
जीवनसाथी 2/69
ये दिल और उनकी, निगाहों के साये
मुझे घेर लेते, हैं बाहों के साये….
खिड़की से बाहर लगी जूही की बेल हवा से बलखा रही थी और उसकी मदहोश करने वाली खुशबु कमरे में घुलती जा रही थी…
समर धीरे से आकर पिया के सामने बैठ गया…. उसने लोशन की बोतल से लोशन लिया और धीमे से पिया के पैरों पर लगाने लगा….
पिया ने मुस्कुरा कर समर को देखा और धीरे से उसके सीने पर अपने पैर से मार कर उसे थोड़ा पीछे धक्का दे दिया…
समर ने पिया के पैर को पकड़ वापस उसे अपनी तरफ खींच लिया…
गाने के बोलों के साथ पिया की आंखें समर के चेहरे पर टिकी थी….
पहाड़ों को चंचल, किरन चूमती है
हवा हर नदी का बदन चूमती है
यहाँ से वहाँ तक, हैं चाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये….
पिया धीमे से समर के पास चली आई….
समर एकटक पिया को देख रहा था… पिया भी उसे देखने में खोयी थीं….
दोनों की सांसो की आवाज़ के अलावा कमरे में कोई शोर नहीं था…
“पिया… !”
“हम्म.. !”
“कुछ कहो.. !”
“क्यों.. ?”
“तुम्हारी आवाज़ महसूस करनी है… अपने भीतर.. ! जानती हो जब तुम मंत्री जी बोलती हो ना तो तब ऐसा लगता है कि तुम्हारी आवाज नहीं कोई पिघलती हुई चॉकलेट हो जिसे…
“जिसे क्या.. ?”
” तुम्हारे होठों को छू कर उस चॉकलेट को अपने अंदर महसूस करना चाहता हूं..!”
पिया ने बनावटी गुस्से से समर की तरफ देखा और समर की उंगली पिया के माथे से होती हुई उसके गाल को छूने लगी…
“अब तक नाराज़ हो.. ?”
पिया ने ना में गर्दन हिला दी….
” वैसे आप बताइए क्या मुझे नाराज नहीं होना चाहिए था ? अगर मेरी जगह आप होते तो क्या आप बड़ा दिल रख कर मुझे माफ कर पाते..?”
” पता नहीं पिया..! इस बारे में मैं कुछ भी नहीं कह सकता क्योंकि मैं तुम्हारी जगह नहीं हूं | लेकिन एक बात जरूर कह सकता हूं कि तुम्हारे अंदर एक बहुत नरम दिल औरत है, जिसने मुझसे नाराज होते हुए भी शोवन का हमेशा बहुत ध्यान रखा… !
समर पिया के और करीब खिसक गया….. समर की बात सुनकर पिया ने पलके झुका ली, और उस काउच से उठकर खिड़की के पास चली गई…
समर भी उसके पास आकर उसके पीछे खड़ा हो गया…
” बात मेरे अंदर छिपी नरम दिल औरत की नहीं है मंत्री जी..! अगर मेरे अंदर की औरत ने शोवन का ध्यान रखा होता तो मैं शोवन पर कभी नाराज ही नहीं होती..! लेकिन मैं शोवन से नाराज थी क्योंकि वह मेरी और मेरे पति के बीच आ गया था, लेकिन आप जानते हैं उसके ऊपर मुझे लाड़ भी आता था, और जानते हैं क्यों आता था ?
क्योंकि कहीं ना कहीं मैं उसमें आप का हिस्सा देखती थीं.. !
मुझे उसे देखकर यही लगता था कि यह आप के खून से बना है.. उस बच्चे में जब-जब मुझे आपका अंश नजर आता था, उस वक्त उस पर भी मुझे प्यार आने लगता था और इसी बात पर मुझे अपने ऊपर नाराजगी होती थी कि, मैं इतना पढ़ लिख कर भी आप के प्यार में क्यों ऐसी अंधी हुई जा रही हूं….
मैं जानती हूं मेरी जगह कोई और औरत होती तो अपने पति की प्रेमिका और उसके बच्चे के बारे में सुनकर तुरंत घर छोड़ कर चली जाती, उस दिन मुझे भी इतना गुस्सा आया था कि लगा घर छोड़कर चली जाऊं… सामान लेकर मैं निकल भी गई, लेकिन सच कहूं तो अपने दिल के हाथों मजबूर होकर मैं रुक गयी, क्योंकि आपसे कितनी भी नाराजगी हो मेरा प्यार मुझ पर हावी पड़ने लगा था…
सच कहूं मंत्री जी तो मैं आपको देखे बिना जी नहीं सकती.. मैं आप पर मरती हूं..!
आप की खुशबू, आपके बिना भी इस कमरे में मुझे मदहोश किए रहती है…!
हाँ मैं नाराज थी,बहुत नाराज़ थीं, लेकिन दिल दिमाग पर आप इस कदर छाए हुए थे कि अस्पताल में बैठकर मरीज देखूं या घर में रिश्तेदारों के साथ बैठी हूं हर वक्त दिमाग में आप और आपका बेटा ही घूमते रहते थे…..
शोवन के सो जाने के बाद अक्सर मैं छिप छिप कर उसे देखती थीं और उसके चेहरे की लकीरों में आपको ढूंढने की कोशिश करती थीं…
जब कभी मुझे उसमें रेवन नज़र आती तब मेरा गुस्सा भड़कने लगता लेकिन जब कभी उसके भोलेपन में उसकी अदा में आप दिखते, उस पर टूट कर प्यार आने लगता…
समझ ही नहीं आता था कि मैं क्या करुँ…..
आपसे ज्यादा तो मैं अपने ऊपर नाराज थी कि क्या कोई इस हद तक किसी से प्यार कर सकता है कि, उसकी गलतियों को भी बिना कुछ बोले माफ कर दे…
हां लेकिन अगर..
कहते-कहते पिया रुक गई उस ने पीछे देखा, समर उसे परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा था…समर की चंचल उँगलियाँ पिया की कमर पर सरगम बजा रही थीं…
” क्या कर रहे हैं आप? आप मेरी बात नहीं सुन रहे मंत्री जी?”
पिया ने हल्के से चेहरा मोड़ कर पीछे देखते हुए कहा…
समर उसके ठीक पीछे खड़ा था.. समर का चेहरा पिया के कंधों पर रखा था और अपनी उंगलियों से समर पिया की कमर पर कुछ लिख रहा था…
” तुम बोलो ना.. मैं सुन रहा हूं!”
” आप कुछ नहीं सुन रहे, मैं जानती हूं.. आप का दिमाग अभी कहीं और चल रहा है..!”
” दिमाग को चलने दो, मेरे कान तुम्हारी तरफ लगे हुए हैं.. तुम बोलती रहो बस..! मुझे तुम्हारी डार्क चॉकलेट जैसी आवाज बहुत मीठी लग रही है पिया….! उतरने दो खुद को मेरे अंदर !”
समर ने एक झटके से पिया को अपनी तरफ घुमाया और उसके होठों पर झुक गया……
धीरे-धीरे पिया की उंगलियां समर की पीठ पर रेंगने लगी…
” मेरी बात खत्म नहीं होने देंगे ना..?”
” मैंने कब मना किया बोलने से..?”
समर की धीमी सी आवाज सुन पिया गुनगुना उठी..
” तो फिर मेरा मुंह क्यों बंद किया..?”
समर ने मुस्कुरा कर पिया के चेहरे को अपने चेहरे से थोड़ा दूर किया और उसे ध्यान से देखने लगा…..
” ऐसे क्या घूर घूर कर देख रहे हैं..? आप ही की हूं..!”
” वही तो देख रहा हूं कि, मेरा माल कितना खूबसूरत है..?”
” छी इतनी चीप बात बोलने में शर्म नहीं आती..?”
” नहीं..!! ना चीप बातें बोलने में शर्म आती है, और ना चीप काम करने में शर्म आती है..!”
” क्रूज़ में तो बड़ा शरमा रहे थे..?”
” शरमाये मेरे दुश्मन… मैंने कब शरम की?”
” अच्छा जी !! फिर, जब मैं डेक पर खड़ी होकर आपको अपनी अदाओं से मोहित करते हुए अपने पास बुला रही थी तो फिर क्यों बहाना बनाकर कमरे में चले गए… हैं..?”
समर की एक भौंह ऊपर हो गई…
“ओह्ह… ऐसा था क्या.. ?”
“जी हाँ ! उसके बाद चांदनी रात में जब हमारे कमरे के बाहर की टेरेस पर मैंने बाँहे फैलाई तब भी आप मेरा इशारा नहीं समझा पाए.. !”
“ओह्ह शिट.. ! “
समर ने अपने माथे पर हल्का सा हाथ मार लिया !
” तो यह बात थीं… मेरी प्रिंसेस मुझे चांदनी रात में प्यार करना चाहती थी..”
पिया ने हां में सिर हिला दिया…
एक ठंडी सी आह भर कर समर ने आगे बढ़कर पिया को अपनी गोद में उठाया और बालकनी का स्लाइडिंग डोर खोलकर बालकनी में निकल गया….
बालकनी में गोल खूबसूरत सा काउच पड़ा था, समर ने पिया को उस पर धीमे से रखा और खुद उठ कर रेलिंग पर चला आया…
पिया ने पीछे से उसके कन्धों पर हाथ रखा और समर की खुली कमीज़ पिया के हाथों में चली आई…
कमीज़ को एक तरफ रख कर पिया ने समर के कंधो पर अपनी उँगलियाँ फिरानी शुरू कर दी लेकिन पिया को यूं लगा जैसे समर का ध्यान कहीं और लगा था… पिया ने पीछे से समर को अपनी बाहों में ले लिया.. और उसके कांधे को चूम लिया… समर ने धीरे से मुस्कुरा कर अपना चेहरा पीछे घुमाया और पिया के चेहरे को पकड़कर उसे खुद से थोड़ा दूर किया और रेलिंग के दूसरी तरफ जा कर इधर-उधर झांक कर देखने लगा…
पिया ने गहरी सी साँस भरी और वही रखे काउच पर हाथ बांधकर बैठ गई…
” कर लीजिए मंत्री जी..! पहले आप चारों तरफ अच्छे से देख कर तसल्ली कर लीजिए कि, कहीं कोई खड़ा तो नहीं है..!”
समर झेंपते हुए पिया की तरफ मुड़ गया…
” क्या करूं यार इन सब मामलों में थोड़ा अजीब हूं मैं…
मुझे भी प्रकृति की गोद में प्यार करना अच्छा लगता है, लेकिन दिल में एक धुकधुकी सी मची रहती है कि आजूबाजू से कोई देख ना ले…
समझ रही हो ना..!
अब मेरा क्या है, मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ता.. ! मैं तो ऐसे ही शर्टलेस पूरी दुनिया घूम लूंगा, लेकिन मेरे अलावा मेरी बीवी को किसी ने भी ऐसा देखा तो मैं उसकी आंखें नोच लूंगा..!”
पिया ने समर को घूर कर देखा और दरवाजा खोल कर अंदर जाने लगी…-” सत्यानाश कर दी मेरी सारी फैंटेसी..! चांद की रौशनी में अपने हैंडसम हंक को टूट कर प्यार करने का मन था मेरा.. !”
“उसके लिए मै पूरा रिसोर्ट बुक कर के लें चलूँगा जान.. तब अपनी सारी फैंटसी पूरी कर लेना.. आज मुझे मेरी फैंटसी पूरी कर लेने दो… बहुत दिन से तुम्हें बाँहों में भरने के लिए तड़प रहा हूँ.. !”
और समर ने पिया को अपनी तरफ खींच कर उसे कसकर अपनी बाहों में भींच लिया… पिया ने खुद को छुड़ाने की बनावटी सी कोशिश जारी रखी…
लेकिन समर ने उसे ना छोड़ना था और ना उसने छोड़ा…
नए नवेले इस जोड़े की महीनों की प्यास आज जाकर बुझ रही थी, आज उन दोनों को ना समय का होश था ना किसी और चीज का …
इतने दिनों के ताने उलाहने हंसी मजाक रोना आंसू सब कुछ जैसे उन दोनों के प्यार की नदी में बह कर अचानक गायब हो चुका था…..
होठों से होठ मिल रहे थे तो आंखों से आंखें…
उंगली पर उंगलीयों की छाप बन रही थी….
दोनों के देह की महक एक दूसरे में घुलकर एक दूसरे की खुशबू से महकने लगी थी……
आज शादी की इतने दिनों के बाद सही मायनो में दोनों एक दूसरे के जीवनसाथी हो गए थे…
पलंग पर पीठ टेक कर बैठा समर पिया को ही देख रहा था…
समर के प्यार का नशा पिया की आँखों में लाल डोरे बन कर तैर गया था…
” अब क्या देख रहें हैं आप मंत्री जी… ?”
” अपनी ब्यूटीफुल वाइफ को देख रहा हूं..! एक बात कहूं पिया बुरा तो नहीं मानोगी.. ?
पिया का दिल धड़क उठा…
अभी कुछ देर पहले ही तो प्यार के सागर में रसभरी डुबकियां लगाकर उठे थे दोनों…
अब ऐसा क्या हो गया जो समर उससे इजाजत मांग रहा था…?
” बोलिए ना.. ! क्यों बुरा मानूंगी मैं?”
” मुझे भूख लग रही है..! कुछ खाने को ला सकती हो..?”
” क्या ? आर यू रियली सीरियस..?”
” हां… लगती है भई, किसी किसी को खाने के बाद भी भूख लगती है..! और मुझे तो अक्सर बेवक्त ही भूख लगती है… सुनो गाजर का हलवा रखा है फ्रिज में वह गर्म करके ले आना..!”
” मैं बस पलंग में घुसकर सोने जा रही थी, और आपने ये फरमान सुना दिया..!”
” यार इतनी हॉट और स्पाइसी बीवी के साथ रोमांस के बाद मीठा तो बनता है..!
पिया ने समर को घूर कर देखा और अपना ओवरकोट गाउन के ऊपर डाल कर नीचे उसके लिए हलुवा लेने चली गई……
*****
महल में सारे बच्चे एक साथ खेल कूद रहें थे, और औरतें उनके साथ बैठी गपशप में लगी थीं…..
निरमा भी बहुत दिन से महल नहीं गयी थीं, इसलिए वो भी महल आई हुई थीं…
सब एक साथ बैठी थीं… उसी वक्त रेखा अपना काम निपटा कर वहाँ चली आई…
“आ जाओ रेखा.. हम सब बस तुम्हारी ही राह देख रहें थे.. ! आज सही वक्त पर घर आ गयी हो, वर्ना तो तुम्हें अक्सर आजकल देर हो जाती है.. !”
रूपा ने बड़े प्यार से रेखा को पास बुला लिया..
“हाँ भाभी सा, ब्राइडल सीज़न शुरू हो जाने की बाद अक्सर यहीं होता है….. !
रेखा कुछ सोचते हुए दूर कहीं देखती हुई खो सी गयी..
“क्या हुआ रेखा ? कुछ सोच रही हो.. ?”
जया के सवाल पर रेखा ने उसे देखा और एक फीकी सी मुस्कान दे दी…..
“हमारी दीदी केसर बाई सा को टेक्सटाइल में काम करने का बहुत शौक था, लेकिन वो कभी अपने मन का काम नहीं कर पायी.. ज़िन्दगी भर वो वही सब करती रही जो उन्हें कभी पसंद नहीं रहा ! और इसी सब को करते करते वो अचानक हम सब को छोड़ गयी… हमें आज भी यक़ीन नहीं होता कि वो हमारे साथ नहीं है ! यूँ लगता है दुनिया की किसी कोने में कहीं तो वो होंगी.. लेकिन फिर ये भी लगता है कि कहाँ होंगी… ?”
रूपा ने रेखा के कंधे पर सांत्वना भरा हाथ रख दिया…
“होनी को कौन टाल सका है रेखा ? जिसका जितना साथ होता है वो उतना ही साथ रहता है.. !”
बाँसुरी वहाँ बैठी अपने मोबाइल पर कुछ देखने में व्यस्त थीं, कि तभी विराट वहाँ चला आया…
वो अब एक तरह से विदेश में ही बस चुका था.. वहाँ रहते हुए वो विदेशों से चल रहें व्यापार का लेखा जोखा रखता था.. .. और साथ ही अपने फोटोग्राफी के शौक को भी पूरा कर रहा था.. !
लेकिन अभी पिछले हफ्ते ही राजा के बहुत बुलाने पर वो सबसे मिलने चला आया था..
वो भी अपनी भाभियों के पास पहुँच कर सबको प्रणाम कर वहाँ बैठ गया…
सबके लिए वो कोई ना कोई तोहफा लेकर आया था… लगभग सभी को वो उनके तोहफे दे चुका था, बस बाँसुरी ही रह गयी थीं.. बाँसुरी को देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कान चली आई..
“भाभी सा हुकुम, आपके लिए ये लेकर आया हूँ.. !”
उसने एक एलीट रिच क्लासी सा रशियन उपन्यास
बाँसुरी की तरफ बढ़ा दिया…
“मै आपके लिए एलक्जेंडर की द फर्स्ट सर्कल लेकर आया हूँ.. पढ़ कर देखिएगा, आपको ज़रूर पसंद आएगी…..
बाँसुरी ने ध्यान से किताब को देखा और विराट की तरफ देखने लगी… उसकी अनजान सी निगाहें देख विराट पल भर को झेंप कर रह गया…
“क्या हुआ.. ? आपको पसंद नहीं आई किताब ?”
“किताब तो ठीक है, लेकिन हमें लगा था आप हमारे लिए लिपस्टिक, शूज़, बैग्स, क्लच ड्रेसेस.. ऐसा कुछ लाएंगे.. विदेशी टैग के साथ.. बुक का क्या है, वो तो यहाँ भी मिल सकती है ना…?”
विराट आश्चर्य से बाँसुरी को देखने लगा..
“भाभी सा ये फर्स्ट एडिशन है.. ! ये किसी हाल में यहाँ इण्डिया में नहीं मिल सकती.. इसे मैंने खास आपके लिए मंगवाया था.. !”
विराट की बात सुन बाँसुरी खिलखिला उठी..
“अरे आप तो बुरा मान गए… हम तो मजाक कर रहें थे… !”
हँसते हुए बाँसुरी हाथ में पकड़ी किताब को खोल कर पन्ने बेतरतीबी से पलटती इधर उधर देखने लगी और उसके पास बैठी निरमा ने धीमे से उस किताब को बंद कर उस पर अपना हाथ रख दिया…
“बाँसुरी.. क्या मुझे एक बार पढ़ने की लिए ये किताब मिल सकती है.. ?”
“तुम अभी लें जाओ… हम बाद में पढ़ लेंगे.. !”
अपनी बात कह कर बाँसुरी ने किताब निरमा की गोद में पटक दी……
निरमा को अचानक कोई पुरानी सी भूली बिसरी बात याद आ गयी….
जब वो लोग बॉम्बे रहा करते थे……
उस वक्त बाँसुरी एक बहुत समय से पढ़ने की इच्छुक किताब को कहीं से लेकर आई थीं और उसे संभाल कर उसने रखा हुआ था..
उस शनिवार की रात निरमा बाँसुरी के फ्लैट पर रुकने आई हुई थीं.. और उन चारों ही लड़कियों का डिनर के साथ किसी ज़बरदस्त जापानी हॉरर मूवी को देखने का प्लान बना था…
लेकिन बाँसुरी किताब पढ़ने का मोह भी छोड़ नहीं पा रही थीं..
जब माला की उस किताब पर नज़र पड़ी तो उसने बाँसुरी से उसे मांग लिया लेकिन बाँसुरी ने तुरंत उस किताब को देने से मना कर दिया था..
“सॉरी माला, तू मेरी जान भले ही मांग लें, लेकिन बुक नहीं दे सकती मै ! वो भी मैं जब तक पढ़ ना लूं.. इस किताब को मै एक बार पढ़ तो लूं उसके बाद तुम सब बारी बारी से पढ़ कर मुझे वापस कर देना… !”
“जब तू पढ़ ही लेगी, फिर हम तुझे वापस क्यों करेंगे भला.. ?”
निरमा के सवाल पर बाँसुरी ने उसे घूर कर देखा था..
“पढ़ने दे रही हूँ वही बहुत है.. तुझे पता है किताबों को लेकर मरा पागलपन किस हद तक है.. ?
मै सब कुछ दे सकती हूँ बस किताबें नहीं.. इस मामले में मै बड़ी कंजूस हूँ.. !”
“धर ले मेरी माँ, तू अपनी किताब अपने ही पास रख.. नहीं चाहिए हमें.. !”
और निरमा और माला ने हँसते हुए उसकी किताब उसे वापस कर दी थीं…
आज अचानक बाँसुरी का निरमा को किताब पकड़ाना
उसे गहन आश्चर्य में डूबा गया…
वो अभी बाँसुरी से कुछ कहती उसके पहले बाँसुरी ने रूपा से अपने मन की बात कह दी….
“भाभी साहब, हम ज़रा बाहर से होकर आएं.. ?”
रूपा ने बाँसुरी की तरफ देखा..
“कहाँ जाना है बाँसुरी.. ?”
“वो बहुत दिन से हम अपनी दोस्त लीना से नहीं मिले.. उससे मिल कर आ सकतें हैं क्या.. ?”
“उन्हें यहीं बुला लीजिये.. ! उनके घर आप कहाँ जाएँगी.. ?”
“नहीं भाभी सा, हमारा मन कर रहा है जाने का….
रूपा ने ज़रा घूर कर ही बाँसुरी को देखा, उसका पांचवा महीना लग चुका था, ऐसे में उसका बाहर जाना रूपा को पसंद नहीं आ रहा था, लेकिन उस पर ज्यादा टोकाटाकी भी नहीं की जा सकती थीं…
रूपा ने एक नज़र उसे देखा और हाँ में गर्दन हिला दी…
“हम में से कोई आपके साथ चले क्या.. ?”
“अरे नहीं भाभी सा, इसकी ज़रूरत नहीं है.. हम सिर्फ ड्राइवर और पंकजा को साथ लेकर चले जायेंगे.. ! “
“और शौर्य… ?”
निरमा ने बाँसुरी को देख पूछ लिया…
“उसे देखने के लिए उसकी बड़ी मॉम हैं काकी सा है और फिर प्यारी सी मासी माँ भी तो है.. !”..
बाँसुरी ने निरमा के गाल थपथपा के कहा और खड़ी हो गयी…
हलके पीले और गुलाबी रंग की ज़री गोटे वाली अनारकली कुर्ती उस पर बहुत फब रही थीं… . वो थोड़ी सी दुबली ज़रूर हुई थीं लेकिन अब पेट का उभार हल्का नजर आने लगा था..
खड़े होकर उसने दुपट्टे को पेट के सामने खींचा और वहीँ खड़ी पंकजा को साथ लिए वहाँ से बाहर निकल गयी…
वहाँ बैठी सारी औरतें उसे जाते देखती रह गयी….
क्रमशः
aparna….
दिल से…
खुश रहिये,पढ़ते रहिये……
और मुझे झेलते रहने के लिए आप सभी का हार्दिक आभार !!!
aparna…
