड़का है फिर भी,जाने क्यूँ शरमाये…
जाने क्यूँ शरमाये, हाय शरमाये..
इस दीवाने लड़के को कोई समझाये…..

*****

   कमरे का दरवाज़ा खुला और एक लड़की ट्रे में कुछ खाने का सामान लिए अंदर दाखिल हो गयी…
बाँसुरी बेड पर बैठी “द फर्स्ट सर्कल” पढ़ रही थीं.. रात गहराने लगी थीं…
आज बाँसुरी को जाने क्यों थकान सी लग रही थी…

” क्या हुआ आपकी तबीयत ठीक नहीं है..?

    बांसुरी ने उस लड़की की तरफ देखा और उसे अपने पास बैठने का इशारा किया |  वह लड़की जमीन पर बैठने लगी, उसे जमीन पर बैठता देखकर बांसुरी ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोका और पलंग पर अपने सामने बैठा लिया..

” तुम कौन हो ? क्या नाम है तुम्हारा? मैं तुम्हारे बारे में जानना चाहती हूं !”

” मेरे बारे में जानकर आप क्या करेंगी रानी साहेब..!”

  बांसुरी मुस्कुरा उठी..

” देखो तुम्हारा जो भी नाम हो मुझे समझ में आ गया है कि मैं अपने लोगों से कहीं दूर हूं..! मुझे यहां इस तरह अकेले किसने रखा है ? क्यों रखा है ?राजा साहब इस सब के बारे में जानते हैं या नहीं जानते ?मुझे कुछ भी नहीं मालूम..! मेरे पास ना तो मेरा मोबाइल है ना इस कमरे में कोई वॉच है..!
  अब तो ऐसा हो गया कि मेरे लिए बस सूरज उगता है और फिर ढल जाता है ! रात होती है चांद निकलता है और ढल जाता है ! मुझे यह तक नहीं मालूम कि आज कौन सा दिन है ? कौन सी तारीख है? कौन सा महीना चल रहा है…?
अंदाजे से बस इतना सोच सकती हूँ कि मुझे यहां रहते काफी दिन बीत चुके हैं..!
और इसी कारण इतना समझ सकती हूं कि, मेरे पति को इस सब के बारे में कोई खबर नहीं है ! क्योंकि अगर उनकी मर्जी से मैं यहां रहती होती तो वह अब तक मुझसे मिलने आ चुके होते..!

मैं भी अब इस सारी आंख मिचौली से परेशान हो गई हूं! अगर तुम लोगों ने मुझे रुपए पैसे के लिए ही कैद किया है तो राजा साहब से बात क्यों नहीं कर लेते..?  वह मेरे बदले में अपनी पूरी हवेली, पूरा महल, पूरी तिजोरी खाली कर देंगे !
  मुझे पूरा विश्वास है….!  तुम एक बार उनसे बात करके तो देखो..!”

वह लड़की मुस्कुरा उठी लेकिन उसने बांसुरी की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया..

” आप खाना खा लीजिए रानी साहेब ! आज आपके पसंद के भरवा करेले बनाए हैं..!”

” अच्छा एक बात बताओ, मेरी पसंद नापसंद तुम्हें कौन बताता है..?  रोज सुबह मेरी पसंद के ताजे ग्लोडियस के फूल तुम लाकर यहां रखती हो..! मेरी पसंद का रूम फ्रेशनर कमरे में डालती हो ! यहां तक कि मेरे पसंद के फिनायल से इस कमरे में पोंछा होता है..
  सुबह शाम मेरी पसंद के फ्रूट्स, नाश्ता, खाना सब कुछ मेरे लिए लाती हो.. कैसे.. ?
तुम्हें कौन बताता है यह सब ?
  यह मेरी पसंद की किताबे आखिर कौन भेज रहा है मेरे लिए..?
प्लीज मुझे कुछ तो बताओ..! कम से कम यही बता दो कि तुम कौन हो ? तुम कहां रहती हो ?और तुम्हारा इस सब से क्या लेना देना है?”

” अच्छा ठीक है.. मैं आपको अपने बारे में सब सच बता देती हूँ… !
  हालाँकि मेरे बारे में कुछ भी जानकर आपको कुछ हासिल नहीं होने वाला, लेकिन आपका ख्याल रखने के साथ ही मुझे ये आदेश भी मिला है कि आप किसी तरह भी परेशान ना रहें..
  आपको खुश रखने की ज़िम्मेदारी मेरी है !
इसलिए रानी हुकुम अगर आप वाकई मेरे बारे में  जानना चाहती हैं तो मैं आपको सब कुछ सच सच बता देती हूँ कि मैं कौन हूँ…
   मेरा नाम सारिका है !!

क्रमशः

aparna….

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